स्वयंसेवकत्व की अखंड यात्रा, ‘विठ्ठल’ से समाजमन के ‘विठ्ठलराव’ तक
– प्रदीप बालकृष्ण भोईर, संगठन एवं प्रबंधन शास्त्र के अध्येता
कुछ व्यक्तित्व पदों से बड़े होते हैं और कुछ अपने कार्य से। कुछ लोगों की पहचान उनके नाम के साथ जुड़े दायित्वों से होती है, तो कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी सबसे बड़ी पहचान उनका स्वयंसेवकत्व बन जाती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोकण प्रांत कार्यवाह, शिक्षा क्षेत्र के अध्ययनशील नेतृत्व, समाजजीवन के कुशल समन्वयक और हजारों कार्यकर्ताओं के आत्मीय मार्गदर्शक श्री. विठ्ठल दुधाप्पा कांबले ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन सेवा, समर्पण, संगठन और संस्कारों की सतत साधना का पर्याय बन गया है।
उनके जन्मदिवस के अवसर पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण करते हुए केवल एक व्यक्ति का परिचय नहीं मिलता, बल्कि संघ संस्कारों से निर्मित उस स्वयंसेवक की यात्रा सामने आती है, जिसने अपने जीवन को राष्ट्रकार्य के लिए समर्पित कर दिया।
एक कार्यक्रम में मंच संचालक ने उनके द्वारा निभाई जा रही अनेक जिम्मेदारियों का उल्लेख किया। भाषण के लिए खड़े होते ही उन्होंने अपनी सहज और विनोदी शैली में कहा, “आपने मेरी विभिन्न जिम्मेदारियों का परिचय दिया, लेकिन मेरी वास्तविक पहचान बताना भूल गए। मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक हूँ और यही मेरी सबसे बड़ी पहचान है।” यह वाक्य उनके व्यक्तित्व का सार है। पद से अधिक स्वयंसेवकत्व, प्रसिद्धि से अधिक कार्य, अधिकार से अधिक दायित्व और व्यक्तिपूजा से अधिक संगठन इन्हीं मूल्यों पर उनका जीवन आधारित है।
व्यवसाय से शिक्षक और चेंबूर एज्युकेशन सोसायटी के विद्यार्थियों के प्रिय प्रधानाचार्य के रूप में उन्होंने अनेक पीढ़ियों का निर्माण किया। उनके लिए शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की आधारशिला है। विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के बीच संवाद और विश्वास का वातावरण निर्मित करते हुए उन्होंने शिक्षा को संस्कारों से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया। इसी कारण वे केवल एक सफल प्रधानाचार्य नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायी शिक्षक और संस्कारवान शिक्षाविद् के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
समाजजीवन के विविध क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने असंख्य कार्यकर्ताओं को जोड़ा। समरसता, संवाद और सामूहिकता उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान है। “संगच्छध्वं संवदध्वं” के वैदिक संदेश को उन्होंने व्यवहार में उतारा। आज समाज के सभी वर्गों के लोग उन्हें आत्मीयता से “विठ्ठलराव” कहकर संबोधित करते हैं। यह संबोधन किसी पद की देन नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व का प्रतीक है।
चेंबूर एज्युकेशन सोसायटी का मैदान और सभागार पिछले कई दशकों से अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और संगठनात्मक गतिविधियों का केंद्र रहा है। मुंबई के निजी अनुदानित विद्यालयों के कर्मचारियों को वेतन पथक दिलाने के लिए हुए ऐतिहासिक संघर्ष की शुरुआत भी इसी परिसर से हुई। अनेक बैठकों, योजनाओं और सामूहिक प्रयासों के फलस्वरूप यह संघर्ष सफल हुआ। इस प्रकार यह परिसर संघर्ष, समर्पण और सफलता का साक्षी बन गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोकण प्रांत कार्यवाह के रूप में उन्होंने व्यक्तिनिर्माण, परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और संगठन विस्तार को विशेष महत्व दिया। उनके लिए शाखा केवल एक दैनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का विश्वविद्यालय है। विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में कार्यरत कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपने के साथ-साथ वे गुणवत्ता, व्यवस्थापन, संस्कार और समाजाभिमुखता के प्रति भी निरंतर सजग रहते हैं।
मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र की निजी अनुदानित शालाओं के विभिन्न प्रश्नों के समाधान के लिए उन्होंने सदैव समन्वयकारी भूमिका निभाई। विभिन्न विचारधाराओं के संगठनों को एक सूत्र में पिरोकर सामूहिक शक्ति का निर्माण करना उनकी विशिष्ट क्षमता रही है। संघ प्रार्थना की पंक्ति “विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिः” में उनका अटूट विश्वास है। उन्होंने अपने कार्य से यह सिद्ध किया है कि संगठित शक्ति के सामने असंभव प्रतीत होने वाली चुनौतियाँ भी परास्त हो जाती हैं। कोविड महामारी के कठिन दौर में जब अनेक शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और कार्यकर्ता संकट में थे, तब उन्होंने केवल औपचारिक संवेदना व्यक्त नहीं की, बल्कि चिकित्सा सहायता, मानसिक संबल और आत्मीय सहयोग प्रदान कर यह विश्वास जगाया कि संकट की घड़ी में कोई कार्यकर्ता अकेला नहीं है। “सेवा ही साधना है” इस भाव को उन्होंने अपने जीवन में साकार किया।
मुंबई प्राथमिक विभाग के अनुदानित विद्यालयों के कर्मचारियों के हिंदू कॉलोनी स्थित महामोर्चे के दौरान परिस्थितियाँ तनावपूर्ण हो गई थीं। ऐसे समय में संयम, अनुशासन और विश्वास के बल पर उन्होंने पूरे आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखा। संघर्ष के क्षणों में भी संगठनात्मक मर्यादा और अनुशासन को बनाए रखने का उनका यह प्रयास प्रेरणादायी है।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी विशेष संवेदनशीलता है। राष्ट्रभक्ति, सेवाभाव, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण और नेतृत्व क्षमता जैसे गुण विद्यार्थियों में विकसित हों, इसके लिए वे निरंतर प्रयासरत रहते हैं। खेल, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में स्वयं सहभागी होकर वे नई पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करते हैं। उनके कार्य से यह अनुभव होता है कि शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का शिल्पकार होता है।
मेरे व्यक्तिगत जीवन में उनका स्थान एक बड़े भाई जैसा है। विभिन्न संगठनों के समन्वय की जिम्मेदारियाँ निभाते समय अनेक कठिन परिस्थितियाँ सामने आईं। उन दिनों प्रायः उनका फोन आता था “प्रदीप, कैसे हो? कोई परेशानी तो नहीं?” अत्यंत व्यस्त जीवन के बावजूद हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने वाला यह मित्र कब बड़े भाई का स्वरूप बन गया, इसका एहसास ही नहीं हुआ।
आज अनेक सेवानिवृत्त शिक्षिकाएँ, शिक्षकेतर कर्मचारी और सहयोगी मुस्कराते हुए पूछते हैं “भोईर, तुम्हारा यह विठ्ठल हमें कब पावेगा?” इस सहज प्रश्न में उनके प्रति लोगों के मन में बसे विश्वास, स्नेह और अपनत्व की झलक दिखाई देती है। इतना व्यापक कार्य करने के बाद भी पुरस्कार, प्रसिद्धि और पदों के प्रति उनमें कोई आकर्षण नहीं है। उनके लिए संघकार्य ही साधना है। इसलिए हजारों शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और कार्यकर्ता विश्वासपूर्वक कहते हैं “कांबले सर हैं, तो समाधान अवश्य निकलेगा।” किंतु वे स्वयं सदैव इस बात पर बल देते हैं कि परिवर्तन किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि संगठित शक्ति से आता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गीत की पंक्तियाँ मानो उनके जीवन का परिचय देती हैं
“तन समर्पित, मन समर्पित, और यह जीवन समर्पित,
चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ।”
आज मेरा मित्र “विठ्ठल” समाजमन का “विठ्ठलराव” बन चुका है। यह सम्मान किसी पद, प्रतिष्ठा अथवा प्रसिद्धि का परिणाम नहीं, बल्कि स्वयंसेवकत्व, सेवा, समरसता, संगठन, संस्कार और आत्मीयता की लंबी साधना का प्रतिफल है।
कबीर ने कहा है
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥”
