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लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हुआ वक्फ संशोधन बिल, 13 घंटे चले मंथन के बाद पक्ष में पड़े 128 वोट

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लोकसभा के बाद वक्फ संशोधन विधेयक राज्यसभा से पास हो गया है। बिल के पक्ष में 128 तो विपक्ष में 95 वोट पड़े।वक्फ संशोधन विधेयक पर 13 घंटे से भी अधिक समय तक चली चर्चा के बाद बृहस्पतिवार देर रात ढाई बजे के बाद राज्यसभा ने भी अपनी मुहर लगा दी। राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर फैसला ध्वनि मत से नहीं, बल्कि मत-विभाजन से किया गया। इससे पहले, लोकसभा ने बुधवार रात करीब 1.56 बजे वक्फ संशोधन विधेयक बहुमत से पारित कर दिया था। विधेयक के पक्ष में 288, जबकि विरोध में 232 मत पड़े। विधेयक पर लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई थी। विधेयक अब हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति के पास जाएगा और सरकार की ओर से अधिसूचित होते ही कानून का रूप ले लेगा।

राज्यसभा में 13 घंटे से ज्यादा समय तक चली बहस के बाद वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 को मंजूरी मिल गई। विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद नंबर गेम में मोदी सरकार जीत गई। राज्यसभा में कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने वक्फ बिल पर कड़ा विरोध जताया। विपक्षी दलों ने इस विधेयक को मुस्लिम विरोधी और असंवैधानिक बताया। वहीं सरकार ने जवाब दिया कि यह ऐतिहासिक सुधार अल्पसंख्यक समुदाय के लिए फायदेमंद होगा।

राज्यसभा में वक्फ बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर मुस्लिम समुदाय को विधेयक से डराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ सभी के लिए काम करती है। रिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड एक वैधानिक निकाय है। ऐसे में सभी सरकारी निकायों की तरह यह धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में कुछ गैर-मुस्लिमों को शामिल करने से बोर्ड के फैसलों में कोई बदलाव नहीं आएगा। बल्कि इससे मूल्य में इजाफा ही होगा।

आपको वक्फ में कलेक्टर को रखने पर आपत्ति थी, तो...

किरेन रिजिजू ने विपक्ष के उठाए मुद्दों का सिलसिलेवार जवाब दिया। उन्होंने विपक्ष के इस दावे को गलत बताया कि राष्ट्रीय वक्फ काउंसिल में गैर मुस्लिमों का बहुमत होगा। रिजिजू ने कहा, 20 सदस्यीय बॉडी में पदेन अध्यक्ष समेत चार से अधिक गैर मुस्लिम सदस्य हो ही नहीं सकते। इसी प्रकार 11 सदस्यीय राज्य बॉडी में 3 से अधिक गैर मुस्लिम नहीं होंगे।साथ ही उन्होंने कहा कि जेपीसी में विपक्ष की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए इसे पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि हर जिले में जो भी जमीनी विवाद होता है, उसे कलेक्टर देखता है। आपको वक्फ में कलेक्टर को रखने पर आपत्ति थी, इसलिए हमने उससे ऊपर के अफसर को रखा है।

सभी के सुझाव को ध्यान में रखा गया- रिजिजू

केंद्रीय मंत्री ने कहा, अधिकांश सदस्यों ने आरोप लगाया कि जेपीसी या सरकार ने कानून पर उनके सुझाव नहीं माने। सरकार किसी की नहीं सुनती। यह आरोप पूरी तरह गलत है। हम सुझाव नहीं मानते तो इस विधेयक का जो मूल मसौदा आया था और जो विधेयक आज पेश हुआ है उसमें इतना बदलाव नहीं होता। विधायक में बड़े पैमाने पर बदलाव है और यह सदस्यों के सुझाव के सुझाव पर ही हुआ है। रिजिजू ने कहा, पहले से रजिस्टर संपत्तियों में छेड़छाड़ नहीं हो सकती यह संशोधन जेपीसी में विपक्ष के सुझाव पर ही शामिल किया गया। इसी प्रकार गैर रजिस्टर्ड वक्फ ट्रस्टों के लिए छह महीने की समय सीमा को भी विपक्ष के सुझाव पर बढ़ाया गया। इसके अलावा भी कई संशोधन विपक्ष के सुझाव पर लिए गए।

