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एड. अशोक दुबे ने महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल के लिए किया नामांकन
मुंबई। महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल चुनाव की तारीख का ऐलान होने के साथ नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, पूरे महाराष्ट्र और गोवा से अधिवक्ता अपना नामांकन करने के लिए अपने समर्थकों के साथ बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र और गोवा के मुंबई कार्यालय में पहुंच रहे हैं। नामांकन करने की अंतिम तारीख 26 फरवरी तथा चुनाव की तारीख 24 फरवरी है । मतगणना 7 अप्रैल को होगा।
मुंबई उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता, Advocates Association of Western India (AAWI) के आजीवन सदस्य अधिवक्ता अशोक कुमार दुबे ने भारी संख्या में उपस्थित अपने समर्थकों के साथ आज अपना नामांकन किया। उनके नामांकन का प्रस्ताव उनके कानूनी गुरु वरिष्ठ अधिवक्ता जयेश याज्ञनिक और राजनाथ पाठक ने किया।
इस अवसर पर उपस्थित अधिवक्ताओं में एडवोकेट अनिल कुमार पांडे, एडवोकेट कमलेश मिश्रा, एडवोकेट अभिनव दुबे, एडवोकेट चिंतन, एडवोकेट अमित तिवारी, एडवोकेट राहुल पाटिल, एडवोकेट अंकित, एडवोकेट मृदुल, एडवोकेट अक्षय जाधव, मुकेश चौरसिया आदि का समावेश रहा।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आ रहे भारत, क्या ट्रूडो से बढ़े विवाद के बाद सुधरेंगे रिश्ते?
#canadapmmarkcarneytovisitindia
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत दौरे पर आने वाले हैं। मार्क कर्नी 26 फरवरी को भारत पहुंच रहे हैं। ये दौरा ऐसे वक्त में अहम माना जा रहा है जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ट्रेड में काफी उठापटक चल रही है। वहीं, ट्रूडो कार्यकाल में आई भारत-कनाडा रिश्तों में खटास के बाद कनाडाई पीएम का दौरा कापी अहम माना जा रहा है।
कनाडा-भारत के रिश्तों पर होगा फोकस
कार्नी 26 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक इंडो-पैसिफिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान मार्क कार्नी 26 फरवरी भारत पहुंचेंगे। इस दौरान वह सबसे पहले मुंबई जाएंगे। इसके बाद वह दिल्ली आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। मार्क कार्नी के कार्यालय की तरफ से जारी बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के मुताबिक, "प्रधानमंत्री कार्नी सबसे पहले मुंबई पहुंचेंगे। फिर नई दिल्ली जाएंगे, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। दोनों नेता कनाडा-भारत के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने को लेकर बातचीत पर फोकस करेंगे।"
भारत के बड़े बिजनेस लीडर्स से मुलाकात
मार्क कार्नी अपने भारत दौरे की शुरुआत मुंबई से करेंगे, जहां वो देश के बड़े बिजनेस लीडर्स के साथ मुलाकात करेंगे। उनका मकसद कनाडा में भारतीय निवेश को बढ़ावा देना और दोनों देशों की कंपनियों के बीच साझेदारी को मजबूत करना रहेगा। इनमें ट्रेड, एनर्जी, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टैलेंट और संस्कृति, और डिफेंस में बड़ी नई पार्टनरशिप शामिल होंगी। इसके बाद वो नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत।
ऑस्ट्रेलिया और जापान भी जाएंगे कनाडाई पीएम
पीएम कर्नी भारत दौरे के बाद ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और कैनबरा भी जाएंगे। जहां वे पीएम एंथनी अल्बानीज़ से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, व्यापार और एआई मेत उन्नत प्रौद्योगिकियों पर सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। पीएम कार्नी इस दौरान ऑस्ट्रेलिया की संसद के दोनों सदनों और आमंत्रित गणमान्य अतिथियों को भी संबोधित करेंगे। 20 सालों में ऐसा पहली बार होगा जब कोई कनाडाई प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया की संसद को संबोधित करेगा। कनाडा के पीएम कर्मी इसके बाद जापान के टोक्यो पहुंचकर प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए से मुलाकात करेंगे। उनके बीच स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों और खाद्य सुरक्षा में पारस्परिक निवेश और साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
लखनऊ मेट्रो की पटरियां मानकों से कमजोर, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
* स्पीड लिमिट प्रमाणपत्र का नवीनीकरण नहीं, सुरक्षा मानकों की अनदेखी; तत्कालीन एमडी कुमार केशव पर उठे सवाल
