घर में अचानक आग लगने से लाखो का नुकशान पीडित ने कोतबाली में दिया शिकायती पत्र
रितेश मिश्रा
बेनीगंज(हरदोई)।  कोतवाली क्षेत्र  बेनीगंज के अंतर्गत ग्राम कुइयाँ निवासी भैयालाल पुत्र फत्ते पासी के घर में शनिवार तड़के आग लग गई। जिससे कि हुए अग्निकांड से भारी नुकसान हो गया। गृहस्वामी ने स्थानीय कोतवाली में शिकायती पत्र देते हुए बताया कि तरकीबन सुबह चार बजे घर के कमरे में रखा डी फ्रीजर अचानक अत्यधिक गर्म होकर धू-धू कर जलने लगा। देखते ही देखते आग ने पूरे कमरे को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे कमरे में रखा अधिकांश सामान जलकर नष्ट हो गया।
पीड़ित भैयालाल के अनुसार आग लगने से लगभग 75 क्विंटल गेहूं, एलसीडी टीवी, स्टैंड पंखा, सोने-चांदी के जेवरात, कपड़े, दो चारपाइयां, एक तख्त, परचून की दुकान का सामान तथा अन्य घरेलू वस्तुएं जलकर राख हो गईं। इसके अलावा उनके पुत्र राजकुमार की कक्षा 5, कक्षा 8, हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बी.ए. एवं एमएसडब्ल्यू की मार्कशीटें और अन्य महत्वपूर्ण शैक्षिक प्रमाण पत्र भी आग की भेंट चढ़ गए।अग्निकांड में मोटरसाइकिल हीरो स्प्लेंडर (यू पी  30 सी ए  8588) के पंजीकरण संबंधी दस्तावेज समेत अन्य जरूरी कागजात भी जल गए। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि डी फ्रीजर में गैस ब्लास्ट होने से कमरे की दीवारें और छत भी क्षतिग्रस्त हो गईं।
हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना के समय घर में मौजूद किसी भी व्यक्ति को कोई शारीरिक चोट नहीं आई। स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक लाखों रुपये मूल्य की संपत्ति नष्ट हो चुकी थी।पीड़ित ने बेनीगंज पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर घटना की सूचना दी है तथा मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई और आर्थिक सहायता दिलाए जाने की मांग की है। इस घटना से परिवार को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को शीघ्र राहत सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह इस कठिन परिस्थिति से उबर सके।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों सम्मानित किए गए लोकगायक सुरेश शुक्ल

मुंबई। कहा जाता है कि कदम चूम लेती है खुद आकर मंजिल, मुसाफिर अगर अपनी हिम्मत न हारे। इस शेर को चरितार्थ किया है उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के छोटे से गांव बिरैली से निकलकर मुंबई फिल्म नगरी में गायक एवं संगीतकार सुरेश शुक्ल ने। सुरेश शुक्ल ने अनेक फिल्मों, धारावाहिकों, एल्बमों एवं चैनलों में संगीत और अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा है। आज मुंबई में उनका नाम संगीत जगत में एक अलग पहचान रखता है। संगीत के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें मुंबई हिंदी पत्रकार संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के सीएम  देवेन्द्र फडणवीस और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के हाथों विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया।
मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, महासचिव विजय सिंह कौशिक , उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह और कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र मिश्र आदि का सुरेश शुक्ल ने धन्यवाद दिया।
संगीत  के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया यह सम्मान उनके लंबे संघर्ष, समर्पण और उपलब्धियों का प्रतीक है। इससे न केवल सुरेश शुक्ल का, बल्कि उनके गृह जनपद जौनपुर और गांव बिरैली का भी गौरव बढ़ा है।
नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में ‘हमारा लक्ष्य’ विषय पर हुआ चिंतन
रितेश मिश्रा
