कटर छीनने पर छात्र को बनाया मुर्गा, बेहोश होकर गिरा, शिकायत करने पर पिता से प्रधानाचार्य ने की मारपीट

जिलाधिकारी को पिता ने स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध दिया पत्र


फर्रुखाबाद। नबावगंज थाना क्षेत्र में स्थित आदर्श पब्लिक स्कूल फतनपुर में कक्षा एक के छात्र को शिक्षक ने कटर छीनने वाले छात्र को सजा न देकर किशोर छात्र को क्लाश रुम में कई घंटे तक मुर्गा बनाकर रखने पर किशोर छात्र बेहोश होकर कक्षा में गिर गया तो शिक्षक ने उसे तत्काल घर भेज दिया। घर पहुंचते ही छात्र ने उसके साथ हुई घटना से पिता को बताया तो पहले उसे दवा दिलाई और दूसरे दिन शिकायत करने स्कूल गए तो प्रधानाचार्य ने शिकायत को सुनने से साफ इंकार कर दिया बल्कि उनके साथ मारपीट करने लगे। पीड़ित पिता ने सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी डॉ अंकुर लाठर को स्कूल प्रधानाचार्य और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया है। जिला अधिकारी ने पीड़ित को कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
महिला आयोग उपाध्यक्ष ने  पीएमश्री की बालिकाओ से किया संवाद, आत्मसुरक्षा की दी जानकारी

फर्रुखाबाद l पीएम श्री बालिका विद्यालय की छात्राओं के साथ महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कॉलेज में पहुंचकर छात्राओं से सीधे संवाद किया और उन्हें महिला मिशन शक्ति की हेल्पलाइन के साथ ही साथ आत्म सुरक्षा करने के संबंध में उन्हें जानकारियां दी उन्होंने कहा कि महिला आयोग सदैव उनके साथ है और संपर्क करने पर आयोग पूरा सहयोग करेगा बिना किसी दबाव के सीधे बात करें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री महिला मिशन शक्ति पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रहे हैं वह चाहते हैं कि बेटियां सुरक्षित रहकर अपने मुकाम तक आसानी से पहुंच सके।
राजेपुर: बदहाली की कगार पर केवल नगला का पंचायत घर, ताला लटका मिला

ग्रामीणों का आरोप— 'निजी काम में लाया जा रहा सरकारी सामान'

राजेपुर विकासखंड क्षेत्र के गांव नगला केवल का सरकार भले ही गांवों को डिजिटल बनाने और पंचायत सचिवालयों के जरिए ग्रामीणों को गांव में ही सभी सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन विकासखंड क्षेत्र राजेपुर के ग्राम केवल नगला से आई तस्वीर इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां स्थित पंचायत घर लंबे समय से ताले में बंद है और देख-रेख के अभाव में पूरी तरह जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है।
जर्जर इमारत और बंद ताला
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पंचायत भवन का ढांचा जर्जर हो चुका है। दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा है, बाउंड्री वॉल पूरी तरह क्षतिग्रस्त है और चारों तरफ झाड़ियां व घास उगी हुई हैं। मुख्य गेट पर ताला लटक रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यहां ग्रामीणों के लिए कोई जनसुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
ग्रामीणों ने बोला हमला, लगाए गंभीर आरोप
पंचायत भवन की बदहाली और सुविधाओं के न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने पंचायत घर के बाहर एकत्र होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध प्रदर्शन करने वालों में संतोष सिंह, सुभाष चंद्र पांडे, जसवंत, राजीव, विमल पांडे (उर्फ मुखिया), विनोद सिंह, हनी सिंह और कमलेश समेत बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।
ग्रामीणों के मुख्य आरोप:
सरकारी संपत्ति का निजी इस्तेमाल: ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन के लिए आए सरकारी इनवर्टर, बैटरी सोलर पैनल और कंप्यूटर को ग्राम प्रधान अपने निजी उपयोग में ले रहे हैं।
सुविधाओं से वंचना: पंचायत घर में ताला लटके रहने के कारण ग्रामीणों को आय, जाति, निवास व अन्य डिजिटल सुविधाओं के लिए तहसील व ब्लॉक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
भवन की उपेक्षा: पंचायत भवन की मरम्मत और रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे लाखों की लागत से बनी सरकारी इमारत खंडहर में तब्दील हो रही है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
ग्राम प्रधान (अखिलेश):
जब इस पूरे मामले और आरोपों पर ग्राम प्रधान अखिलेश से उनका पक्ष जानने के लिए बात की गई, तो उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि— "लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद हैं।"
पंचायत सचिव (राजीव सुमन):
वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहे पंचायत सचिव राजीव सुमन से जब इस बाबत सवाल किया गया, तो उन्होंने मामले से पूरी तरह अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि— "उन्हें इस मामले की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है।"
उठते बड़े सवाल और ग्रामीणों की मांग
