राहत: चिकित्सकीय लापरवाही पर अब मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद होगी कार्रवाई

- यूपी में शासन ने जारी की एसओपी, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी की जगह पहले होगी विशेषज्ञों से जांच; डीएम और सीएमओ को भेजे गए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए शासन ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत डॉक्टरों के खिलाफ चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों की जांच के लिए जिला और राज्य स्तर पर मेडिकल बोर्ड गठित किए जाएंगे। शिकायतों की जांच और बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शासन ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों (डीएम) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को निर्देश जारी कर दिए हैं।
शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, चिकित्सकीय लापरवाही से संबंधित शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी उसे जांच के लिए सीएमओ को भेजेंगे। इसके बाद जिला स्तरीय मेडिकल बोर्ड मामले की जांच कर तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की राय के आधार पर तथ्यों का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
- राज्य स्तर पर गठित होगा मेडिकल बोर्ड
चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों की राज्य स्तर पर सुनवाई और परीक्षण के लिए राज्य मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड के अध्यक्ष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक होंगे। बोर्ड में विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा, ताकि मामलों की जांच में चिकित्सकीय और कानूनी पहलुओं का समुचित आकलन किया जा सके।
आदेश के मुताबिक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई) की ओर से नामित फॉरेंसिक मेडिसिन के प्रोफेसर को बोर्ड में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और अन्य मेडिकल कॉलेजों से दो प्रोफेसर सदस्य होंगे। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का एक प्रतिनिधि तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नामित विधि अधिकारी भी बोर्ड के सदस्य होंगे।
- स्वास्थ्य महानिदेशालय के अधिकारी होंगे सदस्य सचिव
राज्य मेडिकल बोर्ड में स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। बोर्ड में चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ विधि अधिकारी की भागीदारी से चिकित्सकीय तथ्यों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
नई एसओपी के तहत चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों में मेडिकल बोर्ड की जांच और रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। इससे ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की राय के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया निर्धारित होगी। हालांकि, बोर्ड की जांच और रिपोर्ट के आधार पर पुलिस की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों पर लागू सटीक कानूनी प्रावधानों की पुष्टि शासनादेश के मूल पाठ से की जानी चाहिए।
परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति 7 नवंबर तक पूरी करने के निर्देश, टीईटी अनिवार्य

- 23 अक्टूबर तक भेजनी होगी वरिष्ठता एवं पात्रता सूची, डायट प्राचार्य की अध्यक्षता में गठित होगी चयन समिति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बेसिक शिक्षा परिषद ने समयसीमा निर्धारित कर दी है। परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को निर्देश जारी करते हुए पदोन्नति की प्रक्रिया 7 नवंबर तक पूरी करने को कहा है। इस प्रक्रिया में शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया गया है।

निर्देशों के अनुसार, सभी जिलों को शिक्षकों की वरिष्ठता सूची 23 अक्टूबर तक उपलब्ध करानी होगी। जिन जिलों में आपत्तियों के निस्तारण के बाद भी वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है, वहां 15 दिन के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके साथ ही जिले में रिक्त पदों, वरिष्ठता सूची और पात्रता सूची से संबंधित विवरण भी निर्धारित समयसीमा के भीतर बेसिक शिक्षा परिषद की ई-मेल पर भेजना होगा।

- टीईटी के स्तर के आधार पर तय होगी पात्रता

पदोन्नति के लिए तैयार की जाने वाली पात्रता सूची में संबंधित शिक्षक के टीईटी उत्तीर्ण होने का विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा। प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करने वाले शिक्षक प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थापन के पात्र होंगे, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करने वाले शिक्षक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थापन के लिए पात्र माने जाएंगे। दोनों स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करने वाले शिक्षक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक, दोनों स्तर के विद्यालयों में पदस्थापन के पात्र होंगे।

- डायट प्राचार्य की अध्यक्षता में बनेगी चयन समिति

पदोन्नति के लिए चयन समिति का गठन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य की अध्यक्षता में किया जाएगा। संबंधित जिले के बीएसए समिति के सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा जिला मुख्यालय स्थित राजकीय बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज की प्रधानाचार्य तथा जिलाधिकारी की ओर से नामित हिंदी, उर्दू या अन्य भाषा के विशेषज्ञ को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

