कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर पहुंची असम पुलिस, जानें क्या है पूरा मामला

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असम में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बवाल शुरू हो गया है। इसकी आंच दिल्ली तक महसूस की जा रही है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली वाले घर पर असम पुलिस की एक टीम पहुंची। असम पुलिस के साथ दिल्ली पुलिस की टीम भी मौजूद थी।बताया जा रहा है कि असम पुलिस पवन खेड़ा को अरेस्ट करने आई है। हालांकि, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा अभी घर पर मौजूद नहीं हैं।

असम की सियासी हलचल दिल्ली तक

असम विधानसभा चुनाव के प्रचार के आखिरी दौर में सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इस बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि सरमा की पत्नी के पास एक नहीं बल्कि तीन देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या परिवार की विदेशों में संपत्ति और कंपनियां हैं। इन आरोपों के सामने आते ही राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया। इसकी गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है।

हिमंत बिस्‍वा ने दिए थे बड़ी कार्रवाई के संकेत

मुख्यमंत्री सरमा ने तुरंत इन दावों को खारिज कर दिया और उन्हें पूरी तरह झूठा बताया। इसके साथ ही उनकी पत्नी ने भी मोर्चा संभाला और पवन खेड़ा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद हिमंत बिस्‍वा सरमा की पत्‍नी पर 3 विदेशी पासपोर्ट रखने के आरोप लगाने वाले पवन खेड़ा से पूछताछ के लिए असम पुलिस की टीम पहुंची। मुख्‍यमंत्री हिमंत बिस्‍वा सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के संकेत सोमवार को ही दे दिये थे।

पवन खेड़ा के घर पर रेड को लेकर भड़की कांग्रेस

असम पुलिस की पवन खेड़ा के घर पर छापेमारी को लेकर कांग्रेस का रिएक्शन सामने आया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनहित में बुनियादी सवाल पूछने पर मेरे सहयोगी पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधिकारियों की पूरी फौज तैनात करना यह साबित करता है कि असम के मुख्यमंत्री परेशान, हताश और डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह उचित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक तरह की बदले की कार्रवाई है, एक दबंग जो राज्य मशीनरी का इस्तेमाल करके विपक्ष की आवाज़ को दबा रहा है, जो उसके कई काले कारनामों को उजागर कर रहा है। जो लोग डराते-धमकाते हैं, वे असल में डरे हुए होते हैं और उनके पास छिपाने के लिए बहुत कुछ होता है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि मुख्यमंत्री को आसन्न हार का सामना करना पड़ रहा है।

पवन खेड़ा ने सीएम हिमंत की पत्‍नी पर लगाए बड़े आरोप

पवन खेड़ा ने कुछ दिन पहले दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। पवन खेड़ा के मुताबिक, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास UAE, मिस्र और एंटीगुआ और बारबुडा के पासपोर्ट हैं। दुबई में उनकी प्रॉपर्टी हैं और व्योमिंग (अमेरिका) में उनकी एक कंपनी है।

पीएम मोदी ने असम में देश को दी बड़ी सौगात, हरक्यूलस विमान से ऐतिहासिक लैंडिंग, जानें क्या है खास

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम में देश को बड़ी सौगात दी। डिब्रूगढ़ के नेशनल हाईवे पर नॉर्थईस्ट की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का पीएम मोदी ने उद्घाटन किया है। पीएम मोदी खुद भी लॉकहीड सी-130 हरक्यूलस विमान से हाइवे पर उतरे हैं।

पीएम मोदी की सी-130जे सुपर हरक्यूलिस से लैंडिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वायुसेना के विशेष विमान से डिब्रूगढ़ जिले में मोरान बाईपास पर बनी आपात लैंडिंग सुविधा पर उतरे। प्रधानमंत्री मोदी की लैंडिंग के साथ ही हाइवे पर स्थित यह पट्टी वायुसेना के रणनीतिक नेटवर्क का हिस्सा बन गई। पीएम मोदी ने भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस से लैंड किया।

राफेल-सुखोई का भी दिका दम

इसी के साथ भारतीय वायुसेना के सुखोई Su-30MKI ने डिब्रूगढ़ के मोरन बाईपास पर इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) से उड़ान भरी। राफेल, C-130J सुपर हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, डोर्नियर सर्विलांस विमान एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ये सभी जेट हाईवे स्ट्रिप पर सफलतापूर्वक उतरे और उड़े। इसके अलावा हेलीकॉप्टरों से घायलों को निकालने (कैजुअल्टी इवैक्यूएशन) की भी प्रैक्टिस की गई। यह सुविधा युद्ध के साथ-साथ मानवीय सहायता मिशनों में भी काम आएगी।

पूर्वोत्तर भारत का पहला आपातकालीन लैंडिंग केंद्र

बता दें कि यह पूर्वोत्तर भारत का पहला आपातकालीन लैंडिंग केंद्र है। यहां वे फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टरों का हवाई प्रदर्शन देखेंगे। भारतीय वायुसेना के साथ समन्वय में तैयार किया गया यह ईएलएफ आपात स्थिति में सैन्य और नागरिक विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ में सक्षम है।

क्यों महत्वपूर्ण है ये आपातकालीन लैंडिंग केंद्र

यह इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए एक महत्वपूर्ण एसेट के रूप में कार्य करेगी। इससे पूर्वोत्तर में प्राकृतिक आपदाओं या स्ट्रेटेजिक आवश्यकताओं के दौरान बचाव और राहत कार्यों की त्वरित तैनाती संभव हो सकेगी। दोहरे उपयोग वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में परिकल्पित यह ELF, 40 टन तक के लड़ाकू विमानों और 74 टन के अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमानों के संचालन में सक्षम है।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई 100% पाकिस्तानी एजेंट…”, असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा आरोप

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाया है। सरमा ने शनिवार को कहा कि 'गौरव गोगोई सौ प्रतिशत पाकिस्तान का एजेंट है। उसे बाहरी शक्तियों द्वारा देश में प्लांट किया गया है। सरमा ने कहा, जिस दिन मैं सबूत दिखाऊंगा, हर कोई मान जाएगा कि वह सौ प्रतिशत पाकिस्तानी एजेंट हैं। बता दें कि सरमा गोगोई के उनकी ब्रिटिश पत्नी के माध्यम से पाकिस्तानी संबंधों का आरोप लगाते रहे हैं।

सरमा ने गोगोई को चुनौती दी

मीडिया से बातचीत में सरमा ने कहा, गौरव गोगोई पाकिस्तानी एजेंट हैं। वह पूरी तरह से पाकिस्तानी एजेंट हैं। अगर उनमें हिम्मत है, तो मेरे खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करें। मेरे पास सबूत हैं — वह 100 प्रतिशत पाकिस्तानी एजेंट हैं। उन्हें हमारे देश में किसी विदेशी शक्ति द्वारा भेजा गया है। वह एक ‘प्लांटेड’ व्यक्ति हैं। मैं यह तथ्य के साथ कह रहा हूं। एक मुख्यमंत्री के रूप में मैं कह रहा हूं कि वह पूरी तरह पाकिस्तानी एजेंट हैं।

गोगोई की पत्नी पर भी लगा चुके हैं आरोप

असम सीएम ने इससे पहले आरोप लगाया था कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी भारत में रहते हुए पाकिस्तान स्थित एक एनजीओ से वेतन लेती हैं। उनकी पत्नी और बच्चे भारतीय नागरिक नहीं हैं। साथ ही गोगोई से सवाल किया था कि क्या आप 15 दिनों के लिए पाकिस्तान गए थे।

IATITW Pvt. Ltd. launches affordable platform for professionals, companies and employees

Assam, India –Date – A new technology company, IATITW Pvt. Ltd., has launched a unique service platform designed to connect professionals, companies, and employees in one place. The company promises to make service discovery, hiring, and employment verification easier than ever before, all at a very affordable cost. By creating a profile, entering details, and paying a nominal fee of just ₹99 or ₹149, users can access a wide range of opportunities and services.

