जलस्तर घटा, कटान शुरू, कई झोपड़ियां गंगा में समाईं*
ग्रामीणों ने  प्रशासन से मदद करने की गुहार लगाई

अमृतपुर फर्रुखाबाद । अमृतपुर तहसील क्षेत्र में गंगा का जलस्तर भले ही लगातार घट रहा हो, लेकिन जलस्तर कम होते ही नदी ने किनारों पर कटान तेज कर दिया है। करनपुर घाट और मंझा की मड़ैया में गंगा के तेज कटान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।नदी लगातार किनारे की जमीन को अपने आगोश में ले रही है। कई झोपड़ियां कटकर गंगा में समा चुकी हैं, जबकि कई ग्रामीणों के मकान और झोपड़ियां अब कटान की जद में पहुंच गए हैं। इससे नदी किनारे पर रहने वाले परिवारों में दहशत है।ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से बाढ़ का पानी गांवों और आसपास के क्षेत्रों में परेशानी का कारण बना हुआ था। अब जलस्तर कम होने के बाद लोगों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन गंगा के कटान ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। ग्रामीणों को डर है कि यदि कटान इसी गति से जारी रहा तो आने वाले दिनों में उनके घर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।करनपुर घाट निवासी ग्रामीणों ने बताया कि गंगा का कटान आबादी के बेहद करीब पहुंच गया है। खुशीराम की झोपड़ी कटकर गंगा में समा चुकी है। झोपड़ी उजड़ने के बाद उनके परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया। मजबूरी में उन्होंने सड़क किनारे झोपड़ी डालकर अपना आशियाना बनाया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ की परेशानी से किसी तरह उबरने की कोशिश कर रहे परिवारों के सामने अब कटान ने नई समस्या खड़ी कर दी है।ग्रामीण सत्यवती ने बताया कि खुशीराम की झोपड़ी कट चुकी है और अब वह सड़क किनारे झोपड़ी डालकर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि गंगा का कटान लगातार जारी है। धर्मेंद्र की झोपड़ी भी गंगा के बेहद करीब पहुंच गई है।  सुभाष और अवधेश के मकानों पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा  है।करनपुर घाट निवासी शिवाकांत ने बताया कि गंगा के कटान में उनकी दो झोपड़ियां कट चुकी हैं। बाढ़ के दौरान पहले ही खेती को भारी नुकसान हुआ और अब झोपड़ियों के कटने से परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। बाढ़ के पानी के कारण मक्का और गेहूं की फसल भी खराब हो गई।ग्रामीण राकेश का कहना है कि गंगा तेजी से कटान कर रही है। नदी का रुख देखकर ग्रामीणों में भय बना हुआ है। कटान के कारण उपजाऊ जमीन लगातार गंगा में समाती जा रही है और इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।मंझा की मड़ैया में भी गंगा का कटान ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार यहां कई झोपड़ियां कटकर गंगा में समा चुकी हैं। सोनपाल ने बताया कि करीब 8 से 10 झोपड़ियां कट चुकी हैं।  ब्रह्मपाल का कहना है कि गंगा लगातार कटान कर रही है और कई परिवार इसकी चपेट में आ चुके हैं।मंझा निवासी माधुरी ने बताया कि गंगा के कटान में उनकी दो झोपड़ियां गिर चुकी हैं। झोपड़ियां कटने के बाद परिवार को खुले आसमान के नीचे रहने की स्थिति बन गई। अब वह तिरपाल तानकर किसी तरह गुजारा करने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि घर का सामान भी सुरक्षित रखने में परेशानी हो रही है।मंझा निवासी राजीव ने बताया कि उनकी भी दो झोपड़ियां गंगा के कटान में कट चुकी हैं। उनका कहना है कि नदी का कटान लगातार जारी है और ग्रामीणों को हर समय अपने आशियाने के गंगा में समाने का डर सता रहा है। इस बार बाढ़ ने पहले ही खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में खड़ी मक्का और गेहूं की फसल पानी में खराब हो गई। पशुओं के लिए चारे की समस्या भी बनी हुई है। जलस्तर कम होने के बाद स्थिति सामान्य होगी, लेकिन गंगा के तेज कटान ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। एक तरफ बाढ़ का पानी घटने से कुछ राहत मिली है तो दूसरी तरफ कटान के कारण जमीन लगातार गंगा में समा रही है। ऐसे में जिन परिवारों की झोपड़ियां कट चुकी हैं, उनके सामने रहने और सामान सुरक्षित रखने की गंभीर समस्या बनी हुई है।ग्रामीणों ने प्रशासन से गंगा किनारे कटान प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कराने और कटान रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए तो कई और झोपड़ियां तथा मकान गंगा की चपेट में आ सकते हैं।
ग्रामीण सत्यवती, राकेश, नरेश, गुड्डू, धर्मेंद्र, मुनींद्र, बहादुर, शिवाकांत, माधुरी, ब्रह्मपाल, सोनपाल और राजीव ने बताया कि कटान के कारण ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ी हुई है। परिवार अपने घरों और झोपड़ियों को बचाने के लिए लगातार निगरानी कर रहे हैं।उनको डर है कि गंगा का कटान यदि इसी तरह जारी रहा तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर कटान की स्थिति का जायजा ले, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए और जिन लोगों की झोपड़ियां कट चुकी हैं, उन्हें तत्काल राहत एवं आवश्यक सहायता दी जाए।
सी ओ ने किया सेवानिवृत कर्मचारियों का सम्मान



