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ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर बलिया में INDIA गठबंधन का प्रदर्शन; राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
संजीव सिंह बलिया। लोकसभा सदस्य रामशंकर विद्यार्थी राजभर और पूर्व मंत्रियों के नेतृत्व में निकले जुलूस ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर INDIA गठबंधन बलिया के बैनर तले गुरुवार को जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’, ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ और ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ जैसे नारों से बलिया कलेक्ट्रेट परिसर को गुंजाया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा, जिसमें चुनाव आयोग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। समाजवादी पार्टी कार्यालय से निकली शक्तिशाली रैली कार्यक्रम की शुरुआत समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय से हुई, जहां नेता एवं कार्यकर्ता एकत्र हुए। यहां से हाथों में विभिन्न मांगों और विरोध नारों वाली तख्तियां लिए जुलूस की शक्ल में रैली जिलाधिकारी कार्यालय की ओर रवाना हुई। रास्ते भर कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा, निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था और मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के नारे लगाए। नेताओं ने जताई चुनाव व्यवस्था को लेकर चिंता इस अवसर पर लोकसभा सदस्य रामशंकर विद्यार्थी राजभर ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन व्यवस्था बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान पर जनता का विश्वास कायम रहना चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना लोकतंत्र की बुनियादी जिम्मेदारी है। पूर्व मंत्री अम्बिका चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में जनता का मत सर्वोपरि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते हैं, तो उनका निष्पक्ष समाधान होना चाहिए, ताकि जनता का विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं में बना रहे। "हया होती तो इस्तीफा दे चुके होते": जियाउद्दीन रिज़वी पूर्व मंत्री जियाउद्दीन रिज़वी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर निशाना साधते हुए कहा, "ज्ञानेश कुमार के अंदर अगर थोड़ी भी हया होती तो वह अबतक इस्तीफा दे चुके होते, लेकिन लगता है वह लोकतंत्र की हत्या करना उनकी नियति बन गई है।" विधायक जयप्रकाश अंचल ने कहा कि मतदाता सूची से लेकर मतदान तक प्रत्येक प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और संदेह से परे होनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा। जिलाध्यक्ष सुनील मौर्य का आह्वान समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुनील कुमार मौर्य ने कहा कि INDIA गठबंधन लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेता इस प्रदर्शन में श्रीमती मंजू सिंह, संजय उपाध्याय, डॉ. विश्राम यादव, यशपाल सिंह, सुशील पाण्डेय कान्हजी, सीमा राजभर, रामेश्वर पाण्डेय, आशुतोष ओझा, रोहित चौबे, जलालुद्दीन जे.डी., शशिकांत चतुर्वेदी, राजन कन्नौजिया, शैलेश सिंह, जयप्रकाश यादव मुन्ना, अजीत यादव, हरेंद्र गोंड, जमाल आलम, श्रीमती ममता चंद्रा, कामेश्वर सिंह, राजेश गौड़, विकेश सिंह सोनू, विजय शंकर यादव, विनय गौड़, राजेश पासवान, संजय मिश्र, श्री भगवान वर्मा, झलन यादव, रोहित यादव, अजय यादव, रोहित सिंह, जुबेर सोनू, देवीदत्त यादव, अनिल राय, नित्या सैनी, गुरुज लाल राजभर, जय प्रकाश यादव, सर्वजीत यादव, चंदन यादव, सुभाष यादव और रामनाथ पटेल सहित अनेक नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन बीरबल राम ने किया। अंत में सभी नेताओं ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।
चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान पर बोले-अरुण वर्मा पूर्व सपा विधायक*
सुल्तानपुर,समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आज हम लोगों ने प्रेसवार्ता की है,30 सितंबर को INDIA गठबंधन की बैठक दिल्ली में हुई थी। उसमें निर्णय लिया गया था कि पूरे देश में 2 अक्टूबर से लेकर 8 अक्टूबर तक लोकतंत्र बचाओ, वोट बचाओ, देश बचाओ मार्च के तहत कार्यक्रम किया जाएगा। उसी के तहत जनपद सुल्तानपुर में जिला अध्यक्ष जी के नेतृत्व में प्रेस वार्ता का आयोजन हुआ। श्री वर्मा ने आज एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि हम लोगों का कार्यक्रम चल रहा है। जयसिंहपुर,सुल्तानपुर,कादीपुर और इसौली विधानसभा में हम लोगों ने गोष्ठी करके चुनाव आयोग के खिलाफ कार्यक्रम किया। कल हम लोग समाजवादी पार्टी कार्यालय सुपरमार्केट से जिले की पाँचों विधानसभा के नेता पैदल मार्च करके मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए DM कार्यालय को ज्ञापन देंगे। SIR और वोट कटने के आरोप पर*

पूर्व विधायक बोले SIR को लेकर और ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। UP में जब SIR चल रहा था, उस दौरान समाजवादी पार्टी ने कई केस पकड़े। सबसे बड़ा उदाहरण सुल्तानपुर की जयसिंहपुर विधानसभा से है। ककरावरपुर गांव में एक बूथ पर नंदलाल निषाद जो अंगूठा लगाता है, पढ़ा-लिखा नहीं है, उस व्यक्ति के नाम से साइन करके 30 फॉर्म BLO को दिया गया। वो फॉर्म भाजपा के मंडल अध्यक्ष ने दिया था और वो तीसों फॉर्म सिर्फ एक मुस्लिम समाज के थे। नंदलाल निषाद को लखनऊ माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने बुलाया, उन्होंने प्रेस के सामने कहा, लेकिन आज तक चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई की? उसी तरह लखनऊ में एक व्यक्ति दशरथ के नाम पर 100 फॉर्म पकड़ा गया, जबकि एक व्यक्ति 5-6 से ज्यादा फॉर्म नहीं दे सकता। चुनाव अधिकारियों ने माना भी, लेकिन कार्रवाई क्या हुई? हम लगातार इसके खिलाफ लड़ रहे हैं। वोट बचाओ अभियान पर

पूर्व विधायक अरुण वर्मा बोले कि प्रारूप शाखा फॉर्म पर अमेंडमेंट किया गया है, इससे SIR में काटे गए नाम आपस में जुड़ पाएंगे। समाजवादी पार्टी लगातार लड़ रही है कि कैसे हम अपना वोट बचाएं। वोट बचेगा तो देश बचेगा, वोट बचेगा तो लोकतंत्र बचेगा। हम गांव-गांव जाएंगे और एक भी वोट कटने नहीं देंगे। सेवा पखवाड़ा और 2027 पर

श्री वर्मा बोले कि सेवा पखवाड़ा चल रहा है, देश के प्रधानमंत्री हैं। कौन सी सेवा? आप सोचिए, महंगाई, आरक्षण लूटा जा रहा है, 69 हजार भर्ती में घोटाला हुआ, हर व्यक्ति परेशान है और समय और तारीख का इंतजार कर रहा है। जिस तरह 2024 के चुनाव में मिलकर भाजपा को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से रोका था, उसमें सबसे बड़ा योगदान माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी और UP की जनता का था, उसी तरह 2027 के चुनाव में भी भाजपा को बुरी तरह हराने का काम समाजवादी पार्टी करेगी।
2026 में भौतिक विज्ञान के नोबेल पुरस्कार पर विशेष विज्ञान लेख



*भौतिकी का नोबेल 2026: फ्रांसिस हाल्जेन और 'भूतिया कणों' की खोज।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 6 अक्टूबर 2026 को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भौतिकी का नोबेल पुरस्कार बेल्जियम मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को घोषित किया है। उन्हें यह सम्मान "आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में निर्णायक योगदान और ब्रह्मांडीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज" के लिए दिया गया है।
नोबेल समिति ने इन न्यूट्रिनो कणों को "अंतरिक्ष से आने वाले भूतिया संदेश" (Ghostly messages from space) करार दिया है,जो ब्रह्मांड के सबसे रौद्र और रहस्यमयी हिस्सों से सीधी सूचना लेकर आते हैं।