- वरिष्ठता और रिक्त पदों के आधार पर बनेगी सूची

पदोन्नति के लिए शिक्षकों की सूची वरिष्ठता क्रम में तैयार कर उनकी चरित्र पंजिका और आवश्यक अभिलेखों के साथ चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। समिति चयनित अभ्यर्थियों की सूची नियुक्ति प्राधिकारी को भेजेगी। अनुपयुक्त पाए जाने वाले शिक्षकों को सूची से हटाने के बाद उपलब्ध रिक्त पदों के अनुसार वरिष्ठताक्रम में पात्र शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी। पदोन्नति के पात्र शिक्षकों से उनकी वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिक अथवा उच्च प्राथमिक विद्यालय में पदस्थापन के लिए विकल्प भी लिए जाएंगे। परिषद ने सभी बीएसए को निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जा सके।

राहत: चिकित्सकीय लापरवाही पर अब मेडिकल बोर्ड की जांच के बाद होगी कार्रवाई

- यूपी में शासन ने जारी की एसओपी, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी की जगह पहले होगी विशेषज्ञों से जांच; डीएम और सीएमओ को भेजे गए निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए शासन ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत डॉक्टरों के खिलाफ चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों की जांच के लिए जिला और राज्य स्तर पर मेडिकल बोर्ड गठित किए जाएंगे। शिकायतों की जांच और बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शासन ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों (डीएम) और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को निर्देश जारी कर दिए हैं। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, चिकित्सकीय लापरवाही से संबंधित शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी उसे जांच के लिए सीएमओ को भेजेंगे। इसके बाद जिला स्तरीय मेडिकल बोर्ड मामले की जांच कर तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की राय के आधार पर तथ्यों का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

- राज्य स्तर पर गठित होगा मेडिकल बोर्ड

चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े मामलों की राज्य स्तर पर सुनवाई और परीक्षण के लिए राज्य मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड के अध्यक्ष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक होंगे। बोर्ड में विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा, ताकि मामलों की जांच में चिकित्सकीय और कानूनी पहलुओं का समुचित आकलन किया जा सके। आदेश के मुताबिक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई) की ओर से नामित फॉरेंसिक मेडिसिन के प्रोफेसर को बोर्ड में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और अन्य मेडिकल कॉलेजों से दो प्रोफेसर सदस्य होंगे। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) का एक प्रतिनिधि तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से नामित विधि अधिकारी भी बोर्ड के सदस्य होंगे।

- स्वास्थ्य महानिदेशालय के अधिकारी होंगे सदस्य सचिव

राज्य मेडिकल बोर्ड में स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। बोर्ड में चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ विधि अधिकारी की भागीदारी से चिकित्सकीय तथ्यों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।

नई एसओपी के तहत चिकित्सकीय लापरवाही की शिकायतों में मेडिकल बोर्ड की जांच और रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। इससे ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की राय के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया निर्धारित होगी। हालांकि, बोर्ड की जांच और रिपोर्ट के आधार पर पुलिस की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों पर लागू सटीक कानूनी प्रावधानों की पुष्टि शासनादेश के मूल पाठ से की जानी चाहिए।

भयमुक्त वातावरण से बढ़ रही नारी शक्ति की भागीदारी, उत्तर प्रदेश के विकास को मिल रही नई गति

- मां कालरात्रि के स्वरूप का उल्लेख कर सीएम योगी ने महिला सुरक्षा, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और नारी सशक्तीकरण को बताया विकास का आधार

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां कालरात्रि के दिव्य स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि अधर्म, अत्याचार और आसुरी शक्तियों का विनाश तथा भक्तों को अभय प्रदान करना न्याय, साहस और निर्भय समाज की स्थापना का संदेश देता है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और नारी सशक्तीकरण को प्रदेश के विकास से जोड़ते हुए कहा कि भयमुक्त वातावरण महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आर्थिक भागीदारी के लिए आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में माफिया, दंगाइयों और अपराधियों के आतंक से भय एवं अराजकता का वातावरण बना हुआ था, जिसका असर बहन-बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसरों पर भी पड़ता था। उन्होंने कहा कि विगत साढ़े नौ वर्षों में अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत की गई कार्रवाई से कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और भयमुक्त वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया है। सरकार की ओर से इन प्रयासों को महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक जीवन में उनकी बढ़ती भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