किन्तु विठ्ठलराव का जीवन उस वटवृक्ष की भाँति है, जिसकी छाया में असंख्य कार्यकर्ताओं को विश्वास, मार्गदर्शन और आत्मीयता का संबल प्राप्त होता है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि उनके माध्यम से समाजजीवन में सेवा, राष्ट्रनिष्ठा और संगठन का यह दीपक निरंतर प्रज्वलित रहता रहे और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देता रहे।

– प्रदीप बालकृष्ण भोईर, संगठन एवं प्रबंधन शास्त्र के अध्येता

सोलापुर । सोलापुर जिले के करमाला स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान का नाम परिवर्तित कर उसे ‘मदनदास देवी शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान’ नाम दिया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सह-सरकार्यवाह स्व. मदनदास देवी की राष्ट्रसेवा, शिक्षा तथा विद्यार्थियों के निर्माण में दिए गए योगदान के सम्मान में आयोजित नामकरण समारोह उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, विधायक नारायण आबा पाटील, पूर्व विधायक राम सातपुते, करमाला नगराध्यक्ष श्रीमती मोहिनी सावंत, श्रीमती रश्मी बागल, व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संचालक सतीश सूर्यवंशी, सह-निदेशक चंद्रशेखर ढेकणे, सह-आयुक्त श्रीमती संगीता खंदारे, व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण अधिकारी मनोज बिडकर, संस्था प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राठी, स्व. मदनदास देवी के ज्येष्ठ भ्राता खुशालदास देवी एवं राधेश्याम देवी, तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विभिन्न जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी एवं नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का शुभकामना संदेश वीडियो के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। उन्होंने कहा कि स्व. मदनदास देवीजीने विद्यार्थियों में राष्ट्रभावना, शिक्षा के प्रति रुचि तथा समाजसेवा की प्रेरणा जागृत करने का उल्लेखनीय कार्य किया। उनके नाम पर संस्थान का नामकरण होने से भावी पीढ़ियों को उनके विचारों से प्रेरणा मिलती रहेगी, ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया।
ठाणे l साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था भारतीय जनभाषा प्रचार समिति ठाणे की मासिक काव्यगोष्ठी शनिवार 27 जून 2026 को मुन्ना विष्ट कार्यालय सिडको ठाणे में आयोजित किया गया।जिसकी अध्यक्षता संगीत साहित्य मंच के संस्थापक वरिष्ठ साहित्यकार रामजीत गुप्ता ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में काव्य सृजन अध्यक्ष श्रीधर मिश्र आत्मिक एवं नरेन्द्र शर्मा खामोश उपस्थित थे। गोष्ठी का शुभारंभ अनिल कुमार राही के सरस्वती वंदना से हुआ।उपस्थित साहित्यकारों में डॉ शारदा प्रसाद दुबे,नरसिंह हैरान जौनपुरी, अनिल कुमार राही,शिवशंकर मिश्र,लालबहादुर यादव कमल, ओमप्रकाश तिवारी,नंदलाल क्षितिज,उमेश पाण्डेय,टी आर खुराना,अजय कुमार सिंह,डॉ वफ़ा वारसी, सुशील शुक्ला नाचीज़, ओमप्रकाश सिंह, विनय शर्मा दीप,त्रिलोचन सिंह अरोरा,विनय सिंह विनम्र रहे। उपस्थित सभी साहित्यकारों ने खूबसूरत काव्य पाठ से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।मंच का संचालन संस्था अध्यक्ष विनय सिंह विनम्र ने किया। मिडिया सचिव विनय शर्मा दीप ने बताया कि उक्त गोष्ठी का आयोजन चेयरमैन रामप्यारे सिंह रघुवंशी के दिशा निर्देशन में किया गया।उपस्थित मंचस्थ अतिथि साहित्यकारों को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन पश्चात राष्ट्रगान के साथ गोष्ठी का समापन किया गया।