वक्फ बिल पर बीजेडी का यू-टर्न, अंतर्आत्मा की आवाज सुनने की अपील, राज्यसभा से बिल पास कराना हुआ आसान

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बीजू जनता दल ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पर अपना रुख बदल दिया है। लोकसभा में बिल के पेश किए जाने के बाद बीजेडी ने इसके खिलाफ स्टैंड लिया था। लेकिन बावजूद इसके बिल लोकसभा से पारित हो गया। अब संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में बिल पर बहस हो रही है। अब बीजेडी ने भी अपना स्टैंड बदल लिया है और पार्टी के सांसदों को अंतर्आत्मा की आवाज सुनने को कहा है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वोटिंग के लिए कोई व्हिप जारी नहीं किया जाएगा।

राज्यसभा सांसद और बीजेडी के प्रवक्ता डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा, "हम वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के संबंध में अल्पसंख्यक समुदायों के विभिन्न वर्गों द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं का सम्मान करते हैं। हमारी पार्टी ने राज्य सभा में अपने सदस्यों को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि यदि विधेयक मतदान के लिए आता है तो वे न्याय, सद्भाव और सभी समुदायों के अधिकारों के सर्वोत्तम हित में अपने विवेक का प्रयोग करेंगे। कोई पार्टी व्हिप जारी नहीं की गई है।"

इससे पहले पात्रा ने बुधवार को कहा था कि राज्यसभा सदस्य मुजीबुल्ला खान मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगे और विधेयक के संबंध में पार्टी की चिंताओं को सदन में रखेंगे। पात्रा ने कहा कि पार्टी विधेयक से संतुष्ट नहीं है। केंद्र ने संयुक्त संसदीय समिति की समीक्षा के बाद कुछ बिंदुओं में संशोधन किया है।

गौरतलब है कि बीजद ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा से पहले इसका विरोध की बात कही थी। हालांकि, अब फैसला बदलने से राज्यसभा में विपक्ष की स्थिति और कमजोर हुई है। दरअसल, राज्यसभा में बीजद के 7 सांसद हैं। पहले इनकी गिनती विपक्ष में होती थी। हालांकि, अब इन सांसदों का रुख तय नहीं है। ऐसे में वक्फ विधेयक पर विपक्ष की ताकत और कमजोर होना तय है।

राज्यसभा में क्या है समर्थन का गणित?

वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में एनडीए के बहुमत की वजह से पास हो गया। हालांकि, इसे चुनौती राज्यसभा में मिलने की संभावना है। राज्यसभा में कुल सांसद 245 हो सकते हैं। हालांकि, मौजूदा समय में सदन में 236 सांसद हैं। वहीं, 9 सीटें खाली हैं। राज्यसभा में कुल 12 सांसद नामित हो सकते हैं, लेकिन इनकी संख्या फिलहाल 6 है। इस लिहाज से राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

एनडीए के पास कितना संख्या बल?

राज्यसभा में भी आंकड़ों के लिहाज से एनडीए के पास पूर्ण बहुमत है। दरअसल, राज्यसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और उसके पास कुल 98 सांसद हैं। इसके अलावा लोकसभा की तरह ही जदयू, तेदेपा, राकांपा व अन्य दलों की तरफ से एनडीए को समर्थन मिला हुआ है। 

राज्यसभा में जो अन्य दल एनडीए के साथ हैं, उनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) का एक सांसद, पत्तली मक्कल काची, तमिल मनिला कांग्रेस (टीएमसी-एम), नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के एक-एक सांसद, रामदास आठवले की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-ए) का एक सांसद और दो निर्दलीय सांसद हैं। 

