बंगाल हत्याकांड पर यूपी में राजनीतिक घमासान
* अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना
लखनऊ। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब इस हत्याकांड को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्य आरोपी राज सिंह के कथित बीजेपी कनेक्शन को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। आरोपी की बीजेपी नेताओं के साथ वायरल तस्वीरों का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ता से जुड़े लोगों के नाम सामने आना बेहद गंभीर और शर्मनाक है।
राज सिंह की गिरफ्तारी को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा,
“जिस आरोपी की आप बात कर रहे हैं, जिसे पुलिस ने उठाया है, भाजपा का कौन नेता नहीं है जिसके साथ उसकी तस्वीर न हो? सुनने में आया है कुछ लोग अभी-अभी मुख्यमंत्री से मिलकर आए हैं। वो सिफारिश करके आए हैं कि ये निर्दोष है, इसे बंगाल ना जाने दो, पुलिस ना उठा ले जाए।”
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। वहीं बीजेपी की ओर से अब तक इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पर्यटन विभाग में रिश्वतखोरी का कथित वीडियो वायरल, उप निदेशक पर उठे सवाल

* लखनऊ में तैनात पर्यटन विभाग के उप निदेशक K.S. यादव का कथित घूस लेते वीडियो वायरल, जांच की मांग तेज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग में भ्रष्टाचार के एक कथित मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। लखनऊ में तैनात उप निदेशक पर्यटन विभाग कल्याण सिंह उर्फ़ K.S. यादव का कथित रूप से रिश्वत लेते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्हें कथित तौर पर रुपये लेते हुए देखा जा रहा है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक वायरल वीडियो की जांच की मांग जोर पकड़ रही है और मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुका है। हालांकि अब तक वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और विभागीय जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद आम लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या सरकार और विभाग भ्रष्टाचार के इस कथित मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
टेबल टेनिस में यूपी पुलिस की धमाकेदार जीत, मणिपुर और मिजोरम को हराया
लखनऊ। All India Police Badminton Cluster Tournament 2025-26 के अंतर्गत केडी सिंह बाबू स्टेडियम में आयोजित टेबल टेनिस प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश पुलिस की महिला और पुरुष दोनों टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस शानदार जीत से पूरे प्रदेश और पुलिस बल का गौरव बढ़ गया है।

पुरुष टीम ने मिज़ोरम को पराजित कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया

महिला वर्ग के फाइनल मुकाबले में Uttar Pradesh Police की टीम ने मणिपुर को हराकर गोल्ड मेडल जीता, जबकि पुरुष टीम ने मिज़ोरम को पराजित कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन, अनुशासन और टीम भावना की अधिकारियों ने जमकर सराहना की।

कठिन परिश्रम और संघर्ष का प्रतीक :डॉ. रामकृष्ण स्वर्णकार

इस अवसर पर अपर पुलिस महानिदेशक पीएसी डॉ. रामकृष्ण स्वर्णकार तथा पुलिस महानिरीक्षक मध्य जोन एवं सचिव उत्तर प्रदेश पुलिस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।अधिकारियों ने कहा कि खिलाड़ियों की यह उपलब्धि उनके समर्पण, कठिन परिश्रम और संघर्ष का प्रतीक है। प्रतियोगिता में यूपी पुलिस टीम के शानदार प्रदर्शन ने दर्शकों का भी दिल जीत लिया।
शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड में बड़ा खुलासा! अयोध्या से पकड़े गए राज सिंह के नेताओं-माफिया से निकले तार
लखनऊ । शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या मामले में गिरफ्तार आरोपी राज सिंह को लेकर लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि राज सिंह के कई बड़े नेताओं और कथित माफिया से संबंध थे। वह खुद को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का प्रदेश महासचिव बताता था और उत्तर प्रदेश के कई प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों के संपर्क में था।

कोलकाता पुलिस ने हत्या मामले में यूपी के बलिया निवासी राज सिंह को अयोध्या-बस्ती हाईवे से गिरफ्तार किया, जबकि उसके दो साथी मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्या को बिहार के बक्सर से पकड़ा गया। पुलिस जांच में राज सिंह की भूमिका शूटरों को संसाधन उपलब्ध कराने और पूरी साजिश में सहयोग करने की बताई जा रही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, हत्या के बाद फरार आरोपियों तक पहुंचने में एक यूपीआई पेमेंट अहम सुराग बना। अयोध्या-बस्ती मार्ग के टोल प्लाजा पर किए गए डिजिटल भुगतान से पुलिस आरोपियों तक पहुंची। बताया जा रहा है कि राज सिंह 7 मई को लखनऊ में एक राजनीतिक परिवार की शादी में शामिल होने आया था। इसके बाद वह अंबेडकरनगर और अयोध्या गया, जहां से लौटते समय उसकी लोकेशन ट्रेस हुई।

