/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1634728678748426.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1634728678748426.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1634728678748426.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1634728678748426.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1634728678748426.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1634728678748426.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1750607915451691.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1750607915451691.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1750607915451691.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1496467143592709.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/testnewsapp/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png StreetBuzz s:e
योगी सरकार का बड़ा फैसला: शासकीय भूमि से जुड़े मामलों की सुनवाई अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी

सीएम योगी के निर्देश पर नई व्यवस्था तत्काल लागू, लखनऊ और प्रयागराज में गठित विशेष बेंच; हर बुधवार होगी नियमित सुनवाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राजस्व न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने शासकीय एवं सार्वजनिक महत्व की भूमि से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय विशेष पीठ (थ्री मेंबर बेंच) गठित करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

नई व्यवस्था के तहत आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति (यदि कोई हो) से जुड़े सभी लंबित और नए वाद अब केवल तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष ही सुने जाएंगे। इन मामलों की सुनवाई अब एकल पीठ या सर्किट कोर्ट में नहीं होगी।

राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने, भूमि विवादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने और राजस्व न्याय प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-9 के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है।

-  हर बुधवार होगी विशेष पीठ की सुनवाई
राजस्व परिषद ने लखनऊ और प्रयागराज स्थित न्यायालयों में अलग-अलग तीन सदस्यीय विशेष पीठों का गठन किया है। ये विशेष पीठ प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से संबंधित मामलों की सुनवाई करेंगी। परिषद ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नए वादों को चिह्नित कर विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया जाए, ताकि मामलों का त्वरित और व्यवस्थित निस्तारण सुनिश्चित हो सके।

-  पारदर्शिता और एकरूपता को मिलेगा बढ़ावा
नई व्यवस्था के तहत सामूहिक निर्णय प्रणाली अपनाए जाने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। साथ ही समान प्रकृति के मामलों में एकरूप निर्णय आने से भविष्य में कानूनी विवाद और असमंजस की स्थिति भी कम होगी।

-  राजस्व सुधारों की कड़ी में एक और कदम
योगी सरकार पहले ही डिजिटल भू-अभिलेख, ऑनलाइन नामांतरण, आधुनिक तकनीक से भूमि पैमाइश, पारदर्शी राजस्व सेवाओं और सरकारी भूमि की सुरक्षा जैसे कई सुधार लागू कर चुकी है। तीन सदस्यीय विशेष पीठ का गठन इन्हीं सुधारों की श्रृंखला का नया और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे प्रदेश की राजस्व न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी तथा आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का लखनऊ में भव्य स्वागत, मुख्यमंत्री योगी ने एयरपोर्ट पर किया अभिनंदन
-  पहली बार उत्तर प्रदेश आगमन पर पुष्पगुच्छ व भगवा अंगवस्त्र से किया सम्मान, मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों से कराया परिचय

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद नितिन नबीन के पहली बार लखनऊ आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट पहुंचकर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पुष्पगुच्छ भेंट कर और भगवा अंगवस्त्र पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष का प्रदेश सरकार के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों से परिचय भी कराया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर स्वागत संदेश साझा करते हुए लिखा कि "प्रभु श्रीराम एवं लीलाधारी भगवान श्रीकृष्ण के चरणरज से पावन हुई संस्कृति, संस्कार और सृजन की साधना स्थली उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन जी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।"
एयरपोर्ट पर स्वागत के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, भूपेंद्र चौधरी, ए.के. शर्मा, धर्मपाल सिंह, नंद गोपाल गुप्ता 'नन्दी', संजय निषाद, दारा सिंह चौहान, जेपीएस राठौर, राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा, संजय सेठ, ब्रजलाल, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित अनेक मंत्री, जनप्रतिनिधि और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रथम उत्तर प्रदेश आगमन को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। एयरपोर्ट पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
टेलीग्राम पर सरकार सख्त, पायरेटेड फिल्में हटाने का आदेश, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

#governmentgetstoughontelegramsendsnotice

देश में ऑनलाइन पाइरेसी को लेकर केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलिग्राम (Telegram) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को नोटिस जारी कर पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी कंटेंट की शेयरिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है।

15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर अपनी एंटी-पाइरेसी व्यवस्था को मजबूत करने और इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में पाइरेटेड फिल्में, ओटीटी कंटेंट और कई कॉपीराइट कंटेंट शेयर किए जा रहे हैं जिससे फिल्म इंडस्ट्री और क्रिएटर इकोनॉमी को भारी नुकसान हो रहा है।

कॉपीराइट का उल्लंघन सामान्य कानूनी विवाद नहीं

सरकार ने टेलीग्राम को याद दिलाया है कि कॉपीराइट का उल्लंघन केवल एक सामान्य कानूनी विवाद नहीं, बल्कि कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत आपराधिक अपराध भी हो सकता है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत एक मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) के रूप में टेलीग्राम की जिम्मेदारी है कि वह उचित सतर्कता बरते और अवैध सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए।