राज्यसभा में विपक्ष के आंकड़े

दूसरी तरफ राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक के विपक्ष में भी कई पार्टियां जुटी हैं। हालांकि, यह समर्थन विधेयक को रोकने के लिए नाकाफी साबित हो सकता है। राज्यसभा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। विपक्ष से इसके राज्यसभा में सबसे ज्यादा 27 सांसद हैं। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप) और द्रमुक अगली बड़ी पार्टी हैं। 

जो अन्य दल वक्फ संशोधन विधेयक में विपक्ष के साथ हैं उनमें जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी, एआईएडीएमके भी विपक्ष के साथ हैं।

लोकसभा से पास हुआ वक्फ बिल

बता दें कि बुधवार को करीब 12 घंटे की चर्चा के बाद वक्फ बिल लोकसभा से पास हुआ था। बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट डाले गए थे। गुरुवार को इसे राज्यसभा में पेश किया गया। वक्फ बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर टकराव हुआ है। विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताया है। दूसरी ओर सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष गलत बातें फैला रहा है। टीएमसी सांसद मोहम्मद नदीमुल इस्लाम ने विधेयक को “सांस्कृतिक बर्बरता” कहा और वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।

क्या है बिम्सटेक, जिसके समिट में शामिल होने बैंकॉक पहुंचे पीएम मोदी, भारत के लिए क्यों जरूरी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक पहुंचे। पीएम मोदी बंगाल इनिशिएटिव फॉर सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन यानि बिम्सटेक के शिखर सम्मेलन में शामिल होंने बैंकॉक पहुंचे हैं।कल यह सम्मेलन होना है।वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले से ही बैंकॉक में हैं। उन्होंने आज 20वीं बिम्सटेक मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया। ऐसे में सवाल उठता है कि बिम्सटेक क्या है और यह भारत के लिए क्यों इतना जरूरी है कि पीएम मोदी और एस जयशंकर इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए बैंकॉक पहुंचे हैं।

बिम्सटेक क्या है?

बिम्सटेक यानी बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल है। यह एक क्षेत्रीय संगठन है जिसमें बंगाल की खाड़ी के आसपास स्थित सात सदस्य देश शामिल हैं। इस उप-क्षेत्रीय संगठन की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से की गई थी। सात सदस्य देशों में दक्षिण एशिया के पांच देश- बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका- और दक्षिण-पूर्व एशिया के दो देश- म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। मूल रूप से, इस ब्लॉक की शुरुआत चार सदस्य देशों के साथ हुई थी, जिसका नाम 'BIST-EC' (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड आर्थिक सहयोग) था।

क्या है संगठन का मुख्य उद्देश्य?

संगठन का मुख्य उद्देश्य बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों की आर्थिक तरक्की, आपसी सहयोग, क्षेत्रीय चुनौतियों से मिलकर निपटने की नीति, आपसी हितों पर विचार-विमर्श करना आदि था। सहयोग और समानता की भावना पैदा करने के साथ ही शिक्षा, विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में एक-दूसरे की खुलकर मदद करना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है। समान संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, शांतिपूर्ण श-अस्तित्व, पारस्परिक लाभ, सदस्य देशों के बीच अन्य द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दे भी इस महत्वपूर्ण संगठन के प्रमुख सिद्धांतों में शामिल किये गए हैं।

दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बिम्सटेक?

दुनिया के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो दुनिया की कुल आबादी का 22 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इन्हीं सात देशों में निवास करता है। दुनिया के कुल व्यापार का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा बंगाल की खाड़ी से होकर गुजरता है। सदस्य देशों की संयुक्त जीडीपी लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताई जाती है।ये आंकड़े यह बताने को काफी हैं कि दुनिया के लिए यह संगठन और इसके सदस्य देश कितने महत्वपूर्ण हैं।

बिम्सटेक की पहल पर कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम हुआ, जिसका सीधा लाभ सदस्य देशों को मिल रहा है। इनमें भारत और म्यांमार को जोड़ने वाली कलादान मल्टी मॉडल परियोजना, म्यांमार से होकर भारत और थाईलैंड को जोड़ने वाली एशियाई त्रिपक्षीय राजमार्ग तथा यात्री एवं माल परिवहन के सुगम प्रवाह हेतु बांग्लादेश-भारत-भूटान-नेपाल मोटर वाहन समझौता शामिल है।

