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डीसी मंजूनाथ भजन्त्री ने ओल्ड एज होम कुलगु पिस्का नगड़ी का किया निरीक्षण, अस्वस्थ बुजुर्गों के तत्काल इलाज के निर्देश

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज बिहार समाज कल्याण संस्थान (ओल्ड एज होम) कुलगु पिस्का नगड़ी पहुंच कर बुजुर्गों से मिलकर उनका हाल जाना। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की रहने की व्यवस्था, भोजन, स्वच्छता तथा चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया।

इस दौरान जिला जन संपर्क पदाधिकारी राँची, श्रीमती उर्वशी पाण्डेय एवं आश्रम के केयर टेकर उपस्थित थे।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आश्रम परिसर में एक-एक कर सभी रूम, किचन, डाइनिंग एरिया और कैंपस का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने संत मदर टेरेसा क्लिनिक का भी गहन निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने क्लिनिक में उपलब्ध दवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और इलाज की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली।

बुजुर्गों का उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त को सूचना मिली कि वृद्ध आश्रम में दो बुजुर्ग अस्वस्थ हैं और उन्हें वृद्धावस्था से संबंधित बीमारियाँ हैं। इस पर श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने तत्काल सिविल सर्जन सदर को निर्देश देते हुए कहा कि दोनों बुजुर्गों का उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जाए और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निरंतर नजर रखी जाए।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा,

“वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग हमारे समाज के अनुभवी नागरिक हैं। उनकी देखभाल, आरामदायक आवास, पौष्टिक भोजन और समय पर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना हमारा नैतिक दायित्व है।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने आश्रम प्रबंधन को निर्देश दिए कि:

- सभी कमरों में स्वच्छता और वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखा जाए

- किचन और डाइनिंग एरिया में बेहतर स्वच्छता एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था हो

- क्लिनिक में नियमित एएनएम की उपस्थिति और पर्याप्त दवाओं का स्टॉक बना रहे।

- बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से की जाए।

- किसी भी आपात स्थिति में तत्काल अस्पताल रेफर करने की व्यवस्था रखी जाए

बिहार समाज कल्याण संस्थान (ओल्ड एज होम) कुलगु पिस्का नगड़ी में वर्तमान में कई वृद्धजन रह रहे हैं, जिन्हें आश्रम द्वारा आवास, भोजन और आधारभूत सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

01 मई से शुरू होगी मकान सूचीकरण की प्रक्रिया, 15 मई तक कर सकेंगे स्व-गणना

हमारी जनगणना, हमारा विकास के मूल मंत्र के साथ आगामी जनगणना-2027 के प्रथम चरण की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य जिला में निर्धारित समयावधि के अनुसार संपन्न किया जाएगा। इस संबंध में प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं।

चार हजार से ज्यादा पदाधिकारियों/कर्मियों की प्रतिनियुक्ति

रांची जिला में जनगणना कार्य के संपादन हेतु 4232 पदाधिकारियों/कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गयी है, साथ ही संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्र प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण भी पूर्ण हो चुका है। 4134 प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जिनमें महिला प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की संख्या 1727 और पुरुष प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की संख्या 2407 है।

प्रथम चरण दो भागों में विभाजित

जनगणना-2027 के प्रथम चरण को दो भागों में विभाजित किया गया है। 1 मई से 15 मई 2026 तक स्व-गणना (सेल्फ इनुमेरिशन) एवं 16 मई से 14 जून 2026 तक मकान सूचीकरण एवं घर-घर गणना कार्य पूर्ण किया जायेगा। इस अवधि में जिला के प्रत्येक क्षेत्र के हर मकान का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाएगा।

स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया

नागरिकों को सुविधा प्रदान करने हेतु स्व-गणना की व्यवस्था की गई है। स्व-गणना की अवधि 1 मई से 15 मई 2026 निर्धारित है। यह प्रक्रिया ऐच्छिक है, अनिवार्य नहीं। नागरिक ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) पर जाकर स्वयं अपना विवरण दर्ज कर सकते हैं। नागरिक को स्व-गणना के बाद प्राप्त SE-ID को सुरक्षित रखना होगा। जिसे प्रगणक के घर आने पर साझा करना होगा। यदि कोई व्यक्ति स्व-गणना नहीं करता है, तो भी चिंता की आवश्यकता नहीं है। प्रगणक निर्धारित अवधि में घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।

मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing & Housing Census)

16 मई से 14 जून 2026 के बीच प्रगणक प्रत्येक घर का दौरा करेंगे। इस दौरान मकान का विवरण, घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएँ एवं अन्य मूलभूत जानकारी दर्ज की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक परिवार का सही और पूर्ण विवरण दर्ज हो।

गोपनीयता और सुरक्षा की गारंटी

जनगणना से संबंधित सभी सूचनाओं की गोपनीयता सुनिश्चित की गई है। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है। डेटा सुरक्षित सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में संग्रहित किया जाता है। प्रकाशित रिपोर्ट में केवल सामूहिक आँकड़े ही प्रदर्शित किए जाते हैं। किसी भी व्यक्ति का नाम या व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं की जाती। इस जानकारी का उपयोग टैक्स, पुलिस या किसी जांच कार्य में नहीं किया जाता है।

नागरिकों के लिए सहायता

जनगणना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध है। हेल्पलाइन नंबर - 1855 है।

जनभागीदारी का आह्वान

जनगणना एक राष्ट्रीय दायित्व है, जो देश के विकास की आधारशिला तैयार करता है। प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा जिला के नागरिकों से अपील की गयी है कि वे इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएँ और सही जानकारी उपलब्ध कराएँ।

गढ़वा मे खनिजों के अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण संशोधन 2026 की अधिसूचना लागू - जिला खनन पदाधिकारी।


गढ़वा :- झारखंड सरकार ने झारखंड खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) संशोधन 2026 की अधिसूचना लागू कर दी है। अब नए प्रावधानों में बिना अनुमति खनिजों के अवैध खनन, परिवहन अथवा भंडारण करने वाले पर दंड का प्रावधान किया गया है। उक्त बातें जिला खनन पदाधिकारी राजेंद्र उरांव ने बताई है। वहीं उन्होंने कहा कि खनिजों के अवैध खनन, परिवहन अथवा भंडारण में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न वाहनों/मालवाहक वाहनों पर नई दर लागू किए गए हैं।

वहीं उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर ट्रॉली पर ₹50 हज़ार, मेटाडोर/हाफ ट्रक 407/408 पर ₹1 लाख, फुल बॉडी ट्रक (छ: चक्का) पर ₹2 लाख, डम्पर (हाइड्रोलिक छ: चक्का/दस चक्का या इससे अधिक चक्का) पर ₹3 लाख एवं क्रेन, बोट, एक्सभेटर, लोडर, पावर हैमर, कम्प्रेसर या ड्रिलिंग मशीन पर ₹5 लाख तक का दंड प्रावधान है। उन्होंने बताया कि नियम में संशोधन होने से राज्य में खनिजों के अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण पर रोक लगेगी। खनिज के परिवहन के लिए वैध चालान अनिवार्य है।

मतदाता सूची SIR को लेकर रांची में महत्वपूर्ण बैठक, डीसी मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर हुई समीक्षा

जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के दिशा- निर्देश पर निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी, 66-माण्डर (राँची), श्रीमती मोनी कुमारी द्वारा कार्यालय कक्ष में आज दिनांक 29.04.2026 को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उप निर्वाचन पदाधिकारी राँची, श्री बिवेक कुमार सुमन एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में ERO/AERO, BLO, BLO Supervisor एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर सहित सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य SIR अभियान को सुचारू, प्रभावी एवं समयबद्ध रूप से पूरा करना था।

बैठक में चर्चा के प्रमुख बिंदु:

- मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने हेतु घर-घर जाकर सत्यापन (door-to-door verification) की रणनीति।

- नए योग्य मतदाताओं का पंजीकरण, गलत/डुप्लिकेट/मृत/स्थानांतरित नामों की पहचान एवं विलोपन।

- BLOs द्वारा फॉर्म भरने, दस्तावेज सत्यापन तथा फोटो गुणवत्ता सुधार संबंधी कार्यों की समीक्षा।

- कम्प्यूटर ऑपरेटरों को डेटा एंट्री, रिपोर्टिंग एवं ऑनलाइन पोर्टल (voters.eci.gov.in) के उपयोग पर आवश्यक निर्देश।

