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बीजेपी का हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता, राहुल गांधी का गंभीर आरोप, हरियाणा सरकार को बताया घुसपैठिया

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कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर चुनावी प्रक्रिया में धांधली का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा में भाजपा के हर छठे सांसद ने वोट चोरी के जरिए जीत हासिल की है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अगर देश में निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं तो बीजेपी 140 सीटें भी नहीं जीत पाएगी।

राहुल ने पूछा- क्या उन्हें ‘घुसपैठिए’ कहें?

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार। लोकसभा के 240 बीजेपी सांसदों में से मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है। पहचानना मुश्किल नहीं। क्या उन्हें बीजेपी की भाषा में ‘घुसपैठिए’ कहें? और हरियाणा? वहां तो पूरी सरकार ही ‘घुसपैठिया’ है। जो संस्थाएं अपनी जेब में रखते हैं, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ देते हैं। वो ख़ुद “remote controlled” हैं। उन्हें असली डर सच्चाई का है। क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हो जाएं, तो आज ये 140 के पास भी नहीं जीत सकते।’

बंगाल और असम के नतीजों पर भी बोला हमला

राहुल गांधी ने इससे पहले पश्चिम बंगाल और असम के नतीजों के बाद भी बीजेपी पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि असम और पश्चिम बंगाल में 'जनादेश की चोरी' देश के लोकतंत्र को नष्ट करने के भारतीय जनता पार्टी के 'मिशन' के तहत उठाया गया बड़ा कदम है। कांग्रेस के 'कुछ लोगों' और उन दूसरे लोगों को अच्छी तरह समझने की जरूरत है जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं। राहुल गांधी ने आगे कहा था कि क्षुद्र राजनीति को किनारे रखें, यह किसी एक पार्टी या दूसरी पार्टी के बारे में नहीं है, यह भारत के बारे में है।

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत पर बांग्लादेश की खिलीं बांछे, सुलझेगा दशकों पुराना तीस्ता जल विवाद?

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत देश की सियासी गलियारों में ही चर्चा का विषय नहीं है। इस जीत पर पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टियों के भीतर भी कई तरह की चर्चा और विश्लेषण हो रहे हैं। इस बड़ी चुनावी जीत ने क्षेत्रीय कूटनीति और राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत मिल रहे है।

तीस्ता जल समझौते को लेकर जगी उम्मीद

बांग्लादेश की सत्ताधारी 'बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी' (बीएनपी) ने पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज करने पर भाजपा को औपचारिक रूप से अपनी बधाई दी है। इसके साथ ही बांग्लादेश ने भारत को लेकर बड़ी उम्मीद जताई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए लंबे समय से अटके तीस्ता जल समझौते पर विचार किया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश के बीच संबंधों में सुधार की आस

वहीं, बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी बीएनपी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के शानदार प्रदर्शन की जमकर तारीफ की है। हेलाल ने कहा कि वह विजेता पार्टी भाजपा और शुभेंदु अधिकारी को बधाई देते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की यह जीत सुनिश्चित करेगी कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश सरकार के बीच संबंध पहले की तरह ही अच्छे और मजबूत बने रहें। बीएनपी के इस पूरे बयान में सबसे अहम बात तीस्ता जल बंटवारा संधि को लेकर कही गई है, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से अधर में लटकी हुई है।

तीस्ता जल को लेकर बन गई थी सहमति

सितम्बर 2011 में बांग्लादेश और भारत के जल संसाधन मंत्रियों के बीच तीस्ता समझौते पर सहमति बन गई थी। उम्मीद थी कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ढाका यात्रा के दौरान इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के कारण यह समझौता रुक गया। बता दें कि ममता बनर्जी को भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल विवाद को सुलझाने की कोशिशों में एक रुकावट के तौर पर देखा जाता रहा है।