पाइरेसी रोकना सरकार का है मकसद

सरकार ने टेलीग्राम से उन यूजर्स और नेटवर्क के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने को कहा है जो बार-बार पाइरेटेड कंटेंट साझा करते हैं। इसमें केवल पर्सनल अकाउंट ही नहीं बल्कि चैनल, ग्रुप, बॉट, एडमिन और उनसे जुड़े कई नेटवर्क भी शामिल हैं। सरकार के इस कदम का मसकद ऐसे पूरे नेटवर्क को खत्म करना है जो लगातार फिल्मों और वेब सीरीज की पाइरेटेड कॉपी लोगों तक पहुंचाते हैं।

तुंगनाथ धाम में श्रद्धालुओं का नया रिकॉर्ड, 1.18 लाख से अधिक भक्तों ने किए बाबा केदार के दर्शन
-  यात्रा सत्र में उमड़ा आस्था का सैलाब, स्थानीय पर्यटन और कारोबार को मिला बड़ा संबल

रुद्रप्रयाग। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की गोद में स्थित तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 21 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से अब तक 1,18,381 श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर चुके हैं। रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं से जहां धाम में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, वहीं स्थानीय पर्यटन और कारोबार को भी नई गति मिली है।
यात्रा सत्र के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु चोपता से तुंगनाथ तक की पैदल यात्रा कर रहे हैं। हिमालय की बर्फ से आच्छादित चोटियां, मनमोहक प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। इन दिनों पूरा पैदल मार्ग श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही से गुलजार है।
बढ़ती तीर्थयात्रा का सीधा लाभ चोपता, बणियाकुंड, दुगलबिट्टा और आसपास के क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है। होटल, होम-स्टे, भोजनालय, स्थानीय दुकानें, घोड़ा-खच्चर सेवा तथा पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर समिति, तीर्थ पुरोहित समाज, वन विभाग, व्यापार संघ तथा स्वयंसेवी संस्थाएं संयुक्त रूप से स्वच्छता, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटी हैं।
तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि अब तक दर्शन करने वालों में 60,962 पुरुष, 50,815 महिलाएं, 6,384 बच्चे, 151 साधु-संत और 69 विदेशी श्रद्धालु शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चोपता से सीधे चंद्रशिला जाने वाले पर्यटकों को इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में पार्किंग, पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सुविधाओं का और विस्तार किया जाए, तो तुंगनाथ धाम धार्मिक एवं पर्वतीय पर्यटन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान स्थापित कर सकता है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण है कि तुंगनाथ धाम उत्तराखंड के प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
भूख हड़ताल के सातवें दिन सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, 5 किलो से अधिक वजन घटा
-  जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी, शाम को UPSC अभ्यर्थियों के साथ होगा खुला संवाद

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। भूख हड़ताल के सातवें दिन जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार उनका वजन 5 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है। डॉक्टरों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सामान्य स्तर से नीचे पहुंच गए हैं। मेडिकल टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखे हुए है और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने कहा कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक भूख हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन को समर्थन देने के लिए बड़ी संख्या में लोग लगातार धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं।
आंदोलन के तहत शनिवार शाम 7 बजे UPSC अभ्यर्थियों के साथ एक खुला संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान अभिजीत दीपके छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे। आयोजकों के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत से ही बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं और परीक्षा प्रक्रिया, आर्थिक दबाव, मानसिक तनाव तथा अन्य चुनौतियों से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
आयोजकों का कहना है कि इस संवाद का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं और सुझावों को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना है। इसके लिए ओल्ड राजेंद्र नगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों के विचारों को संकलित कर व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
धरना स्थल पर देश के विभिन्न राज्यों से छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों का पहुंचना लगातार जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं की समस्याओं और अपेक्षाओं को आवाज देने का प्रयास है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा। आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ भी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
दिल्ली सरकार ने समाप्त की सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था

-  ईंधन संकट में सुधार के बाद आदेश वापस, अब सभी कर्मचारी नियमित समय पर कार्यालय आएंगे