जांच में यह भी सामने आया है कि राज सिंह पार्षद का चुनाव लड़ चुका है और बलिया के चिलकहर क्षेत्र से ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ने की तैयारी में था। उस पर पहले से हत्या का एक मुकदमा भी दर्ज बताया जा रहा है। हालांकि उसकी मां ने बेटे को निर्दोष बताते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) को शक है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या की साजिश करीब डेढ़ महीने पहले से रची जा रही थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक हमलावरों ने वारदात से पहले रेकी की थी और अपनी पहचान छिपाने के लिए बेहद पेशेवर तरीके से योजना बनाई गई थी। पुलिस का मानना है कि इस पूरे षड्यंत्र में कम से कम आठ लोग शामिल थे, जिनमें एक पेशेवर शूटर भी हो सकता है।

गिरफ्तार तीनों आरोपियों को बारासात कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 13 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। मामले में अब राजनीतिक और आपराधिक गठजोड़ के एंगल से भी जांच तेज हो गई है।
मोदी की ‘सोना न खरीदने’ की अपील पर सराफा कारोबारियों में नाराजगी, लखनऊ में एक दिन बंद रहेगा बाजार

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशवासियों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने की अपील के बाद सराफा कारोबारियों में नाराजगी बढ़ गई है। विरोध स्वरूप लखनऊ महानगर सराफा एसोसिएशन ने शहर में एक दिवसीय व्यापार बंद का आह्वान किया है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि सराफा बाजार पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में सोना न खरीदने की अपील व्यापारियों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे लाखों छोटे व्यापारियों, कारीगरों और इस व्यवसाय से जुड़े परिवारों पर सीधा असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सराफा व्यापार देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा हिस्सा है। यदि लोग लंबे समय तक सोने की खरीदारी से दूरी बनाते हैं तो बाजार में भारी गिरावट आ सकती है। एसोसिएशन ने देशभर के सराफा व्यापारियों से एकजुट होकर विरोध दर्ज कराने और इस मुहिम में शामिल होने की अपील की है।

व्यापारियों का कहना है कि सरकार को आयात नियंत्रण और विदेशी मुद्रा संतुलन के लिए अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए, न कि सीधे तौर पर सोने की खरीदारी को हतोत्साहित करना चाहिए। वहीं, बाजार बंद के ऐलान के बाद लखनऊ के सराफा कारोबारियों में हलचल तेज हो गई है।

यूपी में उच्च शिक्षा को नई पहचान: अब डिग्री कॉलेजों को भी मिलेगी राष्ट्रीय रैंकिंग
* योगी सरकार का बड़ा कदम, विश्वविद्यालयों के बाद अब डिग्री कॉलेजों को उत्कृष्टता की दौड़ में शामिल करने की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगी सरकार लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। कभी नैक (NAAC) रैंकिंग में बी और बी-प्लस ग्रेड तक सीमित रहने वाले प्रदेश के विश्वविद्यालय आज ए++, ए+ और ए ग्रेड हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं। अब सरकार ने प्रदेश के डिग्री कॉलेजों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग दिलाने की दिशा में बड़ा अभियान शुरू किया है।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विधानसभा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार का फोकस अब केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा। अगले चरण में प्रदेश के डिग्री कॉलेजों को भी नैक और अन्य राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, रिसर्च कल्चर, डिजिटल एजुकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्र सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सके।
उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने, रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने और कॉलेजों में छात्र संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को केवल सबसे अधिक विश्वविद्यालयों वाला राज्य बनाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र बनाना है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं। योगी सरकार से पहले प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालय नैक रैंकिंग में बी या बी-प्लस ग्रेड तक सीमित थे और कोई भी विश्वविद्यालय ए श्रेणी में नहीं था। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालयों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिनका सकारात्मक परिणाम आज देखने को मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के सात विश्वविद्यालय नैक की ए++ रैंकिंग प्राप्त कर चुके हैं, जबकि चार विश्वविद्यालय ए+ और दो विश्वविद्यालय ए ग्रेड हासिल कर चुके हैं। इतना ही नहीं, प्रदेश के दो विश्वविद्यालय क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में शामिल हुए हैं और छह विश्वविद्यालय क्यूएस एशिया रैंकिंग में स्थान बना चुके हैं। इसके अलावा तीन विश्वविद्यालय यूजीसी ग्रेड-1 श्रेणी में भी पहुंच चुके हैं।
सरकार का मानना है कि विश्वविद्यालयों की तरह यदि डिग्री कॉलेजों में भी गुणवत्ता, शोध और आधुनिक शिक्षण व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए, तो उत्तर प्रदेश देश में उच्च शिक्षा के सबसे मजबूत मॉडल के रूप में उभर सकता है।
यूपी की ऐतिहासिक धरोहरों को मिलेगा नया जीवन: 40 स्मारक और पुरास्थल होंगे संरक्षित

