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नीट एग्जाम की नई डेट घोषित, 21 जून को होगी परीक्षा, जानें जरूरी अपडेट्स

#reneet2026examdateannounced21_june

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट (यूजी) 2026 की परीक्षा के लिए नई तारीख की घोषणा कर दी है। भारत सरकार की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया है कि अब नीट (यूजी) 2026 का री-एग्जामिनेशन 21 जून 2026 को होगा। नीट यूजी पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोपों के बाद केंद्र सरकार और एनटीए ने 3 मई को हुई परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था। जिसके बाद अब नई तारीख घोषित की गई है।

एनटीए ने क्या कहा?

परीक्षा की तारीख की घोषणा करते हुए एनटीए ने कहा कि उसने केंद्र सरकार की अनुमति के बाद नीट-यूजी-2026 की पुन: परीक्षा रविवार 21 जून 2026 को आयोजित करने का निर्णय लिया है। परीक्षार्थियों व अभिभावकों से अनुरोध है कि वे केवल एनटीए के आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें। अगर नीट परीक्षा से जुड़ी अन्य कोई भी जानकार उन्हें लेनी है तो वो ईमेल आईडी या 011-40759000 / 011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं। परीक्षा के आयोजन को लेकर केंद्र सरकार और एनटीए ने सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

हेल्पलाइन नंबर

नीट यूजी री- एग्जामिनेशन इसके लिए स्टूडेंट्स को फिर से रजिस्ट्रेशन करने की आवश्यक्ता नहीं है। पहले जिन छात्रों ने इस एग्जाम में अप्लाई किया था, वे सभी स्टूडेंट्स परीक्षा में बैठ सकेंगे। इसके लिए किसी तरह अलग से कोई फीस नहीं ली जाएगी। परीक्षा से पहले छात्रों के प्रवेश पत्र भी जारी किए जाएंगे। इसकी जानकारी एनटीए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर समय-समय पर उपलब्ध करवाएगा।

3 मई को हुई थी परीक्षा

इससे पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 3 मई को देशभर में नीट की यूजी की परीक्षा आयोजित की थी। जिसमें 22 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। इसके बाद पेपर लीक और गड़बड़ी के कारण 12 मई को एनटीए ने परीक्षा कैंसिल करने का निर्णय लिया। अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। विशेष टीमें इसकी अलग-अलग जगहों पर जांच कर रही हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) नीट यूजी परीक्षा लीक होने को 'सिस्टेमैटिक फेलियर' बताया है और एनटीए के खिलाफ याचिका भी दायर की गई है।

पांच देशों की यात्रा पर रवाना हुए पीएम मोदी, आज यूएई के राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात

#pmmodidepartsonafivenation_tour

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से पांच देशों के दौरे पर रहेंगे। मोदी 5 देशों की यात्रा पर रवाना हो चुके हैं। पीएम मोदी अगले 6 दिनों में यूएई, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी कई विश्व नेताओं के साथ मुलाकात करेंगे। इस दौरे का मकसद भारत की वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना है। उनका पहला पड़ाव यूएई होगा, जहां वे राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे।

क्या होगा यूएई यात्रा का मुख्य फोकस?

पीएम मोदी सबसे पहले यूएई जाएंगे। पीएम मोदी के संयुक्त अरब अमीरात के आधिकारिक दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे सहयोग के खास क्षेत्र पर बातचीत करेंगे।

यूएई भारत के लिए एलपीजी का सबसे बड़ा स्रोत

बता दें कि यूएई भारत की ऊर्जा सुरक्षा में एक अहम साझीदार रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल यूएई कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत था, जिसने भारत की जरूरत का लगभग 11% हिस्सा पूरा किया। यूएई भारत के लिए एलपीजी का सबसे बड़ा स्रोत है, जो भारत की जरूरत का लगभग 40% हिस्सा पूरा करता है। लंबे समय के लिए सप्लाई के समझौते होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत हुई है। ऊर्जा सहयोग को बढ़ाना इस दौरे का एक अहम एजेंडा होगा।