एक तरफ ग्रामीण भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों का 'अनभिज्ञ' होना प्रशासनिक ढिलाई की ओर इशारा करता है।
ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों व जिला प्रशासन से मांग की है कि:
पंचायत भवन में मौजूद सरकारी सामग्री (कंप्यूटर, इनवर्टर सोलर पैनल आदि) की तत्काल जांच कराई जाए।
पंचायत घर की मरम्मत कराकर इसे नियमित रूप से खुलवाया जाए ताकि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
एफआरयू में ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित होने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती
फर्रुखाबाद।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने जनपद में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से फर्स्ट रेफरल यूनिट की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी एफआरयू पर ब्लड स्टोरेज यूनिट की स्थापना एवं संचालन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव सहित अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर सुरक्षित रक्त की उपलब्धता मातृ मृत्यु दर में कमी लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
सीएमओ ने कहा कि ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित होने से जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे गंभीर मरीजों एवं गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए अनावश्यक रूप से जिला अस्पताल रेफर करने की आवश्यकता कम होगी। इससे उपचार की गति बढ़ेगी और मरीजों को समय रहते जीवनरक्षक सेवाएं मिल सकेंगी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग केवल ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वैच्छिक रक्तदान को भी निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जनपद में समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर अधिकाधिक रक्त संग्रहित किया जा रहा है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर किसी भी मरीज को समय पर सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं युवाओं से भी नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील की।
डॉ. आनंद उपाध्याय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ब्लड स्टोरेज यूनिट के संचालन के लिए आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कोल्ड चेन व्यवस्था एवं गुणवत्ता मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ब्लड बैंक एवं एफआरयू के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, जिससे रक्त की उपलब्धता एवं आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।
उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनपद में सुरक्षित मातृत्व एवं आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। ब्लड स्टोरेज यूनिट और स्वैच्छिक रक्तदान अभियान के प्रभावी संचालन से जनपद के मरीजों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध होगा तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
एफआरयू में ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित होने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती
फर्रुखाबाद।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने जनपद में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से फर्स्ट रेफरल यूनिट की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी एफआरयू पर ब्लड स्टोरेज यूनिट की स्थापना एवं संचालन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव सहित अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर सुरक्षित रक्त की उपलब्धता मातृ मृत्यु दर में कमी लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
सीएमओ ने कहा कि ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित होने से जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे गंभीर मरीजों एवं गर्भवती महिलाओं को उपचार के लिए अनावश्यक रूप से जिला अस्पताल रेफर करने की आवश्यकता कम होगी। इससे उपचार की गति बढ़ेगी और मरीजों को समय रहते जीवनरक्षक सेवाएं मिल सकेंगी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग केवल ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वैच्छिक रक्तदान को भी निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जनपद में समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर अधिकाधिक रक्त संग्रहित किया जा रहा है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर किसी भी मरीज को समय पर सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं युवाओं से भी नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील की।
