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16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SIR, चुनाव आयोग ने तीसरे चरण के लिए जारी किया आदेश

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चुनाव आयोग ने देशभर में मतदाता सूचियों को और ज्यादा पारदर्शी व सटीक बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। आयोग ने 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से यह अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा।

किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा SIR?

चुनाव आयोग के मुताबिक, इस चरण में ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, दादरा एवं नगर हवेली-दमन एवं दीव, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली, नागालैंड और त्रिपुरा को शामिल किया गया है।

हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अभी नहीं होगा SIR

आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तीसरे चरण के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इन तीनों क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण और बर्फबारी वाले इलाकों की परिस्थितियों को देखते हुए बाद में अलग कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

जानें आपको राज्य में कब होगा घर-घर सत्यापन

जारी कार्यक्रम के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया मई से सितंबर 2026 के बीच चलेगी। इसमें घर-घर सत्यापन, मतदान केंद्रों का पुनर्गठन, ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन, दावे और आपत्तियां लेने की प्रक्रिया तथा अंतिम मतदाता सूची जारी करना शामिल है। सबसे पहले ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में 30 मई से 28 जून तक घर-घर सत्यापन अभियान चलेगा और 6 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड, मेघालय और दिल्ली में यह प्रक्रिया जून के अंत से शुरू होकर 7 अक्टूबर 2026 तक पूरी होगी।

3.94 लाख से अधिक बीएलओ मतदाओं से मिलेंगे

एसआईआर के तीसरे चरण के दौरान, 3.94 लाख से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारी (BLOs) घर-घर जाकर 36.73 करोड़ मतदाताओं से मिलेंगे; इसमें उनकी सहायता 3.42 लाख बूथ स्तरीय एजेंट (BLAs) करेंगे, जिन्हें राजनीतिक दलों द्वारा गणना चरण के दौरान नियुक्त किया गया था।

ताइवान मुद्दे पर अमेरिका संग सैन्य संघर्ष भी हो सकता है', चीन पहुंचे ट्रंप को जिनपिंग की चेतावनी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर हैं। सुबह ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप का औपचारिक स्वागत किया। हालांकि, जल्द ही बीजिंग में दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की मुलाकात के बीच माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोस्ती और शानदार भविष्य की बातें कर रहे थे, वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ चेतावनी दे दी कि अगर ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो अमेरिका और चीन के बीच टकराव हो सकता है।

ट्रंप ने शी को बताया महान नेता

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय बैठक से पहले उद्घाटन भाषण में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को महान नेता बताया। ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से बेहतर होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वह जिनपिंग के साथ बातचीत को लेकर उत्साहित हैं और अमेरिका में हर कोई इस शिखर बैठक की चर्चा कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि आपके साथ होना सम्मान की बात है। आपका दोस्त होना सम्मान की बात है और अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से बेहतर होने वाले हैं।

ट्रंप ने दिया अमेरिका-चीन संबंध की मजबूती पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को साझेदार होना चाहिए, न कि प्रतिद्वंदी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया बदलाव से गुजर रही है। यह एक सदी में नहीं देखा गया है। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच अमेरिका और चीन के संबंध को मजबूत करने पर भी जोर दिया है।

ताइवान पर टकराव की संभावना पर किया आगाह

वहीं, दूसरी तरफ बीजिंग में ट्रंप-शी जिनपिंग की हाई-लेवल बैठक के दौरान ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा। शी जिनपिंग ने साफ कहा कि अगर ताइवान मुद्दे को ठीक से हैंडल नहीं किया गया तो अमेरिका और चीन के रिश्ते ‘बहुत खतरनाक स्थिति’ में पहुंच सकते हैं और टकराव भी हो सकता है। उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों का सबसे अहम मुद्दा बताया।

जिनपिंग ने ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का किया जिक्र

बीजिंग में बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने अपने बयान में ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र कर सबका ध्यान खींच लिया। यह अवधारणा प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडिडीज से जुड़ी है, जिसमें कहा गया है कि जब कोई उभरती ताकत स्थापित शक्ति को चुनौती देती है तो टकराव का खतरा बढ़ जाता है। शी जिनपिंग ने ट्रंप के सामने सवाल रखा कि क्या अमेरिका और चीन इस ‘जाल’ से ऊपर उठ सकते हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया कि दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता और संतुलन जरूरी है।

दोनों के बीच बंद कमरे में हुई बातचीत

चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों की सबसे संवेदनशील और अहम कड़ी है। उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे को सावधानी और समझदारी से संभाला गया, तो दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन अगर इसमें दखल बढ़ा या गलत कदम उठाए गए, तो इससे पूरे द्विपक्षीय संबंध खतरे में पड़ सकते हैं।

अहम है ताइवान का मुद्दा?