थाईलैंड में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, थाई रामायण का मंचन देख हुए गदगद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के दौरे पर हैं। पीएम मोदी आज यानी गुरुवार को 2 दिन के थाईलैंड दौरे पर पहुंचे हैं। बैंकॉक में थाईलैंड के उप-प्रधानमंत्री प्रसर्ट जंतररुआंगटों और उनके शीर्ष अधिकारियों ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत। इस दौरान पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। इसके बाद थाई रामायण का मंचन देखा। यहां रामायण को रामाकेन कहा जाता है।

एयरपोर्ट पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री मोदी बैंकॉक के होटल पहुंचे। इस दौरान भारतीय प्रवासियों और भारतीय समुदाय के सदस्यों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी ने कहा कि बैंकॉक में भारतीय समुदाय द्वारा गर्मजोशी से किए गए स्वागत के लिए आभारी हूं।

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि भारत और थाईलैंड के बीच एक गहरा सांस्कृतिक बंधन है जो हमारे लोगों के माध्यम से फलता-फूलता रहता है। यह देखकर खुशी हुई कि यह संबंध यहां इतनी मजबूती से परिलक्षित होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामायण के थाई संस्करण रामकियेन का प्रदर्शन देखा। उन्होंने कहा कि एक ऐसा सांस्कृतिक जुड़ाव जो किसी और से नहीं मिलता। थाई रामायण, रामकियेन का एक आकर्षक प्रदर्शन देखा। यह वास्तव में समृद्ध अनुभव था जिसने भारत और थाईलैंड के बीच साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया। रामायण वास्तव में एशिया के इतने सारे हिस्सों में दिलों और परंपराओं को जोड़ना जारी रखती है।

इसके बाद पीएम मोदी ने थाईलैंड की पीएम पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा से द्विपक्षीय मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने व्यापारिक संबंधों पर चर्चा की। यात्रा के दूसरे दिन यानी कल पीएम मोदी बिम्सटेक सम्मेलन में भाग लेंगे

ट्रंप के टैरिफ से रूस को रियायत, जानें पुतिन पर मेहरबानी की वजह,

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 100 से भी ज्यादा कई देशों पर नए ‘रिसीप्रोकल टैरिफ’ लगाने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सभी आयातों पर 10% का बेसलाइन टैरिफ लगाया, जबकि जिन देशों के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा ज्यादा है, उन पर इससे भी ऊंचे टैरिफ लगाए गए। इस लिस्ट में चीन, भारत, जापान और यूरोपियन यूनियन जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार शामिल हैं। लेकिन रूस का नाम इस लिस्ट में नहीं था।

रूस को क्यों मिली राहत?

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लीविट ने बताया कि रूस को इस सूची में इसलिए शामिल नहीं किया गया क्योंकि यूक्रेन युद्ध के कारण उस पर पहले से ही इतने कड़े प्रतिबंध लगे हैं कि अमेरिका और रूस के बीच व्यापार शून्य हो चुका है। इसके ठीक उलट युद्धग्रस्त यूक्रेन पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। ट्रंप की इस नीति के तहत कई पूर्व सोवियत देशों को भी टैरिफ झेलना होगा, लेकिन रूस को छूट मिलने से कई विशेषज्ञ हैरान हैं।

अमेरिका और रूस के बीच कई देशों से ज्यादा व्यापार

रूस को टैरिफ से छूट मिलने के बावजूद, अमेरिका और रूस के बीच व्यापार अभी भी कुछ छोटे देशों जैसे मॉरीशस और ब्रुनेई से ज्यादा है। खास बात यह है कि मॉरीशस और ब्रुनेई को ट्रंप की टैरिफ लिस्ट में शामिल किया गया, लेकिन रूस को नहीं। इस फैसले ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है और इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं।

