/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png StreetBuzz JPSC परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस India
JPSC परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस

#jpscscamsupremecourtnoticesissuedtocentrejharkhand_govt

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जेपीएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने के साथ परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग की गई है।

जेपीएससी के अलावा कई परीक्षाओं में गड़बड़ी

सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि झारखंड में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि क्या मामला कई परीक्षाओं से जुड़ा है। वकील ने बताया कि एक मामला जेपीएससी और दूसरा झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) की परीक्षा से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा का भी जिक्र हुआ। सीजेआई ने पूछा कि क्या ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा भी लोक सेवा आयोग कराता है। कोर्ट ने कहा कि वह इस पहलू को भी देखेगा कि यह परीक्षा कैसे आयोजित होती है।

याचिका में क्या हैं मांगे

याचिकाकर्ता ने झारखंड के बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। प्रस्तावित समिति में फोरेंसिक विज्ञान, आईटी, परीक्षा सुरक्षा, OMR मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के स्वतंत्र ऑडिट की मांग भी की गई है।

क्या है पूरा मामला?

याचिका दो जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद सामने आए विवाद के बीच दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, एक सफल उम्मीदवार की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल होने के बाद परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर सवाल उठे। याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित उम्मीदवार ने प्रथम प्रश्नपत्र में 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे, इसके बावजूद उसे सफल घोषित किया गया। इन कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।

खान सर के खिलाफ थाने पहुंची यूपी की युवती, बताया जान को खतरा, बोली- फैजल खान के कई राज पता

#patnakhansircontroversycomplaintupstudent

खान ग्लोबल स्टडीज के डायरेक्टर और टीचर फैजल खान उर्फ खान सर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एक लड़की ने खान सर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लड़की का आरोप है कि खान सर उसे कभी भी मरवा सकते हैं, उसे अपनी जान का खतरा है। युवती ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर सुरक्षा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है।

खान सर के कई राज जानने का दावा

युवती ने पटना के पीरबहोर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अपने आवेदन में युवती ने बताया कि वह फैजल खान के बारे में कई राज जानती है। युवती का दावा है कि उसके पास फैजल खान से जुड़ी कई गोपनीय जानकारियां हैं और इस बात की जानकारी फैजल खान को भी है। इसी वजह से उसे अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा महसूस हो रहा है।

जान से मरवाने की धमकी देने का आरोप

युवती का आरोप है कि कोचिंग संचालक ने उसे फोन कर निजी जानकारी किसी को बताने से मना किया था। ऐसा करने पर उसे जान से मरवाने की धमकी दी गई। युवती रविवार की देर रात थाने पहुंचकर पुलिस को आपबीती बताई।

उत्तर प्रदेश की रहने वाली है युवती

युवती उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। फिलहाल वह पटना के गांधी चौक इलाके में रह रही है। पुलिस युवती की तलाश कर रही है। वह अगस्त 2016 में पटना आई थी। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश के देवरिया स्थित एक संस्थान में फैजल खान उर्फ खान सर से पढ़ाई करती थी।

क्या कह रही खान सर की टीम?

वहीं इस मामले को लेकर खान सर की टीम की ओर से कहा गया है कि जिस आवेदन की बात की जा रही है, वह आवेदन कहां दिया गया है और क्यों दिया गया है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। टीम का कहना है कि हर तरफ से खान सर को फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। टीम के मुताबिक, रक्षाबंधन का पर्व आने वाला है और हर साल बड़े स्तर पर इसका आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में छात्राएं भी शामिल होती हैं। ऐसे में छात्राओं को कार्यक्रम में पहुंचने से रोकने और खान सर की छवि खराब करने के लिए साजिश रचे जाने का आरोप लगाया गया है।

चीन जा रहे हैं अजीत डोभाल, जानें क्यों अहम है NSA का बीजिंग दौरा?

