जब विकास के अश्व कागज़ों पर दौड़े और प्रजा प्रतीक्षा करती रही
लक्ष्मी कान्त पाठक

हरदोई हस्तिनापुर के विशाल राजमहल में आज उत्सव का वातावरण है। राजकोष के अभिलेखों में अंकित है कि ग्रामराज्य समृद्धि के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। गांवों तक निर्मल जल पहुंच चुका है, गलियां विकास की चमक से आलोकित हैं, स्वच्छता ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है और प्रजा सुख, शांति तथा संतोष का जीवन व्यतीत कर रही है। दरबार में बैठे महामंत्री आंकड़ों के स्वर्णिम पन्ने खोल-खोलकर बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में विकास की ऐसी गंगा बही है, जैसी पूर्वकाल में कभी नहीं बही।
किन्तु यदि कोई पथिक राजमहल की चकाचौंध छोड़कर गांव की चौपाल तक पहुंच जाए, तो उसे एक दूसरी ही कथा सुनाई देगी—वह कथा, जो राजकीय अभिलेखों में नहीं मिलती; वह कथा, जो गांव की टूटी गलियों, सूखे हैंडपंपों, कूड़े के ढेरों और प्रजा की आंखों में लिखी हुई है।
हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वर्ण मुद्राओं की अभूतपूर्व वर्षा हुई। राजकोष के द्वार खुले, योजनाएं बनीं, प्रस्ताव पारित हुए, निर्माण कार्यों की लंबी सूचियां तैयार हुईं और विकास के रथों को आगे बढ़ाने की घोषणाएं होती रहीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रत्येक गांव शीघ्र ही इंद्रप्रस्थ की भांति वैभवशाली और सुन्दर हो जाएगा। किन्तु समय बीतने के बाद जब प्रजा ने अपने चारों ओर दृष्टि डाली, तो पाया कि परिवर्तन का अधिकांश वैभव केवल राजकीय दस्तावेजों में ही सुरक्षित रह गया है।
सबसे पहले बात जल की।
ऋषियों ने कहा था—“जल ही जीवन है।” अतः ग्रामराज्य में जल योजनाओं पर सर्वाधिक धन व्यय हुआ। अभिलेख बताते हैं कि असंख्य नए हैंडपंप स्थापित किए गए। पुराने हैंडपंपों का रिबोर हुआ। उनकी मरम्मत हुई। पाइप बदले गए। प्लेटफार्म बने। जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ। कागज़ों पर तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रत्येक ग्रामीण के द्वार पर गंगा की धारा बह रही हो।
किन्तु गांव की धरती पर खड़ी प्रजा पूछती है—वे हैंडपंप कहां हैं?
जिन हैंडपंपों के बार-बार रिबोर का उल्लेख है, वे आज भी उसी जर्जर अवस्था में खड़े हैं। जिनकी मरम्मत के भुगतान हुए, वे वर्षों से पानी के स्थान पर केवल जंग उगल रहे हैं। ऐसा लगता है कि हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में हैंडपंप धरती पर कम और कागज़ों में अधिक लगाए गए। पानी नलों और पाइपों से कम, फाइलों और भुगतान पत्रकों से अधिक बहता रहा।
राजमहल में बैठा कोई अभिलेखकार यदि सरकारी दस्तावेज पढ़े तो उसे लगेगा कि जल संकट इतिहास बन चुका है। परन्तु गांव की स्त्रियां आज भी सुबह और शाम सिर पर मटके रखकर पानी की तलाश में भटकती हैं। यही दृश्य बताता है कि राजकीय सत्य और जनसत्य में कितना गहरा अंतर है।
इसके बाद आती है गलियों की कथा।
राजकीय इतिहासकार लिखते हैं कि गांवों में खड़ंजों का जाल बिछा दिया गया। मार्गों का निर्माण हुआ। विकास की नई राहें बनाई गईं। लेकिन जैसे ही वर्षा ऋतु की पहली बूंद गिरती है, विकास की चमक की वास्तविक परीक्षा आरम्भ हो जाती है।