रूसी तेल पर भारी टैरिफ की दी थी धमकी

बीते दिनों ट्रंप ने कहा था कि अगर रूस यूक्रेन युद्ध को खत्म नहीं करता, तो अमेरिका रूसी तेल पर भारी टैरिफ लगाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी देश रूस से तेल खरीदेगा, उसे अमेरिका के साथ व्यापार करने में दिक्कत होगी। लेकिन जब ट्रंप ने अपने टैरिफ की लिस्ट जारी की, तो उसमें रूस का नाम नहीं था।

मैक्सिको-कनाडा पर भी मेहरबानी

ट्रंप ने केवल रूस पर ही दरियादिली नहीं दिखाई है। डोनाल्ड ट्रंप जिन देशों को पानी पी-पीकर कोसते थे, जिन्हें बार-बार आंख दिखाते थे, उन लोगों को भी टैरिफ की लिस्ट से गायब कर दिया है। यहां बात हो रही है कनाडा और मैक्सिको की। जी हां, डोनाल्ड ट्रंप मैक्सिको और कनाडा पर ही सबसे अधिक टैरिफ को लेकर भड़ते रहे हैं। मगर अमेरिका की टैरिफ लिस्ट में न तो कनाडा था और न ही मैक्सिको। जबकि दुनियाभर के कई गरीब देशों पर भी भारी-भरकम टैरिफ लगा है।

20 जवानों की शहादत का सेलिब्रेशन...”विक्रम मिस्री के चीनी दूतावास जानें पर जमकर बरसे राहुल गांधी

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संसद में इन दिनों वक्फ संशोधन बिल को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस बीच गुरूवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चीनी कब्जे का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने चीन के राजदूत के साथ विदेश सचिव के केक काटने को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। लोकसभा में राहुल गांधी ने सवाल दागा कि चीनी दूतावास में क्या हमारे सैनिकों की शहादत का केक काटने गए थे विक्रम मिसरी।

राहुल गांधी ने कहा, चीन ने चार हजार किलोमीटर ले लिए, बीस जवान शहीद हुए, लेकिन विदेश सचिव चीन के राजदूत के साथ केक काट रहे हैं। चीनी दूतावास में क्या हमारे सैनिकों की शहादत का केक काटने गए थे विक्रम मिसरी। बता दें कि केक काटने वाली एक फोटो चीन के एंबेसडर ने 1 अप्रैल को पोस्ट की थी।

एलएसी की स्थिति पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, यथास्थिति बनी रहनी चाहिए और हमें अपनी जमीन वापस मिलनी चाहिए। मुझे यह भी पता चला है कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने चीन को पत्र लिखा है। हमें यह बात अपने लोगों से नहीं बल्कि चीनी राजदूत से पता चल रही है जो यह बात कह रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाया और दावा किया कि चीन ने भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है, जिस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है। इससे सदन में तीखी बहस छिड़ गई। राहुल का बयान उस संदर्भ में है, जब हाल ही में भारत और चीन के संबंध के 75 साल पूरे हुए और इसके अवसर पर चीनी दूतावास में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री शामिल हुए थे।

“कौन चीन के अधिकारियों के साथ चाइनीज सूप पी रहा था?”

वहीं, अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि अक्साई चिन किसकी सरकार में चीन के पास गया है। तब हिंदी चीनी भाई-भाई कहते रहे और आपकी पीठ में छुरा खोंपा गया। डोकलाम की घटना के समय कौन चीन के अधिकारियों के साथ चाइनीज सूप पी रहा था और सेना के जवान के साथ खड़े नहीं हुए।

राजीव गांधी फाउंडेशन पर भी उठाया सवाल

अनुराग ठाकुर ने आगे कहा, जिस संस्था ने चीन के अधिकारियों से पैसा लिया था, क्या राजीव गांधी फाउंडेशन ने पैसा नहीं लिया है, क्यों लिया गया वो पैसा। डोकलाम के समय में चीन को मुंह तोड़ जबाव दिया गया था और रक्षामंत्री के साथ साथ पीएम भी सीमा के जवानों के साथ खड़े थे। हम कह सकते हैं कि एक इंच जमीन भी पीएम मोदी के समय में चीन के हाथ में नहीं गई है। इन लोगों को जवाब देना होगा कि राजीव फाउंडेशन ने पैसा क्यों लिया था?

