45 फीट गहराई में थमी थीं सांसें, तीन घंटे में जिंदगी की जंग जीत गई सोम्या
...............
बहादुर सोम्या बेटी को स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की तत्परता से मिला नया जीवन
******************
एक संकरा सूखा पड़ा कुआं … 45 फीट की गहराई… अंधेरे में जिंदगी के लिए जूझती मासूम और उसे बचाने के लिए दौड़ती पूरी सरकारी मशीनरी
::::::;; ::::::::::::: ::::::::
फर्रुखाबाद।
वह सिर्फ एक कुआं नहीं था…
वह 45 फीट गहरा अंधेरा था, जिसमें एक मासूम की सांसें जिंदगी से जंग लड़ रही थीं।
एक ओर घबराए परिजन और चिंतित ग्रामीण थे, तो दूसरी ओर प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, एम्बुलेंस सेवा और चिकित्सा टीम—हर किसी के सामने एक ही लक्ष्य था: सोम्या को सुरक्षित जिंदगी वापस दिलाना।
नवाबगंज ब्लॉक के रसिदाबाद वल्लभ गांव में जब मासूम सोम्या के कुआं में गिरने की सूचना मिली, तो मानो समय के खिलाफ दौड़ शुरू हो गई। सूचना मिलते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू एवं चिकित्सा व्यवस्था को सक्रिय कर दिया।
एमओआईसी कायमगंज डॉ. विनीत एवं एमओआईसी नवाबगंज डॉ. लोकेश शर्मा तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुए। तीन 108 एम्बुलेंस भी मौके पर भेजी गईं। ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ रेस्क्यू टीम ने बोरवेल में उतरकर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने की जद्दोजहद शुरू की।
महज तीन घंटे में जिंदगी की जंग जीत गई सोम्या.............
करीब तीन घंटे की अथक और समन्वित कार्रवाई के बाद वह भावुक कर देने वाला क्षण आया, जिसका हर कोई इंतजार कर रहा था—मासूम सोम्या को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
घटना की सूचना से लेकर रेस्क्यू की सफलता तक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जिस तत्परता से काम किया, वह आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय, विभागीय समन्वय और जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण बन गया।
सक्रिय प्रशासनिक व्यवस्था ने दिखाई अपनी ताकत.........
जिलाधिकारी महोदय डॉ. अंकुर लाठर की सक्रिय प्रशासनिक कार्यप्रणाली, त्वरित निर्णय क्षमता और सतत निगरानी के तहत संबंधित विभागों को तत्काल सक्रिय किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि रेस्क्यू के साथ-साथ एम्बुलेंस, चिकित्सा परीक्षण और अस्पताल में उपचार की व्यवस्थाएं समानांतर रूप से आगे बढ़ती रहीं।
उद्देश्य स्पष्ट था—बच्ची को कुआं से निकालने के बाद चिकित्सा सहायता में एक क्षण की भी अनावश्यक देरी न हो।
45 फीट की गहराई से सुरक्षित बाहर आई सोम्या इस त्वरित और समन्वित प्रशासनिक कार्रवाई की जीवंत मिसाल बन गई।
पिछले दो महीनों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली में दिखा नया आयाम. ****************************
गौरतलब है कि सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय ने लगभग दो माह पूर्व जनपद फर्रुखाबाद के स्वास्थ्य विभाग की कमान संभाली है।
इन दो महीनों में स्वास्थ्य सेवाओं में तत्परता, सक्रियता, त्वरित प्रतिक्रिया और विभागीय व अन्तर विभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को केवल अस्पताल और चिकित्सा सेवाओं तक सीमित न रखते हुए, अन्य विभागों के साथ समन्वय कर संकट की स्थिति में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की कार्यसंस्कृति को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सोम्या के रेस्क्यू की घटना में इसका व्यावहारिक और प्रत्यक्ष स्वरूप सामने आया।
घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीमों का तत्काल सक्रिय होना, मौके पर चिकित्सा व्यवस्था पहुंचना, 108 एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित होना, रेस्क्यू के बाद तत्काल मेडिकल असेसमेंट और फिर जिला चिकित्सालय में बिना समय गंवाए जांच एवं उपचार शुरू होना—इस पूरी श्रृंखला में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और समन्वित कार्यप्रणाली की स्पष्ट झलक दिखाई दी।