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मेट्रो संचालन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। Comptroller and Auditor General of India (CAG) की हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि मेट्रो की रेल पटरियां निर्धारित तकनीकी मानकों से कमजोर पाई गईं। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की बात कही गई है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो ट्रैक से संबंधित कई विशेष मानकों का पालन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, स्पीड लिमिट प्रमाणपत्र का समय पर नवीनीकरण भी नहीं कराया गया, जिससे उच्च गति पर संचालन के दौरान संभावित खतरे की आशंका बढ़ गई। यह स्थिति सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा को जोखिम में डालने वाली मानी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, परियोजना से जुड़ी प्रमुख कंपनियों जैसे Tata Group और Larsen & Toubro (L&T) ने पहले ही मेट्रो प्रशासन को तकनीकी खामियों को लेकर आगाह किया था। बावजूद इसके, आवश्यक सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए।
जांच में यह भी सामने आया है कि ‘कालिंदी’ नामक फर्म को पटरियां बिछाने का ठेका दिया गया था, जो कथित तौर पर कागजों पर ही सक्रिय बताई जा रही है। इस फर्म और मेट्रो प्रशासन के बीच सांठगांठ के आरोप भी उभरकर सामने आए हैं।
मामले में तत्कालीन प्रबंध निदेशक Kumar Keshav की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि परियोजना में अनियमितताओं के बावजूद उन्होंने प्रभावी निगरानी नहीं की। सूत्रों का दावा है कि इस मुद्दे पर संपर्क किए जाने के बावजूद उन्होंने फोन उठाना भी बंद कर दिया है।
इस पूरे मामले ने मेट्रो प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि संबंधित एजेंसियां इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई करती हैं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
Bangkok, Thailand:Prof. Dr. Prakash Divakaran, Vice-Chancellor of Himalayan University, has been conferred with the Prestigious Indo–Thai Educational Excellence Award in recognition of his iconic leadership and remarkable contribution to higher education.
The award was presented by Asst. Prof. Dr. Thanapon Sarunburana, Vice-Chancellor of Rajapark University, during a distinguished academic gathering in Bangkok. The ceremony brought together leading academicians, administrators, and international delegates from India and Thailand.
The event commenced with a Welcome Address by Dr. J. P. Bhosale, Patron, GRCF, Savitribai Phule Pune University. The Presidential Address was delivered by Prof. Dr. Gowri Ramesh, Registrar of The Tamil Nadu Dr. Ambedkar Law University. Prof. Dr. Prakash Divakaran graced the occasion as Chief Guest and delivered the Inaugural Address.
Among the distinguished dignitaries present were Dr. R. Thippa Reddy, Chairman & Director, Dr. Ambedkar Global Law Institute; Assoc. Prof. Dr. Chaiwat Phuakkhong; Asst. Prof. Dr. Arun Chainit; Dr. Jidapa Thavarit; Dr. Gireesh Kumar J; Dr. Shibu Dharmarajan; Dr. Seema Vijay Medhe; and Ms. Ashsagan Ashghari, Chairman, Phoenix Global Gold Co. Ltd., Bangkok.
The formal Vote of Thanks was proposed by Dr. Cholaraja Mudimannan, Assistant Professor of Law (Senior Scale), University of Delhi.
The award highlights Prof. Dr. Divakaran’s visionary leadership in promoting academic excellence, research innovation, and international collaboration. Under his stewardship, Himalayan University has expanded its global academic partnerships and strengthened its commitment to quality higher education.
The Indo–Thai Educational Excellence Award marks a significant milestone for Himalayan University and reflects the growing academic cooperation between India and Thailand.
क्या है “पैक्स सिलिका” जिसमें आज शामिल होगा भारत, यूएस के साथ एक और डील
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भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाने वाला है। ट्रेड डील पर अंतिम साइन से ठीक पहले अमेरिका के टॉप लेवल के अधिकारी भारत पहुंच रहे हैं। अमेरिकी आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग भारत दौरे पर आ रहे हैं। यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी और सप्लाई-चेन की नई राजनीति की ओर इशारा है।
दरअसल, भारत आज औपचारिक रूप से अमेरिका की अगुवाई वाली पहल 'पैक्स सिलिका' में शामिल होने जा रहा है। यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाई गई है। यह घोषणा दिल्ली में चल रहे ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान की गई है।
पिछले महीने हुई थी गठबंधन में शामिल होने का घोषणा
अमेरिका ने दिसंबर 2025 में पैक्स सिलिका की शुरूआत की थी। पैक्स सिलिका सम्मेलन 12 दिसंबर को वाशिंगटन में हुआ था, जहां साझेदार देशों ने पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने पिछले महीने नई दिल्ली को रणनीतिक गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने की घोषणा की।
घोषणा पर किन देशों ने किया हस्ताक्षर?
