सोनभद्र लाइमस्टोन ब्लॉक-ए की ई-नीलामी के लिए NIT जारी, 79 मिलियन टन भंडार का होगा दोहन


खनन क्षेत्र में बढ़ेगा निवेश, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग उत्तर प्रदेश की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि जनपद सोनभद्र स्थित डाला कजरहट लाइमस्टोन ब्लॉक-ए (161 हेक्टेयर) की ई-नीलामी के लिए Notice Inviting Tender (NIT) 6 मई 2026 को जारी कर दिया गया है।
इस खनन ब्लॉक में लगभग 79.20 मिलियन टन चूना पत्थर का भंडार आंका गया है। इसमें CaO (कैल्शियम ऑक्साइड) की औसत मात्रा 41.98 प्रतिशत है, जो सीमेंट उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता के कच्चे माल के रूप में उपयोगी है।
सरकार के अनुसार, ई-नीलामी प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य को बेहतर राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही, यह पहल प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने और खनन क्षेत्र के विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाएगी।
इस परियोजना के जरिए विशेष रूप से सोनभद्र क्षेत्र में खनन आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ प्रदेश के सतत विकास को भी बल मिलेगा।
बीसी सखी कार्यक्रम से बदल रही यूपी की ग्रामीण तस्वीर, महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का नया आधार
“एक ग्राम पंचायत–एक बीसी सखी” मॉडल से गांव-गांव पहुंचीं बैंकिंग सेवाएं, 44 हजार करोड़ से अधिक लेन-देन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में “बीसी सखी कार्यक्रम” एक प्रभावशाली पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में संचालित यह योजना गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत चल रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें बैंकिंग प्रतिनिधि (बीसी सखी) के रूप में स्थापित करना है। “एक ग्राम पंचायत–एक बीसी सखी” के सिद्धांत पर आधारित यह योजना लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
वर्तमान में प्रदेश में लगभग 40 हजार बीसी सखियां सक्रिय हैं, जो गांव-गांव जाकर बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इनके माध्यम से अब तक 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन-देन किया जा चुका है। ये सखियां नकद जमा-निकासी, आधार आधारित भुगतान (AePS), बैलेंस जांच, बीमा, पेंशन और ऋण पुनर्भुगतान जैसी सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
यह कार्यक्रम न केवल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि महिलाओं को डिजिटल और आर्थिक रूप से भी सशक्त बना रहा है। सुल्तानपुर की प्रियंका मौर्य और लखनऊ की अनीता पाल जैसी बीसी सखियां प्रतिमाह औसतन 45 हजार रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित कर रही हैं। अब तक बीसी सखियों द्वारा 121 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित किया जा चुका है।
कार्यक्रम में भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक साझेदार के रूप में जुड़े हैं, जिनके सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार हो रहा है। बीसी सखियों को माइक्रो एटीएम, लैपटॉप और स्मार्टफोन जैसे डिजिटल उपकरणों से भी सशक्त किया जा रहा है।
सरकार इस योजना के दायरे को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। बीसी सखियों को जन सेवा केंद्र संचालन, बीमा सेवाएं, आरडी खाता खोलना, ऋण वितरण और डाकघर योजनाओं से जोड़ने की तैयारी है। भविष्य में उन्हें आधार अपडेट जैसी सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है।
जनपद स्तर पर भी इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। वर्तमान में प्रयागराज पहले स्थान पर है, जबकि बरेली और शाहजहांपुर क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
मिशन निदेशक दीपा रंजन के अनुसार, लक्ष्य है कि जल्द ही सभी ग्राम पंचायतों में बीसी सखी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि “आत्मनिर्भर ग्रामीण महिला–आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” के संकल्प को साकार किया जा सके। यह योजना न केवल महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
अवैध खनन पर यूपी में बड़ी कार्रवाई, 385 वाहनों पर शिकंजा; 1.85 करोड़ का जुर्माना