दो अहम समझौते की उम्मीद

विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह दौरा अहम व्यापार और निवेश जुड़ाव को बढ़ावा देगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी के दौरे के दौरान ऊर्जा सुरक्षा खास फोकस क्षेत्र में से एक होगा और एलपीजी और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व के क्षेत्र में दो अहम एमओयू होने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यूएई पिछले 25 सालों में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार और कुल मिलाकर निवेश का सातवां सबसे बड़ा सोर्स रहा है। यूएई में 4.5 मिलियन से ज्यादा भारतीय रहते हैं, इसलिए यह दौरा उनके कल्याण के बारे में बात करने का भी एक मौका होगा।

यूएई के बाद नीदरलैंड का दौरा

अपनी यात्रा के दूसरे चरण में, प्रधानमंत्री नीदरलैंड का दौरा करेंगे। इस यात्रा के दौरान, वे नीदरलैंड के किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे, साथ ही प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ भी बातचीत करेंगे। वार्ता में सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, इनोवेशन, रक्षा और जल प्रबंधन जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।

स्वीडन के साथ व्यापार बढ़ाने पर फोकस

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन जाएंगे। वहां वे अपने स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देश व्यापार और सहयोग बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री यूरोपीय उद्योग जगत के बड़े मंच 'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को भी संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद रहेंगी।

नॉर्वे और फिर इटली की यात्रा

स्वीडन के बाद पीएम मोदी नॉर्वे पहुंचेंगे। यहां, 19 मई को ओस्लो में आयोजित तीसरे इंडिया-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेता भी शामिल होंगे। दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 19 से 20 मई तक इटली जाएंगे, जहां वह प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से मुलाकात करेंगे। भारत और इटली के बीच हाल के वर्षों में रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ा है।

महंगाई का एक और झटका! पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल, सीएनजी भी हुआ महंगा

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देश के आम लोगों पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। महंगाई की मार से परेशान लोगों को लगातार झटके लग रहे हैं। पहले दूध महंगा हुआ फिर पेट्रोल-डीजल के रेट भी बढ़ गए। अब सीएनजी भी महंगा हो गया है।

पेट्रोल-डीजल के दामों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी

पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम तीन-तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। वैश्विक बाजार में ऊर्जा की जो कीमतें इतनी तेजी से बढ़ी हैं, उसका सीधा बोझ अब तेल कंपनियों ने ग्राहकों के कंधों पर डाल दिया है। इसी का नतीजा है कि अब आपको अपनी गाड़ी में तेल भरवाने के लिए पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। पेट्रोल-डीजल के दामों में आखिरी बार वृद्धि अप्रैल 2022 में हुई थी।

सरकार ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी क्यों की?

फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही थी क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों पर पड़ता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में फिलहाल पर्याप्त ईंधन स्टॉक मौजूद है, लेकिन ग्लोबल ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण पेट्रोल-डीजल महंगा करना पड़ा।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा

पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि चुनाव खत्म होते ही जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ा दिया गया है। पार्टी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल ₹3-₹3 प्रति लीटर और सीएनजी ₹2 महंगी कर दी गई है। कांग्रेस ने अपने पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा, “चुनाव खत्म, अब शुरू हुई मोदी सरकार की वसूलीय़’

16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SIR, चुनाव आयोग ने तीसरे चरण के लिए जारी किया आदेश

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चुनाव आयोग ने देशभर में मतदाता सूचियों को और ज्यादा पारदर्शी व सटीक बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। आयोग ने 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से यह अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा।

किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SIR?

