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भाजपा का बयान हताशा और राजनीतिक दिवालियेपन की पराकाष्ठा : विनोद कुमार पांडेय

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता के बयान पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि जिन लोगों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विपक्षी आवाजों को दबाने की राजनीति को देशभर में स्थापित किया, उन्हें झारखंड की लोकतांत्रिक सरकार को नसीहत देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड सरकार की तुलना इतिहास की गंभीर त्रासदियों से करना न सिर्फ राजनीतिक दुरुपयोग है, बल्कि भाजपा की बौखलाहट और राजनीतिक कुंठा को भी दर्शाता है। भाजपा को चाहिए कि वह ऐसे अमर्यादित और गैर-जिम्मेदाराना बयानों के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर बात करे।

उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और सोशल मीडिया से जुड़े नियमों को तोड़-मरोड़कर पेश करना भाजपा की पुरानी राजनीतिक शैली है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान प्रदत्त अधिकार है, लेकिन कोई भी अधिकार कानून से ऊपर नहीं है। सरकार का दायित्व है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ कानून-व्यवस्था भी सुनिश्चित करे। प्रशासनिक प्रक्रिया को राजनीतिक दमन बताना पूरी तरह भ्रामक है।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा नेताओं को पहले अपने शासन वाले राज्यों में लोकतांत्रिक अधिकारों, छात्रों, किसानों और विपक्षी नेताओं के साथ हुए व्यवहार का हिसाब देना चाहिए। दूसरों को लोकतंत्र का प्रमाणपत्र बांटने से पहले भाजपा अपने राजनीतिक इतिहास के पन्ने पलट ले।

जेपीएससी पर भाजपा की राजनीति तथ्यहीन और अवसरवादी

जेपीएससी मामले पर भाजपा के आरोपों पर विनोद पांडेय ने कहा कि न्यायपालिका में सरकार की ओर से कौन अधिवक्ता किस स्तर पर पैरवी करेगा, यह पूरी तरह विधिक प्रक्रिया और सरकार के अधिवक्ताओं का विषय है। इसे राजनीतिक षड्यंत्र का रंग देना न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल खड़े करने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि अगर भाजपा के पास जेपीएससी मामले में कोई ठोस तथ्य, दस्तावेज या कानूनी आपत्ति है, तो उसे सक्षम न्यायालय के समक्ष रखना चाहिए, न कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भ्रम फैलाना चाहिए। विद्यार्थियों के हितों के नाम पर राजनीति करने के बजाय भाजपा को यह बताना चाहिए कि उसने उनके भविष्य को लेकर अपने शासनकाल में क्या ठोस कदम उठाए थे।

विनोद पांडेय ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार युवाओं, विद्यार्थियों और आम जनता के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। भाजपा की परेशानी यह है कि झारखंड की जनता अब उसकी राजनीतिक बयानबाजी और झूठे नैरेटिव के बजाय विकास, अधिकार और सामाजिक न्याय की राजनीति को समझ रही है।

उन्होंने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन लोकतांत्रिक विरोध और तथ्यहीन आरोपों के बीच की मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए। भाजपा नेताओं को अपनी भाषा और तथ्यों दोनों पर संयम रखना चाहिए। झारखंड की जनता को नाजी जर्मनी जैसे भयावह ऐतिहासिक संदर्भों से डराने के बजाय भाजपा अपनी नीतियों और अपने काम का हिसाब दे।

उन्होंने कहा कि भाजपा पड़ोस में महाराष्ट्र में अपनी सरकार के नए फरमान के बारे में जानकारी हासिल कर लें जिसमें कहा गया है कि मराठी नहीं आता - तो चालान कटेगा - महाराष्ट्र में रोजी रोजगार नहीं करने दिया जाएगा। झारखंड समेत अन्य राज्य के निवासी को महाराष्ट्र में अब गाड़ी चलाने के लिए सिर्फ लाइसेंस और परमिट काफी नहीं - मराठी का टेस्ट भी पास करना होगा। पूरा मराठी आना होगा। भाजपा की अब अपनी राजनीति चमकाने के लिए भाषा को भी डर और दंड का औजार बना दिया है। हिंदी का सम्मान कहां गया ? कल तक “एक देश, एक भाषा” की बातें, और आज रोज़गार के लिए आए आम आदमी से भाषा की परीक्षा? भाजपा बताए - क्या अब देश के हर राज्य में रोज़गार करने के लिए पहले वहाँ की भाषा की परीक्षा होगी? भाजपा पूरे देश को टुकड़ों में बाँटने की घृणित राजनीति कर रही है।

