पेशवा वंशज की मौजूदगी में लखनऊ में हुआ डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के दो पुस्तकों का लोकार्पण
संजीव सिंह बलिया। जनपद के वरिष्ठ साहित्यकार, चिंतक एवं 25 ग्रंथों के रचनाकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो कृतियों के लखनऊ में हुए भव्य लोकार्पण से बलिया के बुद्धिजीवी एवं साहित्यिक वर्ग में हर्ष का माहौल है। हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग में आयोजित समारोह में उनकी कृतियों ‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ का लोकार्पण हुआ। समारोह में देश के ख्यातिलब्ध साहित्यकारों, विद्वानों और गणमान्य लोगों ने डॉ. उपाध्याय की लेखकीय उपलब्धि की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। विशेष रूप से पेशवा बाजीराव के वंशज एवं समारोह के मुख्य अतिथि श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने ‘संक्रान्ति का संहार’ की सराहना करते हुए कहा कि डॉ. उपाध्याय ने इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय को साहित्य के केंद्र में लाने का उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार जब ऐतिहासिक पात्रों को संवेदना, संघर्ष और मानवीय संदर्भों के साथ समाज के सामने प्रस्तुत करता है तो वह उन्हें जनस्मृति में पुनर्जीवित करता है। उन्होंने पेशवा परंपरा और अपने पूर्वजों से जुड़े ऐतिहासिक पात्रों को साहित्य के माध्यम से सामने लाने के लिए डॉ. उपाध्याय के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्य वक्ता एवं आलोचक डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ ने डॉ. उपाध्याय की ऐतिहासिक लेखन-दृष्टि और शोधपरक साधना की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक लेखन केवल घटनाओं और तिथियों का संकलन नहीं, बल्कि स्रोतों की पड़ताल, पात्रों की मानसिकता को समझने और तत्कालीन परिवेश के पुनर्निर्माण की कठिन प्रक्रिया है। ‘संक्रान्ति का संहार’ में यह अध्ययनशीलता और शोध-दृष्टि स्पष्ट दिखाई देती है। ख्यातिलब्ध कथाकार महेन्द्र भीष्म ने डॉ. उपाध्याय की लेखकीय यात्रा को आचार्य चतुरसेन शास्त्री की ऐतिहासिक उपन्यास परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि इतिहास को शोध, कथात्मकता और मानवीय संवेदना के साथ प्रस्तुत करने की परंपरा को डॉ. उपाध्याय अपने समय की आवश्यकताओं और अपनी विशिष्ट वैचारिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। बीज वक्ता डॉ. जयप्रकाश तिवारी ने ‘संक्रान्ति का संहार’ को पानीपत के तृतीय युद्ध की मात्र ऐतिहासिक गाथा न मानकर इतिहास का सांस्कृतिक पुनर्मूल्यांकन बताया। उन्होंने विट्ठल, कल्याणी, माधव और वेणी जैसे पात्रों को इतिहास के गुमनाम नायकों का प्रतीक बताते हुए कहा कि कृति में सामूहिक राष्ट्रबोध, सांस्कृतिक अस्मिता और स्वराज्य के लिए त्याग एवं बलिदान का संदेश उभरता है। पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. अनिल मिश्र ने ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ को भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक विश्व के बीच वैचारिक सेतु बताया। वहीं डॉ. नरेन्द्र भूषण ने हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी को व्यवहार और लेखन में प्राथमिकता देने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता निर्भय नारायण तथा संचालन डॉ. ममता पंकज ने किया। डॉ. उपाध्याय की इस उपलब्धि पर जनपद के साहित्यिक एवं बौद्धिक वर्ग ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि बलिया की धरती की साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने में डॉ. उपाध्याय की निरंतर सक्रियता महत्वपूर्ण है। दो नई कृतियों का राजधानी लखनऊ में प्रतिष्ठित मंच पर लोकार्पण होना जनपद के लिए भी गौरव का विषय है। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की इस उपलब्धि पर डॉ जनार्दन राय, डॉ गणेश पाठक, डॉ अशोक सिंह, डॉ मनोज कुमार, राधेश्याम यादव, संतोष कुमार वर्मा, अवध बिहारी मितवा, तारकेश्वर मिश्र राही, तेजन सिंह यादव, अजय पांडेय, बड़ेलाल यादव, वीरेंद्र प्रताप यादव, अशोक कन्नौजिया, सत्येंद्र कुमार राजभर, मुकेश चंचल आदि ने बधाई देते हुए कहा कि इतिहास, भारतीय संस्कृति और ज्ञान-परंपरा को साहित्य के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का उनका प्रयास सराहनीय है। उन्होंने दोनों कृतियों के व्यापक पाठकीय स्वीकार और उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की। बताते चलें कि डॉ. विद्यासागर उपाध्याय बलिया के बहुआयामी साहित्यकार एवं चिंतक हैं और अब तक 25 ग्रंथों की रचना कर चुके हैं। उनकी रचनाओं में इतिहास, दर्शन, भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृति और समकालीन सामाजिक सरोकारों के विविध पक्षों का समावेश दिखाई देता है
पेड़ के नीचे खड़े चार युवकों पर गिरी आकाशीय बिजली, दो की मौत कसेसर-कसौंडर नहर मार्ग पर हादसा, दो युवक झुलसे; निजी अस्पताल में चल रहा इलाज
संजीव सिंह बलिया। भीमपुरा थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर तेज बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य युवक झुलसकर घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, सोमवार को कसेसर में साप्ताहिक बाजार लगा था। इसी दौरान कसेसर-कसौंडर नहर मार्ग के पास अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए कुछ लोग एक दुकान के पास स्थित पेड़ के नीचे खड़े हो गए। इसी बीच तेज आवाज के साथ पेड़ पर आकाशीय बिजली गिर गई, जिसकी चपेट में वहां खड़े चार युवक आ गए। हादसे में कसौंडर निवासी रंजीत कुमार (32) और सिकंदरापुर निवासी अनुराग कुमार उर्फ गोलू की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं छोटू कुमार (30) समेत एक अन्य युवक झुलसकर घायल हो गया। दोनों घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। स्थानीय रिपोर्ट में भी इस घटना में दो युवकों की मौत और एक युवक के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि की गई है। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। आसपास मौजूद लोगों ने हादसे की जानकारी मृतकों और घायलों के परिजनों को दी। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंच गए। दोनों युवकों की मौत की खबर सुनकर परिवारों में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना पर भीमपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना अध्यक्ष रंजीत विश्वकर्मा ने बताया कि दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले में आवश्यक कार्रवाई कर रही है।
नगरा पचपेड़वा छठ घाट पर गूंजा संगठनात्मक एकजुटता का संदेश, विहिप ने मनाया स्थापना दिवस
अमर बहादुर सिंह नगरा, बलिया। विश्व हिंदू परिषद (विहिप), रसड़ा-बलिया के तत्वावधान में नगर पंचायत नगरा के पचपेड़वा छठ घाट पर रविवार को स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भारी उपस्थिति रही। इस अवसर पर संगठन की विचारधारा, सामाजिक दायित्व और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष राजीव सिंह चंदेल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में मंगलदेव चौबे मौजूद रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि डा. विजय नारायण सिंह गोपाल ने संबोधित किया। वक्ताओं ने हिंदू समाज को संगठित होने और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। समारोह में भानु पांडेय, दीपक गुप्ता, श्रृषि वर्मा, रामचन्द्र माली, अरुण सिंह, पीएल पांडेय, विशाल गुप्ता, अजीत सिंह डिम्पू, सोनू गुप्ता और संजीत शर्मा सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री अरविंद मिश्रा ने किया। आयोजन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मुंशी यादव को जिला उपाध्यक्ष श्रीमती सरोज देवी एवं मातृशक्ति जिला संयोजिका श्रीमती मिरजा सिंह द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
Instagram पर बाल यौन शोषण विज्ञापनों का मामला, NCPCR और MeitY की Meta पर चौतरफा घेराबंदी