जहां नालियां नहीं हैं, वहां सड़कें तालाब बन जाती हैं। जहां जल निकासी नहीं है, वहां खड़ंजे कीचड़ में समा जाते हैं। अनेक गलियां ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे किसी ग्रामराज्य की नहीं, बल्कि किसी परित्यक्त बस्ती की हों। पत्थरों पर खर्च हुई स्वर्ण मुद्राओं के ढेर भी उस कीचड़ को नहीं रोक पाए, जो हर वर्ष ग्रामीण जीवन को दुश्वार बना देता है।
स्वच्छता की कहानी तो और भी अद्भुत है।
अभिलेख बताते हैं कि सफाई कर्मचारियों की पूरी सेना गांवों में तैनात रही। झाड़ू चलती रही। सफाई होती रही। भुगतान होते रहे। निरीक्षण होते रहे। बैठकों में प्रशंसा होती रही। किन्तु गांव की गलियों में पड़े कूड़े के ढेर, दुर्गंध से भरी नालियां और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति कुछ और ही साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि झाड़ू की सबसे अधिक कृपा उन्हीं स्थानों पर हुई, जहां प्रभाव, प्रतिष्ठा और पहुंच का निवास था। सामान्य ग्रामीण अक्सर उस स्वच्छता अभियान का लाभ खोजता रह गया, जिसकी प्रशंसा रिपोर्टों और प्रस्तुतियों में की जाती रही।
फिर आया स्वच्छता का सबसे भव्य अध्याय—आरआरसी सेंटरों का।
घोषणा हुई कि अब गांवों से कूड़ा समाप्त हो जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक केंद्र बनाए जाएंगे। भूमि चयनित हुई। भवन बने। संसाधन खरीदे गए। उद्घाटन हुए। तस्वीरें खिंचीं। प्रशस्ति गान हुए।
किन्तु इस योजना का सबसे बड़ा व्यंग्य यह रहा कि कूड़ा निस्तारण केंद्र तो बन गए, परंतु कूड़ा वहां तक पहुंच ही नहीं पाया।
केंद्र साफ-सुथरे खड़े रहे और गांव की गलियां कूड़े से भरी रहीं। मानो कूड़े और केंद्र के बीच कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो। कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए साधन भी धीरे-धीरे रहस्य का विषय बन गए। यदि वे वास्तव में सक्रिय होते, तो शायद गांवों में कूड़े के पहाड़ दिखाई न देते।
इस पूरे ग्रामराज्य की सबसे गूढ़ कथा शिकायतों की है।
प्रजा शिकायत करती रही। आवेदन लिखे जाते रहे। दरबारों के चक्कर लगाए जाते रहे। अधिकारी आते रहे, जाते रहे। जांच की घोषणाएं होती रहीं। किन्तु परिणाम प्रायः उसी धूल में दब जाते रहे, जो गांव की पगडंडियों पर उड़ती रहती है।
अब इस कथा का एक महत्वपूर्ण और गंभीर पक्ष कानूनी व्यवस्था से भी जुड़ता है।
भारत का संविधान ग्राम स्वराज की अवधारणा को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता का आधार मानता है। संविधान के 73वें संशोधन द्वारा पंचायतों को स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। ग्राम सभा को गांव की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था माना गया, जहां जनता को विकास कार्यों की समीक्षा, प्रश्न पूछने और जवाब मांगने का अधिकार प्राप्त है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रत्येक नागरिक को यह शक्ति देता है कि वह सार्वजनिक धन के व्यय, निर्माण कार्यों, भुगतान, निविदाओं और योजनाओं का विवरण प्राप्त कर सके। पंचायत राज अधिनियमों में भी सामाजिक अंकेक्षण, अभिलेखों के निरीक्षण तथा जनभागीदारी की व्यवस्था की गई है। अतः यदि कोई ग्रामीण ग्राम निधि, हैंडपंप, सड़क, स्वच्छता या किसी अन्य विकास कार्य के संबंध में जानकारी मांगता है, तो वह किसी पर उपकार नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने वैधानिक और संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहा होता है।
