1305 में राजधानी रहा महुली आज अपनी पहचान के लिए संघर्षरत
रमेश दुबे
### **ऐतिहासिक विरासत को पुनः पहचान दिलाने और नगर पंचायत का दर्जा देने की उठी मांग**
**महुली, संत कबीर नगर।**
इतिहास केवल बीते हुए समय की कहानी नहीं होता, बल्कि वह किसी क्षेत्र की पहचान, गौरव और भविष्य की दिशा तय करने वाली धरोहर होता है। संत कबीर नगर जनपद का **महुली** ऐसा ही एक ऐतिहासिक क्षेत्र है, जिसका गौरवशाली अतीत आज सरकारी उपेक्षा और राजनीतिक नफा-नुकसान के बीच कहीं धुंधला होता दिखाई दे रहा है।
इतिहास के अनुसार **वर्ष 1305 में महाराजा अलख देव ने महुली को अपनी राजधानी बनाकर इस राजवंश की नींव रखी थी।** अर्थात जिस महुली को आज एक सामान्य कस्बे या क्षेत्र के रूप में देखा जाता है, उसका अतीत कभी सत्ता, शासन और राजकीय वैभव का केंद्र हुआ करता था।
समय के साथ परिस्थितियां बदलीं। **वर्ष 1774 में 16वें शासक महाराजा सरफराज पाल ने महसों को अपनी सुरक्षित राजधानी बनाया।** इसके बाद यह क्षेत्र **‘महसों रियासत’** के नाम से प्रसिद्ध हुआ। राजधानी भले ही महुली से स्थानांतरित हो गई, लेकिन महुली का ऐतिहासिक महत्व समाप्त नहीं हुआ।
विडंबना यह है कि जिस महुली ने सदियों पहले एक राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाई थी, वही महुली आज अपनी **मूल पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्षरत** है।
देश और प्रदेश में कई सरकारें आईं और चली गईं। विकास के अनेक दावे हुए, नई योजनाएं बनीं और प्रशासनिक व्यवस्था में लगातार परिवर्तन हुए, लेकिन महुली की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने की दिशा में अपेक्षित गंभीर पहल आज भी दिखाई नहीं देती।
आज भी जब लोग अपने सरकारी दस्तावेजों में **‘परगना महुली पूर्व, पश्चिम, उत्तर अथवा दक्षिण’** जैसे शब्द देखते हैं, तो स्वाभाविक रूप से उनके मन में सवाल उठता है—**आखिर महुली ही क्यों?**
बहुत कम लोगों को यह जानकारी होगी कि जिस नाम को वे अपने कागजों में केवल एक प्रशासनिक पहचान के रूप में देखते हैं, उसके पीछे **सैकड़ों वर्षों का गौरवशाली इतिहास** छिपा हुआ है।
### **महुली को केवल परगना नहीं, ऐतिहासिक पहचान के रूप में देखा जाए**
यह समय है कि सरकार और प्रशासन महुली के इतिहास को केवल पुराने दस्तावेजों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे जनमानस के सामने लाने के लिए ठोस कदम उठाएं।
**सरकार से हमारी प्रमुख मांगें हैं—**
1. महुली के ऐतिहासिक एवं राजवंशीय इतिहास का आधिकारिक दस्तावेजीकरण कराया जाए।
2. महुली के ऐतिहासिक स्थलों एवं धरोहरों का सर्वेक्षण कर उनका संरक्षण किया जाए।
3. महुली के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाला **ऐतिहासिक स्मारक/हेरिटेज स्थल** विकसित किया जाए।
4. महुली के प्रमुख स्थानों पर इसके इतिहास से संबंधित **शिलापट्ट एवं सूचना पट्ट** लगाए जाएं।
5. विद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में महुली के इतिहास को स्थानीय इतिहास के रूप में प्रचारित किया जाए।
6. महुली के समुचित विकास के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
7. महुली को **नगर पंचायत का दर्जा देने** की मांग पर राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्णय लिया जाए।
8. महुली के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे पर्यटन एवं सांस्कृतिक मानचित्र पर स्थान दिलाने की पहल की जाए।
**महुली किसी एक व्यक्ति, दल या सरकार की विरासत नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है।**
राजनीतिक समीकरण बदलते रहेंगे, सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन इतिहास हमेशा जीवित रहेगा। आवश्यकता इस बात की है कि महुली के उस इतिहास को फिर से सम्मान मिले, जिसे समय की धूल और सरकारी उदासीनता ने लगभग विस्मृत कर दिया है।
**जिस महुली ने वर्ष 1305 में राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाई थी, क्या वह आज अपने अस्तित्व और सम्मान के लिए इतनी बड़ी हकदार भी नहीं है कि उसे उसका उचित विकास और प्रशासनिक पहचान मिल सके?**
सरकार से अपेक्षा नहीं, अब **ठोस पहल की मांग** है—
**महुली के इतिहास को पुनः सम्मान मिले, उसकी पहचान पुनः स्थापित हो और उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।**
**✍️ कमल नारायण द्विवेदी**
**महुली, संत कबीर नगर**
Sep 03 2026, 13:55
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