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कैसे होगी इस बार की जनगणना? पूछे जाएंगे 33 सवाल, देनी होगी मकान-वाहन से शौचालय तक की जानकारी

#census2027indiaallyouneedtoknowabout33point_question 

जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। देशभर में 1 अप्रैल से जनगणना शुरू होने जा रही है, जिसे लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और इसमें लोगों से जीवनशैली से जुड़े बेहद विस्तृत सवाल पूछे जाएंगे। 

आरटीआई से भी नहीं मिलेगा जवाब

रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनगणना अधिनियम की धारा 15 का हवाला देते हुए कहा कि जनगणना के दौरान जुटाया गया व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की जानकारी न तो आरटीआई के तहत साझा की जा सकती है, न ही अदालतों में साक्ष्य के रूप में पेश की जा सकती है और न ही किसी अन्य संस्था के साथ साझा की जाएगी। 

जनगणना दो चरणों में पूरी होगी

इस बार जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में मकानों और उनकी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में घर में रहने वाले लोगों की सामाजिक, आर्थिक और अन्य जानकारी दर्ज की जाएगी। खास बात यह है कि पहली बार ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ यानी स्वगणना की सुविधा दी गई है, जिसके तहत लोग खुद भी 15 दिन की निर्धारित अवधि में ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। मृत्युंजय कुमार ने बताया कि सेल्फ एन्यूमरेशन में लोगों को खुद ही जानकारी देनी होगी, लेकिन इसके बावजूद जो कर्मचारी-अधिकारी घर जाएंगे और जो आईडी होगी उसके आधार पर वह क्रॉस वेरीफाई करेंगे। इस वजह से इसमें गड़बड़ी की संभावना नहीं है।

सरकार ने इस बार कुल 33 सवाल तय किए

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के लिए 33 सवालों वाली नई प्रश्नावली जारी की है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। इस प्रश्नावली को 2011 की पिछली जनगणना के बाद भारतीय समाज में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें घर के प्रकार, स्थान और संरचना से जुड़े सवालों के साथ-साथ डिजिटल युग को देखते हुए इंटरनेट सुविधा की उपलब्धता पर भी नया सवाल शामिल किया गया है। इसके अलावा एलपीजी, पीने के पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच को लेकर भी जानकारी ली जाएगी।

दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा

जनगणना 2027 दूसरा चरण जनसंख्या गणना, जो 1 फरवरी 2027 से शुरू होगी। यह भारत की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी, जो देश में नीति निर्माण और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराएगी। करीब 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट वाली इस विशाल प्रक्रिया में राज्यों की मशीनरी, जिला स्तर के अधिकारी और केंद्र सरकार मिलकर काम करेंगे। गृह मंत्रालय की निगरानी में यह पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।

जनगणना में 33 विंदुओं की सूचना लेने प्रगणक पहुंचेंगे आपके घर
गोपनीय होंगे जनगणना के आंकड़े

सहायक निदेशक जनगणना, अयोध्या मण्डल अयोध्या ने किया प्रशिक्षण की गुणवत्ता का आकलन

सुल्तानपुर। स्वतंत्र भारत की आठवीं जनगणना के फील्ड ट्रेनर का प्रशिक्षण राजकीय आई टी आई पयागीपुर में प्रातः साढ़े नौ बजे से शाम पांच बजे तक दो प्रशिक्षण कक्षा-कक्षों में 81 शिक्षकों एवं लेखपालों को दिया जा रहा है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता का निरीक्षण करने पहुंचे सहायक निदेशक जनगणना अयोध्या मण्डल अयोध्या ने प्रतिभागियों को बताया कि प्रथम चरण की जनगणना।

मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना 2026तथा द्वितीय चरण की जनगणना जनसंख्या की गणना 2027 में कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़े कल्याणकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण तथा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन कार्य के लिए आधार बनते हैं, मकान सूची करण, मकानों की स्थिति सुविधाएं परिसंपत्तियों की महत्वपूर्ण सूचना प्रदान करता है और जनसंख्या की गणना के लिए ढांचा भी बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत में पहली बार डिजीटल जनगणना कराई जा रही है जनगणना 2027में  Census 2027_HLO मोबाइल ऐप (हाउस लिस्टिंग आपरेशन)का उपयोग करते हुए डिजीटल डेटा संग्रह करने की ओर एक बड़ा परिवर्तन किया गया है।

जनगणना 2027में पहली बार स्व -गणना प्रारंभ की जा रही है प्रगणकों को स्वगणना के माध्यम से भरे गए डाटा को सबमिट करने से पूर्व डाटा की जांच करनी होगी। ट्रेनर रजनी शुक्ला जिला प्रभारी सहायक निदेशक जनगणना,के के मिश्रा दिलीप कुमार एवं विजय चतुर्वेदी ने बताया कि प्रत्येक प्रगणक को चौंतीस विंदुओं की सूचना एच एल ओ ऐप पर फीड करना होगा।

