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77वें गणतंत्र दिवस पर पीएम मोदी ने पहनी मरून पगड़ी, जानिए क्या है संदेश

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गणतंत्र दिवस के मौके पर रंगीन पगड़ी पहनने का अपना ट्रेडिशन इस साल भी जारी रखा। इस बार भी प्रधानमंत्री मोदी की खास पगड़ी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पीएम मोदी का ये पहनावा सांस्कृतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय समर स्मारक पर जाकर देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी की वेशभूषा की बात करें तो उन्होंने गहरे नीले रंग का कुर्ता पहना। उन्होंने इस पर आसमानी रंग की जैकेट पहनी। सफेद चूड़ीदार पायजामे के साथ पारंपरिक काले जूतों ने पीएम मोदी के लुक को पूरा किया।

पगड़ी पर सुनहरे रंग की कढ़ाई

प्रधानमंत्री ने आज के खास मौके पर मरून रंग की पगड़ी पहनी। इस पगड़ी पर सुनहरे रंग की कढ़ाई की गई है। पगड़ी के पिछले हिस्से में हरे रंग पर सुनहरे रंग की शानदार कढ़ाई देखने को मिली। साफे के आखिरी हिस्से में हरे रंग के नीचे पीले रंग का मिश्रण देखने को मिला।

पहली भी पीएम की पगड़ी ने खींचा है लोगों का ध्यान

इससे पहले के गणतंत्र दिवस समारोहों में भी प्रधानमंत्री मोदी की पगड़ी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती रही है। बता दें कि 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में पीएम मोदी ने चमकीले लाल और पीले रंग का बंधेज साफा पहना था, जो राजस्थानी और गुजराती संस्कृति से जुड़ा एक पारंपरिक टाई-डाई कपड़ा है, जिसे उन्होंने सफेद कुर्ते-पायजामे और भूरे रंग की बंदगला जैकेट के साथ पहना था।

हर बार चर्चा में रहती है पीएम मोदी की पगड़ी

हर साल पीएम मोदी का गणतंत्र दिवस का पहनावा चर्चा का विषय बन जाता है। उनकी पगड़ी हमेशा ही लोगों का सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है। बीते कुछ वर्षों में पीएम मोदी ने राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड और अन्य राज्यों की पगड़ियां और टोपियां पहनी हैं। इन सभी का अपना सांस्कृतिक महत्व रहा है।

प्रधानमंत्री ने गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंचने के पर मरून रंग की पगड़ी पहनी। इस पगड़ी पर सुनहरे रंग की कढ़ाई की गई है। पगड़ी के पिछले हिस्से में हरे रंग पर सुनहरे रंग की शानदार कढ़ाई देखने को मिली। साफे के आखिरी हिस्से में हरे रंग के नीचे पीले रंग का मिश्रण देखने को मिला।

भारत-चीन अच्छे पड़ोसी और साझेदार” शी जिनपिंग ने गणतंत्र दिवस पर भारत को दी बधाई

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भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर दुनिया के देश बधाई दे रहे हैं। इस मौके पर अमेरिका और चीन ने भारत को बधाई देकर खास संदेश दिया है।अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को शुभकामनाएँ देते हुए अमेरिका-भारत संबंधों की सराहना की। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को ‘अच्छा पड़ोसी, दोस्त और साझेदार’ बताया।

चीन ने कहा- दोनों देशों के रिश्ते सुधारे

चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत और चीन ‘अच्छे पड़ोसी, अच्छे दोस्त और अच्छे साझेदार’ हैं। उन्होंने कहा कि बीते एक साल में दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आया है और यह पूरी दुनिया में शांति और समृद्धि के लिए जरूरी है।

ड्रैगन और हाथी साथ-साथ-जिनपिंग

शी जिनपिंग ने कहा कि चीन की हमेशा से यही सोच रही है कि भारत और चीन का अच्छे पड़ोसी, दोस्त और साझेदार बनकर साथ चलना ही दोनों देशों के हित में है। उन्होंने आसान शब्दों में समझाते हुए कहा कि भारत और चीन का रिश्ता ऐसा होना चाहिए जैसे ड्रैगन और हाथी साथ-साथ नाच रहे हों यानी दोनों मिलकर आगे बढ़ें।

आगे भी आपसी बातचीत बढ़ाने की उम्मीद

चीन के राष्ट्रपति ने यह भी उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों देश आपसी बातचीत बढ़ाएंगे, एक-दूसरे से ज्यादा जुड़ेंगे और मिलकर काम करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश एक-दूसरे की चिंताओं को समझकर उनका समाधान करें, तो भारत-चीन रिश्ते और ज्यादा मजबूत, संतुलित और स्थिर बन सकते हैं।

अमेरिका ने क्या कहा?

