उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने महानवमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को दी बधाई
लखनऊ । 19 अक्टूबर 2026।
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी एवं महानवमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने माँ भगवती से प्रदेशवासियों के शांति,सुख,  समृद्धि और कल्याण की कामना की है।
श्री मौर्य ने कहा कि नवरात्रि में माँ दुर्गा की आराधना मातृशक्ति के प्रति सनातन परम्परा के सम्मान का प्रतीक है। आदिशक्ति प्रधान नौ रूपों में नवदुर्गा बनकर चराचर जगत पर अपनी करुणा की वर्षा करती हैं। यह पर्व मातृशक्ति के प्रति भारत की भावना का प्रभावी प्रतिनिधित्व करता है।
सशक्त नारी, समृद्ध उत्तर प्रदेश: महिलाओं के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के नए अवसर
- सीएम योगी ने मां महागौरी की पूजा-अर्चना कर नारीशक्ति के सशक्तीकरण पर दिया जोर, कहा- स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं 1.20 करोड़ से अधिक महिलाएं
- आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय ₹3,000 से बढ़ाकर ₹12,000 प्रतिमाह करने का किया उल्लेख, 31 जिलों की चार लाख से अधिक महिलाएं दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दे रहीं मजबूती
लखनऊ, 18 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने नारीशक्ति के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वावलंबन को समाज की प्रगति का आधार बताया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि मां महागौरी की आराधना हमें प्रेरित करती है कि हर मां स्वस्थ और सुरक्षित हो, हर बेटी को बेहतर पोषण एवं उज्ज्वल भविष्य मिले और प्रत्येक महिला सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नारीशक्ति का जीवन सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि से आलोकित हो रहा है।
- नारीशक्ति को बनाया विकास का भागीदार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार महिलाओं को विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाने के लिए सुरक्षा, सम्मान, पोषण, शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन से जुड़े अवसरों का विस्तार कर रही है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
- स्वयं सहायता समूहों को सौंपी पोषण व्यवस्था की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों के पोषण से जुड़ी व्यवस्थाओं में पहले अनियमितताओं की समस्या थी। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपी गई। उनके अनुसार, इस पहल से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने और उनके आर्थिक स्वावलंबन को प्रोत्साहित करने में मदद मिली। साथ ही, पोषण सेवाओं को मजबूत करने और कुपोषण के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने पर भी ध्यान दिया गया।
- आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाकर किया ₹12 हजार
मुख्यमंत्री ने बताया कि बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय ₹3,000 से बढ़ाकर ₹12,000 प्रतिमाह किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकत्रियों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देकर उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को मजबूती देने का प्रयास किया गया है।
- चार लाख से अधिक महिलाएं दे रहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश के 31 जिलों में चार लाख से अधिक महिलाएं बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी जैसी दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़ी हैं। ये महिलाएं दुग्ध उत्पादन के माध्यम से आय अर्जित करने के साथ उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में बीसी सखी पहल भी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और गांवों में बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
- 1.20 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 1 करोड़ 20 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई राह बना रही हैं। लखपति दीदी पहल के माध्यम से महिलाओं को अपनी मेहनत, हुनर और उद्यमशीलता के जरिए नियमित आय अर्जित करने के अवसर मिल रहे हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ परिवारों की खुशहाली और ग्रामीण विकास को भी गति मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने नवरात्र के पावन अवसर पर नारीशक्ति के सम्मान और सशक्तीकरण के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि ही विकसित उत्तर प्रदेश की आधारशिला है। सशक्त नारी, समृद्ध उत्तर प्रदेश के संकल्प के साथ महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास जारी हैं।
किसानों के बच्चों के लिए दोगुनी हुईं छात्रवृत्ति की सीटें
- कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम
- प्रत्येक कृषि विवि में 90 और प्रत्येक कृषि महाविद्यालय में 30 विद्यार्थियों तक को सालाना 60 हजार रुपये की छात्रवृत्ति
- किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को मिलेगा योजना का लाभ : निदेशक मंडी परिषद जितेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ। प्रदेश सरकार ने किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों के लिए कृषि शिक्षा में छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटें दोगुनी कर दी हैं। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत अब प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान में 45 के स्थान पर 90 तथा प्रत्येक कृषि महाविद्यालय में 15 के स्थान पर 30 विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर सालाना 60 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलेगी।
वर्तमान में मंडी परिषद द्वारा मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत प्रदेश के 11 कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों तथा 61 क़ृषि महाविद्यालयों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। सीटों में बढ़ोतरी के बाद इन संस्थानों में छात्रवृत्ति की कुल निर्धारित संख्या 1,410 से बढ़कर 2,820 हो गई है। इससे अधिक मेधावी विद्यार्थियों को उच्च कृषि शिक्षा का अवसर मिलेगा और भविष्य में कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों तथा कृषि आधारित उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार होने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
- सालाना मिलेगी 60 हजार रुपये की छात्रवृत्ति
मंडी परिषद ने छात्रवृत्ति की मासिक राशि तीन हजार से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दी है। इससे चयनित विद्यार्थियों को अब सालाना 36 हजार के स्थान पर 60 हजार रुपये मिलेंगे। प्रत्येक चयनित विद्यार्थी को 24 हजार रुपये की अतिरिक्त वार्षिक आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।
- अब तक 6,454 विद्यार्थियों को 22.90 करोड़ की सहायता
मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक कुल 6,454 विद्यार्थियों को लगभग 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है। अब निर्धारित संख्या बढ़ने से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को योजना का लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। संशोधित व्यवस्था में कृषि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में कृषि स्नातक के लिए छात्रवृत्ति की संख्या 25 से बढ़ाकर 50, गृह विज्ञान स्नातक के लिए 6 से 12, कृषि स्नातकोत्तर के लिए 10 से 20 तथा गृह विज्ञान स्नातकोत्तर के लिए 4 से 8 कर दी गई है। कृषि महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर यह संख्या 10 से बढ़ाकर 20 तथा स्नातकोत्तर स्तर पर 5 से बढ़ाकर 10 की गई है। कृषि के साथ उद्यान, वानिकी, पशुपालन एवं संबंधित विषयों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थी भी योजना में शामिल हैं।
- मेरिट से चयन, खेतिहर मजदूरों के बच्चों को भी लाभ
योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के निवासी कृषकों एवं खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूर्ण रूप से आश्रित विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती है। स्नातक पाठ्यक्रम के लिए यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में न्यूनतम 70 प्रतिशत तथा अन्य बोर्ड से 85 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। स्नातकोत्तर के लिए स्नातक स्तर पर कम से कम 70 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं। चयन मेरिट के आधार पर होता है। मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। छात्रवृत्ति की संख्या और धनराशि में वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
लखनऊ में ‘दशानन रावण’ पोस्टर से सियासी हलचल, राहुल गांधी से एलन मस्क तक की तस्वीरें शामिल

