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प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी से 55 लाख कर्मचारियों की नाराजगी का दावा, संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप

आठवें वेतन आयोग के समक्ष कर्मचारी संगठनों को प्रतिनिधित्व न मिलने पर उठे सवाल

2001 के बाद नियुक्त संविदा कर्मियों के नियमितीकरण और पुरानी पेंशन बहाली की मांग तेज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कर्मचारियों से जुड़े प्रमुख संगठन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने राज्य सरकार की नौकरशाही पर कर्मचारियों की समस्याओं की उपेक्षा का आरोप लगाया है। परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में दावा किया है कि प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी के रवैये से लगभग 55 लाख कर्मचारी, पेंशनर, शिक्षक, पुलिसकर्मी और आउटसोर्स कर्मचारी प्रभावित हैं, जिससे उनके परिवारों सहित करोड़ों मतदाताओं में असंतोष बढ़ रहा है।

संयुक्त परिषद ने विशेष रूप से 22 और 23 जून को लखनऊ में प्रस्तावित आठवें वेतन आयोग की बैठक का मुद्दा उठाया है। परिषद का कहना है कि आयोग राज्य की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने और कर्मचारियों का पक्ष जानने के लिए आ रहा है, लेकिन कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों को आयोग के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा है।

- 22-23 जून को लखनऊ में आठवें वेतन आयोग की बैठक।

- कर्मचारी संगठनों को प्रतिनिधित्व न मिलने पर नाराजगी।

- 2001 के बाद नियुक्त संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की मांग।

- पुरानी पेंशन बहाली समेत कई लंबित मुद्दों पर आंदोलन की तैयारी।

- मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर समाधान कराने की अपील।

जे.एन. तिवारी ने आरोप लगाया कि वित्त एवं कार्मिक विभाग कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं। उनका कहना है कि आयोग के समक्ष कर्मचारियों का पक्ष न रखे जाने से उसका वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाएगा और पूरी प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की मांग

संयुक्त परिषद ने वर्ष 2001 के बाद नियुक्त संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को प्रमुखता से उठाया है। तिवारी के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय से इस संबंध में दो बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन कार्मिक विभाग स्तर पर मामले को आगे नहीं बढ़ाया गया। परिषद ने मांग की है कि "नियमितीकरण नियमावली-2026" शीघ्र जारी कर संविदा कर्मियों को राहत दी जाए।

महिला कर्मचारियों के मुद्दे भी उठाने की तैयारी

परिषद का कहना है कि आठवें वेतन आयोग के समक्ष महिला कर्मचारियों की सुविधाओं, सेवा शर्तों और अन्य कर्मचारी हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को रखा जाना आवश्यक है। इसके लिए कर्मचारी संगठनों को आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

संयुक्त आंदोलन की तैयारी

संयुक्त परिषद ने संकेत दिया है कि कर्मचारियों की साझा मांगों—पुरानी पेंशन बहाली, संविदा कर्मियों का नियमितीकरण, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पर लगी रोक हटाने और वेतन विसंगतियों के समाधान—को लेकर जल्द ही लखनऊ में प्रदेश के बड़े कर्मचारी संगठनों की संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी। इसमें आगामी रणनीति और संभावित आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा होगी।

उप्र : 465 माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता रद्द, नए प्रवेश पर तत्काल रोक

दो वर्षों से बोर्ड परीक्षा में एक भी छात्र शामिल न होने पर यूपी बोर्ड की बड़ी कार्रवाई

- प्रयागराज के 25 विद्यालय भी सूची में शामिल, छात्रों के हितों की सुरक्षा के निर्देश

प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने नियमों का पालन न करने वाले प्रदेश के 465 मान्यता प्राप्त हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट विद्यालयों की मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी है। इस व्यापक कार्रवाई में प्रयागराज जिले के 25 विद्यालय भी शामिल हैं। परिषद की जांच में सामने आया कि इन विद्यालयों से पिछले दो वर्षों के दौरान एक भी छात्र बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित नहीं हुआ था।

परिषद के सचिव भगवती सिंह ने समीक्षा के बाद मान्यता निरस्त किए गए विद्यालयों की आधिकारिक सूची जारी करते हुए बताया कि संबंधित संस्थानों को पूर्व में कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत न किए जाने पर उनकी मान्यता समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

जांच के दौरान यह भी पाया गया कि ये विद्यालय उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय मान्यता नियमावली के तहत निर्धारित अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं कर रहे थे। शासन एवं बोर्ड स्तर पर हुई आकस्मिक निरीक्षण और परीक्षण प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं।

सचिव ने स्पष्ट किया कि जिन विद्यालयों की मान्यता रद्द की गई है, वे शैक्षिक सत्र 2025-26 से किसी भी कक्षा में नए विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं ले सकेंगे। साथ ही सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश दिए गए हैं कि इन विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के शैक्षिक हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

यूपी बोर्ड की इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

तीन ग्रहों की अद्भुत परेड: 17 जून से पश्चिमी आकाश में दिखेगा दुर्लभ ग्रहीय संरेखण।


खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल प्रेमियों के लिए जून 2026 का महीना एक शानदार आकाशीय दृश्य लेकर आया है। 17 जून के आसपास सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज पर बुध, शुक्र और बृहस्पति ग्रह लगभग एक सीधी रेखा में दिखाई देंगे। यह दृश्य कई दिनों तक बना रहेगा और लगभग 23 जून तक इन ग्रहों की आकर्षक स्थिति थोड़ी आगे पीछे एवं ऊपर नीचे होते हुए देखी जा सकेगी। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यद्यपि ग्रह वास्तव में अंतरिक्ष में एक सीधी रेखा में नहीं होते, बल्कि आपस में करोड़ों किलोमीटर की दूरी पर होते हैं लेकिन कभी- कभी पृथ्वी से देखने पर वे सूर्य-पथ (Ecliptic) के साथ एक रेखीय संरेखण या “प्लैनेट परेड” का आभास देते हैं।

कब है भारत में देखने का सर्वोत्तम समय ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 17 जून 2026 को इस दृश्य की सुंदरता और बढ़ जाएगी, जब पतला अर्धचंद्राकार बढ़ता हुआ चंद्रमा भी ग्रहों के निकट, शुक्र ग्रह और बृहस्पति ग्रह के बीच में दिखाई देगा। उस शाम ब्रहस्पति ग्रह और चंद्रमा भी एक-दूसरे के पास नजर आएंगे, जबकि बुध और बृहस्पति नीचे की ओर स्थित होंगे।

भारत में कैसे देखें?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो इस शानदार लघु खगोलीय संरेखण नज़ारे को देखने के लिए आप सूर्यास्त के तुरंत बाद ही आकाश के पश्चिमी दिशा में देखना शुरू कर सकते हैं, हालांकि सूर्यास्त के लगभग 30 से 40 मिनट बाद पश्चिमी या पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में देखने पर और भी अधिक स्पष्ट एवं सर्वोत्तम अवलोकन कर सकते हैं।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऐसा स्थान चुनें जहाँ पश्चिमी क्षितिज खुला हो और इमारतें या पेड़ बाधा न बनें।

कैसे दिखाई देगा यह खगोलीय संरेखण ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सबसे चमकीला ग्रह शुक्र होगा, उसके नीचे बृहस्पति ग्रह और क्षितिज के सबसे निकट बुध दिखाई देगा।

क्या यह साधारण आंखों से आसानी से दिखाई देगा?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्रकाश प्रदूषण से पूर्णतः दूर जाकर यह दृश्य नंगी/साधारण आँखों से बहुत ही आसानी से काफ़ी सुंदर रूप में देखा जा सकता है; लेकिन अगर आपके साथ कोई दूरबीन या विनोकुलर आदि मौजूद है तो आप इस शानदार खगोलीय नज़ारे को और भी अधिक स्पष्ट रूप में चंद्रमा एवं ग्रहों के विशेष डिटेल्स एवं फ़ीचर्स के साथ दूरबीन होने पर अनुभव और बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

कितना होगा इनका मैग्नीट्यूड एवं कितने बजे से कितने बजे तक दिखाई देंगे यह सभी खगोलीय पिंड?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 17 जून 2026 को ब्रहस्पति ग्रह, मिथुन तारामंडल क्षेत्र में लगभग माइनस 1.68 मैग्नीट्यूड के साथ दिखाई देगा और शुक्र ग्रह,कर्क तारामंडल क्षेत्र में माइनस 3.91 मैग्नीट्यूड की चमक लिए दिखाई देगा एवं बुध ग्रह मिथुन तारामंडल में लगभग माइनस 0.77 मैग्नीट्यूड के साथ नज़र आयेगा, साथ ही बढ़ता हुआ अर्धचंद्राकार चंद्रमा इस रात कर्क तारामंडल दृश्य क्षेत्र में स्थित लगभग माइनस 8 मैग्नीट्यूड के साथ दिखाई देगा एवं 8 बजे के बाद बुध ग्रह पश्चिमी क्षितिज के नीचे जाना शुरू कर देगा एवं उसके बाद धीरे धीरे क्रमशः बाकी दोनों ग्रह, बृहस्पति ग्रह और शुक्र ग्रह भी लगभग आधे- आधे घंटे के अंतराल के बाद में पश्चिमी क्षितिज की ओर नीचे जाना शुरू कर देंगे।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सूर्य ,पूरी तरह अस्त होने से पहले किसी भी ऑप्टिकल उपकरण का उपयोग न करें, जब सूर्यास्त हो जाए तभी किसी भी विशेष खगोलीय उपकरण का उपयोग करें।


खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार जून 2026 ग्रहों के अवलोकन के लिए विशेष महीना है। इन खगोलीय घटनाओं में अब बुध ग्रह के शामिल होने तथा चंद्रमा के साथ जुड़ने से यह सप्ताह वर्ष के सबसे सुंदर सांध्यकालीन आकाशीय दृश्यों में से एक बन गया है।