इस घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, यूएई, सिंगापुर, इस्राइल, कतर और ग्रीस शामिल हैं। जबकि कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड्स और ताइवान जैसे देश इसमें भागीदार के रूप में जुड़े हैं।
चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
कहा जा रहा है कि यह गठबंधन चीन के तकनीकी प्रभुत्व को कम करने के लिए बनाया गया है। ग्लोबल सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में चीन की बड़ी भूमिका रही है। अब अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ नया आर्थिक गठबंधन खड़ा कर रहा है। यह पहल अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति और टेक्नोलॉजी-आधारित साझेदारी मॉडल का हिस्सा मानी जा रही है।
ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की बैठक में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हुआ भारत, क्यों नहीं ली पूर्ण सदस्यता?
#boardofpeacefirstmeetingindiaattendsasobserver
भारत ने गुरुवार को वॉशिंगटन में गाजा बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में ऑब्जर्वर के तौर पर हिस्सा लिया। ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के निमंत्रण की समीक्षा के एक सप्ताह बाद भारत ने 19 फरवरी को पहली बैठक में एक पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास में तैनात भारत के चार्ज डी' अफेयर्स नामग्या सी खम्पा ने देश का प्रतिनिधित्व किया।
अमेरिका ने की 10 अरब डॉलर के योगदान की घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक एक नए वैश्विक मंच की शुरुआत की और गाजा में युद्ध के बाद स्थिरीकरण और राहत प्रयासों के लिए अमेरिका की ओर से 10 अरब डॉलर के योगदान की घोषणा की। यह बैठक संयुक्त राज्य अमेरिका शांति संस्थान में आयोजित की गई। ट्रंप ने उद्घाटन सत्र में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और बोर्ड सदस्य जारेड कुशनर के साथ मंच साझा किया। उन्होंने कहा, “हम जो कर रहे हैं, वह एक सरल शब्द है- शांति। इसे कहना आसान है, लेकिन हासिल करना कठिन। लेकिन हम इसे हासिल करेंगे।
कौन-कौन हुआ शामिल?
वॉशिंगटन स्थित यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में आयोजित बैठक में लगभग 50 देशों के अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ सहित अन्य देश पर्यवेक्षक के रूप में इसमें शामिल हुए।
बोर्ड ऑफ पीस क्या है?
बोर्ड ऑफ पीस को ट्रंप ने पिछले महीने वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में दावोस में पेश किया था। उस समय ट्रंप ने कहा था कि हर कोई इस संगठन का हिस्सा बनना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा था कि यह संगठन आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र (UN) को टक्कर दे सकता है। शुरुआत में इस बोर्ड का मकसद गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की निगरानी करना था। साथ ही गाजा के पुनर्निर्माण और वहां के प्रशासन में भूमिका निभाने की बात थी। लेकिन बाद में ट्रंप की योजना इससे कहीं बड़ी हो गई। इसके चार्टर के अनुसार यह दुनिया के अन्य संघर्ष क्षेत्रों में भी शांति और स्थिरता के लिए काम कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस बोर्ड के चेयरमैन हैं।
भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है और उसे अपनाता भी है”, AI इम्पैक्ट समिट में बोले पीएम मोदी
#indiaaiimpactsummit2026pmnarendramodispeech
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहे 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' को पीएम मोदी संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने इंडिया एआई समिट 2026 का मकसद बताया। पीएम मोदी ने एआई के लिए दुनिया को भारत का मंत्र दिया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है, और उसे अभूतपूर्व तेजी से अपनाता भी है।
भारत को एआई में भय नहीं भविष्य दिखता है-पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है। सबसे बड़े टैग टैलेंट पूल का केंद्र है। उन्होंने कहा कि भारत को एआई में भय नहीं, भाग्य और भविष्य दिखता है।
एआई को डेमोक्रेटाइज करना होगा-पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि एआई को मानव इतिहास का ट्रांसफॉर्मेशन है। हालांकि, इस दौरान पीएम मोदी ने दुनिया को संदेश देते हुए साफ-साफ कहा कि एआई को डेमोक्रेटाइज करना होगा। भविष्य में नहीं, बल्कि वर्तमान में इसकी दिशा तय होनी चाहिए।
एआई एक ट्रांसफॉर्मेशन है-पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, मानव इतिहास में हर कुछ शताब्दियों के बाद एक टर्निंग पॉइंट आता है और वो टर्निंग पॉइंट सभ्यता की दिशा रिसेट करता है और वहीं से विकास की रफ्तार बदलती है। सोचने, समझने और काम करने के परिणाम बदलते हैं। किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया रियल टाइम में कनेक्ट होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव इतिहास का ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेशन है। आज जो हम देख रहे हैं जो प्रेडिक्ट कर रहे हैं वो इसके इंपैक्ट का सिर्फ प्रारंभिक संकेत है।
