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और तकतवर होगी भारतीय सेना, 3.25 लाख करोड़ की डिफेंस डील, 114 नए राफेल खरीदने का प्रस्ताव मंजूर

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केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को फुलप्रूफ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी डीएसी ने एक ऐतिहासिक खरीद को मंजूरी दी है। परिषद ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों और नौसेना के लिए 6 P-8I पोसीडॉन समुद्री निगरानी विमानों की खरीद के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है।

इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे पर “डील होगी डन”

भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने गुरुवार को फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीद डील को मंजूरी दे दी। वहीं अमेरिका से 6 P-8I एयरक्राफ्ट खरीदने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई। राफेल डील फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 17-20 फरवरी के तीन दिवसीय भारत दौरे पर पूरी हो सकती है।

16 जनवरी को प्रस्ताव को मिली थी मंजूरी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डीएसी में राफेल के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। प्रस्ताव अब कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। प्रस्ताव को 16 जनवरी को रक्षा खरीद बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी थी। अब सीसीएस की परमिशन के बाद ही अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, नए राफेल विमानों की खरीद से एयर डिफेंस और बॉर्डर एरिया में तैनाती की क्षमता मजबूत होगी।

वायुसेना को मिलेंगे 6 से 7 नए स्क्वाड्रन

इस सौदे का सबसे अहम पहलू वायुसेना की गिरती स्क्वाड्रन संख्या को संभालना है। 114 नए राफेल विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना को 6 से 7 नए स्क्वाड्रन मिलेंगे। वर्तमान में वायुसेना के पास लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है। डीएसी की मंजूरी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के पास भेजा जाएगा।

भारत में ही बनाए जाएंगे 96 विमान

इस प्रस्ताव के अनुसार, भारत फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 18 राफेल विमान सीधे खरीदेगा। बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इनमें से कुछ विमान दो सीट वाले होंगे, जिनका उपयोग पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा। इस डील में आधुनिक तकनीक भारत को देने और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है।

राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता होगी खत्म? निशिकांत दुबे ने निलंबित करने का दिया नोटिस

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बुधवार को लोकसभा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के भाषण ने सियासत को और गर्मा दिया। उन्होंने राजनीति को मार्शल आर्ट से जोड़ते हुए कहा कि जैसे खेल में 'ग्रिप' और 'चोक' होती है, वैसे ही राजनीति में भी कई अदृश्य तकनीकें काम करती हैं- बस वे दिखाई नहीं देतीं। अब अब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ एक प्रस्‍ताव लाने का नोटिस दिया है।

आजीवन चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार 12 फरवरी को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ ‘सब्सटेंटिव मोशन’ लाने का नोटिस दिया और उनकी संसद सदस्यता रद्द करने के साथ ही आजीवन चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की है।

नोटिस में सोरोस फाउंडेशन जिक्र

संसद परिसर में भाजपा सांसद ने कहा कि उन्होंने अपने नोटिस में राहुल गांधी के विदेशी दौरों और कथित रूप से सोरोस फाउंडेशन, यूएसएआईडी और फोर्ड फाउंडेशन जैसी संस्थाओं से जुड़े लोगों के साथ संपर्क का उल्लेख किया है। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी थाईलैंड, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों की यात्राओं के दौरान ‘भारत विरोधी तत्वों’ के साथ मिलीभगत करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई विशेषाधिकार प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर प्रस्ताव यानी सब्सटेंटिव मोशन है, जिसका उद्देश्य सदन के समक्ष निर्णय या राय व्यक्त करना होता ।

पहले जा चुकी है राहुल गांधी की सदस्यता

साल 2023 में राहुल गांधी के 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार में दिए गए भाषण को लेकर सूरत की एक अदालत ने राहुल गांधी को दो साल की सज़ा सुनाई। इसके तुरंत बाद उनकी लोकसभा सदस्यता रद कर दी गई थी। हालांकि बाद राहुल गांधी की सदस्यता बहाल हो गई थी।

क्या राहुल गांधी का बयान

बुधवार को लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में सरकार ने देश के हितों से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि सरकार खुद मानती है कि दुनिया इस समय अस्थिर दौर से गुजर रही है, जहां ऊर्जा और वित्त को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बावजूद, उनके मुताबिक, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े अहम फैसलों में अमेरिका को ज्यादा प्रभाव दिया है। उन्होंने मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले पकड़ बनाई जाती है, फिर गला दबाया जाता है और अंत में सामने वाला हार मान लेता है।