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बिगड़े रिश्ते

शेख हसीना सरकार के अगस्त 2024 में गिरने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे, जो अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों, भारत में बांग्लादेश मिशन पर हमले, भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की मांग, ढाका में भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक केंद्र पर हमले, वीजा सेवाओं में ठहराव, व्यापारिक सुविधाओं में कटौती, और भारत में टी-20 वर्ल्ड कप क्रिकेट खेलने से बांग्लादेश क्रिकेट टीम के इनकार करने जैसी कई घटनाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को निचले स्तर तक पहुंचा दिया था। हालांकि, बांग्लादेश में फ़रवरी में हुए आम चुनाव के बाद दोनों देशों ने संबंध सुधारने की कोशिशें शुरू की हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान दिल्ली का दौरा भी कर चुके हैं।

ममता बनर्जी का इस्तीफे से इनकार, नतीजों के बाद चुनावी प्रक्रिया पर खड़े किए सवाल

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पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव हारने के बाद प्रेस कॉफ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। इसके साथ ही ममता ने कहा कि मैं लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी।

चुनाव आयोग को बताया 'खलनायक'

ममता ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि इस चुनाव में चुनाव आयोग लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने और ईवीएम में हेराफेरी करने के मामले में 'खलनायक' बन गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या आप मुझे बता सकते हैं कि वोटिंग के बाद भी ईवीएम 80-90 प्रतिशत चार्ज कैसे हो सकता है? यह कैसे संभव है?

आईपीएस और आईएएस के तबादले का आरोप

ममता बनर्जी ने आगे कहा कि चुनाव से दो दिन पहले ही उन्होंने हमारे लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। उन्होंने हर जगह छापेमारी शुरू कर दी। उन्होंने सभी आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को बदल दिया। उन्होंने अपनी पार्टी से लोगों को चुना और भाजपा ने सीधे चुनाव आयोग के साथ मिलकर खेल खेला। यह भाजपा और चुनाव आयोग के बीच एक बेटिंग है। हमने पूरी मशीनरी के खिलाफ लड़ाई लड़ी।'

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर साधा निशाना

टीएमसी अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, इसमें प्रधानमंत्री और होम मिनिस्टर भी शामिल थे। यह सीधे तौर पर उनका हस्तक्षेप था। उन्होंने एसआईआर से 90 लाख नाम हटा दिए थे। जब हम कोर्ट गए, तो 32 लाख नाम फिर से शामिल किए गए। उन्होंने बहुत ही गंदे, घटिया और शरारती खेल खेले। मैंने अपनी जिंदगी में इस तरह का चुनाव कभी नहीं देखा।

टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप

ममता बनर्जी ने कहा कि कोलकाता से जगह जंगल महल तक एक जैसा माहौल है। टीएमसी कार्यकर्ताओं के ऊपर हमले हो रहे हैं। हमारे कार्यकर्ताओं को टॉर्चर किया जा रहा है। बीजेपी जिस तरह अत्याचार कर रही है, गुंडों को सामने रखकर तांडव मचा रखा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनके साथ काउंटिंग सेंटर पर धक्का मुक्की की गई। उन्होंने कहा कि जब एक महिला कैंडिडेट के साथ ऐसा हो सकता है तो अन्य टीएमसी उम्मीदवारों के साथ क्या हुआ होगा?

अमित शाह चुनेंगे पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री, बनाए गए पर्यवेक्षक, जेपी नड्‌डा को असम की जिम्मेदारी

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पश्चिम बंगाल और असम में नई सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कवायद शुरू कर दी है। पश्चिम बंगाल और असम में विधायक दल का नेता चुनने के लिए भाजपा ने अपने केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को दी गई है। वहीं, असम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

जल्द कोलकाता जाएंगे शाह

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है। पार्टी को 206 सीटें हासिल हुई है, जबकि टीएमसी को 82 सीटें मिली हैं। अब बीजेपी सरकार बनाने की तैयारी में जुट गई है। इसी क्रम में पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्य में यह बड़ी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी गई है। अमित शाह अगले 2-3 तीनों में कोलकाता जाएंगे और विधायकों से बातचीत करेंगे। पश्चिम बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को होगा।

नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक कर चुनेंगे नेता

वहीं, पूर्वोत्तर के सबसे अहम राज्य असम के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है। यह दोनों वरिष्ठ नेता असम जाकर सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ सीधी बैठक करेंगे और उनकी राय जानने के बाद ही विधायक दल के नेता के नाम पर अंतिम मुहर लगाएंगे। इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी को रोकने में मदद मिलेगी।

9 मई को पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण, कौन होगा पहली बीजेपी सरकार का सीएम?

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पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद अब सभी की निगाहें राज्य में भाजपा के मुख्यमंत्री चेहरे और शपथ ग्रहण की तारीख पर टिक गई हैं। बंगाल में 206 सीटों पर प्रचंड जीत के बाद नए सीएम चुनने की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार, 9 मई को बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार शपथ लेगी। कोलकाता के परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण संभव है।

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज की। जिसके बाद बीजेपी ने नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए तारीख तय हो गई है। बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को आयोजित किया जाएगा।

राजनाथ सिंह जाएंगे कोलकाता

पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी इतनी बड़ी जीत के साथ उभरी है कि अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खड़ा हो गया है। क्या पार्टी अनुभवी नेता सुवेंदु अधिकारी को चुनेगी या नए चेहरे पर दांव लगाएगी? ऐसे में बुधवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कोलकाता आएंगे। वह यहां बीजेपी के जीते हुए विधायकों से बातचीत करेंगे जिसके बाद विधायक दल का नेता और बंगाल के नये मुख्यमंत्री के नाम का फैसला होगा।

सीएम की दौड़ में पहला नाम सुवेंदु अधिकारी का

मुख्यमंत्री की दौड़ में पहला नाम सुवेंदु अधिकारी का है। वह पिछले पांच सालों से राज्य में नेता विपक्ष की भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने इन चुनावों में मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनकी सीट भवानीपुर में शिकस्त दी है। ऐसे में दौड़ में सुवेंदु अधिकारी आगे माने जा रहे हैं। लेकिन अन्य राज्यों के रिकॉर्ड को देखें तो बीजेपी अभी तक चौंकाती आई है। अगर ऐसा होता है तो फिर कौन सीएम बन सकता है।

पांच विधानसभा चुनावों में किसने कहां मारी बाजी, पूरे देश से लेफ्ट सरकार का सुपड़ा साफ

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पश्चिम बंगाल से लेकर असम, केरल और तमिलनाडु सहित पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में टीएमसी को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी टीवीके ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें डीएमके या एआईएडीएमके नहीं होगी।

बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में इस बार बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने सत्ता का शिखर छू लिया। ममता बनर्जी की टीएमसी को एकतरफा हराकर भाजपा ने सबसे मुश्किल किला यानी बंगाल फतह कर लिया। बंगाल में भाजपा ने 206 सीटें जीती हैं। जबकि तृणमूल कांग्रेस 100 का आंकड़ा भी नहीं छू सकी, पार्टी 80 सीट पर जीत दर्ज की।

तमिलनाडु के नतीजों ने किया हैरान

सबसे अधिस हैरानी तमिलनाडु में हुई। तमिलनाडु की सियासत में पहली बार किस्मत आजमा रहे थलापति विजय ने अपनी पार्टी टीवीके को जबरदस्त जीत दिलाई। चुनावी राजनीति में शानदार आगाज से विजय ने तमिलनाडु की सियासत में लंबे समय से दबदबा रखने वाले द्रमुक और अन्नाद्रमुक को बहुत पीछे छोड़ दिया है। अपने पहले ही चुनाव में उन्होंने राज्य के राजनीतिक समीकरण को हिलाकर रख दिया है। विजय की पार्टी टीवीके ने 100 सीटों का आंकड़ा पार करते हुए 108 सीटों पर कब्जा जमाया है। मगर 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटें हासिल करने से चूक गई। सरकार बनाने के लिए टीवीके को कम से कम 10 सीटों की दरकार होगी।