*विजेता और पुरस्कार का कारण क्या है।* खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन वर्तमान में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं। उनका जन्म 1944 में बेल्जियम के टिएनेन शहर में हुआ था एवं
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, हाल्जेन को यह पुरस्कार उनके उस अभूतपूर्व विचार और वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए मिला है जिसके तहत उन्होंने दक्षिणी ध्रुव (अंटार्कटिका) की बर्फ का उपयोग न्यूट्रिनो कणों को पकड़ने के लिए किया।  नोबेल समिति के अध्यक्ष मार्क पियर्स ने कहा, "फ्रांसिस हाल्जेन ने शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है जिसने हमें एक शानदार उपकरण दिया है। उनकी दृढ़ता और वैज्ञानिक दृष्टि ने एक नए प्रकार के खगोल विज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया है।" और इस वर्ष भौतिकी की नोबेल पुरस्कार राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जो पूरी तरह से हाल्जेन को दी जाएगी क्योंकि इस वर्ष यह पुरस्कार केवल एक ही वैज्ञानिक को दिया गया है।
*क्या होते हैं,न्यूट्रिनो: ब्रह्मांड के 'भूतिया कण'।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो, ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है क्योंकि इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इनका द्रव्यमान लगभग न के बराबर होता है।
ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली भीषण घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्र) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं, या कुछ यूं कहें कि बिल्कुल भी नहीं के बराबर प्रतिक्रिया करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं। और यह तक भी पता नहीं चलता कि कब यह कण उनको पार कर रहे हैं। और यह भी जानना ज़रूरी है कि हर सेकंड अरबों-खरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर और पृथ्वी से होकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश बिना किसी क्रिया के निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था।
*क्या है,आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी: बर्फ का विशाल दूरबीन* ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन ने 1988 में एक अभूतपूर्व विचार रखा कि अंतरिक्ष से आने वाले इन रहस्यमयी कणों को पकड़ने के लिए दक्षिणी ध्रुव (South Pole, अंटार्कटिका) की विशाल बर्फ का उपयोग किया जा सकता है।उनके इसी दृष्टिकोण के कारण अंटार्कटिका की गहराई में बर्फ के नीचे 1 क्यूबिक किलोमीटर के दायरे में दुनिया का पहला विशालकाय न्यूट्रिनो डिटेक्टर बनाया गया, जिसे आइसक्यूब (IceCube) कहा जाता है। *आइसक्यूब कैसे काम करता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की आधिकारिक सूची के अनुसार आइसक्यूब में बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर या Digital Optical Modules) लगाए गए हैं, जिन्हें लगभग 1,450 से 2,450 मीटर की गहराई पर बर्फ में लगाया गया है।
जब कोई,उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी जिसे खगोलविज्ञान में (Cherenkov radiation) चेरेनकोव विकिरण कहा जाता है। यह तब उत्पन्न होता है जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) किसी माध्यम (जैसे पानी या काँच) में लगभग प्रकाश की गति से यात्रा करता है। इसके कारण आमतौर पर पानी के भीतर एक चमकदार नीली रोशनी दिखाई देती है,(Cherenkov radiation) पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर वैज्ञानिक उस सिग्नल से पता लगाते हैं कि कण कहाँ से आया, उसकी दिशा क्या थी, उसकी ऊर्जा कितनी थी और संभवतः वह किस खगोलीय स्रोत से आया। साथ ही यह भी जानना ज़रूरी है कि दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग करने के कई फायदे हैं जैसे कि यह बर्फ विभिन्न प्रकार के हस्तक्षेप से मुक्त है और यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है, यहाँ कोई भूकंप नहीं आते। अगर हम इस आइसक्यूब के निर्माण की बात करें तो पाते हैं कि आइसक्यूब का निर्माण दिसंबर 2010 में पूरा हुआ था और इसकी कुल लागत लगभग 279 मिलियन डॉलर थी।
*2013 की ऐतिहासिक खोज और महत्व क्या है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला (IceCube Neutrino Observatory)  की आधिकारिक विश्व वैज्ञानिक समुदाय की पुष्टि के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 2013 में उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो (high-energy astrophysical neutrinos) का पहली बार स्पष्ट अवलोकन था।
इनमें कुछ न्यूट्रिनो की ऊर्जा पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट Petaelectronvolt (PeV) स्तर तक थी,(पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट (Petaelectronvolt) ऊर्जा को मापने की एक अत्यंत विशाल इकाई (यूनिट) है)।अर्थात अत्यंत विशाल ऊर्जा। इस खोज ने यह प्रमाणित किया कि हमारे ब्रह्मांड में ऐसे प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं जो अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो उत्पन्न करते हैं। *इस खोज का विज्ञान की दुनिया में क्या महत्व है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि फ्रांसिस हाल्जेन के इस काम ने खगोल विज्ञान (Astronomy) के एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत की है। इस खोज से आगे आने वाले समय में ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठ सकता है क्योंकि न्यूट्रिनो अंतरिक्ष के उन सुदूर और रौद्र एवं अज्ञात कोनों की जानकारी लाते हैं, जहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं आ पाता (जैसे कि एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई या विशाल ब्लैक होल)। अब अगर हम बात करें पारंपरिक दूरबीनों एवं अन्य विधाओं की तो पाते हैं कि उनसे न्यूट्रिनों को पूरी तरीके से समझना आसान नहीं था या इसको और भी आसान भाषा में समझने की कोशिश करें तो पाते हैं कि अछूते ब्रह्मांड को देखने के साथ ही पारंपरिक टेलिस्कोप केवल प्रकाश या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों को देख सकते हैं, लेकिन आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की मदद से वैज्ञानिक अब उन अनदेखी घटनाओं का अध्ययन कर पा रहे हैं जो अरबों प्रकाश वर्ष दूर उस काले घने अंधकारमय ब्रह्मांडीय गुफाओं में घटित हो रही हैं। साथ ही इसे मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी के व्यापक विकास के संदर्भ में भी देखा जा सकता है,जहाँ प्रकाश, गुरूत्वीय तरंगें ( gravitational waves), कॉस्मिक रेज (cosmic rays)और न्यूट्रिनों (neutrinos) जैसे अलग-अलग ब्रह्मांडीय संदेशबाहकों (cosmic messengers) से ब्रह्मांड की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही यह भी ज्ञात हो कि 2018 में,आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी ने एक अत्यंत उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो को TXS 0506+056 नामक ब्लेज़र (blazar) तक ट्रेस किया,जो ओरायन तारामंडल की दिशा में 3.7 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। यह पहली बार था जब किसी न्यूट्रिनो को उसके विशिष्ट खगोलीय स्रोत से जोड़ा गया।
*क्यों इतना अनोखा है, न्यूट्रिनो और इन्हें खोजना भी इतना मुश्किल क्यों था* ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो,ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों (Subatomic particles) में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है, इन कणों पर कोई विद्युत आवेश (Charge) नहीं होता और इनका द्रव्यमान (Mass) लगभग न के बराबर ही होता है या कुछ यूं कहें कि लगभग कोई द्रव्यमान नहीं है और ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली उग्र घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल आदि) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ कोई प्रतिक्रिया भी प्रदर्शित नहीं करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों ,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था, इसलिए इसमें बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर) लगाए गए हैं। जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसीलिए इन उच्च ऊर्जा यूट्रिनो को खोजना इतना अनोखा और इतना मुश्किल एवं चुनौतीपूर्ण था। और यही कार्य एवं इनकी खोज करने के लिए बर्ष 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए देने की घोषणा की गई है। उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा है एवं आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी जहां उन्होंने दक्षिण ध्रुव (Antarctic) की गहरी बर्फ में हजारों लाइट सेंसर लगाकर दुनिया की पहली विशाल न्यूट्रिनो वेधशाला की नींव रखी, जिससे ब्रह्मांड की ऊर्जावान प्रक्रियाओं का अध्ययन संभव हुआ। साथ ही नई प्रकार की खगोल विज्ञान को भी जन्म दिया है या कुछ यूं कहें कि इस खोज ने खगोल विज्ञान (Astronomy) की एक बिल्कुल नई विधा का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे दूरस्थ आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।

*क्या है न्यूट्रिनो (Neutrino) कण की कहानी ? ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो (Neutrino) कण का सबसे पहले सैद्धांतिक अनुमान वर्ष 1930 में वोल्फगैंग पाउली (Wolfgang Pauli) ने लगाया था,जबकि वर्ष 1956 में क्लाइड कोवान (Clyde Cowan) और फ्रेडरिक रेइन्स (Frederick Reines) ने इसका प्रयोगात्मक रूप से पता लगाया (खोज की) अब अगर हम बात करें न्यूट्रिनो से जुड़े मुख्य तथ्य सैद्धांतिक प्रस्ताव की तो पाते हैं कि 1930 में वोल्फगैंग पाउली ने बीटा क्षय (beta decay) में ऊर्जा संरक्षण के नियम को समझाने के लिए इस काल्पनिक कण का सुझाव दिया था एवं इसके नामकरण की बात करें तो पाते हैं कि इसका नामकरण एक इतालवी भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने इस कण का नाम 'न्यूट्रिनो' रखा, जिसका अर्थ "छोटा उदासीन कण" है। साथ ही इसके प्रयोगात्मक खोज की बात करें तो पाते हैं कि 1956 में क्लाइड कोवान और फ्रेडरिक रेइन्स ने परमाणु रिएक्टर का उपयोग करके पहली बार न्यूट्रिनो का प्रायोगिक प्रमाण प्राप्त किया। इस खोज के लिए फ्रेडरिक रेइन्स को 1995 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला  और अब वर्ष 2026 की बात करें तो पाते हैं कि 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए दिया गया है,क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों जिन्हें न्यूट्रिनो कहा जाता है को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा।

*भारत के शोधकर्ताओं के लिए इस खोज का क्या महत्व हो सकता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह खोज विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण विचार (दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों को सुलझाया जा सकता है।
आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है, जिसमें लगभग 450 भौतिक विज्ञानी, 58 संस्थान और 14 देश शामिल हैं। साथ ही अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित IceCube Neutrino Observatory (आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला) के संदर्भ में भारत का महत्व भी कुछ मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है। जैसा कि हम जानते हैं कि आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना है, लेकिन वैसे तो भारत का इस वेधशाला से प्रत्यक्ष या सीधे तौर पर संबंध नहीं है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और संस्थान वैश्विक स्तर पर इस प्रयोग के डेटा विश्लेषण, कोडिंग और इसके माध्यम से की जाने वाली ब्रह्मांडीय खोजों (जैसे "घोस्ट पार्टिकल्स" या न्यूट्रिनो की पहचान) में अनुसंधान के ओपन-सोर्स डेटा का विश्लेषण करते हैं।और साथ में यह भी जानना आवश्यक है कि भारत भी अपना न्यूट्रिनो प्रोजेक्ट  INO (India-based Neutrino Observatory) बनाने के लिए प्रयास कर रहा है इसीलिए जब भी विज्ञान में आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी (IceCube Observatory) की बात होती है, तो उसके समानांतर भारत के अपने प्रोजेक्ट INO (इंडिया-बेस्ड न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी) की चर्चा जरूर होती है। लेकिन दोनों में अंतर क्या है? यह भी जानना ज़रूरी है,जहाँ आइस क्यूब अंटार्कटिका की गहरी बर्फ (Ice) के नीचे न्यूट्रिनो ढूंढता है, वहीं भारत का आई०एन० ओ०,(INO)  प्रोजेक्ट तमिलनाडु के थेनी जिले की बोदी पश्चिम पहाड़ियों में जमीन के नीचे एक विशाल प्रयोगशाला बनाने की योजना है एवं इसके लोकेशन के महत्व की बात करें तो पाते हैं कि भारत की भौगोलिक स्थिति भूमध्य रेखा (Equator) के पास है,यहाँ बनाई जाने वाली ऑब्जर्वेटरी से वैज्ञानिकों को उन न्यूट्रिनो कणों का भी अध्ययन करने में मदद मिल मिलेगी जो पृथ्वी के कोर (केंद्र) से होकर गुजरते हैं साथ ही यह डेटा,आइस क्यूब जैसी ध्रुवीय (Polar) ऑब्जर्वेटरी के पूरक के रूप में काम आ सकता है। लेकिन अभी तो इस प्रोजेक्ट की संपूर्ण स्थापना को कई चुनौतियों से निबटना बाकी है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अब हम पुनः संक्षेप में फ्रांसिस हाल्जेन एवं आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी की बात करें तो पाते हैं कि फ्रांसिस हाल्जेन ने अंटार्कटिका की बर्फ को एक अनोखी विशाल दूरबीन में बदल दिया, जिसने विज्ञान को ब्रह्मांड के उन सबसे रहस्यमयी 'भूतिया कणों' को पकड़ने और समझने की शक्ति दी,जो अब तक इंसान की पहुंच से पूरी तरह बाहर थे। इसीलिए यह भी समझना ज़रूरी है कि यह नोबेल पुरस्कार केवल किसी एक व्यक्ति द्वारा अकेले किए गए प्रयोग के लिए नहीं है बल्कि हाल्जेन का सम्मान उनके निर्णायक वैज्ञानिक योगदान, दृष्टि और आइसक्यूब के नेतृत्व तथा उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो की खोज से जुड़ा है। जो निश्चित तौर पर यह दर्शाता है कि अगर टीम भावना से एवं समग्र रूप से दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता से लगातार कोई भी कार्य किया जाता है तो एक दिन उन अच्छे कार्यों का फल और किसी भी समस्या का हल भी अवश्य ही प्राप्त होता है।और इसी को सार्थक होता हुआ देख सकते है कि नोबेल पुरस्कार समिति द्वारा 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार को देने की घोषणा, फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को की गई है।
इंडिया गठबंधन का मार्च जारी, कई बड़े नेता हिरासत में, आकाशवाणी के सामने राहुल-प्रियंका का धरना