झारखंड में अगले माह से शुरू होगा एयर होस्टेस और ग्राउंड क्रू का प्रशिक्षण

रांची। झारखंड सरकार के नागर विमानन विभाग के अंतर्गत संचालित झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के एयर होस्टेस एवं ग्राउंड क्रू ट्रेनिंग विभाग द्वारा डिप्लोमा इन एविएशन एंड मैनेजमेंट पाठ्यक्रम के लिए चयन साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वर्षों के अथक प्रयास के बाद राज्य में अब एयर होस्टेस, फ्लाइट स्टीवर्ड और ग्राउंड क्रू जैसे रोजगारोन्मुखी विमानन प्रशिक्षण की शुरुआत होने जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम अगले माह से शुरू होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की परिकल्पना और मार्गदर्शन के अनुरूप आयोजित चयन साक्षात्कार में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। चयन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता, संचार कौशल, अंग्रेजी भाषा में दक्षता, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और विमानन क्षेत्र के प्रति रुचि का मूल्यांकन किया गया। प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा किया गया।

झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के प्रबंध निदेशक कैप्टन एस.पी. सिन्हा ने कहा कि देश में विमानन क्षेत्र का विस्तार हो रहा है और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में झारखंड के युवाओं को राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण और व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें विमानन उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना संस्थान की प्राथमिकता है और एयर होस्टेस, फ्लाइट स्टीवर्ड और ग्राउंड क्रू के रूप में प्रशिक्षित युवाओं के लिए एयरलाइंस, एयरपोर्ट, ग्राउंड हैंडलिंग, यात्री सेवा और एविएशन हॉस्पिटैलिटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में करियर के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।

कैप्टन एस.पी. सिन्हा ने कहा संस्थान का उद्देश्य युवाओं को सिर्फ प्रमाण-पत्र देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावसायिक दक्षता, संचार क्षमता, अनुशासन, व्यक्तित्व विकास और उद्योग-उन्मुख कौशल से सुसज्जित करना है। संस्थान द्वारा इससे पूर्व कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्रशिक्षण भी शुरू किया जा चुका है।

बता दें कि साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की प्रथम वरीयता सूची माह के अंतिम सप्ताह में झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाने की संभावना है। चयनित अभ्यर्थियों को नामांकन और प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी निर्धारित माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के कदम से छात्रों को जगी न्याय की उम्मीद : आदित्य साहू


भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि JPSC-JSSC नियुक्ति महाघोटाले की CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हेमंत सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाना छात्रों के संघर्ष में एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने सीबीआई जांच की दिशा में इसे बढ़ता हुआ पहला कदम बताया है। सुप्रीम कोर्ट के कदम से छात्रों को न्याय की उम्मीद जगी है।

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार और राज्य सरकार की एजेंसियां न्याय का अंतिम दरवाजा नहीं है। छात्रों के हक और उनके भविष्य की लड़ाई अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुकी है। झारखंड में JSSC और JPSC के माध्यम से नौकरी बेचे जाने और युवाओं के साथ हुए धोखे की CBI जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट की यह टिप्पणी कि मामले में सक्षम एजेंसी से जांच की आवश्यकता हो सकती है, बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि अब झारखंड सरकार की सारी काली करतूतों का सच सामने आकर रहेगा और झारखंड के लाखों युवाओं को उनका अधिकार मिलकर रहेगा। कहा कि अब हेमंत सरकार को बहानेबाजी और पैंतरेबाज़ी छोड़ जवाब देना होगा कि आखिर वह CBI जांच से क्यों भाग रही है? सरकार के द्वारा युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बचाने की कोशिश क्यों हो रही है?