डॉ. आनंद उपाध्याय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ब्लड स्टोरेज यूनिट के संचालन के लिए आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कोल्ड चेन व्यवस्था एवं गुणवत्ता मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ब्लड बैंक एवं एफआरयू के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, जिससे रक्त की उपलब्धता एवं आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।
उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनपद में सुरक्षित मातृत्व एवं आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। ब्लड स्टोरेज यूनिट और स्वैच्छिक रक्तदान अभियान के प्रभावी संचालन से जनपद के मरीजों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध होगा तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जाएं सभी आवश्यक दवाएं, बाहर की दवा लिखने पर होगी सख्त कार्रवाई
फर्रुखाबाद l
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने जनपद के समस्त सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दवा उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं चिकित्सकों को निर्देश दिए कि अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को निर्धारित सूची के अनुसार आवश्यक दवाएं अस्पताल से ही उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर की दवाएं लिखने अथवा खरीदने के लिए बाध्य करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सीएमओ ने कहा कि शासन द्वारा सरकारी चिकित्सालयों में आवश्यक एवं जीवनरक्षक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। ऐसे में प्रत्येक प्रभारी चिकित्सा अधिकारी नियमित रूप से दवा स्टॉक की समीक्षा करें तथा किसी भी दवा की कमी होने पर समय रहते उसकी मांग भेजकर उपलब्धता सुनिश्चित करें। मरीजों को उपचार के दौरान दवाओं के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए।
डॉ. आनंद उपाध्याय ने निर्देश दिए कि अस्पतालों में दवा वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी एवं व्यवस्थित रखी जाए। चिकित्सक केवल आवश्यकता के अनुरूप ही दवाएं लिखें तथा उपलब्ध सरकारी दवाओं को प्राथमिकता दें। यदि किसी विशेष परिस्थिति में अस्पताल में दवा उपलब्ध न हो तो उसका स्पष्ट अभिलेखीकरण किया जाए और उसकी तत्काल व्यवस्था कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि अस्पतालों के औषधि भंडार, दवा वितरण कक्ष एवं स्टॉक रजिस्टर का नियमित निरीक्षण किया जाए। दवा वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही अथवा शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल जांच कर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सीएमओ ने कहा कि जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल उपचार प्रदान करना नहीं, बल्कि मरीजों का आर्थिक बोझ कम करना भी है। सरकारी चिकित्सालयों में निःशुल्क दवा, जांच एवं उपचार की व्यवस्था का लाभ प्रत्येक पात्र मरीज तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों से अपेक्षा की कि मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए शासन की मंशा के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, सुलभ एवं भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएं।
ई कवच पोर्टेल 104 पर गर्भवती महिलाओं की जानकारी दे

फर्रुखाबाद।
ई-कवच पोर्टल पर गर्भवती महिलाओं की प्रत्येक जानकारी समय से अपडेट करें, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित होगी निगरानी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने जनपद में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से संबंधित अधिकारियों, प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि ई-कवच पोर्टल पर गर्भवती महिलाओं से संबंधित प्रत्येक सूचना का समयबद्ध, शत-प्रतिशत एवं त्रुटिरहित अंकन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर दर्ज गुणवत्तापूर्ण डाटा के आधार पर ही गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं समय पर आवश्यक हस्तक्षेप संभव हो पाता है।
सीएमओ ने कहा कि ई-कवच पोर्टल के माध्यम से योग्य दम्पतियों की पहचान, गर्भवती महिलाओं का शीघ्र पंजीकरण, प्रसव पूर्व जांच , उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था  की पहचान, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, प्रसव परिणाम, मातृ मृत्यु तथा प्रसवोत्तर देखभाल से संबंधित सभी सूचनाएं दर्ज की जाती हैं। इसलिए किसी भी स्तर पर डाटा अधूरा अथवा त्रुटिपूर्ण नहीं होना चाहिए।