असम में तीसरी बार भाजपा सरकार

असम में भी हिमंता सरकार की वापसी हुई है। भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। BJP ने यहां अकेले ही 82 सीटें जीतीं, जो बहुमत के आंकड़े से 18 ज्यादा है। असम में 126 सीटों पर चुनाव हुआ। भाजपा ने 89 पर चुनाव लड़ा और 82 सीटें जीतीं। मौजूदा भाजपा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। ऐसा देश में पहली बार हुआ। उसकी जीत का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा 92.1% रहा।

10 साल बाद कांग्रेस सरकार की वापसी

केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस सरकार की वापसी हुई है। केरलम में कांग्रेस ने 114 में से 63 सीटें अपने नाम की है। हालांकि सीएम पिनाराई विजयन अपनी सीट धरमदम से जीत गए, लेकिन राज्य में एलडीएफ की करारी हार हुई। एलडीएफ सरकार के 21 में से 13 मंत्री चुनाव हारे हैं। इनमें स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज, परिवहन मंत्री के बी गणेश कुमार, उद्योग मंत्री पी राजीव, उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदु, खेल मंत्री वी अब्दुरहीमान और देवस्वोम मंत्री वी एन वासवन शामिल हैं।

पुडुचेरी में रंगासामी पांचवीं बार सीएम बनेंगे

एन. रंगासामी 5वीं बार पुडुचेरी के सीएम बनेंगे। उनकी पार्टी AINRC ने 12 सीटें जीतीं। वो पहली बार 2001 में सीएम बने थे। उनकी सरकार के 2 मंत्रियों लक्ष्मीनारायणन और चंद्रा प्रियंगा को हार का सामना करना पड़ा है।

तमिलनाडु चुनाव में बड़ा उलटफेर, बदल गया दशकों का इतिहास, विजय की आंधी में स्टालिन उड़े

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तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती जारी है। तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रूझानों में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (तमिलगा वेत्री कड़गम) की आंधी दिख रही है। तमिलनाडु की राजनीति में पिछले 49 वर्षों से केवल दो ही द्रविड़ पार्टियों, द्रमुक और अन्नाद्रमुक का दबदबा रहा है। लेकिन दशकों बाद ऐसी आंधी दिख रही है, जिसने सबको हैरान कर दिया है।

टीवीके इतिहास रचने की ओर बढ़ रही

सिनेमाई पर्दे के हीरो से असल जिंदगी के राजनेता बने विजय ने 49 साल की मजबूत द्रविड़ सत्ता को हिला कर रख दिया है। ताजा रुझानों के विजय की पार्टी टीवीके सबसे आगे चल रही है और इतिहास रचने की ओर बढ़ रही है। अब तक मिले रुझानों में टीवीके करीब 109 सीटों पर आगे है। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि अगर यही रुझान जारी रहे, तो विजय की पार्टी आसानी से बहुमत हासिल कर सकती है।

अपने गढ़ में पिछड़े स्टालिन

एक्टर विजय की लहर है में एमके स्टालिन झुलस गए हैं। कोलाथुर विधानसभा सीट से एमके स्टालिन खुद पीछे चल रहे हैं। कोलाथुर सीट एमके स्टालिन का गढ़ रही है, जिसे वह 2011 से लगातार जीतते आए हैं। 2021 में उन्होंने यहाँ 70 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार तस्वीर बदलती नजर आ रही है।

50 सीटों पर सिमटती दिख रही डीएमके

अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित होगा और विजय की पार्टी महज दो साल में इतिहास रच सकती है। ऐसे में डीएमके दफ्तर से लेकर डीएमके नेताओं तक के घर पर सन्नाटा पसरा है। 2021 में 133 सीटें जीतने वाली पार्टी 2026 में 50 सीटों पर सिमटती दिख रही है। ऐसे में हर तरफ सन्नाटा पसरा है।