राज्यसभा में अनुराग ठाकुर पर बरसे खरगे, बोले- आरोप साबित करें तो इस्तीफा दे दूंगा

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वक्फ बिल पर संसद में “संग्राम” जारी है। लोकसभा के बाद आज राज्यसभा में वक्फ बिल पेश होने जा रहा है। उससे पहले सदन मे जोरदार हंगामा देखा गया। कांग्रेस ने लोकसभा में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की ओर से राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर लगाए गए गंभीर आरोपों को निराधार बताया और सदन के नेता से स्पष्टीकरण की मांग की। वहीं, मल्लिकार्जुन खरगे अनुराग ठाकुर के वक्फ की जमीन हड़पने के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा, ये बीजेपी वाले जो आरोप लगा रहे हैं, साबित कर दें, मैं झुकूंगा नहीं। अगर आरोप साबित होते हैं तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर को निचले सदन में वक्फ विधेयक पर बहस के दौरान की गई अपनी मानहानिकारक टिप्पणी वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। खरगे ने कहा, लेकिन नुकसान हो चुका है। उन्होंने इस मुद्दे पर अनुराग ठाकुर के साथ-साथ राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा से भी माफी की मांग की।

अनुराग ठाकुर के आरोपों को बताया झूठा और निराधार

मल्लिकार्जुन खरगे ने कल अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में मुझ पर पूरी तरह से झूठे और निराधार आरोप लगाए। जब मेरे साथियों ने उन्हें चुनौती दी तो वह अपनी मानहानिकारक टिप्पणी वापस लेने के लिए मजबूर हो गए। लेकिन नुकसान हो चुका है। टिप्पणी वापस लेने के बावजूद, यह मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छाया रहा। बीजेपी के लोग मुझे डराना चाहते हैं, मैं बिल्कुल झुकूंगा नहीं, मैनें 1 इंच जमीन आज तक किसी की नहीं ली।

खरगे ने आरोपों को साबित करने को कहा

खरगे ने कहा कि अनुराग ठाकुर की ओर से मेरे खिलाफ लगाए गए आरोपों से मेरी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। खरगे ने अनुराग ठाकुर से उनके खिलाफ लगाए गए 'बेबुनियाद' आरोपों को साबित करने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर आप अपने दावों को साबित नहीं कर सकते तो आपको संसद में आने का कोई अधिकार नहीं है। आप इस्तीफा दे दीजिए। इसके साथ ही अगर भाजपा सांसद आरोप साबित कर देते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे।

मेरी जिंदगी संघर्षों और लड़ाइयों से भरी-खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, मैं एक मजदूर का बेटा हूं। मेरी जिंदगी हमेशा एक खुली किताब रही है। यह संघर्षों और लड़ाइयों से भरी रही है, लेकिन मैंने जिंदगी में हमेशा उच्चतम मूल्यों को बरकरार रखा है। खरगे ने अनुराग ठाकुर के आरोपों को झूठा और निराधार बताते हुए माफी की मांग की।

अनुराग ठाकुर ने क्या कहा था?

इससे पहले भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ विधेयक के विरोध को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि विधेयक कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए बनी वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने दलों पर अपना राजनीतिक साम्राज्य बनाने के लिए इनके दोहन का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन जमीनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के बजाय कांग्रेस ने अपने चुनावी फायदे के लिए इन्हें वोट बैंक एटीएम में बदल दिया।

शिक्षक भर्ती घोटाला मामले ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 25 हजार भर्ती रद्द करने का फैसला बरकरार

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पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में 25,000 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती रद करने के कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने इस बारे में पिछले साल आए हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। इसके अलावा भी इस मसले पर 120 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल हुई थीं।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यापक अनियमितताओं के कारण पूरी चयन प्रक्रिया को दोषपूर्ण घोषित करना सही है। सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हमें हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई वैध आधार या कारण नहीं मिला।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले भर्ती किए गए लोगों को अपनी नौकरी के दौरान प्राप्त वेतन वापस करने की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि अप्रैल 2024 में दिए फैसले में हाई कोर्ट ने सभी नौकरियों को रद्द करते हुए इन लोगों से ब्याज समेत पूरा वेतन वसूलने के लिए भी कहा था।