प्रगणकों की फीडिंग सुपरवाइजर के एच एल ओ ऐप पर भी देखेंगी सुपरवाइजर डेटा की जांच करते हुए उसे सिंक करेंगे मकानों को नम्बर देना नजरी नक्शा का काम भी प्रगणकों को करना होगा।22 मई से 20जून तक यह कार्य करना है। 6प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर की तैनाती की जाएगी,16 भाषाओं में से किसी एक भाषा में यह जनगणना होगी । यह आंकड़े पूरी तरह गोपनीय होंगे किसी भी प्रगणकों एवं सुपरवाइजर द्वारा इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इस मौके पर रणवीर सिंह आशुतोष सिंह सुचित्रानंद चतुर्वेदी अम्बरीष पाण्डेय अनूप सिंह अरविंद यादव रविन्द्र सिंह राजेश कुमार मृत्युंजय सिंह सहित सभी फील्ड ट्रेनर उपस्थित रहे।
आजमगढ़: तहबरपुुुुर में शिक्षको ने खण्ड शिक्षा अधिकारी को सौंपा ज्ञापन , जाने क्या है मांगें
आजमगढ़।उत्तर प्रदेशीय प्रारंभिक शिक्षक समिति तहबरपुर अध्यक्ष सूबेदार यादव ने माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षा 2026 में शिक्षा क्षेत्र - तहबरपुर, जनपद -आजमगढ़ में शिक्षकों, शिक्षिकाओं, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों की अव्यवहारिक रुप से अत्यंत दूर लगाई गई ड्यूटी की अनियमितता के विरोध में एवं एवं शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों की विभिन्न मांगों के समर्थन में संगठन के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों के साथ खंड शिक्षा अधिकारी, तहबरपुर व्यास देव को बी आर सी तहबरपुर पर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संगठन द्वारा मांग की गई कि जो शिक्षक या शिक्षिका मार्च - 2026 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं उनकी पत्रावली अविलम्ब संबंधित कार्यालय को भेजी जाय ताकि उनके देयकों का समय से भुगतान हो सके और उनकी पेंशन जारी होने में कोई विलंब न हो। संगठन द्वारा यह भी कहा गया कि बोर्ड परीक्षा में शिक्षा क्षेत्र तहबरपुर में ड्यूटी लगाने में काफी अनियमितता बरती गई। ड्यूटी के संबंध में प्रधानाध्यापकों या प्रभारी प्रधानाध्यापकों से कोई विचार - विमर्श नहीं किया गया। लोगों को 25 से 30 किलोमीटर दूर तक ड्यूटी करने के लिए बाध्य किया गया। 31 मार्च 2026 के बाद नवीन सत्र में कुछ विद्यालय एकल हो जा रहे हैं। ऐसे विद्यालयों को शीघ्र ही अध्यापकों से आच्छादित किया जाय। जनगणना (Census 2026) में कार्मिकों की ड्यूटी लगाए जाने के संबंध में प्रधानाध्यापकों से विचार-विमर्श करके विद्यालय सेवित गांव या आस -पास के मज़रों में ही ड्यूटी लगाने की मांग संगठन द्वारा की गई।खंड शिक्षा अधिकारी तहबरपुर, आजमगढ़ से वार्ता के क्रम में अध्यक्ष सूबेदार यादव ने दो टूक कहा कि यदि शिक्षकों, शिक्षिकाओं, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों की ड्यूटी अव्यवहारिक रुप से लगाई जाती है तो संगठन अन्याय के विरोध में विधिमान्य तरीके से विरोध करने के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन कार्यक्रम में सूबेदार यादव, उदय प्रताप राय,नर्वदेश्वर उपाध्याय, रुद्रप्रताप भारती, राजेश यादव, संदीप कुमार राय, लालजी यादव, सूर्यभान चौहान, दिनेश यादव राजकुमार यादव, स्वामीनाथ यादव,विजय यादव, बृजेश राय, मनोज कुमार त्रिपाठी, सतीश चन्द्र यादव, शिवशंकर राय, दिनेश कुमार, सुभाषचन्द्र प्रजापति, हनुमान गुप्ता,अरविन्द यादव, कमलाकांत, विवेक,माधव सिंह, शिवानंद मिश्र, संजय मौर्य, चन्द्रशेखर सिंह, मनोज सिंह, अशोक यादव, ईश्वर चंद्र, प्रदीप यादव,मनीष श्रीवास्तव, राहुल यादव, सुजीत चौबे, नरेन्द्र चौबे,गुलाब सिंह, रामचंद्र यादव , लालचंद राम,रामकुंवर चौहान सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे।
कांग्रेस शासनकाल में जाति जनगणना न कराना मेरी गलती…राहुल गांधी ने जताया अफसोस

#rahulgandhisaysitwasmymistakenottoconductcaste_census

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लेकर अहम बयान दिया है। राहुल गांधी ने माना कि अपनी पार्टी के शासनकाल में जाति जनगणना न कराना बड़ी गलती थी। इसके लिए उन्होंने खुद को दोषी ठहराया है।

लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि मैं 2004 से राजनीति में हूं और मुझे 21 साल हो गए। जब मैं पीछे देखता हूं और अपना आत्म विश्लेषण करता हूं, मैंने कहां-कहां सही काम किया और कहां कमी रही तो 2-3 बड़े मुद्दे मुझे दिखाई देते हैं। पीछे देखने पर मुझे एक बात बिल्कुल साफ दिखती है कि एक विषय पर मेरी कमी रही। कांग्रेस पार्टी और मैंने एक गलती की। OBC वर्ग का संरक्षण हमें जिस प्रकार से करना चाहिए था, हमने नहीं किया। इसका कारण था, उनके जो मुद्दे थे उस समय मुझे उसकी गहराई से समझ नहीं थी।

इन मुद्दों पर बताया अच्छे नबंर का हकदार

दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस शुक्रवार को ओबीसी नेतृत्व भागीदारी न्याय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा मैंने जमीन अधिग्रहण कानून बनाया, मनरेगा लेकर आया और नियमगिरी की लड़ाई लड़ी। ये काम मैंने ठीक किए...चाहे वह आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों की बात हो तो मुझे अच्छे नंबर मिलने चाहिए, महिलाओं के मुद्दे पर सही नंबर मिले चाहिए।

ओबीसी के मुद्दे आसानी से नहीं दिखते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने आगे कहा कि अगर मैं अपनी कमी की बात करता हूं तो मैंने एक गलती की है, जो ओबीसी वर्ग है उसकी जिस तरह से मुझे रक्षा करनी चाहिए थी, वह मैंने नहीं की। इसका कारण था, आपके जो मुद्दे थे उस समय, मुझे गहराई से समझ नहीं आए। 10-15 साल पहले जो दिक्कतें दलितों के सामने थी वह मुझे समझ आ गई। आदिवासियों के मुद्दे भी आसानी से समझ आ जाते हैं, लेकिन ओबीसी के मुद्दे आसानी से नहीं दिखते हैं, वह छुपे रहते हैं। अगर मुझे आपकी दिक्कतों के बारे में थोड़ा सा भी पता होता तो मैं उसी समय जाति जनगणना करवा देता। राहु गांधी ने आगे कहा कि मैं उस गलती को सुधारना चाहता हूं।

देश की 90 फीसदी आबादी ही प्रोडक्टिव फोर्स है-राहुल गांधी

'भागीदारी न्याय सम्मेलन' में राहुल गांधी ने कहा कि देश में दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक वर्ग की आबादी कुल मिलाकर करीब 90 फीसदी हैं। लेकिन जब बजट बनने के बाद हलवा बांटा जा रहा था, तो वहां 90 फीसदी की आबादी का कोई नहीं था। देश की 90 फीसदी आबादी ही प्रोडक्टिव फोर्स है। हलवा बनाने वाले लोग आप हैं, लेकिन हलवा वो खा रहे हैं। हम ये नहीं कह रहे कि वो हलवा न खाएं, लेकिन कम से कम आपको भी तो मिले।

केन्द्र सरकार ने जारी की जनगणना की अधिसूचना, पूरी तरह होगा डिजिटल, तैयार किए जाएंगे मोबाइल एप

#governmentissuedcensus_notification 

भारत सरकार ने जनगणना को लेकर औपचारिक ऐलान कर दिया है। गृह मंत्रालय ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी, जिसके बाद अब जनगणना की तैयारियों को अंतिम रूप देने का काम शुरू हो गया है।सरकारी बयान के अनुसार, यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। 

16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे मोबाइल एप

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि जनगणना 2027 में होगी और इसे 2 चरणों में कराई जाएगी। इसके लिए लोगों से हर स्तर पर जानकारी ली जाएगी। मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग करते हुए यह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। इसके लिए मोबाइल एप तैयार किए जाएंगे और उसी में जनगणना से जुड़ी सभी जानकारी एकत्र की जाएगी। एप 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे।