किन्तु इस कथा का एक और पक्ष है, जो हस्तिनापुर की प्रजा के मन में सबसे अधिक भय उत्पन्न करता है।
जब तक प्रजा मौन रही, तब तक सब कुछ शांत दिखाई देता रहा। लेकिन जैसे ही किसी ग्रामीण ने ग्राम निधि के व्यय का लेखा-जोखा मांगने का साहस किया, किसी ने कागज़ों में लगे हैंडपंपों की वास्तविकता जाननी चाही, किसी ने अधूरे निर्माण कार्यों पर प्रश्न उठाया अथवा किसी ने सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की विफलताओं को सार्वजनिक करने का प्रयास किया, तब राजकीय व्यवस्था का दूसरा स्वरूप सामने आने लगा।
कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो समस्या के समाधान से अधिक चिंता समस्या उजागर करने वालों की होने लगी हो। प्रजा के स्वर को सुनने के स्थान पर राजकीय रक्षक उसके द्वार तक पहुंचने लगे। शिकायतकर्ता ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया। कहीं चेतावनियों का सहारा लिया गया, कहीं दबाव का और कहीं नियमों व मर्यादाओं के नाम पर ऐसे लोगों को मुकदमों में उलझा दिया गया, जिन्होंने केवल अपने गांव और अपने अधिकारों की बात कही थी।
कुछ प्रजाजन तो ऐसे भी रहे जिन्हें न्याय की अपेक्षा राजकीय कारागार का मार्ग अधिक शीघ्र दिखाई दिया। धीरे-धीरे ग्रामराज्य में यह धारणा घर करने लगी कि विकास पर प्रश्न पूछना सरल नहीं है। परिणाम यह हुआ कि अनेक लोगों ने अन्याय सहना स्वीकार किया, परंतु व्यवस्था से टकराने का साहस नहीं किया।
जबकि विधि का मूल सिद्धांत कहता है कि शिकायतकर्ता, सूचना मांगने वाला नागरिक अथवा जनहित में प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती का आधार होता है। यदि किसी व्यवस्था में प्रश्न पूछना अपराध जैसा प्रतीत होने लगे, तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चिंता का विषय बन जाता है।
और जब किसी राज्य में प्रजा प्रश्न पूछने से भयभीत होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि वहां विकास से अधिक मौन का विस्तार हो रहा है।
ऐसा नहीं कि हस्तिनापुर का खजाना खाली था। खजाना भरा हुआ था। योजनाएं भी थीं। कर्मचारी भी थे। नियम भी थे। लेकिन व्यवस्था का वह आत्मबल कहीं खो गया था, जो धन को विकास और योजना को परिणाम में बदल देता है।
आज पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं।
ग्रामराज्य की प्रजा अपने शासकों से कोई असंभव प्रश्न नहीं पूछ रही। वह केवल इतना जानना चाहती है कि जिन हैंडपंपों पर धन खर्च हुआ, वे कहां हैं? जिनकी मरम्मत हुई, उनमें पानी क्यों नहीं है? जिन गलियों पर लाखों रुपये खर्च हुए, वे कीचड़ से क्यों भरी हैं? जिन सफाई कर्मचारियों का वेतन वर्षों तक निकला, गांव गंदा क्यों है? और जिन कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर धन बहाया गया, वहां गांव का कूड़ा क्यों नहीं पहुंचा?