वहीं, सु़प्रीम कोर्ट ने कहा कि नई चयन प्रक्रिया को 3 महीने के भीतर शुरू करके पूरा करना होगा। नई चयन प्रक्रिया में मौजूदा प्रक्रिया के बेदाग उम्मीदवारों के लिए छूट भी हो सकती है।

बीते साल 7 मई को सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी रद्द करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच जारी रखने के लिए कहा था। सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा था कि इनमें से जितने लोगों की भर्ती भ्रष्टाचार के जरिए हुई है, उनको ही नौकरी से बाहर करना बेहतर होगा।

राज्य सरकार ने दावा किया था कि 7-8 हज़ार लोगों ने गलत तरीके से नौकरी पाई है। हालांकि कोर्ट का मानना था कि इस बारे में संतोषजनक आंकड़ा रखा नहीं गया। सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि राज्य सरकार को इस नियुक्ति से जुड़ा डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखना चाहिए था।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह व्यवस्थागत तरीके से गड़बड़ी हुई है। सरकारी नौकरियां बहुत कम हैं। लोग उन्हें हासिल करने के लिए गंभीरता से प्रयास करते हैं। अगर जनता का विश्वास चला गया तो कुछ नही बचेगा।

पीठ ने सीबीआई जांच के उच्च न्यायालय के निर्देश को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई 4 अप्रैल के लिए तय की। शीर्ष अदालत ने 10 फरवरी को इस मामले में दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वक्फ बिल पर सोनिया गांधी ने सरकार को घेरा, बोलीं- जबरन पारित किया विधेयक, संविधान पर हमला

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वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है। अब इसे आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने विधेयक और उसे पारित कराने के लिए सरकार की ओर से दिखाई गई जल्दबाजी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस विधेयक को जबरन पारित किया गया। हमारी पार्टी का रुख स्पष्ट है। यह विधेयक संविधान पर एक हमला है।

कांग्रेस संसदीय पार्टी (सीपीपी) की आम सभा की बैठक में सोनिया गांधी ने कहा, कल, वक्फ अमेंडमेंट बिल, 2024 लोकसभा में पारित हो गया, और आज यह राज्यसभा में आने वाला है। यह बिल वास्तव में जबरदस्ती पारित कराया गया। हमारी पार्टी का रुख स्पष्ट है। यह बिल संविधान पर सीधा हमला है।

बीजेपी समाज को बांटकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है-सोनिया गांधी

सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) की एक सोची-समझी रणनीति है, जिसका उद्देश्य समाज में हमेशा विभाजन बनाए रखना है। उनका मानना है कि बीजेपी समाज को बांटकर अपना राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।

मोदी सरकार देश को रसातल में धकेल रही-सोनिया गांधी

लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित किए जाने के कुछ घंटों बाद कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में कांग्रेस सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार देश को रसातल में धकेल रही है। सरकार शिक्षा, नागरिक अधिकार, लोगों की स्वतंत्रता, हमारे संघीय ढांचे, या चुनाव का संचालन हो, किसी को भी बख्श नहीं रही है। उन्होंने दावा किया कि अब हमारा संविधान केवल कागजों पर रह जाएगा। हम जानते हैं कि उनका इरादा उसे भी ध्वस्त करने का है।

लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय-सोनिया गांधी

सोनिया गांधी ने कहा कि यह हमारे लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति नहीं मिल रही है। इसी तरह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे जी को बार-बार अनुरोध के बावजूद वह कहने की अनुमति नहीं दी जाती है जो वह कहना चाहते हैं और वास्तव में उन्हें कहना चाहिए। आपकी तरह मैं भी इसकी साक्षी रही हूं कि कैसे सदन हमारी वजह से नहीं, बल्कि खुद सत्तापक्ष के विरोध के कारण स्थगित होता है।

