मऊ घोसी में खेत में पानी चलाने को लेकर विवाद, देवर पर भाभी से मारपीट का आरोप
मऊ के घोसी कोतवाली क्षेत्र के भेलऊर चंगेरी गांव में खेत में पानी चलाने को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि एक देवर ने अपनी भाभी के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। महिला को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

सुनीता देवी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 11 सितंबर को दिन में करीब 11 बजे वह अपने खेत में पानी चला रही थीं। इसी दौरान उनका देवर गुड्डू वहां पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा।

आरोप है कि सुनीता देवी ने जब इसका विरोध किया तो गुड्डू ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। महिला के मुताबिक, जब उन्होंने मारपीट का कारण पूछा तो आरोपी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और मौके से चला गया। मारपीट में सुनीता देवी घायल हो गईं।

घटना के बाद सुनीता देवी घोसी कोतवाली पहुंचीं और पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।

घोसी कोतवाली प्रभारी रविंद्रनाथ राय ने बताया कि सुनीता देवी की शिकायत के आधार पर उनके देवर गुड्डू के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
*कन्नौज में मनाया गया हिंदी दिवस, सेठ बासुदेव सहाय इंटर कॉलेज में हुई संगोष्ठी*
पंकज कुमार श्रीवास्तव

कन्नौज के सेठ बासुदेव सहाय इंटर कॉलेज में हिंदी दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा को भारत की सांस्कृतिक एकता और अखंडता का प्रतीक बताते हुए इसके प्रचार-प्रसार और संरक्षण पर चर्चा की गई।
विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेन्द्र लाल सिंह ने कहा कि हिंदी आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अंग्रेजी प्रवक्ता राजेश कुमार ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है, लेकिन तकनीक के इस दौर में हिंदी के साथ-साथ अन्य भाषाओं का अध्ययन भी आवश्यक है।

समाजशास्त्र प्रवक्ता सुफियान अहमद ने हिंदी के संवैधानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार में महात्मा गांधी, काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त और हजारी प्रसाद द्विवेदी सहित अनेक साहित्यकारों के योगदान को याद किया।
उप प्रधानाचार्य विनोद कुमार कुशवाहा ने हिंदी को आत्मसम्मान की भाषा बताते हुए कहा कि हिंदी के विकास और सम्मान के लिए अनेक महापुरुषों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वरिष्ठ शिक्षक शरद दीक्षित ने कहा कि हिंदी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। वहीं हिंदी के वरिष्ठ प्रवक्ता आलोक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट पर हिंदी की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। छात्रों को इसका सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग कर अपने भविष्य को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।

संगोष्ठी का संचालन हिंदी प्रवक्ता एवं साहित्यकार डॉ. शिव सिंह कुशवाहा ने किया। उन्होंने हिंदी की महत्ता पर दोहा प्रस्तुत करते हुए कहा—
"हिंदी हिन्दुस्तान है, हिंदी ही पहचान।
सकल विश्व में गूंजती भाषा यही महान।।"

कार्यक्रम में जीव विज्ञान प्रवक्ता सूर्य सिंह, ऋषभ कुमार द्विवेदी, गोविंद सिंह, आकाश बाबू, ओम शंकर त्रिवेदी, राकेश यादव सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
कांग्रेसियों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन सौंपा: जनगणना फॉर्म में ओबीसी कॉलम जोड़ने और जातियों की ड्राफ्ट सूची मांगी


रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने धरना प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। इस प्रदर्शन की अगुवाई जिला अध्यक्ष वसीम अंसारी और पिछड़ा वर्ग जिला अध्यक्ष राकेश पाल ने की।ज्ञापन के माध्यम से जनगणना 2027 के फॉर्म में ओबीसी वर्ग का कॉलम जोड़ने की मांग की गई। साथ ही, पहले से मौजूद जातियों की ड्राफ्ट सूची प्रगणक के जरिए नागरिकों को उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। जिला अध्यक्ष वसीम अंसारी ने कहा कि राहुल गांधी के दबाव में बीजेपी सरकार ने लोकसभा 2024 चुनाव के समय 2027 में ओबीसी वर्ग की जनगणना कराने का वादा किया था। हालांकि, अगस्त 2026 की जनगणना नोटिफिकेशन में ओबीसी का कॉलम नहीं जोड़ा गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने पहले से मौजूद जातियों की ड्राफ्ट सूची देने के बजाय जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए 'ओपन इंडियन प्रश्न' का तरीका चुना है। वसीम अंसारी के अनुसार, इस तरीके से जाति की गिनती करने का मतलब है कि जातियों को सैकड़ों-हजारों हिस्सों में बांट देना। इसका सीधा नुकसान पिछड़े और अन्य वंचित वर्गों को होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और तेलंगाना राज्यों में बेहतर जनगणना मॉडल होने के बावजूद, आरएसएस और बीजेपी ने जनगणना 2027 में ओबीसी वर्ग का कॉलम नहीं जोड़ा और ड्राफ्ट सूची भी नहीं दी। इससे साफ हो गया है कि सरकार ओबीसी वर्ग के सही आंकड़े नहीं देना चाहती है। इसका मकसद ओबीसी को आबादी के अनुपात में आरक्षण, संस्थानों में नौकरी और संसाधनों में हिस्सेदारी देने वाली जरूरी नीतियों से वंचित रखना है।
इस अवसर पर राजेश्वर दूबे,  त्रिलोकी नाथ बिंद, सुरेश गौतम, रमाशंकर बिंद,करन मौर्य  , विमलेश पाल, राजेश पाल, धीरज पाल, धीरज बिंद,गोविंद पाल, आदि कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
जनता का विश्वास ही सुशासन की कसौटी, इसके बिना लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं : सीएम योगी

- लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह में बोले मुख्यमंत्री, 50 वर्ष की शानदार यात्रा के लिए दी बधाई
- बोले मुख्यमंत्री- झूठी और बेवजह शिकायत कर सिस्टम का समय खराब करने वालों पर भी शिकंजा जरूरी
- मुख्यमंत्री ने कहा- लोकायुक्त की 50 वर्षों की यात्रा का हो दस्तावेजीकरण, अगले 50 वर्षों के लिए तैयार किया जाए रोडमैप