The idea behind IATITW is simple but powerful. Many professionals and employees struggle to find work that matches their skills, while companies often find it difficult to locate reliable workers. At the same time, customers searching for services such as electricians, teachers, designers, or freelancers often do not know where to turn. With IATITW, you will find a platform that serves all three groups, those offering personal services to clients, employers looking for workers, and those looking for recognition for their work.

The platform provides professionals with the opportunity to create a profile and be discovered by potential customers. You can create a profile and be visible to people searching for a driver, doctor, YouTuber, developer, or home repair specialist. This not only provides new work opportunities but also builds trust, since users know they are contacting a verified professional.

For companies, the platform acts as a recruitment and employee management tool. Businesses can use IATITW to find employees for any department and hire them under flexible contracts of six months, one year, or longer. The process is fast, cost-effective, and transparent, making it particularly useful for small and medium-sized enterprises that need dependable staff but cannot afford expensive hiring platforms.

For employees, IATITW offers a way to showcase skills and experience while also receiving verified certificates. Every time an employee works with a company, a certificate is added to their profile. This ensures that when they move to a new job, they carry proof of their experience, creating greater trust with future employers. The more companies they work with, the more certificates they earn, strengthening their profile over time.

The platform is designed to work both online and offline. Users can search for services through the app or website, but if they are unable to find what they need, they can contact the company’s customer service center for assistance. This hybrid approach ensures that no request goes unanswered and that services are accessible even in areas where online platforms are less commonly used.

Affordability is one of the biggest advantages of IATITW. Through its low pricing, the company makes the service affordable for a wide range of users - from individuals in small towns to large companies in major cities. There are no hidden costs or commissions, which makes the platform stand out from traditional service marketplaces and job boards.

Speaking about the launch, the company’s founder said that the goal of IATITW is to create a trusted and transparent system where professionals, employees, and companies can connect without barriers. The founder explained that the low fee ensures inclusivity, while the verification process builds confidence among users. The company believes that every skilled person deserves visibility, every company deserves reliable staff, and every worker deserves recognition for their contribution.

Looking ahead, IATITW plans to introduce advanced features such as artificial intelligence-based matching and real-time location services to make connections even faster and more accurate. The company also intends to expand its offline support network to ensure that customer queries are answered quickly and services are delivered without delay.

With its official launch, IATITW has entered the market as an affordable, reliable, and transparent solution for professionals, companies, and employees. By simplifying the way people connect and by offering certified verification, the company is positioning itself as a major player in the service and employment sector.

For more information, download https://play.google.com/store/apps/details?id=com.greynext.iatitw

or contact the customer care team at +91 7859909729.

*Asia’s oldest football tournament now in five states as Imphal makes a comeback*

Sports

134th IndianOil Durand Cup

Sports Desk: Asia’s oldest football tournament, the IndianOil Durand Cup, will be back with its 134th Edition and for the first time in its storied history, be hosted in as many as five states with Manipur’s capital Imphal, making a comeback after a two-year gap. The Durand Cup Organising Committee also announced the dates for this year’s tournament to be between July 22- August 23, 2025.

Kokrajhar in Assam will extend their status as Durand Cup hosts for the third consecutive year while Jamshedpur in Jharkhand and Shillong in Meghalaya were added as hosts last year. The century-old tournament shifted its home base to Kolkata – the Mecca of Indian Football, and the capital of West Bengal, from Delhi back in 2019, and, will also continue to hold that status for a sixth consecutive edition.

Since its transition to the East, the Durand Cup has reinstated itself as the country’s premiere competition, growing from 16 teams to 24 teams, including participation from all the Indian Super League (ISL) teams.

Organised by the Eastern Command of the Indian Army on behalf of the three Services, the tournament is unique in the sense that it pits Services teams against India’s best football clubs and over the past couple of editions, has also seen foreign participation with Army teams from neighbouring nations.

The Indian Army’s stated vision of expanding the reach of the historic tournament throughout the East and North-East is also now fully reflected with the choice of host cities this year.

A total of six venues, two in Kolkata (Vivekananda Yuba Bharati Krirangan and Kishore Bharti Krirangan) and one each in Imphal (Khuman Lampak stadium), Ranchi (Morhabadi Stadium) or Jamshedpur (JRD Tata Sports Complex), Shillong (Jawahar Lal Nehru Stadium) and Kokrajhar (SAI Stadium) have been earmarked for the 134th IndianOil Durand Cup edition.

North East United FC are the defending champions having overcome maximum title-holders Mohun Bagan, in a thrilling final last year to get their historic maiden title.

Pic Courtesy by: Durand football society

मणिपुर में सेना का बड़ा एक्शन, 10 उग्रवादी ढेर, हथियारों का जखीरा बरामद*


#assam_rifles_killed_10_militants_in_manipur

मणिपुर के चांदेल में भारतीय सेना ने उग्रवादियों के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। चंदेल जिले में बुधवार को असम राइफल्स की एक यूनिट ने मुठभेड़ में कम से कम 10 उग्रवादियों को मार गिराया।भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने बताया कि खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू किया गया ऑपरेशन अभी भी जारी है।

इंडियन आर्मी ने एक्स पर इस एक्शन की जानकारी दी है। सेना के मुताबिक, मणिपुर के चांदेल जिले के खेंगजॉय तहसील के न्यू समतल गांव के पास उग्रवादियों की गतिविधियों का पता चला था। भारत-म्यांमार सीमा के पास सशस्त्र कैडरों यानी उग्रवादियों की गतिविधियों की खुफिया जानकारी पर एक्शन लिया गया। स्पीयर कॉर्प्स के तहत असम राइफल्स यूनिट ने 14 मई को एक अभियान शुरू किया।जैसे ही सेना के जवानों ने ऑपरेशन शुरू किया, उग्रवादियों ने उन पर गोलियां चलाई। जिसका सेना ने करारा जवाब दिया।

सेना ने बताया कि सुरक्षाबलों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और जवाबी कार्रवाई के दौरान हुई गोलीबारी में 10 कैडरों को मार गिराया गया। मौके से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं।इस ऑपरेशन को कैलिब्रेटेड यानी योजनाबद्ध और सटीक बताया गया है।