12 घंटे की चर्चा के बाद वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में आधी रात को हुआ पास, अब राज्य सभा की बारी

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वक्फ़ संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है। विधेयक पर लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 रात 1.56 बजे लोकसभा में पारित हुआ। विधेयक पर 1 घंटे 50 मिनट तक वोटिंग चली। विधेयक के समर्थन में 288 वोट पड़े, जबकि विरोध में 232 वोट पड़े। इससे पहले विधेयक पर लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। सदन ने विपक्ष के सभी संशोधनों को भी ध्वनिमत से खारिज कर दिया। अब आज विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। राज्यसभा में भी विधेयक को लेकर हंगामे के आसार हैं।

लोकसभा से हरी झंडी मिलने के बाद अब ये बिल गुरुवार को राज्य सभा में पेश किया जाएगा। बिल के लोकसभा में पेश होने के बाद बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। कांग्रेस, एसपी, टीएमसी समेत इंडिया गठबंधन के दल इस बिल का विरोध किया। कांग्रेस के गौरव गोगोई और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सांवत ने आरोप लगाया कि बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति में ठीक से चर्चा तक नहीं हुई।

वहीं बीजेपी के सहयोगी दलों जेडीयू और टीडीपी ने इस बिल का समर्थन किया। सरकार 1995 में बने वक़्फ़ बिल में संशोधन कर कई नए प्रावधान जोड़ने जा रही है।

संसद के निचले सदन में विधेयक पारित होने पर विभिन्न दलों के सांसदों और नेताओं ने प्रतिक्रिया में क्या कहा, आइए जानते हैं-

विधेयक को अदालत में चुनौती दी जाएगी- कल्याण बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, 'यह असांविधानिक विधेयक है। इस विधेयक को अदालत में चुनौती दी जाएगी। यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के लिए खतरनाक है। बीजेपी को इसे पारित करने की कीमत चुकानी होगी।'

आज काला दिन, हमारे अधिकारों पर हमला- इमरान मसूद

संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्य और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'यह काला दिन है। यह हमारे अधिकारों पर हमला है। मुस्लिम समुदाय और वक्फ दोनों को इससे नुकसान होगा। यह दिन इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज होगा। हम अदालत जाएंगे और इस विधेयक के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।'

सरकार की नीयत और मकसद सही नहीं- अवधेश प्रताप सिंह

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, 'हमने लगातार इस विधेयक का विरोध किया है और सरकार की नीयत व मकसद सही नहीं है। वे वक्फ बोर्ड की संपत्ति हड़पना चाहते हैं। यह विधेयक संविधान के खिलाफ है।

विधेयक संविधान और मुसलमानों के खिलाफ: चंद्रशेखर आजाद

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा, हम इस विधेयक के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और सड़कों पर उतरेंगे, जैसे किसान आंदोलन के दौरान किया था। जब तक सरकार इस विधेयक को वापस नहीं लेती, हमारी लड़ाई जारी रहेगी, जैसे उन्होंने किसान बिल वापस लिया था। वक्फ (संशोधन) विधेयक संविधान और मुसलमानों के खिलाफ है।

यह विधेयक सही नहीं- हनुमान बेनीवाल

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने कहा, हमने इस विधेयक का विरोध किया। जेपीसी में विपक्षी सदस्यों को बोलने नहीं दिया गया। हिंदू और मुसलमान दोनों ने मिलकर देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। यह विधेयक सही नहीं है। वे जनता को गुमराह करना चाहते हैं।

संविधान को नजरअंदाज किया जा रहा- पप्पू यादव

बिहार के पूर्णियां से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा, सिर्फ इसलिए कि उनके पास संख्या है, वे संविधान को नजरअंदाज कर रहे हैं। क्या उनके पास एक भी मुस्लिम सांसद है? क्या वे किसी मुसलमान को टिकट देते हैं? वे असली मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहते हैं। देश इसे स्वीकार नहीं करेगा और उन्हें करारा जवाब देगा।