- SIR अभियान के दौरान आने वाली चुनौतियों का समाधान एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए समय-सीमा निर्धारित करना।

निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी योग्य मतदाता सूची से वंचित न रहे और साथ ही मतदाता सूची को त्रुटिरहित, स्वच्छ एवं अद्यतन बनाने के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करें। उन्होंने BLOs और Supervisors से क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करने और नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार चलाया जा रहा एक महत्वपूर्ण अभियान है।

जनसामान्य से अपील की जाती है कि वे अपने बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) से संपर्क करें, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं और मतदाता सूची को शुद्ध रखने में सहयोग प्रदान करें।

रांची के समग्र विकास पर CM हेमन्त सोरेन की उच्चस्तरीय बैठक, स्मार्ट सिटी व पर्यटन परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय में नगर विकास एवं आवास विभाग, पथ निर्माण विभाग तथा पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य की राजधानी रांची के समग्र शहरी विकास, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण, नागरिक सुविधाओं के विस्तार, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की प्रगति तथा पर्यटन विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि विकास कार्यों के दौरान पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने आगे कहा कि सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि प्रकृति को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। साथ ही, वृक्षारोपण (प्लांटेशन) को बढ़ावा देने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने रांची स्मार्ट सिटी परियोजना को और अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान ई-ऑक्शन एवं अन्य माध्यमों से राजस्व सृजन (Revenue Generation) के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्मार्ट सिटी के अंतर्गत सभी योजनाओं को व्यावहारिक एवं जनहितकारी बनाया जाए। बैठक में विभागीय मास्टर प्लान के अंतर्गत परिसंपत्तियों (Assets) के समुचित एवं योजनाबद्ध उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि विकास कार्यों में गति लाई जा सके।

पर्यटन विभाग से संबंधित योजनाओं की भी समीक्षा की गई। इस दौरान 3D एनीमेशन एवं वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं का अवलोकन किया गया। मुख्यमंत्री ने पर्यटन स्थलों के समग्र विकास, उनकी आकर्षक प्रस्तुति तथा बेहतर सुविधाओं के विस्तार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उक्त बैठक में मंत्री श्री सुदिव्य कुमार सोनू, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, वित्त विभाग के सचिव श्री प्रशांत कुमार, भवन निर्माण विभाग के सचिव श्री अरवा राजकमल, पथ निर्माण विभाग के सचिव श्री सुनील कुमार, योजना एवं विकास विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद की बैठक, 24 जिलों में चलेगी मोबाइल साइंस बस

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत झारखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद की सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शोध एवं नवाचार को सुदृढ़ बनाने तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में नवाचार आधारित वातावरण विकसित करने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक के दौरान राज्य के समग्र विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड में प्रतिभा, संसाधन एवं संभावनाओं की कोई कमी नहीं है; आवश्यकता केवल इन क्षमताओं को सही दिशा, उपयुक्त मंच एवं संस्थागत सहयोग प्रदान करने की है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं तकनीकी संस्थानों को नवाचार से जोड़ते हुए भविष्य उन्मुख शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में परिषद के माध्यम से राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रसार, अनुसंधान को प्रोत्साहन, नवाचार संस्कृति के विस्तार तथा शैक्षणिक संस्थानों, शोध संस्थाओं एवं अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। यह भी उल्लेख किया गया कि विज्ञान एवं तकनीक आधारित पहल राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करेंगी तथा झारखंड को ज्ञान-आधारित विकास की दिशा में अग्रसर करेंगी।