पहली बार जाति गणना

गृह मंत्री शाह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था, 16वीं जनगणना में पहली बार जाति गणना शामिल होगी। 34 लाख गणक और सुपरवाइजर, 1.3 लाख जनगणना पदाधिकारी आधुनिक मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के साथ यह कार्य करेंगे। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में 1 अक्तूबर, 2026 से और देश के बाकी हिस्से में 1 मार्च, 2027 से जातियों की गणना और जनगणना का कार्य शुरू होगा।

जातिगत जनगणना के ऐलान के बाद खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, तेलंगाना मॉडल अपनाने की दी सलाह


#khargenewdemandtopmmodioncastecensus

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना के फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने पहलगाम के आतंकी हमले के आक्रोश के बीच जातिगत जनगणना के फैसले पर पीएम मोदी को तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। मल्लिकार्जुन खरगे ने 2 मई को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद पीएम मोदी को यह पत्र लिखा है।

सभी राजनीतिक दलों से बातचीत का अनुरोध

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना के मुद्दे पर जल्द ही सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि मैंने 16 अप्रैल, 2023 को ही आपको जाति जनगणना के मुद्दे पर पत्र लिखा था, लेकिन अफ़सोस की बात है कि मुझे इस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी के नेताओं और आपने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर जाति जनगणना की मांग को उठाने का विरोध भी किया था, जिसे आप आज स्वीकार करते हैं कि यह गहरे सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के हित में है। 

खरगे के पास सरकार के लिए सुझाव

खरगे ने कहा कि आपने बिना किसी तरह की डिटेल्ज की घोषणा दी कि अगली जनगणना में जाति जनगणना को एक अलग श्रेणी के रूप में भी शामिल किया जाएगा। ये जनगणना वास्तव में 2021 में होनी थी। उन्होंने कहा कि मेरे पास आपके विचार के लिए तीन सुझाव हैं। जनगणना प्रश्नावली का डिज़ाइन काफी अहम है। जाति की जानकारी को गिनती के उद्देश्य से नहीं बल्कि बड़े सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इकट्ठा किया जाना चाहिए।

तेलंगाना मॉडल का इस्तेमाल करने का सुझाव

पीएम मोदी को उन्होंने इस काम के लिए कांग्रेस शासित तेलंगाना में अपनाए गए मॉडल का इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया है। खरगे ने अपने पत्र में कहा है कि राज्यों की ओर से पारित आरक्षण को तमिलनाडु की तर्ज पर संविधान की नौंवी अनुसूची में डाला जाए, आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को खत्म किया जाए और निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘जातिगत जनगणना सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के बड़े मकसदों को हासिल करने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनगणना के सवालों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए, जिससे हर जाति के सामाजिक और आर्थिक हालात का सही आकलन हो सके और उनके संवैधानिक अधिकारों को मजबूत किया जा सके।

मल्लिकार्जुन खरगे के 3 महत्वपूर्ण सुझाव

• जनगणना से जुड़े प्रश्नावली का डिजाइन खास होना चाहिए। इसमें पूछे जाने वाले सवालों के लिए तेलंगाना मॉडल का उपयोग करना चाहिए।

• सभी राज्यों द्वारा पारित आरक्षण संबंधी अधिनियमों को संविधान की नई सूची में शामिल किया जाना चाहिए। इससे जनगणना के नतीजे साफ और स्पष्ट होंगे।

• कांग्रेस का मानना है कि जाति जनगणना जैसी किसी प्रक्रिया को विभाजनकारी नहीं माना जाना चाहिए। क्योंकि पिछड़ों, वंचितों और हाशिये पर खड़े लोगों को उनके अधिकार दिलाने का जरिया बनता है।

जातिगत जनगणना के ऐलान के बाद खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, तेलंगाना मॉडल अपनाने की दी सलाह


#khargenewdemandtopmmodioncastecensus

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना के फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने पहलगाम के आतंकी हमले के आक्रोश के बीच जातिगत जनगणना के फैसले पर पीएम मोदी को तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। मल्लिकार्जुन खरगे ने 2 मई को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद पीएम मोदी को यह पत्र लिखा है।

सभी राजनीतिक दलों से बातचीत का अनुरोध

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना के मुद्दे पर जल्द ही सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि मैंने 16 अप्रैल, 2023 को ही आपको जाति जनगणना के मुद्दे पर पत्र लिखा था, लेकिन अफ़सोस की बात है कि मुझे इस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी के नेताओं और आपने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर जाति जनगणना की मांग को उठाने का विरोध भी किया था, जिसे आप आज स्वीकार करते हैं कि यह गहरे सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के हित में है। 

खरगे के पास सरकार के लिए सुझाव

खरगे ने कहा कि आपने बिना किसी तरह की डिटेल्ज की घोषणा दी कि अगली जनगणना में जाति जनगणना को एक अलग श्रेणी के रूप में भी शामिल किया जाएगा। ये जनगणना वास्तव में 2021 में होनी थी। उन्होंने कहा कि मेरे पास आपके विचार के लिए तीन सुझाव हैं। जनगणना प्रश्नावली का डिज़ाइन काफी अहम है। जाति की जानकारी को गिनती के उद्देश्य से नहीं बल्कि बड़े सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इकट्ठा किया जाना चाहिए।

तेलंगाना मॉडल का इस्तेमाल करने का सुझाव

पीएम मोदी को उन्होंने इस काम के लिए कांग्रेस शासित तेलंगाना में अपनाए गए मॉडल का इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया है। खरगे ने अपने पत्र में कहा है कि राज्यों की ओर से पारित आरक्षण को तमिलनाडु की तर्ज पर संविधान की नौंवी अनुसूची में डाला जाए, आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को खत्म किया जाए और निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘जातिगत जनगणना सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के बड़े मकसदों को हासिल करने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनगणना के सवालों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए, जिससे हर जाति के सामाजिक और आर्थिक हालात का सही आकलन हो सके और उनके संवैधानिक अधिकारों को मजबूत किया जा सके।

मल्लिकार्जुन खरगे के 3 महत्वपूर्ण सुझाव

• जनगणना से जुड़े प्रश्नावली का डिजाइन खास होना चाहिए। इसमें पूछे जाने वाले सवालों के लिए तेलंगाना मॉडल का उपयोग करना चाहिए।

• सभी राज्यों द्वारा पारित आरक्षण संबंधी अधिनियमों को संविधान की नई सूची में शामिल किया जाना चाहिए। इससे जनगणना के नतीजे साफ और स्पष्ट होंगे।