श्री साहू ने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों के साथ जो सलूक किया है, क्रूरता की है, उससे राज्य पूरे देश में शर्मसार हुआ है। राहुल गांधी और हेमंत सोरेन ने मिलकर राज्य के अबोध बच्चों के साथ छल एवं साजिश करने का काम किया है और पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। छात्रों को पहले पुलिस से पिटवाया, बाद में सरकार ने अपनी पार्टी के गुंडों से पिटवाया। फिर फर्जी मुकदमों का खेल खेला। सोशल मीडिया सहित उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रतिबंधित किया। हेमंत सरकार पूरी तरह हिटलरशाही पर उतर आई है। सरकार की सारी करतूत काले अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है। राहुल गांधी और कांग्रेस ने भी छात्रहित का ढोंग किया है। सीआईडी जांच के नाम पर केवल आईवॉश की जा रही है। यह मुख्य सरगना और बड़ी मछलियों को बचाने की कवायद के सिवाय कुछ नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह जनविरोधी सरकार जितना जुल्म करना है, कर ले। हमारी पार्टी की सरकार 2029 में राज्य में बननी तय है। जिस दिन सरकार बनी, पहली ही कैबिनेट में सारे मामलों की सीबीआई जांच की अनुशंसा और सभी छात्रों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस करने का फैसला लिया जाएगा। भाजपा छात्रों के साथ सदैव खड़ी है और जब तक दोषियों का चेहरा बेनकाब नहीं होता और युवाओं को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।

झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में भ्रष्टाचार पर सियासी भूचाल, बाबूलाल मरांडी ने CM सोरेन से की CBI जांच की मांग


नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जाँच कराने की मांग की है।

श्री मरांडी ने कहा कि पूरे प्रकरण की CBI अथवा माननीय उच्च न्यायालय के वर्त्तमान न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। साथ ही पिछले दस वर्षों में जारी सभी NOC, मान्यताओं, सीट आवंटन और डिग्रियों का व्यापक ऑडिट कराने तथा संबंधित मंत्री,

अधिकारियों, काउंसिल पदाधिकारियों एवं बिचौलियों की भूमिका भी जाँच के दायरे में लाने की मांग राज्य सरकार से की है। उन्होंने कहा कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो ताकि निर्दाेष विद्यार्थियों के हितों की रक्षा हो सके।

भाजपा नेताओं को छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने की आदत छोड़ देनी चाहिए : विनोद पांडेय

झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को छात्रों के मुद्दों की आड़ में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश बंद करनी चाहिए। उन्होंने भाजपा पर व्यंग करते कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए युवाओं और छात्रों के सवालों का समाधान नहीं कर पाए, वे आज छात्रों के पीछे खड़े होकर राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। जबकि हकीकत अब पूरा देश जान चुका है कि माननीय मुख्यमंत्री ने छात्रों की सभी मांगों को मान लिया है, छात्र अपने घर लौट चुके हैं और 25 अगस्त को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में कई और महत्वपूर्ण निर्णय सरकार छात्र हित में लेने जा रही है।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा नेताओं की राजनीति अब इतनी कमजोर हो चुकी है कि उन्हें अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए छात्रों को आगे करना पड़ रहा है। छात्र-युवा पढ़ाई, रोजगार और अपने भविष्य को लेकर संघर्ष करें, यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनके आंदोलनों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना भाजपा की पुरानी कार्यशैली रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी बताएं कि यदि उन्हें वास्तव में छात्रों की चिंता है तो वे छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर सकारात्मक संवाद क्यों नहीं करते? हर प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक दमन बताकर माहौल गरमाना और फिर थाने पहुंचकर राजनीतिक प्रदर्शन करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करना है।