हस्तिनापुर के प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि राज्य की शक्ति उसके राजमहलों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उसकी प्रजा के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि से मापी जाती है। यदि प्रजा प्रश्न पूछ रही है, यदि गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह केवल किसी एक प्रधान, सचिव या अधिकारी का प्रश्न नहीं है; यह पूरी व्यवस्था के आत्ममंथन का विषय है।उत्तर प्रदेश में ग्राम स्वराज की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब विकास की कहानी केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, स्वच्छ जल स्रोतों, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थलों, सक्रिय ग्राम सभाओं और निर्भय नागरिकों के जीवन में दिखाई देगी। क्योंकि लोकतंत्र का अर्थ केवल योजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उनके परिणामों की सार्वजनिक जवाबदेही भी है।अन्यथा इतिहास एक दिन यह लिखेगा कि उत्तर प्रदेश के ग्राम स्वराज में विकास के अश्व बहुत तेज़ दौड़े थे, परंतु वे धरती पर नहीं, केवल कागज़ों के मैदान में दौड़ते रहे। प्रजा वहीं खड़ी रही—पानी की प्रतीक्षा में, स्वच्छता की प्रतीक्षा में, न्याय की प्रतीक्षा में, और उस विकास की प्रतीक्षा में, जिसका वादा उससे बार-बार किया गया।
भाजपा नेता मुकुल सिंह आशा ने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण
रितेश मिश्रा
हरदोई। भारतीय जनता पार्टी द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य मुकुल सिंह आशा ने पौधारोपण किया।
भाजपा नेता मुकुल सिंह आशा ने अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा रोपते हुए कहा कि माँ जीवन का आधार होती हैं और उनके नाम पर पौधा लगाना प्रकृति तथा मातृत्व दोनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि वृक्ष न केवल पर्यावरण को संतुलित रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित करते हैं। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। उन्होंने सभी से अपील की कि आप सभी लोग पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक एक पौधा अवश्य लगाएं और साथ ही उसकी देखभाल करें।
शिक्षिका से चेन लूटने वाले दो बदमाश मुठभेड़ में गिरफ्तार,पैरों में लगी गोली
रितेश मिश्रा
हरदोई पुलिस ने 3 मई को शहर कोतवाली क्षेत्र की आवास विकास कॉलोनी में स्थित सेंट जेवियर स्कूल के पास शिक्षिका अवंती त्रिवेदी से हुई चेन लूट की वारदात का खुलासा कर दिया है।
घटना उस समय हुई थी जब शिक्षिका अपने बेटे को स्कूल छोड़ने पहुंची थीं। बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें रोककर कहा कि आगे पुलिस चेकिंग चल रही है, इसलिए जेवर उतारकर सुरक्षित रख लें।
बातों में उलझाकर दोनों उनकी सोने की चेन लेकर फरार हो गए थे। पुलिस ने साण्डी बाईपास पुल के पास मुठभेड़ के बाद दोनों आरोपियों पवन कुमार गौतम उर्फ खास और अंकित वर्मा उर्फ अंकित लोथ को गिरफ्तार कर लिया।
जवाबी फायरिंग में दोनों के पैरों में गोली लगी। पुलिस ने लूटी गई चेन, नगदी, तमंचे, कारतूस, बाइक और चोरी की स्कूटी बरामद की है.
समाजवादी नेता पूनम सरोज ने जरूरतमंदों को वितरित किए छाते
रितेश मिश्रा
बेनीगंज (हरदोई)। भीषण गर्मी और तेज धूप से राहत दिलाने के उद्देश्य से विधानसभा 160 बालामऊ क्षेत्र के अंतर्गत नगर बेनीगंज के प्रताप नगर चौराहा, कोथावां में समाजवादी नेता श्रीमती पूनम सरोज द्वारा पटरी दुकानदारों, ठेला संचालकों एवं अन्य जरूरतमंद लोगों को छाते वितरित किए गए।
इस अवसर पर पूनम सरोज ने कहा कि समाज के कमजोर एवं मेहनतकश वर्ग की सहायता करना उनकी प्राथमिकता है। गर्मी के मौसम में धूप से बचाव के लिए छाता एक आवश्यक वस्तु है, जिससे दैनिक कार्य करने वाले लोगों को काफी राहत मिलेगी।
कार्यक्रम में कोथावां ब्लॉक अध्यक्ष रामचंद्र यादव, बेनीगंज नगर अध्यक्ष समीउल्लाह अंसारी, बालामऊ नगर अध्यक्ष मोहम्मद वारिस, आलोक गुप्ता तथा अनमोल सिंह यादव सहित कई कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
छाता पाकर लाभार्थियों ने पूनम सरोज का आभार व्यक्त किया और इस जनसेवा कार्य की सराहना की।
जिलाधिकारी ने जन सुनवाई मे सुनी 79 शिकायतें
रितेश मिश्रा