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भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के सांसदों ने दिल्ली में विरोध मार्च निकाला। तिरंगा झंडा और 'लोकतंत्र बचाओ' लिखे बैनर लिए, इंडी गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक अपना विरोध मार्च शुरू किया। चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ते हुए विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त, भाजपा और आरएसएस के खिलाफ नारे लगाए।

राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए

विपक्षी दलों के 300 से ज्यादा सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च किया। प्रदर्शन के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और इंडी गठबंधन के कई अन्य नेताओं को भी चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने से रोके जाने के बाद कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके बाद छोड़ दिया गया।

बैरिकेड पर चढ़ राहुल गांधी ने लहराया तिरंगा

राहुल गांधी जब चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें पुलिस की कई बैरिकेड्स ने रोक दिया। इसके बाद वे एक बैरिकेड पर चढ़ गए और एक राष्ट्रीय ध्वज लहराया, वहां जमा हुए इंडी गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारे लगाकर उनका समर्थन किया।

राहुल गांधी ने पुलिस पर लगाया धमकाने का आरोप

इस बीच राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि यह नेता करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं और चुनाव आयुक्तों से मुलाकात करना चाहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव आयुक्त उनसे मुलाकात क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें रोक रही है और धमकी दे रही है। हम सिर्फ उनका मुकाबला नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें खत्म कर देंगे। राहुल गांधी ने आगे कहा कि देश के साथ जो किया गया है, उसे देशद्रोह कहा जाता है और इसके लिए कोई बच नहीं पाएगा।

भारत ने एशियन गेम्स में दिन का तीसरा गोल्ड जीता, लवलीना के बाद परवीन हुड्‌डा का गोल्डन पंच

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भारत ने एशियन गेम्स में शुक्रवार को तीसरा गोल्ड जीत लिया है। एशियाई खेलों में आज चौदहवें दिन आर्चरी के बाद बॉक्सिंग में ये दिन का दूसरा स्वर्ण पदक है। स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने जन्मदिन पर गोल्ड दिलाया। उसके बाद परवीन हुड्‌डा महिलाओं की 65 किग्रा में एशियन चैंपियन बनी। एक गोल्ड मेडल तीरंदाजी में आया।

परवीन हुड्डा का पहला एशियन गेम्स मेडल

परवीन हुड्डा ने महिलाओं की 65 किलो वेट कैटेगरी के फाइनल में चाइनीज ताइपे की मुक्केबाज चिन नीन-चिन को कड़े मुकाबले में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया, ये भारत को मिलने वाला कुल 13वां स्वर्ण पदक था। हरियाणा के रोहतक की 26 वर्षीय इस युवा बॉक्सर का यह पहला एशियन गेम्स मेडल है।

बॉक्सर लवलीना ने एशियन गेम्स में पहली बार जीता गोल्ड

इससे पहले भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में चीन की बाओ जियाओजी को 5-0 के एकतरफा फैसले से शिकस्त देकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। जन्मदिन के खास मौके पर उतरी लवलीना ने पूरे मुकाबले के दौरान बेहतरीन संयम का परिचय दिया और बाओ को आगे बढ़ने का मौका देकर बेहद प्रभावी काउंटर-पंचों के जरिए अंक बटोरे। शुरुआती दो राउंड जीतने के बाद उन्होंने तीसरे और अंतिम राउंड में भी अपनी शानदार पकड़ बनाए रखी और इस तरह एक आसान व आधिपत्य भरी जीत दर्ज करते हुए देश के लिए यह स्वर्ण पदक पक्का किया।

भारत मेडल टैली के छठे स्थान पर

एशियन गेम्स में भारत मेडल टैली के छठे स्थान पर है। उसके पास 13 गोल्ड, 25 रजत और 35 कांस्य जीते हैं। भारत के कुल 73 मेडल हैं। वहीं, मुक्केबाजी में 5 मेडल आ चुके हैं। इनमें 3 ब्रॉन्ज भी शामिल हैं।

एशियन गेम्स में भारत को आठवां गोल्ड, चिकिथा-राजेश की टीम ने तिरंदाजी में जीता दूसरा सोना

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जापान में जारी एशियन गेम्स 2026 का आज 12वां दिन है। भारतीय आर्चरी टीम ने दिन की स्वर्णिम शुरूआत की। भारतीय आर्चरी खिलाड़ियों ने दो गोल्ड मेडल जिताते हुए स्वर्ण पदकों की संख्या आठ कर दी है। महिला टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए चीन को हराकर गोल्ड जीतने के बाद भारतीय तीरंदाजों का हौसला बुलंद है। भारतीय जोड़ी ने अब एक और स्वर्ण पदक देश की झोली में डाल दिया है।

कोरिया को हरा कर जीता आठवां गोल्ड

भारत के लिए आज की शुरुआत खास रही है। भारतीय तीरंदाजी ने कमाल कर दिया है। आज सुबह महिला कंपाउंड टीम ने स्वर्ण जीता। अब कुछ ही घंटे बाद मिक्स्ड कंपाउंड टीम ने भी स्वर्ण जीत लिया है। भारतीय मिश्रित कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने कोरिया को हराते हुए आठवां गोल्ड जीत लिया। राजेश जाधव और चिकिथा तनिपार्थी की जोड़ी ने कोरियाई जोड़ी को टाईब्रेक में हराया। इस तरह भारत की झोली में आठवां गोल्ड मेडल आया

आर्चरी का दूसरा गोल्ड

आर्चरी के कंपाउंड मिक्स्ड टीम के हाई-वोल्टेज और सांस रोक देने वाले फाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया है। निर्धारित चार एंड के बाद मुकाबला बराबरी पर रहने के कारण फैसला शूट-ऑफ से हुआ। दबाव भरे पलों में भारतीय जोड़ी चिकिता और साहिल दोनों ने सटीक निशाना साधते हुए 10-10 पॉइंट का परफेक्ट स्कोर दागा। जवाब में कोरियाई पुरुष तीरंदाज 9 पॉइंट पर निशाना ही लगा सका, जिससे भारत ने यह गोल्डन बाजी अपने नाम कर ली।

भारत को मिला सातवां गोल्ड

इससे पहले भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने चीन को हराते हुए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। ओकाजाकी चुओ सोगो पार्क में ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिथा तनिपार्थी और पृथिका प्रदीप की भारतीय टीम ने चीन को मुकाबले में कहीं टिकने ही नहीं दिया। भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने 2023 में हांगझोउ में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।

विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बड़ी बैठक आज, जानें किन मुद्दों पर होगा मंथन

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बारतीय निर्वाचन आयोग से जुड़े विवाद के बीच विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में विपक्षी गठबंधन 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस' (INDIA) के प्रमुख नेता आज दिल्ली में बड़ी बैठक कर रहे हैं। इसमें निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ संयुक्त अभियान को अंतिम रूप देने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

ममता बनर्जी भी बैठक में होंगी शामिल

कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, जयराम रमेश और के. सी. वेणुगोपाल शामिल होंगे। पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के भी बैठक में शामिल होने की जानकारी है। समाजवादी पार्टी, भाकपा, माकपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार गुट और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के नेता भी बैठक में मौजूद रहेंगे। झामुमो, आईयूएमएल, वीसीके, एमडीएमके, केरल कांग्रेस, बीएपी, आरएलपी, फॉरवर्ड ब्लॉक और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल भी चर्चाओं में हिस्सा लेंगे। ऐसे में आज की बैठक पर नजर इस बात पर रहेगी कि निर्वाचन आयोग के मुद्दे पर विपक्षी दल किस साझा रणनीति पर पहुंचते हैं।

इन दलों ने बैठक से बनाई दूरी

आम आदमी पार्टी ने इस बैठक में शामिल न होने का स्पष्ट ऐलान किया है। पार्टी सांसद संजय सिंह के मुताबिक, आप इस बैठक से दूर रहेगी, हालांकि वह चुनाव आयोग के खिलाफ संसद में विपक्षी मांगों का समर्थन करेगी। वहीं, तमिलनाडु चुनावों के बाद कांग्रेस से उपजे राजनीतिक मतभेदों के चलते द्रमुक ने इस बैठक का बहिष्कार किया है और खुद को गठबंधन से अलग कर लिया है। नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल ने भी इस बैठक का हिस्सा न बनने का निर्णय लिया है। तमिलनाडु में कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाने वाली अभिनेता विजय की नई पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके भी इस बैठक में भाग नहीं ले रही है।

क्या होगी विपक्षी दलों की रणनीति?