झामुमो महासचिव ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और किसी भी मामले में पुलिस को कानून के दायरे में ही कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन किसी व्यक्ति पर कार्रवाई को लेकर बिना पूरी जानकारी के पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाना और उसे राजनीतिक रंग देना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं है। भाजपा को कानून और लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले अपने राजनीतिक आचरण का आईना देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेता लगातार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे छात्रों और युवाओं के बीच भ्रम और टकराव की स्थिति पैदा हो। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर कानून हाथ में लेने या राजनीतिक उकसावे की राजनीति को जायज नहीं ठहराया जा सकता।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा की परेशानी यह है कि झारखंड की जनता ने उसकी राजनीति को नकार दिया है। अब कभी छात्रों के नाम पर, कभी युवाओं के नाम पर और कभी कानून-व्यवस्था के नाम पर भाजपा अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जनता सब देख रही है और समझ रही है कि कौन छात्रों के भविष्य की चिंता कर रहा है और कौन उनके मुद्दों को अपनी राजनीति का ईंधन बना रहा है।

उन्होंने बाबूलाल मरांडी से सवाल किया कि यदि भाजपा को सचमुच छात्रों की इतनी चिंता है तो वह यह बताए कि केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों पर उसने क्या ठोस कदम उठाए? सिर्फ थाने में दो घंटे बैठ जाने से छात्र हितैषी होने का प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता।

विनोद पांडेय ने कहा कि झामुमो छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है, लेकिन किसी भी आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश का विरोध करेगा। भाजपा नेताओं को सलाह है कि छात्रों को आगे करके अपनी राजनीति चमकाने के बजाय खुद मैदान में उतरें और जनता के सवालों का सामना करें।

उन्होंने कहा भाजपा नेताओं को यह समझ लेना चाहिए कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर झामुमो से राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। जनता के बीच जाकर लड़ना है तो भाजपा नेता खुद मैदान में उतरें।

रांची में धरना-प्रदर्शन, जुलूस और रैली से पहले लेनी होगी अनुमति, जिला प्रशासन ने जारी की गाइडलाइन

प्रायः यह देखा जा रहा है कि विभिन्न स्थानों पर धरना-प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली एवं आमसभा का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें कई बार प्रशासन को पूर्व में आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है। ऐसे आयोजनों के कारण विधि-व्यवस्था एवं जन-सुरक्षा के साथ-साथ यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि शांतिपूर्ण धरना एवं विरोध-प्रदर्शन नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा है। हालांकि, इस अधिकार का प्रयोग सार्वजनिक व्यवस्था, जन-सुरक्षा, यातायात तथा अन्य नागरिकों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए लागू कानूनों एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध निर्देशों के अधीन किया जाना आवश्यक है।

सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित होने वाले धरना-प्रदर्शन, जुलूस, रैली एवं आमसभाओं के संबंध में सक्षम प्राधिकारी अनुमंडल पदाधिकारी राँची सदर / बुंडू द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। विशेष रूप से ऐसे आयोजनों के संबंध में वहाँ आयोजकों द्वारा कार्यक्रम से पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

आयोजकों से अपील की जाती है कि प्रस्तावित कार्यक्रम के संबंध में आवश्यक जानकारी समय पर प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि विधि-व्यवस्था, जन-सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक व्यवस्था की जा सके।

विशेष रूप से जुलूस एवं रैली के संबंध में प्रस्तावित मार्ग/रूट, आयोजन की तिथि, प्रारंभ एवं समाप्ति का समय तथा संभावित प्रतिभागियों की संख्या से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक होगा। कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख व्यक्तियों की जानकारी भी, जहाँ आवश्यक हो, प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए, ताकि सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

जिला प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन लागू कानूनों, नियमों तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध आदेशों एवं निर्देशों के अनुरूप किया जाए। सार्वजनिक मार्ग या स्थान पर ऐसा कोई कार्य न किया जाए जिससे अनधिकृत रूप से आवागमन बाधित हो, जन-सुरक्षा प्रभावित हो अथवा अन्य नागरिकों के अधिकारों में अनुचित हस्तक्षेप हो।