एआई मशीनों को इंटेलीजेंट बना रही-पीएम मोदी
पीएम ने कहा एआई मशीनों को इंटेलीजेंट बना रही है। लेकिन उससे भी अधिक मानव सामर्थ्य को कई गुना बढ़ा रही है। पहले टेक्नोलॉजी दिखने में दशकों लगते थे, आज मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर तेज भी है, गहरा भी है, व्यापक भी है। इसलिए हमें विजन भी रखना है और जिम्मेदारी भी बढ़ानी है।
ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा इस समिट का होना पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है। यहां दुनिया के कोने-कोने से आए मेहमान इसकी सफलता को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। यंग जेनरेशन की उपस्थिति नया विश्वास पैदा करती है। पीएम ने कहा एआई समिट में यंग टैलेंट बहुत बड़ी संख्या में आया।
राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक', किरेन रिजिजू का नेता प्रतिपक्ष पर बड़ा हमला
#kirenrijijusaysrahulgandhimostdangerouspersonforindiasecurity
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। रिजिजू ने राहुल गांधी पर ‘भारत विरोधी ताकतों’ से संबंध रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए ‘सबसे खतरनाक व्यक्ति’ बन चुके हैं।
राहुल का व्यवहार काफी बचकाना-रिजिजु
केंद्रीय मंत्री का आरोप है कि राहुल का व्यवहार काफी बचकाना है। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष के पद पर बैठे किसी व्यक्ति के लिए इस तरह की हरकत काफी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता एक बड़ा चेहरा होता है। सदन के बाहर जाना, लोगों को देशद्रोही कहना, नाटकीय धरना देना और एक अनपब्लिश्ड किताब से सरकार को बेवजह घेरना, दिखाता है कि राहुल किस तरह व्यवहार करते हैं। उनका व्यहार बच्चों जैसा होता है। हमने भारत के इतिहास में ऐसा LoP कभी नहीं देखा था।
भारत विरोधी ताकतों से जुड़े होने का आरोप
किरेन रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश और विदेश में नक्सलियों, अतिवादियों, वैचारिक समूहों और जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से मुलाकात करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी भारत की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति बन गए हैं, क्योंकि वे भारत विरोधी ताकतों के साथ जुड़ते हैं।
संसद में सिर्फ हंगामा करती है कांग्रेस-रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि सरकार पर आरोप लगाती है कि हम उन्हें संसद में बोलने नहीं देते हैं। विपक्ष के ये आरोप पूरी तरह से गलत हैं। सरकार कांग्रेस को हर बात बोलने का मौका देती है, लेकिन मुद्दों पर बोलने की बजाए वो हंगामा शुरू कर देते हैं। नारों के साथ बैनर लहराने लगते हैं। उन्होंने कहा कि कागज फेंकना, नारेबाजी करना और बैनर दिखाना ज्यादातर कांग्रेस का तरीका है। यह विपक्ष की गंभीरता को दर्शाता है।
जबरदस्ती पीएम के खिलाफ बयानबाजी का आरोप
रिजिजू ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल के समर्थक इन बातों को गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि वे बिना सच और आधार के बोलते हैं। अगर कोई दस्तावेज है या पीएम किसी से मिले हैं, तो सबूत पेश करें। बिना आधार के पीएम का नाम जोड़ना निराशा और हताशा पैदा करता है। उन्होंने कहा, "वे जबरदस्ती प्रधानमंत्री का नाम घसीटते हैं, बिना किसी आधार के। इससे देश में निराशा फैलती है।"
भारत-पाक तनाव पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- मैं दखल न देता तो खतरे में थी शहबाज शरीफ की जान
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन भारत-पाकिस्तान संघर्ष रूकवाने का दावा करते रहे हैं। ट्रंप ने एक बार फिर दोनों देशों को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। कांग्रेस के जॉइंट सेशन में भारत और पाकिस्तान संघर्ष पर ट्रंप ने फिर कहा कि भारत और पाकिस्तान का युद्ध उन्होंने रुकवाया है। यह न्यूक्लियर वॉर हो सकती थी, करीब साढ़े तीन करोड़ लोग मारे जाते। अगर मैं इसमें शामिल नहीं होता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मारे जाते।
10 महीनों में आठ युद्ध रोकने का दावा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद में संबोधन देते हुए फिर भारत और पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अपने कार्यकाल के पहले 10 महीनों में उन्होंने आठ युद्ध समाप्त किए।
‘35 मिलियन लोग मारे गए होते’
ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने गंभीर हो गए थे कि स्थिति परमाणु संघर्ष तक पहुंच सकती थी। उन्होंने देश की संसद में दावा किया कि शहबाज़ शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर वह दखल नहीं देते तो पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में 35 मिलियन लोग मारे गए होते।