- सनातनी रक्षा दल ने शहर के विभिन्न चौराहों पर लगाए पोस्टर, ‘सनातन भारत के विरोधी रावण’ लिखकर कई हस्तियों को दिखाया दस सिरों के रूप में
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के विभिन्न चौराहों पर सनातनी रक्षा दल की ओर से लगाए गए ‘दशानन रावण’ के पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। पोस्टरों पर ‘सनातन भारत के विरोधी रावण’ शीर्षक लिखा गया है। इनमें रावण के दस चेहरों के रूप में कई राजनीतिक हस्तियों, चर्चित व्यक्तियों और अन्य सार्वजनिक शख्सियतों की तस्वीरें शामिल की गई हैं।
पोस्टर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, दिवंगत अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी, कारोबारी एलन मस्क, अमेरिकी सांसद इल्हान उमर, बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख रहे मोहम्मद यूनुस, जॉर्ज सोरोस और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत अन्य लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं।
सनातनी रक्षा दल का आरोप है कि पोस्टर में शामिल लोग भारत विरोधी बयान देते हैं और देश में सत्ता परिवर्तन या तख्तापलट की मंशा रखते हैं। संगठन ने इन आरोपों को पोस्टर के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। हालांकि, ये आरोप संगठन के अपने दावे हैं और पोस्टर में शामिल सभी व्यक्तियों के संबंध में इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पोस्टर की सबसे चर्चित बात इसमें अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क की तस्वीर का शामिल होना है। भारतीय राजनीति से जुड़े चेहरों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित व्यक्तियों को एक ही पोस्टर में दर्शाए जाने से यह मामला खासा ध्यान आकर्षित कर रहा है। शहर के विभिन्न चौराहों पर लगाए गए इन पोस्टरों के जरिए संगठन ने अपना राजनीतिक और वैचारिक संदेश देने की कोशिश की है।
बैलेट पेपर से हो रहा है चुनाव, न्याय के पक्ष में परिणाम देने का काम जनता-जनार्दन का: मुख्यमंत्री योगी

- उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लखनऊ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा सम्मेलन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित।
- शिक्षकों का अपमान और शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा सपा की राजनीति का आधार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- सपा ने वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया दिया, हमने वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट और वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज दिया’
- सीएम योगी बोले - संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति का जवाब बनेगा यह चुनाव
- शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज, दुर्घटना पर 40 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक बीमा सुरक्षा
- अधिवक्ताओं को भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, मृत्यु पर परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता का प्रावधान

लखनऊ, 17 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह शिक्षा की घोषित दुश्मन है। शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा और शिक्षकों का अपमान उसकी राजनीति का आधार रहा है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों पर पेशेवर गुंडों का दबदबा था और युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ। इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए काम किया है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं से अपील की कि वे इस चुनाव में परिवारवाद और वंशवाद को नकारते हुए योग्य और सक्षम प्रतिनिधि चुनें।
उत्तर  प्रदेश विधान परिषद के आगामी लखनऊ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर लखनऊ में  'शिक्षक-स्नातक सम्मेलन' का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए एवं कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। यह सम्मेलन लखनऊ स्नातक क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और लखनऊ शिक्षक क्षेत्र से प्रत्याशी उमेश द्विवेदी के समर्थन में आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम में पहुंचने पर क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, भाजपा प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल और दोनों प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का  बुके भेंट कर भव्य स्वागत व अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र ,पुष्पगुच्छ भेंट किया गया और स्मृति चिह्न के रूप में भगवान श्रीराम की प्रतिमा भेंट की गई।
मुख्यमंत्री ने लखनऊ खंड के मतदाता महासम्मेलन को संबोधित करते हुए सपा की नीतियों पर सवाल उठाए और शिक्षकों, युवाओं तथा अधिवक्ताओं के हित में सरकार की ओर से किए गए कार्यों का उल्लेख किया।
- ‘समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन’
मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा की व्यवस्था की उपेक्षा, शिक्षकों का अपमान, यहीं से समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीति की थी।” उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों में पेशेवर गुंडे हावी हो जाते थे और शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उनके अनुसार, शिक्षा और युवा पिछली सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की व्यवस्था कमजोर होने का असर केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे समाज, प्रदेश और देश का भविष्य भी प्रभावित होता है। उन्होंने शिक्षकों के सम्मान, विद्यालयों की सुविधाओं और युवाओं के अवसरों को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
- ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ के मुकाबले वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट
मुख्यमंत्री ने सपा सरकार पर माफिया के प्रभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी ने 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया' दिया, हमने 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' दिया, 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' दिया।” उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में माफिया जमीनों पर कब्जा कर लेते थे और आम लोगों, शिक्षकों तथा सरकारी संपत्तियों की जमीनों को भी निशाना बनाया जाता था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था में सुधार के साथ विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ने का भी उल्लेख किया।
- ‘परिवारवाद और वंशवाद की विषबेल हटाइए’
मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और उमेश द्विवेदी के समर्थन में मतदान की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के मतदाताओं को ऐसा प्रतिनिधि चुनना चाहिए, जो उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा सके और जिम्मेदारी के साथ काम करे। उन्होंने कहा, “आपका प्रतिनिधि वह बनेगा जिसमें जज्बा हो और जिसमें सामर्थ्य हो।” परिवारवाद और वंशवाद पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से इसे बढ़ावा देने वाली राजनीति को नकारने का आह्वान किया। उन्होंने दोनों प्रत्याशियों को शिक्षकों और स्नातकों की आवाज उठाने में सक्षम बताया।
- बैलेट पेपर से चुनाव, न्याय के पक्ष में परिणाम देने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा, एमएलसी चुनाव “ईवीएम से नहीं, बैलेट पेपर से हो रहा है और परिणाम न्याय के पक्ष में देने का काम आपको करना है।” उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह चुनाव उसका भी जवाब होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से सतर्क रहकर मतदान करने और अति-आत्मविश्वास से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव में प्रत्येक मत महत्वपूर्ण है और कार्यकर्ताओं को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए।
- शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और स्ववित्तपोषित संस्थानों सहित विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों तथा उनके परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों से जुड़े शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों के साथ किसी अनहोनी या दुर्घटना की स्थिति में परिवार को बीमा कवर के माध्यम से 40 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है। रसोइयों के लिए भी दो लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर उपलब्ध कराने का उल्लेख किया।
- ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, ड्रॉपआउट दर 20 से घटकर तीन प्रतिशत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने के लिए काम किया है। बेसिक शिक्षा में ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत अभियान के तहत स्कूलों में बेहतर कक्षाएं, बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और कंप्यूटर कक्ष जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, बेसिक शिक्षा में ड्रॉपआउट दर 20 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत रह गई है, जबकि सैचुरेशन का स्तर 36 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत हो गया है। माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत राजकीय इंटर कॉलेजों, राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों, सहायता प्राप्त कॉलेजों और संस्कृत महाविद्यालयों के भवनों का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया गया है। इन संस्थानों में प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, स्मार्ट क्लास और अटल टिंकरिंग लैब जैसी सुविधाओं का भी विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री ने अटल आवासीय विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों और आश्रम पद्धति के विद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
- अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपये तक स्वास्थ्य सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं के लिए किए गए प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि अधिवक्ता की मृत्यु होने पर उनके परिवार को मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। पहले यह सहायता डेढ़ लाख रुपये थी और इसका लाभ 60 वर्ष से कम आयु के अधिवक्ताओं के मामलों में मिलता था। सरकार ने आयु सीमा को बढ़ाकर 70 वर्ष तक किया है। उन्होंने बताया कि अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों और अधिवक्ताओं सहित विभिन्न वर्गों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है।
- 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, एक लाख और को नियुक्ति की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र दिए हैं। चुनाव से पहले एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने की तैयारी है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का दावा करते हुए कहा कि युवाओं को योग्यता के आधार पर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निजी क्षेत्र में निवेश के माध्यम से 65 लाख युवाओं को रोजगार मिलने और प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या बढ़कर 24 हजार से अधिक होने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में सुरक्षा और निवेश के बेहतर माहौल से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी ने स्नातक प्रत्य़ाशी अवनीश सिंह और शिक्षक प्रत्याशी उमेश के पक्ष में वोट की अपील की. उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत अभिनंदन किया.
- ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिया सभी शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ’
स्नातक प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश सिंह ने कहा मुख्यमंत्री योगी ने सभी शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ दिया. प्रोजेक्ट अंलकार के माध्यम से माध्यमिक स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था को और उनके शिक्षकों कार्यों को और उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृणीकरण करके माध्यमिक विद्यालयों की व्यवस्था को सुधारा है. आउटसोर्सिंग आयोग बनाकर के युवाओं को एक सुरक्षा प्रदान की है।
शिक्षक प्रत्याशी उमेश द्विवेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने 2000 पहले के जो तदर्थ शिक्षक थे उनके सारे शिक्षकों को विनियमित करते हुए उनको वेतन देने का काम किया है. 2000 के बाद के भी लगभग 60 प्रतिशत शिक्षक वेतन आहारित कर रहे हैं 40 पर्सेंट बचे हैं उनके लिए फाइलें चल रही है. इस सरकार के पहले शिक्षक सम्मान नहीं था. शिक्षक वो हो गया था जो नकल कराए, शिक्षक वो हो गया था जो बच्चों की कॉपी लिखे, उनका कोई सम्मान नहीं रह गया था. लेकिन भाजपा ने शिक्षकों का जो गिरा हुआ सम्मान था उसको वापस किया. हमारे खिलाफ जो लोग खड़े हैं वो शिक्षक नहीं है वो मुनीम हैं।
- कार्यक्रम में रहे मौजूद
सम्मेलन में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, मंत्री मनोज पांडे, दिनेश प्रताप सिंह, नितिन अग्रवाल, रजनी तिवारी, राकेश राठौर 'गुरु', सुरेश राही और सतीश चंद्र शर्मा, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल और संजय राय, प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह, प्रदेश महामंत्री उपेंद्र रावत, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, स्नातक प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, शिक्षक प्रत्याशी उमेश द्विवेदी सहित पार्टी पदाधिकारी, शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में शिक्षक एवं स्नातक मतदाता मौजूद रहे।
रूल ऑफ माफिया से मुक्त हुआ यूपी, अब रूल ऑफ लॉ का राज: मुख्यमंत्री योगी

- डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने मेधावियों को दिए पदक

- योगी बोले - अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं, सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े हों युवा अधिवक्ता 

- शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन रखें, मुख्यमंत्री ने याद दिलाए डॉ. लोहिया के विचार

- 75 जिलों में साइबर थाने, एआई प्रज्ञा से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण

लखनऊ, 17 अक्टूबर 2026।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश 'रूल ऑफ माफिया' से मुक्त हुआ है और 'रूल ऑफ लॉ' लागू हुआ है। वर्ष 2017 से पहले कानून-व्यवस्था और निवेश को लेकर संदेह रहता था। माफिया से विकास बाधित था। सरकार ने कानून का शासन स्थापित कर प्रदेश की छवि बदली है। कोई व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं है। फैसला इतिहास सुनाएगा, लेकिन बहस आपको करनी है।

मुख्यमंत्री योगी शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पंचम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित किए। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने मेधावियों को पदक दिए।

- आपातकाल ने समझाया कानून और शासक के शासन का अंतर

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के साथ 25 जून 1975 भी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण तारीख है। आपातकाल ने 'रूल ऑफ लॉ' और 'रूलर ऑफ लॉ' का अंतर समझाया। न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया निर्णय इतिहास में स्थान बनाता है। युवा अधिवक्ताओं को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।

- सत्यं वद, धर्मं चर को हृदय में उतारें

मुख्यमंत्री ने कहा कि 'सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः' को चैंबर की दीवार पर नहीं, हृदय में उतारें। सत्य और निरंतर अध्ययन अधिवक्ता के जीवन का आधार हो। डॉ. लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होना चाहिए।

- विकसित भारत की पैरवी करें युवा अधिवक्ता

मुख्यमंत्री ने विकसित भारत की परिकल्पना को मुकदमे के रूप में प्रस्तुत किया। कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के इस दावे की पैरवी तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी से करनी होगी। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका होगी। प्रदेश को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना तैयार है।

- एआई को सहायक बनाएं, सारथी नहीं

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से होना चाहिए। लापरवाह मसौदे से निर्दोष व्यक्ति को स्वतंत्रता गंवानी पड़ सकती है। डीपफेक और साइबर अपराधों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता की चुनौती पैदा की है। प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क हैं। 'एआई प्रज्ञा' से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

- अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी साख

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने, जड़ों से जुड़े रहने और निरंतर अध्ययन की सीख दी। कहा कि गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान दें। गलत काम का दबाव आए तो सिद्धांतों से समझौता न करें।

- दूसरों के जीवन में बदलाव से तय होगी सफलता: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि उपाधि मंजिल नहीं, नई यात्रा की शुरुआत है। शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर शुरू होती है। सफलता का आकलन इससे होगा कि विद्यार्थी दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाते हैं। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों, करुणा और संवेदनशीलता को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

- कानून के शासन को मजबूत करें विद्यार्थी : मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि विधि शिक्षा में विश्वविद्यालय का विशेष स्थान है। संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा में योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि विद्यार्थी उच्च मानकों और परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए कानून का शासन मजबूत करेंगे।

- 20 वर्षों में 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी दिए: कुलपति

कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं। यहां से शिक्षित विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। विधि शिक्षा केवल भौतिक सफलता नहीं, समाज सेवा का माध्यम भी है। इसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण में हो।

