सिंधु जल संधि पर वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता अदालत के फैसले को भारत ने किया खारिज, दिया दो टूक जवाब
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भारत ने सिंधु जल संधि पर वर्ल्ड बैंक की बनाई कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) के फ़ैसले को मानने से इनकार कर दिया है। भारत ने कोर्ट को अवैध बताते हुए कहा कि इस मामले पर कोई सुनवाई उसके अधिकारी क्षेत्र में नहीं आता है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि CoA की ओर से दिए गए फैसलों का भारत की कार्रवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के निर्णय को भी दोहराया।
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भारत ने संस्था को “अवैध रूप से गठित” बताया
विदेश मंत्रालय ने सोमवार को सिंधु जल संधि को लेकर विश्व बैंक द्वारा गठित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने इस संस्था को “अवैध रूप से गठित” बताते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला लागू रहेगा। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि विश्व बैंक द्वारा गठित यह तथाकथित मध्यस्थता अदालत संधि की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए बनाई गई थी। इसलिए भारत इसके फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, जैसा कि वह इस संस्था की पिछली टिप्पणियों को भी खारिज करता रहा है।
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भारत ने कहा- निकाय का गठन ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने कभी भी इस कथित मध्यस्थता अदालत के कानूनी अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया है। भारत का लगातार यह रुख रहा है कि इस निकाय का गठन ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत इस तथाकथित अदालत के समक्ष कभी पेश नहीं हुआ और न ही उसने इसके पहले दिए गए किसी फैसले या टिप्पणी को मान्यता दी है।
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सिंधु जल समझौते पर मध्यस्थता कोर्ट ने क्या कहा
इससे पहले, नीदरलैंड के हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत ने आदेश दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि पूरी तरह से लागू है। मध्यस्थता अदालत ने भारत से कहा कि यह 'समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे।
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सिंधु जल समझौता कब हुआ था
भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल समझौता हुआ था। भारत का हमेशा से मानना रहा है कि सिंधु जल समझौता एकतरफा पाकिस्तान के हक में हुई और उसका अधिकतर लाभ उसे ही दिया जा रहा है और फिर भी वह उसका पूरी तरह से फायदा उठा नहीं पा रहा। पाकिस्तान ने हमेशा इस संधि का फायदा उठाते हुए खूब मनमानी की और भारत के सिंधु जलों पर समझौते के तहत मिले उचित अधिकारों के इस्तेमाल में भी अड़ंगा डालने की आदत बना ली। भारत ने सबकुछ सहते हुए 65 साल तक इस एकतरफा समझौते का पालन किया और सारे नुकसान को ताक पर रखकर संधि का सम्मान किया।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को किया था स्थगित
भारत ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पाकिस्तान के नेताओं ने कई बार पानी को अपनी 'रेड लाइन' बताया है और भारत के इस कदम को लेकर चेतावनी दी है। पाकिस्तान की ओर से इसे 'युद्ध की कार्रवाई' तक बताया जा चुका है














6 hours ago
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