बार-बार भारत-पाक जंग रूकवाने का दावा
ये पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष को लेकर इस तरह का दावा किया है। हां, शहबाज शरीफ को लेकर ये दावा बिल्कुल नया है। हाल के महीनों में डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उन्होंने ही भारत-पाकिस्तान टकराव को रोका है। उन्होंने लगातार कहा है कि उनके एडमिनिस्ट्रेशन ने दोनों देशों को तनाव बढ़ाने से रोकने के लिए ट्रेड एग्रीमेंट और टैरिफ़ उपायों का इस्तेमाल किया।
भारत ने हमेशा ट्रंप के दावों को नकारा
हालांकि, भारत ने हमेशा से डोनाल्ड ट्रंप के दावों को नकारा है। जबकि पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाकिस्तान युद्ध रूकवाने के लिए क्रेडिट दिया है। पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया है। शहबाज शरीफ ने पिछले दिनों बोर्ड ऑफ गाजा पीस के दौरान भी ट्रंप की तारिफ की थी और कहा था कि ट्रंप की वजह से 35 मिलियन लोगों की जान बच गई।
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एड. अशोक दुबे ने महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल के लिए किया नामांकन
मुंबई। महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल चुनाव की तारीख का ऐलान होने के साथ नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, पूरे महाराष्ट्र और गोवा से अधिवक्ता अपना नामांकन करने के लिए अपने समर्थकों के साथ बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र और गोवा के मुंबई कार्यालय में पहुंच रहे हैं। नामांकन करने की अंतिम तारीख 26 फरवरी तथा चुनाव की तारीख 24 फरवरी है । मतगणना 7 अप्रैल को होगा।
मुंबई उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता, Advocates Association of Western India (AAWI) के आजीवन सदस्य अधिवक्ता अशोक कुमार दुबे ने भारी संख्या में उपस्थित अपने समर्थकों के साथ आज अपना नामांकन किया। उनके नामांकन का प्रस्ताव उनके कानूनी गुरु वरिष्ठ अधिवक्ता जयेश याज्ञनिक और राजनाथ पाठक ने किया।
इस अवसर पर उपस्थित अधिवक्ताओं में एडवोकेट अनिल कुमार पांडे, एडवोकेट कमलेश मिश्रा, एडवोकेट अभिनव दुबे, एडवोकेट चिंतन, एडवोकेट अमित तिवारी, एडवोकेट राहुल पाटिल, एडवोकेट अंकित, एडवोकेट मृदुल, एडवोकेट अक्षय जाधव, मुकेश चौरसिया आदि का समावेश रहा।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आ रहे भारत, क्या ट्रूडो से बढ़े विवाद के बाद सुधरेंगे रिश्ते?
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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत दौरे पर आने वाले हैं। मार्क कर्नी 26 फरवरी को भारत पहुंच रहे हैं। ये दौरा ऐसे वक्त में अहम माना जा रहा है जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ट्रेड में काफी उठापटक चल रही है। वहीं, ट्रूडो कार्यकाल में आई भारत-कनाडा रिश्तों में खटास के बाद कनाडाई पीएम का दौरा कापी अहम माना जा रहा है।
कनाडा-भारत के रिश्तों पर होगा फोकस
कार्नी 26 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक इंडो-पैसिफिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान मार्क कार्नी 26 फरवरी भारत पहुंचेंगे। इस दौरान वह सबसे पहले मुंबई जाएंगे। इसके बाद वह दिल्ली आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। मार्क कार्नी के कार्यालय की तरफ से जारी बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के मुताबिक, "प्रधानमंत्री कार्नी सबसे पहले मुंबई पहुंचेंगे। फिर नई दिल्ली जाएंगे, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। दोनों नेता कनाडा-भारत के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने को लेकर बातचीत पर फोकस करेंगे।"
भारत के बड़े बिजनेस लीडर्स से मुलाकात
मार्क कार्नी अपने भारत दौरे की शुरुआत मुंबई से करेंगे, जहां वो देश के बड़े बिजनेस लीडर्स के साथ मुलाकात करेंगे। उनका मकसद कनाडा में भारतीय निवेश को बढ़ावा देना और दोनों देशों की कंपनियों के बीच साझेदारी को मजबूत करना रहेगा। इनमें ट्रेड, एनर्जी, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टैलेंट और संस्कृति, और डिफेंस में बड़ी नई पार्टनरशिप शामिल होंगी। इसके बाद वो नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत।
ऑस्ट्रेलिया और जापान भी जाएंगे कनाडाई पीएम