* प्रदेशव्यापी अभियान तेज, ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन पर सख्ती जारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अवैध खनन, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर अंकुश लगाने के लिए चलाए गए विशेष अभियान में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग उत्तर प्रदेश के निर्देश पर 1 मई से 3 मई तक चले प्रवर्तन अभियान के दौरान प्रदेशभर में 385 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई और 1 करोड़ 85 लाख रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया।
यह अभियान विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव के निर्देश पर संचालित किया गया। जांच के दौरान अधिकांश वाहन वैध प्रपत्रों के साथ संचालित होते पाए गए, जबकि अवैध परिवहन या ओवरलोडिंग में संलिप्त वाहनों पर सख्त कार्रवाई की गई।
माला श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा। इसी क्रम में 6 मई से निदेशालय स्तर से 20 विशेष टीमें विभिन्न जनपदों के लिए रवाना की जा रही हैं, जो जमीनी स्तर पर सघन जांच करेंगी।
उन्होंने अंतर्राज्यीय सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अन्य राज्यों से आने वाले उपखनिजों का परिवहन केवल ISTP (इंटर-स्टेट ट्रांजिट पास) के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए और ओवरलोडिंग पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। साथ ही, खनन स्थलों पर निर्धारित लोडिंग मानकों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि खनन कार्यों में पारदर्शिता और कानून व्यवस्था बनी रहे।
यूपी में अब घर बैठे मिलेगी खतौनी की प्रमाणित प्रति, तहसील के चक्कर से मिलेगी राहत

* राजस्व विभाग की नई डिजिटल व्यवस्था लागू, 24 घंटे ऑनलाइन सेवा उपलब्ध

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब लोगों को इस कार्य के लिए तहसील या कचहरी जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नागरिक घर बैठे ही कुछ आसान चरणों में खतौनी की प्रमाणित नकल प्राप्त कर सकेंगे।
राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल के तहत नागरिक UP Bhulekh Portal या Board of Revenue Uttar Pradesh Portal पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद ‘खतौनी की नकल’ विकल्प का चयन करना होगा। इसके बाद जनपद, तहसील और गांव की जानकारी दर्ज कर संबंधित गाटा संख्या का चयन करना होगा।
निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करते ही खतौनी की प्रमाणित प्रति तुरंत डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाएगी। यह सेवा 24 घंटे संचालित रहेगी, जिससे नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी इसका लाभ उठा सकते हैं।
नई व्यवस्था में यूपीआई सहित विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है, जिससे भुगतान प्रक्रिया भी तेज और सरल हो गई है।
सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल समय और श्रम की बचत होगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी और आम लोगों को अनावश्यक खर्च से राहत मिलेगी।
भारत-रूस सहयोग से यूपी के युवाओं को मिलेगा रोजगार, उच्चस्तरीय बैठक में बनी रणनीति
* रूस में 5 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर, सेंट पीटर्सबर्ग आर्थिक फोरम में यूपी प्रतिनिधिमंडल होगा शामिल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारत-रूस सहयोग के अंतर्गत एक उच्चस्तरीय बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के कुशल युवाओं को वैधानिक और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत रूस में रोजगार उपलब्ध कराने पर सहमति बनी।
बैठक में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर और मॉस्को सरकार के डिपार्टमेंट फॉर एक्सटर्नल इकोनॉमिक एंड इंटरनेशनल रिलेशंस के मंत्री Sergey Cheremin के बीच विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भारत और रूस के पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने के साथ रोजगार सृजन के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया।
मॉस्को सरकार की ओर से बताया गया कि केवल मॉस्को में ही 5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं, जबकि रूस के अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में कुशल कामगारों की आवश्यकता है। खासकर निर्माण कार्य, इलेक्ट्रीशियन, प्लम्बर और कारपेंटर जैसे तकनीकी क्षेत्रों में मांग अधिक है।
बैठक के दौरान सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित होने वाले आगामी आर्थिक फोरम में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया गया, जिसे मंत्री अनिल राजभर ने स्वीकार कर लिया। इस फोरम में प्रदेश सरकार भविष्य की कार्ययोजना और सहयोग के नए आयामों पर चर्चा करेगी।
मंत्री अनिल राजभर ने यह भी स्पष्ट किया कि युवाओं में रूस जाकर सेना में शामिल किए जाने को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है। इस पर रूसी पक्ष ने आश्वासन दिया कि पूरी प्रक्रिया सुरक्षित, पारदर्शी और स्वैच्छिक होगी, तथा किसी प्रकार का जोखिम या दबाव युवाओं पर नहीं डाला जाएगा।
रूसी भाषा के महत्व पर जोर देते हुए बताया गया कि रोजगार के इच्छुक युवाओं के लिए भाषा ज्ञान आवश्यक होगा। इस पर प्रदेश सरकार ने आश्वस्त किया कि सेवायोजन विभाग के माध्यम से जल्द ही रूसी भाषा प्रशिक्षण भी शुरू किया जाएगा। वर्तमान में जापानी और जर्मन भाषा का प्रशिक्षण पहले से दिया जा रहा है।
बैठक में उत्तर प्रदेश शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए, जिनमें प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन डॉ. शणमुगा सुंदरम, निदेशक नेहा प्रकाश सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
यह पहल न केवल उत्तर प्रदेश के युवाओं को वैश्विक रोजगार से जोड़ने में मददगार होगी, बल्कि भारत-रूस के बीच आर्थिक और श्रम सहयोग को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
आर.एस.ए.सी. में आकाशीय बिजली पर उच्च स्तरीय मंथन, पूर्वानुमान और बचाव के उपायों पर जोर