अब नजर इस बात पर रहेगी कि बुधवार की बैठक में विपक्षी दल निर्वाचन आयोग के मुद्दे पर किस तरह की साझा रणनीति तैयार करते हैं। कांग्रेस पहले ही बड़े आंदोलन की योजना की बात कह चुकी है, जबकि गठबंधन के भीतर सभी दलों की भागीदारी एक जैसी नहीं दिख रही है। आम आदमी पार्टी और द्रमुक की गैरमौजूदगी के बीच बैठक में मौजूद दलों के बीच सहमति किस स्तर तक बनती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। बैठक के बाद सामने आने वाले फैसलों से साफ होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को आगे किस रूप में उठाने की तैयारी कर रहा है।

हमारी चिंताओं को लेकर अमेरिका गंभीर नहीं' यूएस की धरती से एस जयशंकर ने उसे सुनाया

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भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। जयशंकर ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करने को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा है कि आतंकवाद को लेकर भारत की च‍िंताओं के प्रत‍ि अमेरिका का असंवेदनशील होना दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक समस्या है।

पाकिस्तान का नाम लिए बिना आतंकवाद पर घेरा

न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में जयशंकर ने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लेते हुए कहा कि पड़ोसी देश से फैलने वाला आतंकवाद भारत की सुरक्षा से जुड़ी मुख्य चिंताओं में से है। बहुत कम देश ऐसे हैं, जिन्हें किसी पड़ोसी देश से उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जैसा हमने किया है।

पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर अमेरिका पर सवाल

जयशंकर ने पूरी गंभीरता से कहा कि भारत के लिए सुरक्षा सबसे अहम है। उन्होंने कहा, अगर हमारा कोई सहयोगी (यूएस) हमारी इस मुख्य चिंता को नहीं समझता है तो जाहिर है कि इसका असर हमारे रिश्तों पर पड़ता है। गौरतलब है कि भारत लंबे समय से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा विभिन्न वैश्विक मंचों पर उठाता आया है, लेकिन अभी तक पाकिस्तान के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। खासकर ट्रंप प्रशासन ने तो पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर जवाबदेह ठहराने से भी परहेज किया है।

कूटनीति के दिखावे अब खत्म हो गए-जयशंकर

जयशंकर ने कहा कि एक समय अमेरिका में यह सोच थी कि भारत के पास बहुत सारे विकल्प नहीं होने चाहिए और नई दिल्ली को वॉशिंगटन के साथ अपने रिश्तों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि अमेरिका खुद हमेशा से अपने विकल्प खुले रखता आया है। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि कूटनीति के ऐसे दिखावे अब खत्म हो गए हैं और देश अब एक-दूसरे के साथ खुलकर जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बहुध्रुवीय दुनिया की ओर हो रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है।

अमेरिका ने व्यापार का एक नया तरीका अपनाया-जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह भी कहा कि अमेरिका ने व्यापार का एक नया तरीका अपनाया है। यह तरीका वन-टू-वन डील है यानी हर चीज पर फिर से बातचीत। हर कोई खुलकर एक-दूसरे के साथ डील कर रहा है। विदेश मंत्री ने इस दौरान साफ कहा कि हम आज मल्टीपोलैरिटी (बहु-ध्रुवीयता) की ओर बढ़ रहे हैं।

सही, समयबद्ध और सत्यापित डेटा प्रभावी नीति निर्माण का आधार: योगेन्द्र उपाध्याय
- *राज्य स्तरीय AISHE कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री ने डेटा की शुद्धता और समयबद्धता पर दिया जोर*
- *डेटा कलेक्शन को औपचारिकता नहीं, नीति एवं योजना निर्माण की जिम्मेदारी मानें: उच्च शिक्षा मंत्री*

लखनऊ। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा से संबंधित सही, समयबद्ध और सत्यापित डेटा केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रभावी नीति निर्माण, योजनाओं के निर्धारण और उच्च शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण आधार है। डेटा के आधार पर ही तय किया जा सकता है कि कहां नए संस्थानों की आवश्यकता है, कहां शिक्षकों एवं संसाधनों की जरूरत है और विकास के लिए किन क्षेत्रों में विशेष कार्य किए जाने चाहिए। अर्थात भावी कार्यक्रम, योजनाएं और नीतियों का उचित निर्धारण डाटा पर ही निर्भर करता है।
उच्च शिक्षा मंत्री सोमवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय AISHE (All India Survey on Higher Education) कार्यशाला में विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के समन्वय से किया गया। इसमें डेटा संग्रहण, सत्यापन, सबमिशन, विश्लेषण तथा संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई।
मंत्री उपाध्याय ने कहा कि डेटा समाज और उच्च शिक्षा व्यवस्था का दर्पण है। भारत सरकार और प्रदेश सरकार अनेक महत्वपूर्ण निर्णय उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लेती हैं। इसलिए डेटा कलेक्शन को नियमित प्रक्रिया न मानकर नीति एवं योजना निर्माण की जिम्मेदारी के रूप में लिया जाए। यदि डेटा सही होगा तो योजनाएं भी अधिक प्रभावी बनेंगी।
उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा संबद्ध महाविद्यालयों एवं संस्थानों के AISHE डेटा को नियमित अपडेट करने पर जोर दिया। कहा कि कई संस्थान AISHE कोड प्राप्त करने के बाद समय पर डेटा नहीं देते, जिससे उनका स्टेटस निष्क्रिय हो सकता है और इसका असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। नोडल अधिकारी नियमित समीक्षा करें। पोर्टल खुलने के बाद अंतिम तिथि की प्रतीक्षा की प्रवृत्ति से बचें, समय रहते डेटा प्राप्त कर परीक्षण सुनिश्चित करें। नामांकन, रिक्तियों, पाठ्यक्रमों, परीक्षा, परिणाम, आधारभूत संरचना की सूचनाएं मूल अभिलेखों से सत्यापित कर ही दर्ज की जाएं। केवल डेटा भरना पर्याप्त नहीं, उसकी शुद्धता और प्रमाणिकता भी सुनिश्चित हो।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि नोडल अधिकारियों की भूमिका केवल कलेक्शन तक सीमित न रहे। अंतिम अनुमोदन से पहले क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाए, आवश्यकता अनुसार रैंडम वेरिफिकेशन कर अभिलेखों और AISHE डेटा की वास्तविकता जांची जाए और संस्थानों को तकनीकी-प्रशासनिक सहयोग भी दिया जाए। प्रदेश का प्रयास जीरो पेंडेंसी की दिशा में होना चाहिए। कोई भी पात्र एवं कार्यशील संस्थान प्रशासनिक लापरवाही से सर्वे से बाहर न रहे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सही सूचना, सही समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है। आंकड़ों से भविष्य की आवश्यकताओं की पहचान कर नए संस्थानों, फैकल्टी और विभागों पर बेहतर योजना बन सकती है। डेटा प्लानिंग को औपचारिकता नहीं, पॉलिसी प्लानिंग की जिम्मेदारी मानना चाहिए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि AISHE के लिए डेटा प्रबंधन केवल नोडल अधिकारी की नहीं, पूरे संस्थान की जिम्मेदारी है। डेटा प्रवेश, परीक्षा सहित विभिन्न अनुभागों से आता है, इसलिए विश्वसनीयता के लिए संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर एसओपी तैयार कर अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने विश्वविद्यालय रिकॉर्ड और AISHE रिकॉर्ड में एकरूपता, एफिलिएशन सूची के रीकन्सिलिएशन, गलत रिपोर्टिंग और डबल रिपोर्टिंग से बचने के लिए प्रामाणिक अभिलेखों की जांच तथा असामान्य बदलाव पर गहराई से समीक्षा पर जोर दिया। डेटा अपलोड करना प्रक्रिया है, लेकिन उसका विश्लेषण और गैप एनालिसिस अधिक महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. मोनिका सिंह ने आंकड़ों के व्यवस्थित संकलन और गुणवत्ता पर विचार रखे। कार्यशाला में RMLNLU के कुलपति प्रो. डॉ. अमर पाल सिंह, निदेशक AISHE की अपर महानिदेशक संगीता नर्मदेश्वर, रजिस्ट्रार केशव कुमार, राज्य नोडल अधिकारी AISHE प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा, उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डॉ. दिनेश के. राजपूत सहित अन्य अधिकारी एवं प्रदेश के विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे। तकनीकी सत्रों में DCF और AISHE पोर्टल से संबंधित जानकारी दी गई और विश्वविद्यालय-विशिष्ट समस्याओं पर चर्चा हुई।
पत्रातू: दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाएगा PVUNL, ALIMCO के साथ समझौता

Patratu Vidyut Utpadan Nigam Limited (PVUNL) ने दिव्यांगजनों के कल्याण, सशक्तीकरण एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India (ALIMCO) के साथ समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री ए.के. सहगल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. (श्रीमती) शिप्रा रानी तथा मानव संसाधन विभाग के प्रमुख श्री जियाउर रहमान उपस्थित रहे।

इस समझौते के अंतर्गत पीवीयूएनएल द्वारा पत्रातू एवं आसपास के क्षेत्रों में जरूरतमंद दिव्यांगजनों की पहचान के लिए एक आकलन शिविर (Assessment Camp) का आयोजन किया जाएगा। शिविर के माध्यम से पात्र एवं जरूरतमंद व्यक्तियों का पंजीकरण कर उनकी आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा।

आकलन एवं चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण (Assistive Devices) उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उन्हें दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल सके।

पीवीयूएनएल की यह पहल अपने परिचालन क्षेत्र के आसपास रहने वाले समुदायों के समग्र विकास एवं सामाजिक कल्याण के प्रति निगम की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस कार्यक्रम के माध्यम से दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायता प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, उनकी गतिशीलता बढ़ाने तथा सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

पीवीयूएनएल निरंतर अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) पहलों के माध्यम से स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाने तथा समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कार्यरत है।