बांग्लादेश में नई सरकार की गठन के लिए डाले जा रहे वोट, सुबह 11 बजे तक 14.96% मतदान

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बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव को लेकर वोटिंग जारी है। भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजे से वोटिंग जारी है। यह चुनाव 2024 के उस हिंसक आंदोलन के बाद हो रहे हैं, जिसके कारण 15 साल से शासन कर रही तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटना पड़ा था।शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद यह चुनाव हो रहा है।

12.77 करोड़ वोटर्स करेंगे फैसला

ढाका समेत देश के 42779 मतदान केंद्रों पर 12.77 करोड़ वोटर्स उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे। राजधानी ढाका में ज्यादातर मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण तरीके से मतदान जारी है। वोटिंग को लेकर मिला-जुला नजारा दिखाई दे रहा है, कुछ जगहों पर सुबह से वोटिंग के लिए लंबी-लंबी कतारें नजर आ रही हैं, वहीं कई जगहों पर उम्मीद के मुताबिक मतदान कम होता नजर आ रहा है, जहां पोलिंग बूथ खाली दिखाई दे रहे हैं।

सुबह 11 बजे तक 14.96% मतदान

बांग्‍लादेश के चुनाव आयोग ने कहा है कि सुबह 11 बजे तक देश में 14.96% फीसदी मतदान हुआ है। ये वोट 32000 पोलिंग सेंटर पर डाले जा रहे हैं। जमात-ए-इस्‍लामी ने कहा है कि चुनाव का माहौल शांत है लेकिन कुछ जगहों पर संघर्ष की खबरें हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कुछ बूथ एजेंटों पर 'आतंकियों' ने हमला किया। उन्‍होंने प्रशासन से ऐक्‍शन की मांग की है।

तारिक रहमान के पीएम बनने की संभावना

बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के बीच प्रमुख टक्कर बताई जा रही है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी 10 पार्टियों वाले गठबंधन के साथ मैदान में हैं। 60 साल के रहमान 17 साल के स्वनिर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे हैं। उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है। BNP के मुकाबले में जमात-ए-इस्लामी है, जो 11 पार्टियों वाले गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। इस गुट में नेशनल सिटिजन पार्टी भी है, जिसे हसीना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बनाया है।

शेख हसीना के बेटे सजीब ने चुनाव को बताया दिखावा

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि ये चुनाव पूरी तरह से दिखावा हैं। गुरुवार को होने वाले संसदीय चुनाव के मतदान से एक दिन पहले वाजेद ने कहा कि इस चुनाव के नतीजे पहले से तय हैं और यह खास राजनीतिक ताकतों को किनारे करने के लिए बनाया गया है। सजीब ने कहा, ये पूरी तरह से दिखावा है। उन्होंने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है। अवामी लीग को हमेशा 30 से 40 प्रतिशत वोट मिले हैं। अगर सबसे बड़ी पार्टी हिस्सा नहीं ले सकती तो आप इसे चुनाव कैसे कह सकते हैं?

आज भारत बंद: जानें, किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने क्यों बुलाई हड़ताल

#bharatbandhtoday

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संयुक्त किसान मोर्चा समेत देश की 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते, केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और नए श्रम कानूनों के विरोध में 12 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है।

10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने बुलाई हड़ताल

यह हड़ताल 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के जॉइंट प्लेटफॉर्म ने बुलाई है, जिसमें AITUC, INTUC, CITU, HMS, TUCC, SEWA, AIUTUC, AICCTU शामिल हैं। हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), कृषि श्रमिक संघों, छात्रों, युवा संघों और अन्य संगठनों का समर्थन प्राप्त है। किसान समूहों ने एमजीएनआरईजीए को बहाल करने और कृषि को प्रभावित करने वाली नीतियों का विरोध करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

हड़ताल में बैंकिंग यूनियनें भी शामिल

इस हड़ताल में बैंकिंग यूनियनें भी शामिल हैं। इस प्रकार, हड़ताल के बीच, बैंकिंग कार्यों पर अनिश्चितता छाई हुई है, और शहरों भर के ग्राहक इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि शाखाएं सामान्य रूप से काम करेंगी या उन्हें व्यवधानों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि कई बैंक यूनियन हड़ताल के आह्वान का समर्थन कर रहे हैं।

भारत बंद क्यों बुलाया गया?

