मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 02 एवं 03 सितम्बर को रांची में

रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने मंगलवार को निर्वाचन सदन, धुर्वा, रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि 02 एवं 03 सितम्बर 2026 को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Voter Registration and Voter Registers 2026” आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का उद्घाटन सत्र 02 सितम्बर को पूर्वाह्न 10:00 बजे से 11:30 बजे तक होगा।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन का आयोजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखण्ड द्वारा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखण्ड के सहयोग से किया जा रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM), रांची, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची इसके नॉलेज पार्टनर हैं।

सम्मेलन में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखण्ड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल, IIM रांची के निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ भाग लेंगे। विशिष्ट अतिथियों में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव श्री अरविंद आनंद सहित निर्वाचन एवं अकादमिक क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र में “Voter Registration and Voter Registers” विषयक पुस्तक एवं सम्मेलन की स्मारिका का लोकार्पण भी किया जाएगा।

श्री के. रवि कुमार ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार द्वारा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (International IDEA) की अध्यक्षता ग्रहण करने के उपरांत भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के क्रम में देश के राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन कार्यालयों को निर्वाचन से संबंधित अलग-अलग विषयों पर शोध का दायित्व दिया गया था। इसी क्रम में झारखण्ड को “Voter Registration and Voter Registers” विषय पर शोध का दायित्व मिला।

उन्होंने बताया कि इस विषय पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय द्वारा देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों, रिसर्च स्कॉलर्स एवं निर्वाचन विषय के शिक्षाविदों से शोध-पत्रों के एब्सट्रैक्ट्स आमंत्रित किए गए थे। कुल 230 एब्सट्रैक्ट्स प्राप्त हुए, जिनमें नॉलेज पार्टनर्स की टीम द्वारा मूल्यांकन के बाद 80 एब्सट्रैक्ट्स का चयन किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों के विषय-विशेषज्ञों से भी शोध-पत्र आमंत्रित किए गए। पूरी प्रक्रिया के बाद कुल 57 शोध-पत्रों को अंतिम रूप से चयनित किया गया है, जिन्हें सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषयवार प्रस्तुत किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि शुद्ध, समावेशी, अद्यतन एवं विश्वसनीय मतदाता सूची लोकतांत्रिक निर्वाचन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची निर्माण से जुड़े प्रशासनिक, कानूनी, सामाजिक, तकनीकी एवं अकादमिक पहलुओं के साथ व्यावहारिक चुनौतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि दो दिनों के तकनीकी एवं अकादमिक सत्रों में मतदाता पंजीकरण, निर्वाचक नामावली प्रबंधन, डिजिटाइजेशन, मतदाताओं की समावेशिता तथा लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़े उभरते विषयों पर चर्चा होगी। इसमें निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी, नीति-निर्माता, विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, पत्रकार एवं सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि सहभागिता करेंगे।

श्री के. रवि कुमार ने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों और अकादमिक शोध को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। देश-विदेश के अनुभवों, शोध-पत्रों एवं विशेषज्ञों के विचारों से मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन की वर्तमान एवं भविष्य की चुनौतियों को समझने तथा बेहतर कार्यप्रणालियों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष एवं सुझाव भविष्य में निर्वाचन प्रबंधन की प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी, समावेशी एवं विश्वसनीय बनाने में उपयोगी सिद्ध होंगे।

इस अवसर पर अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी श्री देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी श्री धीरज कुमार ठाकुर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखण्ड के राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. अपर्णा, IIM रांची के लिबरल आर्ट्स विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. चार्वाक पति, NUSRL रांची के विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आनंदकुमार आर. शिंदे, सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बी.के. सिन्हा तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार पांडेय सहित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

नेतरहाट की नाशपाती ने पकड़ी संगठित बाजारों की राह, महिला किसानों को मिल रहा बेहतर दाम

नेतरहाट की पहाड़ियों में उगने वाली प्रीमियम गुणवत्ता की नाशपाती अब स्थानीय हाट-बाजारों से निकलकर संगठित और बड़े बाजारों तक पहुंच रही है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के SETU (Scaling and Enabling for Trade Upliftment) सेल की पहल से महिला-नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के माध्यम से किसानों को संस्थागत खरीदारों से जोड़ा जा रहा है।