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर बलिया में INDIA गठबंधन का प्रदर्शन; राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
संजीव सिंह बलिया। लोकसभा सदस्य रामशंकर विद्यार्थी राजभर और पूर्व मंत्रियों के नेतृत्व में निकले जुलूस ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर INDIA गठबंधन बलिया के बैनर तले गुरुवार को जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’, ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ और ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ जैसे नारों से बलिया कलेक्ट्रेट परिसर को गुंजाया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा, जिसमें चुनाव आयोग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। समाजवादी पार्टी कार्यालय से निकली शक्तिशाली रैली कार्यक्रम की शुरुआत समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय से हुई, जहां नेता एवं कार्यकर्ता एकत्र हुए। यहां से हाथों में विभिन्न मांगों और विरोध नारों वाली तख्तियां लिए जुलूस की शक्ल में रैली जिलाधिकारी कार्यालय की ओर रवाना हुई। रास्ते भर कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा, निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था और मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के नारे लगाए। नेताओं ने जताई चुनाव व्यवस्था को लेकर चिंता इस अवसर पर लोकसभा सदस्य रामशंकर विद्यार्थी राजभर ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन व्यवस्था बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान पर जनता का विश्वास कायम रहना चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना लोकतंत्र की बुनियादी जिम्मेदारी है। पूर्व मंत्री अम्बिका चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में जनता का मत सर्वोपरि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते हैं, तो उनका निष्पक्ष समाधान होना चाहिए, ताकि जनता का विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं में बना रहे। "हया होती तो इस्तीफा दे चुके होते": जियाउद्दीन रिज़वी पूर्व मंत्री जियाउद्दीन रिज़वी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर निशाना साधते हुए कहा, "ज्ञानेश कुमार के अंदर अगर थोड़ी भी हया होती तो वह अबतक इस्तीफा दे चुके होते, लेकिन लगता है वह लोकतंत्र की हत्या करना उनकी नियति बन गई है।" विधायक जयप्रकाश अंचल ने कहा कि मतदाता सूची से लेकर मतदान तक प्रत्येक प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और संदेह से परे होनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा। जिलाध्यक्ष सुनील मौर्य का आह्वान समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुनील कुमार मौर्य ने कहा कि INDIA गठबंधन लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। प्रदर्शन में शामिल प्रमुख नेता इस प्रदर्शन में श्रीमती मंजू सिंह, संजय उपाध्याय, डॉ. विश्राम यादव, यशपाल सिंह, सुशील पाण्डेय कान्हजी, सीमा राजभर, रामेश्वर पाण्डेय, आशुतोष ओझा, रोहित चौबे, जलालुद्दीन जे.डी., शशिकांत चतुर्वेदी, राजन कन्नौजिया, शैलेश सिंह, जयप्रकाश यादव मुन्ना, अजीत यादव, हरेंद्र गोंड, जमाल आलम, श्रीमती ममता चंद्रा, कामेश्वर सिंह, राजेश गौड़, विकेश सिंह सोनू, विजय शंकर यादव, विनय गौड़, राजेश पासवान, संजय मिश्र, श्री भगवान वर्मा, झलन यादव, रोहित यादव, अजय यादव, रोहित सिंह, जुबेर सोनू, देवीदत्त यादव, अनिल राय, नित्या सैनी, गुरुज लाल राजभर, जय प्रकाश यादव, सर्वजीत यादव, चंदन यादव, सुभाष यादव और रामनाथ पटेल सहित अनेक नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन बीरबल राम ने किया। अंत में सभी नेताओं ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।
चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान पर बोले-अरुण वर्मा पूर्व सपा विधायक*
सुल्तानपुर,समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आज हम लोगों ने प्रेसवार्ता की है,30 सितंबर को INDIA गठबंधन की बैठक दिल्ली में हुई थी। उसमें निर्णय लिया गया था कि पूरे देश में 2 अक्टूबर से लेकर 8 अक्टूबर तक लोकतंत्र बचाओ, वोट बचाओ, देश बचाओ मार्च के तहत कार्यक्रम किया जाएगा। उसी के तहत जनपद सुल्तानपुर में जिला अध्यक्ष जी के नेतृत्व में प्रेस वार्ता का आयोजन हुआ। श्री वर्मा ने आज एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि हम लोगों का कार्यक्रम चल रहा है। जयसिंहपुर,सुल्तानपुर,कादीपुर और इसौली विधानसभा में हम लोगों ने गोष्ठी करके चुनाव आयोग के खिलाफ कार्यक्रम किया। कल हम लोग समाजवादी पार्टी कार्यालय सुपरमार्केट से जिले की पाँचों विधानसभा के नेता पैदल मार्च करके मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए DM कार्यालय को ज्ञापन देंगे। SIR और वोट कटने के आरोप पर*

पूर्व विधायक बोले SIR को लेकर और ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। UP में जब SIR चल रहा था, उस दौरान समाजवादी पार्टी ने कई केस पकड़े। सबसे बड़ा उदाहरण सुल्तानपुर की जयसिंहपुर विधानसभा से है। ककरावरपुर गांव में एक बूथ पर नंदलाल निषाद जो अंगूठा लगाता है, पढ़ा-लिखा नहीं है, उस व्यक्ति के नाम से साइन करके 30 फॉर्म BLO को दिया गया। वो फॉर्म भाजपा के मंडल अध्यक्ष ने दिया था और वो तीसों फॉर्म सिर्फ एक मुस्लिम समाज के थे। नंदलाल निषाद को लखनऊ माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने बुलाया, उन्होंने प्रेस के सामने कहा, लेकिन आज तक चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई की? उसी तरह लखनऊ में एक व्यक्ति दशरथ के नाम पर 100 फॉर्म पकड़ा गया, जबकि एक व्यक्ति 5-6 से ज्यादा फॉर्म नहीं दे सकता। चुनाव अधिकारियों ने माना भी, लेकिन कार्रवाई क्या हुई? हम लगातार इसके खिलाफ लड़ रहे हैं। वोट बचाओ अभियान पर

पूर्व विधायक अरुण वर्मा बोले कि प्रारूप शाखा फॉर्म पर अमेंडमेंट किया गया है, इससे SIR में काटे गए नाम आपस में जुड़ पाएंगे। समाजवादी पार्टी लगातार लड़ रही है कि कैसे हम अपना वोट बचाएं। वोट बचेगा तो देश बचेगा, वोट बचेगा तो लोकतंत्र बचेगा। हम गांव-गांव जाएंगे और एक भी वोट कटने नहीं देंगे। सेवा पखवाड़ा और 2027 पर

श्री वर्मा बोले कि सेवा पखवाड़ा चल रहा है, देश के प्रधानमंत्री हैं। कौन सी सेवा? आप सोचिए, महंगाई, आरक्षण लूटा जा रहा है, 69 हजार भर्ती में घोटाला हुआ, हर व्यक्ति परेशान है और समय और तारीख का इंतजार कर रहा है। जिस तरह 2024 के चुनाव में मिलकर भाजपा को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से रोका था, उसमें सबसे बड़ा योगदान माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी और UP की जनता का था, उसी तरह 2027 के चुनाव में भी भाजपा को बुरी तरह हराने का काम समाजवादी पार्टी करेगी।
2026 में भौतिक विज्ञान के नोबेल पुरस्कार पर विशेष विज्ञान लेख



*भौतिकी का नोबेल 2026: फ्रांसिस हाल्जेन और 'भूतिया कणों' की खोज।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 6 अक्टूबर 2026 को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भौतिकी का नोबेल पुरस्कार बेल्जियम मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को घोषित किया है। उन्हें यह सम्मान "आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में निर्णायक योगदान और ब्रह्मांडीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज" के लिए दिया गया है।
नोबेल समिति ने इन न्यूट्रिनो कणों को "अंतरिक्ष से आने वाले भूतिया संदेश" (Ghostly messages from space) करार दिया है,जो ब्रह्मांड के सबसे रौद्र और रहस्यमयी हिस्सों से सीधी सूचना लेकर आते हैं।