उक्त बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परिषद की गतिविधियों को परिणामोन्मुख बनाया जाए तथा राज्य के उच्च एवं तकनीकी संस्थानों में शोध, स्टार्टअप, इनोवेशन एवं प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान एवं नवाचार को समाज एवं शासन की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना समय की मांग है। मुख्यमंत्री ने मोबाइल साइंस एग्जिबिशन बस के संचालन पर भी विचार-विमर्श करते हुए निर्देश दिया कि इसका परिचालन राज्य के सभी 24 जिलों में सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग, विशेषकर विद्यार्थी, इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस प्रकार की पहल अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। झारखंड में विज्ञान जागरूकता के लिए मोबाइल विज्ञान प्रदर्शनी जैसी गतिविधियाँ पहले भी उपयोगी साबित हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक के साथ-साथ मैकेनिकल नवाचारों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि कृषि कार्य अधिक सुलभ, आधुनिक और उत्पादक बन सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि साइंस सिटी केवल बच्चों के आकर्षण का केंद्र न रहे, बल्कि हर आयु वर्ग के लोग वहां पहुंचें, उसे देखें और उससे प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन साइंस केंद्र एवं तारामंडलों की प्रगति की जानकारी ली तथा निर्देश दिया कि इन संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण, आकर्षक और जनोपयोगी स्वरूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को देश के विभिन्न शहरों में स्थित साइंस सिटी एवं तारामंडलों का भ्रमण कराने के लिए विशेष पहल की जाए, ताकि उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा और नवाचार के प्रति रुचि विकसित हो। उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, शोध एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में हर संभव सहयोग के लिए तैयार है।

उक्त बैठक में मंत्री श्री सुदिव्य कुमार सोनू, विधायक श्री विकास मुंडा, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री के. श्रीनिवास, वित्त विभाग के सचिव श्री प्रशांत कुमार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर सचिव श्री राज कुमार गुप्ता, उच्च शिक्षा निदेशक श्री सुधीर बारा, तकनीकी शिक्षा निदेशक श्री सुनील कुमार, निदेशक, एनएमएल जमशेदपुर डॉ. संदीप घोष चौधरी, हेड, स्टेट साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रोग्राम (भारत सरकार) डॉ. निशा मेंदिरत्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।_

भाजपा द्वारा पानी-बिजली के ज्वलंत मुद्दे पर 6-12 मई तक जिलावार प्रदर्शन का ऐलान

बीते 17 अप्रैल को बिजली के मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन करने के बाद झारखंड भाजपा ने एक बार फिर पानी की घोर किल्लत एवं बिजली कटौती को लेकर जोरदार आंदोलन करने का ऐलान कर दिया है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने 6 से लेकर 12 मई तक यानि 6 दिनों तक भाजपा द्वारा इस गंभीर मुद्दे पर विभिन्न जिलों में जोरदार प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

प्रेस वार्ता के दौरान श्री साहू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पानी बिजली संकट से त्राहिमाम कर रही झारखंड की जनता के बीच व्याप्त भारी आक्रोश को आंदोलन के माध्यम से स्वर देने का निर्णय लिया है। इसी निमित्त भारतीय जनता पार्टी द्वारा 6 मई से लेकर 12 मई तक यानि 6 दिनों तक जिलावार जन प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। आंदोलन की तैयार रूपरेखा के अनुसार 6 मई को गढ़वा, पलामू एवं लातेहार, 7 मई को चाईबासा, जमशेदपुर एवं सरायकेला-खरसावां, 8 मई को हजारीबाग, चतरा, कोडरमा एवं रामगढ़, 9 मई को दुमका, पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, देवघर एवं जामताड़ा, 11 मई को गिरिडीह, धनबाद एवं बोकारो और 12 मई को रांची, लोहरदगा, सिमडेगा, गुमला एवं खूंटी में भारतीय जनता पार्टी का एक एक कार्यकर्ता सिर पर घड़ा, डेकची सहित पानी ढोने वाले अन्य बर्तन को लेकर प्रदर्शन करेंगे। हमारी पार्टी आँखें मूंदकर नहीं बैठ सकती है। हमारे एक एक कार्यकर्ता इस जनविरोधी सरकार को कुंभकर्णी निद्रा से जगाने का काम करेंगे।

श्री साहू ने कहा कि पूरा झारखंड पेयजल की घोर किल्लत से त्राहिमाम कर रहा है। प्रदेश भर में लगभग 80000 चापानल खराब पड़े हैं। 72 घंटे में खराब पड़े चापानल को बनाने का सरकारी दावा फिसड्डी साबित हुआ है। सरकार द्वारा जारी टोल फ्री नंबर भी किसी काम का नहीं है। राज्य भर में लोग बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। जनता की यह पीड़ा राज्य सरकार को महसूस नहीं होती है। काफी दुख का विषय है कि सरकार की रुचि जनसमस्याओं को दूर करने की बजाय पूरी कैबिनेट के साथ दूसरे प्रदेशों में चुनावी दौरा कर पिकनिक मनाने में अधिक है। लगता है, सीएम का फोकस पॉइंट झारखंड की बजाय पड़ोसी राज्य हो गया है। हेमंत सरकार को भले ही आम लोगों की यह पीड़ा महसूस नहीं होती परन्तु भाजपा का एक एक कार्यकर्ता आम लोगों की इस पीड़ा को महसूस कर रहा है।