इस पहल के तहत अब तक करीब 5 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता की नाशपाती संगठित खरीदारों तक पहुंचाई जा चुकी है, जबकि लगभग 10 मीट्रिक टन नाशपाती की एक और खेप असम के गुवाहाटी भेजने के लिए तैयार की जा रही है।

JSLPS की इस पहल में केवल बाजार उपलब्ध कराने पर ही नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत नाशपाती का सामूहिक संग्रहण, वैज्ञानिक ग्रेडिंग और छंटाई, गुणवत्ता जांच, आधुनिक पैकेजिंग तथा सुव्यवस्थित लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने लगा है।

Agri Arjuna के माध्यम से नेतरहाट की नाशपाती अब संगठित रिटेल चेन, जिसमें रिलायंस भी शामिल है, तक पहुंच रही है। वहीं, Tincture Agri के जरिए अतिरिक्त खेपों को प्रीमियम घरेलू बाजारों में भेजा जा रहा है।

नेतरहाट की ठंडी जलवायु नाशपाती की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है और यह क्षेत्र झारखंड के प्रमुख नाशपाती उत्पादक इलाकों में शामिल है। JSLPS की यह पहल किसानों को पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता से आगे बढ़ाकर संगठित मूल्य श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो रही है। इससे नेतरहाट की नाशपाती को राज्य के एक प्रमुख बागवानी उत्पाद के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से निदेशक आई०आई०टी० मण्डी, प्रो० लक्ष्मीधर बेहरा ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में निदेशक आई०आई०टी० मण्डी, प्रो० लक्ष्मीधर बेहरा ने मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री को उन्होंने इस्कॉन रांची द्वारा आगामी 04 सितंबर 2026 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कटहल मोड़, रांची में आयोजित होने वाले "श्री कृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव" में सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया।

साथ ही मुख्यमंत्री एवं उनके बीच राज्य में युवाओं के स्किल डेवलपमेंट, एआई, रोबोटिक्स एवं आधुनिक तकनीक की उपयोगिता के माध्यम से आर्थिक समृद्धि की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

मौके पर मुख्यमंत्री ने उन्हें श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित महामहोत्सव के लिए अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर इस्कॉन रांची के श्रीमान प्रदीप (PR) एवं श्रीमान सुधीर कृष्ण चैतन्य दास उपस्थित थे।

सिंधु जल संधि पर वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता अदालत के फैसले को भारत ने किया खारिज, दिया दो टूक जवाब

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भारत ने सिंधु जल संधि पर वर्ल्ड बैंक की बनाई कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) के फ़ैसले को मानने से इनकार कर दिया है। भारत ने कोर्ट को अवैध बताते हुए कहा कि इस मामले पर कोई सुनवाई उसके अधिकारी क्षेत्र में नहीं आता है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि CoA की ओर से दिए गए फैसलों का भारत की कार्रवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के निर्णय को भी दोहराया।

भारत ने संस्था को “अवैध रूप से गठित” बताया

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को सिंधु जल संधि को लेकर विश्व बैंक द्वारा गठित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने इस संस्था को “अवैध रूप से गठित” बताते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला लागू रहेगा। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि विश्व बैंक द्वारा गठित यह तथाकथित मध्यस्थता अदालत संधि की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए बनाई गई थी। इसलिए भारत इसके फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, जैसा कि वह इस संस्था की पिछली टिप्पणियों को भी खारिज करता रहा है।

भारत ने कहा- निकाय का गठन ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने कभी भी इस कथित मध्यस्थता अदालत के कानूनी अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया है। भारत का लगातार यह रुख रहा है कि इस निकाय का गठन ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत इस तथाकथित अदालत के समक्ष कभी पेश नहीं हुआ और न ही उसने इसके पहले दिए गए किसी फैसले या टिप्पणी को मान्यता दी है।

सिंधु जल समझौते पर मध्यस्थता कोर्ट ने क्या कहा

इससे पहले, नीदरलैंड के हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत ने आदेश दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि पूरी तरह से लागू है। मध्यस्थता अदालत ने भारत से कहा कि यह 'समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे।