* इसरो, एनडीएमए और एसडीएमए के विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव, ग्राउंड सेंसर नेटवर्क विस्तार पर चर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत संचालित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आर.एस.ए.सी.), लखनऊ में आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) से बचाव एवं उसके प्रभावी न्यूनीकरण के उपायों पर उच्च स्तरीय वैज्ञानिक विचार-विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इसरो, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA), स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) सहित विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियों के माध्यम से आकाशीय बिजली के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। इसरो के वैज्ञानिकों ने ग्राउंड सेंसर के जरिए डेटा संग्रहण और उसे ‘भुवन पोर्टल’ पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी। साथ ही प्रदेश में ग्राउंड सेंसर नेटवर्क के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
एनडीएमए के विशेषज्ञों ने आकाशीय बिजली से जुड़े सामुदायिक मूल्यांकन, जनजागरूकता, क्षमता विकास और प्रबंधन कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रदेश में आकाशीय बिजली से निपटने के लिए संस्थागत और ऑपरेशनल फ्रेमवर्क की रूपरेखा प्रस्तुत की।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि आकाशीय बिजली के पूर्वानुमान से जुड़ी सटीक जानकारी को एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम लोगों तक सरल और सुलभ रूप में पहुंचाया जाए। इसके साथ ही विभिन्न स्टेकहोल्डर्स ने जोखिम वाले क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान और बचाव उपायों पर अपने सुझाव साझा किए।
इस अवसर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आर.एस.ए.सी. के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक मौजूद रहे।
शिक्षामित्रों का मानदेय 18,000 रु. हुआ, प्रदेशभर में सम्मान समारोह

* सीएम ने 10 शिक्षामित्रों को दिए प्रतीकात्मक चेक, ‘अरुणोदय’ कैलेंडर का विमोचन; बेसिक शिक्षा में सुधारों की झलक

गोरखपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत करीब 1.43 लाख शिक्षामित्रों का मानदेय 10,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा को लागू किया। इस अवसर पर गोरखपुर स्थित योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में भव्य “शिक्षामित्र सम्मान समारोह” का आयोजन किया गया, जबकि प्रदेश के सभी जनपदों में भी समानांतर कार्यक्रम आयोजित हुए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 10 चयनित शिक्षामित्रों को प्रतीकात्मक चेक वितरित कर बढ़े हुए मानदेय की औपचारिक शुरुआत की। साथ ही विद्यार्थी नेतृत्व आधारित गतिविधियों पर केंद्रित ‘अरुणोदय’ कैलेंडर का विमोचन किया और बेसिक शिक्षा विभाग के उपलब्धि-आधारित स्टॉलों का अवलोकन भी किया।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि यह आयोजन शिक्षामित्रों के त्याग और समर्पण के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया मानदेय अब 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है। इसके लिए लगभग 230.11 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है, ताकि समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सके।
मंत्री ने बताया कि “ऑपरेशन कायाकल्प” के तहत विद्यालयों में 19 मानकों पर मूलभूत सुविधाएं जैसे पेयजल, शौचालय, फर्नीचर और ब्लैकबोर्ड उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू कर सरकारी और निजी स्कूलों के बीच का शैक्षिक अंतर कम करने का प्रयास किया गया है।
डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देते हुए प्रदेश के 31,878 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 14,988 में आईसीटी लैब और 1,129 में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। इसके अलावा शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए 2.61 लाख से अधिक टैबलेट वितरित किए गए हैं।
बालिका शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 6 से 12 तक विस्तारित किया गया है। साथ ही छात्रों को यूनिफॉर्म, जूते, बैग और स्टेशनरी के लिए 1,200 रुपये की डीबीटी सहायता सीधे अभिभावकों के खातों में भेजी जा रही है।
“स्कूल चलो अभियान” के तहत 1 से 15 अप्रैल 2026 के बीच 20 लाख से अधिक नए छात्रों का नामांकन किया गया। मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि “उत्तम प्रदेश” के निर्माण में शिक्षामित्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और वे भविष्य निर्माण के प्रमुख आधार हैं।उन्होंने शिक्षामित्रों से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करते रहें, जिससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।
उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ने रीता बहुगुणा के पति स्व. पीसी जोशी को दी श्रद्धांजलि

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज प्रयागराज में पूर्व सांसद प्रो. रीता बहुगुणा जोशी के आवास पर पहुंचकर उनके पति स्वर्गीय पी.सी. जोशी के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित कर दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि दी।
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा परिवार को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें।
उन्होंने कहा कि स्व. पी.सी. जोशी एक सज्जन, सरल एवं समाज के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे, जिनका निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य लोग भी  मौजूद रहे।
अटल नगर के फ्लैट अब 10 साल की आसान किश्तों में ले सकेंगे

- एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने जन सामान्य की मांग पर दी बड़ी राहत

- ब्याज दर में भी 02 प्रतिशत की छूट, 09 की जगह 07 प्रतिशत ब्याज दर लगेगी

- तत्काल प्रभाव से लागू होंगे आदेश, आम लोगों के आवास का सपना होगा साकार

लखनऊ। एलडीए ने अपनी अफोर्डेबल हाउसिंग योजना अटल नगर को और अधिक बजट फ्रेंडली बना दिया है। अब लोग यहां 10 वर्ष की आसान किश्तों में फ्लैट ले सकेंगे, वो भी पहले से कम ब्याज दर पर। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने जन सामान्य की मांग पर इस बड़ी राहत की घोषणा की है। छूट सम्बंधी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

 एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि देवपुर पारा स्थित अटल नगर योजना में 12 से लेकर 19 मंजिल के 15 टावरों में कुल 2,496 फ्लैट्स हैं। 30 वर्गमीटर से लेकर 54.95 वर्गमीटर क्षेत्रफल के इन फ्लैटों की कीमत लगभग 9.83 लाख रूपये से शुरू होती है। यहां अधिकांश फ्लैटों का लॉटरी से आवंटन किया जा चुका है। 630 फ्लैटों के लिए 18 अप्रैल से 17 मई, 2026 के मध्य ऑनलाइन पंजीकरण खोला गया है। इसमें 01 BHK के 539 और 02 BHK के 91 फ्लैट शामिल हैं। उपाध्यक्ष ने बताया कि पुरानी व्यवस्था के तहत किश्तों का विकल्प चुनने वाले आवंटियों को 07 वर्ष की 84 किश्तों में भुगतान करना होता था, वो भी 09 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर पर। इससे 01 BHK के फ्लैट की मासिक किश्त लगभग 15,000 रुपये बनती थी। जिससे आवंटियों के मासिक बजट पर बोझ पड़ रहा था। लोगों की मांग पर इसकी समीक्षा की गयी और छूट का प्रावधान किया गया है।