छात्रों एवं आम नागरिकों से अपील है कि वे किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने से पूर्व उसके आयोजकों से कार्यक्रम की वैधानिक स्थिति एवं प्रशासन द्वारा निर्धारित शर्तों की जानकारी प्राप्त करें। किसी अफवाह या भ्रामक सूचना के आधार पर ऐसा कोई कदम न उठाएं जिससे विधि-व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात व्यवस्था अथवा आम नागरिकों को असुविधा हो।

पूर्व सूचना एवं सक्षम प्राधिकारी से अनुमति की व्यवस्था का उद्देश्य किसी शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक कार्यक्रम को रोकना नहीं, बल्कि प्रतिभागियों की सुरक्षा, विधि-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं आम नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

जिला प्रशासन सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों, विभिन्न संस्थाओं, संगठनों तथा आम नागरिकों से अपील करता है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के संबंध में लागू विधि एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें तथा आवश्यक जानकारी समय पर प्रशासन को उपलब्ध कराते हुए विधि-व्यवस्था, जन-सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

झारखंड में छुट्टी के दिन भी खुलेंगे सरकारी स्कूल, 28 और 30 अगस्त को लगेंगी विशेष कक्षाएं

राज्य के सरकारी स्कूल में 28 और 30 अगस्त को अवकाश के दिन भी खुला रहेगा. इस संबंध में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने दिशा-निर्देश भी जारी कर सभी जिला के शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षकों को पत्र भेजा है.

बता दें, स्कूलों में 28 अगस्त को रक्षाबंधन और 30 अगस्त को रविवार का अवकाश है. रक्षाबंधन के दिन स्कूल सुबह 9 बजे से 10 बजे तक खुले रहेंगे. इस दौरान स्कूलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. केंद्र सरकार के निर्देश के अनुरूप 28 से 30 अगस्त तक... खेलेगा भारत, जीतेगा भारत... विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है.

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवकाश के दिन स्कूल खोलने के बदले शिक्षकों को अलग से क्षतिपूरक अवकाश दिया जाएगा. यह अभियान केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में भी तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

28 से 30 अगस्त तक खेल गतिविधियों से जुड़ेंगे विद्यार्थी

स्कूली शिक्षा विभाग ने 28 से 30 अगस्त तक होने वाली गतिविधियों की रूपरेखा भी जारी की है. इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर खेल गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा.

छात्रों के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं राजनीतिक दल - झामुमो

गढ़वा : विभिन्न परीक्षाओं में भ्रष्टाचार एवं इसके विरुद्ध सरकार की करवाई पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का रुख बिल्कुल साफ है। झारखंड सरकार पूरी तरह से छात्रों के साथ है एवं छात्रों के हित में हर कार्य कर रही है। परंतु यहां कुछ राजनीतिक दल के लोग छात्रों के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं। यह कार्य किसी भी स्थिति में छात्र हित में नहीं है, झामुमो जिला कमिटी व केंद्रीय सदस्य ने शनिवार को प्रेस वार्ता में ये बाते कही !!

झामुमो केंद्रीय सदस्य जवाहर पासवान ने कहा कि राज्य में जो छात्र आंदोलन चल रहा है। इस पर हेमंत सरकार ने छात्रों की सारी बातें मान ली है। सिर्फ सीबीआई जांच को छोड़ कर सरकार ने आंदोलन पर पूर्ण विराम लगा दिया था। सीबीआई को जेपीएससी एक और दो का जांच दिया गया था, परंतु आज तक कोई बंद लिफाफा नहीं मिला। उसका नतीजा शून्य रहा। सीबीआई जांच में यही होता है। जबकि राज्य सरकार ने सीआईडी से जांच शुरू कराया है। सीआईडी तीव्र गति से जांच कर रही है। अब तक दो दर्जन से अधिक लोग शिकंजे में डाले जा चुके हैं।सरकार के फैसले के विरुद्ध छात्र कोर्ट गए थे, न्यायालय ने सरकार के फैसले पर स्टे लगा दिया। जब न्यायालय ने ही सरकार के फैसले को रोक दिया तो इसमें सरकार कहां से आ गई। इसमें सरकार कैसे दोषी है ? फिर भी राजनीतिक दलों एवं कोचिंग माफिया के उकसावे पर लोग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन कर रहे हैं। यह कहीं से भी उचित नहीं है। यह बहुत ही शर्मनाक बात है। यह कार्य राजनीति से प्रेरित है। इस पर यदि राजनीति ही करना है तो लोग खुलकर राजनीतिक करें। भाजपा के लोग छात्रों को उकसा रहे हैं। झामुमो नेताओं ने कहा कि भाजपा के लोग कहीं भी हेमंत सरकार को घेर नहीं पा रहे हैं, तो उन्हें लग रहा है कि छात्र आंदोलन बहुत अच्छा मौका है। इसी पर वे अपना राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं !!