सूत्रों के अनुसार, इलाके में और भी उग्रवादी छिपे होने की आशंका के मद्देनजर सर्च ऑपरेशन अभी भी चलाया जा रहा है। ऑपरेशन के दौरान किसी भी जवान के हताहत होने की खबर नहीं है। यह कार्रवाई मणिपुर में जारी अशांति के बीच सुरक्षाबलों की ओर से एक अहम सफलता मानी जा रही है।

असम में गोमांस पर बैन:होटल-रेस्टोरेंट या किसी भी सार्वजनिक स्थानों पर नहीं परोसा जाएगा बीफ

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असम की हिमंता बिस्वा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने राज्य के गोमांस पर बैन लगाया दिया है।असम के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट में अब बीफ नहीं परोसा जा सकेगा। यही नहीं, किसी भी तरह के पब्लिक फंक्शन में भी बीफ की डिशेज नहीं सर्व की जा सकेंगी। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को इस बाबत प्रतिबंधों की घोषणा की।

सरमा ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि 'पहले हमारा फैसला मंदिरों के पास गोमांस खाने पर रोक लगाने का था, लेकिन अब हमने इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया है। यानी आप किसी भी सामुदायिक स्थान, सार्वजनिक स्थान, होटल या रेस्तरां में गोमांस नहीं खा सकेंगे।'

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि असम में गो-हत्या रोकने के लिए हम 3 साल पहले कानून लाए थे. इस कानून से हमें गो-हत्या के खिलाफ काफी सफलता मिली है. अब हमने फैसला लिया है कि राज्य में किसी होटल, रेस्टोरेंट या सार्वजनिक स्थान पर बीफ नहीं परोसा जाएगा. पहले हमारा फैसला था कि किसी मंदिर के 5 किलोमीटर दायरे तक गोमांस नहीं परोसा जाएगा। सरमा ने कहा, 'हमने फैसला किया है कि किसी भी रेस्तरां या होटल में गोमांस नहीं परोसा जाएगा। इसलिए आज से हमने होटलों, रेस्तरां और सार्वजनिक स्थानों पर गोमांस की खपत को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है।

हिमंता बिस्वा सरमा के इस फैसले के बाद सरकार में मंत्री पीजूष हजारिका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने असम कांग्रेस को चैलेंज किया है। हजारिका ने कहा,मैं असम कांग्रेस को चुनौती देता हूं कि वो गोमांस प्रतिबंध का स्वागत करे या फिर पाकिस्तान जाकर बस जाए।

असम सरकार का ये फैसला उस वक्त आया है जब राज्य में गोमांस को लेकर सियासत तेज है। दरअसल, कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन ने आरोप लगाया था कि नगांव जिले के सामगुरी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से बीफ पार्टी का आयोजन किया गया था। उन्होंने कहा था कि इसका मकसद मुस्लिम मतदाताओं को रिझाना था। सामगुरी सीट पर उपचुनाव के लिए 13 नवंबर को मतदान हुआ था। 23 नवंबर को रिजल्ट आने के बाद कांग्रेस की हार पर सांसद रकीबुल हुसैन ने भाजपा पर बीफ बांटने का आरोप लगाया था।

सरमा ने इन आरोपों पर कहा था कि रकीबुल हुसैन ने एक अच्छी बात कही है कि बीफ खाना गलत बात है।सीएम ने सोमवार को कहा था, मैं रकीबुल हुसैन से जानना चाहता हूं कि बीफ पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया कि बीफ खाना गलत है, तो ऐसी स्थिति में इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, मैं अब रकीबुल हुसैन के बयान को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेन बोरा को पत्र लिखूंगा और उनसे पुछूंगा कि क्या वो भी रकीबुल हुसैन की तरह बीफ पर प्रतिबंध लगाने की वकालत करते हैं।

हेमंत बिस्वा सरमा ने झारखंड में मुस्लिम आबादी बढ़ने का किया दावा, कहा यह है 'सरल गणित'

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Hemant Biswa Sharma (CM of Assam)

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के सह-प्रभारी हेमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है और आदिवासी आबादी घट रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मुस्लिम आबादी बढ़ने के पीछे घुसपैठ ही वजह है।

उन्होंने एएनआई से कहा, "मैंने घुसपैठियों के खिलाफ आग जलाई। भगवान हनुमान ने भी लंका में आग लगाई थी। हमें घुसपैठियों के खिलाफ आग जलानी है और झारखंड को स्वर्ण भूमि बनाना है। संथाल परगना में आदिवासी आबादी घट रही है और मुस्लिम आबादी बढ़ रही है।"

उन्होंने आश्चर्य जताया कि अगर घुसपैठ नहीं है तो मुस्लिम आबादी में वृद्धि का क्या कारण है? उन्होंने कहा, "हर मुसलमान घुसपैठिया नहीं है, लेकिन हर 5 साल में मुसलमानों की आबादी कैसे बढ़ रही है? क्या एक परिवार 10-12 बच्चे पैदा कर रहा है? अगर परिवार इतने बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं, तो निश्चित रूप से लोग बाहर से आ रहे हैं। यह सरल गणित है। हम चुनाव जीतेंगे, लेकिन यह मुख्य प्राथमिकता नहीं है, बल्कि संथाल परगना से घुसपैठियों को बाहर निकालना और महिलाओं को न्याय दिलाना है।" 

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि झारखंड में भाजपा सरकार संथाल परगना संभाग में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करेगी। उन्होंने एएनआई से कहा, "कल भी आपने झारखंड सरकार का आंतरिक पत्र देखा, जिसमें लिखा था कि घुसपैठियों को मदरसों में प्रशिक्षण दिया जाता है और आधार कार्ड बनाए जाते हैं। बहुत सी बातें सामने आ रही हैं, हमें विश्वास है कि इन चुनावों के बाद भाजपा की सरकार बनेगी और हम संथाल परगना में एनआरसी लागू करेंगे।" 

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में होगा - 13 नवंबर और 20 नवंबर को। पिछले विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 30 सीटें जीती थीं, भाजपा ने 25 और कांग्रेस ने 16 सीटें जीती थीं।