*विजेता और पुरस्कार का कारण क्या है।* खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन वर्तमान में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं। उनका जन्म 1944 में बेल्जियम के टिएनेन शहर में हुआ था एवं
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, हाल्जेन को यह पुरस्कार उनके उस अभूतपूर्व विचार और वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए मिला है जिसके तहत उन्होंने दक्षिणी ध्रुव (अंटार्कटिका) की बर्फ का उपयोग न्यूट्रिनो कणों को पकड़ने के लिए किया।  नोबेल समिति के अध्यक्ष मार्क पियर्स ने कहा, "फ्रांसिस हाल्जेन ने शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है जिसने हमें एक शानदार उपकरण दिया है। उनकी दृढ़ता और वैज्ञानिक दृष्टि ने एक नए प्रकार के खगोल विज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया है।" और इस वर्ष भौतिकी की नोबेल पुरस्कार राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जो पूरी तरह से हाल्जेन को दी जाएगी क्योंकि इस वर्ष यह पुरस्कार केवल एक ही वैज्ञानिक को दिया गया है।
*क्या होते हैं,न्यूट्रिनो: ब्रह्मांड के 'भूतिया कण'।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो, ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है क्योंकि इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इनका द्रव्यमान लगभग न के बराबर होता है।
ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली भीषण घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्र) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं, या कुछ यूं कहें कि बिल्कुल भी नहीं के बराबर प्रतिक्रिया करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं। और यह तक भी पता नहीं चलता कि कब यह कण उनको पार कर रहे हैं। और यह भी जानना ज़रूरी है कि हर सेकंड अरबों-खरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर और पृथ्वी से होकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश बिना किसी क्रिया के निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था।
*क्या है,आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी: बर्फ का विशाल दूरबीन* ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन ने 1988 में एक अभूतपूर्व विचार रखा कि अंतरिक्ष से आने वाले इन रहस्यमयी कणों को पकड़ने के लिए दक्षिणी ध्रुव (South Pole, अंटार्कटिका) की विशाल बर्फ का उपयोग किया जा सकता है।उनके इसी दृष्टिकोण के कारण अंटार्कटिका की गहराई में बर्फ के नीचे 1 क्यूबिक किलोमीटर के दायरे में दुनिया का पहला विशालकाय न्यूट्रिनो डिटेक्टर बनाया गया, जिसे आइसक्यूब (IceCube) कहा जाता है। *आइसक्यूब कैसे काम करता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की आधिकारिक सूची के अनुसार आइसक्यूब में बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर या Digital Optical Modules) लगाए गए हैं, जिन्हें लगभग 1,450 से 2,450 मीटर की गहराई पर बर्फ में लगाया गया है।
जब कोई,उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी जिसे खगोलविज्ञान में (Cherenkov radiation) चेरेनकोव विकिरण कहा जाता है। यह तब उत्पन्न होता है जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) किसी माध्यम (जैसे पानी या काँच) में लगभग प्रकाश की गति से यात्रा करता है। इसके कारण आमतौर पर पानी के भीतर एक चमकदार नीली रोशनी दिखाई देती है,(Cherenkov radiation) पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर वैज्ञानिक उस सिग्नल से पता लगाते हैं कि कण कहाँ से आया, उसकी दिशा क्या थी, उसकी ऊर्जा कितनी थी और संभवतः वह किस खगोलीय स्रोत से आया। साथ ही यह भी जानना ज़रूरी है कि दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग करने के कई फायदे हैं जैसे कि यह बर्फ विभिन्न प्रकार के हस्तक्षेप से मुक्त है और यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है, यहाँ कोई भूकंप नहीं आते। अगर हम इस आइसक्यूब के निर्माण की बात करें तो पाते हैं कि आइसक्यूब का निर्माण दिसंबर 2010 में पूरा हुआ था और इसकी कुल लागत लगभग 279 मिलियन डॉलर थी।
*2013 की ऐतिहासिक खोज और महत्व क्या है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला (IceCube Neutrino Observatory)  की आधिकारिक विश्व वैज्ञानिक समुदाय की पुष्टि के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 2013 में उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो (high-energy astrophysical neutrinos) का पहली बार स्पष्ट अवलोकन था।
इनमें कुछ न्यूट्रिनो की ऊर्जा पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट Petaelectronvolt (PeV) स्तर तक थी,(पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट (Petaelectronvolt) ऊर्जा को मापने की एक अत्यंत विशाल इकाई (यूनिट) है)।अर्थात अत्यंत विशाल ऊर्जा। इस खोज ने यह प्रमाणित किया कि हमारे ब्रह्मांड में ऐसे प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं जो अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो उत्पन्न करते हैं। *इस खोज का विज्ञान की दुनिया में क्या महत्व है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि फ्रांसिस हाल्जेन के इस काम ने खगोल विज्ञान (Astronomy) के एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत की है। इस खोज से आगे आने वाले समय में ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठ सकता है क्योंकि न्यूट्रिनो अंतरिक्ष के उन सुदूर और रौद्र एवं अज्ञात कोनों की जानकारी लाते हैं, जहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं आ पाता (जैसे कि एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई या विशाल ब्लैक होल)। अब अगर हम बात करें पारंपरिक दूरबीनों एवं अन्य विधाओं की तो पाते हैं कि उनसे न्यूट्रिनों को पूरी तरीके से समझना आसान नहीं था या इसको और भी आसान भाषा में समझने की कोशिश करें तो पाते हैं कि अछूते ब्रह्मांड को देखने के साथ ही पारंपरिक टेलिस्कोप केवल प्रकाश या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों को देख सकते हैं, लेकिन आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की मदद से वैज्ञानिक अब उन अनदेखी घटनाओं का अध्ययन कर पा रहे हैं जो अरबों प्रकाश वर्ष दूर उस काले घने अंधकारमय ब्रह्मांडीय गुफाओं में घटित हो रही हैं। साथ ही इसे मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी के व्यापक विकास के संदर्भ में भी देखा जा सकता है,जहाँ प्रकाश, गुरूत्वीय तरंगें ( gravitational waves), कॉस्मिक रेज (cosmic rays)और न्यूट्रिनों (neutrinos) जैसे अलग-अलग ब्रह्मांडीय संदेशबाहकों (cosmic messengers) से ब्रह्मांड की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही यह भी ज्ञात हो कि 2018 में,आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी ने एक अत्यंत उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो को TXS 0506+056 नामक ब्लेज़र (blazar) तक ट्रेस किया,जो ओरायन तारामंडल की दिशा में 3.7 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। यह पहली बार था जब किसी न्यूट्रिनो को उसके विशिष्ट खगोलीय स्रोत से जोड़ा गया।
*क्यों इतना अनोखा है, न्यूट्रिनो और इन्हें खोजना भी इतना मुश्किल क्यों था* ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो,ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों (Subatomic particles) में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है, इन कणों पर कोई विद्युत आवेश (Charge) नहीं होता और इनका द्रव्यमान (Mass) लगभग न के बराबर ही होता है या कुछ यूं कहें कि लगभग कोई द्रव्यमान नहीं है और ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली उग्र घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल आदि) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ कोई प्रतिक्रिया भी प्रदर्शित नहीं करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों ,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था, इसलिए इसमें बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर) लगाए गए हैं। जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसीलिए इन उच्च ऊर्जा यूट्रिनो को खोजना इतना अनोखा और इतना मुश्किल एवं चुनौतीपूर्ण था। और यही कार्य एवं इनकी खोज करने के लिए बर्ष 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए देने की घोषणा की गई है। उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा है एवं आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी जहां उन्होंने दक्षिण ध्रुव (Antarctic) की गहरी बर्फ में हजारों लाइट सेंसर लगाकर दुनिया की पहली विशाल न्यूट्रिनो वेधशाला की नींव रखी, जिससे ब्रह्मांड की ऊर्जावान प्रक्रियाओं का अध्ययन संभव हुआ। साथ ही नई प्रकार की खगोल विज्ञान को भी जन्म दिया है या कुछ यूं कहें कि इस खोज ने खगोल विज्ञान (Astronomy) की एक बिल्कुल नई विधा का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे दूरस्थ आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।

*क्या है न्यूट्रिनो (Neutrino) कण की कहानी ? ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो (Neutrino) कण का सबसे पहले सैद्धांतिक अनुमान वर्ष 1930 में वोल्फगैंग पाउली (Wolfgang Pauli) ने लगाया था,जबकि वर्ष 1956 में क्लाइड कोवान (Clyde Cowan) और फ्रेडरिक रेइन्स (Frederick Reines) ने इसका प्रयोगात्मक रूप से पता लगाया (खोज की) अब अगर हम बात करें न्यूट्रिनो से जुड़े मुख्य तथ्य सैद्धांतिक प्रस्ताव की तो पाते हैं कि 1930 में वोल्फगैंग पाउली ने बीटा क्षय (beta decay) में ऊर्जा संरक्षण के नियम को समझाने के लिए इस काल्पनिक कण का सुझाव दिया था एवं इसके नामकरण की बात करें तो पाते हैं कि इसका नामकरण एक इतालवी भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने इस कण का नाम 'न्यूट्रिनो' रखा, जिसका अर्थ "छोटा उदासीन कण" है। साथ ही इसके प्रयोगात्मक खोज की बात करें तो पाते हैं कि 1956 में क्लाइड कोवान और फ्रेडरिक रेइन्स ने परमाणु रिएक्टर का उपयोग करके पहली बार न्यूट्रिनो का प्रायोगिक प्रमाण प्राप्त किया। इस खोज के लिए फ्रेडरिक रेइन्स को 1995 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला  और अब वर्ष 2026 की बात करें तो पाते हैं कि 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए दिया गया है,क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों जिन्हें न्यूट्रिनो कहा जाता है को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा।

*भारत के शोधकर्ताओं के लिए इस खोज का क्या महत्व हो सकता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह खोज विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण विचार (दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों को सुलझाया जा सकता है।
आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है, जिसमें लगभग 450 भौतिक विज्ञानी, 58 संस्थान और 14 देश शामिल हैं। साथ ही अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित IceCube Neutrino Observatory (आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला) के संदर्भ में भारत का महत्व भी कुछ मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है। जैसा कि हम जानते हैं कि आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना है, लेकिन वैसे तो भारत का इस वेधशाला से प्रत्यक्ष या सीधे तौर पर संबंध नहीं है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और संस्थान वैश्विक स्तर पर इस प्रयोग के डेटा विश्लेषण, कोडिंग और इसके माध्यम से की जाने वाली ब्रह्मांडीय खोजों (जैसे "घोस्ट पार्टिकल्स" या न्यूट्रिनो की पहचान) में अनुसंधान के ओपन-सोर्स डेटा का विश्लेषण करते हैं।और साथ में यह भी जानना आवश्यक है कि भारत भी अपना न्यूट्रिनो प्रोजेक्ट  INO (India-based Neutrino Observatory) बनाने के लिए प्रयास कर रहा है इसीलिए जब भी विज्ञान में आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी (IceCube Observatory) की बात होती है, तो उसके समानांतर भारत के अपने प्रोजेक्ट INO (इंडिया-बेस्ड न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी) की चर्चा जरूर होती है। लेकिन दोनों में अंतर क्या है? यह भी जानना ज़रूरी है,जहाँ आइस क्यूब अंटार्कटिका की गहरी बर्फ (Ice) के नीचे न्यूट्रिनो ढूंढता है, वहीं भारत का आई०एन० ओ०,(INO)  प्रोजेक्ट तमिलनाडु के थेनी जिले की बोदी पश्चिम पहाड़ियों में जमीन के नीचे एक विशाल प्रयोगशाला बनाने की योजना है एवं इसके लोकेशन के महत्व की बात करें तो पाते हैं कि भारत की भौगोलिक स्थिति भूमध्य रेखा (Equator) के पास है,यहाँ बनाई जाने वाली ऑब्जर्वेटरी से वैज्ञानिकों को उन न्यूट्रिनो कणों का भी अध्ययन करने में मदद मिल मिलेगी जो पृथ्वी के कोर (केंद्र) से होकर गुजरते हैं साथ ही यह डेटा,आइस क्यूब जैसी ध्रुवीय (Polar) ऑब्जर्वेटरी के पूरक के रूप में काम आ सकता है। लेकिन अभी तो इस प्रोजेक्ट की संपूर्ण स्थापना को कई चुनौतियों से निबटना बाकी है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अब हम पुनः संक्षेप में फ्रांसिस हाल्जेन एवं आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी की बात करें तो पाते हैं कि फ्रांसिस हाल्जेन ने अंटार्कटिका की बर्फ को एक अनोखी विशाल दूरबीन में बदल दिया, जिसने विज्ञान को ब्रह्मांड के उन सबसे रहस्यमयी 'भूतिया कणों' को पकड़ने और समझने की शक्ति दी,जो अब तक इंसान की पहुंच से पूरी तरह बाहर थे। इसीलिए यह भी समझना ज़रूरी है कि यह नोबेल पुरस्कार केवल किसी एक व्यक्ति द्वारा अकेले किए गए प्रयोग के लिए नहीं है बल्कि हाल्जेन का सम्मान उनके निर्णायक वैज्ञानिक योगदान, दृष्टि और आइसक्यूब के नेतृत्व तथा उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो की खोज से जुड़ा है। जो निश्चित तौर पर यह दर्शाता है कि अगर टीम भावना से एवं समग्र रूप से दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता से लगातार कोई भी कार्य किया जाता है तो एक दिन उन अच्छे कार्यों का फल और किसी भी समस्या का हल भी अवश्य ही प्राप्त होता है।और इसी को सार्थक होता हुआ देख सकते है कि नोबेल पुरस्कार समिति द्वारा 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार को देने की घोषणा, फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को की गई है।
इंडिया गठबंधन का मार्च जारी, कई बड़े नेता हिरासत में, आकाशवाणी के सामने राहुल-प्रियंका का धरना