ताइवान लंबे समय से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान को सैन्य और राजनीतिक समर्थन देता रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ है।

दिल्ली में आज से ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक, मध्य एशिया संकट के बीच महमंथन

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भारत की अध्यक्षता में 'ब्रिक्स' देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आज से नई दिल्ली में शुरू होने जा रही है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे।

पश्चिम एशिया संकट पर होगी चर्चा

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर पड़ रहे असर को लेकर मुख्य रूप से चर्चा हो सकती है। ईरान ने ब्रिक्स के मौजूदा अध्यक्ष भारत से आग्रह किया था कि वह संघर्ष रोकने में अपनी स्वतंत्र भूमिका का उपयोग करे। इस बैठक के लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची दिल्ली पहुंच चुके हैं। अमेरिका-इजराइल से युद्ध छिड़ने के बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा है।

इन प्रमुख मुद्दों पर भी होगा फोकस

विदेश मंत्रालय के अनुसार, चर्चाओं का मुख्य केंद्र प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम, सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, और बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय शासन संरचनाओं में सुधार को आगे बढ़ाना होगा। मंत्रालय ने कहा कि भाग लेने वाले देश अपने-अपने प्रतिनिधित्व का स्तर स्वयं तय करेंगे।

शिखर सम्मेलन का एजेंडा तय करेगी बैठक

भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। सितंबर में इसका वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होना है। उससे पहले विदेश मंत्रियों का ये सम्मेलन हो रहा है। माना जा रहा है कि यह बैठक इस साल अंत में होने वाले ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के एजेंडे को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय (एमईए) ने पुष्टि की कि भाग लेने वाले देशों के वरिष्ठ राजनयिक इस बैठक में शामिल होंगे। मंत्रालय ने दो दिवसीय बैठक के दौरान होने वाली चर्चाओं की व्यापक रूपरेखा भी बताई।

भारत ने हाल में ही जारी किया था ब्रिक्स 2026 का लोगो

भारत ने हाल ही में अपनी 'ब्रिक्स 2026' अध्यक्षता के लिए आधिकारिक लोगो और वेबसाइट का अनावरण किया। अधिकारियों ने बताया कि इस बार 'ब्रिक्स' समिट की थीम भारत के 'मानवता सबसे पहले' और जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान विशेष जोर दिया था। यह चौथा अवसर होगा जब भारत ब्रिक्स के शिखर स्तर के किसी आयोजन की मेजबानी करेगा, जो इस ग्रुप के भीतर और वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच नई दिल्ली की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

नहीं बढ़ेंगे चीनी के दाम, आम आदमी को राहत देने की बड़ी पहल, केन्द्र ने निर्यात पर लगाई रोक

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केंद्र सरकार ने देश में चीनी की सप्लाई बनाए रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है। घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए भारत ने चीनी के निर्यात पर बैन लगा दिया है। सरकार ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि फिलहाल 30 सितंबर या अगले आदेश तक देश से चीनी के निर्यात को रोका गया है।

घरेलू खपत से कम हुआ चीनी उत्पादन

भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बढ़ा चीनी उत्पादक देश है। भारत ने पहले चीनी मिलों को 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी। सरकार को उम्मीद थी कि उत्पादन घरेलू मांग से अधिक रहेगा। हालांकि अब अनुमान है कि प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में पैदावार कमजोर रहने के कारण लगातार दूसरे वर्ष चीनी उत्पादन घरेलू खपत से कम रह सकता है। जिसके बाद रॉ, सफेद और रिफाइंड चीनी के एक्सपोर्ट पर तुरंत रोक लगाई गई है।

कीमत बढ़ने से रोकने के लिए बड़ी पहल

देश में चीनी की कीमत बढ़ने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस साल अल नीनो के कारण मॉनसून के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इससे अगले सत्र में चीनी का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे कीमतों में उछाल आ सकती है। इसके मद्देनजर सरकार ने चीनी का एक्सपोर्ट रोकने का फैसला किया है।