- मिशन शक्ति और महिला सुरक्षा की पहल से बढ़ा भरोसा

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए मिशन शक्ति, 1090 हेल्पलाइन, महिला बीट पुलिसिंग और सेफ सिटी परियोजना जैसी पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इनका उद्देश्य महिलाओं को घर से लेकर सड़क, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों और कार्यस्थलों तक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। साथ ही, महिला संबंधी अपराधों की रोकथाम, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने पुलिस रिस्पॉन्स टाइम का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2016 में 65 मिनट रहा पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम घटकर पांच मिनट रह गया है। उनके अनुसार, यह बदलाव आपात परिस्थितियों में पुलिस की त्वरित पहुंच और कानून-व्यवस्था की जवाबदेही को दर्शाता है। सुरक्षित वातावरण का प्रभाव महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर भी पड़ रहा है। सुरक्षा के प्रति विश्वास बढ़ने से महिलाएं शिक्षा, रोजगार और अन्य गतिविधियों में अधिक सक्रिय भागीदारी के अवसर प्राप्त कर रही हैं। नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी इस बदलाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

- 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हुई महिला श्रम बल भागीदारी

मुख्यमंत्री ने महिला श्रम बल भागीदारी दर में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दर 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने की दिशा को रेखांकित करता है। रोजगार और उद्यमिता के अवसरों का विस्तार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी सहायक हो सकता है। महिलाओं की भागीदारी अब कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र और उद्यमिता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण होती जा रही है। कौशल विकास, स्वरोजगार और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे उनकी आय के अवसरों का विस्तार होने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होती हैं।

- नारी शक्ति की भागीदारी से अर्थव्यवस्था को मिल रहा संबल

मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी सशक्तीकरण केवल सामाजिक न्याय और समान अवसरों का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति से भी जुड़ा है। महिलाओं की शिक्षा, कौशल, रोजगार और उद्यमिता में बढ़ती भागीदारी से परिवारों की आय, उत्पादकता और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है। इस दृष्टि से महिला सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन को प्रदेश के समावेशी विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय में तीन गुनी वृद्धि का भी उल्लेख किया। प्रदेश की आर्थिक प्रगति के संदर्भ में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी एक महत्वपूर्ण पहलू है। हालांकि, आर्थिक वृद्धि में महिला श्रम बल की भागीदारी का सटीक योगदान निर्धारित करने के लिए संबंधित अवधि के आधिकारिक आर्थिक और श्रम संबंधी आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण आवश्यक है।

- माँ कालरात्रि का संदेश : भय से मुक्ति, न्याय और सशक्तीकरण

मुख्यमंत्री ने माँ कालरात्रि के स्वरूप से प्रेरणा लेते हुए कहा कि अन्याय और भय का अंत तथा न्याय एवं साहस की स्थापना ही सशक्त समाज का आधार है। महिला सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, रोजगार और स्वावलंबन के लिए किए जा रहे प्रयास इसी व्यापक उद्देश्य से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को सुरक्षित वातावरण और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलते हैं, तो उनकी प्रतिभा और क्षमता का लाभ परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था सभी को मिलता है। प्रदेश की नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। महिला सुरक्षा से आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भरता से आर्थिक भागीदारी तक का यह संबंध प्रदेश में समावेशी विकास की संभावनाओं को रेखांकित करता है।

सपा की किसान विरोधी सोच से हर कोई वाकिफ : पंकज चौधरी
- मुख्यमंत्री योगी ने बढ़ाया गन्ने का मूल्य, सपा ने किए खोखले वादे; पंकज चौधरी ने अखिलेश को घेरा
- 2027 में हार का डर, इसलिए चुनाव आयोग पर निशाना साध रहे अखिलेश; दयाशंकर सिंह का सपा पर तीखा प्रहार
- पिछड़ों-दलितों का सपा में कोई सम्मान नहीं, संजय निषाद का अखिलेश पर हमला