Amar Bahadur Singh Nagra Ballia सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta (Instagram और Facebook) भारत में गंभीर कानूनी और प्रशासनिक संकट का सामना कर रहा है। यह पूरा मामला Instagram पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री (CSEAM) को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के प्रदर्शन से जुड़ा है। मामला क्या है और खुलासे में क्या सामने आया? * BBC की पड़ताल: BBC की एक विशेष जाँच में यह उजागर हुआ कि Instagram पर भारत में CSEAM को बढ़ावा देने वाले सशुल्क (Paid) विज्ञापन दिखाए जा रहे थे। * संगीन अपराध: BBC द्वारा बनाए गए एक टेस्ट अकाउंट पर दर्जनों ऐसे विज्ञापनों की पुष्टि हुई। भारत में ऐसी सामग्री का प्रचार और वितरण कानूनी रूप से गंभीर संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) है। * TTP की रिपोर्ट: अमरीकी गैर-सरकारी संस्था 'टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट' (TTP) की रिपोर्ट के अनुसार, Meta का AI मॉडरेशन सिस्टम इन विज्ञापनों को रोकने में विफल रहा। TTP ने यह भी खुलासा किया कि यूज़र्स द्वारा रिपोर्ट किए गए 57% विज्ञापनों पर Meta ने यह कहकर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया कि वे उनके नियमों का उल्लंघन नहीं करते। Meta का पक्ष और बचाव * ऑटोमेटेड सिस्टम की सीमाएँ: Meta ने अपने बयान में कहा कि वे हर साल लाखों उल्लंघनकारी खातों को हटाते हैं, लेकिन कोई भी AI सिस्टम 100% सटीक नहीं हो सकता। * अपराधियों का सेंध लगाना: कंपनी का दावा है कि पेशेवर अपराधी लगातार उनकी सुरक्षा प्रणालियों में सेंध लगाने के रास्ते तलाशते रहते हैं। NCPCR की कार्रवाई और कानूनी अधिकार राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए 3 जुलाई को नोटिस भेजा और 9 सितंबर को Meta India के शीर्ष नेतृत्व (MD और कंट्री हेड) को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए समन जारी किया। | कानूनी पहलू | विवरण | |---|---| | मूल कानून | बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005। | | प्राप्त शक्तियाँ | दंड प्रक्रिया संहिता (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) के तहत दीवानी अदालत (Civil Court) की शक्तियाँ। | | जाँच का दायरा | निजी संस्थाओं से बाल सुरक्षा पर स्पष्टीकरण मांगना, एजेंसियों से रिपोर्ट तलब करना और POCSO अधिनियम के तहत समीक्षा करना। | MeitY और NHRC का रुख * मंत्रालय की सख्ती: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भी Meta को कड़ा नोटिस जारी किया और वैश्विक सार्वजनिक मामलों के निदेशक जोएल कपलान को तलब किया। * NHRC की समानांतर जाँच: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में MeitY और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट माँगी है। NHRC इस बात की जाँच कर रहा है कि प्लेटफ़ॉर्म का एल्गोरिदम ऐसी सामग्री से कमाई या उसके प्रचार में किस हद तक शामिल है।
न्यूयॉर्क ने AI पर खींची लक्ष्मण रेखा, भारत के स्कूलों के सामने बड़ा सवाल—‘AI सिखाएं या स्क्रीन रोकें?’ दुनिया AI की ओर बढ़ रही है,
अमर बहादुर सिंह  बलिया शहर! नई दिल्ली:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से शिक्षा का हिस्सा बन रहा है। विद्यार्थी सवालों के जवाब खोजने, नोट्स बनाने, असाइनमेंट तैयार करने और नई जानकारी समझने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी ओर स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो और ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के स्क्रीन टाइम को लगातार बढ़ा रहे हैं। इसी दोहरी चुनौती के बीच न्यूयॉर्क के सरकारी स्कूलों में AI और स्क्रीन टाइम को लेकर अपनाई गई सख्त नीति भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी बनकर सामने आई है। भारत की चुनौती न्यूयॉर्क से अलग अमेरिका के कई स्कूलों में विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल संसाधन पहले से उपलब्ध हैं, जबकि भारत के सरकारी स्कूलों में अभी भी बड़ी संख्या में बच्चों को पर्याप्त डिजिटल संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की आवश्यकता है। इसलिए भारत के लिए समाधान AI पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं हो सकता। भारत को ऐसी नीति की जरूरत