* योगी सरकार का बड़ा फैसला, खंडहर बन रहे प्राचीन स्मारकों का होगा संरक्षण और पर्यटन विकास

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 40 ऐतिहासिक स्मारकों और पुरास्थलों को संरक्षित घोषित करने का निर्णय लिया है। इनमें कई स्मारक ढाई हजार से तीन हजार वर्ष पुराने बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ स्थल कुषाण काल से संबंधित माने जा रहे हैं। इसके साथ ही तीन स्थलों को असंरक्षित घोषित किया गया है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की प्राचीन धरोहरें स्थापत्य कला, संस्कृति और इतिहास की अमूल्य विरासत हैं। समय के साथ कई स्मारक जीर्ण-शीर्ण होकर खंडहर में बदलते जा रहे हैं, इसलिए राज्य सरकार ने इन्हें संरक्षित कर नया स्वरूप देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि इन स्मारकों के आसपास बुनियादी सुविधाएं विकसित कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि पर्यटक और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इन स्थलों तक पहुंच सकें। साथ ही बाउंड्रीवाल और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं के जरिए अतिक्रमण रोकने की भी योजना बनाई गई है।

* कई जिलों के ऐतिहासिक स्थल सूची में शामिल
संरक्षित घोषित किए गए स्मारकों में सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी, कानपुर नगर, रायबरेली, लखनऊ, प्रतापगढ़, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, देवरिया, जालौन, ललितपुर, झांसी, महोबा, गाजीपुर, वाराणसी, आगरा, मैनपुरी, सहारनपुर और रामपुर के ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।
इनमें प्राचीन शिव मंदिर, किले, बावलियां, समाधियां, टीले, मंदिर परिसर और ऐतिहासिक भवन प्रमुख रूप से शामिल हैं। लखनऊ स्थित ऐतिहासिक मूसाबाग भवन और कालाकांकर भवन को भी संरक्षण सूची में शामिल किया गया है।

* नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की पहल
पर्यटन मंत्री ने कहा कि यह पहल केवल स्मारकों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास भी है। उन्होंने कहा कि ये स्मारक भारतीय स्थापत्य कला और प्राचीन सभ्यता के दुर्लभ उदाहरण हैं, जिन्हें संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार इन स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में भी कार्य करेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
भूसा संग्रहण अभियान में तेजी लाने के निर्देश, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई : धर्मपाल सिंह

लखनऊ। धर्मपाल सिंह ने प्रदेश में संचालित “भूसा संग्रहण अभियान” की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गौआश्रय स्थलों में किसी भी गौवंश को भूखा-प्यासा नहीं रहने दिया जाए। उन्होंने कहा कि भूसा संग्रहण, पशु आहार प्रबंधन और गौआश्रय स्थलों के संचालन को मिशन मोड में संचालित किया जाए तथा लक्ष्य पूरा न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विधान भवन स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने भूसा संग्रहण में न्यूनतम प्रदर्शन करने वाले जनपद हमीरपुर, वाराणसी, प्रतापगढ़, औरैया और अयोध्या को चेतावनी देते हुए अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गौ संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में भूसा संग्रहण का कुल लक्ष्य 1.37 करोड़ कुंतल निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 1.11 करोड़ कुंतल भूसा संग्रहित किया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गेहूं कटाई के मौजूदा मौसम का लाभ उठाकर अधिक से अधिक भूसा संग्रहित किया जाए। साथ ही भूसा एवं साइलेज टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने तथा गोचर भूमि को कब्जामुक्त कर हरा चारा बोने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में गौआश्रय स्थलों पर गोवंशों के लिए भूसा, हरा चारा, स्वच्छ पेयजल, छायादार व्यवस्था, चिकित्सा और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने पशुओं की सुरक्षा के लिए समयबद्ध टीकाकरण अभियान चलाने तथा दवाइयों और वैक्सीन की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश भी दिए।
धर्मपाल सिंह ने गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट स्थापित करने पर भी बल देते हुए कहा कि इससे गोबर का समुचित प्रबंधन होगा और गौआश्रय स्थल आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि गोबर गैस और जैविक खाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी सहायक होगी।
बैठक में मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एनजीओ द्वारा संचालित गौआश्रय स्थलों का सत्यापन कर उनकी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि गौशालाओं का संचालन व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में वर्तमान में 7386 गौआश्रय स्थलों में 12,37,694 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1,14,481 लाभार्थियों को 1,84,227 गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। अभियान के तहत 1905 अस्थायी एवं 7285 स्थायी भूसा बैंक स्थापित किए जा चुके हैं। भूसा संग्रहण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनपदों में जालौन, मुजफ्फरनगर, नोएडा, मिर्जापुर और महोबा शामिल हैं।
कर्मचारी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से मिले हरिकिशोर तिवारी
* कैशलेस योजना और पेंशन मुद्दे पर उठाई आवाज