#nsaajitdovalvisitto_china

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन जा रहे हैं। अजीत डोभाल आज बिजिंग के लिए रवाना हो चुके हैं। वे मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस हाईलेवल मीटिंग का मुख्य फोकस वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिरता बहाल करने और दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालने पर रहेगा।

2003 में शुरू हुई थी ये वार्ता

मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर 'विशेष प्रतिनिधियों' (SR) की वार्ता के 25वें दौर के लिए बैठक करेंगे। डोभाल और वांग 'विशेष प्रतिनिधियों' के तौर पर काम करते हैं। यह व्यवस्था 2003 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा के विवाद को सुलझाना था।

गलवान झड़प के बाद पांच साल बंद रही वार्ता

2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बने तनावपूर्ण हालात के कारण यह बातचीत लगभग पांच साल तक रुकी रही। यह बातचीत दिसंबर 2024 में फिर से शुरू हुई, जब बीजिंग में 23वां दौर हुआ। इसके बाद 24वां दौर पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में हुआ था।

एजेंडा में क्या-क्या हो सकता है

उम्मीद है कि दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 के डिसइंगेजमेंट (सेना पीछे हटाने के) समझौते का जायजा लेंगे। क्या पिछली बातचीत के बाद से 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर शांति बनी हुई है? बीजिंग का कहना है कि बॉर्डर पर हालात "आमतौर पर स्थिर" हैं, दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि 24वें दौर की बातचीत के बाद से वे समझौते पर अमल करने और अगली बैठक की तैयारी में जुटे रहे हैं

बेहद अहम है डोबाल का ये दौरा

यह बातचीत कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं। 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले एक सकारात्मक माहौल बनाना और सीमा पर तनाव कम करना है। इनमें सीमा प्रबंधन, आपसी भरोसा बढ़ाने वाले उपाय और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। हालांकि, बीजिंग और नई दिल्ली ने चीनी राष्ट्रपति शी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि वह आएंगे। उनके दौरे से समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात का रास्ता बन सकता है।

चीन जा रहे हैं अजीत डोभाल, जानें क्यों अहम है NSA का बीजिंग दौरा?

#nsaajitdovalvisitto_china

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन जा रहे हैं। अजीत डोभाल आज बिजिंग के लिए रवाना हो चुके हैं। वे मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस हाईलेवल मीटिंग का मुख्य फोकस वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिरता बहाल करने और दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालने पर रहेगा।

2003 में शुरू हुई थी ये वार्ता

मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर 'विशेष प्रतिनिधियों' (SR) की वार्ता के 25वें दौर के लिए बैठक करेंगे। डोभाल और वांग 'विशेष प्रतिनिधियों' के तौर पर काम करते हैं। यह व्यवस्था 2003 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा के विवाद को सुलझाना था।

गलवान झड़प के बाद पांच साल बंद रही वार्ता

2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बने तनावपूर्ण हालात के कारण यह बातचीत लगभग पांच साल तक रुकी रही। यह बातचीत दिसंबर 2024 में फिर से शुरू हुई, जब बीजिंग में 23वां दौर हुआ। इसके बाद 24वां दौर पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में हुआ था।

एजेंडा में क्या-क्या हो सकता है

उम्मीद है कि दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 के डिसइंगेजमेंट (सेना पीछे हटाने के) समझौते का जायजा लेंगे। क्या पिछली बातचीत के बाद से 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर शांति बनी हुई है? बीजिंग का कहना है कि बॉर्डर पर हालात "आमतौर पर स्थिर" हैं, दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि 24वें दौर की बातचीत के बाद से वे समझौते पर अमल करने और अगली बैठक की तैयारी में जुटे रहे हैं

बेहद अहम है डोबाल का ये दौरा

यह बातचीत कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं। 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले एक सकारात्मक माहौल बनाना और सीमा पर तनाव कम करना है। इनमें सीमा प्रबंधन, आपसी भरोसा बढ़ाने वाले उपाय और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। हालांकि, बीजिंग और नई दिल्ली ने चीनी राष्ट्रपति शी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि वह आएंगे। उनके दौरे से समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात का रास्ता बन सकता है।

बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट केरल इकाई द्वारा कविगोष्ठी संपन्न