लोगों को मिलेगा छूट का लाभ

नयी व्यवस्था के तहत अब लोगों को 07 वर्ष की जगह 10 वर्ष की 120 आसान किश्तों में भुगतान का विकल्प मिलेगा। इसके अलावा ब्याज दर में भी 02 प्रतिशत की छूट दी गयी है। जिससे 09 प्रतिशत की जगह 07 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से किश्तें बनेंगी। इससे 01 BHK के फ्लैट की मासिक किश्त लगभग 10,767 रुपये बनेगी, जोकि पहले की तुलना में लगभग 4,000 रूपये कम होगी। छूट मिलने से आम नागरिक आसानी से अपने घर का सपना साकार कर सकेंगे।

लिफ्ट व पावर बैकअप की सुविधा

उपाध्यक्ष ने बताया कि अटल नगर में स्वच्छ जल एवं विद्युत आपूर्ति, लिफ्ट, पावर बैकअप, सुरक्षा व्यवस्था, ग्रीन एवं किड्स प्ले एरिया व पार्किंग आदि की सुविधा दी गयी है। 01 बीएचके के फ्लैट के लिए 55,658 रूपये और 02 बीएचके के फ्लैट के लिए 1,00852 रूपये पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है, जोकि आवंटन न होने की दिशा में आवेदक को वापस कर दिया जाएगा।

* 15 दिन में 642 ने कराया पंजीकरण

अटल नगर योजना के भवनों के लिए पंजीकरण सिर्फ और सिर्फ एलडीए की वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकेगा। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि 15 दिनों में 2,108 लोगों ने रजिस्ट्रेशन बुकलेट खरीदी है, जिनमें से 642 लोगों ने सफलतापूर्वक पंजीकरण करा लिया है।

लखनऊ ग्रीन कॉरिडोर पर सजेगा ‘तेजस’, शहर को मिलेगी नई पहचान

15 फीट लंबा एयरक्राफ्ट मॉडल बनेगा आकर्षण का केंद्र, ‘तेजस चौराहा’ के रूप में विकसित होगी रोटरी

लखनऊ। राजधानी लखनऊ की खूबसूरती में जल्द ही एक नया आयाम जुड़ने जा रहा है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा नव निर्मित ग्रीन कॉरिडोर पर स्वदेशी लड़ाकू विमान HAL Tejas का आकर्षक मॉडल स्थापित किया जाएगा, जो शहर में सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बनेगा।

एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि यह पहल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में की जा रही है। उनकी अनुशंसा पर Hindustan Aeronautics Limited द्वारा ‘तेजस’ का मॉडल बेंगलुरु से मंगाया गया है। वर्तमान में इसे जनेश्वर मिश्र पार्क में सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने बताया कि समतामूलक चौराहे के पास ग्रीन कॉरिडोर के प्रवेश द्वार पर इस मॉडल को स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही इस रोटरी को ‘तेजस चौराहा’ नाम दिया जाएगा, जो आने वाले समय में शहर का प्रमुख आकर्षण बनेगा।

15 दिन में होगा स्थापना कार्य पूरा

एलडीए उपाध्यक्ष के अनुसार, मॉडल की स्थापना के लिए स्थल पर फाउंडेशन और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। लगभग 15 दिनों के भीतर यह कार्य पूर्ण कर मॉडल को पार्क से ग्रीन कॉरिडोर की रोटरी पर स्थापित कर दिया जाएगा।

आकर्षक और वास्तविक आकार का मॉडल

यह मॉडल 15 फीट लंबा और लगभग 9.5 फीट चौड़ा होगा, जिसका वजन करीब 200 किलोग्राम है। इसे वास्तविक तेजस विमान की तरह डिजाइन किया गया है, जिससे यह देखने में बिल्कुल असली जैसा प्रतीत होगा। यह पहल न केवल लखनऊ की सुंदरता को बढ़ाएगी, बल्कि युवाओं को भारतीय वायुसेना और देश की रक्षा शक्ति के प्रति प्रेरित भी करेगी।