दिल्ली ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन लागू की गई वर्क फ्रॉम होम (WFH) व्यवस्था समाप्त कर दी है। ईंधन आपूर्ति की स्थिति सामान्य होने के बाद सरकार ने यह विशेष व्यवस्था वापस लेते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले की तरह नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
नए आदेश के अनुसार अब सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक कार्यालयों और सचिवालय में नियमित रूप से कार्य करेंगे।
गौरतलब है कि मई में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण संभावित वैश्विक ईंधन संकट की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऊर्जा और ईंधन की बचत के उद्देश्य से सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू किया था। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों के कार्य समय में भी बदलाव किया गया था।
सरकार ने उस दौरान सरकारी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए अधिकारियों के पेट्रोल भत्ते में 20 प्रतिशत तक कटौती की थी। 200 लीटर की मासिक सीमा को घटाकर 160 लीटर तथा 250 लीटर की सीमा को 200 लीटर कर दिया गया था। साथ ही प्रत्येक सोमवार को 'मेट्रो मंडे' के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था, जिसके तहत मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इसके अलावा, 17 मई को दिल्ली सरकार ने निजी कंपनियों और संस्थानों से भी सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने, कार्यालयों के समय में बदलाव करने तथा कर्मचारियों को कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की सलाह दी थी, ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।
अब ईंधन संकट में सुधार और आपूर्ति सामान्य होने के बाद सरकार ने यह अस्थायी व्यवस्था समाप्त कर दी है। इसके साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में पूर्ववत नियमित कार्य व्यवस्था बहाल कर दी गई है।
पदाधिकारी ने खुद भरा इन्यूमरेशन फॉर्म, मतदाताओं से की अपील - समय पर फॉर्म जमा करें

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के तहत अपना इन्यूमरेशन फॉर्म भरकर एवं हस्ताक्षर कर 64 –हटिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अपने मतदान केंद्र संख्या 374 कि बीएलओ श्रीमती अन्नु कच्छप को जमा किया। श्री के. रवि कुमार ने राज्य के प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिकों से आग्रह किया है कि बीएलओ जब आपके घर आयें तो यथा–संभव हाथों हाथ अपना तथा अपने परिवार का इन्यूमरेशन फॉर्म भरकर/भवरवाकर एवं हस्ताक्षर कर/ कराकर अपने बीएलओ को अवश्य जमा करें। बीएलओ द्वारा सीमित समय में पूरे मतदान केंद्र क्षेत्र के सभी घरों तक जाकर सेवा प्रदान करना है।

उन्होंने सभी कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों से भी आग्रह किया है कि वे अपने सुविधानुसार जल्द से जल्द अपने बीएलओ से संपर्क करते हुए अपना तथा अपने परिजनों का इन्यूमरेशन फॉर्म भरवाना सुनिश्चित करें एवं भारत निर्वाचन आयोग के लक्ष्य "एक भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से छूटेगा नहीं एवं एक भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में जुड़ेगा नहीं" को प्राप्त करने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करें।

इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के आवास पर 64 हटिया विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ श्री सुदीप्त राज, बीएलओ सुपरवाईजर एवं कंप्यूटर ऑपरेटर भी उपस्थित थे ।

दिल्ली विश्वविद्यालय: ईसीए कोटा के शारीरिक परीक्षण 15 जुलाई से संभावित, मूल प्रमाणपत्र और CUET स्कोरकार्ड लाना होगा अनिवार्य

-  परीक्षण केंद्र और समय जल्द होंगे घोषित, नियमों के उल्लंघन पर रद्द होगी उम्मीदवारी


नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सह-पाठ्यक्रम गतिविधि (ECA) कोटे के तहत प्रवेश प्रक्रिया के लिए शारीरिक परीक्षण संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, शारीरिक परीक्षण 15 जुलाई 2026 से शुरू होने की संभावना है। परीक्षण की अंतिम तिथि, समय और केंद्र की जानकारी जल्द ही विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि सभी अभ्यर्थियों को परीक्षण के दौरान पंजीकरण के समय अपलोड किए गए ईसीए प्रमाणपत्रों की मूल प्रतियां तथा CUET (UG) स्कोरकार्ड साथ लाना अनिवार्य होगा। आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षण में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
निर्देशों के अनुसार, अभ्यर्थियों को अपनी प्रस्तुति के लिए आवश्यक सभी सामग्री स्वयं लानी होगी। इसमें संगीत वाद्ययंत्र, नृत्य की पोशाक, प्रस्तुति सामग्री, लेखन सामग्री, योगा मैट तथा अन्य आवश्यक उपकरण शामिल हैं। किसी भी अभ्यर्थी को दूसरे प्रतिभागी से सामान साझा करने या उधार लेने की अनुमति नहीं होगी।
नृत्य और संगीत श्रेणी के अभ्यर्थियों को तीन से पांच मिनट की प्रस्तुति देनी होगी, जबकि रंगमंच श्रेणी के अभ्यर्थियों को लगभग चार मिनट का एकल अभिनय प्रस्तुत करना होगा। रचनात्मक लेखन, वाद-विवाद और ललित कला के अभ्यर्थियों को विषय मौके पर दिया जाएगा। योग श्रेणी के प्रतिभागियों को चार मिनट के भीतर कम से कम चार योगासन प्रदर्शित करने होंगे।
विश्वविद्यालय ने शारीरिक परीक्षण के दौरान फोटोग्राफी, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा किसी भी अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित साधनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित अभ्यर्थी की उम्मीदवारी तत्काल रद्द की जा सकती है।
बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों को यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा। उन्हें आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाएं स्वयं करनी होंगी। विश्वविद्यालय ने अभ्यर्थियों को पानी, आवश्यक दवाइयां और अन्य जरूरी सामान साथ रखने की सलाह भी दी है।
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन समिति का निर्णय अंतिम होगा। बीमारी, चोट या अन्य व्यक्तिगत कारणों के आधार पर दोबारा शारीरिक परीक्षण का अवसर नहीं दिया जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी के दो परीक्षण एक ही समय पर निर्धारित होते हैं, तो वह विश्वविद्यालय के प्रवेश प्रकोष्ठ से आधिकारिक ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकता है।
विश्वविद्यालय ने सभी अभ्यर्थियों से निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने, सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखने तथा प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित नवीनतम जानकारी के लिए नियमित रूप से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की अपील की है।
SIR-2026: रांची DC का सख्त निर्देश, BLO सुबह 6 बजे से करें घर-घर फॉर्म वितरण

विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-2026) के अंतर्गत Enumeration Form के वितरण, संग्रहण एवं डिजिटाइजेशन कार्य की समीक्षा हेतु जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।

बैठक में सभी EROs, AEROs, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सभी CDPO एवं सुपरवाइजर उपस्थित थे।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि Enumeration Form के वितरण, संग्रहण एवं डिजिटाइजेशन कार्य में गति लाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में नियमित निगरानी करते हुए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य पूर्ण कराएं।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा BLO को निर्देश दिया कि वे प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से घर-घर जाकर Enumeration Form का वितरण एवं संग्रहण करें, ताकि अधिकतम मतदाता घर पर मिल सकें और दिन के उत्तरार्ध में संग्रहित प्रपत्रों का समयबद्ध डिजिटाइजेशन सुनिश्चित किया जाए, जिससे कार्य में तेजी आए।

बैठक में समीक्षा के दौरान धीमी कार्य प्रगति पर कई ERO, AERO एवं BLO के कार्य पर असंतोष व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को कारण बताओ (Show Cause) नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण निर्वाचन कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को प्रतिदिन कार्य की समीक्षा कर प्रगति की सतत निगरानी करने तथा वितरण, संग्रहण एवं डिजिटाइजेशन के कार्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया।

राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज गोपनीय रहेंगे

-  केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय के फैसले को सही ठहराया

-  आयोग बोला- दस्तावेज सार्वजनिक करने से सुरक्षा पर पड़ सकता है असर; ट्रस्ट RTI के दायरे में नहीं

नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक न करने के केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्णय को सही ठहराया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि इन दस्तावेजों का खुलासा संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इन्हें गोपनीय श्रेणी में रखना उचित है।
यह मामला नीरज शर्मा द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत दायर आवेदन से जुड़ा है। आवेदन में उन्होंने 5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की योजना तथा उससे संबंधित सरकारी आदेशों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। गृह मंत्रालय से संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट के गठन से संबंधित सभी दस्तावेज उनकी संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए गोपनीय श्रेणी में रखे गए हैं। मंत्रालय ने तर्क दिया कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से संबंधित व्यक्तियों के जीवन और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर RTI अधिनियम की धारा 8(1)(g) के तहत सूचना देने से इनकार किया गया।
तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया ने गृह मंत्रालय की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिया गया उत्तर विधिसम्मत है और इस मामले में आयोग के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही अपील का निस्तारण कर दिया गया।

-  ट्रस्ट RTI के दायरे में नहीं
एक अन्य आदेश में केंद्रीय सूचना आयोग ने स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' नहीं है। गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिस पर न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार का स्वामित्व, नियंत्रण अथवा वित्तीय सहायता है। सरकार की भूमिका केवल उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ट्रस्ट के गठन तक सीमित रही।
ट्रस्ट की ओर से भी आयोग को बताया गया कि उसका गठन किसी सरकारी अधिसूचना के माध्यम से नहीं हुआ है और उसे सरकार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं होती। इसलिए वह सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में नहीं आता।
आयोग ने अपने अंतिम निर्णय में कहा कि ट्रस्ट का गठन उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में ट्रस्ट विलेख के माध्यम से किया गया था। उपलब्ध तथ्यों से यह सिद्ध नहीं होता कि ट्रस्ट सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है या उसे सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। इसी आधार पर आयोग ने माना कि ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकरण का दर्जा नहीं दिया जा सकता और वह सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में नहीं आता।
योगी सरकार का बड़ा फैसला: शासकीय भूमि से जुड़े मामलों की सुनवाई अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी

सीएम योगी के निर्देश पर नई व्यवस्था तत्काल लागू, लखनऊ और प्रयागराज में गठित विशेष बेंच; हर बुधवार होगी नियमित सुनवाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राजस्व न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने शासकीय एवं सार्वजनिक महत्व की भूमि से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय विशेष पीठ (थ्री मेंबर बेंच) गठित करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

नई व्यवस्था के तहत आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति (यदि कोई हो) से जुड़े सभी लंबित और नए वाद अब केवल तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष ही सुने जाएंगे। इन मामलों की सुनवाई अब एकल पीठ या सर्किट कोर्ट में नहीं होगी।

राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने, भूमि विवादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने और राजस्व न्याय प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-9 के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है।

-  हर बुधवार होगी विशेष पीठ की सुनवाई
राजस्व परिषद ने लखनऊ और प्रयागराज स्थित न्यायालयों में अलग-अलग तीन सदस्यीय विशेष पीठों का गठन किया है। ये विशेष पीठ प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से संबंधित मामलों की सुनवाई करेंगी। परिषद ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नए वादों को चिह्नित कर विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया जाए, ताकि मामलों का त्वरित और व्यवस्थित निस्तारण सुनिश्चित हो सके।

-  पारदर्शिता और एकरूपता को मिलेगा बढ़ावा
नई व्यवस्था के तहत सामूहिक निर्णय प्रणाली अपनाए जाने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। साथ ही समान प्रकृति के मामलों में एकरूप निर्णय आने से भविष्य में कानूनी विवाद और असमंजस की स्थिति भी कम होगी।

-  राजस्व सुधारों की कड़ी में एक और कदम
योगी सरकार पहले ही डिजिटल भू-अभिलेख, ऑनलाइन नामांतरण, आधुनिक तकनीक से भूमि पैमाइश, पारदर्शी राजस्व सेवाओं और सरकारी भूमि की सुरक्षा जैसे कई सुधार लागू कर चुकी है। तीन सदस्यीय विशेष पीठ का गठन इन्हीं सुधारों की श्रृंखला का नया और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे प्रदेश की राजस्व न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी तथा आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का लखनऊ में भव्य स्वागत, मुख्यमंत्री योगी ने एयरपोर्ट पर किया अभिनंदन
-  पहली बार उत्तर प्रदेश आगमन पर पुष्पगुच्छ व भगवा अंगवस्त्र से किया सम्मान, मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों से कराया परिचय

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद नितिन नबीन के पहली बार लखनऊ आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट पहुंचकर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पुष्पगुच्छ भेंट कर और भगवा अंगवस्त्र पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष का प्रदेश सरकार के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों से परिचय भी कराया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर स्वागत संदेश साझा करते हुए लिखा कि "प्रभु श्रीराम एवं लीलाधारी भगवान श्रीकृष्ण के चरणरज से पावन हुई संस्कृति, संस्कार और सृजन की साधना स्थली उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन जी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।"
एयरपोर्ट पर स्वागत के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, भूपेंद्र चौधरी, ए.के. शर्मा, धर्मपाल सिंह, नंद गोपाल गुप्ता 'नन्दी', संजय निषाद, दारा सिंह चौहान, जेपीएस राठौर, राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा, संजय सेठ, ब्रजलाल, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित अनेक मंत्री, जनप्रतिनिधि और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रथम उत्तर प्रदेश आगमन को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। एयरपोर्ट पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
टेलीग्राम पर सरकार सख्त, पायरेटेड फिल्में हटाने का आदेश, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट

#governmentgetstoughontelegramsendsnotice

देश में ऑनलाइन पाइरेसी को लेकर केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलिग्राम (Telegram) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को नोटिस जारी कर पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी कंटेंट की शेयरिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है।

15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर अपनी एंटी-पाइरेसी व्यवस्था को मजबूत करने और इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में पाइरेटेड फिल्में, ओटीटी कंटेंट और कई कॉपीराइट कंटेंट शेयर किए जा रहे हैं जिससे फिल्म इंडस्ट्री और क्रिएटर इकोनॉमी को भारी नुकसान हो रहा है।

कॉपीराइट का उल्लंघन सामान्य कानूनी विवाद नहीं

सरकार ने टेलीग्राम को याद दिलाया है कि कॉपीराइट का उल्लंघन केवल एक सामान्य कानूनी विवाद नहीं, बल्कि कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत आपराधिक अपराध भी हो सकता है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत एक मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) के रूप में टेलीग्राम की जिम्मेदारी है कि वह उचित सतर्कता बरते और अवैध सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए।