• कांग्रेस का मानना है कि जाति जनगणना जैसी किसी प्रक्रिया को विभाजनकारी नहीं माना जाना चाहिए। क्योंकि पिछड़ों, वंचितों और हाशिये पर खड़े लोगों को उनके अधिकार दिलाने का जरिया बनता है।

Thanks Given to Prime Minister Modi for Caste Census by Suheldev Bharatiya Samaj Party in Budhanpur Tehsil
Under the leadership of District Vice President ,Ramashankar Rajbhar of the Suheldev Bharatiya Samaj Party (SBSP), a letter of gratitude addressed to Prime Minister Narendra Modi regarding the government's decision to conduct a caste census was submitted through the Sub-Divisional Magistrate (SDM) of Budhanpur Tehsil. Ramashankar Rajbhar stated that the party's national president, Om Prakash Rajbhar, had instructed all party members and workers to submit a letter of thanks to the Prime Minister through their respective SDMs. Following this directive, all party workers gathered at 12 PM and submitted the letter to SDM S.N. Tripathi.There was great enthusiasm among the party workers. SDM S.N. Tripathi confirmed that the SBSP representatives had handed over a letter of gratitude for the Prime Minister, which would be forwarded to him promptly.On this occasion, several people including Tejai Rajbhar, Ramchandra Rajbhar, Gajraj, Laxmi, Rajmati, Archana, Anita, Radhika, and Sanjay were present.
बिहार चुनाव से पहले जात‍ि जनगणना का एलान, राहुल के हाथ से निकला बड़ा मुद्दा

#caste_census_issue_slips_hand_from_congress

देश में आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना कराई जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने जाति जनगणना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसे मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा। केन्द्र की मोदी सरकार ने बिहार विधानसभा चुनाव के पहले ये बड़ा दांव खेला है। दरअसल, राहुल गांधी जातिगत जनगणना को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाते आ रहे थे। ऐसे में चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बन सकता था। लेकिन केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का वादा कर कांग्रेस के हाथ से यह मुद्दा छीन लिया है।

फिलहाल देश में पहलगाम हमले के कारण माहौल गर्म है। ऐसे समय में मोदी सरकार ने बहुत बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। एनडीए सरकार ने तय किया है कि वह 2026 में होने वाली जनगणना के साथ ही देश भर में जातीय जनगणना भी कराएगी। कांग्रेस और खासकर इसके नेता राहुल गांधी 2024 के लोकसभा चुनावों से ही इसकी मांग कर रहे थे और इसे उन्होंने अपना सबसे बड़ा मुद्दा बना लिया था। लेकिन, मोदी सरकार ने अप्रत्याशित रूप से जातीय जनगणना की बात कहकर देश की राजनीति को पूरी तरह से नया मोड़ दे दिया है। इसका सबसे पहला प्रभाव बिहार विधानसभा चुनाव पड़ सकता है।

2024 के लोकसभा चुनावों में खासकर के उत्तर प्रदेश में इंडिया ब्लॉक को इसका फायदा भी मिला था। बीजेपी को उसके ओबीसी और दलित वोट बैंक का नुकसान भी हुआ। क्योंकि, तब कांग्रेस और सहयोगियों ने यह जोरदार प्रचार किया था कि बीजेपी इसीलिए 400 सीटें मांग रही है, ताकि वह संविधान बदलकर आरक्षण को खत्म कर सके। बाद में उन्होंने तेलंगाना और कर्नाटक में कांग्रेस की अपनी सरकारों पर भी इस तरह की जनगणना की रिपोर्ट जारी करने का दबाव बनाया। इससे भी कांग्रेस यह संदेश देने में सफल रही है कि यदि वह केंद्र में सत्ता में आती है तो वह पूरे देश में जातिगत जनगणना कराएगी। अब जिस तरह से सरकार ने परिस्थितियां पलटने की कोशिश की है, उसके बाद राहुल अपने एजेंडे का किस हद तक फायदा उठा सकेंगे, यह बड़ा सवाल है।

कयास लगाए जा रहे हैं कि जाति जनगणना की शुरुआत सितंबर में की जा सकती है। हालांकि जनगणना की प्रोसेस पूरी होने में एक साल लगेगा। ऐसे में जनगणना के अंतिम आंकड़े 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में मिल सकेंगे। देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इसे हर 10 साल में किया जाता है। इस हिसाब से 2021 में अगली जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था।

राहुल जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2023 में सबसे पहले जाति जनगणना की मांग की थी। इसके बाद वे देश-विदेश की कई सभाओं और फोरम पर केंद्र से जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं। नीचे ग्राफिक में देखें राहुल ने कब और कहां जाति जनगणना की मांग दोहराई

जाति जनगणना कराएगी मोदी सरकार, मूल जनगणना के साथ ही होगी गिनती, कैबिनेट में बड़ा फैसला

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जातिगत जनगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का एलान कर दिया है। यह जनगणना मूल जनगणना के साथ ही कराई जाएगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बात की जानकारी दी। अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि सरकार ने फैसला लिया है कि जनगणना साथ जातियों की गणना भी होगी।

कांग्रेस ने जातियों का इस्तेमाल वोट बैंक के लिए किया- वैष्णव

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज फैसला किया है कि जाति गणना को आगामी जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए। वैष्णव ने कहा कि 1947 से जाति जनगणना नहीं की गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने हमेशा से ही जातिगत जनगणना का विरोध किया है। आजादी के बाद से ही जाति को जनगणना की किसी भी प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। वैष्णव ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा जातियों का इस्तेमाल वोट बैंक के लिए किया है।

जाति जनगणना को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया- वैष्णव

वैष्णव ने कहा, 2010 में दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि जाति जनगणना के मामले पर कैबिनेट में विचार किया जाना चाहिए। इस विषय पर विचार करने के लिए मंत्रियों का एक समूह बनाया गया था। अधिकांश राजनीतिक दलों ने जाति जनगणना की सिफारिश की है। इसके बावजूद, कांग्रेस सरकार ने जाति का सर्वेक्षण या जाति जनगणना कराने का फैसला किया। यह अच्छी तरह से समझा जा सकता है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने जाति जनगणना को केवल एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है।

जाति जनगणना, मूल जनगणना में ही शामिल होगी- वैष्णव

वैष्णव ने आगे कहा जाति जनगणना केवल केंद्र का विषय है। कुछ राज्यों ने यह काम सुचारू रूप से किया है। कुछ अन्य ने केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से गैर-पारदर्शी तरीके से ऐसे सर्वेक्षण किए हैं। ऐसे सर्वेक्षणों ने समाज में संदेह पैदा किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि राजनीति से हमारा सामाजिक ताना-बाना खराब न हो, सर्वेक्षण के बजाय जाति गणना को जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए। मोदी सरकार ने फैसला किया है कि जाति जनगणना, मूल जनगणना में ही शामिल होगी।