ममता के यूपी-बिहार-असम भी जलेंगे वाले बयान पर मचा सियासी घमासान, भाजपा नेताओं ने साधा निशाना*
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा द्वारा बुलाए गए बंद के विरोध में ऐसा बयान दे दिया है कि सियासी तूफान खड़ा हो गया है।ममता ने 28 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा था कि अगर पश्चिम बंगाल को जलाया तो असम, उत्तर-पूर्व, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और दिल्ली भी जलेंगे।उनके इस बयान पर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के भाषण पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने जोरदार हमला बोला है। पूनावाला ने ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस, समा और आप नेताओं को भी घेरा है। बीजेपी नेता ने कहा हैं, ''140 करोड़ भारतीय पश्चिम बंगाल की बेटी के लिए न्याय मांग रहे हैं। ममता बनर्जी की प्राथमिकता न्याय नहीं बल्कि बदला है। जब एक सीएम कहतीं हैं, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पूर्वोत्तर और ओडिशा जलेंगे, मैं पूछना चाहता हूं कि क्या अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, आप या गौरव गोगोई इस बयान का समर्थन करते हैं? क्या जो लोग न्याय की मांग कर रहे हैं वे अशांति पैदा कर रहे हैं? यह प्रदर्शनकारियों और डॉक्टरों का अपमान है जब ममता बनर्जी का कहना है कि न्याय की मांग करना अशांति पैदा करने जैसा है। वह संविधान विरोधी बयान दे रही हैं और राहुल गांधी, जो संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं, इस पर एक शब्द भी नहीं बोलते हैं।'' *सरमा ने पूछा- आपकी हिम्मत कैसे हुई असम को धमकाने की?* ममता के इस बयान को लेकर असम के सीएम हिमंत विस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि दीदी, आपकी हिम्मत कैसे हुई असम को धमकाने की? हमें लाल आंखें मत दिखाइए। आपकी असफलता की राजनीति से भारत को जलाने की कोशिश भी मत कीजिए। आपको विभाजनकारी भाषा बोलना शोभा नहीं देता। *बंगाल भाजपा अध्यक्ष का गृह मंत्री को लिखा पत्र* सुकांत ने अमित शाह के नाम पत्र में लिखा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज कोलकाता में TMC के छात्र विंग को संबोधित करते हुए भीड़ को उकसाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 'मैंने कभी बदला नहीं चाहा, लेकिन अब, जो करना है वह करो।' ममता का यह बयान राज्य के सर्वोच्च पद से बदले की राजनीति का स्पष्ट समर्थन है। उन्होंने बेशर्मी से राष्ट्र-विरोधी बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि 'याद रखें, अगर बंगाल जलता है, तो असम, बिहार, झारखंड, ओडिशा, और दिल्ली भी जलेंगे।' यह संवैधानिक पद पर बैठने वाले व्यक्ति की आवाज नहीं हो सकती है, यह राष्ट्र-विरोधी की आवाज है। उनका बयान स्पष्ट रूप से धमकाने, हिंसा भड़काने और लोगों के बीच नफरत फैलाने का प्रयास है। अब वे इतने महत्वपूर्ण पद पर बने रहने की हकदार नहीं हैं। उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। जनता के हर सेवक का, खासतौर से ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति का मौलिक कर्तव्य है कि वह शांति को बढ़ावा दे और किसी भी तरह की हिंसा को बढ़ने से रोके। ममता के विचार चिंताजनक हैं और यह पश्चिम बंगाल के नागरिकों की सुरक्षा और राज्य की अखंडता को कमजोर करता है। मैं आपसे विनम्र निवेदन करता हूं कि आप इस गंभीर मामले पर संज्ञान लें और स्थिति को संबोधित करने और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए उपयुक्त कार्रवाई करें। मैं पश्चिम बंगाल के नागरिकों के हितों की रक्षा करने और हमारे राष्ट्र के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए आपकी तरफ से तुरंत और निर्णायक कार्रवाई का इंतजार कर रहा हूं। *ममता ने क्या कहा* ममता ने कहा था, "कुछ लोगों को लगता है कि यह बांग्लादेश है। वे हमारी तरह बात करते हैं और हमारी संस्कृति भी एक जैसी है, लेकिन याद रखिए कि बांग्लादेश अलग देश है और भारत अलग देश है। मोदी बाबू कोलकाता के मामले में अपनी पार्टी का इस्तेमाल करके बंगाल में आग लगवा रहे हैं। अगर आपने बंगाल को जलाया तो असम, उत्तर-पूर्व, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और दिल्ली भी जलेंगे। हम आपकी कुर्सी गिरा देंगे।" दरअसल, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेड में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना के विरोध में छात्र संगठनों ने 27 अगस्त को 'नबन्ना अभियान' विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था।इस दौरान छात्र सचिवालय तक रैली निकाल रहे थे, जहां प्रदर्शन हिंसक हो गया और पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस घटना के विरोध में भाजपा ने 28 अगस्त को 12 घंटे बंद का ऐलान किया था।ममता ने इसी बंद को लेकर भाजपा पर निशाना साधा था।
असम में अब काजी नहीं कर सकेंगे मुस्लिमों की शादी का रजिस्ट्रेशन, बदलेगा 90 साल पुराना कानून

#registration_of_muslim_marriages_in_assam_will_be_done_by_govt_not_qazi

असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ के कुछ प्रावधानों को रद्द करने वाली है। दरअसल, असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार गुरुवार को विधानसभा में मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रेशन बिल 2024 पेश करेगी। एक बार लागू होने के बाद, यह कानून मुस्लिम विवाह और तलाक को दर्ज करने वाले काजियों की भूमिका को खत्म कर देगा। इससे पहले बुधवार को असम कैबिनेट इस बिल को मंजूरी दे चुकी है। अब इसे सदन में पेश किया जाएगा। 

राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा- बिल में 2 विशेष प्रावधान हैं। पहला- मुस्लिम शादी का रजिस्ट्रेशन अब काजी नहीं सरकार करेगी। दूसरा- बाल विवाह के पंजीकरण को अवैध माना जाएगा। सीएम हिमंत ने कहा कि अब तक काजी नाबालिग लड़कियों की शादियां भी रजिस्टर्ड करते थे। अब ऐसा नहीं होगा। अब बाल विवाह रजिस्ट्रेशन बिल्कुल नहीं होगा। हम बाल विवाह की बुराई को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि नया बिल इस्लामिक निकाह सिस्टम में बदलाव नहीं करेगा। केवल रजिस्ट्रेशन पार्ट में ही बदलाव होगा। शादी और तलाक रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड होंगे।

नए बिल के पास होकर कानून बनने के बाद जिला आयुक्तों और रजिस्ट्रारों को मौजूदा वक्त में 94 काजियों के पास मौजूद रजिस्ट्रेशन के रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेने का अधिकार होगा। जिन्हें 1935 के ब्रिटिश युग के कानून द्वारा वैध बनाया गया था। 90 साल पहले अंग्रेजों के दौर में 1935 के कानून में निकाह और तलाक के लिए रजिस्ट्रेशन का जिक्र किया गया था। इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक बनाया गया था। यह अधिनियम मुस्लिम विवाह और तलाक के पंजीकरण की प्रक्रिया निर्धारित करता था। साल 2010 में इसमें बदलाव किया गया और रजिस्ट्रेशन को ऐच्छिक न रखकर, अनिवार्य किया गया। 1935 के कानून में विशेष स्थिति में कम उम्र में निकाह करने की अनुमति दी जाती।

असम कैबिनेट ने जुलाई की शुरुआत में प्रस्तावित अनिवार्य पंजीकरण कानून के लिए रास्ता साफ करने के लिए असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 को निरस्त करने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी थी।1935 के कानून के तहत स्पेशल कंडीशन में कम उम्र में निकाह करने की अनुमति दी जाती थी। जुलाई में जारी इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन रिपोर्ट ने बाल विवाह से निपटने के लिए असम सरकार के प्रयासों की सराहना की। रिपोर्ट में कहा गया कि कानूनी कार्रवाई के जरिए असम में बाल विवाह के मामलों को कम किया है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर पहुंची असम पुलिस, जानें क्या है पूरा मामला