लखनऊ, 16 अक्टूबर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के गन्ना किसानों, PDA और चुनाव आयोग को लेकर दिए गए बयान पर NDA नेताओं ने तीखा पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह और संजय निषाद ने अलग-अलग मुद्दों पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव को घेरा। पंकज चौधरी ने कहा कि पूरा प्रदेश सपा की किसान विरोधी सोच से वाकिफ है। दयाशंकर सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव को 2027 में हार का डर सता रहा है, इसीलिए वो अभी से चुनाव आयोग पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी में पिछड़ों और दलितों का कोई सम्मान नहीं है।
- सपा राज में गन्ना किसानों को भुगतान के लिए आंदोलन करना पड़ता था
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने किसानों के लिए काम करके दिखाया है। उन्होंने कई बार गन्ने का मूल्य बढ़ाया है, जबकि सपा सरकार के दौरान किसानों से केवल खोखले वादे किए जाते थे। वहीं, कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में गन्ना किसान सबसे ज्यादा परेशान थे और उन्हें भुगतान के लिए आंदोलन करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज गन्ना किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है।
दयाशंकर सिंह ने कहा कि सपा ने पश्चिमी यूपी में जिस तरह से जाटों का अपमान किया है। हिंदुओं के साथ अत्याचार किया है। उसका खामियाजा उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे को कोई सनातनी नहीं भूला है। पश्चिम में और पूरे प्रदेश में सपा का सफाया निश्चित है।
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा कि आज सपा के नेता किसानों की बात कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सपा सरकार के समय के लंबित भुगतान भी मौजूदा सरकार में किए गए थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव किसानों के मुद्दे पर जितना अधिक बोलेंगे, उतना ही फंसते जाएंगे।
- पिछड़ों-दलितों का सपा में कोई सम्मान नहीं
संजय निषाद ने कहा कि पिछड़े और दलित पहले सपा के साथ जुड़े थे, लेकिन अखिलेश यादव की नजर में उनका कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा केवल एक ही जाति और धर्म को महत्व देती है। इसी वजह से अब पिछड़े और दलित सपा से दूर हो गए हैं। संजय निषाद ने कहा कि भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के सिद्धांत पर चलती है।
शिक्षा की नैया डुबोने वाली पार्टी है सपा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- गाजियाबाद में शिक्षक-स्नातक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने भाजपा के दोनों एमएलसी प्रत्याशियों के लिए मांगा समर्थन
- शिक्षकों के लिए संस्थान का भेद नहीं, बेसिक से तकनीकी और स्ववित्तपोषित शिक्षकों तक चिकित्सा सुविधा देने का भरोसा
- सपा राज में आजम खान के विश्वविद्यालय के लिए अलग मानक, दूसरे विश्वविद्यालयों की मान्यता में खड़ी की जाती थीं बाधाएं