श्री साहू ने कहा कि देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर को स्वच्छ जल मिले, इसके लिए नल जल योजना के रूप में महत्वाकांक्षी योजना चलाई, इसमें सफलता भी मिली। लेकिन दुखद बात यह है कि 12764 करोड़ रुपए झारखंड में खर्च होने के बावजूद यहां पर यह योजना धरातल पर प्रभावी नहीं दिख रही है। अधिकांश जगहों पर जलापूर्ति कागजों तक ही सीमित है, नल सूखे पड़े हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल सुनी सुनाई बातों को नहीं कह रहे हैं बल्कि इस योजना का भुक्तभोगी वे खुद हैं और उदाहरण के तौर पर उनका गांव है, जहां नल तो लगा है, पाइप भी बिछाया गया है लेकिन पानी का एक बूंद आज तक नहीं मिल पाया है। हेमंत सरकार ने इस योजना में भ्रष्टाचार करने का काम किया है। आज भी राज्य में 45% परिवार इस योजना से वंचित हैं। इस योजना की झारखंड में स्थिति यह है कि यह योजना राष्ट्रीय औसत से लगभग 25% पीछे है। देशभर में नीचे से यह दूसरे स्थान पर है।

श्री साहू ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2019 से 2025 के बीच झारखंड को 12982 करोड रुपए आवंटित किए। जिसमें से 6010 करोड़ यानी 46.30% ही राज्य सरकार खर्च कर पाई। 7000 से अधिक की राशि पड़ी हुई है। राज्य सरकार दोषारोपण करती है कि केंद्र सरकार भेदभाव करती है, गैर बीजेपी शासित प्रदेश को मदद नहीं करती। इससे प्रमाणित होता है कि यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीतिक है। दरअसल केंद्र के पैसे को झारखंड सरकार खर्च ही नहीं कर पाती। आज अगर नल जल योजना को सही से जमीन पर उतारा जाता तो लोगों को पानी की इतनी भयावह स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। माताएं बहने कई किलोमीटर से माथे पर बर्तन लेकर चुआ तालाब से पानी लाने को विवश हैं। राज्य सरकार केवल बड़ी-बड़ी बातें करती है, प्रलोभन देना, ठगना ही इस सरकार का एकमात्र काम रह गया है।

श्री साहू ने कहा कि पानी की किल्लत और बिजली कटौती के विरोध में भाजपा का यह आंदोलन राज्य सरकार की नींद हराम कर देगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पानी बिजली के मुद्दे पर सरकार गंभीरता दिखाएं। लोगों को पानी की कमी नहीं हो। खराब पड़े चापानलों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। अब तो केंद्र ने भी पंचायत को पैसा दे दिया है, उसका इन कार्यों में सदुपयोग हो। प्रदेश अध्यक्ष ने चुटकी लेते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार कितनी गंभीर होगी, सरकार ही जाने। लेकिन इतना तय है कि जमीनी हकीकत से कोसों दूर सरकार की तरफ से अखबारों में खंडन जरूर किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि सरकार अपनी ऊर्जा इन सब चीजों की बजाय जनता की समस्याओं के समाधान की दिशा में लगावे तो ज्यादा बेहतर होगा।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व सांसद आभा महतो, भानु प्रताप शाही, प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाऊरी एवं प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेन्द्र प्रताप सिंह भी मौजूद थे।

आदिवासी अस्मिता बचाने दुमका कूच करेगी सीपीआईएम, मई में विशाल प्रदर्शन


आदिवासी अस्मिता और जल-जंगल-ज़मीन पर षड्यंत्र एवं प्रहार बर्दाश्त नहीं: सीपीआईएम ने फूंका आंदोलन का बिगुल