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असम में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बवाल शुरू हो गया है। इसकी आंच दिल्ली तक महसूस की जा रही है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली वाले घर पर असम पुलिस की एक टीम पहुंची। असम पुलिस के साथ दिल्ली पुलिस की टीम भी मौजूद थी।बताया जा रहा है कि असम पुलिस पवन खेड़ा को अरेस्ट करने आई है। हालांकि, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा अभी घर पर मौजूद नहीं हैं।

असम की सियासी हलचल दिल्ली तक

असम विधानसभा चुनाव के प्रचार के आखिरी दौर में सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इस बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि सरमा की पत्नी के पास एक नहीं बल्कि तीन देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या परिवार की विदेशों में संपत्ति और कंपनियां हैं। इन आरोपों के सामने आते ही राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया। इसकी गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है।

हिमंत बिस्‍वा ने दिए थे बड़ी कार्रवाई के संकेत

मुख्यमंत्री सरमा ने तुरंत इन दावों को खारिज कर दिया और उन्हें पूरी तरह झूठा बताया। इसके साथ ही उनकी पत्नी ने भी मोर्चा संभाला और पवन खेड़ा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद हिमंत बिस्‍वा सरमा की पत्‍नी पर 3 विदेशी पासपोर्ट रखने के आरोप लगाने वाले पवन खेड़ा से पूछताछ के लिए असम पुलिस की टीम पहुंची। मुख्‍यमंत्री हिमंत बिस्‍वा सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के संकेत सोमवार को ही दे दिये थे।

पवन खेड़ा के घर पर रेड को लेकर भड़की कांग्रेस

असम पुलिस की पवन खेड़ा के घर पर छापेमारी को लेकर कांग्रेस का रिएक्शन सामने आया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनहित में बुनियादी सवाल पूछने पर मेरे सहयोगी पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधिकारियों की पूरी फौज तैनात करना यह साबित करता है कि असम के मुख्यमंत्री परेशान, हताश और डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह उचित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक तरह की बदले की कार्रवाई है, एक दबंग जो राज्य मशीनरी का इस्तेमाल करके विपक्ष की आवाज़ को दबा रहा है, जो उसके कई काले कारनामों को उजागर कर रहा है। जो लोग डराते-धमकाते हैं, वे असल में डरे हुए होते हैं और उनके पास छिपाने के लिए बहुत कुछ होता है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि मुख्यमंत्री को आसन्न हार का सामना करना पड़ रहा है।

पवन खेड़ा ने सीएम हिमंत की पत्‍नी पर लगाए बड़े आरोप

पवन खेड़ा ने कुछ दिन पहले दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। पवन खेड़ा के मुताबिक, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास UAE, मिस्र और एंटीगुआ और बारबुडा के पासपोर्ट हैं। दुबई में उनकी प्रॉपर्टी हैं और व्योमिंग (अमेरिका) में उनकी एक कंपनी है।

पीएम मोदी ने असम में देश को दी बड़ी सौगात, हरक्यूलस विमान से ऐतिहासिक लैंडिंग, जानें क्या है खास

#pmmodiinassaminaugurateshighwayemergencylandingfacility

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम में देश को बड़ी सौगात दी। डिब्रूगढ़ के नेशनल हाईवे पर नॉर्थईस्ट की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का पीएम मोदी ने उद्घाटन किया है। पीएम मोदी खुद भी लॉकहीड सी-130 हरक्यूलस विमान से हाइवे पर उतरे हैं।

पीएम मोदी की सी-130जे सुपर हरक्यूलिस से लैंडिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वायुसेना के विशेष विमान से डिब्रूगढ़ जिले में मोरान बाईपास पर बनी आपात लैंडिंग सुविधा पर उतरे। प्रधानमंत्री मोदी की लैंडिंग के साथ ही हाइवे पर स्थित यह पट्टी वायुसेना के रणनीतिक नेटवर्क का हिस्सा बन गई। पीएम मोदी ने भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस से लैंड किया।

राफेल-सुखोई का भी दिका दम

इसी के साथ भारतीय वायुसेना के सुखोई Su-30MKI ने डिब्रूगढ़ के मोरन बाईपास पर इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) से उड़ान भरी। राफेल, C-130J सुपर हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, डोर्नियर सर्विलांस विमान एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ये सभी जेट हाईवे स्ट्रिप पर सफलतापूर्वक उतरे और उड़े। इसके अलावा हेलीकॉप्टरों से घायलों को निकालने (कैजुअल्टी इवैक्यूएशन) की भी प्रैक्टिस की गई। यह सुविधा युद्ध के साथ-साथ मानवीय सहायता मिशनों में भी काम आएगी।

पूर्वोत्तर भारत का पहला आपातकालीन लैंडिंग केंद्र

बता दें कि यह पूर्वोत्तर भारत का पहला आपातकालीन लैंडिंग केंद्र है। यहां वे फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टरों का हवाई प्रदर्शन देखेंगे। भारतीय वायुसेना के साथ समन्वय में तैयार किया गया यह ईएलएफ आपात स्थिति में सैन्य और नागरिक विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ में सक्षम है।

क्यों महत्वपूर्ण है ये आपातकालीन लैंडिंग केंद्र

यह इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए एक महत्वपूर्ण एसेट के रूप में कार्य करेगी। इससे पूर्वोत्तर में प्राकृतिक आपदाओं या स्ट्रेटेजिक आवश्यकताओं के दौरान बचाव और राहत कार्यों की त्वरित तैनाती संभव हो सकेगी। दोहरे उपयोग वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में परिकल्पित यह ELF, 40 टन तक के लड़ाकू विमानों और 74 टन के अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमानों के संचालन में सक्षम है।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई 100% पाकिस्तानी एजेंट…”, असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा आरोप

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाया है। सरमा ने शनिवार को कहा कि 'गौरव गोगोई सौ प्रतिशत पाकिस्तान का एजेंट है। उसे बाहरी शक्तियों द्वारा देश में प्लांट किया गया है। सरमा ने कहा, जिस दिन मैं सबूत दिखाऊंगा, हर कोई मान जाएगा कि वह सौ प्रतिशत पाकिस्तानी एजेंट हैं। बता दें कि सरमा गोगोई के उनकी ब्रिटिश पत्नी के माध्यम से पाकिस्तानी संबंधों का आरोप लगाते रहे हैं।

सरमा ने गोगोई को चुनौती दी

मीडिया से बातचीत में सरमा ने कहा, गौरव गोगोई पाकिस्तानी एजेंट हैं। वह पूरी तरह से पाकिस्तानी एजेंट हैं। अगर उनमें हिम्मत है, तो मेरे खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करें। मेरे पास सबूत हैं — वह 100 प्रतिशत पाकिस्तानी एजेंट हैं। उन्हें हमारे देश में किसी विदेशी शक्ति द्वारा भेजा गया है। वह एक ‘प्लांटेड’ व्यक्ति हैं। मैं यह तथ्य के साथ कह रहा हूं। एक मुख्यमंत्री के रूप में मैं कह रहा हूं कि वह पूरी तरह पाकिस्तानी एजेंट हैं।

गोगोई की पत्नी पर भी लगा चुके हैं आरोप

असम सीएम ने इससे पहले आरोप लगाया था कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी भारत में रहते हुए पाकिस्तान स्थित एक एनजीओ से वेतन लेती हैं। उनकी पत्नी और बच्चे भारतीय नागरिक नहीं हैं। साथ ही गोगोई से सवाल किया था कि क्या आप 15 दिनों के लिए पाकिस्तान गए थे।

IATITW Pvt. Ltd. launches affordable platform for professionals, companies and employees

Assam, India –Date – A new technology company, IATITW Pvt. Ltd., has launched a unique service platform designed to connect professionals, companies, and employees in one place. The company promises to make service discovery, hiring, and employment verification easier than ever before, all at a very affordable cost. By creating a profile, entering details, and paying a nominal fee of just ₹99 or ₹149, users can access a wide range of opportunities and services.