गाजियाबाद, 16 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि सपा शिक्षा पर कितना भी उपदेश दे, उसका भरोसा नदी किनारे बैठे उस मगरमच्छ जैसा है, जो किसी को अपनी पीठ पर बैठाकर नदी पार कराने की बात करता है। सपा शिक्षा की नैया पार लगाने वाली नहीं, उसे डुबोने वाली पार्टी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की चार सरकारों में शिक्षा, रोजगार और विकास के सामने संकट खड़ा हुआ। उस समय दंगे, कर्फ्यू और अराजकता प्रदेश की पहचान बन गए थे।
मुख्यमंत्री योगी शुक्रवार को गाजियाबाद में मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी श्रीचंद शर्मा और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी दिनेश गोयल के समर्थन में आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिक्षकों के लिए चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, विश्वविद्यालयों की स्थापना और सरकारी भर्तियों का उल्लेख किया। साथ ही दोनों प्रत्याशियों को फिर विधान परिषद भेजने की अपील की।
- रामलीलाओं के आयोजन को लेकर सपा पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि गाजियाबाद आते समय रास्ते में कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी रामलीलाएं होती दिखाई दीं। सपा सरकार होती तो अब तक दंगे शुरू हो चुके होते और कर्फ्यू लगा होता। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा के पंडाल और अन्य धार्मिक आयोजन भी नहीं हो पाते थे। आज गाजियाबाद से हरिद्वार के बीच साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु कांवड़ लेकर निकलते हैं। श्रद्धालु बाबा औघड़नाथ, दुग्धेश्वरनाथ और पुरा महादेव सहित विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को बिना भेदभाव अपनी आस्था व्यक्त करने का अवसर मिलना चाहिए।
- शिक्षक का संस्थान नहीं, राष्ट्र निर्माण में योगदान महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शिक्षक बेसिक शिक्षा का हो या माध्यमिक, उच्च, तकनीकी अथवा चिकित्सा शिक्षा का, सभी को चिकित्सा सुविधा मिलेगी। वित्तपोषित, प्रबंधकीय व्यवस्था और स्ववित्तपोषित संस्थानों के शिक्षक भी इसमें शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक युग निर्माता और राष्ट्र निर्माता है। वह ऐसी पीढ़ियां तैयार करता है, जिनकी ऊर्जा प्रदेश की प्रगति में काम आती है। श्रीचंद शर्मा और दिनेश गोयल जब भी शिक्षकों तथा स्नातकों की समस्याएं लेकर आए, उनका समाधान किया गया।
- विश्वविद्यालयों की मान्यता में भेदभाव का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सरकार में शिक्षा संस्थानों के लिए समान मानक नहीं थे। आजम खान विश्वविद्यालय बनाएं तो उनके लिए अलग नियम होते थे, जबकि ग्लोबल यूनिवर्सिटी को मान्यता नहीं दी जाती थी। भाजपा सरकार ने सभी के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू की। सहारनपुर में मां शाकंभरी, अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह, मुरादाबाद में गुरु जंभेश्वर, आजमगढ़ में महाराज सुहेलदेव, बलरामपुर में मां पाटेश्वरी और मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित किए गए। मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय बनाया गया। लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, गोरखपुर में आयुष विश्वविद्यालय और कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय का निर्माण भी कराया गया।
- नौकरी के नाम पर गड़बड़ी करने वालों के लिए जेल
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपराध और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। युवाओं की नौकरी से खिलवाड़ करने वालों को जेल भेजने और उनकी संपत्ति जब्त करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने दावा किया कि साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। यूपी पुलिस में 32,600 से अधिक अभ्यर्थियों के परिणाम जारी हुए हैं। 42 हजार से अधिक होमगार्ड की भर्ती के परिणाम भी आ चुके हैं। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में 120 स्टार्टअप थे। अब इनकी संख्या 24 हजार से अधिक हो चुकी है। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बने हैं।
- पीडीए के नाम पर टिकट वितरण को लेकर कटाक्ष
मुख्यमंत्री ने विधान परिषद चुनाव में सपा के प्रत्याशी चयन पर सवाल उठाए। कहा कि सपा के पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी है। पहले अपने चाचा को टिकट दिया और फिर मुंबई के एक धनकुबेर के हाथ टिकट गिरवी रख दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा टिकट वितरण में भी अपने घोषित सिद्धांतों पर नहीं चल रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन पिछले राज्यसभा चुनाव से बेहतर होगा।
- पश्चिमी यूपी में सड़क और रेल परियोजनाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली-मेरठ के बीच 12 लेन एक्सप्रेसवे और नमो भारत रैपिड रेल से क्षेत्र में आवागमन सुगम हुआ है। गंगा एक्सप्रेसवे से मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा का समय घटेगा। उन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मेट्रो विस्तार और वाराणसी रोपवे परियोजना का भी उल्लेख किया। साथ ही काशी विश्वनाथ धाम, विंध्यवासिनी धाम, अयोध्या में श्रीराम मंदिर, ब्रज क्षेत्र, शुकतीर्थ और मां शाकंभरी शक्तिपीठ के विकास को विरासत और विकास का उदाहरण बताया।
-  23 अक्टूबर को मतदान के लिए अवकाश
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 23 अक्टूबर को सुबह आठ से शाम चार बजे तक मतदान होगा। मतदाताओं के लिए अवकाश रहेगा। उन्होंने मतदान केंद्र पर उपलब्ध कराई जाने वाली कलम से मतपत्र पर वरीयता अंकित करने की अपील की। शिक्षक एमएलसी प्रत्याशी श्रीचंद शर्मा ने कहा कि प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक के शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये की कैशलेस चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है। वित्तविहीन शिक्षकों को राजकीय सम्मान दिलाने और शिक्षामित्रों, अनुदेशकों तथा व्यावसायिक शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने का काम भी किया गया है।
- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
सम्मेलन में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल व नरेंद्र कश्यप, राज्यमंत्री बृजेश सिंह, जसवंत सैनी, दिनेश खटीक व केपी मलिक, भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं राज्यसभा सदस्य रामप्रताप सिंह चौहान, सांसद डॉ. महेश शर्मा, भोला सिंह, अतुल गर्ग, राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी और सुरेंद्र नागर सहित अन्य जनप्रतिनिधि व पदाधिकारी मौजूद रहे।
पश्चिम ही नहीं, पूरे यूपी में सपा की हालत खराब : राजभर
- अखिलेश यादव झूठ की दुकान हैं'… गन्ना किसानों के भुगतान पर राजभर ने दिलाई सपा शासन की याद
- 'अखिलेश ने प्रमोशन में आरक्षण खत्म किया, दलितों पर गुंडागर्दी की'… राजभर ने पूछा- सपा के साथ क्यों जाएंगे दलित?
- सपा के फर्जी वोटरों का खेल खत्म हुआ इसलिए SIR पर झूठ फैला रहे अखिलेश, राजभर का बड़ा हमला