मुंबई। हिंदी प्रचार एवं शोध संस्था, मुंबई द्वारा 261वीं मासिक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन न्यू सी व्यू, न्यू रविराज कॉम्प्लेक्स, जेसल पार्क, भाईंदर (पूर्व) में संपन्न हुआ।गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुधाकर मिश्र ने की। मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. कृपाशंकर मिश्र तथा विशिष्ट अतिथि एवं संयोग साहित्य पत्रिका के संपादक मुरलीधर पाण्डेय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संस्था के महासचिव डॉ. उमेश चन्द्र शुक्ल ने किया।अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सुधाकर मिश्र ने सभी रचनाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपना गीत सुनाते हुए कहा कि "आ रहे दिन त्रासदी के, छा रहा थक्का अंधेरा, सत्य भाषिक धूप-सी मोहक…"। उनके गीत ने वर्तमान समय की विसंगतियों के बीच सत्य और आशा का संदेश दिया।मुख्य अतिथि डॉ. कृपाशंकर मिश्र ने अपने गीतों के माध्यम से ग्राम्य जीवन की स्मृतियों को जीवंत करते हुए कहा— "आइए गाँव की बातें करते हैं", "शहर का हो के भी शहर का हो नहीं पाया", "चलो हम ढूँढ़ लाएँ फिर उस गुज़रे ज़माने को।" उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।विशिष्ट अतिथि मुरलीधर पाण्डेय ने अपनी संवेदनशील रचना "ये ज़िंदगी कुछ बोलती नहीं" का पाठ कर जीवन के मौन सत्य को अभिव्यक्ति दी। प्रख्यात ग़ज़लकार डॉ. उमेश चन्द्र शुक्ल ने अपनी सशक्त ग़ज़लों से खूब वाहवाही बटोरी। उन्होंने पढ़ा "चिता की आग में जलते हुए मंजर देखे, हमने मिट्टी के खुदाओं के मुकद्दर देखे।" एक अन्य शेर में उन्होंने सामाजिक मूल्यों की रक्षा का संदेश देते हुए कहा "ज़मीर बेचकर दुकान-मकान मत करना, तुम दागदार अपना खानदान मत करना।" वहीं उन्होंने वर्तमान व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा— "रोज़ छत की दरकनों को देखता हूँ ख़ौफ़ से, अब भरोसा भी नहीं बाकी किसी शहतीर में।"शिव प्रसाद जमदग्निपुरी ने सामाजिक चेतना से ओतप्रोत रचनाएँ प्रस्तुत करते हुए कहा— "दबी हुई आग को भड़काइए मत" तथा "यही पिलाते हैं दूध विषधर को दिन-रात।"अरुण दुबे ने मानवीय संवेदनाओं को स्वर देते हुए गीत प्रस्तुत किया— "जाने कैसे बने दरिंदे आज के इंसानों में।" डॉ. ओमप्रकाश तिवारी ने अपनी मार्मिक रचनाओं "धूम्र, तुम कितने प्रिय थे इस धरती पर" तथा "मैया, अब आसन कहाँ लगाऊँ" का पाठ किया।डॉ. प्रमोद पल्लवित ने "पाप-पुण्य का लेखा-जोखा", "देख रहा हूँ एकटक उसकी ओर" तथा "मेरी तक़दीर में तुम रहो न रहो, मेरे जज़्बात…" जैसी रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर किया।
मुंबई । साहित्यिक व सामाजिक संस्था हस्ताक्षरम की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन कांदिवली पूर्व के ठाकुर कांप्लेक्स स्थित एवान सोसाइटी में आमंत्रित कवियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था के वरिष्ठ सलाहकार अमरनाथ द्विवेदी व संचालन की जिम्मेदारी डाॅ. मृदुल 'महक' व अल्हड़ असरदार ने संयुक्त रूप से वहन किया। मुख्य अतिथि के रूप में गाजियाबाद के वरिष्ठ सायर नरेंद्र शर्मा 'खामोश' उपस्थित रहे।पश्चिम रेल्वे में सेवारत साहित्यकार कवि विनोद शुक्ला ने सरस्वती वंदना कर गोष्ठी का आरंभ किया। ओमप्रकाश तिवारी, अरूण दुबे, आनंद पाण्डेय 'केवल' , अर्चना झा, हिरालाल यादव, कल्पेश यादव, सारिका सिंह, डॉ. मृदुल 'महक', वाचस्पति तिवारी, नरेंद्र शर्मा 'खामोश', अल्हड़ असरदार एवं अमरनाथ द्विवेदी ने क्रमशः अपनी अपनी कविताओं, गीतों व गजलों का पाठन किया। समसामयिक विषयों पर काव्यात्मक टिप्पणियां हुई, सामाजिक व पारिवारिक विषयों पर मंथन के साथ साथ राजनीतिक विषयों पर भी रचनाएं पढ़ी गई। हास्य व्यंग, श्रृंगार के साथ ही वीर रस से परिपूर्ण कविताएं पढ़ी व सुनी गई। गोष्ठी के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले पंकज सिंह व सारिका सिंह ने सभी का यथोचित स्वागत व धन्यवाद ज्ञापित किया। स्वादिष्ट अल्पाहार व चाय के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।
–डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा वरिष्ठ साहित्यकार