चुनाव आयोग के मुताबिक, इस चरण में ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, दादरा एवं नगर हवेली-दमन एवं दीव, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली, नागालैंड और त्रिपुरा को शामिल किया गया है।

हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अभी नहीं होगा SIR

आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तीसरे चरण के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इन तीनों क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण और बर्फबारी वाले इलाकों की परिस्थितियों को देखते हुए बाद में अलग कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

जानें आपको राज्य में कब होगा घर-घर सत्यापन

जारी कार्यक्रम के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया मई से सितंबर 2026 के बीच चलेगी। इसमें घर-घर सत्यापन, मतदान केंद्रों का पुनर्गठन, ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन, दावे और आपत्तियां लेने की प्रक्रिया तथा अंतिम मतदाता सूची जारी करना शामिल है। सबसे पहले ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में 30 मई से 28 जून तक घर-घर सत्यापन अभियान चलेगा और 6 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड, मेघालय और दिल्ली में यह प्रक्रिया जून के अंत से शुरू होकर 7 अक्टूबर 2026 तक पूरी होगी।

3.94 लाख से अधिक बीएलओ मतदाओं से मिलेंगे

एसआईआर के तीसरे चरण के दौरान, 3.94 लाख से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारी (BLOs) घर-घर जाकर 36.73 करोड़ मतदाताओं से मिलेंगे; इसमें उनकी सहायता 3.42 लाख बूथ स्तरीय एजेंट (BLAs) करेंगे, जिन्हें राजनीतिक दलों द्वारा गणना चरण के दौरान नियुक्त किया गया था।

ताइवान मुद्दे पर अमेरिका संग सैन्य संघर्ष भी हो सकता है', चीन पहुंचे ट्रंप को जिनपिंग की चेतावनी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर हैं। सुबह ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप का औपचारिक स्वागत किया। हालांकि, जल्द ही बीजिंग में दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की मुलाकात के बीच माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोस्ती और शानदार भविष्य की बातें कर रहे थे, वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ चेतावनी दे दी कि अगर ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव हो सकता है।

ट्रंप ने शी को बताया महान नेता

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय बैठक से पहले उद्घाटन भाषण में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को महान नेता बताया। ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से बेहतर होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वह जिनपिंग के साथ बातचीत को लेकर उत्साहित हैं और अमेरिका में हर कोई इस शिखर बैठक की चर्चा कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि आपके साथ होना सम्मान की बात है। आपका दोस्त होना सम्मान की बात है और अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से बेहतर होने वाले हैं।

ट्रंप ने दिया अमेरिका-चीन संबंध की मजबूती पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को साझेदार होना चाहिए, न कि प्रतिद्वंदी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया बदलाव से गुजर रही है। यह एक सदी में नहीं देखा गया है। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच अमेरिका और चीन के संबंध को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।

ताइवान पर टकराव की संभावना पर किया आगाह

वहीं, दूसरी तरफ बीजिंग में ट्रंप-शी जिनपिंग की हाई-लेवल बैठक के दौरान ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा। शी जिनपिंग ने साफ कहा कि अगर ताइवान मुद्दे को ठीक से हैंडल नहीं किया गया तो अमेरिका और चीन के रिश्ते ‘बहुत खतरनाक स्थिति’ में पहुंच सकते हैं और टकराव भी हो सकता है। उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों का सबसे अहम मुद्दा बताया।

जिनपिंग ने ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का किया जिक्र

बीजिंग में बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने अपने बयान में ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र कर सबका ध्यान खींच लिया। यह अवधारणा प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडिडीज से जुड़ी है, जिसमें कहा गया है कि जब कोई उभरती ताकत स्थापित शक्ति को चुनौती देती है तो टकराव का खतरा बढ़ जाता है। शी जिनपिंग ने ट्रंप के सामने सवाल रखा कि क्या अमेरिका और चीन इस ‘जाल’ से ऊपर उठ सकते हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता और संतुलन जरूरी है।

दोनों के बीच बंद कमरे में हुई बातचीत

चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों की सबसे संवेदनशील और अहम कड़ी है। उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे को सावधानी और समझदारी से संभाला गया, तो दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन अगर इसमें दखल बढ़ा या गलत कदम उठाए गए, तो इससे पूरे द्विपक्षीय संबंध खतरे में पड़ सकते हैं।

अहम है ताइवान का मुद्दा?