पीएम कर्नी भारत दौरे के बाद ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और कैनबरा भी जाएंगे। जहां वे पीएम एंथनी अल्बानीज़ से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, व्यापार और एआई मेत उन्नत प्रौद्योगिकियों पर सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। पीएम कार्नी इस दौरान ऑस्ट्रेलिया की संसद के दोनों सदनों और आमंत्रित गणमान्य अतिथियों को भी संबोधित करेंगे। 20 सालों में ऐसा पहली बार होगा जब कोई कनाडाई प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया की संसद को संबोधित करेगा। कनाडा के पीएम कर्मी इसके बाद जापान के टोक्यो पहुंचकर प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए से मुलाकात करेंगे। उनके बीच स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों और खाद्य सुरक्षा में पारस्परिक निवेश और साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
लखनऊ मेट्रो की पटरियां मानकों से कमजोर, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
* स्पीड लिमिट प्रमाणपत्र का नवीनीकरण नहीं, सुरक्षा मानकों की अनदेखी; तत्कालीन एमडी कुमार केशव पर उठे सवाल
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मेट्रो संचालन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। Comptroller and Auditor General of India (CAG) की हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि मेट्रो की रेल पटरियां निर्धारित तकनीकी मानकों से कमजोर पाई गईं। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की बात कही गई है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो ट्रैक से संबंधित कई विशेष मानकों का पालन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, स्पीड लिमिट प्रमाणपत्र का समय पर नवीनीकरण भी नहीं कराया गया, जिससे उच्च गति पर संचालन के दौरान संभावित खतरे की आशंका बढ़ गई। यह स्थिति सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा को जोखिम में डालने वाली मानी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, परियोजना से जुड़ी प्रमुख कंपनियों जैसे Tata Group और Larsen & Toubro (L&T) ने पहले ही मेट्रो प्रशासन को तकनीकी खामियों को लेकर आगाह किया था। बावजूद इसके, आवश्यक सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए।
जांच में यह भी सामने आया है कि ‘कालिंदी’ नामक फर्म को पटरियां बिछाने का ठेका दिया गया था, जो कथित तौर पर कागजों पर ही सक्रिय बताई जा रही है। इस फर्म और मेट्रो प्रशासन के बीच सांठगांठ के आरोप भी उभरकर सामने आए हैं।
मामले में तत्कालीन प्रबंध निदेशक Kumar Keshav की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि परियोजना में अनियमितताओं के बावजूद उन्होंने प्रभावी निगरानी नहीं की। सूत्रों का दावा है कि इस मुद्दे पर संपर्क किए जाने के बावजूद उन्होंने फोन उठाना भी बंद कर दिया है।
इस पूरे मामले ने मेट्रो प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि संबंधित एजेंसियां इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई करती हैं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
Bangkok, Thailand:Prof. Dr. Prakash Divakaran, Vice-Chancellor of Himalayan University, has been conferred with the Prestigious Indo–Thai Educational Excellence Award in recognition of his iconic leadership and remarkable contribution to higher education.
The award was presented by Asst. Prof. Dr. Thanapon Sarunburana, Vice-Chancellor of Rajapark University, during a distinguished academic gathering in Bangkok. The ceremony brought together leading academicians, administrators, and international delegates from India and Thailand.
The event commenced with a Welcome Address by Dr. J. P. Bhosale, Patron, GRCF, Savitribai Phule Pune University. The Presidential Address was delivered by Prof. Dr. Gowri Ramesh, Registrar of The Tamil Nadu Dr. Ambedkar Law University. Prof. Dr. Prakash Divakaran graced the occasion as Chief Guest and delivered the Inaugural Address.
Among the distinguished dignitaries present were Dr. R. Thippa Reddy, Chairman & Director, Dr. Ambedkar Global Law Institute; Assoc. Prof. Dr. Chaiwat Phuakkhong; Asst. Prof. Dr. Arun Chainit; Dr. Jidapa Thavarit; Dr. Gireesh Kumar J; Dr. Shibu Dharmarajan; Dr. Seema Vijay Medhe; and Ms. Ashsagan Ashghari, Chairman, Phoenix Global Gold Co. Ltd., Bangkok.
The formal Vote of Thanks was proposed by Dr. Cholaraja Mudimannan, Assistant Professor of Law (Senior Scale), University of Delhi.
The award highlights Prof. Dr. Divakaran’s visionary leadership in promoting academic excellence, research innovation, and international collaboration. Under his stewardship, Himalayan University has expanded its global academic partnerships and strengthened its commitment to quality higher education.
The Indo–Thai Educational Excellence Award marks a significant milestone for Himalayan University and reflects the growing academic cooperation between India and Thailand.