भारत बंद उन नीतियों के विरोध में बुलाया गया है जिन्हें श्रमिक संघ "श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी और निगम समर्थक" नीतियां बताते हैं। इनमें चार श्रम संहिताएं, बिजली विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025, वीबी-जी रैम जी अधिनियम 2025 और हालिया मुक्त व्यापार समझौते जैसे विशिष्ट मुद्दे शामिल हैं।

किन सेवाओं पर पड़ेगा असर?

1. परिवहन सेवाएं

कई राज्यों में बस, ऑटो और लॉरी ड्राइवर्स यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक व निजी परिवहन प्रभावित हो सकता है। बड़े शहरों में यातायात व्यवस्था में बाधा आने की संभावना है।

2. बैंकिंग सेवाएं

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काउंटर सेवाएं धीमी रह सकती हैं। चेक क्लीयरेंस में देरी की आशंका बनी हुई है। हालांकि, बैंक बंद नहीं होंगे और ऑनलाइन लेन-देन व एटीएम सेवाएं सामान्य रहेंगी।

3. बाजार और व्यापार

कई व्यापारिक संगठनों और मंडियों ने हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है, जिससे बड़े शहरों में थोक और खुदरा बाजार आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रह सकते हैं।

4. सरकारी कार्यालय

ट्रेड यूनियनों के अधिक प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने की संभावना, जिससे सरकारी कामकाज धीमा हो सकता है।

5. स्कूल और कॉलेज

सुरक्षा और परिवहन समस्याओं को देखते हुए, कुछ राज्यों में जिला प्रशासन स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर सकता है।

जो सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी

• एंबुलेंस, अस्पताल और अन्य आपातकालीन सेवाएं

• दमकल विभाग

• हवाई यात्रा और एयरपोर्ट संचालन

• डिजिटल बैंकिंग और एटीएम

राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएगी सरकार, जानें क्या है मामला

#centretomoveprivilegenoticeagainstrahul_gandhi

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संसद के बजट सत्र में हंगामे का दौर जारी है। केंद्र सरकार राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने जा रही है। इस संबंध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को शाम 5 बजे तक जवाब देना है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने सदन की गरिमा को ताक पर रखकर प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ सफेद झूठ बोला है, जिसके लिए बीजेपी उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाने जा रही है। उन्होंने कहा, लोकसभा और राज्यसभा में प्रोसीजर और कंडक्ट ऑफ बिजनेस के बहुत साफ नियम हैं। जब कोई सदस्य दूसरे सदस्य पर गंभीर आरोप लगाना चाहता है, तो आपको नोटिस देना होगा और आरोप को साबित भी करना होगा।

किरेन रिजिजू का राहुल गांधी पर पलटवार

किरेन रिजीजू ने राहुल गांधी के उन दावों पर कड़ा ऐतराज जताया है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री ने देश के राष्ट्रीय हितों को बेच दिया है। रिजीजू ने तीखे अंदाज में कहा, सदन के पटल पर मैंने खुद राहुल गांधी से अनुरोध किया था कि वे जो आरोप लगा रहे हैं, उनके आवश्यक प्रमाण पेश करें। लेकिन उन्होंने बिना किसी तथ्यात्मक आधार के निराधार और भ्रामक बातें कहीं। यह केवल प्रधानमंत्री का अपमान नहीं, बल्कि पूरे सदन को गुमराह करने की कोशिश है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का भी लिया नाम

विवाद केवल प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं रहा। रिजीजू के अनुसार, राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेकर उन पर जो व्यक्तिगत और गंभीर आरोप लगाए हैं, वे विशेषाधिकार का खुला उल्लंघन हैं। रिजीजू ने कहा कि किसी मंत्री के खिलाफ बिना किसी ठोस दस्तावेज के इस तरह की बयानबाजी करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मामले को हल्के में नहीं लेंगे। रिजीजू ने कहा, मैं स्पीकर के समक्ष इस गंभीर उल्लंघन के खिलाफ आवश्यक नोटिस दाखिल करने जा रहा हूं।

संसद में क्या बोले राहुल गांधी?