बंगाल चुनाव में बीजेपी की सुनामी, रूझानों में 180 के पार, ममता बनर्जी का किला ढहा

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी की सुनामी आती दिख रही है। बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है।

रुझानों में बीजेपी एकतरफा जीत

रुझानों में बीजेपी एकतरफा जीत हासिल करती दिख रही है। वोटों की शुरुआती गिनती में कड़े मुकाबले के बाद अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं और बीजेपी ने निर्णायक बढ़त बनाते हुए सियासी समीकरण पूरी तरह उलट दिए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी 183 सीटों पर बढ़त के साथ स्पष्ट बहुमत से काफी आगे निकल चुकी है, जबकि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी महज 93 सीटों पर सिमटती दिख रही है।

ममता बनर्जी और सुबेंदु अधिकारी कके बीच कड़ा मुकाबला

पश्चिम बंगाल की भवानीपुर और नंदीग्राम सीट पर सभी की नजरें हैं। भवानीपुर पर ममता बनर्जी और बीजेपी उम्मीदवार सुबेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला है। हालांकि, यहां दोनों नेताओं के बीच कड़ी टक्कर नजर आ रही है। रुझानों में कभी सुबेंदु अधिकारी तो कभी ममता बनर्जी लीड करते नजर आ रहे हैं। पहले ममता बनर्जी आगे चल रही थीं, लेकिन अब सुबेंदु अधिकारी लीड कर रहे हैं, जबकि नंदीग्राम में भी सुबेंदु अधिकारी बढ़त बनाए हुए हैं।

मोदी मैजिक के आगे ममता कका दांव फेल

पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार जिस तरह से चुनाव प्रचार किया और उनके साथ जिस तरह से लोग जुड़ते नजर आए, विपक्ष के दिमाग में तभी से खतरे की घंटी बजनी शुरू हो गई। चाहे झारग्राम में पीएम मोदी ने एक दुकान में जालमुड़ी खरीद कर खाई हो या फिर कोलकाता के पास हावड़ा में हुगली नदी में बोटिंग की हो, विपक्ष के नेताओं ने उनपर कटाक्ष करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। लेकिन, पीएम मोदी बंगाल के लोगों का मूड भांप चुके थे। मॉर्निंग वॉक के दौरान भी लोगों ने उन्हें जिस तरह से अपने बीच देखकर प्रतिक्रिया दी, उससे साफ लगा कि अब बंगाल की जनता के मन से ममता बनर्जी का प्रभाव धूमिल हो चुका है और वह बदलाव के लिए वोट डालने का मन बना चुके हैं।

पश्चिम बंगाल में रुझानों में भाजपा को बहुमत, 157 सीटों पर आगे

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पश्चिम बंगाल विधानसभा में हुए चुनाव के नतीजों की तस्वीर साफ होने लगी है। शुरुआती रुझान में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिल गया है। बीजेपी ने 147 का जादुई आंकड़े को छू लिया है। टीएमसी पिछड़ती नजर आ रही है।

सुबह 10 बजे तक के रुझान में भारतीय जनता पार्टी 147, तृणमूल कांग्रेस 107, कांग्रेस 3 सीट पर बढ़त बनाई हुई है। हालांकि चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक सुबह 10 बजकर 9 मिनट तक बीजेपी 38 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं टीएमसी 18 सीटों पर आगे चल रही है। इसके अलावा भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्टा 1 सीट पर आगे चल रही है।

