नेतन्याहू की बढ़ेगी टेंशन! ईरानी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से की मुलाकात
#iran_foreign_minister_meet_saudi_arabia_crown_prince
![]()
इजराइल 1 अक्टूबर को हुए ईरानी हमले के पलटवार की तैयारी कर रहा है। ईरान पर किस तरह का हमला हो, ये तय करने के लिए नेतन्याहू की कैबिनेट में वोटिंग होगी। इससे पहले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार शाम अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से फोन पर बातचीत की। ईरान पर इजराइली हमले की आशंका के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। ये मुलाकात बुधवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुई।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इजराइल के खिलाफ नया मोर्चा बनाने में जुटे हैं।इसके लिए वह इन दिनों क्षेत्र के खाड़ी अरब देशों के दौरे पर हैं। सऊदी अरब को इजराइल का दोस्त माना जाता है। लेकिन हाल ही में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गाजा के मसले पर इजराइल को दो टूक कह दिया था कि आजाद फिलिस्तीन के बिना वो इजराइल को मान्यता नहीं देंगे। सऊदी अरब के इस रुख से ईरान की उम्मीदें बढ़ गईं हैं। लिहाजा वह अब इजराइल के खिलाफ सऊदी अरब को साधने की कोशिश में जुटा है।
इसी क्रम में ईरानी विदेश मंत्री अराघची सऊदी अरब पहुंचे और प्रिंस से मुलाकात की। सऊदी अरब के स्टेट मीडिया के मुताबिक इस बैठक के दौरान दोनों ने मिडिल-ईस्ट में बने हालातों पर चर्चा की है। ईरानी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के अलावा अपने समकक्ष प्रिंस फैजल बिन फरहान से भी मुलाकात की है। बुधवार को हुई इस मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों और कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा हुई है।
सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच क्षेत्र के ताजा हालात पर भी चर्चा हुई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर पोस्ट कर लिखा है कि, ‘विदेश मंत्री के दौरे का मकसद क्षेत्र में यहूदी प्रशासन के नरसंहार और आक्रामकता को रोकना, साथ ही गाजा और लेबनान में हमाई भाइयों और बहनों के दर्द और पीड़ा को खत्म करना है।
बता दें कि एक अक्टूबर को ईरान ने इजराइल पर करीब 200 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया था, ईरान का कहना है कि उसने इस्माइल हानिया, हसन नसरल्लाह और आईआरजीसी के कमांडर निलफोरूशन की मौत का बदला लेने के लिए ये हमला किया था। वहीं अब इजराइल भी ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इस हालात में ईरान-इजराइल के बीच युद्ध होता है तो क्षेत्र में मौजूद तमाम मुस्लिम देशों की भूमिका बेहद अहम होगी। हालांकि सऊदी अरब, जॉर्डन और इजिप्ट जैसे देश अब तक इस तनाव में तटस्थ नजर आए हैं।







हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए बड़ी असफलता साबित हुए हैं। पार्टी ने लोकसभा चुनाव के दौरान जो मोमेंटम हासिल किया था, उसे गंवा दिया है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली के अहम विधानसभा चुनाव होने हैं। जाहिर सी बात है इस हार का असर इन चुनावों में भी देखा जाएगा। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस की हार का असर आने वाले विधानसभा चुनावों में भी दिखेगा। महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली में कांग्रेस को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। सहयोगियों के साथ मोलभाव कठिन हो सकता है। बता दें कि इस साल के आखिर तक महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव हो सकते हैं। महाराष्ट्र की बात करें तो राहुल गांधी लगातार कांग्रेस की ओर से वहां चुनाव प्रचार करने जा रहे हैं। वह कई सभाओं को संबोधित कर चुके हैं। वहीं, भाजपा भी उस राज्य को हर हाल में अपने साथ रखना चाहती है। इस कारण महाराष्ट्र में भाजपा भी अपनी ताकत लगा रही है। ऐसे में महाराष्ट्र में इस बार जो लड़ाई होगी, वह कांटे की होगी। बीजेपी को हरियाणा में मिल रही जीत से महाराष्ट्र और झारखंड में कई गुना तेजी से पार्टी अपनी ताकत झोंक सकती है। झारखंड चुनाव में भी बीजेपी को उम्मीद ज्यादा है। हेमंत सोरेन की सरकार में जिस तरीके से हिंदुओं पर हमले हुए, लव जिहाद के मामले आए, आदिवासी गांव में बांग्लादेशी घुसपैठियों का आना जाना बढ़ा, उससे झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार निशाने पर आ गई है। यही कारण है कि भाजपा इस चुनाव को लेकर अभी से ही इन्हें मुद्दा बनाते हुए अभी से वहां पूरी ताकत झोंक रही है। खुद पीएम नरेंद्र मोदी बार-बार वहां जा रहे हैं। भाजपा को भी पता है कि वहां दोबारा सत्ता किसी की नहीं आती है। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि झारखंड में एक बार फिर से उसकी सरकार बन सकती है। यहां कांग्रेस अभी काफी पिछड़ी स्थिति में दिख रही है। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में 99 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस इंडिया ब्लॉक में खुद को बड़े भाई के तौर पर प्रोजेक्ट करने लगी थी। लेकिन हरियाणा और जम्मू कश्मीर की हार से उसका ये भ्रम टूटेगा। जम्मू कश्मीर में कांग्रेस नेशनल कॉन्फ्रेंस की जूनियर पार्टनर बनकर चुनाव लड़ी। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 51 में से 42 सीटों पर जीत हासिल की है। कांग्रेस 32 सीटों पर चुनाव लड़ी और सिर्फ 6 सीटें जीत पाई है। हरियाणा में कांग्रेस को बीजेपी से सीधी लड़ाई में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के बाद करारी मात मिली है। पार्टी मध्य प्रदेश में 15 साल की सत्ता विरोधी लहर को नहीं भुना पाई तो हरियाणा में पार्टी 10 साल की सत्ता विरोधी लहर के बावजूद नहीं जीत पाई। हरियाणा में कांग्रेस की हार ने विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन को प्रभावित किया है, जिससे भविष्य के राज्य चुनावों के लिए उनके दृष्टिकोण में बदलाव होने की संभावना है। कांग्रेस को हार के बाद यह सुझाव दिया जा रहा है कि वो अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करे। हरियाणा की हार के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि कांग्रेस को अपनी स्ट्रैटजी पर फिर से सोचने की जरूरत है। बीजेपी के साथ सीधी लड़ाई में पार्टी कमजोर पड़ जाती है। ऐसा क्यों होता है। पूरे गठबंधन पर फिर से काम करने की जरूरत है। बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस की सहयोगी पार्टनर है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 8 अक्टूबर को चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस का सीधे तौर पर जिक्र किए बिना कहा कि किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। केजरीवाल ने एमसीडी पार्षदों को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा का चुनावी परिणाम देखिए। वहां क्या हुआ है। इस परिणाम का सबसे बड़ा सबक ये है कि किसी को भी अति आत्म विश्वास का शिकार नहीं होना चाहिए।
Oct 10 2024, 16:32
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
6.0k