इससे पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया है और देश का विदेशी ताकतों के सामने 'समर्पण' कर दिया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करते समय भारत के हितों को शर्मनाक तरीके से गिरवी रख दिया। उन्होंने इसे 'नॉनसेंस' कदम बताते हुए कहा कि सरकार ने कृषि, आईटी, डेटा और लोगों के हितों से जुड़े कई मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकाव दिखाया है।

संसद के बाहर क्या बोले राहुल गांधी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने संबोधन के बाद मीडिया से बात की, जहां उन्होंने कहा कि मेरे पास डाटा है और मैंने कहा कि मैं प्रमाणित कर दूंगा, एप्सटीन में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस फाइल्स है जिसमें हरदीप पुरी का नाम है, अनिल अंबानी का नाम है, अडानी का केस चल रहा है, प्रधानमंत्री पर सीधे दबाव है यह सब जानते हैं। बिना दबाव के कोई प्रधानमंत्री यह नहीं कर सकता। जो हुआ है, जो किसानों के साथ, डाटा के साथ, रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा के साथ हुआ है कोई प्रधानमंत्री सामान्य परिस्थिति में नहीं कर सकता। वह तभी करेगा जब किसी ने जकड़ रखा हो।

कांग्रेस सांसदों ने चेंबर में घुसकर स्पीकर को गालियां दीं”, रिजिजू का बड़ा आरोप

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई सांसद स्पीकर के कक्ष में गए और उनके साथ गाली गलौज की।

20-25 कांग्रेस सांसद स्पीकर के चैंबर में घुसे-रिजिजु

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने आज यानी बुधवार को कांग्रेस सांसदों पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में घुसकर उन्हें गालियां देने का आरोप लगाया। किरेन रिजिजू ने कहा, ‘कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चैंबर में घुस गए और उन्हें गालियां दीं। मैं भी वहां था। स्पीकर बहुत नरम इंसान हैं, नहीं तो सख्त कार्रवाई होती। प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत सीनियर कांग्रेस लीडर भी अंदर मौजूद थे, और वे उन्हें लड़ने के लिए उकसा रहे थे।’

'घटना से स्पीकर बहुत दुखी'

रिजिजू ने कहा कि स्पीकर इस घटना से "बहुत दुखी" हैं और उन्होंने खुद उनसे बात की है। रिजिजू ने सदन में बोलने को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने एक फैसला दिया था, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। उनके मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें बोलने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है और वे अपनी इच्छा से बोलेंगे।

बिना अध्यक्ष की अनुमति कोई सदस्य नहीं बोल सकता-रिजिजु

रिजिजू ने कहा कि संसद में नियम बहुत साफ हैं, बिना अध्यक्ष की अनुमति कोई भी सदस्य नहीं बोल सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यहां तक कि प्रधानमंत्री भी तभी बोलते हैं जब अध्यक्ष अनुमति देते हैं। हर सदस्य को नियमों का पालन करना होता है। उन्होंने कहा कि स्पीकर का स्वभाव बहुत शांत है, वरना इस तरह की घटना पर सख्त कार्रवाई हो सकती थी।

लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने के लिए नोटिस

यह पूरा विवाद उस समय सामने आया है जब कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर चर्चा बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन यानी 9 मार्च को हो सकती है। बताया जा रहा है कि नोटिस में फरवरी 2025 की घटनाओं का चार बार उल्लेख किया गया है, जो नियमों के अनुसार तकनीकी आपत्ति का कारण बन सकता था। हालांकि, स्पीकर ने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिया है कि नोटिस में जो भी कमियां हैं, उन्हें ठीक कराया जाए और आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए।

“ट्रेड डील में भारत को बेच दिया गया”, लोकसभा में राहुल ने दिखाए आक्रामक तेवर

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संसद के बजट सत्र के दौरान हर दिन हंगामा देखने को मिल रहा है। मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। वहीं ओम बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला आने तक लोकसभा न आने का निर्णय लिया है। संसद में आज नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को भारत-यूएस ट्रेड डील घेरा।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को बताया एकतरफा

संसद में बजट सत्र में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा, दुनिया में वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं। आज दुनिया में अमेरिकी दबदबे को चुनौती दी जा रही है। डॉलर पुराने सिस्टम को चैलेंज किया जा रहा है। उन्होंने अपने भाषण में भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर डिटेल में बात की। उन्होंने कहा कि यह डील पूरी तरह से एकतरफा है।