जिन खेपों की लोडिंग हो चुकी है उन्हें भेजने की अनुमति

सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन खेपों की लोडिंग आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने से पहले शुरू हो चुकी थी, उन्हें निर्यात की अनुमति दी जाएगी। व्यापारियों के अनुसार, निर्यात के लिए स्वीकृत 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी में से लगभग 8 लाख टन के निर्यात अनुबंध किए जा चुके थे, जिनमें से 6 लाख टन से अधिक चीनी पहले ही भेजी जा चुकी है। हालांकि जो खेप पहले से निर्यात प्रक्रिया में हैं उन्हें निर्धारित शर्तों के तहत भेजने की अनुमति दी जाएगी।

सड़क पर उतरे GenZ, नेपाल-बांग्लादेश की तरह करें आंदोलन’, केजरीवाल की युवाओं से सरकार हिलाने देनी की अपील

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नीट पेपर लीक मामले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ‘जेन Z’ यानी युवाओं सड़क पर उतरने की अपील की है। नीट पेपर लीक को लेकर बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने खास तौर पर देश के ‘जेन Z’ यानी युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अगर अब भी युवा आवाज नहीं उठाएंगे तो पेपर लीक का सिलसिला कभी नहीं रुकेगा।

केंद्र और भाजपा शासित राज्य सरकारों पर गंभीर आरोप

अरविंद केजरीवाल ने देश में हो रहे पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में जब से मोदी सरकार आई है टोटल हमारे देश में 93 पेपर लीक हो चुके हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि नेपाल और बांग्लादेश में जेन जेड ने सरकारें गिरा दीं, क्या हमारे युवा परीक्षा पत्र लीक में शामिल लोगों को जेल नहीं भेज सकते? अगर पेपर लीक रोकना है तो हमारी Gen Z को आंदोलन करना होगा।

पेपर लीक मामले में सीबीआई को भी घेरा

अरविंद केजरीवाल ने कहा, मैं देश के Gen Z से सीधे बात करने आया हूं। मेरी बात ध्यान से सुनना। 2017, 2021, 2024 में पेपर लीक हुए थे। उस समय सीबीआई को जांच सौंप दी गई। क्या सीबीआई ने कुछ किया? इस बार भी सीबीआई को जांच सौंपी गई है। क्या सीबीआई कुछ करेगी? 

सीबीआई पर लगाया गंभीर आरोप

दिल्ली के पूर्व सीएम ने कहा, 2024 के जो मास्टरमाइंड थे, उनको सीबीआई ने गिरफ्तार किया। कानून के मुताबिक गिरफ्तारी के 90 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल होनी होती है, नहीं तो आदमी को ऑटोमैटिक बेल मिल जाती है। सीबीआई ने सो-कॉल्ड मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया और 90 दिन में सीबीआई ने चार्जशीट फाइल नहीं की, और उसको ऑटोमैटिक बेल मिल गई। क्यों? आपको लगता है कि सीबीआई ने इसलिए चार्जशीट फाइल नहीं की क्योंकि सीबीआई इनएफिशिएंट है? ना, सीबीआई इनएफिशिएंट नहीं है। सीबीआई में बड़े अच्छे-अच्छे अफसर हैं। क्योंकि सीबीआई उन्हीं लोगों को रिपोर्ट करती है जो इस देश में पेपर लीक करवा रहे हैं। सीबीआई किसी को सजा दिलवा ही नहीं सकती।

बीजेपी शासित राज्यों का किया जिक्र

केजरीवाल ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों में बार-बार पेपर लीक होना महज संयोग नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, इस बार भी राजस्थान से मामला सामने आया और वहां बीजेपी की सरकार है। इससे शक होता है कि क्या इनके नेता भी इसमें शामिल हैं? अगर ऐसा है तो सरकार निष्पक्ष कार्रवाई कैसे करेगी?