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी लोक सेवक गलत करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। कई बार व्यक्ति को ताकत मिलने पर वह उच्छृंखल और उद्दंड व्यवहार करने लगता है। उन्होंने रामचरितमानस की पंक्ति ‘प्रभुता पाई काहि मद नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में कहीं न कहीं अंकुश होना आवश्यक है, जो मर्यादाओं का पालन करा सके। लोकायुक्त जैसी संस्था मेरिट के आधार पर शिकायतों का समाधान निकालकर लोक सेवकों को जनता के प्रति जवाबदेही का अहसास कराती है।
मुख्यमंत्री योगी सोमवार को उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने संगठन की 50 वर्ष की यात्रा के लिए बधाई देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवैधानिक संस्थाओं में सामान्य नागरिक का विश्वास है। गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। जनता का विश्वास नहीं है तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और गौरव की अनुभूति करे, यही लोकतंत्र की कसौटी है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि केवल संस्था का गठन करने से समस्या का समाधान नहीं होता। सामान्य व्यक्ति बेझिझक अपनी समस्या लेकर आए और नियमानुसार उसका समयबद्ध समाधान अपनी आंखों के सामने देख सके। शिकायतकर्ता की जाति, मत या संप्रदाय देखे बिना मेरिट के आधार पर समाधान होना चाहिए। साथ ही शिकायत की व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों पर भी शिकंजा कसना होगा। झूठी और बेवजह शिकायतें सिस्टम का समय खराब करने के साथ वास्तविक पीड़ित के न्याय का समय भी नष्ट करती हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने तकनीक से आए बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता दर्शन में आने वाली शिकायतों में करीब 60 फीसदी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी होती थीं। ई-पॉस मशीनें लगाने और प्रदेश की करीब 80 हजार उचित दर की दुकानों को तकनीक से जोड़ने के बाद हेराफेरी की गुंजाइश समाप्त हुई है। आज 16 करोड़ लोगों को राशन मिल रहा है और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं।
राजस्व विभाग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में इन 34 लाख मामलों का समाधान किया गया। हालांकि इस दौरान नौ लाख नए मामले भी आए हैं। पैमाइश में गड़बड़ी रोकने के लिए हर तहसील में तकनीक आधारित उपकरण उपलब्ध कराया गया है। अब कोऑर्डिनेट के आधार पर पैमाइश होगी, जिससे एक इंच जमीन भी इधर-उधर नहीं हो सकेगी।
मुख्यमंत्री योगी ने जनधन खाते और डीबीटी को भी सुशासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के पैसे में भी बिचौलिये हिस्सा लेते थे। आज 1.10 करोड़ लोगों को सालाना 12 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। बीच में न कोई मध्यस्थ है और न दलाली। यही सुशासन है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस के बेहतर उपयोग से प्रशासन की पारदर्शिता और बढ़ेगी। तकनीक वही सार्थक है, जो लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बने। उन्होंने लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की पूरी यात्रा का दस्तावेजीकरण करने का सुझाव दिया। कहा कि कितने मामले आए, कितनों का निस्तारण हुआ और किन मामलों में क्या कार्रवाई हुई, इसका बेहतर प्रस्तुतीकरण तैयार किया जाए। देशभर के लोकायुक्तों और भारत के लोकपाल को आमंत्रित कर बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाए, जिसमें श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर चर्चा हो। स्वर्ण जयंती के माध्यम से उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन को अगले 50 वर्षों की कार्ययोजना और मजबूत रोडमैप के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
- भ्रष्टाचार राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न: लोकायुक्त
लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता और जनविश्वास की यात्रा है। उन्होंने संस्था के सुदृढ़ीकरण में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष आभार जताया। कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है, इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है और यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है। डिजिटल गवर्नेंस के जरिए संस्था को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक सही निर्णय किसी नागरिक का अधिकार सुनिश्चित कर सकता है, जबकि एक गलत निर्णय पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है। उन्होंने इस अवसर पर पूर्व लोकायुक्तों और संस्था से जुड़े पूर्व अधिकारियों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए उनका अभिवादन किया।
- लोकायुक्त ने मजबूत किया जनविश्वास
उप लोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त ने अनेक दौर देखे हैं और हर दौर में साबित किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवंत व्यवस्था है। लोकायुक्त के पास अधिकांश शिकायतें गांवों से मनरेगा में फर्जी उपस्थिति, आवास एवं शौचालय आवंटन में कथित भ्रष्टाचार, राशन कार्ड, पेंशन और भूमि अभिलेखों में हेराफेरी से जुड़ी आती हैं। चीनी मिल श्रमिकों का बकाया दिलाने के साथ खाद्य एवं रसद, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर भी जांच और कार्रवाई की गई है। इससे जनता में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकायुक्त केवल शिकायत सुनने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था है।
- चार प्रमुख क्षेत्रों में काम कर रहा लोकायुक्त प्रशासन
उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से लोकायुक्त प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन मुख्य रूप से चार क्षेत्रों- अन्वेषण, अतिरिक्त कृत्यों का निर्वहन, जनजागरूकता कार्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में काम करता है। वर्ष 2024 में परिवादों के निस्तारण की अधिकतम दर 98 प्रतिशत रही, जबकि औसत निस्तारण 90 प्रतिशत दर्ज किया गया।
- 1.25 लाख परिवादों पर कार्रवाई, 33.55 करोड़ की राहत
संगठन की सचिव रीमा बंसल ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन की भूमिका केवल भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके हस्तक्षेप से आम जनता को प्रशासनिक और आर्थिक राहत भी मिली है। सितंबर 1977 से अगस्त 2026 तक 1,25,056 परिवादों में कार्रवाई की गई। वर्ष 2017 से 2025 के बीच परिवादियों और आम जनता को 33 करोड़ 55 लाख 17 हजार 427 रुपये की आर्थिक राहत दिलाई गई। इसमें वर्ष 2018 में सर्वाधिक छह करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिली। पिछले पांच वर्षों में जांच-पड़ताल के बाद 186 प्रतिवेदन, 35 विशेष प्रतिवेदन और 37 संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारियों को भेजी गईं।
- स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का हुआ विमोचन
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी और लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन से पहले मुख्यमंत्री योगी ने लोकायुक्त प्रशासन की स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। साथ ही 50 वर्षों की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी तथा लघु फिल्म देखी। कार्यक्रम में लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोकायुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह और सुरेंद्र कुमार यादव समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
क्रिकेटर मोहम्मद शमी के दो भाइयों पर मुकदमा, महिला ने लगाए शारीरिक संबंध बनाने और धमकी देने के आरोप
लखनऊ। क्रिकेटर मोहम्मद शमी के भाई मोहम्मद कैफ और मोहम्मद हसीब के खिलाफ लखनऊ के आशियाना पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। एक तलाकशुदा महिला ने मोहम्मद कैफ के खिलाफ कथित तौर पर शादी का वादा करके संबंध बनाने और मोहम्मद हसीब पर जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। फिलहाल, लखनऊ पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