डील में आपने भारत को बेच दिया-राहुल

राहुल गांधी ने कहा कि इस ट्रेड डील में भारत के सामानों पर लगने वाले तीन फीसदी के औसत टैरिफ को 18 फीसदी कर दिया गया है। वहीं अमेरिकी आयात पर टैरिफ जीरो कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों के साथ छल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस डील में आपने भारत को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बांग्लादेशी कपड़ों पर टैरिफ जीरो कर दिया है।

हम एक खतरनाक दुनिया की तरफ बढ़ रहे-राहुल

राहुल गांधी ने कहा है कि बजट में यह माना गया है कि ऊर्जा और वित्त को हथियार बनाया जा रहा है लेकिन बजट में ऐसा कुछ नहीं है जो इस पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि हमें अपने लोगों, डेटा, खाने की सप्लाई और ऊर्जा सिस्टम की सुरक्षा करनी है। राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कहा कि हम एक खतरनाक दुनिया की तरफ बढ़ रहे हैं, हमें अपनी ताकत को समझना होगा। हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत हमारे लोग हैं।

राहुल गांधी ने किया एआई के खतरों का जिक्र

राहुल गांधी ने अपने भाषण में एआई के खतरों के चर्चा की है। उन्होंने कहा कि आज भारतीयों के पास सबसे ज्यादा डेटा है। अमेरिका को भारत का सिर्फ डेटा चाहिए। उसे अपने डॉलर के बचाने के लिए डेटा चाहिए। एआई के कारण हमारे सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की नौकरी खतरे में है। एआई से एक खतरनाक दुनिया दिख रही है। लेकिन, सरकार ने बजट में इन समस्याओं के समाधान का प्रावधान नहीं दिख रहा है। खाद्य सुरक्षा बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है।

जन गण मन से पहले बजेगा वंदे मातरम्, 3 मिनट 10 सेकेंड के राष्ट्रगीत के दौरान खड़े होना जरूरी

#newguidelinesforvandematarammandatestanding_up

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया है। इसके तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरों वाला 3 मिनट 10 सेकंड का पूरा संस्करण कई आधिकारिक अवसरों पर बजाया या गाया जाना अब अनिवार्य होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि यदि राष्ट्रगान और जन गण मन को एक साथ गाया जाता है या बजाया जाता है तो वंदे मातरम पहले बजाया जाएगा। साथ ही इस दौरान श्रोताओं को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

राष्ट्रगान से पहले बजेगा राष्ट्रगीत

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, अब तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में समेत सरकारी कार्यक्रमों, सरकारी स्कूलों के आयोजनों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को एक साथ गाया या बजाया जाता है, तो वंदे मातरम पहले बजेगा, और इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। ताकि सम्मान और राष्ट्रीय भावना का स्पष्ट संदेश मिले।

वंदे मातरम का पूरा छह पैराग्राफ बजाना अनिवार्य

28 जनवरी को गृह मंत्रालय के द्वारा जारी किए गए 10 पन्नों के आदेश यह अनिवार्य किया गया है कि तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में आगमन, राष्ट्र के नाम उनके भाषणों और संबोधनों से पहले और बाद में, साथ ही राज्यपाल के भाषणों से पहले और बाद में समेत कई आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम का छह छंदों वाला 3 मिनट और 10 सेकंड का संस्करण बजाया या गाया जाए।

सिनेमा हॉल में लागू नहीं होंगे नए नियम

गृह मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक निकायों को जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रगान का आधिकारिक संस्करण गाया या बजाया जाता है तो श्रोताओं को सावधान मुद्रा में खड़ा होना चाहिए। हालांकि जब किसी समाचार या वीडियो के दौरान राष्ट्रगान फिल्म के रूप में बजाया जाता है तो श्रोताओं से खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जाती है। क्योंकि खड़े होने से फिल्म का प्रदर्शन बाधित होगा और राष्ट्रगान की गरिमा बढ़ाने के बजाय अव्यवस्था और भ्रम की स्थित उत्पन्न होगी।

बंकिम चंद्र चटर्जी की रचना है राष्ट्रगीत वंदे मातरम

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया।

सांसद पप्पू यादव को पटना कोर्ट से जमानत, 31 साल पुराने मामले में हुई थी गिरफ्तारी