पीएम मोदी ने 50 फीसदी कम किया अपना काफिला, दूसरे मंत्रियों और विभागों को बड़ा संदेश

#pmmodibigdecision50vehiclesremovedfromconvoy_expenditure 

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष थमता नहीं दिख रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया में ईंधन संकट की आहट है। इस हालात से निपटने के लिए भारत में भी तैयारी शुरू हो चुकी। इसी क्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों देश से ईंधन की खपत कम करने की अपील की थी। इस बीच पीएम मोदी ने बड़ा कदम उठाते हुए ना केवल दूसरे मंत्रियों और सरकारी विभागों को बल्कि आम जनता को भी बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

एसपीजी को 50 प्रतिशत गाड़ियों को कम करने का निर्देश

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अपनी सुरक्षा के लिए तैनात विशेष सुरक्षा दल (एसपीजी) को अपने काफिले में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा पीएम मोदी ने एसपीजी को यह भी कहा है कि जहां तक हो सके, बिना नई गाड़ियां खरीदे, उनके काफिले में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को शामिल किया जाए।

मंत्रालय और अन्य विभाग भी खर्च में करने जा रहे कटौती

संकेत मिल रहे हैं कि मंत्रालय और विभाग आने वाले दिनों में खर्च में कटौती के उपाय अपनाने की तैयारी कर रहे हैं, जिनमें कर्मचारियों को मेट्रो का अधिक उपयोग करने, कार पूलिंग को अपनाने और बड़े आयोजनों से बचने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

सीएम योगी के काफिले में भी 50 फीसदी की कटौती

सीएम योगी ने भी पीएम की अपील पर अमल किया हैं। उन्होंने मुख्य सचिव, डीजीपी, सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव की बैठक में ये निर्देश दिया कि उनकी और अन्य मंत्रियों की फ्लीट में 50 फीसदी की कमी तत्काल प्रभाव से की जाए। उन्होंने काफिले से गैरजरूरी वाहनों को हटाए जाने के निर्देश दिए हैं।

हैदराबाद से पीएम मोदी ने की थी अपील

पीएम मोदी ने हाल ही में हैदराबाद दौरे के दौरान देशवासियों से ईंधन की खरीद कम करने और सोने की खरीद एक साल तक नहीं करने की अपील की थी। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने काफिले को घटना ये इशारा है कि सरकार के अन्य विभाग इस दिशा में कदम उठाएं और जल्द से जल्द इस दिशा में काम करें।

मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन, अखिलेश यादव के थे सौतेले भाई

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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के भाई और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति का निधन हो गया है। प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। बताया जा रहा है कि किचन में प्रतीक यादव बेहोश पड़े हुए थे। थोड़ी देर में उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा। प्रतीक यादव की मौत संदिग्ध मानी जा रही है।

किचन में बेहोश पड़े थे प्रतीक यादव

प्रतीक बुधवार तड़के करीब चार बजे घर के किचेन में अचेत अवस्था में मिले थे। जानकारी के अनुसार सुबह छह बजे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में लाए गए थे। डॉक्टर ने जांच पड़ताल करके उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम की वीडियो ग्राफी होगी

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। डॉक्टर्स का पैनल प्रतीक यादव का जल्द पोस्टमार्टम करेगा। पोस्टमार्टम की वीडियो ग्राफी कराई जाएगी। 

राजनीति के बजाय बिजनेस और फिटनेस सेक्टर में बनाया करियर

देश के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के बावजूद प्रतीक ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी थी। उनकी पत्नी अपर्णा यादव राजनीति में सक्रिय हैं और फिलहाल भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी हुई हैं। अपर्णा यादव अक्सर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहती हैं। प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से पढ़ाई की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में आने के बजाय बिजनेस और फिटनेस सेक्टर में अपना करियर बनाया।

सनातन को खत्म कर देना चाहिए', उदयनिधि स्टालिन ने फिर दिया विवादित बयान

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तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर से सनातन को लेकर विवादित बयान दिया है। मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपने पहले भाषण में उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सनातन धर्म लोगों को बांटता है, इसलिए इसे निश्चित रूप से खत्म किया जाना चाहिए।

सीएम विजय के सामने उदयनिधि की विवादित बयान

तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सनातन, जिसने लोगों को बांटने का काम किया, उसे खत्म कर देना चाहिए। उदयनिधि ने जिस समय यह बयान दिया उस वक्त मुख्यमंत्री विजय विधानसभा में उनके ठीक सामने बैठे थे।

