“हर किसान को स्लॉट, बिना भीड़ के उपार्जन” -कलेक्टर संजय जैन का निरीक्षण, व्यवस्थाओं को और पारदर्शी बनाने के निर्देश
मऊगंज। जिले में गेहूं उपार्जन को अधिक सुव्यवस्थित और किसान हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य शासन ने स्लॉट बुकिंग की अवधि 9 मई तक बढ़ा दी है। अब छोटे, मध्यम और बड़े सभी किसान स्लॉट बुक कर समर्थन मूल्य पर अपनी उपज का विक्रय कर सकेंगे।
कलेक्टर संजय कुमार जैन ने पन्नी उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने तौल प्रक्रिया, भंडारण, साफ-सफाई और किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की बारीकी से समीक्षा की तथा अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्लॉट बुकिंग प्रणाली का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसके लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने तौल में पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने किसानों से संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने। किसानों ने स्लॉट बुकिंग व्यवस्था को सुविधाजनक बताते हुए प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त सुझावों के आधार पर व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किया जाए।
उल्लेखनीय है कि जिले में 26 उपार्जन केंद्रों पर पंजीकृत किसानों से स्लॉट बुकिंग के आधार पर गेहूं खरीदी की जा रही है। शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य 2585 रुपये तथा 40 रुपये बोनस सहित कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपार्जन किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर पीके पांडेय, एसडीएम मऊगंज एपी द्विवेदी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
















2 hours and 57 min ago
इस अन्तर्राष्ट्रीय मेले में बिलाल खत्री ‘बाग प्रिंट’ कला का लाइव प्रदर्शन करेंगे। पारंपरिक प्राकृतिक रंगों, नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक्स और हस्तनिर्मित तकनीकों के माध्यम से कपड़ों पर उभरती कलाकृतियों को अन्तर्राष्ट्रीय दर्शक प्रत्यक्ष देख सकेंगे। यह भारतीय हस्तशिल्प की गहराई और सौंदर्य को समझने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा।
*परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समावेश
इस विशेष प्रदर्शनी के लिए तैयार किए गए डिज़ाइन में भारतीय पारंपरिक शिल्प और आधुनिक वैश्विक सौंदर्यबोध का समन्वय किया गया है। यूरोपीय बाज़ार की पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई ये कृतियां ‘बाग प्रिंट’ को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देंगी।
‘बाग प्रिंट’ मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग क्षेत्र की पारंपरिक हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग कला है। बाग एक छोटा जनजातीय कस्बा है, जहां भील और भिलाला समुदाय निवास करते हैं और प्राचीन बाघ गुफाएं भी स्थित हैं। इस कला की परंपरा खत्री समुदाय द्वारा लगभग 400 वर्ष पूर्व सिंध के लरकाना क्षेत्र से आकर स्थापित की गई मानी जाती है।
इस शिल्प में सूती और रेशमी कपड़ों को पारंपरिक प्राकृतिक प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है। लोहे के संक्षारण, धवाड़ी फूल और मायरोबालन के मिश्रण के साथ-साथ फिटकरी और एलिज़ारिन का उपयोग किया जाता है। कुशल कारीगरों द्वारा लकड़ी के ब्लॉक्स से डिज़ाइन तैयार कर उन्हें हाथ से भरा जाता है। तैयार वस्त्रों को बहते पानी में धोकर धूप में सुखाया जाता है, जिससे उन्हें विशिष्ट फिनिश प्राप्त होती है। ‘बाग प्रिंट’ में लाल और काले रंग के ज्यामितीय एवं पुष्पीय रूपांकन प्रमुख होते हैं।
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