हरदोई अल्लीपुर स्थित पं. बाबूराम त्रिवेदी सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के चतुर्थ दिवस पर विभिन्न विषयों पर शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। अतिथियों का रोली एवं बैच लगाकर स्वागत किया गया। मंच संचालन मैगलगंज के प्रधानाचार्य उत्तम मिश्र ने किया, जबकि अतिथियों का परिचय जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक मिथिलेश अवस्थी ने कराया। अल्लीपुर डिग्री कॉलेज के प्राचार्य शशिकांत पांडेय ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

प्रथम एवं द्वितीय सत्र में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर ने “हमारा लक्ष्य” विषय पर अत्यंत प्रेरणादायी एवं चिंतनपरक सत्र लिया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन को मुख्य रूप से दो शक्तियां नियंत्रित करती हैं—शिक्षा और धर्म। शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान प्रदान करती है, जबकि धर्म उसके जीवन में करुणा, संवेदना और नैतिक मूल्यों का विकास करता है। उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग में गूगल और मोबाइल सूचनाएं तो दे सकते हैं, लेकिन संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों का संचार केवल शिक्षक ही कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आचार्य होना केवल एक पद या व्यवसाय नहीं, बल्कि एक विचार और जीवन पद्धति है। समाज आचार्य से केवल विषय ज्ञान की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि उसके आचरण, व्यक्तित्व और आदर्शों से भी प्रेरणा प्राप्त करता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को स्वयं को निरंतर विकसित करते हुए विद्यार्थियों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।
डॉ. राम मनोहर ने भारतीय संस्कृति और धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म किसी संप्रदाय विशेष का नाम नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली व्यवस्था है। धर्म व्यक्ति के भीतर कर्तव्यबोध, अनुशासन और सेवा का भाव उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना की बात कही थी और यह स्थापना किसी भवन या स्थान पर नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में होती है।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को विद्या भारती के “हमारा लक्ष्य” का महत्व समझाते हुए कहा कि यह केवल कुछ पंक्तियां नहीं, बल्कि संगठन की आत्मा और कार्य की दिशा है। लक्ष्य को समझे बिना शिक्षा के उद्देश्य को पूर्ण रूप से नहीं समझा जा सकता। उन्होंने विशेष पद्धति से उंगलियों के माध्यम से लक्ष्य का अभ्यास कराया और सभी प्रशिक्षणार्थियों को इसे कंठस्थ करने के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में अधिकांश प्रशिक्षणार्थियों ने लक्ष्य को स्मरण भी कर लिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों का अध्यापन करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का शिल्पी होता है। उसके द्वारा तैयार की गई युवा पीढ़ी ही भविष्य में राष्ट्र के चरित्र, संस्कृति और विकास की दिशा निर्धारित करती है। इसलिए प्रत्येक आचार्य को राष्ट्रभक्ति, सेवा, समरसता और संस्कारों से युक्त शिक्षा प्रदान करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने सभी को “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो” के उद्घोष के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराया।
प्रशिक्षण वर्ग में कक्षा शिक्षण के अंतर्गत संभाग निरीक्षक श्याम मनोहर शुक्ल ने गणित, संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह ने सामाजिक विज्ञान, आशुतोष तिवारी ने अंग्रेजी, अतुल अवस्थी ने विज्ञान तथा दीपक पांडेय ने हिंदी विषय का शिक्षण प्रशिक्षण प्रदान किया।
इस अवसर पर जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के उपाध्यक्ष एवं विद्यालय प्रबंधक शीर्षेन्दुशील त्रिवेदी, वर्गाधिकारी संतोष त्रिवेदी, लखनऊ संभाग निरीक्षक श्याम मनोहर शुक्ल, सीतापुर संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह, श्रावस्ती संभाग निरीक्षक कैलाश चंद्र वर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
08 से 10 जून तक होगी पुलिस भर्ती परीक्षा, डीएम ने दिए कड़े निर्देश* .