सिंधु जल समझौता कब हुआ था

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल समझौता हुआ था। भारत का हमेशा से मानना रहा है कि सिंधु जल समझौता एकतरफा पाकिस्तान के हक में हुई और उसका अधिकतर लाभ उसे ही दिया जा रहा है और फिर भी वह उसका पूरी तरह से फायदा उठा नहीं पा रहा। पाकिस्तान ने हमेशा इस संधि का फायदा उठाते हुए खूब मनमानी की और भारत के सिंधु जलों पर समझौते के तहत मिले उचित अधिकारों के इस्तेमाल में भी अड़ंगा डालने की आदत बना ली। भारत ने सबकुछ सहते हुए 65 साल तक इस एकतरफा समझौते का पालन किया और सारे नुकसान को ताक पर रखकर संधि का सम्मान किया।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को किया था स्थगित

भारत ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पाकिस्तान के नेताओं ने कई बार पानी को अपनी 'रेड लाइन' बताया है और भारत के इस कदम को लेकर चेतावनी दी है। पाकिस्तान की ओर से इसे 'युद्ध की कार्रवाई' तक बताया जा चुका है

भारत की जीडीपी हुई 7.8% तो पीएम मोदी ने कांग्रेस को कोसा, जयराम रमेश ने भी पर साधा निशाना

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अप्रैल-जून तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दर उम्मीद से कहीं बेहतर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की 7.8 प्रतिशत आर्थिक विकास दर को लेकर देशवासियों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर निराशा का माहौल बनाने वाले आलोचकों पर तीखा तंज कसा है।

पीएम मोदी इस वक्त एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए बिश्केक में हैं। पीएम मोदी ने वहां से इंस्टाग्राम पर एक नया वीडियो साझा करते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश की सामूहिक शक्ति, संकल्प और मेहनत का नतीजा है। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया गंभीर आर्थिक अनिश्चितताओं और मंदी के दबाव से जूझ रही है, तब भारत की यह तेज रफ्तार देश के मजबूत बुनियादी ढांचे और अदम्य आर्थिक सामर्थ्य का जीता-जागता सबूत है। यह प्रदर्शन साबित करता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

पीएम मोदी ने देशवासियों को दी बधाई

पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम और ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, “मेरे देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। 7.8% की विकास दर – पूरा देश खुशी से भरा हुआ है। मैं देश के लोगों को उनके संकल्प और मेहनती स्वभाव के लिए बधाई देता हूं; यह हमारी सामूहिक ताकत को दिखाता है। दुनिया संघर्षों में फंसी हुई है; हर तरफ से युद्ध की खबरें आ रही हैं और दुनिया संकटों से घिरी हुई है। सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हुई। इसके बावजूद भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है।”

विपक्ष पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री ने कहा कि “एक तरफ भारत तमाम वैश्विक चुनौतियों को पार करते हुए आगे बढ़ रहा है, वहीं देश के भीतर कुछ लोग निराशा और झूठ का माहौल बनाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी चुनौतियों के बीच भारत ने 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल की है। हमें इस गति को बनाए रखना होगा। हमें आगे बढ़ते रहना होगा, और इसके लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनना जरूरी है।”

जयराम रमेश ने जीडीपी के आंकड़ों पर केन्द्र को घेरा

वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जीडीपी के आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।जयराम रमेश ने कहा कि ये आंकड़े अर्थव्यवस्था में घरेलू और विदेशी, दोनों तरह के निजी निवेश को लेकर बेहद कमजोर धारणा को नहीं दर्शाते। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता भरोसा बेहद सुस्त है और नवंबर 2025 से लगातार गिरावट की ओर है। कांग्रेस नेता ने कहा कि घरेलू जरूरत की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि शिक्षित बेरोजगारी चिंताजनक स्तर पर है।

एसआईआर में देश भर में 13 करोड़ नाम ड्राफ्ट से कटे, दिल्ली में सबसे अधिक कैंची चली

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चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तीसरे चरण का ड्राफ्ट आंकड़ा सामने आ चुका है। जून 2025 में शुरू हुई इस कवायद के तहत अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जा चुके हैं। सबसे ज्यादा दिल्ली और महाराष्ट्र में ये 'सफाई' हुई है। दिलचस्प बात ये है कि देशभर की वोटर लिस्ट में 34 लाख नाम ऐसे थे, जो अब इस दुनिया में ही नहीं थे। इनके नाम भी हटा दिए गए हैं।