फर्रुखाबाद। पुलिस विभाग में 31 अगस्त 2026 को अधिवर्षता आयु पूर्ण करने वाले पुलिस के 02 उपनिरीक्षक एवं 01 संदेश वाहक सहित कुल 03 अधिकारी/कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए। क्षेत्राधिकारी मोहम्मदाबाद आलोक  सिंह द्वारा सभी सेवानिवृत्त अधिकारी/कर्मचारियों को भावभीनी विदाई देते हुए उनके दीर्घ, समर्पित एवं कर्तव्यनिष्ठ सेवाकाल के लिए आभार व्यक्त किया गया । साथ ही स्वस्थ, सुखद एवं मंगलमय भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं।
कर्मचारियों की मेहनत रंग लाई अधीक्षक का रुका स्थानांतरण
फर्रुखाबाद। कर्मचारियों की एक जुटता का परिणाम है कि
मुख्य चिकित्सा अधिकारी से सिविल चिकित्सालय अधीक्षक डॉक्टर राणा प्रताप के नेतृत्व में मुख्य चिकित्सा अधिकारी  से उनके कार्यालय में वार्ता हुई जो की सार्थक रही,  उन्होंने मीडिया व कर्मचारीयों के सामने अधीक्षक का ट्रांसफर तत्काल प्रभाव से रोक देने का आश्वासन दिया है साथ ही 5 और 6 तारीख को कर्मचारीयों और अधिकारियों की अन्य समस्याओं के संबंध में वार्ता करने के लिए बुलाया है ।
इस मौके पर  प्रमोद दीक्षित अध्यक्ष उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महसंघ  , फार्मासिस्ट मनोज कुमार बाथम ,,जिला अध्यक्ष चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ जनपद अंकित दीक्षित, विजेंद्र फार्मासिस्ट , परितोष अवस्थी फार्मासिस्ट गुलाब, सोनू ,हरिओम संजय कुमार डा.आकांक्षा नैना श्रीवास्तव, निधि मिश्रा, अनामिका चरन, सोनी, लता, पिंकी, रीना एवं समस्त  स्टाफ लिंजिगंज मौजूद रहा।
कागजों में भर रही बच्चों की थाली? झंडी की मड़ैया स्कूल में मिड-डे मील पर गंभीर सवाल
बच्चों और अभिभावकों ने लगाए भोजन, फल और दूध न मिलने के आरोप, औचक जांच की मांग; प्रधानाध्यापक भी विद्यालय में नहीं मिले

अमृतपुर। सरकार बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए मिड-डे मील योजना के तहत विद्यालयों में भोजन के साथ फल और दूध उपलब्ध करा रही है। मगर विकासखंड राजेपुर के प्राथमिक विद्यालय झंडी की मड़ैया में बच्चों और अभिभावकों की ओर से लगाए गए आरोपों ने योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बच्चों और अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय में कई बार बच्चों को मिड-डे मील का भोजन नहीं मिलता। फल और दूध वितरण को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि बच्चों के नाम पर उपलब्ध कराया जाने वाला पोषण वास्तव में उनकी थाली तक पहुंच रहा है या फिर सरकारी अभिलेखों में ही इसका हिसाब पूरा किया जा रहा है।

बच्चों को बाहरी लोगों के सामने क्या बताने को कहा जाता है?