उदयनिधी के बयान पर बीजेपी का पलटवार

उदयनिधी टिप्पणियों की भाजपा ने तुरंत आलोचना की, प्रवक्ता सीआर केशवन ने इसे एक जहरीली बयानबाजी करार दिया। उन्होंने कहा कि उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के राहुल गांधी हैं, जो विभाजनकारी नफरत की राजनीति फैला रहे हैं। राहुल गांधी ने पवित्र सेंगोल का मजाक उड़ाया और राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का अपमान करते हुए उसका बहिष्कार किया। राहुल गांधी की तरह, जिन्हें पिछले तीन लोकसभा चुनावों में नकार दिया गया है, उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु की जनता द्वारा दंडित और निष्कासित किए जाने के बावजूद अपनी जहरीली बयानबाजी जारी रखे हुए हैं।

2023 में भी उदयनिधि ने दिया था ऐसा ही बयान

बता दें कि 2023 में भी उदयनिधि स्टालिन ने यह बयान दिया। उदयनिधि ने सितंबर 2023 में एक सम्मेलन में कहा था कि सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है तथा उसका खात्मा किया जाना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा था कि सनातन धर्म को मच्छर, डेंगू, मलेरिया या कोरोना की तरह खत्म करना होगा। उनके इस बयान पर जमकर बवाल हुआ था। बीजेपी ने देशभर में उदयनिधि के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अब एक बार फिर इसके दोहराए जाने से सियासी माहौल गरमा गया है और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच टकराव तेज होने की संभावना बढ़ गई है।

NEET UG परीक्षा रद्द, CBI करेगी पेपर लीक की जांच

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नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द हो गई है। 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक होने के बाद से नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने रद्द करने का फैसला लिया है। अब यह परीक्षा दोबारा होगी और साथ ही मामले की जांच के लिए सीबीआई की जांच भी होगी।

सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा रद्द

पेपर लीक के आरोपों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने मंगलवार को NEET (UG) 2026 परीक्षा रद्द कर दी। एनटीए ने बताया कि भारत सरकार की मंजूरी मिलने के बाद परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया। यह परीक्षा 3 मई को हुई थी। करीब 23 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी।

दोबारा करायी जाएगी परीक्षा

परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल है। हालांकि, एजेंसी ने केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा की है। एनटीए ने कहा है कि दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा की तारीखें और दोबारा जारी किए जाने वाले एडमिट कार्ड का शेड्यूल जल्द ही आधिकारिक आधिकारिक माध्यमों से जारी किया जाएगा।

2024 में भी हुआ था पेपर लीक

2024 में भी NEET UG परीक्षा पेपर लीक के चलते कुछ सेंटर्स पर रद्द कर दी गई थी। परीक्षा 5 मई 2024 को हुई थी। 6 मई को एनटीए ने पेपर लीक की बात से इनकार किया था। इसके बाद बिहार (पटना) और झारखंड (हजारीबाग) में जांच हुई। जांच में पेपर लीक के सबूत मिले और कई गिरफ्तारियां भी हुईं थीं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था और कुछ सेंटर पर 1539 कैंडिडेट्स की दोबारा परीक्षा हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के अलावा, 67 छात्रों को 720/720 अंक मिलना और एक ही केंद्र से कई टॉपर्स का आना भी बड़े विवाद का कारण बना था।

हिमंत बिस्व सरमा दूसरी बार बने असम के सीएम, 4 मंत्रियों ने भी ली शपथ

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असम विधानसभा चुनाव में एनडीए की जबरदस्त जीत के बाद आज हिमंता बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। हिमंत सरमा लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बने हैं। उनके बाद 4 अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के कई सीनियर नेता, केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के सीएम शामिल हुए।

इन 4 नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ

1. रामेश्वर तेली (बीजेपी नेता और मोदी सरकार में पूर्व राज्य मंत्री)

2. अजंता नियोग (पिछली सरकार में वित्त मंत्री)

3. अतुल बोरा (असम गण परिषद के अध्यक्ष और पिछली 2 सरकारों में मंत्री)

4. चरण बोरो (बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के नेता, पिछली सरकार में भी मंत्री)

विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत

असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है। इस चुनाव में भाजपा नीत एनडीए ने राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए 126 में से 102 सीटों पर कब्जा किया है। भाजपा ने अकेले 82 सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की है। इस प्रचंड बहुमत के साथ हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे। उनकी लोकप्रियता और कुशल रणनीतियों ने गठबंधन को इस ऐतिहासिक सफलता तक पहुंचाया है।