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष इं. हरिकिशोर तिवारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर प्रदेश के कर्मचारियों एवं शिक्षकों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कर्मचारी संगठनों और शासन स्तर पर लंबित बैठकों को लेकर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
इं. तिवारी ने कहा कि तत्कालीन अपर मुख्य सचिव कार्मिक देवेश चतुर्वेदी के दिल्ली स्थानांतरण के बाद से कर्मचारी संगठनों के साथ किसी भी स्तर पर नियमित बैठक नहीं हो सकी है, जिसके कारण कर्मचारियों की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान लंबित पड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि शासनादेश जारी कर कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित संवाद और बैठकें सुनिश्चित कराई जाएं।
बैठक में वर्ष 2016 की पं. दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा योजना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। परिषद की ओर से कहा गया कि लंबे आंदोलन और संघर्ष के बाद बनी यह नियमावली गंभीर बीमारियों—जैसे कैंसर, ब्रेन हेमरेज, लीवर ट्रांसप्लांट, घुटना प्रत्यारोपण आदि—के लिए असीमित इलाज की व्यवस्था प्रदान करती थी, लेकिन बाद में इसे आयुष्मान योजना से जोड़कर इलाज की सीमा मात्र पांच लाख रुपये तक सीमित कर दी गई। परिषद ने मूल नियमावली को पुनः लागू करने की मांग की।
लोक निर्माण विभाग में ऑनलाइन आगणन और स्वीकृति प्रक्रियाओं में हो रही देरी का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। परिषद ने कहा कि अधिकांश स्वीकृतियां वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में जारी होने से कार्यों को जल्दबाजी में पूरा करना पड़ता है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। परिषद पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि वर्ष 2018 में कर्मचारी-शिक्षक आंदोलन के दौरान सरकार ने समिति बनाकर वार्ता कराई थी। इसी क्रम में सरकारी अंशदान को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया गया, जिसने नई पेंशन व्यवस्था की कमियों के आकलन और आगे चलकर यूपीएस (यूनिफाइड पेंशन स्कीम) जैसे विकल्प तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिषद ने कहा कि कर्मचारियों के हित में आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
इस अवसर पर परिषद के महामंत्री शिवबरन सिंह यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेम कुमार सिंह, कार्यवाहक अध्यक्ष इं. एन.डी. द्विवेदी, कार्यवाहक महामंत्री डॉ. नरेश, सुभाष पांडे, एच.एन. मिश्रा, अखिलेश अग्निहोत्री, आशुतोष तिवारी, प्रभात मिश्रा, संतोष तिवारी, अनुज शुक्ला और दिवाकर राय सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मुख्यमंत्री से सकारात्मक कार्रवाई और आवश्यक आदेश जारी होने की उम्मीद जताई।
“संपदा” कार्यक्रम में सहेजी गई विलुप्त होती अलगोजा वादन परंपरा, ब्रज लोक संगीत की बिखरी छटा


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक संगीत परंपराओं और विलुप्तप्राय लोक वाद्यों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान एवं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में “संपदा” कार्यक्रम के अंतर्गत विलुप्त हो रहे अलगोजा वादन का अभिलेखीकरण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी स्टूडियो में किया गया।
संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि कार्यक्रम में मथुरा के प्रसिद्ध लोक कलाकार सुखवीर एवं हरप्रसाद ने अलगोजा और चंग वादन की पारंपरिक शैली का प्रभावशाली प्रदर्शन प्रस्तुत किया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से ब्रज क्षेत्र की लोक संवेदनाओं, सांगीतिक विरासत और पारंपरिक धुनों को जीवंत कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान अलगोजा वादन और लोक संगीत परंपरा पर केंद्रित एक विशेष साक्षात्कार भी आयोजित किया गया। कलाकारों का साक्षात्कार डॉ. शोभित नाहर ने लिया। इस दौरान अलगोजा वादन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, तकनीकी विशेषताओं, वर्तमान चुनौतियों और नई पीढ़ी तक इस लोक परंपरा को पहुंचाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश एवं देश की विलुप्त होती लोक कलाओं और वाद्य परंपराओं का दस्तावेजीकरण कर उन्हें संरक्षित करना तथा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करना है। उपस्थित कला प्रेमियों, शोधार्थियों और संगीत अनुरागियों ने इस पहल को लोक संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी और सार्थक कदम बताया।