अभिभावकों ने आरोप लगाया कि बच्चों से कथित तौर पर यह भी कहा जाता है कि यदि कोई अधिकारी अथवा बाहरी व्यक्ति विद्यालय में भोजन, फल और दूध के वितरण के संबंध में पूछताछ करे तो उन्हें सब कुछ वितरित होने की बात बतानी है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला गंभीर माना जा सकता है।

अभिभावकों को आशंका है कि विद्यालय के अभिलेखों में भोजन, फल और दूध का वितरण दर्ज हो, जबकि मौके पर बच्चों को उसका लाभ न मिल रहा हो। ऐसे में मिड-डे मील रजिस्टर, खाद्यान्न स्टॉक और वितरण संबंधी अभिलेखों की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

बिना सूचना औचक जांच की मांग

मामले की जानकारी करने के दौरान प्रधानाध्यापक अनिल कुमार सिंह विद्यालय में मौजूद नहीं मिले। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विद्यालय का बिना पूर्व सूचना औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अधिकारियों को बच्चों से सीधे बातचीत कर भोजन, फल और दूध के वितरण की वास्तविक स्थिति की जानकारी करनी चाहिए।

इसके साथ ही मिड-डे मील रजिस्टर, खाद्यान्न स्टॉक, भोजन की मात्रा तथा फल एवं दूध वितरण से संबंधित अभिलेखों की गहन जांच कराने की मांग की गई है, ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हो तो उसका पता लगाया जा सके।

बच्चों की थाली या कागजों का हिसाब?

मिड-डे मील बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी योजना है। ऐसे में शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बच्चों के अधिकार और सरकारी योजना के क्रियान्वयन से जुड़ा गंभीर मामला होगा।

अब देखना यह है कि झंडी की मड़ैया प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की थाली वास्तव में भर रही है या भोजन, फल और दूध का हिसाब सिर्फ कागजों पर पूरा हो रहा है।

बीईओ बोले—जांच के बाद दोषी मिलने पर होगी कार्रवाई

इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी राजीव कुमार श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच में यदि कोई शिक्षक दोषी पाया जाता है तो नियमों के अनुसार उसके विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सपा पिछड़ा वर्ग के प्रदेश सचिव ने गांधीगिरी कर 30 रुपए किलों चीनी बेचकर प्रदेश सरकार को दी चेतावनी ,
बहुत महंगाई की मार, अबकी बार सपा सरकार का स्लोगन लिखा बैनर लगाकर आम जनता में बांटी चीनी


फर्रुखाबाद। समाजवादी पार्टी  पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद यूनुस खान ने  केंद्र और प्रदेश सरकार को चेताया है कि वर्तमान समय में चीनी के भाव 70 रुपए किलो है इसको लेकर सपा प्रदेश सचिव ने सोमवार को जिला मुख्यालय के फतेहगढ़ में स्टॉल लगाकर आम नागरिकों को₹30 किलो चीनी उपलब्ध कराई चीनी के भाव सुनकर आम नागरिक सपा के स्टॉल की ओर दौड़ पड़े और देखते ही देखते स्टॉल के पास लंबी कतार लग गई इसका मुख्य कारण यह था की त्योहार को लेकर हर नागरिक को चीनी की आवश्यकता है ऐसे में सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर सपा ने गांधीगिरी करके आम नागरिकों में चीनी का वितरण किया।
स्वास्थ्य विभाग के औचक निरीक्षण की खुली पोल, अधिकारी पहुंचे तो झोलाछापों ने बंद कर दी दुकानें
राजेपुर से राजपुर-गुंडेरा संपर्क मार्ग तक मचा हड़कंप, कई कथित अवैध क्लीनिक व मेडिकल स्टोर संचालक दुकानें बंद कर हुए फरार

राजेपुर फर्रुखाबाद। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजेपुर का मुख्य चिकित्सा अधिकारी आनंद उपाध्याय द्वारा औचक निरीक्षण किए जाने की भनक लगते ही क्षेत्र में कथित रूप से संचालित झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध मेडिकल संचालकों में हड़कंप मच गया। अधिकारी के निरीक्षण की सूचना मिलते ही राजेपुर से लेकर राजपुर-गुंडेरा संपर्क मार्ग और रतनपुर पमारान गांव तक कई दुकानों के शटर गिर गए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, राजपुर में बंगाली डॉक्टर के नाम से चर्चित एक चिकित्सक तथा रतनपुर पमारान में संचालित बताए जा रहे एक अन्य बंगाली डॉक्टर ने भी आनन-फानन में अपनी दुकानें बंद कर दीं और मौके से चले गए। इससे स्वास्थ्य विभाग की औचक निरीक्षण व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