इन्होंने कहा कि पूर्व की सरकार के समय में दो बार सीबीआई जांच दिया गया है, परंतु वह अब जांच कहां है। जांच रिपोर्ट का किसी को पता नहीं है। देश के कई राज्यों में सीबीआई जांच दिया गया था, कहीं भी कोई रिजल्ट नहीं आया। आज तक सीबीआई ने रिपोर्ट जमा नहीं किया। झामुमो नेताओं ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि इस भ्रष्टाचार की आंच हमारे चौखट पर भी आती है तो हम सीआईडी को नहीं रोकेंगे। वह मेरे घर में भी जांच कर सकता है। जो मुख्यमंत्री इतना खुला दिल से बात करें उस पर शंका करना कहीं से भी उचित नहीं है।

मौके पर केंद्रीय सदस्य तनवीर आलम,केंद्रीय सदस्य मनोज ठाकुर,झामुमों जिला सचिव शरीफ अंसारी, उपाध्यक्ष फरीद खान, जिला कोषाध्यक्ष चन्दन जायसवाल, वरिष्ठ नेता मनोज तिवारी, उपाध्यक्ष संजय काँस्यकर, उपस्थित थे !!

हेमन्त सोरेन की सरकार ने आपातकाल के मंजर की दिला दी याद : संजय सेठ

केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने राज्य भर में छात्रों पर झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा हुए हमले एवं बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज की भर्त्सना करते हुए झारखंड में पिछले 6 वर्षों में जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल सहित सभी आयोजित भर्ती परीक्षा की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।

भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में श्री सेठ ने कहा कि जिस प्रकार से निर्दोष छात्रों पर रांची, हज़ारीबाग़, गिरिडीह, गढ़वा में झामुमो के गुंडों के द्वारा मारपीट, छेड़छाड़ और पुलिस के द्वारा लाठियां बरसाई गयी। उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। बच्चे जब इलाज के लिए अस्पताल गए तो वहां भी छात्रों को पीटा गया और वहां से भगाया गया। अस्पताल के निदेशक और सिविल सर्जन पर घायल छात्रों को बिना इलाज के ही छोड़ देने का दबाव बनाया गया। हमने ऐसा मंजर आपातकाल के समय ही देखा था जिसे कल हेमन्त सोरेन की सरकार ने याद दिला दी।

श्री सेठ ने कहा कि हेमन्त जी ये कोई बाहर के बच्चे नहीं है हमारे और आपके बच्चे हैं। वे बेचारे संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से बिना उपद्रव, बिना किसी के मुर्दाबाद, बिना किसी की आजादी की मांग और बिना किसी सार्वजनिक सम्पति की नुकसान किये, किसी पर ढेला पत्थर फेंके बिना पिछले 25 दिनों से अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ आपसे गुहार करते रहे और आमरण अनशन पर रहे। लेकिन आपने उनकी एक न सुनी। जब पूरे देश में इस आंदोलन को समर्थन मिलने लगा तो आपकी सरकार ने फूट डालो और राज करो की नीति को अपनाते हुए छात्रों को धोखा दिया। एक षड्यंत्र के तहत आपने परीक्षा को रद्द किया लेकिन उसके बचाव में कोर्ट में दलील देने हेतु राज्य के महाधिवक्ता को कोर्ट नहीं भेजकर एक जूनियर वकील को भेज दिया। आपकी इस चाल को राज्य की जनता भलीभांति समझ चुकी है।