रितेश मिश्रा
हरदोई। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती की लिखित परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं सकुशल ढंग से सम्पन्न कराने के लिए शुक्रवार को विवेकानन्द सभागार में जिलाधिकारी अनुनय झा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परीक्षा की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, परीक्षार्थियों की सुविधाओं तथा विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
जिलाधिकारी ने बताया कि परीक्षा 8 जून, 9 जून एवं 10 जून 2026 को आयोजित होगी। परीक्षा प्रतिदिन दो पालियों में सम्पन्न कराई जाएगी। प्रथम पाली सुबह 10 बजे से 12 बजे तक तथा द्वितीय पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगी। उन्होंने सभी केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देशित किया कि परीक्षा प्रारम्भ होने से पूर्व सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाएं तथा परीक्षा के दौरान शासन और भर्ती बोर्ड के दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
डीएम अनुनय झा ने कहा कि जनपद में आयोजित होने वाली यह महत्वपूर्ण परीक्षा पूरी पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सम्पन्न कराई जाएगी। परीक्षा की गोपनीयता और शुचिता बनाए रखने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, पेयजल, शौचालय एवं प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को परीक्षा केंद्रों का पूर्व निरीक्षण कर सभी व्यवस्थाओं का सत्यापन करने के निर्देश दिए। वहीं पुलिस विभाग को सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल एवं मजिस्ट्रेट तैनात करने तथा केंद्रों और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित करने वाले किसी भी प्रयास को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने तथा परीक्षार्थियों की परीक्षा केंद्रों तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बैठक में डीएम ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि जनपद में आने वाले किसी भी परीक्षार्थी को खुले में रुकने या सोने की आवश्यकता न पड़े। इसके लिए धर्मशालाओं, छात्रावासों, सामुदायिक भवनों एवं अन्य उपयुक्त स्थानों पर आवश्यकतानुसार ठहरने की व्यवस्था की जाए। साथ ही परीक्षार्थियों को पेयजल, शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण
रितेश मिश्रा
हरदोई विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कुबेर लाल जन सेवा संस्थान के सदस्यों ने नरसिंह भगवान प्रांगण में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर संस्थान की संस्थापिका DrNirma Devi    ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने एवं उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. चित्रा मिश्रा, काजल गुप्ता,  सुमित श्रीवास्तव संजय गुप्ता, Prashant Gupta Nitin सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।
एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पिहानी में किया गया वृक्षारोपण
बबलू प्रजापति
पिहानी, हरदोई*: पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत शुक्रवार को पिहानी में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी नीलम मौर्य, ब्लॉक प्रमुख कुशी बाजपेई और नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सिंह ने स्वयं पौधे रोपित किए। इस दौरान वन विभाग की टीम, नगर पालिका कर्मचारी और स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए।
रेंजर नीलम मौर्य ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ सिर्फ नारा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताने का भाव है। हर व्यक्ति को अपनी मां के नाम पर एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए और उसकी देखभाल बच्चे की तरह करनी चाहिए।
ब्लॉक प्रमुख कुशी बाजपेई* ने लोगों से अपील की कि वे अपने घर, खेत और सार्वजनिक जगहों पर ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं ताकि आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा मिल सके।
ईओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि नगर पालिका क्षेत्र में चिन्हित जगहों पर छायादार और फलदार पौधों को लगाने का कार्य जारी रहेगा हम सबकों भी अपने आस-पड़ोस एक  एक पौधे का रोपण अवश्य करना चाहिए l
एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पिहानी में किया गया वृक्षारोपण
बबलू प्रजापति
पिहानी, हरदोई*: पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत शुक्रवार को पिहानी में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी नीलम मौर्य, ब्लॉक प्रमुख कुशी बाजपेई और नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सिंह ने स्वयं पौधे रोपित किए। इस दौरान वन विभाग की टीम, नगर पालिका कर्मचारी और स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए।
रेंजर नीलम मौर्य ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ सिर्फ नारा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताने का भाव है। हर व्यक्ति को अपनी मां के नाम पर एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए और उसकी देखभाल बच्चे की तरह करनी चाहिए।
ब्लॉक प्रमुख कुशी बाजपेई* ने लोगों से अपील की कि वे अपने घर, खेत और सार्वजनिक जगहों पर ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं ताकि आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा मिल सके।
ईओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि नगर पालिका क्षेत्र में चिन्हित जगहों पर छायादार और फलदार पौधों को लगाने का कार्य जारी रहेगा हम सबकों भी अपने आस-पड़ोस एक  एक पौधे का रोपण अवश्य करना चाहिए l
पर्यावरण दिवस पर भाजपा ने चलाया “एक पेड़ मां के नाम” अभियान,

रितेश मिश्रा
हरदोई 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत आज भाजपा जिला कार्यालय के निकट स्थित पार्क में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के आधार हैं। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक नागरिक को वृक्षारोपण को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा प्रेरित “एक पेड़ मां के नाम” अभियान मातृ सम्मान और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम है। यह अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित वातावरण सुनिश्चित करने का भी संकल्प है।
उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान करते हुए कहा कि केवल वृक्ष लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने भी वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से जिला महामंत्री सतेन्द्र राजपूत, जिला मंत्री सत्यम शुक्ला, जिला मीडिया प्रभारी अतुल सिंह चाऊंपुर एड, सह कार्यालय मंत्री अर्जुन चंदेल, छोटू सिंह गुड्डन सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प के साथ हुआ
वैभव लॉन, में 21 जून से 27 जून तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन

रितेश मिश्रा
हरदोई। कमलेश्वर फाउंडेशन एवं सहयोगी संस्था कुबेर लाल जनसेवा संस्थान द्वारा जनकल्याण एवं सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से दिनांक 21 जून 2026 से 27 जून 2026 तक वैभव लॉन, हरदोई में प्रतिदिन सायं 4:00 बजे से भव्य श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।
संस्था के सदस्यों द्वारा समाचार पत्रों में प्रकाशित घटनाओं एवं सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन करने पर यह तथ्य सामने आया कि जनपद हरदोई सहित समाज के विभिन्न वर्गों में आत्महत्या, मानसिक तनाव, घबराहट, उच्च रक्तचाप, पारिवारिक विघटन, सामाजिक संघर्ष तथा नशे की प्रवृत्तियों में निरंतर वृद्धि हो रही है। किशोर, युवा, विद्यार्थी, नौकरीपेशा, व्यवसायी, बेरोजगार, महिलाएं एवं पुरुष सभी किसी न किसी रूप में इन समस्याओं से प्रभावित हो रहे हैं।
संस्था द्वारा किए गए अध्ययन एवं शोध के आधार पर यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि उचित परामर्श (काउंसलिंग) एवं सकारात्मक मार्गदर्शन के माध्यम से इन समस्याओं में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। साथ ही भक्ति, अध्यात्म एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए रुचिपूर्ण ढंग से प्रदान की गई परामर्श सेवाएं अधिक प्रभावी एवं लाभकारी सिद्ध होती हैं।
इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्था द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथावाचिका एवं परामर्शदाता पूज्या श्री राधा प्रिया जी के श्रीमुख से संपन्न होगा। श्री राधा प्रिया जी आध्यात्मिक एवं परामर्श सेवा के क्षेत्र में निरंतर सराहनीय कार्य कर रही हैं। उनके सानिध्य में आयोजित यह कथा केवल आध्यात्मिक यात्रा ही नहीं होगी, बल्कि मानसिक एवं भावनात्मक हीलिंग का भी एक सशक्त माध्यम बनेगी।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस 21 जून 2026 को प्रातः 7:00 बजे भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा। यह यात्रा श्रीराम जानकी मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए वैभव लॉन में सम्पन्न होगी।
कमलेश्वर फाउंडेशन एवं कुबेरलाल जन सेवा संस्थान ने जनपदवासियों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के इस अभियान का सहभागी बनने का आग्रह किया है।
कमलेश्वर फाउंडेशन की सचिव अमिता मिश्रा "मीतू" ने बताया कि आज के समय में इस तनाव पूर्ण वातावरण में लोगों को तनाव मुक्त करने का सबसे बेहतर माध्यम अध्यात्म है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हीलिंग देना भी है। अध्यात्म के साथ साथ उनके तनाव को कैसे कम किया जा सकता है। इसके लिए ये कमलेश्वर फाउंडेशन का एवं कुबेरलाल जनसेवा संस्थान का एक प्रयास है।
कुबेर लाल जन सेवा संस्थान की संस्थापिका निरमा देवी ने बताया कि भागवत कथा के द्वारा आज की पीढ़ी को अपने देश की संस्कृति और संस्कारों से पुनः जोड़ा जा सकेगा ।इससे एक मजबूत समाज की स्थापना करने में सहायता मिलेगी।
पोस्टर विमोचन में विधायक प्रभाष कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन, नगरपालिका अध्यक्ष सुख सागर मिश्रा ,"मधुर" , डॉ सीपी कटियार, निरमा देवी , डॉ चित्रा मिश्रा , विजय लक्ष्मी सिंह, अमिताभ शुक्ला "मोनू" , संजीव मिश्रा, अमिताभ शुक्ला,पंकज अवस्थी , सचिन मिश्रा, अभिषेक गुप्ता , सुमन सिंह, प्रशांत गुप्ता नितिन , काजल गुप्ता, सुमित श्रीवास्तव , वंदना सिंह, शांतनु सिंह सहित संस्था के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
जब विकास के अश्व कागज़ों पर दौड़े और प्रजा प्रतीक्षा करती रही
लक्ष्मी कान्त पाठक

हरदोई हस्तिनापुर के विशाल राजमहल में आज उत्सव का वातावरण है। राजकोष के अभिलेखों में अंकित है कि ग्रामराज्य समृद्धि के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। गांवों तक निर्मल जल पहुंच चुका है, गलियां विकास की चमक से आलोकित हैं, स्वच्छता ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है और प्रजा सुख, शांति तथा संतोष का जीवन व्यतीत कर रही है। दरबार में बैठे महामंत्री आंकड़ों के स्वर्णिम पन्ने खोल-खोलकर बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में विकास की ऐसी गंगा बही है, जैसी पूर्वकाल में कभी नहीं बही।
किन्तु यदि कोई पथिक राजमहल की चकाचौंध छोड़कर गांव की चौपाल तक पहुंच जाए, तो उसे एक दूसरी ही कथा सुनाई देगी—वह कथा, जो राजकीय अभिलेखों में नहीं मिलती; वह कथा, जो गांव की टूटी गलियों, सूखे हैंडपंपों, कूड़े के ढेरों और प्रजा की आंखों में लिखी हुई है।
हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वर्ण मुद्राओं की अभूतपूर्व वर्षा हुई। राजकोष के द्वार खुले, योजनाएं बनीं, प्रस्ताव पारित हुए, निर्माण कार्यों की लंबी सूचियां तैयार हुईं और विकास के रथों को आगे बढ़ाने की घोषणाएं होती रहीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रत्येक गांव शीघ्र ही इंद्रप्रस्थ की भांति वैभवशाली और सुन्दर हो जाएगा। किन्तु समय बीतने के बाद जब प्रजा ने अपने चारों ओर दृष्टि डाली, तो पाया कि परिवर्तन का अधिकांश वैभव केवल राजकीय दस्तावेजों में ही सुरक्षित रह गया है।
सबसे पहले बात जल की।
ऋषियों ने कहा था—“जल ही जीवन है।” अतः ग्रामराज्य में जल योजनाओं पर सर्वाधिक धन व्यय हुआ। अभिलेख बताते हैं कि असंख्य नए हैंडपंप स्थापित किए गए। पुराने हैंडपंपों का रिबोर हुआ। उनकी मरम्मत हुई। पाइप बदले गए। प्लेटफार्म बने। जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ। कागज़ों पर तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रत्येक ग्रामीण के द्वार पर गंगा की धारा बह रही हो।
किन्तु गांव की धरती पर खड़ी प्रजा पूछती है—वे हैंडपंप कहां हैं?
