सौर ऊर्जा में यूपी ने रचा नया इतिहास, पीएम सूर्य घर उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित
* मंत्री ए.के. शर्मा के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा उत्तर प्रदेश का गौरव, लखनऊ बना देश का पहला जिला जहां एक लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने सौर एवं अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अग्रणी पहचान मजबूत की है। भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम “पीएम सूर्य घर के दो वर्ष : एक करोड़ रूफटॉप तक सौर ऊर्जा का विस्तार” के दौरान उत्तर प्रदेश को “पीएम सूर्य घर उत्कृष्टता पुरस्कार” के लिए चयनित किया गया है।

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में किए गए सतत प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज अक्षय ऊर्जा विकास के क्षेत्र में देश के लिए मॉडल राज्य बनकर उभरा है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

मंत्री ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में अब तक 9.91 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 5.57 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इससे 5.64 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है तथा प्रदेश में 1,888 मेगावाट से अधिक रूफटॉप सौर क्षमता विकसित हुई है।

उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को अब तक 3,602 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सब्सिडी तथा 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की राज्य सहायता प्रदान की जा चुकी है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना है जिसने PM Surya Ghar Stakeholders Monitoring State Dashboard विकसित कर योजना की रियल-टाइम निगरानी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है। प्रदेश में वर्तमान में प्रतिदिन करीब 2,000 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन किए जा रहे हैं और 6,000 से अधिक पंजीकृत वेंडरों के साथ उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी स्थिति में है। विशेष उपलब्धि के रूप में लखनऊ देश का पहला जिला बन गया है, जहां योजना के तहत एक लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूरे किए गए हैं। ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में सौर ऊर्जा कारोबार बढ़कर 36 से 40 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जिससे 70 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। इसके अलावा 9,200 सरकारी भवनों पर 247 मेगावाट, जल जीवन मिशन के तहत लगभग 900 मेगावाट तथा 691 वाणिज्यिक एवं औद्योगिक भवनों पर 220 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित की जा चुकी है।

सौर ऊर्जा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश अन्य अक्षय ऊर्जा कार्यक्रमों में भी देश में अग्रणी बना हुआ है। सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) क्षेत्र में 38 संयंत्रों के माध्यम से 284 टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के साथ प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। वहीं पीएम-कुसुम सी-1 योजना के अंतर्गत 7,821 संयंत्रों की स्थापना कर किसानों को स्वच्छ और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराई जा रही है।मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए यूपीनेडा, ऊर्जा विभाग, विद्युत वितरण निगमों, अधिकारियों, कर्मचारियों और सभी हितधारकों को बधाई देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश हरित ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
एक वर्ष में अपराधियों पर कसा शिकंजा, महिला सुरक्षा से लेकर साइबर अपराध नियंत्रण तक कई बड़ी उपलब्धियां; उत्तर प्रदेश पुलिस ने पेश किया रिपोर्ट का
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बीते एक वर्ष के दौरान अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराधों पर अंकुश, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पुलिस महानिदेशक Rajeev Krishna के नेतृत्व में 31 मई 2025 से 31 मई 2026 तक के कार्यकाल का विस्तृत ब्यौरा जारी किया गया है। इसके साथ ही आगामी वर्षों के लिए पुलिस की प्राथमिकताओं और कार्ययोजना की भी जानकारी दी गई है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पुलिस विभाग ने दस प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाकर कार्य किया, जिसके सकारात्मक परिणाम प्रदेशभर में देखने को मिले।

अपराधियों के खिलाफ सख्ती, दोषसिद्धि दर 93 प्रतिशत से अधिक

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत व्यापक कार्रवाई की। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 32 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 29 हजार से अधिक मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई। इस दौरान 42 हजार से अधिक अपराधियों को सजा दिलाई गई। इनमें 18 अपराधियों को मृत्युदंड और 3,340 अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