वहीं, अमेरिका की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ठोस नतीजे दे रहे हैं। रुबियो ने कहा, ‘अमेरिका के लोगों की ओर से मैं भारत के लोगों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई देता हूं। अमेरिका और भारत का रिश्ता ऐतिहासिक है। रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और नई तकनीक में हमारा सहयोग, और क्वाड के जरिए हमारी साझेदारी, दोनों देशों और पूरे क्षेत्र के लिए मजबूत आधार बन रही है।’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका आने वाले साल में भारत के साथ मिलकर साझा लक्ष्यों पर काम करने को उत्सुक है।

इमैनुअल मैक्रों ने भी दी भारत को बधाई

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी भारत को बधाई दी और 2024 के गणतंत्र दिवस को याद किया, जब वे मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता को शुभकामनाएँ देते हुए भविष्य में सहयोग जारी रखने की बात कही।

राष्ट्रपति मुर्मू ने फहराया तिरंगा, कर्तव्‍य पथ पर ऑपरेशन सिंदूर की झलक

#republicdaycelebration_parade

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भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने तिरंगा फहराया। इस दौरान गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर और सैंटोस कोस्टा भी मौजूद रहे।

शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक्र चक्र

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया है। शुभांशु भारत के सबसे सम्मानित शांति काल का वीरता पुरस्कार पाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं।

सेना के हेलिकॉप्टरों ने बनाई शानदार फॉर्मेशन

दिल्ली में कर्तव्य पथ पर 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार Mi-17 1V हेलीकॉप्टरों द्वारा ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गई। हेलीकॉप्टरों के इस फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत किया।

सेना ने किया भीष्म टैंक का प्रदर्शन

गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने टी-90 टैंक का प्रदर्शन किया। इसे भारतीय सेना ने 'भीष्म' नाम दिया है। रूस में निर्मित तीसरी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक है। यह टैंक 2001 से भारतीय सेना का हिस्सा है और इसे राजस्थान, पंजाब में पाकिस्तान सीमा और लेह में चीन सीमा पर तैनात किया गया है। 2005 में इनकी बड़ी खेप भारत आई। शुरुआत में यह पूरी तरह रूसी तकनीक से बना था, लेकिन अब इसके कई पुर्जे भारत में ही बनाए जाते हैं। तमिलनाडु के अवाडी में इन टैंकों को तैयार किया जाता है।

ब्रह्मोस मिसाइल टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर किया मार्च

दिव्यास्त्र और अग्निबाण टुकड़ी ने परेड की। साथ ही रॉकेट टुकड़ी सूर्यास्त्र और ब्रह्मोस मिसाइल की टुकड़ी ने भी कर्तव्य पथ पर परेड की और हर भारतीय के सीने को गर्व से भर दिया। आकाश मिसाइल और ड्रोन शक्ति ईगल प्रहार ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना के पशु दस्ते ने मार्च किया, जिसका नेतृत्व कैप्टन हर्षिता यादव ने किया।

अरुणाचल स्काउट और राजपूत रेजीमेंट का मार्च

ऊंचे और पहाड़ी इलाकों पर युद्ध में विशेषज्ञा रखने वाले अरुणाचल स्काउट ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इसके बाद सेना की राजपूत रेजीमेंट ने मार्च किया। यह सेना की सबसे पुरानी रेजीमेंट में से एक है। इसके बाद असम रेजीमेंट के जवानों ने मार्च किया। सेना की जम्मू कश्मीर लाइट इंफेंट्री के दस्ते ने मार्च किया। साथ ही कंबाइंड मिलिट्री बैंड ने मार्च किया, जिसका नेतृत्व सूबेदार एए खान ने किया। सिख लाइट इंफेंट्री के मार्चिंग दस्ते ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इंडियन नेवी बैंड ने सामंजस्य और भव्यता को दिखाते हुए जय भारती की धुन बजाई।