लखनऊ, 16 अक्टूबर। यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गन्ना किसानों का मुद्दा उठाया था और पश्चिमी यूपी में सपा को मजबूत करने की बात कही थी। इस पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा कि पश्चिम ही नहीं, पूरब समेत पूरे प्रदेश में सपा की हालत खराब है। गन्ना किसानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सपा और अखिलेश यादव के शासनकाल में किसानों के साथ जितना अन्याय हुआ, उतना कभी नहीं हुआ।
- सपा राज में महीनों तक नहीं होता था गन्ना किसानों का भुगतान
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव झूठ की दुकान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान गन्ना किसानों के साथ जितना अन्याय हुआ, उतना कभी नहीं हुआ। किसानों को महीनों तक भुगतान नहीं मिलता था और वे आत्महत्या करने को मजबूर थे। राजभर ने कहा कि योगी सरकार में गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान हुआ है और अब 14 दिनों के भीतर भुगतान किया जा रहा है।
- पूरे यूपी में सपा की हालत खराब: राजभर
राजभर ने कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में सपा की हालत खराब है। उन्होंने कहा, 'पूरब में ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद और अनुप्रिया पटेल जी साइकिल की हवा निकाल रहे हैं।' उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी यूपी में सपा का ऐसा हाल होगा, जिसकी उसने उम्मीद भी नहीं की होगी।
- दलित-पिछड़ों के सपा से जुड़ने के दावे पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव के दलित और पिछड़े नेताओं के समाजवादी पार्टी से जुड़ने के दावे पर राजभर ने सपा के पुराने कार्यकाल का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि दलित सपा के साथ क्यों जुड़ेंगे? राजभर ने कहा कि सपा सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण खत्म किया। सपा सरकार के दौरान दलितों के साथ तानाशाही और गुंडागर्दी हुई। बाबा साहब डॉ. आंबेडकर के नाम पर बने जिलों और पार्कों के नाम बदल दिए गए। राजभर ने सवाल किया कि क्या दलित इन बातों को भूल जाएंगे? गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि मायावती की हत्या की योजना समाजवादी पार्टी के लोगों ने बनाई थी।
- '2027 में सपा का सफाया तय'
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव हताश हो गए हैं और उन्हें पता है कि 2027 में सपा का सफाया तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज सपा चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है, जबकि उसका इतिहास फर्जी मतदान कराने का रहा है। राजभर ने कहा कि SIR से अखिलेश यादव को इसलिए दिक्कत हो रही है, क्योंकि उन्हें पता है कि अब सपा के फर्जी वोटर मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाएंगे।
अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने का सपना देख रही शक्तियां: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

- मुख्यमंत्री योगी ने एक्स पर पोस्ट कर साधा निशाना, कहा- लोकतंत्र में सत्ता का रास्ता जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं

- बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का स्वप्न देखने वालों पर प्रहार, युवाओं को अराजकता का औजार बनाने की कोशिश

- चुनाव सुधार और न्याय के नाम पर देश में अस्थिरता के बीज बोने का आरोप, कहा- षड्यंत्रों के अंधड़ से नहीं हिलेगा भारतीय लोकतंत्र

- सत्ता की भूख मिटाने के लिए नहीं, राष्ट्र निर्माण के लिए है युवाशक्ति, अराजकता की सियासी साजिश नहीं होने देंगे सफल

- राजनीति के मारीचों-कालनेमियों को जनता पहले ही सत्ता से कर चुकी है दूर, अब अराजकता फैलाकर कुर्सी हथियाने की कोशिश

लखनऊ, 16 अक्टूबर 2026।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश में अराजकता फैलाकर सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वाली शक्तियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का मार्ग जनादेश से निकलता है, अराजकता से नहीं। बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का स्वप्न देखने वाली शक्तियां युवाओं को राष्ट्र निर्माण के बजाय अराजकता की ओर धकेलना चाहती हैं। चुनाव सुधार का मुखौटा लगाकर, न्याय का नारा देकर और लोकतंत्र की दुहाई देकर देश में अस्थिरता के बीज बोने की कोशिश हो रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का लोकतंत्र जनविश्वास की मजबूत जड़ों पर खड़ा है। इसे किसी षड्यंत्र से हिलाया नहीं जा सकता।