गैंगस्टर एक्ट के तहत हजारों अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 788 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त की गईं। माफिया और संगठित अपराध से जुड़े तत्वों के खिलाफ अभियान चलाकर 336 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियों को जब्त, ध्वस्त या कब्जामुक्त कराया गया।

लूट, चोरी और डकैती की घटनाओं में कमी

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कई गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है। लूट की घटनाओं में लगभग 28 प्रतिशत, चोरी में 14 प्रतिशत और डकैती में 11 प्रतिशत की गिरावट आई है। हत्या, बलवा और नकबजनी जैसे अपराधों में भी कमी दर्ज की गई है।

महिला सुरक्षा को मिली नई मजबूती

महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिशन शक्ति अभियान को और मजबूत किया गया। प्रदेश के सभी थानों में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए और हजारों पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। महिला हेल्प डेस्क व्यवस्था को और प्रभावी बनाया गया।

पुलिस के अनुसार मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के बाद महिलाओं से जुड़े अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। बलात्कार के मामलों में करीब 34 प्रतिशत, महिलाओं और बच्चियों के अपहरण के मामलों में 17 प्रतिशत, दहेज हत्या में लगभग 13 प्रतिशत तथा घरेलू हिंसा के मामलों में लगभग 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

जन शिकायतों के निस्तारण में सुधार

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जन शिकायत पोर्टल और अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया गया। लगातार निगरानी और समीक्षा के चलते लंबित शिकायतों में लगभग 28 प्रतिशत की कमी आई।

पूरे वर्ष शांतिपूर्ण रहा प्रदेश

पुलिस के अनुसार समीक्षा अवधि के दौरान प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था सफल रही। इसके अलावा होली, दीपावली, ईद तथा अन्य धार्मिक आयोजनों को भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।

साइबर अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई

साइबर अपराधों से निपटने के लिए लखनऊ में विशेष साइबर अपराध कॉल सेंटर की क्षमता को बढ़ाया गया। ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध से संबंधित मामलों में कार्रवाई करते हुए 400 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज कराई गई। साथ ही एक लाख से अधिक मोबाइल नंबर और बड़ी संख्या में मोबाइल उपकरणों की पहचान संख्या ब्लॉक कराई गई।

साइबर अपराध की जांच और रोकथाम के लिए हजारों पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया तथा प्रत्येक जोन में विशेष साइबर कमांडो तैनात किए गए।

तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा

पुलिसिंग को आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित "यक्ष" नामक विशेष एप विकसित किया गया। इस प्रणाली के माध्यम से फरार अपराधियों की पहचान, गिरोहों की निगरानी, बीट पुलिसिंग और अपराध विश्लेषण जैसे कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर जोर

प्रदेश में 60 हजार से अधिक नव आरक्षियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही नए आपराधिक कानूनों के संबंध में 27 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण में साइबर अपराध, डिजिटल साक्ष्य, आर्थिक अपराध और आधुनिक जांच पद्धतियों को विशेष रूप से शामिल किया गया।

पुलिस कर्मियों के कल्याण के लिए कई कदम

पुलिस विभाग ने अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए भी कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं। दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। बीमा सुविधाओं का विस्तार किया गया तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी बजट में वृद्धि की गई।

मेधावी बच्चों के लिए छात्रावास बनाने की योजना शुरू की गई। पुलिस परिवारों के लिए स्वास्थ्य शिविर, करियर परामर्श और कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाए गए।

सड़क दुर्घटनाएं कम करने की पहल

सड़क सुरक्षा को लेकर "शून्य मृत्यु जिला योजना" लागू की गई। इसके तहत दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर विशेष टीमें तैनात की गईं। इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं, मौतों और घायलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।

आतंकवाद, मादक पदार्थ तस्करी और परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई

आतंकवाद निरोधक दस्ते, विशेष कार्य बल और मादक पदार्थ विरोधी इकाइयों ने आतंकवाद, अवैध घुसपैठ, मादक पदार्थ तस्करी, अवैध हथियार कारोबार, वन्यजीव तस्करी और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान चलाए। करोड़ों रुपये मूल्य के मादक पदार्थ बरामद किए गए और कई संगठित गिरोहों का पर्दाफाश किया गया।

आगामी कार्ययोजना क्या है?