हरदोई आज कलेक्ट्रेट में जन सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी अनुनय झा ने आमजन की समस्याओं को सुना। जन सुनवाई मे आज कुल 79 शिकायते प्राप्त हुई, जिसके त्वरित निस्तारण के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक शिकायत का निस्तारण समयबद्व और गुणवत्तापूर्ण पूर्ण हो। जनसुनवाई मे प्राप्त कुछ शिकायतों का जिलाधिकारी ने मौके पर ही समाधान किया। जनसुनवाई मे अपर जिलाधिकारी न्यायिक प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, अतिरिक्त मजिस्टेट अरूणिमा श्रीवास्तव प्रभारी सूचना अधिकारी दिव्या निगम व अन्य सम्बन्धित विभाग के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहें
पीड़ित पति ने शाहाबाद नगर पालिका ईओ और अपनी पत्नी पर लगाए गंभीर आरोप, पुलिस ने शुरू की जाँच
रितेश मिश्रा
हरदोई। पाली कस्बे के निवासी पीड़ित पति ने एसपी से मिलकर शाहाबाद नगर पालिका के ईओ और अपनी पत्नी के अवैध संबंध बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैँ। पुलिस ने प्रार्थना पत्र लेकर मामले की जाँच शुरू कर दी है।
       पाली कस्बे के निवासी पीड़ित देवेंद्र मिश्रा के अनुसार उनकी पत्नी पाली नगर पंचायत मे कर्मचारी है शाहाबाद के ईओ कृष्ण कुमार सोनकर की पाली तैनाती के समय उसकी पत्नी से अवैध संबंध बना लिए थे।
      उसकी पत्नी काफी समय से घर छोड़कर हरदोई में रह रही है।जिस कारण उसे मानसिक,आर्थिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।उसके द्वारा परिवार को बचाने के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।जब वह अपनी पत्नी को वापस घर लाने के लिए पहुंचे तो उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।इस विवाद के कारण उनका पारिवारिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
शिकायती पत्र में देवेंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया है कि उनके घर से लाखों रुपए मूल्य के जेवरात, नकदी और अन्य घरेलू सामान गायब हैं। उसके पास मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं, जिनकी जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने पुलिस से संबंधित लोगों की कॉल डिटेल की जांच कराने, सुरक्षा उपलब्ध कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
      पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई जाएगी। शाहाबाद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी कृष्ण कुमार सोनकर ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है।
धार्मिक स्थल के पास अंडा व शराब की बिक्री और रास्ता बाधित करने से ग्रामीणों में रोष*

ग्राम परनखा के पीड़ित ने डीएम को शिकायती पत्र भेजकर लगाई न्याय की गुहार*

रितेश मिश्रा
हरदोई बिलग्राम तहसील अंतर्गत थाना माधोगंज क्षेत्र के ग्राम परनखा (पोस्ट- खुर्दा मदारपुर) में धार्मिक स्थल के निकट ग्राम समाज की सरकारी भूमि पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। गांव के ही एक जागरूक नागरिक अरविंद कुमार पुत्र राम औतार ने इस संबंध में जिलाधिकारी हरदोई को एक लिखित शिकायती पत्र भेजकर जांच कराने और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता अरविंद कुमार ने आरोप लगाया है कि ग्राम परनखा में एक प्राचीन शिव मंदिर स्थित है और वहीं पास में एक पूजनीय कुआं भी है, जो कि पूरी तरह से ग्राम समाज की जमीन पर बना हुआ है और ग्रामीणों की आस्था का केंद्र है। आरोप है कि गांव के ही निवासी हुकुम चंद पुत्र राधे लाल और घनश्याम पुत्र हुकुम चंद ने इस मंदिर व कुएं के पास की ग्राम समाज की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। दबंगों द्वारा इस पवित्र स्थल के पास अवैध कब्जा करके एक किराना की दुकान, एक अंडे की दुकान और एक मोटरसाइकिल रिपेयरिंग की दुकान संचालित की जा रही है।शिकायतकर्ता का कहना है कि मंदिर जैसे पवित्र धार्मिक स्थल के बिल्कुल पास में अंडे और शराब की खिड़की खोलकर बिक्री धड़ल्ले से की जाती है, जो कि पूरी तरह से नियम और न्यायसंगत नहीं है। इससे मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। इसके अलावा, उक्त लोगों द्वारा रात के समय मंदिर जाने वाले मुख्य रास्ते पर अपने वाहन (मोटरसाइकिल/गाड़ियाँ) आदि खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे मंदिर का रास्ता भी पूरी तरह बाधित हो जाता है और ग्रामीणों को आने-जाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।