राजेपुर: बदहाली की कगार पर केवल नगला का पंचायत घर, ताला लटका मिला
ग्रामीणों का आरोप— 'निजी काम में लाया जा रहा सरकारी सामान'
राजेपुर विकासखंड क्षेत्र के गांव नगला केवल का सरकार भले ही गांवों को डिजिटल बनाने और पंचायत सचिवालयों के जरिए ग्रामीणों को गांव में ही सभी सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन विकासखंड क्षेत्र राजेपुर के ग्राम केवल नगला से आई तस्वीर इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां स्थित पंचायत घर लंबे समय से ताले में बंद है और देख-रेख के अभाव में पूरी तरह जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है।
जर्जर इमारत और बंद ताला
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पंचायत भवन का ढांचा जर्जर हो चुका है। दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा है, बाउंड्री वॉल पूरी तरह क्षतिग्रस्त है और चारों तरफ झाड़ियां व घास उगी हुई हैं। मुख्य गेट पर ताला लटक रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यहां ग्रामीणों के लिए कोई जनसुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
ग्रामीणों ने बोला हमला, लगाए गंभीर आरोप
पंचायत भवन की बदहाली और सुविधाओं के न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने पंचायत घर के बाहर एकत्र होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध प्रदर्शन करने वालों में संतोष सिंह, सुभाष चंद्र पांडे, जसवंत, राजीव, विमल पांडे (उर्फ मुखिया), विनोद सिंह, हनी सिंह और कमलेश समेत बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।
ग्रामीणों के मुख्य आरोप:
सरकारी संपत्ति का निजी इस्तेमाल: ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन के लिए आए सरकारी इनवर्टर, बैटरी सोलर पैनल और कंप्यूटर को ग्राम प्रधान अपने निजी उपयोग में ले रहे हैं।
सुविधाओं से वंचना: पंचायत घर में ताला लटके रहने के कारण ग्रामीणों को आय, जाति, निवास व अन्य डिजिटल सुविधाओं के लिए तहसील व ब्लॉक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
भवन की उपेक्षा: पंचायत भवन की मरम्मत और रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे लाखों की लागत से बनी सरकारी इमारत खंडहर में तब्दील हो रही है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
ग्राम प्रधान (अखिलेश):
जब इस पूरे मामले और आरोपों पर ग्राम प्रधान अखिलेश से उनका पक्ष जानने के लिए बात की गई, तो उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि— "लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद हैं।"
पंचायत सचिव (राजीव सुमन):
वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहे पंचायत सचिव राजीव सुमन से जब इस बाबत सवाल किया गया, तो उन्होंने मामले से पूरी तरह अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि— "उन्हें इस मामले की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है।"
उठते बड़े सवाल और ग्रामीणों की मांग
एक तरफ ग्रामीण भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों का 'अनभिज्ञ' होना प्रशासनिक ढिलाई की ओर इशारा करता है।
ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों व जिला प्रशासन से मांग की है कि:
पंचायत भवन में मौजूद सरकारी सामग्री (कंप्यूटर, इनवर्टर सोलर पैनल आदि) की तत्काल जांच कराई जाए।
पंचायत घर की मरम्मत कराकर इसे नियमित रूप से खुलवाया जाए ताकि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
Aug 04 2026, 19:30
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