जिन हैंडपंपों के बार-बार रिबोर का उल्लेख है, वे आज भी उसी जर्जर अवस्था में खड़े हैं। जिनकी मरम्मत के भुगतान हुए, वे वर्षों से पानी के स्थान पर केवल जंग उगल रहे हैं। ऐसा लगता है कि हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में हैंडपंप धरती पर कम और कागज़ों में अधिक लगाए गए। पानी नलों और पाइपों से कम, फाइलों और भुगतान पत्रकों से अधिक बहता रहा।
राजमहल में बैठा कोई अभिलेखकार यदि सरकारी दस्तावेज पढ़े तो उसे लगेगा कि जल संकट इतिहास बन चुका है। परन्तु गांव की स्त्रियां आज भी सुबह और शाम सिर पर मटके रखकर पानी की तलाश में भटकती हैं। यही दृश्य बताता है कि राजकीय सत्य और जनसत्य में कितना गहरा अंतर है।
इसके बाद आती है गलियों की कथा।
राजकीय इतिहासकार लिखते हैं कि गांवों में खड़ंजों का जाल बिछा दिया गया। मार्गों का निर्माण हुआ। विकास की नई राहें बनाई गईं। लेकिन जैसे ही वर्षा ऋतु की पहली बूंद गिरती है, विकास की चमक की वास्तविक परीक्षा आरम्भ हो जाती है।
जहां नालियां नहीं हैं, वहां सड़कें तालाब बन जाती हैं। जहां जल निकासी नहीं है, वहां खड़ंजे कीचड़ में समा जाते हैं। अनेक गलियां ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे किसी ग्रामराज्य की नहीं, बल्कि किसी परित्यक्त बस्ती की हों। पत्थरों पर खर्च हुई स्वर्ण मुद्राओं के ढेर भी उस कीचड़ को नहीं रोक पाए, जो हर वर्ष ग्रामीण जीवन को दुश्वार बना देता है।
स्वच्छता की कहानी तो और भी अद्भुत है।
अभिलेख बताते हैं कि सफाई कर्मचारियों की पूरी सेना गांवों में तैनात रही। झाड़ू चलती रही। सफाई होती रही। भुगतान होते रहे। निरीक्षण होते रहे। बैठकों में प्रशंसा होती रही। किन्तु गांव की गलियों में पड़े कूड़े के ढेर, दुर्गंध से भरी नालियां और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति कुछ और ही साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि झाड़ू की सबसे अधिक कृपा उन्हीं स्थानों पर हुई, जहां प्रभाव, प्रतिष्ठा और पहुंच का निवास था। सामान्य ग्रामीण अक्सर उस स्वच्छता अभियान का लाभ खोजता रह गया, जिसकी प्रशंसा रिपोर्टों और प्रस्तुतियों में की जाती रही।
फिर आया स्वच्छता का सबसे भव्य अध्याय—आरआरसी सेंटरों का।
घोषणा हुई कि अब गांवों से कूड़ा समाप्त हो जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक केंद्र बनाए जाएंगे। भूमि चयनित हुई। भवन बने। संसाधन खरीदे गए। उद्घाटन हुए। तस्वीरें खिंचीं। प्रशस्ति गान हुए।
किन्तु इस योजना का सबसे बड़ा व्यंग्य यह रहा कि कूड़ा निस्तारण केंद्र तो बन गए, परंतु कूड़ा वहां तक पहुंच ही नहीं पाया।
केंद्र साफ-सुथरे खड़े रहे और गांव की गलियां कूड़े से भरी रहीं। मानो कूड़े और केंद्र के बीच कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो। कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए साधन भी धीरे-धीरे रहस्य का विषय बन गए। यदि वे वास्तव में सक्रिय होते, तो शायद गांवों में कूड़े के पहाड़ दिखाई न देते।
इस पूरे ग्रामराज्य की सबसे गूढ़ कथा शिकायतों की है।
प्रजा शिकायत करती रही। आवेदन लिखे जाते रहे। दरबारों के चक्कर लगाए जाते रहे। अधिकारी आते रहे, जाते रहे। जांच की घोषणाएं होती रहीं। किन्तु परिणाम प्रायः उसी धूल में दब जाते रहे, जो गांव की पगडंडियों पर उड़ती रहती है।
अब इस कथा का एक महत्वपूर्ण और गंभीर पक्ष कानूनी व्यवस्था से भी जुड़ता है।
भारत का संविधान ग्राम स्वराज की अवधारणा को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता का आधार मानता है। संविधान के 73वें संशोधन द्वारा पंचायतों को स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। ग्राम सभा को गांव की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था माना गया, जहां जनता को विकास कार्यों की समीक्षा, प्रश्न पूछने और जवाब मांगने का अधिकार प्राप्त है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रत्येक नागरिक को यह शक्ति देता है कि वह सार्वजनिक धन के व्यय, निर्माण कार्यों, भुगतान, निविदाओं और योजनाओं का विवरण प्राप्त कर सके। पंचायत राज अधिनियमों में भी सामाजिक अंकेक्षण, अभिलेखों के निरीक्षण तथा जनभागीदारी की व्यवस्था की गई है। अतः यदि कोई ग्रामीण ग्राम निधि, हैंडपंप, सड़क, स्वच्छता या किसी अन्य विकास कार्य के संबंध में जानकारी मांगता है, तो वह किसी पर उपकार नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने वैधानिक और संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहा होता है।