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पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को गर्दनीबाग मामले में कोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायालय में जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें राहत दे दी गई। पप्पू यादव को 31 साल पुराने जमीन विवाद में शुक्रवार देर रात गिरफ्तार किया गया था और वे पटना की बेऊर जेल में बंद थे।

तीन दशक पुराने केस में हुई थी गिरफ्तारी

दरअसल, करीब तीन दशक पुराने एक मामले में गिरफ्तारी के बाद से सांसद पप्पू यादव पटना के बेऊर जेल में कैद थे। धोखाधड़ी से मकान किराए पर लेने और कब्जा करने के मामले में मकान मालिक ने गर्दनीबाग थाने में केस किया था। इसी मामले में तीन दिन पहले (शुक्रवार की देर रात) गिरफ्तारी हुई थी।

सोमवार को ही होनी थी सुनवाई

पप्पू यादव की जमानत याचिका पर कोर्ट में सोमवार को ही सुनवाई होनी थी। लेकिन अचानक पटना सिविल कोर्ट में बम रखने जाने की सूचना ईमेल से आई, जिसके बाद वहां अफरातफरी का माहौल हो गया। पटना पुलिस इसकी जांच-पड़ताल में जुट गई। कोर्ट परिसार को खाली करवा कर चेकिंग की गई थी। इससे न्यायिक कामकाज भी बाधित हुए। जिसके चलते पप्पू यादव की याचिका पर भी सुनवाई नहीं हो पाई। जेल से बाहर आने के लिए सांसद पप्पू यादव का इंतजार बढ़ गया था। मगर, आज का उन्हें राहत मिल गई।

क्या है मामला?

ये मामला साल 1995 का है, जो पटना के गर्दनीबाग थाने में दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया था कि पप्पू यादव और उनके सहयोगियों ने उनका मकान व्यक्तिगत उपयोग के नाम पर किराए पर लिया था, लेकिन बाद में उसका इस्तेमाल धोखे से सांसद के कार्यालय के रूप में किया जाने लगा। इस मामले में धारा 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) समेत अन्य गंभीर धाराएं लगी थीं।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी कांग्रेस, 125 सांसदों ने किए हस्ताक्षर

संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी को बोलने न देने के मुद्दे पर हंगामा जारी है। इस बीच कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव पर अब तक इंडिया गठबंधन के 125 सांसदों ने अपने सिग्नेचर किए हैं।

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ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने की तैयारी को लेकर विपक्ष का सबसे बड़ा दावा है कि संसद की बहसों के दौरान विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा है। साथ ही, विपक्षी सांसदों के निलंबन और सत्ता पक्ष के सांसदों के खिलाफ कार्रवाई न होने को लेकर भी नाराजगी है। इसी सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दफ्तर में हुई बैठक में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला लिया गया।

कांग्रेस, सपा और डीएमके सांसदों ने किए हस्ताक्षर

सामाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। जानकारी है कि विपक्षी नेता आज संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपेंगे।

अविश्वास प्रस्ताव पर टीएमसी नहीं साथ

इस बीच यह भी साफ हो गया है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) फिलहाल लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है। सूत्रों के अनुसार, टीएमसी इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच और चर्चा चाहती है और वह अविश्वास प्रस्ताव पर साइन नहीं करेगी। ऐसे में विपक्ष की एकजुटता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 94?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत लोकसभा अध्यक्ष को उनके पद से हटाया जा सकता है। इसके लिए किसी भी लोकसभा सदस्य को महासचिव को एक लिखित नोटिस देना होता है। इस नोटिस में स्पीकर को पद से हटाने के इरादे का स्पष्ट जिक्र होना चाहिए। लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने से पहले कम से कम 14 दिनों का पूर्व नोटिस देना जरूरी होता है। यह समय इसलिए दिया जाता है ताकि सदन और स्पीकर इस पर चर्चा के लिए तैयार हो सकें।

क्या है अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया?

विपक्ष के नोटिस के 14 दिन पूरे होने पर लोकसभास्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखा जाता है। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते लेकिन वे सदन में मौजूद रह सकते हैं और बोल सकते हैं। वहीं, यदि सदन के उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत इसके पक्ष में वोट करता है, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ता है।