मई में दुमका आयुक्त कार्यालय पर होगा आदिवासियों का विशाल महाजुटाान

दुमका: संताल परगना के जनजातीय क्षेत्रों में कॉरपोरेट-राज्य गठजोड़ द्वारा किए जा रहे सुनियोजित भूमि अधिग्रहण और संवैधानिक अधिकारों के दमन के खिलाफ सीपीआईएम (भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी) ने आर-पार के संघर्ष का ऐलान कर दिया है। कल ही में पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित गाँवों का दौरा किया, जिसमें राज्य सचिव कॉम प्रकाश विप्लव, राज्य सचिव मंडल सदस्य सुरजीत सिन्हा, राज्य कमेटी सदस्य सुभाष हेम्ब्रम, अमल आज़ाद और जिला सचिव देवी सिंह पहाड़िया शामिल थे।

इस दौरान द्वारा उजागर हुए मुख्य तथ्य:

संवैधानिक ढाँचे का उल्लंघन: टीम ने पाया कि जिला प्रशासन और एमडीओ (MDO) स्थानीय दलाल तत्वों के साथ मिलकर वनाधिकार अधिनियम (FRA), पेसा (PESA) और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर रहे हैं। बिना ग्राम सभा की अनुमति के किए जा रहे सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाएँ पूरी तरह असंवैधानिक और अवैध हैं।

प्रशासनिक अवरोध और पट्टा दावे: क्षेत्र में वनाधिकार के दर्जनों आवेदन वर्षों से लंबित हैं। सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, लंबित दावों (विशेषकर PVTG समूहों के) का निपटारा किए बिना जबरन विस्थापन की तैयारी की जा रही है, जो कानूनी रूप से अनुचित है।

राम सभाओं की अनदेखी: प्रशासन ने पेसा (PESA) के तहत ग्राम सभाओं की सर्वोच्चता को दरकिनार कर दिया है। ग्रामीणों में व्याप्त अज्ञानता का लाभ उठाकर डराने-धमकाने और दबाव की राजनीति की जा रही है।

गाँवों का सामूहिक संकल्प और आगामी रणनीति:

1. ग्राम सभा का गठन: प्रभावित गाँवों के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्थानीय प्रधानो को 10 दिनों के भीतर औपचारिक ग्राम सभा बुलाने का अल्टीमेटम दिया है, ताकि 'वन अधिकार समिति' का गठन और नए दावों का पंजीकरण हो सके।

2. दस्तावेजी प्रमाण: ग्राम सभा की कार्यवाही और प्रस्तावों को राज्यपाल, भारत के राष्ट्रपति और उच्च न्यायालय को साक्ष्य के रूप में भेजा जाएगा।

3. संगठनात्मक लामबंदी: एक विशेष उपसमिति का गठन किया गया है जो ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण और कानूनी लड़ाई की निगरानी करेगी।

4. विशाल प्रदर्शन: इस लूट और दमन के विरोध में मई 2026 के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के समक्ष बड़ी संख्या में ग्रामीणों की प्रत्यक्ष भागीदारी के साथ विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी अंतिम रूपरेखा 10 मई को होने वाली जिला कमेटी की बैठक में तय होगी।

नेतृत्व का वक्तव्य:

पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि "आदिवासियों को उनकी पैतृक ज़मीन से बेदखल करने की किसी भी साजिश का मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि आदिवासियों के अस्तित्व की रक्षा का जन-आंदोलन है। जब तक अंतिम व्यक्ति का वनाधिकार दावा सुरक्षित नहीं होता, एमडीओ का एक भी पहिया आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा।"

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक संपन्न, ₹820 करोड़ की सड़क परियोजनाओं सहित 15 प्रस्तावों पर मुहर

W.P.(S) No.-4299/2024 सुदर्शन महतो एवं अन्य बनाम झारखण्ड राज्य एवं अन्य में दिनांक-05.08.2024 को पारित न्यायादेश एवं Contempt Case (Civil) No. 192/2025, सुदर्शन महतो एवं अन्य बनाम झारखण्ड राज्य एवं अन्य में दिनांक-12.12.2025 को पारित न्यायनिर्णय के आलोक में जिन वादियों की नियमित सेवा 10 वर्ष से कम है के नियमित सेवा के रूप में की गयी सेवा में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत अवधि को जोड़कर पेंशनादि की स्वीकृति दी गई।