केरल । साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट केरल इकाई द्वारा आनलाइन कविगोष्ठी गुरुवार 20 अगस्त 2026 को संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ प्रशन्ना कुमारी सी.जे. ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में डॉ ज्योति कृष्ण, विशिष्ट अतिथि कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप मुंबई उपस्थित थे।मंच का खूबसूरत संचालन डॉ अम्बिली टी. ने किया एवं मंच पर राष्ट्रीय सचिव श्रीमती सत्यभामा सिंह भी मौजूद थीं। आमंत्रित साहित्यकारों में डॉ डी लता, श्रीमती सौम्या, डॉ दिव्या एस., कवियत्री दिव्या रानी, पूजा कुमारी मंडल एवं डॉ अंजना डी. उपस्थित थीं। उपस्थित सभी साहित्यकारों ने हिन्दी की ग़ज़लों, कविताओं एवं छंदों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ प्रशन्ना ने सभी साहित्यकारों द्वारा प्रस्तुत कविताओं पर बखूबी समीक्षा करते हुए सराहा तत्पश्चात अपनी रचनाओं से सभी को आह्लादित किया।
सदी के सबसे बड़े खतरे का अलर्ट, टूटेगा 100 साल का रिकॉर्ड, भारत में मानसून पर संकट

#elninomonsoonrainfallcropimpactindia

दुनिया भर में मौसम का मिजाज एक बार फिर तेजी से बदलने वाला है। इस बार जो चेतावनी आई है, वो बेहद डरावने संकेत दे रही है। दुनिया में एक बड़ा संकट दस्तक देने को बेताब है। धरती पर सदी का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इस संकट का नाम है अलनीनो। दुनिया भर की मौसम एजेंसियां आगाह कर रही हैं कि मानसून को सोख लेने वाला अल नीनो सौ सालों में सबसे भयानक रूप लेने वाला है।

विनाशकारी और शक्तिशाली अल नीनो आकार ले रहा

ब्रिटेन के मौसम विभाग (मेट ऑफिस) ने चेतावनी दी है कि इस साल का अल नीनो पिछले 100 से अधिक वर्षों में सबसे अधिक विनाशकारी और शक्तिशाली रूप ले सकता है। प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 3°C से भी अधिक रहने का अनुमान है, जो आधुनिक जलवायु रिकॉर्ड में अब तक का उच्चतम स्तर है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अभूतपूर्व घटना के कारण साल 2027 वैश्विक स्तर पर अब तक का सबसे गर्म साल साबित हो सकता है और यह 2024 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा।

4 डिग्री तक बढ़ सकता है तापमान

ब्रिटेन के मौसम विभाग का कहना है कि अल नीनो के असर से प्रशांत महासागर का पानी 3.9 डिग्री तक गर्म हो सकता है। यूके वेदर डिपार्टमेंट के अफसर एडम स्केफन का कहना है कि प्रशांत महासागर की सतह का तापमान दो डिग्री बढ़ने को भी बहुत बड़ी घटना माना जाता है। वर्ष 2015-16 में अल नीनो की वजह से महासागर का तापमान 3 डिग्री बढ़ा था। टेंपरेचर का 4 डिग्री तक बढ़ना जलवायु परिवर्तन के लिहाज से बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हो सकती है। प्रशांत महासागर की सतह का तापमान अभी 30 साल के सामान्य औसत से 2.6 डिग्री तक बढ़ गया है।

भारत पर दिख रहा असर

अल नीनो पहले ही भारत के मानसून पर असर डाल रहा है। अगस्त आते आते ही मानसून की गतिविधियां सुस्त पड़ने लगी हैं। बादल छाये हैं, लेकिन अच्छी बारिश नहीं हो रही है। ऊफर से बरसात लाने वाले मानसून ट्रफ या इंडियन ओशियन डायपोल भी सक्रिय नहीं हो पा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने मानसून के चार महीनों में बारिश का औसत सामान्य से केवल 90 फीसदी रहने का अनुमान जताया है, जो 11 सालों में सबसे कम है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने तो यह आंकड़ा घटाकर 85 फीसदी कर दिया है।

भारत पर होगा गंभीर असर

अल नीनो के एक्टिव होने से मानसून की बारिश थम सी गई है और इस बार सामान्य से काफी कम बारिश का अनुमान है। भारत में कृषि सीधे तौर पर मानसून से जुड़ी है। ऐसे में भारत पर इसका गंभीर हो सकता है। अब इसकी ताकत बढ़ने की आशंका के बीच भारत को लगातार दो फसल सीजन में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इस साल की रबी फसल पर असर पड़ने के साथ 2027 की खेती भी प्रभावित हो सकती है।

दिल्ली-NCR में स्वाइन फ्लू का प्रकोप, 1770 के पार पहुंचे मामले, जानें किन्हें है H1N1 से ज्यादा खतरा?