#oppositionindiablocmpsmarch

भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के सांसदों ने दिल्ली में विरोध मार्च निकाला। तिरंगा झंडा और 'लोकतंत्र बचाओ' लिखे बैनर लिए, इंडी गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक अपना विरोध मार्च शुरू किया। चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ते हुए विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त, भाजपा और आरएसएस के खिलाफ नारे लगाए।

राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए

विपक्षी दलों के 300 से ज्यादा सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च किया। प्रदर्शन के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और इंडी गठबंधन के कई अन्य नेताओं को भी चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने से रोके जाने के बाद कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके बाद छोड़ दिया गया।

बैरिकेड पर चढ़ राहुल गांधी ने लहराया तिरंगा

राहुल गांधी जब चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें पुलिस की कई बैरिकेड्स ने रोक दिया। इसके बाद वे एक बैरिकेड पर चढ़ गए और एक राष्ट्रीय ध्वज लहराया, वहां जमा हुए इंडी गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारे लगाकर उनका समर्थन किया।

राहुल गांधी ने पुलिस पर लगाया धमकाने का आरोप

इस बीच राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि यह नेता करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं और चुनाव आयुक्तों से मुलाकात करना चाहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव आयुक्त उनसे मुलाकात क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें रोक रही है और धमकी दे रही है। हम सिर्फ उनका मुकाबला नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें खत्म कर देंगे। राहुल गांधी ने आगे कहा कि देश के साथ जो किया गया है, उसे देशद्रोह कहा जाता है और इसके लिए कोई बच नहीं पाएगा।

भारत ने एशियन गेम्स में दिन का तीसरा गोल्ड जीता, लवलीना के बाद परवीन हुड्‌डा का गोल्डन पंच

#Indiawonitsthirdgoldofthedayattheasian_games

भारत ने एशियन गेम्स में शुक्रवार को तीसरा गोल्ड जीत लिया है। एशियाई खेलों में आज चौदहवें दिन आर्चरी के बाद बॉक्सिंग में ये दिन का दूसरा स्वर्ण पदक है। स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने जन्मदिन पर गोल्ड दिलाया। उसके बाद परवीन हुड्‌डा महिलाओं की 65 किग्रा में एशियन चैंपियन बनी। एक गोल्ड मेडल तीरंदाजी में आया।

परवीन हुड्डा का पहला एशियन गेम्स मेडल

परवीन हुड्डा ने महिलाओं की 65 किलो वेट कैटेगरी के फाइनल में चाइनीज ताइपे की मुक्केबाज चिन नीन-चिन को कड़े मुकाबले में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया, ये भारत को मिलने वाला कुल 13वां स्वर्ण पदक था। हरियाणा के रोहतक की 26 वर्षीय इस युवा बॉक्सर का यह पहला एशियन गेम्स मेडल है।

बॉक्सर लवलीना ने एशियन गेम्स में पहली बार जीता गोल्ड

इससे पहले भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में चीन की बाओ जियाओजी को 5-0 के एकतरफा फैसले से शिकस्त देकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। जन्मदिन के खास मौके पर उतरी लवलीना ने पूरे मुकाबले के दौरान बेहतरीन संयम का परिचय दिया और बाओ को आगे बढ़ने का मौका देकर बेहद प्रभावी काउंटर-पंचों के जरिए अंक बटोरे। शुरुआती दो राउंड जीतने के बाद उन्होंने तीसरे और अंतिम राउंड में भी अपनी शानदार पकड़ बनाए रखी और इस तरह एक आसान व आधिपत्य भरी जीत दर्ज करते हुए देश के लिए यह स्वर्ण पदक पक्का किया।

भारत मेडल टैली के छठे स्थान पर

एशियन गेम्स में भारत मेडल टैली के छठे स्थान पर है। उसके पास 13 गोल्ड, 25 रजत और 35 कांस्य जीते हैं। भारत के कुल 73 मेडल हैं। वहीं, मुक्केबाजी में 5 मेडल आ चुके हैं। इनमें 3 ब्रॉन्ज भी शामिल हैं।

एशियन गेम्स में भारत को आठवां गोल्ड, चिकिथा-राजेश की टीम ने तिरंदाजी में जीता दूसरा सोना

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जापान में जारी एशियन गेम्स 2026 का आज 12वां दिन है। भारतीय आर्चरी टीम ने दिन की स्वर्णिम शुरूआत की। भारतीय आर्चरी खिलाड़ियों ने दो गोल्ड मेडल जिताते हुए स्वर्ण पदकों की संख्या आठ कर दी है। महिला टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए चीन को हराकर गोल्ड जीतने के बाद भारतीय तीरंदाजों का हौसला बुलंद है। भारतीय जोड़ी ने अब एक और स्वर्ण पदक देश की झोली में डाल दिया है।

कोरिया को हरा कर जीता आठवां गोल्ड

भारत के लिए आज की शुरुआत खास रही है। भारतीय तीरंदाजी ने कमाल कर दिया है। आज सुबह महिला कंपाउंड टीम ने स्वर्ण जीता। अब कुछ ही घंटे बाद मिक्स्ड कंपाउंड टीम ने भी स्वर्ण जीत लिया है। भारतीय मिश्रित कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने कोरिया को हराते हुए आठवां गोल्ड जीत लिया। राजेश जाधव और चिकिथा तनिपार्थी की जोड़ी ने कोरियाई जोड़ी को टाईब्रेक में हराया। इस तरह भारत की झोली में आठवां गोल्ड मेडल आया

आर्चरी का दूसरा गोल्ड

आर्चरी के कंपाउंड मिक्स्ड टीम के हाई-वोल्टेज और सांस रोक देने वाले फाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया है। निर्धारित चार एंड के बाद मुकाबला बराबरी पर रहने के कारण फैसला शूट-ऑफ से हुआ। दबाव भरे पलों में भारतीय जोड़ी चिकिता और साहिल दोनों ने सटीक निशाना साधते हुए 10-10 पॉइंट का परफेक्ट स्कोर दागा। जवाब में कोरियाई पुरुष तीरंदाज 9 पॉइंट पर निशाना ही लगा सका, जिससे भारत ने यह गोल्डन बाजी अपने नाम कर ली।

भारत को मिला सातवां गोल्ड

इससे पहले भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने चीन को हराते हुए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया और गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। ओकाजाकी चुओ सोगो पार्क में ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिथा तनिपार्थी और पृथिका प्रदीप की भारतीय टीम ने चीन को मुकाबले में कहीं टिकने ही नहीं दिया। भारतीय महिला कंपाउंड टीम ने 2023 में हांगझोउ में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।

विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बड़ी बैठक आज, जानें किन मुद्दों पर होगा मंथन

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बारतीय निर्वाचन आयोग से जुड़े विवाद के बीच विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होने का प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में विपक्षी गठबंधन 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस' (INDIA) के प्रमुख नेता आज दिल्ली में बड़ी बैठक कर रहे हैं। इसमें निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ संयुक्त अभियान को अंतिम रूप देने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

ममता बनर्जी भी बैठक में होंगी शामिल

कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, जयराम रमेश और के. सी. वेणुगोपाल शामिल होंगे। पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के भी बैठक में शामिल होने की जानकारी है। समाजवादी पार्टी, भाकपा, माकपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार गुट और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के नेता भी बैठक में मौजूद रहेंगे। झामुमो, आईयूएमएल, वीसीके, एमडीएमके, केरल कांग्रेस, बीएपी, आरएलपी, फॉरवर्ड ब्लॉक और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल भी चर्चाओं में हिस्सा लेंगे। ऐसे में आज की बैठक पर नजर इस बात पर रहेगी कि निर्वाचन आयोग के मुद्दे पर विपक्षी दल किस साझा रणनीति पर पहुंचते हैं।

इन दलों ने बैठक से बनाई दूरी

आम आदमी पार्टी ने इस बैठक में शामिल न होने का स्पष्ट ऐलान किया है। पार्टी सांसद संजय सिंह के मुताबिक, आप इस बैठक से दूर रहेगी, हालांकि वह चुनाव आयोग के खिलाफ संसद में विपक्षी मांगों का समर्थन करेगी। वहीं, तमिलनाडु चुनावों के बाद कांग्रेस से उपजे राजनीतिक मतभेदों के चलते द्रमुक ने इस बैठक का बहिष्कार किया है और खुद को गठबंधन से अलग कर लिया है। नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल ने भी इस बैठक का हिस्सा न बनने का निर्णय लिया है। तमिलनाडु में कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाने वाली अभिनेता विजय की नई पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके भी इस बैठक में भाग नहीं ले रही है।

क्या होगी विपक्षी दलों की रणनीति?