ताइवान लंबे समय से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को सैन्य और राजनीतिक समर्थन देता रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ है।

दिल्ली में आज से ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक, मध्य एशिया संकट के बीच महमंथन

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भारत की अध्यक्षता में 'ब्रिक्स' देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आज से नई दिल्ली में शुरू होने जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे।

पश्चिम एशिया संकट पर होगी चर्चा

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर पड़ रहे असर को लेकर मुख्य रूप से चर्चा हो सकती है। ईरान ने ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष भारत से आग्रह किया था कि वह संघर्ष रोकने में अपनी स्वतंत्र भूमिका का उपयोग करे। इस बैठक के लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची दिल्ली पहुंच चुके हैं। अमेरिका-इजराइल से युद्ध छिड़ने के बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा है।

इन प्रमुख मुद्दों पर भी होगा फोकस

विदेश मंत्रालय के अनुसार, चर्चाओं का मुख्य केंद्र प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम, सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, और बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय शासन संरचनाओं में सुधार को आगे बढ़ाना होगा। मंत्रालय ने कहा कि भाग लेने वाले देश अपने-अपने प्रतिनिधित्व का स्तर स्वयं तय करेंगे।

शिखर सम्मेलन का एजेंडा तय करेगी बैठक

भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। सितंबर में इसका वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होना है। उससे पहले विदेश मंत्रियों का ये सम्मेलन हो रहा है। माना जा रहा है कि यह बैठक इस साल अंत में होने वाले ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के एजेंडे को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय (एमईए) ने पुष्टि की कि भाग लेने वाले देशों के वरिष्ठ राजनयिक इस बैठक में शामिल होंगे। मंत्रालय ने दो दिवसीय बैठक के दौरान होने वाली चर्चाओं की व्यापक रूपरेखा भी बताई।

भारत ने हाल में ही जारी किया था ब्रिक्स 2026 का लोगो

भारत ने हाल ही में अपनी 'ब्रिक्स 2026' अध्यक्षता के लिए आधिकारिक लोगो और वेबसाइट का अनावरण किया। अधिकारियों ने बताया कि इस बार 'ब्रिक्स' समिट की थीम भारत के 'मानवता सबसे पहले' और जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान विशेष जोर दिया था। यह चौथा अवसर होगा जब भारत ब्रिक्स के शिखर स्तर के किसी आयोजन की मेजबानी करेगा, जो इस ग्रुप के भीतर और वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच नई दिल्ली की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

नहीं बढ़ेंगे चीनी के दाम, आम आदमी को राहत देने की बड़ी पहल, केन्द्र ने निर्यात पर लगाई रोक

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केंद्र सरकार ने देश में चीनी की सप्लाई बनाए रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है। घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए भारत ने चीनी के निर्यात पर बैन लगा दिया है। सरकार ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि फिलहाल 30 सितंबर या अगले आदेश तक देश से चीनी के निर्यात को रोका गया है।

घरेलू खपत से कम हुआ चीनी उत्पादन

भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बढ़ा चीनी उत्पादक देश है। भारत ने पहले चीनी मिलों को 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी। सरकार को उम्मीद थी कि उत्पादन घरेलू मांग से अधिक रहेगा। हालांकि अब अनुमान है कि प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में पैदावार कमजोर रहने के कारण लगातार दूसरे वर्ष चीनी उत्पादन घरेलू खपत से कम रह सकता है। जिसके बाद रॉ, सफेद और रिफाइंड चीनी के एक्सपोर्ट पर तुरंत रोक लगाई गई है।