झारखण्ड राज्य राजमार्ग प्राधिकार के माध्यम से "Construction of Elevated road/Flyover at Argora Chowk from Harmu (Near KAV's Restaurant) to Dibdih Bridge (Near Sailor's Knot Restaurant) with legs toward Kathal More (Chaputoli) and Towards Ashok Nagar (Near Road No. 3) including service road (कुल लंबाई-3.804 कि०मी०) (भू-अर्जन, युटिलिटी शिफ्टिंग एवं R&R सहित)" हेतु रू० 469,62,12,300/- (चार सौ उनहत्तर करोड़ बासठ लाख बारह हजार तीन सौ) मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

झारखण्ड राज्य राजमार्ग प्राधिकार के माध्यम से "करमटोली से साईंस सिटी फ्लाईओवर (सर्विस पथ सहित) (कुल लम्बाई-3.216 कि०मी०) निर्माण कार्य (भू-अर्जन, R&R, युटिलिटी शिफ्टींग, वनरोपन एवं बागवानी सहित)" हेतु रू० 351,14,44,800 /- (तीन सौ इक्यावन करोड़ चौदह लाख चौवालीस हजार आठ सौ) मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण (State School Standard Authority) के गठन की स्वीकृति दी गई।

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत पथ एवं पुल निर्माण की स्वीकृति दी गई।

दिनांक-13.07.2024 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में W.P. (S) No.- 1298/2023 अनिल कुमार सिंह एवं अन्य बनाम झारखण्ड सरकार एवं अन्य में पारित AWARD के आलोक में जिन वादियों की नियमित सेवा 10 वर्ष से कम है, के नियमित सेवा के रूप में की गई सेवा में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत अवधि को जोड़कर पेंशनादि की स्वीकृति दी गई।

W.P.(S) No.- 4501/2024 प्रभाकर सारंगी एवं अन्य बनाम झारखण्ड सरकार एवं अन्य में दिनांक-24.10.2024 को पारित न्यायादेश एवं Contempt Case (Civil) No. 347/2025, प्रभाकर सारंगी एवं अन्य बनाम झारखण्ड सरकार एवं अन्य में दिनांक-12.12.2025 को पारित न्यायनिर्णय के आलोक में वादी श्री प्रभाकर सारंगी, सेवानिवृत कोषरक्षक-सह-चौकीदार, लघु सिंचाई प्रमंडल, गुमला एवं 24 अन्य के नियमित सेवा के रूप में की गई सेवा में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत अवधि को जोड़कर पेंशनादि की स्वीकृति दी गई।

राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, पलामू के अंतर्गत GEC Palamu Innovation and Incubation Centre Foundation की स्थापना करने, उक्त Foundation अन्तर्गत 04 Centre of Excellences (CoEs) का संचालन करने तथा उक्त हेतु कुल पाँच (05) वर्षों में कुल रूपये 22,97,31,238/-(बाईस करोड़ सत्तानवे लाख इकतीस हजार दो सौ अड़तीस रुपये) मात्र के अनुमानित व्यय की स्वीकृति दी गई।

L.P.A. No.-346/2017 The State of Jharkhand Vs Ram Bali Das & Ors. एवं L.P.A. No.-509/2017 The State of Jharkhand Vs Maini Devi में माननीय झारखण्ड उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक-12.01.2023 को पारित Common न्यायादेश के अनुपालन एवं विद्वान महाधिवक्ता से प्राप्त मंतव्य के आलोक में श्री रामबली दास, श्री उपेन्द्र शर्मा एवं श्रीमती मैनी देवी झारखण्ड सरकार के अधीनस्थ अनियमित रूप से नियुक्त एवं कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की सेवा नियमितीकरण की स्वीकृति दी गई।

झारखण्ड राज्य एवं अन्य बनाम प्रदीप कुमार में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 14.11.2025 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में श्री प्रदीप कुमार, सेवानिवृत भा०व०से० पदाधिकारी (झा०-82) को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) के वेतनमान (पे मैट्रिक्स लेवल-17) में पेंशन एवं परिणामी लाभों के निर्धारण की स्वीकृति दी गई।

झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली-2026 की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई।

झारखंड राज्य के गढ़वा जिला अंतर्गत "श्री बंशीधर नगर" अनुमंडल के नाम में आंशिक संशोधन करते हुए "श्री बंशीधर नगर उंटारी" के रूप में प्रतिस्थापित किए जाने की स्वीकृति दी गई।

राज्य में AI Innovation एवं Adoption को गति प्रदान करने के लिए Google LLC के साथ MoU करने की स्वीकृति दी गई।

विभागीय अधिसूचना सं०-3842/रा०, दिनांक-24.11.2023 में प्रथम संशोधन की स्वीकृति दी गई।

झारखण्ड राज्य के अनुसूचित जनजाति के अधिकतम 20, अनुसूचित जाति के अधिकतम 10, पिछड़ा वर्ग के अधिकतम 14 एवं अल्पसंख्यक के अधिकतम 06 कुल अधिकतम 50 (पचास) प्रतिभावान छात्र/छात्राओं को चयनित कर प्रत्येक वर्ष विदेश में स्थित चयनित अग्रणी विश्वविद्यालयों/संस्थानों के चयनित कोर्स (Course) में उच्च स्तरीय शिक्षा यथा 01 (एक) वर्षीय मास्टर्स (Masters) हेतु छात्रवृति सहायता प्रदान करने की स्वीकृति दी गई।*

हेमन्त कैबिनेट का बड़ा फैसला: आपदा में अनुग्रह राशि बढ़ी, प्रक्रिया होगी सरल

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय में झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में कई मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय किस प्रकार हैं : -

अदर डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम (ODMP) योजना अंतर्गत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार के अधीन कार्यरत क्षमता संवर्धन पदाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी की सेवा अवधि विस्तार को संपुष्टि प्रदान की गई एवं वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु सेवा अवधि का विस्तार किए जाने की स्वीकृति दी गई।

विभिन्न प्रकार के चिन्हित विशिष्ट स्थानीय आपदा में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को प्रदान किए जाने वाले अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु सहमति दी गई, इस निमित्त मृतक के आश्रितों को उनके गृह जिला के उपायुक्त द्वारा घटना का सत्यापन प्राप्त कर अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी।

अनुग्रह अनुदान की राशि के दोहरे भुगतान को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सत्यापन कार्य अनिवार्य किए जाने पर सहमति दी गई, साथ ही यह निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार अथवा भारत सरकार की योजनाओं के अंतर्गत बीमित व्यक्ति या तो आपदा प्रबंधन अंतर्गत अनुग्रह अनुदान की राशि अथवा भारत सरकार/राज्य सरकार द्वारा आच्छादित बीमा की राशि में से एक प्राप्त कर सकेंगे।

सड़क दुर्घटना के अनुग्रह राशि बढ़ाने के संबंध में निर्णय : - विशिष्ट स्थानीय आपदा अंतर्गत चिन्हित अन्य आपदा अंतर्गत मृत व्यक्ति के आश्रितों के समरूप सड़क दुर्घटना में मृतक व्यक्ति के आश्रित को भी 4 लाख रुपए दिए जाने का निर्णय लिया गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व में यह राशि मात्र एक लाख रुपए थी।

युवा आपदा मित्र स्कीम जो दुमका गोड्डा, पाकुड़ एवं साहिबगंज जिले में कार्यान्वित किया जा रहा है। इस स्कीम से जुड़े स्वयंसेवकों का डेटाबेस तैयार करने और उसे इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ERSS) से सम्बध करने का निर्णय लिया गया जिससे की आवश्यकता के समय आसानी से युवा आपदा मित्रों की सेवा ली जा सकेगी। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने SOP बनाने एवं कार्य लेने के दौरान उन्हें कुछ भत्ता प्रदान करने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।

राज्य में पानी में डूबने से होने वाली मृत्यु की संख्या को ध्यान में रखकर संप्रति-48, गोताखोरों को चिन्हित कर प्रशिक्षण दिलाने के प्रस्ताव पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने गोताखोरों की संख्या को बढ़ाने पर बल देते हुए पुलिस जवान/गृहरक्षकों को सम्मिलित किए जाने के साथ-साथ महिलाओं को भी शामिल किए जाने को लेकर कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया।

बैठक में राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ० इरफान अंसारी, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह, सचिव श्री प्रशांत कुमार, सचिव श्रीमती विप्रा भाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।*