है जिसमें तकनीक का इस्तेमाल भी हो और बच्चों की स्वतंत्र सोच भी मजबूत हो। AI से नकल नहीं, सीखने की आदत बने शिक्षाविदों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विद्यार्थी हर उत्तर AI से लेने लगेंगे तो उनकी सोचने, लिखने, तर्क करने और समस्या हल करने की क्षमता पर क्या असर पड़ेगा? स्कूलों में AI साक्षरता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाकर बच्चों को बताया जा सकता है— AI कैसे काम करता है? AI की जानकारी में गलती क्यों हो सकती है? AI और इंटरनेट की जानकारी की सत्यता कैसे जांचें? असाइनमेंट में AI का नैतिक उपयोग कैसे करें? अपनी सोच और रचनात्मकता को AI से कैसे बेहतर बनाएं? भारत को ‘AI बैन’ नहीं, ‘AI बैलेंस’ चाहिए भारत की परिस्थितियों में सबसे व्यावहारिक रास्ता AI को पूरी तरह रोकना नहीं बल्कि नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण इस्तेमाल है। प्राथमिक कक्षाओं में स्क्रीन आधारित गतिविधियों को सीमित रखते हुए किताब, शिक्षक, खेल और वास्तविक दुनिया के अनुभवों को प्राथमिकता दी जा सकती है। उच्च कक्षाओं में AI को एक शैक्षणिक सहायक के रूप में इस्तेमाल करना सिखाया जा सकता है। स्कूल से ज्यादा बड़ी चुनौती घर में है स्कूल में स्क्रीन टाइम नियंत्रित करने के बावजूद बच्चे घर पर घंटों मोबाइल चला सकते हैं। इसलिए केवल शिक्षा विभाग की नीति पर्याप्त नहीं होगी। अभिभावकों को भी डिजिटल अनुशासन का हिस्सा बनाना होगा। बच्चों के लिए पढ़ाई, खेल, नींद, परिवार के साथ समय और डिजिटल मनोरंजन के बीच संतुलन जरूरी है। भारत के सामने अवसर भी बड़ा है भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में है। यदि भारतीय विद्यार्थी AI को केवल उत्तर पाने वाली मशीन के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय नई समस्याओं के समाधान, शोध, नवाचार और रचनात्मकता के लिए इस्तेमाल करना सीखते हैं, तो यही तकनीक भारत की बड़ी ताकत बन सकती है। अब बहस ‘AI आएगा या नहीं’ की नहीं होनी चाहिए AI शिक्षा में आएगा—और तेजी से आएगा। असली सवाल यह है कि भारत अपने बच्चों को AI का मालिकाना सोच वाला उपयोगकर्ता बनाएगा या केवल AI से उत्तर लेने वाला उपभोक्ता। “AI बच्चों की सोच का विकल्प न बने; वह उनकी सोच को और ऊंचा उठाने का साधन बने—भारत की शिक्षा नीति की अगली चुनौती यही है।”
एआरपी चयन परीक्षा: 78 आवेदकों की 15 सितंबर को होगी लिखित परीक्षा

संजीव सिंह बलिया! स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, शिक्षकों को सहयोग देने और ‘निपुण भारत’ जैसी सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
परीक्षा का आयोजन
बलिया जिले में एआरपी पद के लिए 78 इच्छुक आवेदकों की लिखित परीक्षा 15 सितंबर को अपरान्ह 1.30 बजे से जीजीआईसी (राजकीय इंटर कॉलेज), बलिया में आयोजित की जाएगी
बीएसए की जानकारी
बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) मनीष कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि एआरपी की नियुक्ति के बाद स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, शिक्षकों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन, तथा ‘निपुण भारत मिशन’ जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
एआरपी की भूमिका
एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) समग्र शिक्षा अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनका मुख्य कार्य होता है:
स्कूलों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की निगरानी करना
शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण देना
‘निपुण भारत मिशन’ के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान (FLN) को मजबूत करना
शैक्षणिक योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय स्थापित करना
परिचारक शिव कुमार सिंह की तेरहवीं पर श्रद्धांजलि; नगरा प्राथमिक शिक्षक संघ ने परिवार को दिया 25,500 रुपये का सहयोग