डॉ. आनंद उपाध्याय ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का प्रथम तिमाही में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा निर्धारित समय पर सभी प्रसव पूर्व जांच कराई जाएं। जिन महिलाओं में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के लक्षण पाए जाएं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक उपचार एवं समयबद्ध रेफरल उपलब्ध कराया जाए। ऐसे सभी मामलों का नियमित फॉलोअप भी सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि जीवित जन्म, मृत जन्म, गर्भपात, मातृ मृत्यु एवं अन्य प्रसव परिणामों से संबंधित सूचनाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर ई-कवच पोर्टल पर अपडेट की जाएं। संबंधित अधिकारी समय-समय पर पोर्टल पर दर्ज डाटा का सत्यापन करें, जिससे शासन स्तर पर होने वाली समीक्षा में जनपद की वास्तविक एवं गुणवत्तापूर्ण प्रगति परिलक्षित हो सके।
104 कॉल सेंटर से प्राप्त कॉल का करें सत्यापन में सहयोग
सीएमओ ने बताया कि राज्य स्तर से 104 स्वास्थ्य हेल्पलाइन के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं का समय-समय पर सत्यापन किया जाता है। उन्होंने एएनएम, आशा एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित किया कि वे गर्भवती महिलाओं को पहले से जागरूक करें कि 104 हेल्पलाइन से आने वाली कॉल अवश्य रिसीव करें तथा सही जानकारी उपलब्ध कराएं। यदि किसी लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कोई समस्या हो तो उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में  नियमित समीक्षा होगी।
डॉ. आनंद उपाध्याय ने निर्देश दिए कि ई-कवच पोर्टल पर पंजीकरण, एएनसी, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, प्रसव परिणाम, मातृ मृत्यु एवं प्रसवोत्तर सेवाओं की प्रगति की प्रत्येक माह जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में विस्तार से समीक्षा की जाए। जहां भी कमियां पाई जाएं, उन्हें तत्काल दूर करते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व प्रत्येक महिला का अधिकार है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल शत-प्रतिशत पंजीकरण नहीं, बल्कि प्रत्येक गर्भवती महिला को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ई-कवच पोर्टल पर सही एवं समयबद्ध डाटा, नियमित फील्ड मॉनिटरिंग तथा 104 हेल्पलाइन के माध्यम से होने वाला सत्यापन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कांवड़ यात्रा के दृष्टिगत पांचाल घाट पर जिलाधिकारी ने व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश*

फर्रुखाबाद । शासन के निर्देशानुसार श्रावण मास में आयोजित कांवड़ यात्रा को सकुशल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने गंगा नदी के पांचाल घाट पर जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने घाटों पर सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पेयजल, शौचालय, चिकित्सा सुविधा, कंट्रोल रूम, गोताखोरों एवं जल पुलिस की तैनाती सहित श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु किए गए सभी प्रबंधों का गहन जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने पाए तथा सभी व्यवस्थाएं सतत रूप से संचालित रहें।
जिलाधिकारी ने घाटों पर साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने, पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मियों की तैनाती, पेयजल की उपलब्धता तथा विद्युत व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा संवेदनशील स्थलों पर पुलिस बल एवं गोताखोरों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाए, साथ ही आपदा की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभाग पूरी तरह सतर्क एवं तैयार रहें।
  उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए निर्धारित डायवर्जन योजना का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाए तथा श्रद्धालुओं को आवश्यक जानकारी समय-समय पर उपलब्ध कराई जाए। चिकित्सा टीम, एंबुलेंस एवं अग्निशमन विभाग को भी पूर्ण सतर्कता के साथ तैनात रखने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि कांवड़ यात्रा आस्था का महत्वपूर्ण पर्व है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए शासन की मंशा के अनुरूप यात्रा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराएं। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक आरती सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक गिरीश कुमार सिंह, नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार, उप जिलाधिकारी सदर संजय कुमार, खण्ड विकास अधिकारी बढ़पुर डॉ0 फरहाना खान, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका विनोद कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश चंद्र सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर पहुंचने पर जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों एवं शरणालय स्थलों का किया निरीक्षण

फर्रुखाबाद । नरौरा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर पहुंचने के दृष्टिगत जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर जिला प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ग्राम तीसराम मड़ैया, ग्राम चित्रकूट तथा राजेपुर स्थित महात्मा गांधी इंटर कॉलेज एवं राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में स्थापित शरणालय स्थलों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से शरणार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जा रही व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा निर्देश दिए कि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।जिलाधिकारी ने शरणालय स्थलों पर पेयजल, विद्युत, शौचालय, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, भोजन, चिकित्सा सुविधा, बच्चों एवं महिलाओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं तथा पशुओं के चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पूर्णतः तैयार रहें तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए उन्होंने बाढ़ प्रभावित कृषि भूमि एवं जलभराव की स्थिति का भी निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित क्षेत्रों की निरंतर निगरानी की जाए। ग्राम स्तर पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्क रहने तथा जलस्तर में किसी भी प्रकार की वृद्धि होने पर तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचित करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद प्रशासन द्वारा संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। राहत सामग्री, नावों, चिकित्सा दलों तथा आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अफवाहों पर ध्यान न दें तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचित करें। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक  आरती सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी अमृतपुर स्वेता साहू, तहसीलदार शशांक सिंह, खंड विकास अधिकारी राजेपुर सुनील जायसवाल सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
तहसील समाधान दिवस में जिलाधिकारी ने सुनी जनसमस्याएं, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण के दिए निर्देश*
फर्रुखाबाद । अमृतपुर तहसील के सभा कक्ष में "तहसील समाधान दिवस" का जिलाधिकारी डॉक्टर अंकुर लाठर की अध्यक्षता में आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप तहसील समाधान दिवस का उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राजस्व, पुलिस, विकास, विद्युत, सिंचाई, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण एवं अन्य विभागों से संबंधित प्राप्त शिकायतों का मौके पर जाकर सत्यापन कर नियमानुसार निस्तारण किया जाए। किसी भी शिकायत के निस्तारण में अनावश्यक विलंब अथवा लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
समाधान दिवस के दौरान प्राप्त प्रार्थना पत्रों में मुख्य रूप से भूमि विवाद, पैमाइश, कब्जा, सड़क, जल निकासी, विद्युत आपूर्ति, पेंशन तथा अन्य जनसुविधाओं से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुईं। जिलाधिकारी ने गंभीर प्रकृति के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने तथा शिकायतकर्ताओं को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि समाधान दिवस में प्राप्त सभी प्रकरणों की नियमित समीक्षा की जाए तथा निस्तारण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे आमजन को पारदर्शी एवं प्रभावी प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अमृतपुर तहसील में आयोजित तहसील दिवस के दौरान कुल 138 प्रकरण प्राप्त हुए, जिसमें राजस्व विभाग के 55, पुलिस विभाग के 26, विकास विभाग के 22, विद्युत विभाग के 06, खाद्य एवं रसद विभाग के 08 एवं अन्य विभागों के 21 प्रकरण सम्मिलित रहे, इनमें से 04 प्रकरणों को मौके पर निस्तारित किया गया।
तहसील दिवस के बाद जिलाधिकारी ने अमृतपुर तहसील परिसर में वृक्षारोपण किया, यहां पर उन्होंने आमजनमानस से अपील करते हुए कहा कि वह अपने जीवन में पेड़ अनिवार्य रूप से लगाए जिससे आने वाली पीढियों को स्वच्छ एवं स्वास्थ्यवर्धक वातावरण प्राप्त हो सके। इसके पश्चात जिलाधिकारी ने कुठला झील पर पर्यटन विकास की संभावनाओं की दृष्टिगत पर्यटन विभाग द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों का निरीक्षण किया यहां पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि झील पर व्यवस्थित रूप से साफ सफाई कराते हुए पर्यटन विकास के अंतर्गत आवश्यक कार्य पूर्ण करें, जिससे लोगों को पर्यटन योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके।
इस दौरान पर पुलिस अधीक्षक आरती सिंह, मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी राजीव कुमार, उप जिलाधिकारी स्वेता साहू, परियोजना निदेशक डीआरडीए कपिल कुमार, क्षेत्राधिकारी अमृतपुर, तहसीलदार शशांक सिंह सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी तथा तहसील स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।