कैसे होगी इस बार की जनगणना? पूछे जाएंगे 33 सवाल, देनी होगी मकान-वाहन से शौचालय तक की जानकारी

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जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। देशभर में 1 अप्रैल से जनगणना शुरू होने जा रही है, जिसे लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और इसमें लोगों से जीवनशैली से जुड़े बेहद विस्तृत सवाल पूछे जाएंगे। 

आरटीआई से भी नहीं मिलेगा जवाब

रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनगणना अधिनियम की धारा 15 का हवाला देते हुए कहा कि जनगणना के दौरान जुटाया गया व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की जानकारी न तो आरटीआई के तहत साझा की जा सकती है, न ही अदालतों में साक्ष्य के रूप में पेश की जा सकती है और न ही किसी अन्य संस्था के साथ साझा की जाएगी। 

जनगणना दो चरणों में पूरी होगी

इस बार जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में मकानों और उनकी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में घर में रहने वाले लोगों की सामाजिक, आर्थिक और अन्य जानकारी दर्ज की जाएगी। खास बात यह है कि पहली बार ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ यानी स्वगणना की सुविधा दी गई है, जिसके तहत लोग खुद भी 15 दिन की निर्धारित अवधि में ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। मृत्युंजय कुमार ने बताया कि सेल्फ एन्यूमरेशन में लोगों को खुद ही जानकारी देनी होगी, लेकिन इसके बावजूद जो कर्मचारी-अधिकारी घर जाएंगे और जो आईडी होगी उसके आधार पर वह क्रॉस वेरीफाई करेंगे। इस वजह से इसमें गड़बड़ी की संभावना नहीं है।

सरकार ने इस बार कुल 33 सवाल तय किए

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के लिए 33 सवालों वाली नई प्रश्नावली जारी की है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। इस प्रश्नावली को 2011 की पिछली जनगणना के बाद भारतीय समाज में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें घर के प्रकार, स्थान और संरचना से जुड़े सवालों के साथ-साथ डिजिटल युग को देखते हुए इंटरनेट सुविधा की उपलब्धता पर भी नया सवाल शामिल किया गया है। इसके अलावा एलपीजी, पीने के पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच को लेकर भी जानकारी ली जाएगी।

दूसरा चरण 1 फरवरी 2027 से शुरू होगा

जनगणना 2027 दूसरा चरण जनसंख्या गणना, जो 1 फरवरी 2027 से शुरू होगी। यह भारत की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी, जो देश में नीति निर्माण और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराएगी। करीब 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बजट वाली इस विशाल प्रक्रिया में राज्यों की मशीनरी, जिला स्तर के अधिकारी और केंद्र सरकार मिलकर काम करेंगे। गृह मंत्रालय की निगरानी में यह पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।

जनगणना में 33 विंदुओं की सूचना लेने प्रगणक पहुंचेंगे आपके घर
गोपनीय होंगे जनगणना के आंकड़े

सहायक निदेशक जनगणना, अयोध्या मण्डल अयोध्या ने किया प्रशिक्षण की गुणवत्ता का आकलन

सुल्तानपुर। स्वतंत्र भारत की आठवीं जनगणना के फील्ड ट्रेनर का प्रशिक्षण राजकीय आई टी आई पयागीपुर में प्रातः साढ़े नौ बजे से शाम पांच बजे तक दो प्रशिक्षण कक्षा-कक्षों में 81 शिक्षकों एवं लेखपालों को दिया जा रहा है। प्रशिक्षण की गुणवत्ता का निरीक्षण करने पहुंचे सहायक निदेशक जनगणना अयोध्या मण्डल अयोध्या ने प्रतिभागियों को बताया कि प्रथम चरण की जनगणना।

मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना 2026तथा द्वितीय चरण की जनगणना जनसंख्या की गणना 2027 में कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़े कल्याणकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण तथा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन कार्य के लिए आधार बनते हैं, मकान सूची करण, मकानों की स्थिति सुविधाएं परिसंपत्तियों की महत्वपूर्ण सूचना प्रदान करता है और जनसंख्या की गणना के लिए ढांचा भी बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत में पहली बार डिजीटल जनगणना कराई जा रही है जनगणना 2027में  Census 2027_HLO मोबाइल ऐप (हाउस लिस्टिंग आपरेशन)का उपयोग करते हुए डिजीटल डेटा संग्रह करने की ओर एक बड़ा परिवर्तन किया गया है।

जनगणना 2027में पहली बार स्व -गणना प्रारंभ की जा रही है प्रगणकों को स्वगणना के माध्यम से भरे गए डाटा को सबमिट करने से पूर्व डाटा की जांच करनी होगी। ट्रेनर रजनी शुक्ला जिला प्रभारी सहायक निदेशक जनगणना,के के मिश्रा दिलीप कुमार एवं विजय चतुर्वेदी ने बताया कि प्रत्येक प्रगणक को चौंतीस विंदुओं की सूचना एच एल ओ ऐप पर फीड करना होगा।