पाइरेसी रोकना सरकार का है मकसद

सरकार ने टेलीग्राम से उन यूजर्स और नेटवर्क के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने को कहा है जो बार-बार पाइरेटेड कंटेंट साझा करते हैं। इसमें केवल पर्सनल अकाउंट ही नहीं बल्कि चैनल, ग्रुप, बॉट, एडमिन और उनसे जुड़े कई नेटवर्क भी शामिल हैं। सरकार के इस कदम का मसकद ऐसे पूरे नेटवर्क को खत्म करना है जो लगातार फिल्मों और वेब सीरीज की पाइरेटेड कॉपी लोगों तक पहुंचाते हैं।

तुंगनाथ धाम में श्रद्धालुओं का नया रिकॉर्ड, 1.18 लाख से अधिक भक्तों ने किए बाबा केदार के दर्शन
-  यात्रा सत्र में उमड़ा आस्था का सैलाब, स्थानीय पर्यटन और कारोबार को मिला बड़ा संबल

रुद्रप्रयाग। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की गोद में स्थित तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 21 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से अब तक 1,18,381 श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर चुके हैं। रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं से जहां धाम में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, वहीं स्थानीय पर्यटन और कारोबार को भी नई गति मिली है।
यात्रा सत्र के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु चोपता से तुंगनाथ तक की पैदल यात्रा कर रहे हैं। हिमालय की बर्फ से आच्छादित चोटियां, मनमोहक प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। इन दिनों पूरा पैदल मार्ग श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही से गुलजार है।
बढ़ती तीर्थयात्रा का सीधा लाभ चोपता, बणियाकुंड, दुगलबिट्टा और आसपास के क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है। होटल, होम-स्टे, भोजनालय, स्थानीय दुकानें, घोड़ा-खच्चर सेवा तथा पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर समिति, तीर्थ पुरोहित समाज, वन विभाग, व्यापार संघ तथा स्वयंसेवी संस्थाएं संयुक्त रूप से स्वच्छता, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटी हैं।
तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि अब तक दर्शन करने वालों में 60,962 पुरुष, 50,815 महिलाएं, 6,384 बच्चे, 151 साधु-संत और 69 विदेशी श्रद्धालु शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चोपता से सीधे चंद्रशिला जाने वाले पर्यटकों को इस आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में पार्किंग, पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सुविधाओं का और विस्तार किया जाए, तो तुंगनाथ धाम धार्मिक एवं पर्वतीय पर्यटन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान स्थापित कर सकता है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण है कि तुंगनाथ धाम उत्तराखंड के प्रमुख आध्यात्मिक और पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
भूख हड़ताल के सातवें दिन सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, 5 किलो से अधिक वजन घटा
-  जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी, शाम को UPSC अभ्यर्थियों के साथ होगा खुला संवाद

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। भूख हड़ताल के सातवें दिन जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार उनका वजन 5 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है। डॉक्टरों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सामान्य स्तर से नीचे पहुंच गए हैं। मेडिकल टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखे हुए है और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने कहा कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक भूख हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन को समर्थन देने के लिए बड़ी संख्या में लोग लगातार धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं।
आंदोलन के तहत शनिवार शाम 7 बजे UPSC अभ्यर्थियों के साथ एक खुला संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान अभिजीत दीपके छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे। आयोजकों के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत से ही बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं और परीक्षा प्रक्रिया, आर्थिक दबाव, मानसिक तनाव तथा अन्य चुनौतियों से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।
आयोजकों का कहना है कि इस संवाद का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं और सुझावों को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना है। इसके लिए ओल्ड राजेंद्र नगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अभ्यर्थियों के विचारों को संकलित कर व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
धरना स्थल पर देश के विभिन्न राज्यों से छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों का पहुंचना लगातार जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं की समस्याओं और अपेक्षाओं को आवाज देने का प्रयास है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा। आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ भी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
दिल्ली सरकार ने समाप्त की सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था

-  ईंधन संकट में सुधार के बाद आदेश वापस, अब सभी कर्मचारी नियमित समय पर कार्यालय आएंगे