लोगों का कहना है कि यदि निरीक्षण वास्तव में औचक था तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के पहुंचने से पहले ही कथित झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध मेडिकल संचालकों तक इसकी सूचना कैसे पहुंच गई? अधिकारी के पहुंचने से पहले ही दुकानें बंद होना कहीं न कहीं विभागीय सूचना तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

‘औचक निरीक्षण’ से पहले ही कैसे मिल जाती है सूचना?

ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी जनपद स्तर से स्वास्थ्य विभाग का कोई वरिष्ठ अधिकारी क्षेत्र में जांच या निरीक्षण के लिए निकलता है, उससे पहले ही कथित झोलाछाप डॉक्टरों को इसकी जानकारी मिल जाती है। सूचना मिलते ही संबंधित लोग दुकानें बंद कर इधर-उधर हो जाते हैं और अधिकारी के लौटने के बाद फिर से गतिविधियां शुरू होने की चर्चा है।

ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि आखिर विभाग की कार्रवाई से पहले सूचना बाहर कौन पहुंचाता है? क्या स्वास्थ्य विभाग के अंदर ही कोई ऐसा व्यक्ति या सूचना तंत्र मौजूद है, जो कार्रवाई की भनक संबंधित लोगों तक पहुंचा देता है?

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और राजेपुर क्षेत्र में संचालित सभी क्लीनिक, मेडिकल स्टोर व पैथोलॉजी केंद्रों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठाई है कि यदि कहीं बिना वैध अनुमति अथवा नियमों के विपरीत चिकित्सा सेवाएं संचालित हो रही हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कथित अवैध चिकित्सा कारोबार पर कार्रवाई करता है या फिर निरीक्षण और कार्रवाई का सिलसिला महज औपचारिकता बनकर रह जाता है।
हिंदू समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अंकित तिवारी ने दिया त्यागपत्र, राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा पत्र

फर्रुखाबाद ।  हिंदू समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अंकित तिवारी ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को त्याग पत्र स्वीकृत के लिए भेज दिया है । उन्होंने कहा कि हिंदू समाज पार्टी में उत्तर प्रदेश अध्यक्ष के पद पर रहते हुए संगठन एवं पार्टी के हित में अपनी पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं क्षमता के साथ कार्य करता रहा हूं, परंतु वर्तमान परिस्थितियों एवं व्यक्तिगत, संगठनात्मक कारणों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद से तत्काल  त्यागपत्र दे रहा हूं। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष से त्यागपत्र स्वीकार करते हुए दायित्व से पदमुक्त करने की कृपा करें। मैं पार्टी एवं समस्त पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करता हूं, क्योंकि मुझे संगठन में कार्य करने का सहयोग प्रदान किया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी के उत्पीड़न को लेकर कर्मचारियों ने की बैठक