प्रगणकों की फीडिंग सुपरवाइजर के एच एल ओ ऐप पर भी देखेंगी सुपरवाइजर डेटा की जांच करते हुए उसे सिंक करेंगे मकानों को नम्बर देना नजरी नक्शा का काम भी प्रगणकों को करना होगा।22 मई से 20जून तक यह कार्य करना है। 6प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर की तैनाती की जाएगी,16 भाषाओं में से किसी एक भाषा में यह जनगणना होगी । यह आंकड़े पूरी तरह गोपनीय होंगे किसी भी प्रगणकों एवं सुपरवाइजर द्वारा इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इस मौके पर रणवीर सिंह आशुतोष सिंह सुचित्रानंद चतुर्वेदी अम्बरीष पाण्डेय अनूप सिंह अरविंद यादव रविन्द्र सिंह राजेश कुमार मृत्युंजय सिंह सहित सभी फील्ड ट्रेनर उपस्थित रहे।
आजमगढ़: तहबरपुुुुर में शिक्षको ने खण्ड शिक्षा अधिकारी को सौंपा ज्ञापन , जाने क्या है मांगें
आजमगढ़।उत्तर प्रदेशीय प्रारंभिक शिक्षक समिति तहबरपुर अध्यक्ष सूबेदार यादव ने माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षा 2026 में शिक्षा क्षेत्र - तहबरपुर, जनपद -आजमगढ़ में शिक्षकों, शिक्षिकाओं, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों की अव्यवहारिक रुप से अत्यंत दूर लगाई गई ड्यूटी की अनियमितता के विरोध में एवं एवं शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों की विभिन्न मांगों के समर्थन में संगठन के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों के साथ खंड शिक्षा अधिकारी, तहबरपुर व्यास देव को बी आर सी तहबरपुर पर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संगठन द्वारा मांग की गई कि जो शिक्षक या शिक्षिका मार्च - 2026 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं उनकी पत्रावली अविलम्ब संबंधित कार्यालय को भेजी जाय ताकि उनके देयकों का समय से भुगतान हो सके और उनकी पेंशन जारी होने में कोई विलंब न हो। संगठन द्वारा यह भी कहा गया कि बोर्ड परीक्षा में शिक्षा क्षेत्र तहबरपुर में ड्यूटी लगाने में काफी अनियमितता बरती गई। ड्यूटी के संबंध में प्रधानाध्यापकों या प्रभारी प्रधानाध्यापकों से कोई विचार - विमर्श नहीं किया गया। लोगों को 25 से 30 किलोमीटर दूर तक ड्यूटी करने के लिए बाध्य किया गया। 31 मार्च 2026 के बाद नवीन सत्र में कुछ विद्यालय एकल हो जा रहे हैं। ऐसे विद्यालयों को शीघ्र ही अध्यापकों से आच्छादित किया जाय। जनगणना (Census 2026) में कार्मिकों की ड्यूटी लगाए जाने के संबंध में प्रधानाध्यापकों से विचार-विमर्श करके विद्यालय सेवित गांव या आस -पास के मज़रों में ही ड्यूटी लगाने की मांग संगठन द्वारा की गई।खंड शिक्षा अधिकारी तहबरपुर, आजमगढ़ से वार्ता के क्रम में अध्यक्ष सूबेदार यादव ने दो टूक कहा कि यदि शिक्षकों, शिक्षिकाओं, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों की ड्यूटी अव्यवहारिक रुप से लगाई जाती है तो संगठन अन्याय के विरोध में विधिमान्य तरीके से विरोध करने के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन कार्यक्रम में सूबेदार यादव, उदय प्रताप राय,नर्वदेश्वर उपाध्याय, रुद्रप्रताप भारती, राजेश यादव, संदीप कुमार राय, लालजी यादव, सूर्यभान चौहान, दिनेश यादव राजकुमार यादव, स्वामीनाथ यादव,विजय यादव, बृजेश राय, मनोज कुमार त्रिपाठी, सतीश चन्द्र यादव, शिवशंकर राय, दिनेश कुमार, सुभाषचन्द्र प्रजापति, हनुमान गुप्ता,अरविन्द यादव, कमलाकांत, विवेक,माधव सिंह, शिवानंद मिश्र, संजय मौर्य, चन्द्रशेखर सिंह, मनोज सिंह, अशोक यादव, ईश्वर चंद्र, प्रदीप यादव,मनीष श्रीवास्तव, राहुल यादव, सुजीत चौबे, नरेन्द्र चौबे,गुलाब सिंह, रामचंद्र यादव , लालचंद राम,रामकुंवर चौहान सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे।
कांग्रेस शासनकाल में जाति जनगणना न कराना मेरी गलती…राहुल गांधी ने जताया अफसोस

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कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लेकर अहम बयान दिया है। राहुल गांधी ने माना कि अपनी पार्टी के शासनकाल में जाति जनगणना न कराना बड़ी गलती थी। इसके लिए उन्होंने खुद को दोषी ठहराया है।

लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि मैं 2004 से राजनीति में हूं और मुझे 21 साल हो गए। जब मैं पीछे देखता हूं और अपना आत्म विश्लेषण करता हूं, मैंने कहां-कहां सही काम किया और कहां कमी रही तो 2-3 बड़े मुद्दे मुझे दिखाई देते हैं। पीछे देखने पर मुझे एक बात बिल्कुल साफ दिखती है कि एक विषय पर मेरी कमी रही। कांग्रेस पार्टी और मैंने एक गलती की। OBC वर्ग का संरक्षण हमें जिस प्रकार से करना चाहिए था, हमने नहीं किया। इसका कारण था, उनके जो मुद्दे थे उस समय मुझे उसकी गहराई से समझ नहीं थी।

इन मुद्दों पर बताया अच्छे नबंर का हकदार

दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस शुक्रवार को ओबीसी नेतृत्व भागीदारी न्याय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा मैंने जमीन अधिग्रहण कानून बनाया, मनरेगा लेकर आया और नियमगिरी की लड़ाई लड़ी। ये काम मैंने ठीक किए...चाहे वह आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों की बात हो तो मुझे अच्छे नंबर मिलने चाहिए, महिलाओं के मुद्दे पर सही नंबर मिले चाहिए।

ओबीसी के मुद्दे आसानी से नहीं दिखते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने आगे कहा कि अगर मैं अपनी कमी की बात करता हूं तो मैंने एक गलती की है, जो ओबीसी वर्ग है उसकी जिस तरह से मुझे रक्षा करनी चाहिए थी, वह मैंने नहीं की। इसका कारण था, आपके जो मुद्दे थे उस समय, मुझे गहराई से समझ नहीं आए। 10-15 साल पहले जो दिक्कतें दलितों के सामने थी वह मुझे समझ आ गई। आदिवासियों के मुद्दे भी आसानी से समझ आ जाते हैं, लेकिन ओबीसी के मुद्दे आसानी से नहीं दिखते हैं, वह छुपे रहते हैं। अगर मुझे आपकी दिक्कतों के बारे में थोड़ा सा भी पता होता तो मैं उसी समय जाति जनगणना करवा देता। राहु गांधी ने आगे कहा कि मैं उस गलती को सुधारना चाहता हूं।

देश की 90 फीसदी आबादी ही प्रोडक्टिव फोर्स है-राहुल गांधी

'भागीदारी न्याय सम्मेलन' में राहुल गांधी ने कहा कि देश में दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक वर्ग की आबादी कुल मिलाकर करीब 90 फीसदी हैं। लेकिन जब बजट बनने के बाद हलवा बांटा जा रहा था, तो वहां 90 फीसदी की आबादी का कोई नहीं था। देश की 90 फीसदी आबादी ही प्रोडक्टिव फोर्स है। हलवा बनाने वाले लोग आप हैं, लेकिन हलवा वो खा रहे हैं। हम ये नहीं कह रहे कि वो हलवा न खाएं, लेकिन कम से कम आपको भी तो मिले।

केन्द्र सरकार ने जारी की जनगणना की अधिसूचना, पूरी तरह होगा डिजिटल, तैयार किए जाएंगे मोबाइल एप

#governmentissuedcensus_notification 

भारत सरकार ने जनगणना को लेकर औपचारिक ऐलान कर दिया है। गृह मंत्रालय ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी, जिसके बाद अब जनगणना की तैयारियों को अंतिम रूप देने का काम शुरू हो गया है।सरकारी बयान के अनुसार, यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। 

16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे मोबाइल एप

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि जनगणना 2027 में होगी और इसे 2 चरणों में कराई जाएगी। इसके लिए लोगों से हर स्तर पर जानकारी ली जाएगी। मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग करते हुए यह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। इसके लिए मोबाइल एप तैयार किए जाएंगे और उसी में जनगणना से जुड़ी सभी जानकारी एकत्र की जाएगी। एप 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे।