लखनऊ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351 और 69 के तहत क्रिकेटर के भाई मोहम्मद कैफ और मोहम्मद हबीब पर मुकदमा दर्ज किया है।एफआईआर के अनुसार, महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि 2020 में एक दोस्त के जरिए मोहम्मद कैफ से उसकी मुलाकात हुई थी। परिचय होने के बाद दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगी थीं। अगस्त 2023 में मोहम्मद कैफ ने उससे शादी का प्रस्ताव रखा था।

महिला ने कहा कि उसने पहले ही मोहम्मद कैफ को बताया था कि वह तलाकशुदा है और उसका एक बेटा है। उस समय कैफ ने उससे बोला कि उसे उसके अतीत और बेटे से कोई आपत्ति नहीं है। महिला ने कहा कि शादी का विश्वास दिलाए जाने के वह उनकी बातों पर विश्वास करने लगी थी। इसके बाद कैफ ने उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब वह शादी के लिए बोलती थी तो कैफ उसके सामने कुरान की कसम खाते थे और उचित समय पर शादी की बात कहते थे।

अपनी शिकायत में महिला ने यह भी बताया कि कैफ ने उससे आईपीएल 2025 के ऑक्शन के बाद निश्चित रूप से शादी करने के लिए कहा था। महिला ने मोहम्मद कैफ पर नौकरी छुड़वाने के भी आरोप लगाए हैं। महिला ने कहा कि दिसंबर में शादी नहीं करने के बाद उसने शमी के भाई मोहम्मद हसीब से बात की थी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला था।

महिला ने शिकायत में कहा कि उसके एक पॉडकास्ट के बाद मोहम्मद कैफ ने उससे फिर से शादी का वादा करते हुए उस पॉडकास्ट को रोकने के लिए बोला था और बाद में शारीरिक संबंध भी बनाए थे। एफआईआर के अनुसार, महिला ने कहा कि मोहम्मद हसीब ने उसे एक व्यक्ति बदरुद्दीन के जरिए अमरोहा बुलाया था, जहां उन्होंने उसे डराया और जान से मारने की धमकी दी।शिकायत के बाद लखनऊ पुलिस ने क्रिकेटर मोहम्मद शमी के भाई मोहम्मद कैफ और मोहम्मद हसीब के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
सपा की पूर्व विधायक उर्मिला राजपुत ने दुकान का किया उद्घाटन