संजीव सिंह बलिया!नगरा: 12 सितंबर 2026 को शिक्षा क्षेत्र नगरा के कम्पोजिट विद्यालय देवलवीर में परिचारक के पद पर तैनात शिव कुमार सिंह का 31 अगस्त 2026 को असामयिक निधन हो गया था। आज 12 सितंबर 2026 को उनके पैतृक गांव कसौन्डर में आयोजित तेरहवीं की श्रद्धांजलि सभा में शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और परिचारक समुदाय ने स्वर्गीय आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन स्वर्गीय शिव कुमार सिंह की तेरहवीं पर उनके मूल आवास गांव कसौन्डर में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्राथमिक शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ और अनुदेशक संघ के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ नगरा के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप यादव, मंत्री ओमप्रकाश, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमंत कुमार यादव, उपाध्यक्ष विनोद कुमार भारती,प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के मंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव सिंह,वरिष्ठ शिक्षक संकुल चंद्रमोहन जी, शैलेश कुमार यादव, रवींद्र सिंह, संतोष सिंह, दिनेश जी, अभिमन्यु सिंह और कृपाशंकर जी सहित कई शिक्षकगण मौजूद रहे। परिवार को आर्थिक सहयोग श्रद्धांजलि सभा में सभी शिक्षकों, शिक्षा मित्रों, अनुदेशकों और परिचारकों के सहयोग से स्वर्गीय शिव कुमार सिंह के परिवार को 25,500 रुपये (पच्चीस हजार पाँच सौ रुपये) का आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया। इस सहयोग के लिए प्राथमिक शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ और अनुदेशक संघ ने सभी योगदानकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उपस्थित पदाधिकारी कार्यक्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ नगरा के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप यादव, मंत्री ओमप्रकाश, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमंत कुमार यादव, उपाध्यक्ष विनोद कुमार भारती प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला मंत्री अजय श्रीवास्तव, ब्लॉक कोषाध्यक्ष बच्चालाल,अनुदेशक संघ के पदाधिकारी सुनील कुमार और परिचारक अमित कुमार भी मौजूद रहे।
बलिया जनपद: दिव्यांग बच्चों के लिए निःशुल्क उपकरण वितरण से पूर्व 18–21 सितंबर को होगा परीक्षण शिविर
संजीव सिंह बलिया: समग्र शिक्षा के तहत दिव्यांग बच्चों को मिलेंगे निःशुल्क ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और श्रवण यंत्र; 18–21 सितंबर को परीक्षण शिविर उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संचालित समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत समेकित शिक्षा कार्यक्रम में शारीरिक, श्रवण, मानसिक एवं दृष्टि बाधित बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने और स्वावलंबी बनाने के लिए एलिम्को कानपुर के सहयोग से निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। शिविर का उद्देश्य और उपकरण इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र (हियरिंग एड), वैशाखी, ब्रेल किट, स्लेट, छड़ी आदि उपकरण प्रदान कर उनकी गतिशीलता और शिक्षा में सहायता करना है। एलिम्को कानपुर की विशेषज्ञ तकनीकी टीम बच्चों का गहन परीक्षण करके आवश्यक उपकरणों का मापन और चिन्हांकन करेगी, जिसके बाद उपकरण वितरण किया जाएगा। बलिया जनपद में शिविर की तिथि और स्थान जनपद बलिया के परीषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों के लिए तीन स्थानों पर परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया है: 18 सितंबर 2026 – बीआरसी नगरा 19 सितंबर 2026 – बीआरसी पन्दह 21 सितंबर 2026 – कम्पोजिट विद्यालय, भृगुआश्रम नगर क्षेत्र, बलिया राज्य परियोजना कार्यालय, निशातनगंज, लखनऊ के आदेश के क्रम में आयोजित इन शिविरों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों का परीक्षण किया जाएगा। आवश्यक दस्तावेज और पात्रता बीएसए मनीष कुमार सिंह ने समस्त खंड शिक्षा अधिकारी, एसआरजी, एआरपी, शिक्षक, ग्राम प्रधान, प्रधानाध्यापक, विशेष शिक्षकों एवं अभिभावकों से अपेक्षा की है कि वे अपने क्षेत्र के कक्षा 1 से 8 तक के सभी शारीरिक दिव्यांग, श्रवण बाधित एवं दृष्टि बाधित बच्चों को शिविर में लाएं। शिविर में लाने के लिए अनिवार्य दस्तावेज: बच्चे का पूरा शरीर दिखाई देने वाला एक फोटोग्राफ दिव्यांगता प्रमाण-पत्र आधार कार्ड सांसद/विधायक/प्रधान/तहसीलदार द्वारा निर्गत आय प्रमाण-पत्र विद्यालय में नामांकन एवं प्रेरणा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन आगे की प्रक्रिया परीक्षण शिविर के बाद चिन्हित बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार अक्टूबर 2026 के आसपास विशेष वितरण शिविर आयोजित कर निःशुल्क उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।
मुरली छपरा: सड़क हादसे के 42 दिन बाद शिक्षक ने तोड़ा दम; प्रभारी प्रधानाध्यापक शौकत अली का लखनऊ में निधन, शिक्षा जगत स्तब्ध
संजीव सिंह बलिया! मुरली छपरा:शिक्षा क्षेत्र मुरली छपरा के प्राथमिक विद्यालय धतूरी टोला में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक शौकत अली का शुक्रवार की शाम लखनऊ में इलाज के दौरान असामयिक निधन हो गया। 31 जुलाई को हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए शिक्षक का 42 दिनों तक निजी अस्पताल में इलाज चलता रहा, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। मौत की सूचना मिलते ही शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मिलनसार प्रवृत्ति के धनी शौकत अली के निधन पर खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार, प्राशिसं के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह, मुरलीछपरा के ब्लाक अध्यक्ष नीरज सिंह सहित दर्जनों शिक्षकों, पदाधिकारियों और शुभचिंतकों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। श्रद्धांजलि देने वालों में राधेश्याम पांडेय, संजय सिंह, अरुण सिंह, कुलदीप सिंह रिंकू, दिग्विजय सिंह, श्रीकांत नारायण सिंह, उपेंद्र सिंह, अल्ताफ अंसारी, रामरतन सिंह यादव, पंकज यादव, विनोद यादव, पवन शर्मा, अजय कुमार गुप्ता, प्रमोद सिंह, राजीव सिंह, बृजेश यादव, गंगासागर पांडेय, सतदेव, दुर्गेश सिंह, संतोष मिश्र, नागेंद्र सिंह, दीपक माली, शशिकांत आदि शामिल हैं। बलिया के काजीपुर निवासी शौकत अली लंबे समय से शिक्षा सेवा से जुड़े रहे थे और अपने सहकर्मियों व छात्रों में लोकप्रिय थे। उनके निधन पर विद्यालय परिसर में शोक मनाया गया और गतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
मुरली छपरा: सड़क हादसे के 42 दिन बाद शिक्षक ने तोड़ा दम; प्रभारी प्रधानाध्यापक शौकत अली का लखनऊ में निधन, शिक्षा जगत स्तब्ध
संजीव सिंह बलिया! मुरली छपरा:शिक्षा क्षेत्र मुरली छपरा के प्राथमिक विद्यालय धतूरी टोला में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक शौकत अली का शुक्रवार की शाम लखनऊ में इलाज के दौरान असामयिक निधन हो गया। 31 जुलाई को हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए शिक्षक का 42 दिनों तक निजी अस्पताल में इलाज चलता रहा, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। मौत की सूचना मिलते ही शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मिलनसार प्रवृत्ति के धनी शौकत अली के निधन पर खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद कुमार, प्राशिसं के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह, मुरलीछपरा के ब्लाक अध्यक्ष नीरज सिंह सहित दर्जनों शिक्षकों, पदाधिकारियों और शुभचिंतकों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। श्रद्धांजलि देने वालों में राधेश्याम पांडेय, संजय सिंह, अरुण सिंह, कुलदीप सिंह रिंकू, दिग्विजय सिंह, श्रीकांत नारायण सिंह, उपेंद्र सिंह, अल्ताफ अंसारी, रामरतन सिंह यादव, पंकज यादव, विनोद यादव, पवन शर्मा, अजय कुमार गुप्ता, प्रमोद सिंह, राजीव सिंह, बृजेश यादव, गंगासागर पांडेय, सतदेव, दुर्गेश सिंह, संतोष मिश्र, नागेंद्र सिंह, दीपक माली, शशिकांत आदि शामिल हैं। बलिया के काजीपुर निवासी शौकत अली लंबे समय से शिक्षा सेवा से जुड़े रहे थे और अपने सहकर्मियों व छात्रों में लोकप्रिय थे। उनके निधन पर विद्यालय परिसर में शोक मनाया गया और गतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।