- रुपाली और तेजस्वनी को स्वर्ण पदक

एलएलएम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक मिला। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला।

- ईशा अग्रवाल को तीन प्रायोजित स्वर्ण पदक

ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक मिला। तान्या वर्मा को टैक्सेशन में प्रदीप कुमार अग्रवाल मेमोरियल और मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए केके लूथरा मेमोरियल स्वर्ण पदक मिला।

- डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के मेधावी भी सम्मानित

साइबर लॉ में भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिला। बौद्धिक संपदा अधिकार में आशी पांडे, रितेश मेहता और ईशा अस्थाना को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिले। मीडिया लॉ में अंशुमान सिंह को स्वर्ण और संतुष्ट सोनकर को रजत पदक मिला।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह और कुलसचिव केशव कुमार सहित न्यायमूर्तिगण, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे।

राहत: चिकित्सकीय लापरवाही पर अब मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद होगी कार्रवाई

- यूपी में शासन ने जारी की एसओपी, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी की जगह पहले होगी विशेषज्ञों से जांच; डीएम और सीएमओ को भेजे गए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए शासन ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत डॉक्टरों के खिलाफ चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों की जांच के लिए जिला और राज्य स्तर पर मेडिकल बोर्ड गठित किए जाएंगे। शिकायतों की जांच और बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शासन ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों (डीएम) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को निर्देश जारी कर दिए हैं।
शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, चिकित्सकीय लापरवाही से संबंधित शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी उसे जांच के लिए सीएमओ को भेजेंगे। इसके बाद जिला स्तरीय मेडिकल बोर्ड मामले की जांच कर तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की राय के आधार पर तथ्यों का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
- राज्य स्तर पर गठित होगा मेडिकल बोर्ड
चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों की राज्य स्तर पर सुनवाई और परीक्षण के लिए राज्य मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड के अध्यक्ष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक होंगे। बोर्ड में विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा, ताकि मामलों की जांच में चिकित्सकीय और कानूनी पहलुओं का समुचित आकलन किया जा सके।
आदेश के मुताबिक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई) की ओर से नामित फॉरेंसिक मेडिसिन के प्रोफेसर को बोर्ड में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और अन्य मेडिकल कॉलेजों से दो प्रोफेसर सदस्य होंगे। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का एक प्रतिनिधि तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नामित विधि अधिकारी भी बोर्ड के सदस्य होंगे।
- स्वास्थ्य महानिदेशालय के अधिकारी होंगे सदस्य सचिव
राज्य मेडिकल बोर्ड में स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। बोर्ड में चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ विधि अधिकारी की भागीदारी से चिकित्सकीय तथ्यों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
नई एसओपी के तहत चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों में मेडिकल बोर्ड की जांच और रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। इससे ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की राय के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया निर्धारित होगी। हालांकि, बोर्ड की जांच और रिपोर्ट के आधार पर पुलिस की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों पर लागू सटीक कानूनी प्रावधानों की पुष्टि शासनादेश के मूल पाठ से की जानी चाहिए।
परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति 7 नवंबर तक पूरी करने के निर्देश, टीईटी अनिवार्य

- 23 अक्टूबर तक भेजनी होगी वरिष्ठता एवं पात्रता सूची, डायट प्राचार्य की अध्यक्षता में गठित होगी चयन समिति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बेसिक शिक्षा परिषद ने समयसीमा निर्धारित कर दी है। परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को निर्देश जारी करते हुए पदोन्नति की प्रक्रिया 7 नवंबर तक पूरी करने को कहा है। इस प्रक्रिया में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया है।

निर्देशों के अनुसार, सभी जिलों को शिक्षकों की वरिष्ठता सूची 23 अक्टूबर तक उपलब्ध करानी होगी। जिन जिलों में आपत्तियों के निस्तारण के बाद भी वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है, वहां 15 दिन के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके साथ ही जिले में रिक्त पदों, वरिष्ठता सूची और पात्रता सूची से संबंधित विवरण भी निर्धारित समयसीमा के भीतर बेसिक शिक्षा परिषद की ई-मेल पर भेजना होगा।

- टीईटी के स्तर के आधार पर तय होगी पात्रता

पदोन्नति के लिए तैयार की जाने वाली पात्रता सूची में संबंधित शिक्षक के टीईटी उत्तीर्ण होने का विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करने वाले शिक्षक प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थापन के पात्र होंगे, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करने वाले शिक्षक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थापन के लिए पात्र माने जाएंगे। दोनों स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करने वाले शिक्षक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक, दोनों स्तर के विद्यालयों में पदस्थापन के पात्र होंगे।

- डायट प्राचार्य की अध्यक्षता में बनेगी चयन समिति

पदोन्नति के लिए चयन समिति का गठन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य की अध्यक्षता में किया जाएगा। संबंधित जिले के बीएसए समिति के सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा जिला मुख्यालय स्थित राजकीय बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज की प्रधानाचार्य तथा जिलाधिकारी की ओर से नामित हिंदी, उर्दू या अन्य भाषा के विशेषज्ञ को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

- वरिष्ठता और रिक्त पदों के आधार पर बनेगी सूची

पदोन्नति के लिए शिक्षकों की सूची वरिष्ठता क्रम में तैयार कर उनकी चरित्र पंजिका और आवश्यक अभिलेखों के साथ चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। समिति चयनित अभ्यर्थियों की सूची नियुक्ति प्राधिकारी को भेजेगी। अनुपयुक्त पाए जाने वाले शिक्षकों को सूची से हटाने के बाद उपलब्ध रिक्त पदों के अनुसार वरिष्ठताक्रम में पात्र शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी। पदोन्नति के पात्र शिक्षकों से उनकी वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिक अथवा उच्च प्राथमिक विद्यालय में पदस्थापन के लिए विकल्प भी लिए जाएंगे। परिषद ने सभी बीएसए को निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जा सके।

राहत: चिकित्सकीय लापरवाही पर अब मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद होगी कार्रवाई

- यूपी में शासन ने जारी की एसओपी, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी की जगह पहले होगी विशेषज्ञों से जांच; डीएम और सीएमओ को भेजे गए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए शासन ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत डॉक्टरों के खिलाफ चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों की जांच के लिए जिला और राज्य स्तर पर मेडिकल बोर्ड गठित किए जाएंगे। शिकायतों की जांच और बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शासन ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों (डीएम) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को निर्देश जारी कर दिए हैं। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, चिकित्सकीय लापरवाही से संबंधित शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी उसे जांच के लिए सीएमओ को भेजेंगे। इसके बाद जिला स्तरीय मेडिकल बोर्ड मामले की जांच कर तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की राय के आधार पर तथ्यों का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

- राज्य स्तर पर गठित होगा मेडिकल बोर्ड

चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों की राज्य स्तर पर सुनवाई और परीक्षण के लिए राज्य मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड के अध्यक्ष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक होंगे। बोर्ड में विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा, ताकि मामलों की जांच में चिकित्सकीय और कानूनी पहलुओं का समुचित आकलन किया जा सके। आदेश के मुताबिक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई) की ओर से नामित फॉरेंसिक मेडिसिन के प्रोफेसर को बोर्ड में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और अन्य मेडिकल कॉलेजों से दो प्रोफेसर सदस्य होंगे। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का एक प्रतिनिधि तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नामित विधि अधिकारी भी बोर्ड के सदस्य होंगे।

- स्वास्थ्य महानिदेशालय के अधिकारी होंगे सदस्य सचिव

राज्य मेडिकल बोर्ड में स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। बोर्ड में चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ विधि अधिकारी की भागीदारी से चिकित्सकीय तथ्यों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।

नई एसओपी के तहत चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों में मेडिकल बोर्ड की जांच और रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। इससे ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की राय के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया निर्धारित होगी। हालांकि, बोर्ड की जांच और रिपोर्ट के आधार पर पुलिस की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों पर लागू सटीक कानूनी प्रावधानों की पुष्टि शासनादेश के मूल पाठ से की जानी चाहिए।

भयमुक्त वातावरण से बढ़ रही नारी शक्ति की भागीदारी, उत्तर प्रदेश के विकास को मिल रही नई गति

- मां कालरात्रि के स्वरूप का उल्लेख कर सीएम योगी ने महिला सुरक्षा, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और नारी सशक्तीकरण को बताया विकास का आधार