The idea behind IATITW is simple but powerful. Many professionals and employees struggle to find work that matches their skills, while companies often find it difficult to locate reliable workers. At the same time, customers searching for services such as electricians, teachers, designers, or freelancers often do not know where to turn. With IATITW, you will find a platform that serves all three groups, those offering personal services to clients, employers looking for workers, and those looking for recognition for their work.

The platform provides professionals with the opportunity to create a profile and be discovered by potential customers. You can create a profile and be visible to people searching for a driver, doctor, YouTuber, developer, or home repair specialist. This not only provides new work opportunities but also builds trust, since users know they are contacting a verified professional.

For companies, the platform acts as a recruitment and employee management tool. Businesses can use IATITW to find employees for any department and hire them under flexible contracts of six months, one year, or longer. The process is fast, cost-effective, and transparent, making it particularly useful for small and medium-sized enterprises that need dependable staff but cannot afford expensive hiring platforms.

For employees, IATITW offers a way to showcase skills and experience while also receiving verified certificates. Every time an employee works with a company, a certificate is added to their profile. This ensures that when they move to a new job, they carry proof of their experience, creating greater trust with future employers. The more companies they work with, the more certificates they earn, strengthening their profile over time.

The platform is designed to work both online and offline. Users can search for services through the app or website, but if they are unable to find what they need, they can contact the company’s customer service center for assistance. This hybrid approach ensures that no request goes unanswered and that services are accessible even in areas where online platforms are less commonly used.

Affordability is one of the biggest advantages of IATITW. Through its low pricing, the company makes the service affordable for a wide range of users - from individuals in small towns to large companies in major cities. There are no hidden costs or commissions, which makes the platform stand out from traditional service marketplaces and job boards.

Speaking about the launch, the company’s founder said that the goal of IATITW is to create a trusted and transparent system where professionals, employees, and companies can connect without barriers. The founder explained that the low fee ensures inclusivity, while the verification process builds confidence among users. The company believes that every skilled person deserves visibility, every company deserves reliable staff, and every worker deserves recognition for their contribution.

Looking ahead, IATITW plans to introduce advanced features such as artificial intelligence-based matching and real-time location services to make connections even faster and more accurate. The company also intends to expand its offline support network to ensure that customer queries are answered quickly and services are delivered without delay.

With its official launch, IATITW has entered the market as an affordable, reliable, and transparent solution for professionals, companies, and employees. By simplifying the way people connect and by offering certified verification, the company is positioning itself as a major player in the service and employment sector.

For more information, download https://play.google.com/store/apps/details?id=com.greynext.iatitw

or contact the customer care team at +91 7859909729.

*Asia’s oldest football tournament now in five states as Imphal makes a comeback*

Sports

134th IndianOil Durand Cup

Sports Desk: Asia’s oldest football tournament, the IndianOil Durand Cup, will be back with its 134th Edition and for the first time in its storied history, be hosted in as many as five states with Manipur’s capital Imphal, making a comeback after a two-year gap. The Durand Cup Organising Committee also announced the dates for this year’s tournament to be between July 22- August 23, 2025.

Kokrajhar in Assam will extend their status as Durand Cup hosts for the third consecutive year while Jamshedpur in Jharkhand and Shillong in Meghalaya were added as hosts last year. The century-old tournament shifted its home base to Kolkata – the Mecca of Indian Football, and the capital of West Bengal, from Delhi back in 2019, and, will also continue to hold that status for a sixth consecutive edition.

Since its transition to the East, the Durand Cup has reinstated itself as the country’s premiere competition, growing from 16 teams to 24 teams, including participation from all the Indian Super League (ISL) teams.

Organised by the Eastern Command of the Indian Army on behalf of the three Services, the tournament is unique in the sense that it pits Services teams against India’s best football clubs and over the past couple of editions, has also seen foreign participation with Army teams from neighbouring nations.

The Indian Army’s stated vision of expanding the reach of the historic tournament throughout the East and North-East is also now fully reflected with the choice of host cities this year.

A total of six venues, two in Kolkata (Vivekananda Yuba Bharati Krirangan and Kishore Bharti Krirangan) and one each in Imphal (Khuman Lampak stadium), Ranchi (Morhabadi Stadium) or Jamshedpur (JRD Tata Sports Complex), Shillong (Jawahar Lal Nehru Stadium) and Kokrajhar (SAI Stadium) have been earmarked for the 134th IndianOil Durand Cup edition.

North East United FC are the defending champions having overcome maximum title-holders Mohun Bagan, in a thrilling final last year to get their historic maiden title.

Pic Courtesy by: Durand football society

मणिपुर में सेना का बड़ा एक्शन, 10 उग्रवादी ढेर, हथियारों का जखीरा बरामद*


#assam_rifles_killed_10_militants_in_manipur

मणिपुर के चांदेल में भारतीय सेना ने उग्रवादियों के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। चंदेल जिले में बुधवार को असम राइफल्स की एक यूनिट ने मुठभेड़ में कम से कम 10 उग्रवादियों को मार गिराया।भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने बताया कि खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू किया गया ऑपरेशन अभी भी जारी है।

इंडियन आर्मी ने एक्स पर इस एक्शन की जानकारी दी है। सेना के मुताबिक, मणिपुर के चांदेल जिले के खेंगजॉय तहसील के न्यू समतल गांव के पास उग्रवादियों की गतिविधियों का पता चला था। भारत-म्यांमार सीमा के पास सशस्त्र कैडरों यानी उग्रवादियों की गतिविधियों की खुफिया जानकारी पर एक्शन लिया गया। स्पीयर कॉर्प्स के तहत असम राइफल्स यूनिट ने 14 मई को एक अभियान शुरू किया।जैसे ही सेना के जवानों ने ऑपरेशन शुरू किया, उग्रवादियों ने उन पर गोलियां चलाई। जिसका सेना ने करारा जवाब दिया।

सेना ने बताया कि सुरक्षाबलों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और जवाबी कार्रवाई के दौरान हुई गोलीबारी में 10 कैडरों को मार गिराया गया। मौके से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए हैं।इस ऑपरेशन को कैलिब्रेटेड यानी योजनाबद्ध और सटीक बताया गया है।