हर तीन में से एक मतदाता ड्राफ्ट सूची से बाहर

सोमवार को दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। दिल्ली में एसआईआर से पहले करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे, लेकिन ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 97.53 लाख रह गई। यानी मतदाताओं की संख्या में करीब 32.8 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। यानी करीब हर तीन में से एक मतदाता फिलहाल ड्राफ्ट सूची से बाहर है।

महाराष्ट्र में 2 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटे

महाराष्ट्र में भी बड़ी संख्या में नाम हटे हैं। यहां एसआईआर से पहले करीब 9.78 करोड़ मतदाता थे, जो ड्राफ्ट रोल में घटकर 7.71 करोड़ रह गए। यानी राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 2.07 करोड़ नाम हटाए गए हैं। जो करीब 21.1 फीसदी की गिरावट आई है।

तीसरे चरण में अब तक 6.15 करोड़ नाम बाहर

चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के तीसरे चरण में शामिल 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अब तक कुल करीब 6.15 करोड़ नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग ने 14 मई को एसआईआर के तीसरे चरण की घोषणा की थी, जो 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित किया जाएगा। अब तक, इनमें से 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट रोल प्रकाशित किए जा चुके हैं, जबकि दो राज्यों (नागालैंड और त्रिपुरा) में अगले दो महीनों में गिनती का चरण शुरू होने वाला है।

34 लाख लोग मृत पाए गए

भारत निर्वाचन आयोग के डेटा के अनुसार, 1.54 करोड़ नाम (यानी 15.7%) अनुपस्थिति/जगह बदलने के कारण हटाए गए, जबकि 34 लाख लोग मृत पाए गए। दिलचस्प बात ये है कि देशभर की वोटर लिस्ट में 34 लाख नाम ऐसे थे, जो अब इस दुनिया में ही नहीं थे। इनके नाम भी हटा दिए गए हैं।

झारखंड में सीजनल इन्फ्लूएंजा (H1N1, H3N2) को लेकर अलर्ट, अस्पतालों में बनेंगे 10 बेड के आइसोलेशन वार्ड

देश के कई राज्यों दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान में इन्फ्लूएंजा A H1N1 और H3N2 सीजनल इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों को देखते हुए झारखंड सरकार का स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों के आलोक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने राज्य के सभी सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेजों और जिला सर्विलेंस पदाधिकारियों को अलर्ट रहने और सतत् निगरानी रखने का निर्देश जारी किया है। वहीं, एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम IDSP के तहत राज्य सर्विलेंस पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार सिंह की देखरेख में राज्यभर में ILI और SARI मामलों की दैनिक निगरानी और IHIP पोर्टल पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में झारखंड में इन्फ्लूएंजा के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात और जागरूकता से इसका बचाव संभव है।

संक्रमण से निपटने के लिए अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा के निर्देश पर राज्य स्तर पर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इन्फ्लूएंजा A H1N1 और H3N2 की जांच सुविधा रिम्स, रांची और एमजीएम, जमशेदपुर में उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा, सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में संभावित व संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए कम से कम 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है। अस्पतालों में PPE किट, N95 मास्क, ट्रिपल लेयर मास्क, VTM किट, आवश्यक दवाएं, ऑक्सीजन उपकरण और वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। वहीं अस्पतालों के OPD में आने वाले ILI सर्दी, खांसी, बुखार और SARI गंभीर श्वसन संक्रमण के मरीजों की अनिवार्य रूप से स्क्रीनिंग की जाएगी, जिसके लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मास्क पहनने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

आम जनमानस को जागरूक करने और संक्रमण से बचाव के प्रचार-प्रसार पर जानकारी देते हुए आईईसी के स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ. राहुल किशोर सिंह ने बताया कि इन्फ्लूएंजा से बचाव, लक्षण और 'क्या करें और क्या न करें' से संबंधित सामग्री के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी के अनुसार बुजुर्ग व्यक्ति, 5 वर्ष तक के छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं एवं अन्य पुरानी गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति इस संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हैं, इसलिए इनका विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

राज्य सर्विलेंस पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि सभी निजी व सरकारी अस्पतालों को मरीजों का डेटा IHIP पोर्टल पर नियमित दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।

संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सलाह जारी करते हुए कहा है कि भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाते समय मास्क पहनें, छींकते या खांसते वक्त रुमाल या कपड़े से मुंह-नाक ढंकें, और शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ पिएं। वहीं, अभिवादन के लिए हाथ मिलाने से बचें, सार्वजनिक स्थानों पर न थूकें, डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स दवाएं न लें,