फर्रुखाबाद।
सपा की पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत ने
ग्राम जरारी में खाद , बीज व दवाओ की दुकान का फीता काट कर उद्घाटन किया ।  उद्घाटन के दौरान पूर्व विधायक के साथ बहुत्व से गणमान्य लोग मौजूद रहे और उनके साथ जनसंवाद का भी मौका मिला । साथ ही ग्राम न्यामनपुर में अधिवक्ता के आवास पर लोगो से बातचीत हुई। ग्राम मिवपुरा में प्रधान ने
ग्राम खुदागंज में  रामरतन पाल को दुखद मृत्यु पर उनके आवास पहुंचकर शोक श्रद्वान्जलि अर्पित की, गंगा डूबन पर पूर्व प्रधान नकीस के इंतकाल होने पर पहुंचकर शोक व्यक्त किया।  लोगों की  बीबीपुर में से हुयी मावों पर पहुंचकर उनक शवों को नमन कर श्रद्वान्वाले दी। ग्राम महमूदापुर में स्व मास्टर दाताराम की पत्नी के निधन पर उनके आवास पहुंचकर शोक व्यक्व किया

ईश्वर मृत आत्माओ को दुख सहने की शक्ति प्रदान  करें।
मऊ- बड़ा गड़बड़ झाला, बिना शासनादेश भर्ती पर गिरेगी गाज! स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर महानिदेशालय की नजर
मऊ, आजमगढ़ और बलिया समेत कई जिलों में आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या और मानदेय में मिली गड़बड़ी - बजट रोकने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी

मऊ, स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कार्मिकों की भर्ती को लेकर महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के कार्यालय ने जिलों के विभागीय अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 10 सितंबर 2026 को जारी पत्र में आजमगढ़ मंडल के मऊ और बलिया समेत संबंधित जिलों में बिना शासनादेश तथा महानिदेशालय की सहमति के मनमाने ढंग से आउटसोर्स कार्मिक रखे जाने के मामलों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों को दरकिनार कर की जा रही ऐसी नियुक्तियां नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आती हैं। साथ ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई और संबंधित बजट रोकने की चेतावनी दी गई है।

पूर्व में वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी शासनादेश का पालन नहीं किया गया। इस वजह से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनुदान संख्या-32 के अंतर्गत मानक मद-58 ‘आउटसोर्स सेवाओं’ में प्रदेश के सभी जनपदों के आहरण-वितरण अधिकारियों से सूचना (शासनादेश) मांगी गई थी। लेकिन विभाग को अपूर्ण सूचना उपलब्ध कराया गया, इसलिए निदेशालय द्वारा 'गूगल शीट' पर ही उपलब्ध कराई गई सूचनाओं का हवाला दिया गया है। इन सूचनाओं के परीक्षण में कई जिलों में तैनात आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या और  विभाग द्वारा शासनादेश का अनुपालन न करने की बात सामने आने की बात कही गई है।

कहीं जरूरत से ज्यादा कार्मिक, तो कहीं स्वीकृति पर सवाल
महानिदेशालय के पत्र के मुताबिक कुछ जनपदों में आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या अत्यधिक परिलक्षित हो रही है। ऐसे में इन कार्मिकों को रखे जाने का औचित्य और आधार स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किए जाने की जरूरत बताई गई है कि इन कार्मिकों की नियुक्ति की स्वीकृति आखिर किस स्तर से और किस आधार पर प्राप्त हुई।

महानिदेशालय ने जिलों से उपलब्ध कराई गई सूचना को आगामी बजट आवंटन का आधार बनाने की बात कही है। यानी अब जिलों में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या और उनके मानदेय का सीधा असर आगामी बजट पर पड़ सकता है।