पीड़ित और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। प्रार्थना पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम भेजकर मौके की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ग्राम समाज की भूमि से अवैध कब्जा तत्काल हटवाया जाए और धार्मिक मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाले तथा सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले उक्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
उपेक्षित पड़ा गुप्तकाल से जुड़ा पौराणिक महेश बाबा मंदिर, कायाकल्प के लिए जनप्रतिनिधियों ने कसी कमर*
रितेश मिश्रा
कछौना, हरदोई।* विकासखंड कछौना की ग्राम सभा समसपुर के ग्राम महेशन मढ़िया में स्थित प्राचीन महेश बाबा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि ग्राम प्रधान रानू बाजपेई, अनूप कुमार मटरू व पूर्व मंडल अध्यक्ष नवीन पटेल, रामऔतार गोस्वामी ने सभापति अशोक अग्रवाल पत्र देकर जीर्णोद्धार कराने की मांग की, उन्होंने इस पौराणिक मंदिर के जीर्णोद्धार हेतु शासन को पत्र लिखा है। श्रद्धालुओं ने इस मंदिर के सौंदर्यीकरण व कायाकल्प की उम्मीद जग गई है। जिससे यह स्थल उत्तर प्रदेश के नक्शे पर एक पहचान बनेगा। विधानसभा बालामऊ की ग्राम सभा समसपुर के ग्राम महेशन मढ़िया में काफी प्राचीन मंदिर 12 एकड़ बाग में स्थित है। पुरानी मान्यता के अनुसार बाबा राघव दास महंत द्वारा 150 वर्ष पूर्व मंदिर की स्थापना की गई। इसमें ग्राम महरी, समसपुर, बर्राघूमन, कटका, सहोरिया आदि गांवो की भूमि अभिलेख में दर्द है। परंतु राघव दास महंत के निधन के बाद भू-माफिया ने कूटरचित द्वारा काफी भूमि अपने नाम हस्तांतरित कराली। इस मंदिर का 60 बीघा भूमि पर बाग है। यह ऐतिहासिक व पौराणिक स्थल है, यह जंगल के होने के कारण आक्रांताओं से बच गया था, प्राकृतिक अवस्था में स्थित है। शिव पार्वती की खंडित मूर्ति है। जनश्रुति के अनुसार गुप्त काल के पहले का है। पूरे देश में केवल दो ही स्थानों पर इस तरह के मंदिर हैं। मंदिर परिसर में ठाकुर द्वार में हनुमान मंदिर व राम जानकी मंदिर की स्थापना है, जो जीर्ण शीर्ण अवस्था में पड़ा है। यह प्रकृतिक स्थल में होने के कारण काफी रमणीक लगता है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति मिलती है। वर्ष के में दो बार मेला लगता है। इसके सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार के लिए ग्राम प्रधानगढ़ रानू बाजपेई, अनूप कुमार मटरू, जनसरोकार मंच के संयोजक परमेश्वर दयाल, सुरेंद्र सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष नवीन पटेल, रामाऔतार गोस्वामी ने जीर्णोद्धार के लिए जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है।
अब गर्भवती महिला की होंगी छह प्रसवपूर्व जाँचें
रितेश मिश्रा
हरदोई, मां और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब गर्भवती महिलाओं को न्यूनतम छह प्रसवपूर्व जांचों (एएनसी) से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे पहले नियमित रूप से चार एएनसी जांचों का प्रावधान था। इस संबंध में परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. एच.डी. अग्रवाल ने सभी संबंधित अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भवनाथ पांडे ने बताया कि  जनपद में प्रत्येक गर्भवती तक गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय पर पहचान, आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करना तथा मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाना है। उन्होंने कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन नई व्यवस्था से उनकी निगरानी और अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि प्रसवपूर्व जांचों की संख्या चार से बढ़ाकर छह किए जाने से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की अधिक नियमित समीक्षा संभव होगी। इससे एनीमिया, गर्भावधि मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज), उच्च रक्तचाप तथा अन्य जोखिमपूर्ण स्थितियों की समय रहते पहचान और प्रबंधन के अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे जटिलताओं को गंभीर होने से पहले नियंत्रित किया जा सकेगा।
नोडल डॉ. अरविन्द सचान ने कहा कि अतिरिक्त एएनसी विजिट से आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी गर्भवती महिलाओं के साथ अधिक नियमित संपर्क का अवसर मिलेगा। इन मुलाकातों के दौरान महिलाओं को संतुलित पोषण, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों के नियमित सेवन, समय पर टीकाकरण, आवश्यक स्वास्थ्य जांच, संस्थागत प्रसव की तैयारी तथा नवजात शिशु की देखभाल के संबंध में परामर्श दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों को भी गर्भावस्था और नवजात में दिखाई देने वाले खतरे के लक्षणों के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय रहते स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क किया जा सके।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत प्रत्येक माह की 1, 9, 16 और 24 तारीख को स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवतियों की जांच कर उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की पहचान की जाती है और उनका प्रबंधन किया जाता है।
वर्ष 2025-26 में  पीएमएसएमए के तहत 84,271 गर्भवतियों की जांच की गई, जिनमें 6090 उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान की गई। चिन्हित उच्च जोखिम गर्भवतियों की नियमित निगरानी की गई तथा आवश्यकतानुसार उन्हें उच्चतर स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर किया गया।
एएनसी का समय निर्धारण इस प्रकार किया गया है—
पहली एएनसी : गर्भावस्था के पंजीकरण के तुरंत बाद, 12 सप्ताह के भीतर।
दूसरी एएनसी : 16 से 20 सप्ताह के बीच।
तीसरी एएनसी : 24 से 28 सप्ताह के बीच।
चौथी एएनसी : 28 से 32 सप्ताह के बीच।
पाँचवीं एएनसी : 32 से 36 सप्ताह के बीच।
छठी एएनसी : 36 से 40 सप्ताह के बीच।
पत्रकार बार्ता के दौरान भाजपा नेता ने पी. एम और सी.एम की जमकर प्रन्सशा।
                                       

रितेश मिश्रा
हरदोई ! भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा है कि जिस तरीके से गंगा नदी की धारा उत्तरांचल से निकल कर पश्चिम बंगाल तक गई है ठीक उसी तरीके से भारतीय जनता पार्टी को भी पीएम नरेंद्र मोदी के करिश्माइ नेतृत्व के बलबूते  उत्तरांचल से लेकर पश्चिम बंगाल तक बेहद मजबूती  मिली है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल व असम विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत ने साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी  देश के सर्वाधिक लोकप्रिय व सर्वमान्य  नेता है। उन्होने अपने पैतृक आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि पीएम मोदी जी द्वारा विदेश , आर्थिक व रक्षा नीति में लिए गए निर्णय के चलते विश्व भर के देशों में पीएम की साथ तेजी के साथ बढ़ी है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि ईरान युद्ध ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है ऐसे समय में पीएम मोदी जी ने जिस तरीके से देशवासियों का नेतृत्व कर जो साहसिक निर्णय लिये हैं उसे उन पर भरोसा अपेक्षाकृत और अधिक मजबूत हुआ है।यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की कार्य शैली की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और विकास के लिए उन्होंने जो भी मॉडल अपनाया है उस मॉडल को देश के अन्य राज्य भी तेजी के साथ अपना रहे भाजपा नेता पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि अगले साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं उनमें भी भाजपा की जीत सुनिश्चित है।श्री अग्रवाल ने कानून व्यवस्था  व विकास के लिए अपने दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए कहा कि जनपद मे  जिसने भी विकास किया है उसके बारे में यहां की जनता बखूबी जानती है विकास हमने किया या किसी और ने किया कुल मिलाकर हरदोई का विकास तो हुआ है ही।
पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल ने हरदोई भाजपा जिला अध्यक्ष को सलाह दी कि वह पार्टी संगठन में अनुशासन को पूरी तरीके से कायम रखने के संदर्भ में उचित कदम उठाए।प्रेस वार्ता के दौरान हरदोई नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष पंडित राम प्रकाश शुक्ला एडवोकेट भी मौजूद थे।