और गंदे हाथों से आंख, नाक व मुंह को बार-बार न छुएं। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परामर्श, लक्षण दिखने पर सलाह या सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी के लिए राज्य सरकार का 24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन नंबर 104 डायल किया जा सकता है। लक्षण दिखने पर तुरंत अपने नजदीकी सदर अस्पताल या सरकारी चिकित्सा संस्थान में संपर्क करने की अपील की गई है।

एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

कांग्रेस ने आदिवासियों के साथ हमेशा किया छल, मिशनरी ने निभाई सहयोगी की भूमिका : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आदिवासियों के हक-अधिकार पर डाका डालने, इन्हें बरगलाने, राज्य की लगातार बदलती डेमोग्राफी को लेकर कांग्रेस, मिशनरी और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा आदिवासियों के साथ धोखा और छल करने का काम किया है। कांग्रेस द्वारा सहयोगी के रूप में आदिवासियों को बरगलाने और गुमराह करने के लिए मिशनरियों का उपयोग किया गया है। मिशनरियों ने भी आदिवासियों को सदैव भ्रमित किया है।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड बनने की मांग देश स्वतंत्र होने के साथ ही जोर पकड़ने लगी। लेकिन कांग्रेस ने बड़ी धूर्तता के साथ लगातार इस मांग को अनसुना और नजरअंदाज किया। नेता प्रतिपक्ष ने जयपाल सिंह मुंडा, कार्तिक उरांव और शिबू सोरेन के झारखंड आंदोलनों का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा कि कैसे कांग्रेस आंदोलनों को खरीदती और दबाती रही। कांग्रेस ने यहां के लोगों की भावनाओं की कभी कद्र नहीं की। कांग्रेस आदिवासियों के साथ छल, धोखा करती रही है और इसका साथ मिशनरियों ने बखूबी दिया है।

श्री मरांडी ने कहा कि अगर शुतुरमुर्ग की तरह हम सर छुपा कर रहेंगे तो शिकारी आएगा और मुर्गा का शिकार करके चला जाएगा। जयपाल सिंह मुंडा का जो मुर्गा छाप था, कांग्रेस उसे पहले भी शिकार कर चुकी है। कांग्रेस का वही खेल आज भी बदस्तूर जारी है। कांग्रेस का शुरू से सिद्धांत रहा है कि आदिवासी के नाम पर चिल्लाओ और उन्हें हाशिए पर धकेल दो। आज स्थिति बहुत ही खतरनाक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को यहां तक पहुंचाने में कौन जिम्मेवार रहा है, आज भी कौन जिम्मेवार है, इसके बारे में हम सबों को विचार और चर्चा करनी चाहिए।

श्री मरांडी ने कहा कि जहां तक संविधान से प्रदत्त आदिवासियों के हक अधिकार की बात है तो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पूरी तरह सुरक्षित है। आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों से कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। नरेंद्र मोदी इन अधिकारों पर खरोंच तक नहीं आने देंगे। श्री मरांडी ने आदिवासी समाज के लोगों से कांग्रेस और मिशनरियों की चाल और झांसे में नहीं फंसने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को लूटने की इजाज़त नहीं दे सकती है, इसके लिए जो लड़ाई लड़नी होगी लड़ी जाएगी।

उन्होंने मिशनरियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आदिवासियों को रैली में शामिल होने के लिए रांची के आर्च बिशप की ओर से पत्र जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि रैली में नहीं जाने पर 100 से लेकर 500 रुपए तक जुर्माना वसूलने की धमकी दी गई। इससे संबंधित उन्होंने एक ऑडियो क्लिप भी सुनाया। कांग्रेस आदिवासियों की झूठी हितैषी और लोकतंत्र की हिमायती बनती है और यहां इसके संवाहक मिशनरी बनी हुई है। मिशनरियों के इस कृत्य पर तरस और गुस्सा भी आता है। इस प्रकार का राजनीति खेल अगर ये खेलेंगे और आदिवासियों को बरगलाने का कोई काम करेगा तो यह बर्दाश्त से बाहर है।