बढ़ानी होगी संख्या तो पहले लेनी होगी मंजूरी पूर्व में कोई नियमों का पालन नहीं किया गया, इस वजह से
पत्र में साफ निर्देश दिया गया है कि भविष्य में यदि किसी जनपद को आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता महसूस होती है तो बढ़ोतरी से पहले महानिदेशालय स्तर से अनुमति अथवा स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति अतिरिक्त कार्मिक रखने की स्थिति में उनके मानदेय के भुगतान के लिए बजट आवंटित नहीं किया जाएगा।

महानिदेशालय ने इसके लिए संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी को पूर्ण रूप से उत्तरदायी ठहराने की बात कही है। ऐसे में पत्र जारी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के जिलास्तरीय अधिकारियों में खलबली मचना तय माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि मऊ, आजमगढ़ और बलिया समेत समस्त जिलों में आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या, नियुक्ति प्रक्रिया में प्रयोग शासनादेश और बजट संबंधी सूचनाओं के मिलान के बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई सामने आती है?
मऊ: मधुबन के दुबारी क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों से मिले नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री, राहत सामग्री का किया वितरण

मऊ जिले के मधुबन विधानसभा क्षेत्र के दुबारी स्थित जनता इंटर कॉलेज परिसर में बाढ़ प्रभावित लोगों से नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा जी मुलाकात कर राहत सामग्री वितरित कीऐ |

इस दौरान प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ भोजन और शुद्ध पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन को उन्होंने आवश्यक निर्देश दिए |

उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा और राहत-बचाव को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ तत्परता से कार्य कर रही है।
गंगा का जलस्तर सात सेंटीमीटर घटा, खतरे के निशान से 33 सेंटीमीटर नीचे
कानपुर। गंगा का जलस्तर रविवार के मुकाबले सोमवार को सात सेंटीमीटर घट गया। कानपुर बैराज पर अपस्ट्रीम में जलस्तर 114.670 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी बिंदु से 67 सेंटीमीटर ऊपर और खतरे के निशान से 33 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि जलस्तर में कमी के बावजूद प्रशासन की ओर से नदी किनारे के इलाकों पर नजर रखी जा रही है।

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि गंगा के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी इंतजाम रखे गए हैं।

फ्लड कंट्रोल ऑफिस, एलजीसी कानपुर के अनुसार, बैराज पर डाउनस्ट्रीम में जलस्तर 114.280 मीटर दर्ज किया गया। बैराज से चार लाख 12 हजार 548 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया। रविवार को अपस्ट्रीम में जलस्तर 114.740 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 114.370 मीटर था, जबकि डिस्चार्ज 4 लाख 20 हजार 691 क्यूसेक दर्ज किया गया था। इस तरह एक दिन में अपस्ट्रीम जलस्तर सात सेंटीमीटर और डाउनस्ट्रीम नौ सेंटीमीटर कम हुआ है। डिस्चार्ज में भी 8 हजार 143 क्यूसेक की कमी दर्ज की गई।

शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 113.050 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी बिंदु से पांच सेंटीमीटर ऊपर है। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का निशान 114 मीटर है। वहीं हरिद्वार बैराज से 74 हजार 532 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 64 हजार 283 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।

प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। जलस्तर में कमी के बावजूद अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के प्रयागराज दौरे पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त, युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह नजरबंद
उच्च न्यायालय परिसर में सम्मान समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

प्रयागराज।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सोमवार को प्रस्तावित प्रयागराज दौरे को लेकर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह को पुलिस ने उनके आवास पर नजरबंद किया है। पुलिस और प्रशासन की ओर से शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अपराह्न 3:45 बजे प्रयागराज पहुंचेंगे। इसके बाद वह उच्च न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में शामिल होंगे। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री शाम 5:10 बजे प्रयागराज से लखनऊ के लिए रवाना होंगे।

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर निर्धारित मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती के साथ यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। अधिकारियों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है।

युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह को नजरबंद किए जाने की कार्रवाई को भी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि मुख्यमंत्री का प्रयागराज दौरा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो।