*एसआईटी का फर्जी निदेशक बनकर शिक्षकों से वसूली करने वाले हेडमास्टर समेत दो शिक्षक बर्खास्त*
नितेश श्रीवास्तव
भदोही। कालीन नगरी में फर्जी शिक्षकों के मिलने का सिलसिला नहीं थम रहा है। फर्जी एसआईटी अफसर बनकर कई सालों से शिक्षकों से वसूली करने वाले हेडमास्टर समेत दो शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है। दोनों शिक्षक बीएड और संपूर्णांनंद संस्कृत विश्वविद्यालय के फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी कर रहे थे। इन दो शिक्षकों को बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह ने बर्खास्त कर दिया। अभिलेखों की जांच एवं अधिकारियों के रिपोर्ट पर यह कार्रवाई की गई। इसमें एक हेडमास्टर फर्जी एसआईटी का निदेशक बनकर प्रदेश भर में शिक्षकों से वसूली करता था।
जिले में 885 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। इसमें चार हजार से अधिक शिक्षकों की तैनाती है। शासन स्तर से जरूरत के हिसाब से शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है। पिछले पांच से छह साल में नियुक्ति से लेकर अन्य गतिविधियां ऑनलाइन होने से प्रमाणपत्र की खामियां उजागर हो जाती हैं, लेकिन डेढ़ से दो दशक पूर्व की नियुक्ति प्रक्रिया कागजों में ही चलती थी। विश्वविद्यालय और बोर्ड स्तर पर होने वाले सत्यापन में भी झोल कर दिया जाता, इससे फर्जी और दूसरे के प्रमाणपत्र पकड़ में नहीं आते। प्रेरणा पोर्टल पर सभी अभिलेख ऑनलाइन होने के बाद प्रदेश स्तर पर बड़ी संख्या में शिक्षकों के प्रमाणपत्र संदिग्ध मिले। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से विश्वविद्यालय और बोर्ड से अभिलेखों का सत्यापन कराया।
इन पर हुई कार्रवाई
प्राथमिक विद्यालय तुलापुर रोही के हेडमास्टर अनुराग तिवारी निवासी ग्राम एवं पोस्ट बरदह तहसील लालगंज, आजमगढ़ और कंपोजिट विद्यालय कलिकमवैया के सहायक अध्यापक शैलेंद्र कुमार निवासी ग्राम भटौली पोस्ट हरहुआ वाराणसी का प्रमाणपत्र फर्जी मिला। दोनों के अनुक्रमांक पर दूसरे विद्यार्थियों का नाम अंकित मिला। सत्यापन रिपोर्ट और खंड शिक्षा अधिकारी की आख्या पर बीएसए ने दोनों शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी। दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते हुए रिकवरी का निर्देश दिया।
छह लाख की धांधली में भी आया था हेडमास्टर का नाम
प्राथमिक विद्यालय तुलापुर का हेडमास्टर अनुराग तिवारी विभाग को ही अपने चक्रव्यूह में उलझा दिया था। सेवा समाप्ति आदेश में बीएसए ने इसका जिक्र भी किया है। कहा है कि वह फर्जी एसआईटी का निदेशक बनकर जिले में ही नहीं दूसरे जनपदों में शिक्षकों को मूर्ख बनाया। यही नहीं विद्यालय में एमडीएम में करीब छह लाख की धांधली में भी उसका नाम आया। उसकी इस करतूत से विभाग की छवि धूमिल हुई। यह शिक्षक आचरण नियमावली के विरूद्ध है।
Mar 04 2025, 14:04