डॉ राणा से 10% रिश्वत की मांग, कर्मचारियो से वसूली न करने पर किया गया स्थानांतरण

फर्रुखाबाद।
रविवार को सिविल चिकित्सालय में समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बैठक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के उत्पीड़न को लेकर आहुत की गई जिसकी अध्यक्षता सिविल चिकित्सालय लिंजीगंज अधीक्षक डॉक्टर राणा प्रताप द्वारा की गई । इस दौरान कर्मचारियों का आरोप है कि 27 अगस्त 26 को मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा औचक निरीक्षण 9:50 प्रातः पर किया गया जो की निरीक्षक 5 से 7 मिनट में ही कर लिया गया निरीक्षण के बाद उनके द्वारा नियमित और संविदा कर्मियों की उपस्थिति पंजिका भी साथ में ले गये जो कि 30 अगस्त 26 तक वापस नहीं की गई। जिससे चिकित्सालय में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है । डॉ राणा प्रताप से मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा बोला गया की 10% कर्मचारियों से वसूली कर कार्यालय में आकर मुझे दे, मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को व्हाट्सएप के माध्यम से स्थानांतरण राजेपुर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ड्यूटी पर किया गया जो कि नियमानुसार सही नहीं है डॉक्टर राणा प्रताप लेवल 3 क्लास के अधिकारी हैं कर्मचारियों अधिकारियों द्वारा तत्काल प्रभाव से सिविल अधीक्षक डॉ राणा प्रताप का स्थानांतरण रोका जाए क्योंकि डॉक्टर राणा प्रताप का कार्य एवं व्यवहार बहुत ही सराहनीय है और साथ ही उनके द्वारा उपस्थिति पंजिका भी वापस की जाए,अन्यथा की स्थिति में सिविल अस्पताल लिंजीगंज की आकस्मिक सेवाएं छोड़कर समस्त प्रकार के कार्य बहिष्कार किये जाएंगे जिसके अर्बन सभी हेल्थ सेंटर और अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सभी चिकित्सा इकाइयों पर भी कार्य बहिष्कार किया जाएगा।  31 अगस्त 26 को सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी से इस संबंध में वार्ता की जाएगी अगर वार्ता संतोषजनक और सही परिणाम के साथ सार्थक हल नहीं निकलता है तो समस्त कर्मचारी एवं अधिकारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी की होगी,
बैठक में उपस्थित प्रमोद कुमार दीक्षित जिला अध्यक्ष संयुक्त संघर्ष संचालन समिति फर्रुखाबाद मनोज कुमार जिला अध्यक्ष उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ फर्रुखाबाद संजय बाथम जिला महामंत्री एनएचएम संघ और संगठन के पदाधिकारी कर्मचारी एवं सदस्य उपस्थित रहे ।
स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, घबराएं नहीं बचाव करें*

*बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी को न करें नजरअंदाज, समय पर लें चिकित्सकीय सलाह*

      फर्रुखाबाद । स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। वर्तमान में जिले में स्वाइन फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन संभावित स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों में आवश्यक तैयारियां दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। लोहिया अस्पताल में मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त बेड और चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध रखने की तैयारी की गई है।
      मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने लोगों से अपील की है कि स्वाइन फ्लू के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, अत्यधिक कमजोरी अथवा सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए।
      उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य इकाइयों में संभावित मरीजों की पहचान, निगरानी और उपचार की व्यवस्था सक्रिय रखी जाए तथा किसी भी संदिग्ध स्थिति की सूचना समय से उपलब्ध कराई जाए। अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और उपचार संबंधी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाए।
      सीएमओ ने कहा कि स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना, हाथों की नियमित सफाई रखना, बीमार व्यक्ति के निकट संपर्क से बचना तथा भीड़भाड़ वाली जगहों पर आवश्यक सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
      उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं बरतनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को समय से उपचार उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जा रही हैं।
जिलाधिकारी ने जिला महिला चिकित्सालय का किया औचक निरीक्षण*

*स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार एवं मरीजों की सुविधा के दिए निर्देश*


फर्रुखाबाद । जिला महिला चिकित्सालय का जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर लाठर ने औचक निरीक्षण कर अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने महिला वार्ड, शिशु वार्ड एवं एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की जानकारी प्राप्त की।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पीडियाट्रिक वार्ड में स्थापना से संबंधित पदों पर आवश्यक तैनाती के लिए शासन को मांग पत्र तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जब तक शासन स्तर से पदों पर तैनाती नहीं हो जाती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में महिला अस्पताल में तैनात पीडियाट्रिशियन स्टाफ का सहयोग लिया जाए, ताकि नवजात एवं बच्चों को उपचार में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
जिलाधिकारी ने एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण करते हुए वहां उपलब्ध संसाधनों की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि विवेकाधीन कोष से एसएनसीयू के लिए आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति की कार्यवाही पूर्ण कराई जाए, जिससे गंभीर नवजात शिशुओं को बेहतर एवं समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
जिलाधिकारी ने ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने जनमानस की सुविधा एवं पारदर्शिता के दृष्टिगत निर्देश दिए कि ऑपरेशन थिएटर के बाहर रोस्टर के अनुरूप सर्जरी करने वाले चिकित्सकों की सूची चस्पा की जाए, ताकि मरीजों एवं उनके परिजनों को संबंधित चिकित्सक के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध हो सके।
जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया कि चिकित्सालय में साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टाफ की उपस्थिति तथा मरीजों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने आने वाले प्रत्येक मरीज को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।