मुख्यमंत्री योगी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन का स्वप्न देखने वाली शक्तियां युवाओं के हाथों में राष्ट्र निर्माण की मशाल के स्थान पर अराजकता के औजार थमाना चाहती हैं। उनका इशारा उन शक्तियों की ओर था, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय अराजकता के सहारे सत्ता तक पहुंचने का सपना देख रही हैं।

- चुनाव सुधार का मुखौटा लगाकर अस्थिरता फैलाने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने चुनाव सुधार, न्याय और लोकतंत्र के नाम पर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार का मुखौटा, न्याय का नारा और लोकतंत्र की दुहाई देकर देश में अस्थिरता के बीज बोने वालों को समझना होगा कि भारत का लोकतंत्र जन विश्वास की जड़ों पर खड़ा विशाल वटवृक्ष है। षड्यंत्रों के अंधड़ उसे हिला नहीं सकते। मुख्यमंत्री का संदेश था कि सत्ता परिवर्तन का एकमात्र लोकतांत्रिक रास्ता जनता का जनादेश है, न कि अराजकता का सहारा लेना।

-राष्ट्र निर्माण के लिए है युवाशक्ति, सत्ता की भूख मिटाने के लिए नहीं

मुख्यमंत्री योगी ने युवाओं को अराजकता की राजनीति में इस्तेमाल करने की कोशिशों पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवाशक्ति देश का भविष्य संवारने के लिए है, किसी की सत्ता की भूख मिटाने के लिए नहीं। राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने उन शक्तियों पर निशाना साधा, जो अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए युवाओं को अराजकता का औजार बनाना चाहती हैं।

- मारीचों- कालनेमियों को पहचान चुकी है जनता

मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में राजनीतिक विरोधियों के लिए मारीच और कालनेमि का उल्लेख करते हुए तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जनता-जनार्दन ने राजनीति के इन मारीचों -कालनेमियों को पहचानकर ही सत्ता से दूर रखा है। अब ये देश को अराजकता की आग में झोंककर कुर्सी हथियाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश ऐसी किसी भी सियासी साजिश को सफल नहीं होने देगा।

नवरात्र में देवी मंदिरों से अखिलेश ने बनाई दूरी, यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा: प्रकाश पाल

- सपा मुखिया पर बरसे भाजपा के राज्यसभा सांसद - 'मस्जिद ले जाकर पत्नी का अपमान करा सकते हैं, सम्मान से देवी दर्शन से है परहेज'

- नवरात्र में देवी मंदिरों से विपक्ष की दूरी पर भाजपा का राहुल-अखिलेश पर प्रहार, कहा- सनातन विरोधी चेहरे फिर बेनकाब, शक्ति पर भारी पड़ेगा अहंकार

लखनऊ, 16 अक्टूबर। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ इंडी गठबंधन पर सनातन धर्म के प्रति दुर्भावना रखने और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने शुक्रवार को कानपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से कहा कि नवरात्र के पावन पर्व पर पूरा देश देवी भक्ति में लीन है। विपक्षी नेता जानबूझकर सनातन की आस्था के केंद्रों से दूरी बनाए हुए हैं।

- नवरात्र में देवी मंदिरों से अखिलेश ने बनाई दूरी

भाजपा सांसद प्रकाश पाल ने कहा कि मौजूदा समय में पूरा सनातन समाज शारदीय नवरात्र का महापर्व बड़े ही धूमधाम और श्रद्धाभाव से मना रहा है। नवरात्र के पहले दिन से ही सभी देवी मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है और लोग आस्था के साथ दर्शन-पूजन कर रहे हैं। इसके विपरीत इंडी गठबंधन के प्रमुख नेता चाहे वह अखिलेश यादव हों या राहुल गांधी... अब तक किसी भी देवी मंदिर में नजर नहीं आए हैं। विशेष रूप से अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसी भी देवी मंदिर में उनको अब तक नहीं देखा गया है।

- तुष्टिकरण की पराकाष्ठा पर सपा और उसके सहयोगी दल

प्रकाश पाल ने तीखे शब्दों में कहा कि सपा और उसके सहयोगी अन्य विपक्षी दलों के नेता सनातन धर्म से दूरी बनाने की होड़ में इस कदर आगे बढ़ चुके हैं कि वे तुष्टिकरण में पूरी तरह व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अपनी पत्नी को अपने साथ लेकर दिल्ली की मस्जिद में जाकर अपमान तो करवा सकते हैं, लेकिन सम्मान के साथ किसी देवी मंदिर में जाना उन्हें गवारा नहीं है। पूरा सनातन समाज उनकी इस तुष्टिकरण की नीति को बहुत ध्यान से देख रहा है।