सूत्रों के अनुसार, इलाके में और भी उग्रवादी छिपे होने की आशंका के मद्देनजर सर्च ऑपरेशन अभी भी चलाया जा रहा है। ऑपरेशन के दौरान किसी भी जवान के हताहत होने की खबर नहीं है। यह कार्रवाई मणिपुर में जारी अशांति के बीच सुरक्षाबलों की ओर से एक अहम सफलता मानी जा रही है।

असम में गोमांस पर बैन:होटल-रेस्टोरेंट या किसी भी सार्वजनिक स्थानों पर नहीं परोसा जाएगा बीफ

#assam_beef_ban

असम की हिमंता बिस्वा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने राज्य के गोमांस पर बैन लगाया दिया है।असम के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट में अब बीफ नहीं परोसा जा सकेगा। यही नहीं, किसी भी तरह के पब्लिक फंक्शन में भी बीफ की डिशेज नहीं सर्व की जा सकेंगी। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को इस बाबत प्रतिबंधों की घोषणा की।

सरमा ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि 'पहले हमारा फैसला मंदिरों के पास गोमांस खाने पर रोक लगाने का था, लेकिन अब हमने इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया है। यानी आप किसी भी सामुदायिक स्थान, सार्वजनिक स्थान, होटल या रेस्तरां में गोमांस नहीं खा सकेंगे।'

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि असम में गो-हत्या रोकने के लिए हम 3 साल पहले कानून लाए थे. इस कानून से हमें गो-हत्या के खिलाफ काफी सफलता मिली है. अब हमने फैसला लिया है कि राज्य में किसी होटल, रेस्टोरेंट या सार्वजनिक स्थान पर बीफ नहीं परोसा जाएगा. पहले हमारा फैसला था कि किसी मंदिर के 5 किलोमीटर दायरे तक गोमांस नहीं परोसा जाएगा। सरमा ने कहा, 'हमने फैसला किया है कि किसी भी रेस्तरां या होटल में गोमांस नहीं परोसा जाएगा। इसलिए आज से हमने होटलों, रेस्तरां और सार्वजनिक स्थानों पर गोमांस की खपत को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है।

हिमंता बिस्वा सरमा के इस फैसले के बाद सरकार में मंत्री पीजूष हजारिका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने असम कांग्रेस को चैलेंज किया है। हजारिका ने कहा,मैं असम कांग्रेस को चुनौती देता हूं कि वो गोमांस प्रतिबंध का स्वागत करे या फिर पाकिस्तान जाकर बस जाए।

असम सरकार का ये फैसला उस वक्त आया है जब राज्य में गोमांस को लेकर सियासत तेज है। दरअसल, कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन ने आरोप लगाया था कि नगांव जिले के सामगुरी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से बीफ पार्टी का आयोजन किया गया था। उन्होंने कहा था कि इसका मकसद मुस्लिम मतदाताओं को रिझाना था। सामगुरी सीट पर उपचुनाव के लिए 13 नवंबर को मतदान हुआ था। 23 नवंबर को रिजल्ट आने के बाद कांग्रेस की हार पर सांसद रकीबुल हुसैन ने भाजपा पर बीफ बांटने का आरोप लगाया था।

सरमा ने इन आरोपों पर कहा था कि रकीबुल हुसैन ने एक अच्छी बात कही है कि बीफ खाना गलत बात है।सीएम ने सोमवार को कहा था, मैं रकीबुल हुसैन से जानना चाहता हूं कि बीफ पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया कि बीफ खाना गलत है, तो ऐसी स्थिति में इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, मैं अब रकीबुल हुसैन के बयान को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेन बोरा को पत्र लिखूंगा और उनसे पुछूंगा कि क्या वो भी रकीबुल हुसैन की तरह बीफ पर प्रतिबंध लगाने की वकालत करते हैं।

हेमंत बिस्वा सरमा ने झारखंड में मुस्लिम आबादी बढ़ने का किया दावा, कहा यह है 'सरल गणित'

#hemant_biswa_claims_muslim_hike_in_jharkhand

Hemant Biswa Sharma (CM of Assam)

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के सह-प्रभारी हेमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है और आदिवासी आबादी घट रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मुस्लिम आबादी बढ़ने के पीछे घुसपैठ ही वजह है।

उन्होंने एएनआई से कहा, "मैंने घुसपैठियों के खिलाफ आग जलाई। भगवान हनुमान ने भी लंका में आग लगाई थी। हमें घुसपैठियों के खिलाफ आग जलानी है और झारखंड को स्वर्ण भूमि बनाना है। संथाल परगना में आदिवासी आबादी घट रही है और मुस्लिम आबादी बढ़ रही है।"

उन्होंने आश्चर्य जताया कि अगर घुसपैठ नहीं है तो मुस्लिम आबादी में वृद्धि का क्या कारण है? उन्होंने कहा, "हर मुसलमान घुसपैठिया नहीं है, लेकिन हर 5 साल में मुसलमानों की आबादी कैसे बढ़ रही है? क्या एक परिवार 10-12 बच्चे पैदा कर रहा है? अगर परिवार इतने बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं, तो निश्चित रूप से लोग बाहर से आ रहे हैं। यह सरल गणित है। हम चुनाव जीतेंगे, लेकिन यह मुख्य प्राथमिकता नहीं है, बल्कि संथाल परगना से घुसपैठियों को बाहर निकालना और महिलाओं को न्याय दिलाना है।" 

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि झारखंड में भाजपा सरकार संथाल परगना संभाग में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करेगी। उन्होंने एएनआई से कहा, "कल भी आपने झारखंड सरकार का आंतरिक पत्र देखा, जिसमें लिखा था कि घुसपैठियों को मदरसों में प्रशिक्षण दिया जाता है और आधार कार्ड बनाए जाते हैं। बहुत सी बातें सामने आ रही हैं, हमें विश्वास है कि इन चुनावों के बाद भाजपा की सरकार बनेगी और हम संथाल परगना में एनआरसी लागू करेंगे।" 

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में होगा - 13 नवंबर और 20 नवंबर को। पिछले विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 30 सीटें जीती थीं, भाजपा ने 25 और कांग्रेस ने 16 सीटें जीती थीं।