#riseinswineflucasesindelhiover1770casesrecorded

दिल्ली-एनसीआर में मानसून के बीच H1N1 यानी स्वाइल फ्लू के मामलों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में इस साल अब तक स्वाइन फ्लू के 1770 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, मानसून के दौरान मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

अब तक 1777 मामले सामने आए

दिल्ली में इस साल अब तक H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के 1,777 मामले सामने आ चुके हैं। दिल्ली में एक ही दिन में एच1एन1 के 114 नए मरीज मिले। इससे इस वर्ष अब तक एन1एच1 की पुष्टि हुई मरीजों की संख्या बढ़कर 1,777 हो गई। छह अगस्त तक दिल्ली में एच1एन1 के 1,344 मामले थे। यानी मात्र 14 दिन में 433 नए मामले सामने आए।

पिछले साल की तुलना में आठ गुना मामले

इस साल के मुकाबले 2025 में 229, 2024 में 3,151 और 2023 में 209 मामले दर्ज किए गए थे। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब आठ गुना मामले हो गए हैं। आंकड़ों से साफ है कि स्वाइन फ्लू के मामले साल-दर-साल काफी उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं।

जेपी नड्डा ने की तैयारियों की समीक्षा

दिल्ली में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को देश में मौसमी इन्फ्लुएंजा की स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में खास तौर पर राष्ट्रीय राजधानी की स्थिति, अस्पतालों की तैयारियों, निगरानी और जांच व्यवस्था की समीक्षा की गई।

क्या हैं लक्षण

डॉक्टरों के अनुसार, इस मौसम में कई मरीजों में लंबे समय तक रहने वाली खांसी और तेज बुखार देखने को मिल रहा है। वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों में होने वाली सूजन भी कुछ मरीजों में खांसी और सांस से जुड़ी परेशानी बढ़ा सकती है। उन्होंने बताया कि एच1एन1 संक्रमण में आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

मरीजों को सांस लेने में होती है तकलीफ

ज्यादातर लोगों को H1N1 सामान्य फ्लू की तरह ही होता है, लेकिन कुछ मामलों में वायरस फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाता है। इस स्थिति में वायरस फेफड़ों के टिश्यू में सूजन पैदा कर देता है, जहां से शरीर में ऑक्सीजन का आदान-प्रदान होता है। इस वजह से सांस लेने में तकलीफ होती है।

पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले बवाल, ABVP-NSUI के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प

#abvpnsuiclashbeforerahulgandhipunechhatronkigoonjevent

लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आज 22 अगस्त को होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से एक दिन पहले पुणे में हंगामा हो गया। शुक्रवार को पुणे के सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के सदस्यों के बीच झड़प हो गई। घटना के बाद परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।

दोनों गुटों ने लगाए एक-दूसरे पर मारपीट के आरोप

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद शुरू हुआ। इसके बाद दोनों गुट आमने-सामने आ गए और स्थिति बिगड़ गई। घटना में एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों संगठनों ने एक-दूसरे पर मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। एबीवीपी के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे की छात्राओं पर शनिवार को होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराने का दबाव बना रहे थे। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के समर्थन में बोलने वाली दो छात्राओं को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हॉस्टल के अंदर रोक लिया और उन्हें धमकी दी।

विरोध में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार मौके पर पहुंचे। विजय वडेट्टीवार ने घटना के बाद हॉस्टल का दौरा किया। उन्होंने दावा किया कि एबीवीपी कार्यकर्ता दोनों छात्राओं को धमका रहे थे। घटना के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। विजय वडेट्टीवार, सतेज पाटील और विश्वजीत कदम धरने पर बैठ गए।