पहली बार जाति गणना

गृह मंत्री शाह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था, 16वीं जनगणना में पहली बार जाति गणना शामिल होगी। 34 लाख गणक और सुपरवाइजर, 1.3 लाख जनगणना पदाधिकारी आधुनिक मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के साथ यह कार्य करेंगे। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में 1 अक्तूबर, 2026 से और देश के बाकी हिस्से में 1 मार्च, 2027 से जातियों की गणना और जनगणना का कार्य शुरू होगा।

जातिगत जनगणना के ऐलान के बाद खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, तेलंगाना मॉडल अपनाने की दी सलाह


#khargenewdemandtopmmodioncastecensus

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना के फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने पहलगाम के आतंकी हमले के आक्रोश के बीच जातिगत जनगणना के फैसले पर पीएम मोदी को तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। मल्लिकार्जुन खरगे ने 2 मई को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद पीएम मोदी को यह पत्र लिखा है।

सभी राजनीतिक दलों से बातचीत का अनुरोध

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना के मुद्दे पर जल्द ही सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि मैंने 16 अप्रैल, 2023 को ही आपको जाति जनगणना के मुद्दे पर पत्र लिखा था, लेकिन अफ़सोस की बात है कि मुझे इस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी के नेताओं और आपने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर जाति जनगणना की मांग को उठाने का विरोध भी किया था, जिसे आप आज स्वीकार करते हैं कि यह गहरे सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के हित में है। 

खरगे के पास सरकार के लिए सुझाव

खरगे ने कहा कि आपने बिना किसी तरह की डिटेल्ज की घोषणा दी कि अगली जनगणना में जाति जनगणना को एक अलग श्रेणी के रूप में भी शामिल किया जाएगा। ये जनगणना वास्तव में 2021 में होनी थी। उन्होंने कहा कि मेरे पास आपके विचार के लिए तीन सुझाव हैं। जनगणना प्रश्नावली का डिज़ाइन काफी अहम है। जाति की जानकारी को गिनती के उद्देश्य से नहीं बल्कि बड़े सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इकट्ठा किया जाना चाहिए।

तेलंगाना मॉडल का इस्तेमाल करने का सुझाव

पीएम मोदी को उन्होंने इस काम के लिए कांग्रेस शासित तेलंगाना में अपनाए गए मॉडल का इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया है। खरगे ने अपने पत्र में कहा है कि राज्यों की ओर से पारित आरक्षण को तमिलनाडु की तर्ज पर संविधान की नौंवी अनुसूची में डाला जाए, आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को खत्म किया जाए और निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘जातिगत जनगणना सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के बड़े मकसदों को हासिल करने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनगणना के सवालों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए, जिससे हर जाति के सामाजिक और आर्थिक हालात का सही आकलन हो सके और उनके संवैधानिक अधिकारों को मजबूत किया जा सके।

मल्लिकार्जुन खरगे के 3 महत्वपूर्ण सुझाव

• जनगणना से जुड़े प्रश्नावली का डिजाइन खास होना चाहिए। इसमें पूछे जाने वाले सवालों के लिए तेलंगाना मॉडल का उपयोग करना चाहिए।

• सभी राज्यों द्वारा पारित आरक्षण संबंधी अधिनियमों को संविधान की नई सूची में शामिल किया जाना चाहिए। इससे जनगणना के नतीजे साफ और स्पष्ट होंगे।

• कांग्रेस का मानना है कि जाति जनगणना जैसी किसी प्रक्रिया को विभाजनकारी नहीं माना जाना चाहिए। क्योंकि पिछड़ों, वंचितों और हाशिये पर खड़े लोगों को उनके अधिकार दिलाने का जरिया बनता है।

जातिगत जनगणना के ऐलान के बाद खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, तेलंगाना मॉडल अपनाने की दी सलाह


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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के जातिगत जनगणना के फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने पहलगाम के आतंकी हमले के आक्रोश के बीच जातिगत जनगणना के फैसले पर पीएम मोदी को तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। मल्लिकार्जुन खरगे ने 2 मई को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद पीएम मोदी को यह पत्र लिखा है।

सभी राजनीतिक दलों से बातचीत का अनुरोध

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना के मुद्दे पर जल्द ही सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि मैंने 16 अप्रैल, 2023 को ही आपको जाति जनगणना के मुद्दे पर पत्र लिखा था, लेकिन अफ़सोस की बात है कि मुझे इस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी के नेताओं और आपने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर जाति जनगणना की मांग को उठाने का विरोध भी किया था, जिसे आप आज स्वीकार करते हैं कि यह गहरे सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के हित में है। 

खरगे के पास सरकार के लिए सुझाव

खरगे ने कहा कि आपने बिना किसी तरह की डिटेल्ज की घोषणा दी कि अगली जनगणना में जाति जनगणना को एक अलग श्रेणी के रूप में भी शामिल किया जाएगा। ये जनगणना वास्तव में 2021 में होनी थी। उन्होंने कहा कि मेरे पास आपके विचार के लिए तीन सुझाव हैं। जनगणना प्रश्नावली का डिज़ाइन काफी अहम है। जाति की जानकारी को गिनती के उद्देश्य से नहीं बल्कि बड़े सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इकट्ठा किया जाना चाहिए।

तेलंगाना मॉडल का इस्तेमाल करने का सुझाव

पीएम मोदी को उन्होंने इस काम के लिए कांग्रेस शासित तेलंगाना में अपनाए गए मॉडल का इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया है। खरगे ने अपने पत्र में कहा है कि राज्यों की ओर से पारित आरक्षण को तमिलनाडु की तर्ज पर संविधान की नौंवी अनुसूची में डाला जाए, आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को खत्म किया जाए और निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था लागू हो। इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘जातिगत जनगणना सिर्फ आंकड़े इकट्ठा करने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के बड़े मकसदों को हासिल करने के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनगणना के सवालों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए, जिससे हर जाति के सामाजिक और आर्थिक हालात का सही आकलन हो सके और उनके संवैधानिक अधिकारों को मजबूत किया जा सके।

मल्लिकार्जुन खरगे के 3 महत्वपूर्ण सुझाव

• जनगणना से जुड़े प्रश्नावली का डिजाइन खास होना चाहिए। इसमें पूछे जाने वाले सवालों के लिए तेलंगाना मॉडल का उपयोग करना चाहिए।

• सभी राज्यों द्वारा पारित आरक्षण संबंधी अधिनियमों को संविधान की नई सूची में शामिल किया जाना चाहिए। इससे जनगणना के नतीजे साफ और स्पष्ट होंगे।