क्या है “पैक्स सिलिका” जिसमें आज शामिल होगा भारत, यूएस के साथ एक और डील
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भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाने वाला है। ट्रेड डील पर अंतिम साइन से ठीक पहले अमेरिका के टॉप लेवल के अधिकारी भारत पहुंच रहे हैं। अमेरिकी आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग भारत दौरे पर आ रहे हैं। यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी और सप्लाई-चेन की नई राजनीति की ओर इशारा है।
दरअसल, भारत आज औपचारिक रूप से अमेरिका की अगुवाई वाली पहल 'पैक्स सिलिका' में शामिल होने जा रहा है। यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाई गई है। यह घोषणा दिल्ली में चल रहे ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान की गई है।
पिछले महीने हुई थी गठबंधन में शामिल होने का घोषणा
अमेरिका ने दिसंबर 2025 में पैक्स सिलिका की शुरूआत की थी। पैक्स सिलिका सम्मेलन 12 दिसंबर को वाशिंगटन में हुआ था, जहां साझेदार देशों ने पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने पिछले महीने नई दिल्ली को रणनीतिक गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने की घोषणा की।
घोषणा पर किन देशों ने किया हस्ताक्षर?
इस घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, यूएई, सिंगापुर, इस्राइल, कतर और ग्रीस शामिल हैं। जबकि कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड्स और ताइवान जैसे देश इसमें भागीदार के रूप में जुड़े हैं।
चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
कहा जा रहा है कि यह गठबंधन चीन के तकनीकी प्रभुत्व को कम करने के लिए बनाया गया है। ग्लोबल सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में चीन की बड़ी भूमिका रही है। अब अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ नया आर्थिक गठबंधन खड़ा कर रहा है। यह पहल अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति और टेक्नोलॉजी-आधारित साझेदारी मॉडल का हिस्सा मानी जा रही है।
ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की बैठक में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हुआ भारत, क्यों नहीं ली पूर्ण सदस्यता?
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भारत ने गुरुवार को वॉशिंगटन में गाजा बोर्ड ऑफ पीस की पहली मीटिंग में ऑब्जर्वर के तौर पर हिस्सा लिया। ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के निमंत्रण की समीक्षा के एक सप्ताह बाद भारत ने 19 फरवरी को पहली बैठक में एक पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास में तैनात भारत के चार्ज डी' अफेयर्स नामग्या सी खम्पा ने देश का प्रतिनिधित्व किया।
अमेरिका ने की 10 अरब डॉलर के योगदान की घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक एक नए वैश्विक मंच की शुरुआत की और गाजा में युद्ध के बाद स्थिरीकरण और राहत प्रयासों के लिए अमेरिका की ओर से 10 अरब डॉलर के योगदान की घोषणा की। यह बैठक संयुक्त राज्य अमेरिका शांति संस्थान में आयोजित की गई। ट्रंप ने उद्घाटन सत्र में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और बोर्ड सदस्य जारेड कुशनर के साथ मंच साझा किया। उन्होंने कहा, “हम जो कर रहे हैं, वह एक सरल शब्द है- शांति। इसे कहना आसान है, लेकिन हासिल करना कठिन। लेकिन हम इसे हासिल करेंगे।
कौन-कौन हुआ शामिल?
वॉशिंगटन स्थित यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में आयोजित बैठक में लगभग 50 देशों के अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ सहित अन्य देश पर्यवेक्षक के रूप में इसमें शामिल हुए।
बोर्ड ऑफ पीस क्या है?