श्री मरांडी ने कहा कि सुनियोजित तरीके से डेमोग्राफी चेंज किया जा रहा है। इस पर ना मिशनरी कुछ बोल रही है, ना कांग्रेस और न ही राज्य सरकार। डुगडुगी बजाकर आदिवासियों के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ने की बात करने वालों के द्वारा उन्हें गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बदलती डेमोग्राफी पर कांग्रेस, मिशनरी और हेमंत सरकार की चुप्पी घातक है।

श्री मरांडी ने कहा कि जिस प्रकार झारखंड और संथाल परगना की डेमोग्राफी चेंज हुई है, चेंज हो रही है और भविष्य में चेंज होगी, वह काफी चिंतनीय एवं भयावह है। इस दिशा में आदिवासी नहीं सोचेंगे, सरकार विचार नहीं करेगी तो जनसंख्या का आंकड़ा चीख चीख कर गवाही दे रहा है कि आदिवासियों के समक्ष महा भीषण संकट खड़ा होने वाला है। राज्य सरकार वोट बैंक की राजनीति के कारण पूरी तरह चुप है।

श्री मरांडी ने कहा कि 1951 में आदिवासियों की आबादी 35.38 प्रतिशत थी जो 2011 में घटकर 26.20 प्रतिशत रह गई। वहीं

मुस्लिम आबादी 8.9% से बढ़कर 14.53 प्रतिशत हो गई। ईसाई की आबादी में नहीं के बराबर अंतर हुआ।

1951 में सनातनियों की कुल आबादी 87.79% थी जो 2011 में घटकर 81.17% रह गई। उन्होंने कहा कि अगर इसी रफ्तार से आदिवासियों की आबादी घटी तो 2051 आते आते आदिवासियों की आबादी 22.21% रह जाएगी, वही सनातनियों की आबादी घटकर 76.88% रह जाएगी, जबकि मुस्लिम 19% हो जाएगा। उन्होंने संथाल परगना में आदिवासी आबादी के घटते प्रतिशत और मुस्लिम आबादी की वृद्धि का भी आंकड़ा के साथ मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी और दलित को संविधान में आबादी के अनुपात में हक और अधिकार प्राप्त होता है, इसलिए इस लिहाज से यह बड़े संकट की आहट है। राज्य सरकार को इसकी कतई चिंता नहीं है।

श्री मरांडी ने आदिवासी कल्याण समिति पाकुड़ का एक पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि कैसे संताल परगना में आदिवासियों की रैयती जमीनों पर कब्जा कर उस पर बहुमंज़िला भवन, कारखाना, मस्जिद , मदरसा आदि बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी कल्याण समिति की ओर से मुख्यमंत्री सहित केंद्र और अन्य स्थानों पर भेजे गए पत्र में पाकुड़ के कई इलाकों में फर्जी दान पत्र के जरिए आदिवासी जमीन पर कब्जे की बात कही गई है। इस पत्र में कई जगहों का जिक्र करते हुए बांग्लादेशियों के द्वारा जमीन लूट की शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। श्री मरांडी ने कहा कि बांग्लादेशियों द्वारा कई मोहल्लों को साफ कर दिया गया है। अभी झारखंड में तो कांग्रेस और jmm की सरकार है। मुख्यमंत्री को जांच करके बताना चाहिए कि मामले में क्या कार्रवाई हुई।

इस दौरान प्रेस वार्ता में अशोक बड़ाइक, रामकुमार पाहन, सनी टोप्पो, पिंकी खोया भी उपस्थित रहीं।

219वें उर्स में शामिल हुए मुख्यमंत्री, रिसालदार बाबा की मजार पर की चादरपोशी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज रांची के डोरंडा स्थित हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार बाबा की मजार पर आयोजित 219वें उर्स में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने परंपरा के अनुरूप मजार पर चादरपोशी की तथा राज्य की सुख-समृद्धि, अमन-चैन, प्रगति एवं खुशहाली के लिए दुआ मांगी।

मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार बाबा की शिक्षाएं प्रेम, भाईचारे, इंसानियत और आपसी सौहार्द का संदेश देती हैं।

उन्होंने उर्स के पाक मौके पर राज्यवासियों के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री ने राज्य में आपसी भाईचारा, सामाजिक सद्भाव एवं एकजुटता की भावना के और अधिक मजबूत होने की दुआ की। उन्होंने उर्स में शामिल सभी अकीदतमंदों एवं राज्यवासियों को उर्स की शुभकामनाएं दीं।