सीएमओ डॉ. आनंद उपाध्याय के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया, सतत निगरानी और अन्य विभागों के साथ प्रभावी समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। सोम्या का सफल रेस्क्यू इस कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक परिणाम बनकर सामने आया।
कुआं से अस्पताल तक—हर कदम पर जिंदगी की सुरक्षा
सोम्या के बाहर आने के बाद भी चिकित्सा टीम ने किसी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती।
डिप्टी सीएमओ डॉ. आर.सी. माथुर के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने मौके पर ही बच्ची का तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण किया। चिकित्सक एवं स्टाफ नर्स की निगरानी में उसे 108 एम्बुलेंस द्वारा तत्काल जिला चिकित्सालय लोहिया भेजा गया।
सूखे कुआं के अंधेरे से अस्पताल की रोशनी तक—सोम्या की जिंदगी की यह यात्रा हर कदम पर चिकित्सकीय निगरानी में आगे बढ़ी।
जिला अस्पताल में खुला जिंदगी बचाने का दूसरा मोर्चा+++++++++++++
जिला चिकित्सालय लोहिया में सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा के नेतृत्व में डॉ. विवेक सक्सेना एवं अन्य चिकित्सकों ने तत्काल चिकित्सा मोर्चा संभाला।
आवश्यक रक्त जांच, सीटी स्कैन सहित अन्य चिकित्सकीय परीक्षण तत्काल कराए गए। चिकित्सकों ने लगातार निगरानी रखते हुए आवश्यक उपचार एवं सुरक्षित मेडिकल मैनेजमेंट सुनिश्चित किया।
और फिर आया वह सुकून देने वाला पल—
सोम्या सुरक्षित थी।
जिस बच्ची के लिए कुछ घंटे पहले पूरा गांव सांस रोके खड़ा था, वही बच्ची अब चिकित्सकों की निगरानी में सुरक्षित थी।
यह सिर्फ रेस्क्यू नहीं—टीमवर्क की जीत है
यह घटनाक्रम दिखाता है कि आपदा या आपात स्थिति में—
सूचना → त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई → रेस्क्यू → एम्बुलेंस → चिकित्सकीय परीक्षण → अस्पताल में उपचार
की प्रत्येक कड़ी यदि समय पर सक्रिय हो जाए, तो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी जिंदगी बचाई जा सकती है।
सोम्या का सुरक्षित बचना इसी समन्वित कार्यप्रणाली की सफलता है।
सीएमओ की अपील—“एक बोरवेल / सूखा कुआं बंद करना, एक जिंदगी बचाना है”
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने जनपदवासियों से अपील की है कि अनुपयोगी बोरवेल, खुले कुएं एवं गड्ढों को किसी भी स्थिति में खुला न छोड़ें। उन्हें सुरक्षित रूप से ढककर रखें और बच्चों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखें।
उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल अभिभावकों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी सभी चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों को जनसेवा के लिए तत्पर एवं उपलब्ध रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
एक बेटी बची… एक परिवार बचा… एक उम्मीद बची *******************
45 फीट की गहराई से बाहर आई सोम्या आज सिर्फ एक सुरक्षित बच्ची नहीं, बल्कि उम्मीद की एक जीवित तस्वीर है।
उसकी कहानी कहती है—
अंधेरा कितना भी गहरा हो,
अगर बचाने वाले हाथ समय पर पहुंच जाएं,
तो जिंदगी रोशनी तक लौट सकती है।
बहादुर सोम्या को सलाम।
रेस्क्यू टीम के साहस को सलाम।
चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता को सलाम।
प्रशासनिक समन्वय को सलाम।
और सबसे बढ़कर—
“जब प्रशासन की तत्परता, स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और टीमों का समन्वय एक साथ खड़ा होता है, तो 45 फीट का अंधेरा भी जिंदगी की रोशनी को रोक नहीं सकता।”
“हर बच्चा सुरक्षित हो—यही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और यही हमारी सबसे बड़ी जीत है।”
Aug 22 2026, 09:52
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
2.5k