• कांग्रेस का मानना है कि जाति जनगणना जैसी किसी प्रक्रिया को विभाजनकारी नहीं माना जाना चाहिए। क्योंकि पिछड़ों, वंचितों और हाशिये पर खड़े लोगों को उनके अधिकार दिलाने का जरिया बनता है।

Thanks Given to Prime Minister Modi for Caste Census by Suheldev Bharatiya Samaj Party in Budhanpur Tehsil
Under the leadership of District Vice President ,Ramashankar Rajbhar of the Suheldev Bharatiya Samaj Party (SBSP), a letter of gratitude addressed to Prime Minister Narendra Modi regarding the government's decision to conduct a caste census was submitted through the Sub-Divisional Magistrate (SDM) of Budhanpur Tehsil. Ramashankar Rajbhar stated that the party's national president, Om Prakash Rajbhar, had instructed all party members and workers to submit a letter of thanks to the Prime Minister through their respective SDMs. Following this directive, all party workers gathered at 12 PM and submitted the letter to SDM S.N. Tripathi.There was great enthusiasm among the party workers. SDM S.N. Tripathi confirmed that the SBSP representatives had handed over a letter of gratitude for the Prime Minister, which would be forwarded to him promptly.On this occasion, several people including Tejai Rajbhar, Ramchandra Rajbhar, Gajraj, Laxmi, Rajmati, Archana, Anita, Radhika, and Sanjay were present.
बिहार चुनाव से पहले जात‍ि जनगणना का एलान, राहुल के हाथ से निकला बड़ा मुद्दा

#caste_census_issue_slips_hand_from_congress

देश में आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना कराई जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने जाति जनगणना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसे मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा। केन्द्र की मोदी सरकार ने बिहार विधानसभा चुनाव के पहले ये बड़ा दांव खेला है। दरअसल, राहुल गांधी जातिगत जनगणना को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाते आ रहे थे। ऐसे में चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बन सकता था। लेकिन केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का वादा कर कांग्रेस के हाथ से यह मुद्दा छीन लिया है।

फिलहाल देश में पहलगाम हमले के कारण माहौल गर्म है। ऐसे समय में मोदी सरकार ने बहुत बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। एनडीए सरकार ने तय किया है कि वह 2026 में होने वाली जनगणना के साथ ही देश भर में जातीय जनगणना भी कराएगी। कांग्रेस और खासकर इसके नेता राहुल गांधी 2024 के लोकसभा चुनावों से ही इसकी मांग कर रहे थे और इसे उन्होंने अपना सबसे बड़ा मुद्दा बना लिया था। लेकिन, मोदी सरकार ने अप्रत्याशित रूप से जातीय जनगणना की बात कहकर देश की राजनीति को पूरी तरह से नया मोड़ दे दिया है। इसका सबसे पहला प्रभाव बिहार विधानसभा चुनाव पड़ सकता है।

2024 के लोकसभा चुनावों में खासकर के उत्तर प्रदेश में इंडिया ब्लॉक को इसका फायदा भी मिला था। बीजेपी को उसके ओबीसी और दलित वोट बैंक का नुकसान भी हुआ। क्योंकि, तब कांग्रेस और सहयोगियों ने यह जोरदार प्रचार किया था कि बीजेपी इसीलिए 400 सीटें मांग रही है, ताकि वह संविधान बदलकर आरक्षण को खत्म कर सके। बाद में उन्होंने तेलंगाना और कर्नाटक में कांग्रेस की अपनी सरकारों पर भी इस तरह की जनगणना की रिपोर्ट जारी करने का दबाव बनाया। इससे भी कांग्रेस यह संदेश देने में सफल रही है कि यदि वह केंद्र में सत्ता में आती है तो वह पूरे देश में जातिगत जनगणना कराएगी। अब जिस तरह से सरकार ने परिस्थितियां पलटने की कोशिश की है, उसके बाद राहुल अपने एजेंडे का किस हद तक फायदा उठा सकेंगे, यह बड़ा सवाल है।

कयास लगाए जा रहे हैं कि जाति जनगणना की शुरुआत सितंबर में की जा सकती है। हालांकि जनगणना की प्रोसेस पूरी होने में एक साल लगेगा। ऐसे में जनगणना के अंतिम आंकड़े 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में मिल सकेंगे। देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इसे हर 10 साल में किया जाता है। इस हिसाब से 2021 में अगली जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था।

राहुल जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2023 में सबसे पहले जाति जनगणना की मांग की थी। इसके बाद वे देश-विदेश की कई सभाओं और फोरम पर केंद्र से जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं। नीचे ग्राफिक में देखें राहुल ने कब और कहां जाति जनगणना की मांग दोहराई

जाति जनगणना कराएगी मोदी सरकार, मूल जनगणना के साथ ही होगी गिनती, कैबिनेट में बड़ा फैसला

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जातिगत जनगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का एलान कर दिया है। यह जनगणना मूल जनगणना के साथ ही कराई जाएगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बात की जानकारी दी। अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि सरकार ने फैसला लिया है कि जनगणना साथ जातियों की गणना भी होगी।

कांग्रेस ने जातियों का इस्तेमाल वोट बैंक के लिए किया- वैष्णव

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज फैसला किया है कि जाति गणना को आगामी जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए। वैष्णव ने कहा कि 1947 से जाति जनगणना नहीं की गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने हमेशा से ही जातिगत जनगणना का विरोध किया है। आजादी के बाद से ही जाति को जनगणना की किसी भी प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। वैष्णव ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा जातियों का इस्तेमाल वोट बैंक के लिए किया है।

जाति जनगणना को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया- वैष्णव

वैष्णव ने कहा, 2010 में दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि जाति जनगणना के मामले पर कैबिनेट में विचार किया जाना चाहिए। इस विषय पर विचार करने के लिए मंत्रियों का एक समूह बनाया गया था। अधिकांश राजनीतिक दलों ने जाति जनगणना की सिफारिश की है। इसके बावजूद, कांग्रेस सरकार ने जाति का सर्वेक्षण या जाति जनगणना कराने का फैसला किया। यह अच्छी तरह से समझा जा सकता है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने जाति जनगणना को केवल एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है।

जाति जनगणना, मूल जनगणना में ही शामिल होगी- वैष्णव

वैष्णव ने आगे कहा जाति जनगणना केवल केंद्र का विषय है। कुछ राज्यों ने यह काम सुचारू रूप से किया है। कुछ अन्य ने केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से गैर-पारदर्शी तरीके से ऐसे सर्वेक्षण किए हैं। ऐसे सर्वेक्षणों ने समाज में संदेह पैदा किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि राजनीति से हमारा सामाजिक ताना-बाना खराब न हो, सर्वेक्षण के बजाय जाति गणना को जनगणना में शामिल किया जाना चाहिए। मोदी सरकार ने फैसला किया है कि जाति जनगणना, मूल जनगणना में ही शामिल होगी।