पुलिस कर रही मामले की जांच

घटना के बाद परिसर में तनाव का माहौल बन गया। विवाद की वास्तविक पृष्ठभूमि और झड़प किस कारण से शुरू हुई, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पुणे के डीसीपी हसन गौहर ने कहा, "हमें दो गुटों के बीच झड़प की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर हमने कुछ लोगों को नारे लगाते और सड़क जाम करने की कोशिश करते हुए पाया; उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।

चीनी की कीमत में रिकॉर्ड उछाल, अचानक क्यों 65 रुपये किलो तक पहुंचा भाव

#whyissugarsuddenlygetting_expensive

इन दिनों चाय की चुस्की फीकी लगने लगी है। मिठास घोलने वाली चीनी अब जरा कड़वी लगने लगी है। भारत में चीनी के दाम पिछले कुछ महीनों से तेजी से बढ़ रहे हैं। चीनी 65 रुपए के पार हो गई है। इस बीच केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी बिना आयात शुल्क के मंगाने की अनुमति दी है। दस साल बाद ऐसा होगा जब भारत को चीनी का आयात करना पड़ रहा है।

पहले कभी इतने ऊंचे नहीं गए चीनी के दाम

रिपोर्ट के मुताबिक, इसी महीने भारत में चीनी की कीमतों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 अगस्त को खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 55.7 रुपए प्रति किलोग्राम थी। इसी रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने पहले चीनी की कीमत 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी। 20 अगस्त, 2025 को इसकी कीमत 46.3 रुपए प्रति किलोग्राम थी। बाजार के जानकारों का कहना है कि चीनी के दाम इससे पहले कभी इतने ऊंचे नहीं गए।

चीनी के दाम अचानक क्यों बढ़े?

ऐसे में सवाल उठता है कि चीनी के दाम अचानक क्यों बढ़ रहे हैं? क्या देश में चीनी की कमी है या आपूर्ति को लेकर समस्या है? चीनी की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर बढ़ता दबाव है। चीनी मिलों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के उपाध्यक्ष केतन पटेल का कहना है कि 2025-26 के चीनी वर्ष में देश में चीनी उत्पादन 3.2 करोड़ टन (32 अरब किलोग्राम) रहने का अनुमान था, लेकिन वास्तव में यह क़रीब 3 करोड़ टन (30 अरब किलोग्राम) ही रहा।

चीनी की कीमतों पर मौसम का भी असर

चीनी की कीमतों पर मौसम का असर भी पड़ रहा है। पिछले साल बारिश ज़्यादा हुई थी, जिसका गन्ने की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ा। वहीं, इस साल भारत में मानसून के 11 साल के सबसे निचले स्तर पर रहने का अनुमान जताया गया है। कमजोर बारिश ने गन्ने की बुवाई और फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही अल नीनो का खतरा भी बना हुआ है। अगर अनुमान के मुताबिक बारिश कमजोर रहती है तो गन्ने की बुवाई प्रभावित होगी और भारत कम से कम अगले तीन साल तक चीनी के निर्यात बाजार से बाहर रह सकता है। इसी तरह अधिक उत्पादन देने वाली सीओ-0238 नाम की गन्ने की किस्म में उत्तर प्रदेश में गेरुआ रोग फैल गया

सरकार ने चीनी के निर्यात पर लगाई रोक

जन्माष्टमी से शुरू होने वाला त्योहारों का मौसम क़रीब आ रहा है। चीनी की मांग पूरे साल रहती है, लेकिन त्योहारों के दौरान इसमें खास बढ़ोतरी होती है। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के समय मिठाई की बिक्री काफी बढ़ जाती है। ऐसे में चीनी की बढ़ती क़ीमतों पर क़ाबू पाने के लिए सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। साथ ही, थोक व्यापारियों के पास चीनी का कितना स्टॉक हो सकता है, इस पर स्टॉक लिमिट भी लगा दी गई है

वंदे मातरम्' के छंदों पर छिड़ी सियासी लड़ाई, जानें क्या है नौ दशक पुराना 1937 का प्रस्ताव?

