सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर, अब सीजेपी दिल्ली में नहीं करेगी प्रोटेस्ट
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दिल्ली में 5 सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की तरफ से प्रस्तावित विरोध मार्च को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी सामने आई। सीजेपी ने अदालत को बताया कि वह 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपने नए विरोध मार्च का आह्वान वापस ले रही है। यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर दिए गए आश्वासन के बाद लिया गया।
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छात्रों के खिलाफ दर्ज 129 एफआईआर रद्द
कॉकरोच मूवमेंट के दौरान राजधानी दिल्ली और 4 राज्यों में प्रदर्शन को लेकर छात्रों के खिलाफ दर्ज 129 एफआईआर रद्द कर दी गई हैं। सरकार का कहना है प्रदर्शन खत्म होने के दौरान उसने छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का वादा किया था, जिसे अब पूरा कर लिया है। मंगलवार (1 सितंबर) को सरकार ने एफआईआर को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने की अपील की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
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सीजेपी ने किया प्रदर्शन न करने का ऐलान
जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेपी के सौरव दास ने कहा, मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासनों और आज उन्हें मिली न्यायिक मान्यता को देखते हुए, और इस कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए, कॉकरोच जनता पार्टी 5 सितंबर को होने वाले मार्च के आह्वान को वापस लेना उचित समझता है। उम्मीद है कि सरकार अपने वचन का पालन करेगी।
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एफआईआर वापस क्यों ली गई?
केंद्र की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी से वादा किया था कि अगर आंदोलन वापस ले लिए जाते हैं, तो मामले वापस ले लिए जाएंगे। मैंने दिल्ली के लिए लिस्ट दे दी है। इसके बाद बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल ने भी केस वापिस की याचिका दाखिल की। इन राज्यों ने भी कहा कि हम केस वापस ले रहे हैं। इन सभी राज्यों में कुल 129 एफआईआर दर्ज थे। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर किसी अन्य राज्यों में भी कोई मुकदमा दर्ज है तो हम चाहते हैं कि वे जांच को आगे न बढ़ाएं।
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20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था आंदोलन
बता दें कि नीट अनियमितताओं के खिलाफ सीजेपी के नेतृत्व में आंदोलन 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। यह आंदोलन 25 जुलाई को उस समय समाप्त किया गया, जब तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और सरकार ने संगठन की अन्य मांगों को भी स्वीकार किया।







--अमरेश द्विवेदी--
Sep 02 2026, 11:52
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