अब नजर इस बात पर रहेगी कि बुधवार की बैठक में विपक्षी दल निर्वाचन आयोग के मुद्दे पर किस तरह की साझा रणनीति तैयार करते हैं। कांग्रेस पहले ही बड़े आंदोलन की योजना की बात कह चुकी है, जबकि गठबंधन के भीतर सभी दलों की भागीदारी एक जैसी नहीं दिख रही है। आम आदमी पार्टी और द्रमुक की गैरमौजूदगी के बीच बैठक में मौजूद दलों के बीच सहमति किस स्तर तक बनती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। बैठक के बाद सामने आने वाले फैसलों से साफ होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को आगे किस रूप में उठाने की तैयारी कर रहा है।

हमारी चिंताओं को लेकर अमेरिका गंभीर नहीं' यूएस की धरती से एस जयशंकर ने उसे सुनाया

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भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। जयशंकर ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करने को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा है कि आतंकवाद को लेकर भारत की च‍िंताओं के प्रत‍ि अमेरिका का असंवेदनशील होना दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक समस्या है।

पाकिस्तान का नाम लिए बिना आतंकवाद पर घेरा

न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में जयशंकर ने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लेते हुए कहा कि पड़ोसी देश से फैलने वाला आतंकवाद भारत की सुरक्षा से जुड़ी मुख्य चिंताओं में से है। बहुत कम देश ऐसे हैं, जिन्हें किसी पड़ोसी देश से उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जैसा हमने किया है।

पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर अमेरिका पर सवाल

जयशंकर ने पूरी गंभीरता से कहा कि भारत के लिए सुरक्षा सबसे अहम है। उन्होंने कहा, अगर हमारा कोई सहयोगी (यूएस) हमारी इस मुख्य चिंता को नहीं समझता है तो जाहिर है कि इसका असर हमारे रिश्तों पर पड़ता है। गौरतलब है कि भारत लंबे समय से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा विभिन्न वैश्विक मंचों पर उठाता आया है, लेकिन अभी तक पाकिस्तान के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। खासकर ट्रंप प्रशासन ने तो पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर जवाबदेह ठहराने से भी परहेज किया है।

कूटनीति के दिखावे अब खत्म हो गए-जयशंकर

जयशंकर ने कहा कि एक समय अमेरिका में यह सोच थी कि भारत के पास बहुत सारे विकल्प नहीं होने चाहिए और नई दिल्ली को वॉशिंगटन के साथ अपने रिश्तों पर ध्यान देना चाहिए, जबकि अमेरिका खुद हमेशा से अपने विकल्प खुले रखता आया है। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि कूटनीति के ऐसे दिखावे अब खत्म हो गए हैं और देश अब एक-दूसरे के साथ खुलकर जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बहुध्रुवीय दुनिया की ओर हो रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है।

अमेरिका ने व्यापार का एक नया तरीका अपनाया-जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह भी कहा कि अमेरिका ने व्यापार का एक नया तरीका अपनाया है। यह तरीका वन-टू-वन डील है यानी हर चीज पर फिर से बातचीत। हर कोई खुलकर एक-दूसरे के साथ डील कर रहा है। विदेश मंत्री ने इस दौरान साफ कहा कि हम आज मल्टीपोलैरिटी (बहु-ध्रुवीयता) की ओर बढ़ रहे हैं।

सही, समयबद्ध और सत्यापित डेटा प्रभावी नीति निर्माण का आधार: योगेन्द्र उपाध्याय
- *राज्य स्तरीय AISHE कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री ने डेटा की शुद्धता और समयबद्धता पर दिया जोर*
- *डेटा कलेक्शन को औपचारिकता नहीं, नीति एवं योजना निर्माण की जिम्मेदारी मानें: उच्च शिक्षा मंत्री*

लखनऊ। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा से संबंधित सही, समयबद्ध और सत्यापित डेटा केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रभावी नीति निर्माण, योजनाओं के निर्धारण और उच्च शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण आधार है। डेटा के आधार पर ही तय किया जा सकता है कि कहां नए संस्थानों की आवश्यकता है, कहां शिक्षकों एवं संसाधनों की जरूरत है और विकास के लिए किन क्षेत्रों में विशेष कार्य किए जाने चाहिए। अर्थात भावी कार्यक्रम, योजनाएं और नीतियों का उचित निर्धारण डाटा पर ही निर्भर करता है।
उच्च शिक्षा मंत्री सोमवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय AISHE (All India Survey on Higher Education) कार्यशाला में विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के समन्वय से किया गया। इसमें डेटा संग्रहण, सत्यापन, सबमिशन, विश्लेषण तथा संस्थागत व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई।
मंत्री उपाध्याय ने कहा कि डेटा समाज और उच्च शिक्षा व्यवस्था का दर्पण है। भारत सरकार और प्रदेश सरकार अनेक महत्वपूर्ण निर्णय उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लेती हैं। इसलिए डेटा कलेक्शन को नियमित प्रक्रिया न मानकर नीति एवं योजना निर्माण की जिम्मेदारी के रूप में लिया जाए। यदि डेटा सही होगा तो योजनाएं भी अधिक प्रभावी बनेंगी।
उन्होंने विश्वविद्यालयों द्वारा संबद्ध महाविद्यालयों एवं संस्थानों के AISHE डेटा को नियमित अपडेट करने पर जोर दिया। कहा कि कई संस्थान AISHE कोड प्राप्त करने के बाद समय पर डेटा नहीं देते, जिससे उनका स्टेटस निष्क्रिय हो सकता है और इसका असर विद्यार्थियों पर पड़ता है। नोडल अधिकारी नियमित समीक्षा करें। पोर्टल खुलने के बाद अंतिम तिथि की प्रतीक्षा की प्रवृत्ति से बचें, समय रहते डेटा प्राप्त कर परीक्षण सुनिश्चित करें। नामांकन, रिक्तियों, पाठ्यक्रमों, परीक्षा, परिणाम, आधारभूत संरचना की सूचनाएं मूल अभिलेखों से सत्यापित कर ही दर्ज की जाएं। केवल डेटा भरना पर्याप्त नहीं, उसकी शुद्धता और प्रमाणिकता भी सुनिश्चित हो।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि नोडल अधिकारियों की भूमिका केवल कलेक्शन तक सीमित न रहे। अंतिम अनुमोदन से पहले क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाए, आवश्यकता अनुसार रैंडम वेरिफिकेशन कर अभिलेखों और AISHE डेटा की वास्तविकता जांची जाए और संस्थानों को तकनीकी-प्रशासनिक सहयोग भी दिया जाए। प्रदेश का प्रयास जीरो पेंडेंसी की दिशा में होना चाहिए। कोई भी पात्र एवं कार्यशील संस्थान प्रशासनिक लापरवाही से सर्वे से बाहर न रहे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सही सूचना, सही समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है। आंकड़ों से भविष्य की आवश्यकताओं की पहचान कर नए संस्थानों, फैकल्टी और विभागों पर बेहतर योजना बन सकती है। डेटा प्लानिंग को औपचारिकता नहीं, पॉलिसी प्लानिंग की जिम्मेदारी मानना चाहिए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि AISHE के लिए डेटा प्रबंधन केवल नोडल अधिकारी की नहीं, पूरे संस्थान की जिम्मेदारी है। डेटा प्रवेश, परीक्षा सहित विभिन्न अनुभागों से आता है, इसलिए विश्वसनीयता के लिए संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर एसओपी तैयार कर अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने विश्वविद्यालय रिकॉर्ड और AISHE रिकॉर्ड में एकरूपता, एफिलिएशन सूची के रीकन्सिलिएशन, गलत रिपोर्टिंग और डबल रिपोर्टिंग से बचने के लिए प्रामाणिक अभिलेखों की जांच तथा असामान्य बदलाव पर गहराई से समीक्षा पर जोर दिया। डेटा अपलोड करना प्रक्रिया है, लेकिन उसका विश्लेषण और गैप एनालिसिस अधिक महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. मोनिका सिंह ने आंकड़ों के व्यवस्थित संकलन और गुणवत्ता पर विचार रखे। कार्यशाला में RMLNLU के कुलपति प्रो. डॉ. अमर पाल सिंह, निदेशक AISHE की अपर महानिदेशक संगीता नर्मदेश्वर, रजिस्ट्रार केशव कुमार, राज्य नोडल अधिकारी AISHE प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा, उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डॉ. दिनेश के. राजपूत सहित अन्य अधिकारी एवं प्रदेश के विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे। तकनीकी सत्रों में DCF और AISHE पोर्टल से संबंधित जानकारी दी गई और विश्वविद्यालय-विशिष्ट समस्याओं पर चर्चा हुई।
पत्रातू: दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाएगा PVUNL, ALIMCO के साथ समझौता

Patratu Vidyut Utpadan Nigam Limited (PVUNL) ने दिव्यांगजनों के कल्याण, सशक्तीकरण एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India (ALIMCO) के साथ समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री ए.के. सहगल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. (श्रीमती) शिप्रा रानी तथा मानव संसाधन विभाग के प्रमुख श्री जियाउर रहमान उपस्थित रहे।

इस समझौते के अंतर्गत पीवीयूएनएल द्वारा पत्रातू एवं आसपास के क्षेत्रों में जरूरतमंद दिव्यांगजनों की पहचान के लिए एक आकलन शिविर (Assessment Camp) का आयोजन किया जाएगा। शिविर के माध्यम से पात्र एवं जरूरतमंद व्यक्तियों का पंजीकरण कर उनकी आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा।

आकलन एवं चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण (Assistive Devices) उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उन्हें दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल सके।

पीवीयूएनएल की यह पहल अपने परिचालन क्षेत्र के आसपास रहने वाले समुदायों के समग्र विकास एवं सामाजिक कल्याण के प्रति निगम की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस कार्यक्रम के माध्यम से दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायता प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, उनकी गतिशीलता बढ़ाने तथा सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

पीवीयूएनएल निरंतर अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) पहलों के माध्यम से स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाने तथा समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कार्यरत है।