कीमत बढ़ने से रोकने के लिए बड़ी पहल

देश में चीनी की कीमत बढ़ने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस साल अल नीनो के कारण मॉनसून के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इससे अगले सत्र में चीनी का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे कीमतों में उछाल आ सकती है। इसके मद्देनजर सरकार ने चीनी का एक्सपोर्ट रोकने का फैसला किया है।

जिन खेपों की लोडिंग हो चुकी है उन्हें भेजने की अनुमति

सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन खेपों की लोडिंग आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने से पहले शुरू हो चुकी थी, उन्हें निर्यात की अनुमति दी जाएगी। व्यापारियों के अनुसार, निर्यात के लिए स्वीकृत 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी में से लगभग 8 लाख टन के निर्यात अनुबंध किए जा चुके थे, जिनमें से 6 लाख टन से अधिक चीनी पहले ही भेजी जा चुकी है। हालांकि जो खेप पहले से निर्यात प्रक्रिया में हैं उन्हें निर्धारित शर्तों के तहत भेजने की अनुमति दी जाएगी।

सड़क पर उतरे GenZ, नेपाल-बांग्लादेश की तरह करें आंदोलन’, केजरीवाल की युवाओं से सरकार हिलाने देनी की अपील

#arvindkejriwalattacksbjpoverneetpaper_leak 

नीट पेपर लीक मामले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ‘जेन Z’ यानी युवाओं सड़क पर उतरने की अपील की है। नीट पेपर लीक को लेकर बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने खास तौर पर देश के ‘जेन Z’ यानी युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अगर अब भी युवा आवाज नहीं उठाएंगे तो पेपर लीक का सिलसिला कभी नहीं रुकेगा।

केंद्र और भाजपा शासित राज्य सरकारों पर गंभीर आरोप

अरविंद केजरीवाल ने देश में हो रहे पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में जब से मोदी सरकार आई है टोटल हमारे देश में 93 पेपर लीक हो चुके हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि नेपाल और बांग्लादेश में जेन जेड ने सरकारें गिरा दीं, क्या हमारे युवा परीक्षा पत्र लीक में शामिल लोगों को जेल नहीं भेज सकते? अगर पेपर लीक रोकना है तो हमारी Gen Z को आंदोलन करना होगा।

पेपर लीक मामले में सीबीआई को भी घेरा

अरविंद केजरीवाल ने कहा, मैं देश के Gen Z से सीधे बात करने आया हूं। मेरी बात ध्यान से सुनना। 2017, 2021, 2024 में पेपर लीक हुए थे। उस समय सीबीआई को जांच सौंप दी गई। क्या सीबीआई ने कुछ किया? इस बार भी सीबीआई को जांच सौंपी गई है। क्या सीबीआई कुछ करेगी? 

सीबीआई पर लगाया गंभीर आरोप

दिल्ली के पूर्व सीएम ने कहा, 2024 के जो मास्टरमाइंड थे, उनको सीबीआई ने गिरफ्तार किया। कानून के मुताबिक गिरफ्तारी के 90 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल होनी होती है, नहीं तो आदमी को ऑटोमैटिक बेल मिल जाती है। सीबीआई ने सो-कॉल्ड मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया और 90 दिन में सीबीआई ने चार्जशीट फाइल नहीं की, और उसको ऑटोमैटिक बेल मिल गई। क्यों? आपको लगता है कि सीबीआई ने इसलिए चार्जशीट फाइल नहीं की क्योंकि सीबीआई इनएफिशिएंट है? ना, सीबीआई इनएफिशिएंट नहीं है। सीबीआई में बड़े अच्छे-अच्छे अफसर हैं। क्योंकि सीबीआई उन्हीं लोगों को रिपोर्ट करती है जो इस देश में पेपर लीक करवा रहे हैं। सीबीआई किसी को सजा दिलवा ही नहीं सकती।

बीजेपी शासित राज्यों का किया जिक्र

केजरीवाल ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों में बार-बार पेपर लीक होना महज संयोग नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, इस बार भी राजस्थान से मामला सामने आया और वहां बीजेपी की सरकार है। इससे शक होता है कि क्या इनके नेता भी इसमें शामिल हैं? अगर ऐसा है तो सरकार निष्पक्ष कार्रवाई कैसे करेगी?