बोर्ड ऑफ पीस को ट्रंप ने पिछले महीने वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में दावोस में पेश किया था। उस समय ट्रंप ने कहा था कि हर कोई इस संगठन का हिस्सा बनना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा था कि यह संगठन आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र (UN) को टक्कर दे सकता है। शुरुआत में इस बोर्ड का मकसद गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की निगरानी करना था। साथ ही गाजा के पुनर्निर्माण और वहां के प्रशासन में भूमिका निभाने की बात थी। लेकिन बाद में ट्रंप की योजना इससे कहीं बड़ी हो गई। इसके चार्टर के अनुसार यह दुनिया के अन्य संघर्ष क्षेत्रों में भी शांति और स्थिरता के लिए काम कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस बोर्ड के चेयरमैन हैं।
भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है और उसे अपनाता भी है”, AI इम्पैक्ट समिट में बोले पीएम मोदी
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राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहे 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' को पीएम मोदी संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने इंडिया एआई समिट 2026 का मकसद बताया। पीएम मोदी ने एआई के लिए दुनिया को भारत का मंत्र दिया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है, और उसे अभूतपूर्व तेजी से अपनाता भी है।
भारत को एआई में भय नहीं भविष्य दिखता है-पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है। सबसे बड़े टैग टैलेंट पूल का केंद्र है। उन्होंने कहा कि भारत को एआई में भय नहीं, भाग्य और भविष्य दिखता है।
एआई को डेमोक्रेटाइज करना होगा-पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि एआई को मानव इतिहास का ट्रांसफॉर्मेशन है। हालांकि, इस दौरान पीएम मोदी ने दुनिया को संदेश देते हुए साफ-साफ कहा कि एआई को डेमोक्रेटाइज करना होगा। भविष्य में नहीं, बल्कि वर्तमान में इसकी दिशा तय होनी चाहिए।
एआई एक ट्रांसफॉर्मेशन है-पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, मानव इतिहास में हर कुछ शताब्दियों के बाद एक टर्निंग पॉइंट आता है और वो टर्निंग पॉइंट सभ्यता की दिशा रिसेट करता है और वहीं से विकास की रफ्तार बदलती है। सोचने, समझने और काम करने के परिणाम बदलते हैं। किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया रियल टाइम में कनेक्ट होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव इतिहास का ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेशन है। आज जो हम देख रहे हैं जो प्रेडिक्ट कर रहे हैं वो इसके इंपैक्ट का सिर्फ प्रारंभिक संकेत है।
एआई मशीनों को इंटेलीजेंट बना रही-पीएम मोदी
पीएम ने कहा एआई मशीनों को इंटेलीजेंट बना रही है। लेकिन उससे भी अधिक मानव सामर्थ्य को कई गुना बढ़ा रही है। पहले टेक्नोलॉजी दिखने में दशकों लगते थे, आज मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर तेज भी है, गहरा भी है, व्यापक भी है। इसलिए हमें विजन भी रखना है और जिम्मेदारी भी बढ़ानी है।
ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा इस समिट का होना पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है। यहां दुनिया के कोने-कोने से आए मेहमान इसकी सफलता को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। यंग जेनरेशन की उपस्थिति नया विश्वास पैदा करती है। पीएम ने कहा एआई समिट में यंग टैलेंट बहुत बड़ी संख्या में आया।
राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक', किरेन रिजिजू का नेता प्रतिपक्ष पर बड़ा हमला
#kirenrijijusaysrahulgandhimostdangerouspersonforindiasecurity
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। रिजिजू ने राहुल गांधी पर ‘भारत विरोधी ताकतों’ से संबंध रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए ‘सबसे खतरनाक व्यक्ति’ बन चुके हैं।
राहुल का व्यवहार काफी बचकाना-रिजिजु
केंद्रीय मंत्री का आरोप है कि राहुल का व्यवहार काफी बचकाना है। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष के पद पर बैठे किसी व्यक्ति के लिए इस तरह की हरकत काफी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता एक बड़ा चेहरा होता है। सदन के बाहर जाना, लोगों को देशद्रोही कहना, नाटकीय धरना देना और एक अनपब्लिश्ड किताब से सरकार को बेवजह घेरना, दिखाता है कि राहुल किस तरह व्यवहार करते हैं। उनका व्यहार बच्चों जैसा होता है। हमने भारत के इतिहास में ऐसा LoP कभी नहीं देखा था।
भारत विरोधी ताकतों से जुड़े होने का आरोप
किरेन रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश और विदेश में नक्सलियों, अतिवादियों, वैचारिक समूहों और जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से मुलाकात करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी भारत की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति बन गए हैं, क्योंकि वे भारत विरोधी ताकतों के साथ जुड़ते हैं।
संसद में सिर्फ हंगामा करती है कांग्रेस-रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि सरकार पर आरोप लगाती है कि हम उन्हें संसद में बोलने नहीं देते हैं। विपक्ष के ये आरोप पूरी तरह से गलत हैं। सरकार कांग्रेस को हर बात बोलने का मौका देती है, लेकिन मुद्दों पर बोलने की बजाए वो हंगामा शुरू कर देते हैं। नारों के साथ बैनर लहराने लगते हैं। उन्होंने कहा कि कागज फेंकना, नारेबाजी करना और बैनर दिखाना ज्यादातर कांग्रेस का तरीका है। यह विपक्ष की गंभीरता को दर्शाता है।
जबरदस्ती पीएम के खिलाफ बयानबाजी का आरोप
रिजिजू ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल के समर्थक इन बातों को गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि वे बिना सच और आधार के बोलते हैं। अगर कोई दस्तावेज है या पीएम किसी से मिले हैं, तो सबूत पेश करें। बिना आधार के पीएम का नाम जोड़ना निराशा और हताशा पैदा करता है। उन्होंने कहा, "वे जबरदस्ती प्रधानमंत्री का नाम घसीटते हैं, बिना किसी आधार के। इससे देश में निराशा फैलती है।"
Feb 25 2026, 10:49
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