उत्तर प्रदेश पुलिस ने भविष्य के लिए भी व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल साक्ष्यों का अधिक उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक समन व्यवस्था को मजबूत करना और समयबद्ध विवेचना को प्राथमिकता दी जाएगी।

इसके साथ ही माफिया, संगठित अपराधियों और आर्थिक अपराध से जुड़े लोगों के खिलाफ वित्तीय जांच को और मजबूत किया जाएगा। अवैध संपत्तियों, बेनामी निवेश, हवाला नेटवर्क और फर्जी कंपनियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मौत बनकर दौड़ी रफ्तार, कंटेनर में समाई कार; महिला समेत तीन की दर्दनाक मौत, पांच जिंदगी की जंग लड़ रहे

लखनऊ । आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर रविवार देर रात एक ऐसा भयावह सड़क हादसा हुआ, जिसने देखने वालों की रूह कंपा दी। तेज रफ्तार कार आगे चल रहे कंटेनर में पीछे से इतनी जोरदार तरीके से टकराई कि वह कंटेनर के पिछले हिस्से में समा गई। टक्कर के बाद कंटेनर चालक करीब 50 मीटर तक कार को घसीटता रहा। हादसे में महिला समेत तीन लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक मासूम बच्चे सहित पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
यह हादसा थाना फतेहाबाद क्षेत्र में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 36.700 पर रात करीब दो बजे हुआ। बताया जा रहा है कि राजस्थान के चूरू निवासी सोहेब अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ बिहार से राजस्थान लौट रहे थे। कार में कुल आठ लोग सवार थे। सफर के दौरान अचानक तेज रफ्तार कार आगे चल रहे कंटेनर से टकरा गई।
टक्कर इतनी भीषण कि कार के उड़ गए परखच्चे
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे की आवाज दूर तक सुनाई दी। टक्कर के बाद कार का अगला हिस्सा पूरी तरह कंटेनर के नीचे घुस गया और वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कार में बैठे लोग लोहे के ढांचे में फंसकर चीखते रहे। हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हाइड्रा मशीन से काटकर निकाले गए घायल
सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक फतेहाबाद विनोद कुमार मिश्र, यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी राधा मोहन द्विवेदी और उनकी टीम मौके पर पहुंची। कार इतनी बुरी तरह फंस चुकी थी कि घायलों को बाहर निकालना चुनौती बन गया। राहत एवं बचाव कार्य के लिए हाइड्रा मशीन बुलानी पड़ी। करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कार को काटकर उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला गया।
लेकिन तब तक एक महिला सहित तीन लोगों की सांसें थम चुकी थीं। वहीं परमिला, पूजा कुमारी, राजू, कार चालक सोहेब और छह वर्षीय अयांश गंभीर रूप से घायल मिले। सभी घायलों को तत्काल सीएचसी फतेहाबाद पहुंचाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा रेफर कर दिया गया।
हादसे के बाद कंटेनर चालक फरार
दुर्घटना के बाद कंटेनर चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने कंटेनर को कब्जे में ले लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि हादसा तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुआ, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
एक ही परिवार और रिश्तेदारी से जुड़े लोगों के साथ हुए इस हादसे ने खुशियों भरे सफर को मातम में बदल दिया। कुछ ही पलों में तीन जिंदगियां खत्म हो गईं, जबकि पांच लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। हादसे की सूचना मिलते ही मृतकों और घायलों के परिजनों में कोहराम मच गया।
पुलिस का बयान
प्रभारी निरीक्षक फतेहाबाद विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि हादसे में महिला समेत तीन लोगों की मौत हुई है और पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि घायलों का उपचार चल रहा है। फरार कंटेनर चालक की तलाश के लिए टीमों को लगाया गया है।