किन्तु इस कथा का एक और पक्ष है, जो हस्तिनापुर की प्रजा के मन में सबसे अधिक भय उत्पन्न करता है।
जब तक प्रजा मौन रही, तब तक सब कुछ शांत दिखाई देता रहा। लेकिन जैसे ही किसी ग्रामीण ने ग्राम निधि के व्यय का लेखा-जोखा मांगने का साहस किया, किसी ने कागज़ों में लगे हैंडपंपों की वास्तविकता जाननी चाही, किसी ने अधूरे निर्माण कार्यों पर प्रश्न उठाया अथवा किसी ने सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की विफलताओं को सार्वजनिक करने का प्रयास किया, तब राजकीय व्यवस्था का दूसरा स्वरूप सामने आने लगा।
कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो समस्या के समाधान से अधिक चिंता समस्या उजागर करने वालों की होने लगी हो। प्रजा के स्वर को सुनने के स्थान पर राजकीय रक्षक उसके द्वार तक पहुंचने लगे। शिकायतकर्ता ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया। कहीं चेतावनियों का सहारा लिया गया, कहीं दबाव का और कहीं नियमों व मर्यादाओं के नाम पर ऐसे लोगों को मुकदमों में उलझा दिया गया, जिन्होंने केवल अपने गांव और अपने अधिकारों की बात कही थी।
कुछ प्रजाजन तो ऐसे भी रहे जिन्हें न्याय की अपेक्षा राजकीय कारागार का मार्ग अधिक शीघ्र दिखाई दिया। धीरे-धीरे ग्रामराज्य में यह धारणा घर करने लगी कि विकास पर प्रश्न पूछना सरल नहीं है। परिणाम यह हुआ कि अनेक लोगों ने अन्याय सहना स्वीकार किया, परंतु व्यवस्था से टकराने का साहस नहीं किया।
जबकि विधि का मूल सिद्धांत कहता है कि शिकायतकर्ता, सूचना मांगने वाला नागरिक अथवा जनहित में प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती का आधार होता है। यदि किसी व्यवस्था में प्रश्न पूछना अपराध जैसा प्रतीत होने लगे, तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चिंता का विषय बन जाता है।
और जब किसी राज्य में प्रजा प्रश्न पूछने से भयभीत होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि वहां विकास से अधिक मौन का विस्तार हो रहा है।
ऐसा नहीं कि हस्तिनापुर का खजाना खाली था। खजाना भरा हुआ था। योजनाएं भी थीं। कर्मचारी भी थे। नियम भी थे। लेकिन व्यवस्था का वह आत्मबल कहीं खो गया था, जो धन को विकास और योजना को परिणाम में बदल देता है।
आज पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं।
ग्रामराज्य की प्रजा अपने शासकों से कोई असंभव प्रश्न नहीं पूछ रही। वह केवल इतना जानना चाहती है कि जिन हैंडपंपों पर धन खर्च हुआ, वे कहां हैं? जिनकी मरम्मत हुई, उनमें पानी क्यों नहीं है? जिन गलियों पर लाखों रुपये खर्च हुए, वे कीचड़ से क्यों भरी हैं? जिन सफाई कर्मचारियों का वेतन वर्षों तक निकला, गांव गंदा क्यों है? और जिन कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर धन बहाया गया, वहां गांव का कूड़ा क्यों नहीं पहुंचा?
हस्तिनापुर के प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि राज्य की शक्ति उसके राजमहलों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उसकी प्रजा के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि से मापी जाती है। यदि प्रजा प्रश्न पूछ रही है, यदि गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह केवल किसी एक प्रधान, सचिव या अधिकारी का प्रश्न नहीं है; यह पूरी व्यवस्था के आत्ममंथन का विषय है।उत्तर प्रदेश में ग्राम स्वराज की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब विकास की कहानी केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, स्वच्छ जल स्रोतों, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थलों, सक्रिय ग्राम सभाओं और निर्भय नागरिकों के जीवन में दिखाई देगी। क्योंकि लोकतंत्र का अर्थ केवल योजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उनके परिणामों की सार्वजनिक जवाबदेही भी है।अन्यथा इतिहास एक दिन यह लिखेगा कि उत्तर प्रदेश के ग्राम स्वराज में विकास के अश्व बहुत तेज़ दौड़े थे, परंतु वे धरती पर नहीं, केवल कागज़ों के मैदान में दौड़ते रहे। प्रजा वहीं खड़ी रही—पानी की प्रतीक्षा में, स्वच्छता की प्रतीक्षा में, न्याय की प्रतीक्षा में, और उस विकास की प्रतीक्षा में, जिसका वादा उससे बार-बार किया गया।