ममता के यूपी-बिहार-असम भी जलेंगे वाले बयान पर मचा सियासी घमासान, भाजपा नेताओं ने साधा निशाना*
#political_stir_over_mamata_benerjee_s_assam_delhi_will_burn_remark
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा द्वारा बुलाए गए बंद के विरोध में ऐसा बयान दे दिया है कि सियासी तूफान खड़ा हो गया है।ममता ने 28 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा था कि अगर पश्चिम बंगाल को जलाया तो असम, उत्तर-पूर्व, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और दिल्ली भी जलेंगे।उनके इस बयान पर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के भाषण पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने जोरदार हमला बोला है। पूनावाला ने ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस, समा और आप नेताओं को भी घेरा है। बीजेपी नेता ने कहा हैं, ''140 करोड़ भारतीय पश्चिम बंगाल की बेटी के लिए न्याय मांग रहे हैं। ममता बनर्जी की प्राथमिकता न्याय नहीं बल्कि बदला है। जब एक सीएम कहतीं हैं, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पूर्वोत्तर और ओडिशा जलेंगे, मैं पूछना चाहता हूं कि क्या अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, आप या गौरव गोगोई इस बयान का समर्थन करते हैं? क्या जो लोग न्याय की मांग कर रहे हैं वे अशांति पैदा कर रहे हैं? यह प्रदर्शनकारियों और डॉक्टरों का अपमान है जब ममता बनर्जी का कहना है कि न्याय की मांग करना अशांति पैदा करने जैसा है। वह संविधान विरोधी बयान दे रही हैं और राहुल गांधी, जो संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं, इस पर एक शब्द भी नहीं बोलते हैं।'' *सरमा ने पूछा- आपकी हिम्मत कैसे हुई असम को धमकाने की?* ममता के इस बयान को लेकर असम के सीएम हिमंत विस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि दीदी, आपकी हिम्मत कैसे हुई असम को धमकाने की? हमें लाल आंखें मत दिखाइए। आपकी असफलता की राजनीति से भारत को जलाने की कोशिश भी मत कीजिए। आपको विभाजनकारी भाषा बोलना शोभा नहीं देता। *बंगाल भाजपा अध्यक्ष का गृह मंत्री को लिखा पत्र* सुकांत ने अमित शाह के नाम पत्र में लिखा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज कोलकाता में TMC के छात्र विंग को संबोधित करते हुए भीड़ को उकसाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 'मैंने कभी बदला नहीं चाहा, लेकिन अब, जो करना है वह करो।' ममता का यह बयान राज्य के सर्वोच्च पद से बदले की राजनीति का स्पष्ट समर्थन है। उन्होंने बेशर्मी से राष्ट्र-विरोधी बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि 'याद रखें, अगर बंगाल जलता है, तो असम, बिहार, झारखंड, ओडिशा, और दिल्ली भी जलेंगे।' यह संवैधानिक पद पर बैठने वाले व्यक्ति की आवाज नहीं हो सकती है, यह राष्ट्र-विरोधी की आवाज है। उनका बयान स्पष्ट रूप से धमकाने, हिंसा भड़काने और लोगों के बीच नफरत फैलाने का प्रयास है। अब वे इतने महत्वपूर्ण पद पर बने रहने की हकदार नहीं हैं। उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। जनता के हर सेवक का, खासतौर से ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति का मौलिक कर्तव्य है कि वह शांति को बढ़ावा दे और किसी भी तरह की हिंसा को बढ़ने से रोके। ममता के विचार चिंताजनक हैं और यह पश्चिम बंगाल के नागरिकों की सुरक्षा और राज्य की अखंडता को कमजोर करता है। मैं आपसे विनम्र निवेदन करता हूं कि आप इस गंभीर मामले पर संज्ञान लें और स्थिति को संबोधित करने और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए उपयुक्त कार्रवाई करें। मैं पश्चिम बंगाल के नागरिकों के हितों की रक्षा करने और हमारे राष्ट्र के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए आपकी तरफ से तुरंत और निर्णायक कार्रवाई का इंतजार कर रहा हूं। *ममता ने क्या कहा* ममता ने कहा था, "कुछ लोगों को लगता है कि यह बांग्लादेश है। वे हमारी तरह बात करते हैं और हमारी संस्कृति भी एक जैसी है, लेकिन याद रखिए कि बांग्लादेश अलग देश है और भारत अलग देश है। मोदी बाबू कोलकाता के मामले में अपनी पार्टी का इस्तेमाल करके बंगाल में आग लगवा रहे हैं। अगर आपने बंगाल को जलाया तो असम, उत्तर-पूर्व, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और दिल्ली भी जलेंगे। हम आपकी कुर्सी गिरा देंगे।" दरअसल, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेड में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना के विरोध में छात्र संगठनों ने 27 अगस्त को 'नबन्ना अभियान' विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था।इस दौरान छात्र सचिवालय तक रैली निकाल रहे थे, जहां प्रदर्शन हिंसक हो गया और पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस घटना के विरोध में भाजपा ने 28 अगस्त को 12 घंटे बंद का ऐलान किया था।ममता ने इसी बंद को लेकर भाजपा पर निशाना साधा था।
असम में अब काजी नहीं कर सकेंगे मुस्लिमों की शादी का रजिस्ट्रेशन, बदलेगा 90 साल पुराना कानून

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असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ के कुछ प्रावधानों को रद्द करने वाली है। दरअसल, असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार गुरुवार को विधानसभा में मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रेशन बिल 2024 पेश करेगी। एक बार लागू होने के बाद, यह कानून मुस्लिम विवाह और तलाक को दर्ज करने वाले काजियों की भूमिका को खत्म कर देगा। इससे पहले बुधवार को असम कैबिनेट इस बिल को मंजूरी दे चुकी है। अब इसे सदन में पेश किया जाएगा। 

राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा- बिल में 2 विशेष प्रावधान हैं। पहला- मुस्लिम शादी का रजिस्ट्रेशन अब काजी नहीं सरकार करेगी। दूसरा- बाल विवाह के पंजीकरण को अवैध माना जाएगा। सीएम हिमंत ने कहा कि अब तक काजी नाबालिग लड़कियों की शादियां भी रजिस्टर्ड करते थे। अब ऐसा नहीं होगा। अब बाल विवाह रजिस्ट्रेशन बिल्कुल नहीं होगा। हम बाल विवाह की बुराई को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि नया बिल इस्लामिक निकाह सिस्टम में बदलाव नहीं करेगा। केवल रजिस्ट्रेशन पार्ट में ही बदलाव होगा। शादी और तलाक रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर्ड होंगे।

नए बिल के पास होकर कानून बनने के बाद जिला आयुक्तों और रजिस्ट्रारों को मौजूदा वक्त में 94 काजियों के पास मौजूद रजिस्ट्रेशन के रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेने का अधिकार होगा। जिन्हें 1935 के ब्रिटिश युग के कानून द्वारा वैध बनाया गया था। 90 साल पहले अंग्रेजों के दौर में 1935 के कानून में निकाह और तलाक के लिए रजिस्ट्रेशन का जिक्र किया गया था। इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक बनाया गया था। यह अधिनियम मुस्लिम विवाह और तलाक के पंजीकरण की प्रक्रिया निर्धारित करता था। साल 2010 में इसमें बदलाव किया गया और रजिस्ट्रेशन को ऐच्छिक न रखकर, अनिवार्य किया गया। 1935 के कानून में विशेष स्थिति में कम उम्र में निकाह करने की अनुमति दी जाती।

असम कैबिनेट ने जुलाई की शुरुआत में प्रस्तावित अनिवार्य पंजीकरण कानून के लिए रास्ता साफ करने के लिए असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1935 को निरस्त करने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी थी।1935 के कानून के तहत स्पेशल कंडीशन में कम उम्र में निकाह करने की अनुमति दी जाती थी। जुलाई में जारी इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन रिपोर्ट ने बाल विवाह से निपटने के लिए असम सरकार के प्रयासों की सराहना की। रिपोर्ट में कहा गया कि कानूनी कार्रवाई के जरिए असम में बाल विवाह के मामलों को कम किया है।