श्री सेठ ने राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि झारखंड में खून बहा है, यहां भी छात्रों के हाथ पैर टूटे है, लेकिन आपके मुंह से उफ तक न निकला। उन्होंने राहुल गांधी को मौकापरस्त बतलाते हुए कहा कि आपको छात्र आंदोलन से केवल राजनीतिक लाभ लेना है। इसलिये आप दिल्ली तो गए लेकिन झारखंड जहां आपकी सरकार है वहां आप नहीं आये। आप अगर इतने ही छात्र हितैषी हैं तो राँची आकर झारखंड के छात्रों के आंदोलन के साथ खड़े होइये और हेमन्त सोरेन सरकार से इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कीजिए। अन्यथा तत्काल अपना समर्थन वापस लीजिए। लेकिन आप ऐसा नहीं करेंगे, आपके दोहरे चरित्र से पूरा देश वाकिफ हो चुका है। इसलिये आपको और आपकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता है।

पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा के पत्र का क्या हुआ

रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने पूछा कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष नीलिमा केरकेटा के द्वारा 2024 में सरकार को जेपीएससी में व्याप्त घोटाले एवं खामियों को लेकर जो पत्र लिखकर आगाह किया गया था, सरकार उस पत्र को क्यों दबा कर बैठी हुई है। सरकार की क्या मजबूरी है और किसका दबाव है। नीलिमा केरकेट्टा के पत्र का सच झारखंड की जनता जानना चाहती है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान जेपीएससी में पूर्व मंत्री, मुख्यमंत्री और झामुमो के महासचिव की रिश्तेदार सदस्य रह चुकी हैं। कहीं सरकार इन्हें बचाने की कोशिश तो नहीं कर रही है। आखिर इस मामले की जांच सीबीआई से कराने पर क्या आपत्ति है या डर क्यों हैं। सीआईडी की जांच पर यहां के बच्चों को भरोसा नहीं है। बिनसिस के निदेशक अरुण कुमार पर 2022 में नौकरी बेचने का आरोप लगा और सीआईडी जांच में उनके खिलाफ सबूत भी पाए गए लेकिन सीआईडी के द्वारा अरुण कुमार पर चार सालों तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। फिर कैसे यहां के बच्चे सीआईडी जांच पर भरोसा करें।

श्री सेठ ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड में नौकरी को बेच कर सत्ता में शामिल लोगों ने 1000 करोड़ रुपये से अधिक की उगाही की है। उन्होंने कहा कि बच्चों को झारखंड से बाहर पटना और नेपाल ले जाकर प्रश्नों के उत्तर रटवाये गए थे। इसकी जांच पूर्ण रूप से सीबीआई ही कर सकती है, सीआईडी नहीं। सीआईडी की जांच पर यहां के बच्चों को भरोसा नहीं है।

आज की प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और मीडिया सह प्रभारी सतीश सिन्हा उपस्थित रहे।

राँची में 23 अगस्त को होगा झारखंड रेरा का एक दिवसीय सेमिनार, रेडिसन ब्लू में जुटेंगे रियल एस्टेट सेक्टर के हितधारक

राँची:झारखंड रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (झारखंड रेरा) द्वारा रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं व्यावहारिक पहलुओं पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन 23 अगस्त 2026 को किया जाएगा। यह कार्यक्रम राँची के रेडिसन ब्लू होटल में प्रातः 11:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक आयोजित होगा।

सेमिनार में रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों को अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, परियोजना पंजीकरण, प्रमोटर एवं आवंटियों के अधिकार एवं दायित्व, अनुपालन प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन, शिकायत निवारण व्यवस्था एवं अन्य नियामकीय पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रतिभागियों द्वारा उठाए जाने वाले व्यावहारिक प्रश्नों एवं जिज्ञाशाओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा।

झारखंड रेरा ने सभी बिल्डरों, प्रमोटरों, भूमि स्वामियों, होमबायर्स, बैंक एवं वित्तीय संस्थानों तथा अन्य हितधारकों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक सहभागिता करने की अपील की है, ताकि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता एवं विश्वास को और मजबूत किया जा सके।