मुंबई। पहले निजी विद्यालय और बाद में समायोजन के बाद मुंबई महानगरपालिका शिक्षण विभाग में शिक्षक के रूप में कार्यरत गामा प्रसाद रजक का सेवानिवृत्त सम्मान समारोह 28 जून को भरुचा रोड हिंदी स्कूल,दहिसर पूर्व के सभागार कक्ष में आयोजित किया गया, जिसमें भारी संख्या में उपस्थित लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता संत श्री राम कुमार चौरसिया गुरुजी ने की। सम्मानित अतिथि के रूप में मुख्याध्यापिका संगीता तिवारी, पूर्व नगरसेवक कमलेश यादव प्रिंसिपल रमाकांत सरोज, प्रबंधक शिवपूजन यादव, मुख्याध्यापक बागुल सर, शरद सर, मुख्याध्यापिका ज्योति शर्मा, पूर्व मुख्याध्यापक अशोक सिंह, दशरथ कनौजिया सिकंदर कनौजिया जगदीश कनौजिया उपस्थित रहे। गामा प्रसाद रजक के बड़े भाई श्रीराम रजक, दयाराम रजक और भाभी निर्मला अनीता भी मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कौशलेंद्र सिंह ने किया। कार्यक्रम का आयोजन भरूचा रोड हिंदी शाला क्रमांक 1 की तरफ से किया गया। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में लालजी, जितेंद्र, मोतीलाल, ईश्वरलाल, नागेंद्र ,राजकुमार, राजाराम, राम आत्मा, अशोक, नीरज सिंह, पुरेंद्र कुमार ,हरिओम, शिवधनी,सती राम,,समशेर सिंह छविनाथ रजक, विजय धोबी, विजय रजक, संजय, विनोद, योगेश जियालाल, पुष्पा, हरिओम, राहुल, सुरेश, धीरेन्द्र, विनोद यादव,भरुचा रोड़ हिंदी स्कूल के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं और सामाजिक साथी इत्यादि का समावेश रहा।
भायंदर। संदीप तिवारी मीरा भायंदर उत्तर भारतीय समाज का ताकतवर चेहरा हैं। उनके शिवसेना में शामिल होने से न सिर्फ शिवसेना की ताकत बढ़ेगी अपितु उत्तर भारतीय समाज और शिवसेना के बीच और मजबूत संबंध कायम होगा। मीरा रोड स्थित शिवसेना कार्यालय में सैकड़ो समर्थकों के साथ उत्तर भारतीय युवा नेता संदीप तिवारी के शिवसेना में शामिल होने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि संदीप तिवारी की सामाजिक ताकत और युवाओं पर उनके प्रभाव को देखते हुए जल्द ही इन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। शिवसेना विधानसभा प्रमुख विक्रम प्रताप सिंह ने कहा कि जनता के बीच संदीप की अच्छी लोकप्रियता है। समाज सेवा के माध्यम से हमेशा लोगों के बीच विद्यमान रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह संदीप की घर वापसी है और यह उनके जीवन की यादगार राजनीतिक पारी होगी। जिला प्रमुख राजू भोईर ने कहा कि संदीप तिवारी ऊर्जावान और प्रभावशाली युवा नेता है। राजनीतिक परिवार से हैं। उत्तर भारतीय समाज को इनसे बड़ी आशाएं हैं। नवीन सिंह, पूर्व नगरसेवक विजय राय,गुड्डू तिवारी और राजेश यादव ने भी उनके शिवसेना प्रवेश का स्वागत करते हुए कहा कि संदीप तिवारी को सही राजनीतिक प्लेटफार्म मिल गया है। देखा जाए तो संदीप तिवारी ने अपनी राजनीतिक शुरुआत शिवसेना से ही की थी। उनके चाचा रविंद्र नाथ तिवारी भाजपा के विधायक रहे हैं,बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और महानगरपालिका चुनाव में प्रभाग क्रमांक 10 से चुनाव लड़ने की तैयारी की। परंतु अंतिम क्षणों में जब भाजपा ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया तो उन्होंने मातोश्री जाकर शिवसेना यूबीटी ज्वाइन कर ली। शिवसेना ने उन्हें प्रभाग क्रमांक 10 से अपना प्रत्याशी बनाया, परंतु चुनाव में पराजित हो गए। इस बारे में पत्रकारों से बात करते हुए संदीप तिवारी ने कहा कि मीरा भायंदर में यूबीटी का प्रभाव बहुत कमजोर है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक द्वारा किए जा रहे लोकगीत कार्यों का जनता पर अच्छा प्रभाव है। यही कारण है कि उन्होंने अपने सैकड़ो समर्थकों के साथ शिवसेना ज्वाइन किया। उन्होंने कहा कि मीरा भायंदर में शिवसेना को सबसे ताकतवर पार्टी बनाने की दिशा में कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाईक के मार्गदर्शन में पूरी ताकत के साथ काम करेंगे।
Jul 01 2026, 15:28
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