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां कालरात्रि के दिव्य स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि अधर्म, अत्याचार और आसुरी शक्तियों का विनाश तथा भक्तों को अभय प्रदान करना न्याय, साहस और निर्भय समाज की स्थापना का संदेश देता है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और नारी सशक्तीकरण को प्रदेश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि भयमुक्त वातावरण महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आर्थिक भागीदारी के लिए आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में माफिया, दंगाइयों और अपराधियों के आतंक से भय एवं अराजकता का वातावरण बना हुआ था, जिसका असर बहन-बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसरों पर भी पड़ता था। उन्होंने कहा कि विगत साढ़े नौ वर्षों में अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत की गई कार्रवाई से कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और भयमुक्त वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया है। सरकार की ओर से इन प्रयासों को महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक जीवन में उनकी बढ़ती भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

- मिशन शक्ति और महिला सुरक्षा की पहल से बढ़ा भरोसा

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए मिशन शक्ति, 1090 हेल्पलाइन, महिला बीट पुलिसिंग और सेफ सिटी परियोजना जैसी पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इनका उद्देश्य महिलाओं को घर से लेकर सड़क, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों और कार्यस्थलों तक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। साथ ही, महिला संबंधी अपराधों की रोकथाम, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने पुलिस रिस्पॉन्स टाइम का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2016 में 65 मिनट रहा पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम घटकर पांच मिनट रह गया है। उनके अनुसार, यह बदलाव आपात परिस्थितियों में पुलिस की त्वरित पहुंच और कानून-व्यवस्था की जवाबदेही को दर्शाता है। सुरक्षित वातावरण का प्रभाव महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर भी पड़ रहा है। सुरक्षा के प्रति विश्वास बढ़ने से महिलाएं शिक्षा, रोजगार और अन्य गतिविधियों में अधिक सक्रिय भागीदारी के अवसर प्राप्त कर रही हैं। नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी इस बदलाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

- 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हुई महिला श्रम बल भागीदारी

मुख्यमंत्री ने महिला श्रम बल भागीदारी दर में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दर 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने की दिशा को रेखांकित करता है। रोजगार और उद्यमिता के अवसरों का विस्तार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी सहायक हो सकता है। महिलाओं की भागीदारी अब कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र और उद्यमिता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण होती जा रही है। कौशल विकास, स्वरोजगार और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे उनकी आय के अवसरों का विस्तार होने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होती हैं।

- नारी शक्ति की भागीदारी से अर्थव्यवस्था को मिल रहा संबल

मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी सशक्तीकरण केवल सामाजिक न्याय और समान अवसरों का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति से भी जुड़ा है। महिलाओं की शिक्षा, कौशल, रोजगार और उद्यमिता में बढ़ती भागीदारी से परिवारों की आय, उत्पादकता और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। इस दृष्टि से महिला सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को प्रदेश के समावेशी विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय में तीन गुनी वृद्धि का भी उल्लेख किया। प्रदेश की आर्थिक प्रगति के संदर्भ में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी एक महत्वपूर्ण पहलू है। हालांकि, आर्थिक वृद्धि में महिला श्रम बल की भागीदारी का सटीक योगदान निर्धारित करने के लिए संबंधित अवधि के आधिकारिक आर्थिक और श्रम संबंधी आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण आवश्यक है।

- माँ कालरात्रि का संदेश : भय से मुक्ति, न्याय और सशक्तीकरण

मुख्यमंत्री ने माँ कालरात्रि के स्वरूप से प्रेरणा लेते हुए कहा कि अन्याय और भय का अंत तथा न्याय एवं साहस की स्थापना ही सशक्त समाज का आधार है। महिला सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, रोजगार और स्वावलंबन के लिए किए जा रहे प्रयास इसी व्यापक उद्देश्य से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को सुरक्षित वातावरण और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलते हैं, तो उनकी प्रतिभा और क्षमता का लाभ परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था सभी को मिलता है। प्रदेश की नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। महिला सुरक्षा से आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भरता से आर्थिक भागीदारी तक का यह संबंध प्रदेश में समावेशी विकास की संभावनाओं को रेखांकित करता है।