*18 सालों तक 26 जनवरी को मनाया गया गणतंत्र दिवस, जानिए इस दिन का ऐतिहासिक महात्व

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आज पूरा देश बड़े ही धूमधान से 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। हम भारतीय 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते है। इसी दिन हमें हमारा संविधान मिला था। देश की आजादी के करीब ढाई साल के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था।

18 वर्ष तक 26 जनवरी को मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

दरअसल आजादी से पहले 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था। करीब 18 वर्ष तक 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस (स्वतंत्रता दिवस) मनाया जाता रहा। दिसंबर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर में अधिवेशन हुआ था। इस अधिवेशन की अध्यक्षता देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने की थी। अधिवेशन में पंडित नेहरु ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव में कहा गया था कि यदि अंग्रेजी हुकूमत 26 जनवरी 1930 तक भारत को उसका प्रभुत्व (डोमिनियन का पद) नहीं देती है तो भारत खुद को स्वतंत्र घोषित कर देगा। इसलिए कांग्रेस ने 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस (स्वतंत्रता दिवस) घोषित किया।

1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया

26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इसी दिन जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगा फहराया था। फिर देश को आजादी मिलने के बाद 15 अगस्त 1947 को अधिकारिक रूप से स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया। 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव लागू होने की तिथि को महत्व देने के लिए ही 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया था। इसके बाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।

26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्रता दिवस ?

बता दें कि 15 अगस्त 1947 को भारत के आजाद होने के बाद संविधान सभा का गठन किया गया। फिर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने तकरीबन दो साल, 11 महीने और 18 दिन में दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान तैयार किया। सन 1948 के शुरूआत में ही डॉ अंबेडकर ने संविधान सभा में पहली बार संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत की थी। लेकिन इनमें कुछ संशोधनों के बाद नवंबर 1949 में इसे स्वीकार कर लिया गया और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर दिया गया। इसके बाद हर साल 26 जनवरी को हम गणतंत्र का जश्न मनाते हैं।

बता दें कि संविधान के लागू होने के बाद इसके निर्माताओं को ये विचार आया कि इस दिन को ऐसे अवसर पर मनाया जाना चाहिए जिसका संबंद्ध राष्ट्रीय गौरव से हो। इसके बाद ये फैसला लिया गया कि गणतंत्रता दिवस ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ यानी 26 जनवरी को ही मनाया जाएगा।

'मैं पार्टी लाइन से कभी अलग नहीं हुआ', ऑपरेशन सिंदूर पर थरूर का बड़ा बयान

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तिरुवनंतपुरम के सांसद और कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर ने पार्टी के साथ चल रही तनातनी के बीच बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी के रुख का उल्लंघन नहीं किया है। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि सिद्धांतों के मामले में उनका एकमात्र मतभेद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर था।

थरूर केरल लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित एक सत्र के दौरान सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने सख्त रुख अपनाया था और वह इस अब भी बिना किसी पछतावे के इस रुख पर कायम हैं।

थरूर बोले- अपने रुख पर कोई पछतावा नहीं

शशि थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी लाइन का उल्लंघन नहीं किया है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख हमेशा देशहित को प्राथमिकता देने वाला रहा है। थरूर ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रूप से उन्होंने केवल ‘ऑपरेशन सिंधूर’ के मुद्दे पर सैद्धांतिक असहमति जताई थी और उस रुख को लेकर उन्‍हें कोई पछतावा नहीं है।

ऑब्जर्वर और राइटर के तौर पर घटना का जिक्र

अपनी बात समझाते हुए थरूर ने कहा कि एक ऑब्जर्वर और राइटर के तौर पर उन्होंने पहलगाम घटना के बाद एक अखबार में कॉलम लिखा था, जिसमें कहा था कि इसे बिना सजा दिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए और इसका करारा जवाब दिया जाना चाहिए।

भारत सरकार ने वही किया जो उन्होंने सुझाव दिया-थरूर

कांग्रेस सांसद ने कहा कि जब भारत विकास करने पर फोकस कर रहा है तो उसे पाकिस्तान के साथ लंबे समय तक चलने वाले झगड़े में नहीं घसीटा जाना चाहिए और कोई भी कार्रवाई सिर्फ आतंकवादी कैंपों को टारगेट करने तक ही सीमित होनी चाहिए। थरूर ने कहा कि उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि भारत सरकार ने ठीक वही किया जो उन्होंने सुझाव दिया था।

पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद की अटकलें

थरूर का ये बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व के साथ उनके कथित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कोच्चि में हाल ही में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मंच पर मौजूद नेताओं के नाम लेने के क्रम में थरूर का नाम न लिए जाने से वे आहत हुए थे। इसके अलावा राज्य स्तर पर कुछ नेताओं द्वारा उन्हें लगातार हाशिए पर रखने की कोशिशों की बातें भी सामने आई हैं।

कलह और तेज हो सकती है

कांग्रेस सांसद ने ऑपरेशन सिंदूर पर ऐसी बात कही है, जिससे पार्टी लीडरशिप खासकर राहुल गांधी के लिए इसे पचा पाना मुश्किल होगा। ऑपरेशन सिंदूर पर शशि थरूर के रुख से पार्टी में कलह की धार और तेज हो सकती है। बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राहुल गांधी काफी क्रिटिकल रहे हैं।

फायरिंग केस में एक्टर कमाल राशिद खान गिरफ्तार, जानें क्या है पूरा मामला

#kamalrashidkhankrkfiringcasearrest

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एक्टर कमाल राशिद खान, जिन्हें केआरके के नाम से भी जाना जाता है, उन्हें मुंबई में दो राउंड फायरिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें शुक्रवार देर रात ओशिवारा पुलिस ने हिरासत में लिया था। वह इस मामले में मुख्य संदिग्ध हैं।

आज कोर्ट में होगी पेशी

कमाल आर खान उर्फ केआरके को बीते 18 जनवरी को मुंबई के ओशिवारा के अंधेरी स्थित एक रिहायशी बिल्डिंग पर चार राउंड फायरिंग करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। पुलिस की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और आज शनिवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।

कमाल आर खान की बिल्डिंग से चलीं गोलियां

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 18 जनवरी को हुई थी, इस दौरान अंधेरी के ओशिवारा में एक बिल्डिंग पर दो राउंड गोलियां चलाई गईं। नालंदा सोसाइटी से दो गोलियां बरामद की गईं। एक दूसरी मंजिल से और दूसरी चौथी मंजिल से। एक फ्लैट राइटर-डायरेक्टर का है और दूसरा मॉडल का। संजय चव्हाण के साथ ओशिवारा पुलिस स्टेशन के 18 पुलिसकर्मियों की एक टीम, कई क्राइम ब्रांच टीमों के साथ मिलकर मामले की जांच कर रही थी।

दो राउंड फायरिंग की बात कबूली

पुलिस के अनुसार, अपने बयान में केआरके ने लाइसेंसी बंदूक से दो राउंड फायर करने की बात कबूल की है। यह घटना 18 जनवरी को ओशिवारा स्थित नालंदा सोसाइटी में हुई थी। जांच के दौरान सोसाइटी परिसर से दो गोलियां बरामद हुईं, जिनमें एक दूसरी मंजिल से और दूसरी चौथी मंजिल से मिली। पुलिस ने बताया कि एक फ्लैट एक लेखक-निर्देशक का है, जबकि दूसरा एक मॉडल का है।

भारत ने दुनिया को चौंकाया: UN में ईरान का दिया साथ, पश्चिमी देशों को दिखाया आईना

#indiasupportsiranatnhrcrejectswestern_pressure

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यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट काउंसिल (UNHRC) में भारत की कूटनीति में बड़ा बदलाव देखा गया। UNHRC में भारत ने डंके की चोट पर ईरान का साथ दिया। भारत ने ईरान पर पश्चिमी देशों के प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाला। भारत के साथ साथ चीन और पाकिस्तान ने भी प्रस्ताव के खिलाफ 'NO' वोट किया है। हालांकि भारत, चीन और पाकिस्तान के समर्थन के बावजूद UNHRC में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया है।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई को लेकर अपनी जांच को और गहरा करने का फैसला किया है। इसमें बच्चों सहित हजारों लोगों के मारे जाने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव में ईरान से "क्रूर दमन" खत्म करने की मांग भी की गई है।