बंगाल में बीजेपी में जश्न शुरू

पश्चिम बंगाल में शुरूआती रूझानों के बाद बीजेपी में जश्न मनाया जा रहा है। सुबेंदु अधिकारी ने कहा कि पहले राउंड में वह दो हजार से पीछे थे लेकिन सेकंड राउंड तक हिंदू-मुस्लिम हो गया। मैं आपको पहले दिन से बता रहा हूं कि पश्चिम बंगाल में चुनाव कैसे होता है, सबको पता है। मोयना विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार अशोक डिंडा ने कहा कि बंगाल के लोग बेवकूफ नहीं हैं। यह चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुआ है और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है।

झारमुड़ी बांटे जा रहे

भबानीपुर में जयश्री राम के नारे गूंजने लगे हैं। झारमुड़ी बंटनी शुरू हो गई है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटनी भी शुरू कर दी है। बीजेपी का बंगाल में अपनी जीत का भरोसा हो गया है। सुवेंदु अधिकारी के जयाकारे लग रहे हैं।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे आज, बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में मतगणना जारी

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देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आज, सोमवार को घोषित होंगे। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में किसकी सरकार बनेगी, अब इसका फैसला हो रहा है। कहां-किसकी सरकार बनेगी, आज यह साफ हो जाएगा। जिसके लिए पांचों राज्यों में डाले गे वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। इन परिणाम पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। ये चुनाव नतीजे ममता बनर्जी, हिमंत बिस्व सरमा, स्टालिन और पी. विजयन जैसे कद्दावर मुख्यमंत्रियों की किस्मत का भी फैसला करेंगे।

बंगाल के रिजल्ट पर देशभर की नजर

आज पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के नतीजे आ रहे हैं। मगर सबसे अधिक नजर देश और दुनिया की बंगाल पर है। राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति के जेहन में फिलहाल एक ही सवाल है कि क्या तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सत्ता बरकरार रख पाएगी या फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐतिहासिक जीत हासिल करके पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाएगी। बंगाल में एग्जिट पोल भाजपा के पक्ष में रहे हैं। अब ऐसे में दिखने वाली बात है कि ये एग्जिट पोल रिजल्ट की भविष्यवाणी सही साबित होती है या नहीं। अगर एग्जिट पोल सही साबित होते हैं तो ममता बनर्जी को झटका लग सकता है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ करेगी गेम?

केरल में पिछले दस साल से एलडीएफ की सरकार है। एग्जिट पोल की मानें तो कांग्रेस नीत यूडीएफ इस बार सत्ता में आ सकता है। पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम मोर्चा लगातार तीसरी बार जीतने की कोशिश कर रहा है, जो अब तक कभी नहीं हुआ। लेकिन यहां मुकाबला कड़ा है और कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ करीब 72 सीटें जीत सकता है। अगर यूडीएफ अच्छा प्रदर्शन करता है, तो यह कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राहत होगी और यह दिखाएगा कि वह बड़े गठबंधन का नेतृत्व कर सकती है।

तमिलनाडु में क्या स्टालिन करेंगे वापसी?

तमिलनाडु में अगली सरकार किसकी बनेगी बस कुछ देर में नतीजे आने पर तस्वीर साफ हो जाएगी। राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान 85.1 फीसदी मतदान हुआ है, जो रिकॉर्ड है। यहां आमतौर पर डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधा मुकाबला होता है, लेकिन इस बार अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके भी मैदान में है। अनुमान बताते हैं कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे है और उसे 120 से 145 सीटें मिल सकती हैं। वहीं विजय की पार्टी तीसरी ताकत बनकर उभरी है और चेन्नई व मदुरै जैसे शहरों में करीब 30 प्रतिशत वोट पा सकती है। इससे राज्य की पारंपरिक राजनीति बदल सकती है।

असम में क्या एनडीए करेगी कमाल?

वहीं, पूर्वोत्तर के असम में भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन मजबूत स्थिति में दिख रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में एनडीए लगातार तीसरी बार जीत की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। एग्जिट पोल के अनुसार एनडीए को 126 में से 85 से 100 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने मिलकर मोर्चा बनाया है, लेकिन उनके सामने भाजपा की मजबूत संगठन क्षमता की चुनौती है।