#vandemataram2versesvs6verses1937congress_resolution

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के छंदों पर देश में विवाद मचा हुआ है। विवाद की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस के दिन कांग्रेस मुख्यालय में तिंरगा फहराने के बाद इस गीत के गायन से हुई। कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी के व्यवहार का वीडिया सामने आने के बाद बवाल मच गया। इस वीडियो में दिख रहा है कि गीत की पहली दो लाइनों के गायन के बाद सोनिया गांधी बात करने लगती हैं। जबकि नए नियम के तहत इस पूरे गीत का गायन करना अनिवार्य है। इस बीच कांग्रेस कार्यसमिति ने फैसला किया है कि पार्टी के कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। कांग्रेस पार्टी ने ये फैसला लेते हुए अपने क़रीब नौ दशक पुराने प्रस्ताव का हवाला दिया है।

1937 के प्रस्ताव को ही मानेगी कांग्रेस

पूरा मामला स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस ऑफिस में झंडोत्तोलन के दौरान पूरा वंदे मातरम् गीत बजने पर शुरू हुआ। जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने इस गीत के दो पैराग्राफ के बाद भी इसे गाते रहने पर आपत्ति जताई। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत का अपमान करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने जवाब में स्पष्ट किया कि उसके आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। पार्टी ने इसके लिए 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति यानी सीडब्ल्यूसी के फैसले को आधार बनाया है। यही पुराना फैसला अब दो पद बनाम छह पद की राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

कांग्रेस का 1937 का प्रस्ताव क्या था?

1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् के शुरुआती दो पदों को राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया था। बाकी चार पदों को इस रूप में स्वीकार नहीं किया गया। उस समय गीत के आगे के हिस्से में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भों को लेकर आपत्ति सामने आई थी। कांग्रेस का तर्क है कि उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे प्रमुख नेताओं से जुड़े फैसले के तहत शुरुआती दो पदों को ही अपनाया गया था। इसलिए पार्टी आज भी उसी परंपरा का पालन कर रही है।

'वंदे मातरम्' स्वदेशी आंदोलन के नारों की गूंज

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने साल 1875 में संस्कृतनिष्ठ बांग्ला में 'वंदे मातरम्' गीत की रचना की थी। बाद में इसे उन्होंने अपने चर्चित उपन्यास 'आनंद मठ' में शामिल किया था। 18वीं सदी के अंतिम दौर की कहानी कहने वाले 'आनंद मठ' उपन्यास की पृष्ठभूमि संन्यासी विद्रोह है। ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत में शासन के शुरुआती दशकों में इसके ख़िलाफ़ बंगाल में संन्यासी विद्रोह हुआ था। 'वंदे मातरम्' गीत 1905 से 1908 के दौरान हुए स्वदेशी आंदोलन में एक नारे के रूप में भी गूंजा और यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के साथ गहराई से जुड़ता चला गया। 1937 में कांग्रेस की कार्यसमिति ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा था कि जब भी किसी राष्ट्रीय कार्यक्रम में वंदे मातरम् गीत को गाया जाए तब सिर्फ़ पहले दो अंतरे ही गाए जाएं। इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि गीत के पहले दो अंतरों में ऐसा कुछ नहीं है जिसे लेकर किसी को आपत्ति हो और बाद के अंतरे बहुत चर्चित नहीं हैं।

वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों का गायन अनिवार्य

बता दें कि 'वंदे मातरम्' के पूर्ण संस्करण को हाल ही में राष्ट्रगान के समान क़ानूनी संरक्षण दिया गया है। इसके तहत सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों का गायन अनिवार्य किया गया है। केंद्र सरकार ने 28 जनवरी को जारी दिशा-निर्देशों में वंदे मातरम् के सभी छह पदों के गायन की व्यवस्था का उल्लेख किया। जब जन गण मन के साथ वंदे मातरम् बजाया जाएगा, तो पहले राष्ट्रगीत के सभी छह पद गाए जाने की बात कही गई है। इससे पहले शुरुआती दो पदों के इस्तेमाल की व्यवस्था बताई गई थी।