- राहुल गांधी के शक्ति वाले बयान पर किया पलटवार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि राहुल गांधी ने कहा था कि हिंदू धर्म में जो शक्ति है, मैं उसे खत्म करना चाहता हूं। पाल ने कहा कि हमारे सनातन धर्म में शक्ति का स्वरूप ही देवी शक्ति और नारी शक्ति है, जिसे खत्म करने की बात विपक्षी नेता करते हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जिस शक्ति को महिषासुर, चंड और मुंड जैसे असुर खत्म नहीं कर पाए, उसे ये राजनीतिक दल क्या खाक खत्म करेंगे। शक्ति की महिमा न्यारी है और वह चंड-मुंड पर सदैव भारी है।

नैमिष नगर से आईआईएम रोड के मध्य ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण शुरू
- एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने स्थल निरीक्षण करके विकास कार्यों में तेजी लाने के दिये निर्देश
- 9.9 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर आईआईएम रोड से नैमिष नगर होते हुए रैथा रोड से कनेक्ट होगा

लखनऊ। किसान पथ से आईआईएम रोड के मध्य आकार ले रहा ग्रीन कॉरिडोर अब सीधा नैमिष नगर से कनेक्ट होगा। इसके लिए आईआईएम रोड (घैला पुल) से नैमिष नगर के बीच 9.9 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर रूट का काम 53 करोड़ रूपये की लागत से शुरू हो गया है।
   लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने गुरूवार को स्थल निरीक्षण करके विकास कार्यों का जायजा लिया। इसके अंतर्गत 24 मीटर चौड़ी बंधा रोड व लिंक रोड निर्मित की जाएगी। इससे बड़ी आबादी को सुगम यातायात के लिए मुख्य मार्ग उपलब्ध होगा। एलडीए ने नैमिष नगर योजना केे ब्रह्म खण्ड व भूमि खण्ड (फेज-1 एवं 2) में कुल 1673 भूखण्डों के लिए पंजीकरण खोला हुआ है। जिसके दृष्टिगत इन दोनों सेक्टरों में तेजी से विकास कार्य कराये जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने सर्वप्रथम ग्राम-पलहरी में बने साइट ऑफिस में बैठक करके विकास कार्यों की समीक्षा की। इसमें पाया गया कि वर्तमान में कुल 16 निविदाओं के माध्यम से सड़क, सीवर, वॉटर लाइन एवं ड्रेनेज आदि के कार्य कराये जा रहे हैं। स्थल निरीक्षण में सभी स्थानों पर विकास कार्य प्रचलित पाया गया। 
   उपाध्यक्ष ने निर्देश दिये कि योजना के फेज-1 में आने वाले सभी सेक्टरों में सेक्टोरल रोड का कार्य टेंडर कराकर शुरू करा दिया जाए। साथ ही जिन 02 सेक्टरों में भूखण्डों के लिए पंजीकरण खोले गये हैं, उनमें सड़क निर्माण का कार्य बरसात से पहले पूर्ण करा लिया जाए। निरीक्षण में मुख्य अभियंता मानवेन्द्र सिंह, एसडीएम संगीता राघव, जोनल अधिकारी अतुल कृष्ण सिंह, अधिशासी अभियंता अजीत कुमार एवं नीरज कुमार, प्रभारी अधिशासी अभियंता विशाल यादव समेत अन्य अधिकारी व अभियंता उपस्थित रहे।
- कनेक्टिंग रोड होगी 24 मीटर चौड़ी
आईआईएम से मुबारकपुर चौराहा होते हुए नैमिष नगर योजना को जोड़ने वाली सड़क का चौड़ीकरण कराया जाएगा। वर्तमान में यह सड़क लगभग 10 मीटर चौड़ी है, जबकि उक्त रूट पर ट्रैफिक का काफी लोड रहता है। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने योजना की कनेक्टिविटी को और अधिक बेहतर बनाने के लिए इस सड़क को 24 मीटर चौड़ी करने के निर्देश दिये हैं।
- गांवों में कराये जाएंगे अवस्थापना के कार्य
नैमिष नगर योजना में आ रहे गांवों मेें एलडीए अवस्थापना के कार्य कराएगा। इस क्रम में उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने सबसे पहले भूमि खण्ड एवं ब्रहम खण्ड के बीच आ रहे ग्राम-सैदापुर व कोडरी भौली में विकास कार्य शुरू कराने के निर्देश दिये हैं।