भारत के साथ चीन-पाकिस्तान ने भी NO में वोट किया

UNHRC में कुल 47 सदस्य देश हैं, जिन्होंने इस प्रस्ताव के जरिए ईरान में "सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के अभूतपूर्व पैमाने" पर चिंता जताई है। ईरान के खिलाफ लाए गये पश्चिमी देशों के प्रस्ताव के समर्थन में 25 वोट, विरोध में 7 वोट और 15 देशों ने वोटिंग से दूर रहने का फैसला किया है। भारत, चीन और पाकिस्तान ने विरोध में यानि NO में वोट किया है।

भारत आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ

पश्चिमी देश और नाटो सदस्य जैसे अमेरिका, फ्रांस और दक्षिण कोरिया ईरान के खिलाफ थे। वे सख्त कार्रवाई चाहते थे। लेकिन भारत ने डंके की चोट पर ईरान का साथ दिया। भारत ने साफ कर दिया कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ है। इससे भारत की विदेश नीति की ताकत दिखी, जो संतुलित और स्वतंत्र है। पश्चिमी देशों को लगा कि वे आसानी से ईरान को अलग-थलग कर लेंगे, लेकिन भारत के वोट ने उनके प्लान पर पानी फेर दिया। भारत की तरह ही चीन ने भी ईरान का साथ दिया है।

पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुकता भारत

भारत की यह नीति उसके रणनीतिक हितों से जुड़ी है, जिसमें ईरान से ऊर्जा आयात, चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना शामिल है। भारत हमेशा जोर देता है कि मानवाधिकार के मुद्दों पर राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचा जाना चाहिए। इस वोट से भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को दोहराया, जिसमें वह पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुकता और दोस्त देशों के साथ खड़ा रहता है। ईरान के साथ भारत के संबंध मजबूत हैं, और यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास को और मजबूत करता है।

शशि थरूर फिर कांग्रेस की अहम बैठक से रहे गायब, जानें क्‍या बताई वजह

#tharoorwasabsentfromcongresskeralameeting

केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक बार फिर शशि थरूर की नाराजगी की खबर सामने आई है। चुनावी तैयारियों को लेकर आज होने वाली कांग्रेस की अहम बैठक में थरूर शामिल नहीं हुए। आज राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दिल्ली में बैठक प्रस्तावित थी। लेकिन इसमें थरूर नहीं पहुंचे।

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शशि थरूर के ऑफिस की तरफ से इस बाबत बयान जारी किया गया है, जिसमें स्‍पष्‍ट तौर पर कहा गया है कि शशि थरूर आज यानी 23 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली केरल कांग्रेस की अहम चुनावी तैयारी बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उनके कार्यालय ने कहा, ‘वे केरल लिटरेचर फेस्टिवल के लिए कालीकट में हैं, जो एशिया का सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव है। वह अपनी नवीनतम पुस्तक पर बोल रहे हैं, जो श्री नारायण गुरु पर आधारित है। उन्होंने पार्टी को पहले ही सूचित कर दिया था कि वह बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे।’

क्या है थरूर की नाराजगी की वजह?

शशि थरूर और कांग्रेस पार्टी के बीच के मतभेद की खबरें लंबे समय से आ रही है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी एक बार फिर चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के हालिया कोच्चि दौरे के दौरान उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलने से थरूर नाराज हैं।

राहुल गांधी ने थरूर का नाम भी नहीं लिया

कुछ दिन पहले कोच्चि में कांग्रेस ने महापंचायत कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद थे। कार्यक्रम से पहले यह तय किया गया कि वरिष्ठता को देखते हुए शशि थरूर के भाषण के बाद सिर्फ राहुल गांधी का भाषण होगा। महापंचायत में वक्ताओं का क्रम भी तय था, इसके बावजूद शशि थरूर के भाषण के बाद अन्य वक्ताओं की लाइन लगा दी। राहुल गांधी भी अंत में बोले, मगर उन्होंने मंच पर मौजूद शशि थरूर का नाम भी नहीं लिया। यह राहुल गांधी की चूक थी या संकेत, इस घटनाक्रम ने शशि थरूर की नाराजगी को और बढ़ा दिया।

बैठक से दूर लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल

बताया जाता है कि महापंचायत में बैठने के क्रम में भी कांग्रेस सांसद की सीनियॉरिटी को दरकिनार किया गया था। शशि थरूर ने इसे अपमान बताते हुए केरल विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा के लिए पार्टी हाईकमान की बुलाई गई बैठक से दूर रहने फैसला किया है। वह इस दौरान कालीकट में हो रहे केरल लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल होंगे।