दिल्ली ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन लागू की गई वर्क फ्रॉम होम (WFH) व्यवस्था समाप्त कर दी है। ईंधन आपूर्ति की स्थिति सामान्य होने के बाद सरकार ने यह विशेष व्यवस्था वापस लेते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले की तरह नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
नए आदेश के अनुसार अब सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक कार्यालयों और सचिवालय में नियमित रूप से कार्य करेंगे।
गौरतलब है कि मई में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण संभावित वैश्विक ईंधन संकट की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऊर्जा और ईंधन की बचत के उद्देश्य से सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू किया था। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों के कार्य समय में भी बदलाव किया गया था।
सरकार ने उस दौरान सरकारी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए अधिकारियों के पेट्रोल भत्ते में 20 प्रतिशत तक कटौती की थी। 200 लीटर की मासिक सीमा को घटाकर 160 लीटर तथा 250 लीटर की सीमा को 200 लीटर कर दिया गया था। साथ ही प्रत्येक सोमवार को 'मेट्रो मंडे' के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था, जिसके तहत मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इसके अलावा, 17 मई को दिल्ली सरकार ने निजी कंपनियों और संस्थानों से भी सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने, कार्यालयों के समय में बदलाव करने तथा कर्मचारियों को कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की सलाह दी थी, ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।
अब ईंधन संकट में सुधार और आपूर्ति सामान्य होने के बाद सरकार ने यह अस्थायी व्यवस्था समाप्त कर दी है। इसके साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में पूर्ववत नियमित कार्य व्यवस्था बहाल कर दी गई है।
पदाधिकारी ने खुद भरा इन्यूमरेशन फॉर्म, मतदाताओं से की अपील - समय पर फॉर्म जमा करें

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के तहत अपना इन्यूमरेशन फॉर्म भरकर एवं हस्ताक्षर कर 64 –हटिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अपने मतदान केंद्र संख्या 374 कि बीएलओ श्रीमती अन्नु कच्छप को जमा किया। श्री के. रवि कुमार ने राज्य के प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिकों से आग्रह किया है कि बीएलओ जब आपके घर आयें तो यथा–संभव हाथों हाथ अपना तथा अपने परिवार का इन्यूमरेशन फॉर्म भरकर/भवरवाकर एवं हस्ताक्षर कर/ कराकर अपने बीएलओ को अवश्य जमा करें। बीएलओ द्वारा सीमित समय में पूरे मतदान केंद्र क्षेत्र के सभी घरों तक जाकर सेवा प्रदान करना है।

उन्होंने सभी कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों से भी आग्रह किया है कि वे अपने सुविधानुसार जल्द से जल्द अपने बीएलओ से संपर्क करते हुए अपना तथा अपने परिजनों का इन्यूमरेशन फॉर्म भरवाना सुनिश्चित करें एवं भारत निर्वाचन आयोग के लक्ष्य "एक भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से छूटेगा नहीं एवं एक भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में जुड़ेगा नहीं" को प्राप्त करने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करें।

इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के आवास पर 64 हटिया विधानसभा क्षेत्र के एईआरओ श्री सुदीप्त राज, बीएलओ सुपरवाईजर एवं कंप्यूटर ऑपरेटर भी उपस्थित थे ।

दिल्ली विश्वविद्यालय: ईसीए कोटा के शारीरिक परीक्षण 15 जुलाई से संभावित, मूल प्रमाणपत्र और CUET स्कोरकार्ड लाना होगा अनिवार्य

-  परीक्षण केंद्र और समय जल्द होंगे घोषित, नियमों के उल्लंघन पर रद्द होगी उम्मीदवारी


नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सह-पाठ्यक्रम गतिविधि (ECA) कोटे के तहत प्रवेश प्रक्रिया के लिए शारीरिक परीक्षण संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, शारीरिक परीक्षण 15 जुलाई 2026 से शुरू होने की संभावना है। परीक्षण की अंतिम तिथि, समय और केंद्र की जानकारी जल्द ही विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि सभी अभ्यर्थियों को परीक्षण के दौरान पंजीकरण के समय अपलोड किए गए ईसीए प्रमाणपत्रों की मूल प्रतियां तथा CUET (UG) स्कोरकार्ड साथ लाना अनिवार्य होगा। आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षण में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
निर्देशों के अनुसार, अभ्यर्थियों को अपनी प्रस्तुति के लिए आवश्यक सभी सामग्री स्वयं लानी होगी। इसमें संगीत वाद्ययंत्र, नृत्य की पोशाक, प्रस्तुति सामग्री, लेखन सामग्री, योगा मैट तथा अन्य आवश्यक उपकरण शामिल हैं। किसी भी अभ्यर्थी को दूसरे प्रतिभागी से सामान साझा करने या उधार लेने की अनुमति नहीं होगी।
नृत्य और संगीत श्रेणी के अभ्यर्थियों को तीन से पांच मिनट की प्रस्तुति देनी होगी, जबकि रंगमंच श्रेणी के अभ्यर्थियों को लगभग चार मिनट का एकल अभिनय प्रस्तुत करना होगा। रचनात्मक लेखन, वाद-विवाद और ललित कला के अभ्यर्थियों को विषय मौके पर दिया जाएगा। योग श्रेणी के प्रतिभागियों को चार मिनट के भीतर कम से कम चार योगासन प्रदर्शित करने होंगे।
विश्वविद्यालय ने शारीरिक परीक्षण के दौरान फोटोग्राफी, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा किसी भी अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित साधनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित अभ्यर्थी की उम्मीदवारी तत्काल रद्द की जा सकती है।
बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों को यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा। उन्हें आवास, भोजन और अन्य व्यवस्थाएं स्वयं करनी होंगी। विश्वविद्यालय ने अभ्यर्थियों को पानी, आवश्यक दवाइयां और अन्य जरूरी सामान साथ रखने की सलाह भी दी है।
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन समिति का निर्णय अंतिम होगा। बीमारी, चोट या अन्य व्यक्तिगत कारणों के आधार पर दोबारा शारीरिक परीक्षण का अवसर नहीं दिया जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी के दो परीक्षण एक ही समय पर निर्धारित होते हैं, तो वह विश्वविद्यालय के प्रवेश प्रकोष्ठ से आधिकारिक ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकता है।
विश्वविद्यालय ने सभी अभ्यर्थियों से निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने, सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखने तथा प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित नवीनतम जानकारी के लिए नियमित रूप से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की अपील की है।
SIR-2026: रांची DC का सख्त निर्देश, BLO सुबह 6 बजे से करें घर-घर फॉर्म वितरण

विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-2026) के अंतर्गत Enumeration Form के वितरण, संग्रहण एवं डिजिटाइजेशन कार्य की समीक्षा हेतु जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।

बैठक में सभी EROs, AEROs, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सभी CDPO एवं सुपरवाइजर उपस्थित थे।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि Enumeration Form के वितरण, संग्रहण एवं डिजिटाइजेशन कार्य में गति लाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में नियमित निगरानी करते हुए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य पूर्ण कराएं।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा BLO को निर्देश दिया कि वे प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से घर-घर जाकर Enumeration Form का वितरण एवं संग्रहण करें, ताकि अधिकतम मतदाता घर पर मिल सकें और दिन के उत्तरार्ध में संग्रहित प्रपत्रों का समयबद्ध डिजिटाइजेशन सुनिश्चित किया जाए, जिससे कार्य में तेजी आए।

बैठक में समीक्षा के दौरान धीमी कार्य प्रगति पर कई ERO, AERO एवं BLO के कार्य पर असंतोष व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को कारण बताओ (Show Cause) नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण निर्वाचन कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को प्रतिदिन कार्य की समीक्षा कर प्रगति की सतत निगरानी करने तथा वितरण, संग्रहण एवं डिजिटाइजेशन के कार्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया।

राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज गोपनीय रहेंगे

-  केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय के फैसले को सही ठहराया

-  आयोग बोला- दस्तावेज सार्वजनिक करने से सुरक्षा पर पड़ सकता है असर; ट्रस्ट RTI के दायरे में नहीं

नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक न करने के केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्णय को सही ठहराया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि इन दस्तावेजों का खुलासा संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इन्हें गोपनीय श्रेणी में रखना उचित है।
यह मामला नीरज शर्मा द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत दायर आवेदन से जुड़ा है। आवेदन में उन्होंने 5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की योजना तथा उससे संबंधित सरकारी आदेशों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। गृह मंत्रालय से संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर उन्होंने केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट के गठन से संबंधित सभी दस्तावेज उनकी संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए गोपनीय श्रेणी में रखे गए हैं। मंत्रालय ने तर्क दिया कि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से संबंधित व्यक्तियों के जीवन और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर RTI अधिनियम की धारा 8(1)(g) के तहत सूचना देने से इनकार किया गया।
तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया ने गृह मंत्रालय की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिया गया उत्तर विधिसम्मत है और इस मामले में आयोग के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही अपील का निस्तारण कर दिया गया।

-  ट्रस्ट RTI के दायरे में नहीं
एक अन्य आदेश में केंद्रीय सूचना आयोग ने स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' नहीं है। गृह मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिस पर न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार का स्वामित्व, नियंत्रण अथवा वित्तीय सहायता है। सरकार की भूमिका केवल उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ट्रस्ट के गठन तक सीमित रही।
ट्रस्ट की ओर से भी आयोग को बताया गया कि उसका गठन किसी सरकारी अधिसूचना के माध्यम से नहीं हुआ है और उसे सरकार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं होती। इसलिए वह सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में नहीं आता।
आयोग ने अपने अंतिम निर्णय में कहा कि ट्रस्ट का गठन उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में ट्रस्ट विलेख के माध्यम से किया गया था। उपलब्ध तथ्यों से यह सिद्ध नहीं होता कि ट्रस्ट सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में है या उसे सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। इसी आधार पर आयोग ने माना कि ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकरण का दर्जा नहीं दिया जा सकता और वह सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में नहीं आता।