पीएम मोदी ने 50 फीसदी कम किया अपना काफिला, दूसरे मंत्रियों और विभागों को बड़ा संदेश

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष थमता नहीं दिख रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया में ईंधन संकट की आहट है। इस हालात से निपटने के लिए भारत में भी तैयारी शुरू हो चुकी। इसी क्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों देश से ईंधन की खपत कम करने की अपील की थी। इस बीच पीएम मोदी ने बड़ा कदम उठाते हुए ना केवल दूसरे मंत्रियों और सरकारी विभागों को बल्कि आम जनता को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

एसपीजी को 50 प्रतिशत गाड़ियों को कम करने का निर्देश

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अपनी सुरक्षा के लिए तैनात विशेष सुरक्षा दल (एसपीजी) को अपने काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा पीएम मोदी ने एसपीजी को यह भी कहा है कि जहां तक हो सके, बिना नई गाड़ियां खरीदे, उनके काफिले में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को शामिल किया जाए।

मंत्रालय और अन्य विभाग भी खर्च में करने जा रहे कटौती

संकेत मिल रहे हैं कि मंत्रालय और विभाग आने वाले दिनों में खर्च में कटौती के उपाय अपनाने की तैयारी कर रहे हैं, जिनमें कर्मचारियों को मेट्रो का अधिक उपयोग करने, कार पूलिंग को अपनाने और बड़े आयोजनों से बचने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

सीएम योगी के काफिले में भी 50 फीसदी की कटौती

सीएम योगी ने भी पीएम की अपील पर अमल किया हैं। उन्होंने मुख्य सचिव, डीजीपी, सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव की बैठक में ये निर्देश दिया कि उनकी और अन्य मंत्रियों की फ्लीट में 50 फीसदी की कमी तत्काल प्रभाव से की जाए। उन्होंने काफिले से गैरजरूरी वाहनों को हटाए जाने के निर्देश दिए हैं।

हैदराबाद से पीएम मोदी ने की थी अपील

पीएम मोदी ने हाल ही में हैदराबाद दौरे के दौरान देशवासियों से ईंधन की खरीद कम करने और सोने की खरीद एक साल तक नहीं करने की अपील की थी। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने काफिले को घटना ये इशारा है कि सरकार के अन्य विभाग इस दिशा में कदम उठाएं और जल्द से जल्द इस दिशा में काम करें।

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन, अखिलेश यादव के थे सौतेले भाई

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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के भाई और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति का निधन हो गया है। प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। बताया जा रहा है कि किचन में प्रतीक यादव बेहोश पड़े हुए थे। थोड़ी देर में उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा। प्रतीक यादव की मौत संदिग्ध मानी जा रही है।

किचन में बेहोश पड़े थे प्रतीक यादव

प्रतीक बुधवार तड़के करीब चार बजे घर के किचेन में अचेत अवस्था में मिले थे। जानकारी के अनुसार सुबह छह बजे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में लाए गए थे। डॉक्टर ने जांच पड़ताल करके उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम की वीडियो ग्राफी होगी

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। डॉक्टर्स का पैनल प्रतीक यादव का जल्द पोस्टमार्टम करेगा। पोस्टमार्टम की वीडियो ग्राफी कराई जाएगी। 

राजनीति के बजाय बिजनेस और फिटनेस सेक्टर में बनाया करियर

देश के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के बावजूद प्रतीक ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी थी। उनकी पत्नी अपर्णा यादव राजनीति में सक्रिय हैं और फिलहाल भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई हैं। अपर्णा यादव अक्सर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहती हैं। प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से पढ़ाई की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में आने के बजाय बिजनेस और फिटनेस सेक्टर में अपना करियर बनाया।