'द केरल स्टोरी-2' को ज्यादा दर्शक न मिलना 'अच्छी खबर', राहुल गांधी बोले-फिल्मों का इस्तेमाल प्रचार के लिए हो रहा
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि यह "अच्छी खबर" है कि विवादित फिल्म 'द केरल स्टोरी-2 गोज बियॉन्ड' को ज्यादा दर्शक नहीं मिल रहे हैं। राहुल गांधी ने शुक्रवार को कुट्टिक्कानम के मारियन कॉलेज में छात्रों से बातचीत करते हुए ये बयान दिया।
फिल्मों को दुष्प्रचार का साधन बनाए जाने के बारे में एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए गांधी ने ‘केरल स्टोरी-2 गोज बियॉन्ड’ पर अपने विचार साझा किए। राहुल गांधी ने कहा कि अच्छी खबर यह है कि ‘केरल स्टोरी’ वाले सिनेमाघरों में सीट खाली पड़ी हैं, और इसे कोई देख नहीं रहा है। यह दिखाता है कि ऐसे लोग हैं, जिनमें से अधिकांश को केरल और उसकी परंपराओं तथा संस्कृति की समझ नहीं है।
फिल्मों-टेलीविजन और मीडिया का राजनीतिक इस्तेमाल
राहुल के अनुसार, फिल्मों, टेलीविजन और मीडिया को तेजी से ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि सिनेमा, टेलीविजन और मीडिया का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश फैलाने के लिए तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “इसका इस्तेमाल ठीक इसी उद्देश्य से किया जाता है— लोगों को बदनाम करने, उन्हें समाज से अलग करने और समाज में फूट डालने के लिए, ताकि कुछ लोगों को फायदा हो और दूसरों को नुकसान। भारत भी कुछ ऐसा ही बन चुका है।
इस तरह के घटनाक्रम के लिए बड़ी खर्च हो रहा-राहुल गांधी
कांग्रेस सांसद का दावा है किया कि इस तरह के घटनाक्रम देश के लिए हानिकारक थे और इस उद्देश्य के लिए बड़ी मात्रा में धन खर्च किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अगर कोई इंसान किसी खास तरह की फिल्म बनाना चाहता है, मीडिया में कुछ कहना चाहता है, या किसी खास आइडिया को डिफेंड करना चाहता है, तो उन पर हमला किया जाता है और अक्सर उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। राहुल ने कहा कि मैं यह हर समय महसूस करता हूं। दूसरी तरफ, कुछ कहानियों को लोग जितना चाहें उतना फैला सकते हैं और उनका कुछ नहीं होता।
देश की शिक्षा प्रणाली पर वैचारिक दबाव-राहुल गांधी
राहुल गांधी ने कहा कि केरल में समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं हैं और उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे इन परंपराओं से जुड़े रहें और साथ ही दुनिया के अन्य हिस्सों से भी सीखें। उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि देश की शिक्षा प्रणाली वैचारिक दबाव का सामना कर रही है। उन्होंने कहा, “यदि आप विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को देखें, तो उनमें से बड़ी संख्या में नियुक्तियां केवल इसलिए की गई हैं क्योंकि वे आरएसएस या किसी विशेष विचारधारा का हिस्सा हैं। शिक्षा प्रणाली पर वैचारिक दबाव है। शिक्षा किसी विशेष विचारधारा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, विशेष रूप से आरएसएस के विभाजनकारी दृष्टिकोण तक तो बिल्कुल नहीं।”







3 hours ago
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