बता दें कि बीते कुछ महीनों में थरूर के कुछ बयान और सोशल मीडिया पोस्ट पार्टी नेतृत्व को असहज करने वाले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के कुछ कदमों की सराहना करते हुए उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया। इसकी शुरुआत पहलगाम हमले से हुई, जब थरूर ने इंटेलिजेंस चूक के आरोपों पर मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश जाने वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शशि थरूर के चयन पर कांग्रेस ने सवाल उठाए।

26 जनवरी से पहले स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, नोएडा और अहमदाबाद में ई-मेल से सनसनी

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गणतंत्र दिवस से पूर्व अहमदाबाद और नोएडा में एक बार फिर स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। दोनों शहरों के प्रतिष्ठित स्कूलों को ई-मेल के जरिए धमकी भरे संदेश भेजे गए हैं, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूटना के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया। अलग-अलग थानों की पुलिस फोर्स के साथ बॉम्ब स्क्वाड, बीडीडीएस, डॉग स्क्वाड और फायर ब्रिगेड की टीमें तुरंत संबंधित स्कूल परिसरों में पहुँचीं और सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया।

धमकी के बाद पुलिस जांच में जुटी

नोएडा के सेक्टर-168 स्थित शिव नादर स्कूल से जुड़ा है, जहाँ ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई। सुरक्षा को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने एहतियातन बच्चों को सुरक्षित तरीके से उनके घर भेज दिया। पूरे परिसर को खाली कराकर हर कोने की बारीकी से जाँच की जा रही है।वहीं धमकी भरे ई-मेल की तकनीकी जाँच के लिए साइबर सेल को सक्रिय कर दिया गया है, जो मेल के स्रोत और भेजने वाले की पहचान में जुटी है।

गुजरात में भी कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी

वहीं दूसरी तरफ गुजरात में अहमदाबाद के पश्चिमी इलाके के कई स्कूलों को ईमेल से बम की धमकी मिली है। अहमदाबाद में सेंट जेवियर्स स्कूल और संत कबीर स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की सूचना सामने आई है। यह धमकी भी ई-मेल के माध्यम से दी गई। धमकी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच की बम स्क्वॉड और फोरेंसिक डिपार्टमेंट की टीम जांच कर रही है।

कविता राजपूत को भारत- श्रीलंका हिन्दी गौरव सम्मान
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कोलंबो। विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित भारत श्रीलंका हिन्दी सम्मेलन में वरिष्ठ कवियत्री कविता राजपूत को हिन्दी गौरव सम्मान प्रदान किया गया।भारतीय उच्चायोग स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, श्रीलंका फाउंडेशन के द्वारा कोलंबो में आयोजित द्वितीय सम्मेलन में महामहिम उच्चायुक्त संतोष झा ने कहा कि हिन्दी आज वैश्विक संचार की भाषा बन रही है जो संस्कृतियों को जोड़ने का कार्य कर रही है।उन्होने विश्व भर में हिन्दी का प्रचार कर रही पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी के प्रयासों की सराहना की तथा समारोह में श्रीलंका के शिक्षा मंत्री मधुर सिंहरत्न ने भारत श्रीलंका के राजनयिक 75 वर्षों के सम्बन्धों के दौर को ऐतिहासिक बताया। कविता राजपूत ने अपने भाव व अभिव्यक्ति को सभी के समक्ष रखा जहां वे सराही गई। समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के व्हिडिओ को सुनाया गया जिसमें उन्होंने कहा कि जहां- जहां भारत वंशी हैं वहां हिंदी फैलनी चाहिए।स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रोफेसर अंकुरण दत्ता ने कहा कि भारत के कोने कोने से आए साहित्यकार भारत के सांस्कृतिक राजदूत हैं।केलानिया विश्वविध्यालय की छात्राओं ने सिंघली एवं हिन्दी भाषा में ‘चौधवी का चाँद’ गीत सुनाकर भाषा प्रेमियों को एक सूत्र में बांध दिया।समारोह के सह आयोजक डॉ अकेला ने आभार व्यक्त किया। कविता राजपूत को उक्त सम्मान मिलने पर मुंबई, ठाणे,नवी मुंबई की साहित्यिक संस्थाओं ने शुभकामनाएं एवं बधाइयां दी हैं।