स्मार्ट मीटर पर बड़ा फैसला: तकनीकी समिति की रिपोर्ट आने तक स्मार्ट मीटर पर रोक

* 45 दिन तक नहीं कटेगा बिजली कनेक्शन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्मार्ट मीटर को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह रोक मुख्यमंत्री के निर्देशन में गठित तकनीकी समिति की रिपोर्ट आने और उसकी जांच पूरी होने तक लागू रहेगी।
ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने शनिवार को शक्ति भवन, लखनऊ में आयोजित समीक्षा बैठक में कहा कि प्रदेश सरकार उपभोक्ता हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्युत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

* 45 दिन तक नहीं कटेगा बिजली कनेक्शन
मंत्री ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए कहा कि जहां हाल ही में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां लगभग 15 दिन की कन्वर्जन अवधि और उसके बाद 30 दिन, यानी कुल 45 दिन तक किसी भी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।

* जीरो बैलेंस पर भी मिलेगी बिजली
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए नई व्यवस्था के तहत जीरो बैलेंस होने पर भी अधिकतम 3 दिन या ₹200 तक (2 किलोवाट भार तक) बिजली आपूर्ति जारी रहेगी, ताकि उपभोक्ताओं को तत्काल परेशानी न हो।

* 5-स्तरीय SMS अलर्ट सिस्टम लागू
उपभोक्ताओं को समय रहते जानकारी देने के लिए 5-स्तरीय SMS अलर्ट प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत—
-बैलेंस 30% होने पर पहला संदेश
-10% होने पर दूसरा संदेश
-बैलेंस समाप्त होने पर तीसरा संदेश
-डिस्कनेक्शन से एक दिन पहले चौथा संदेश
-डिस्कनेक्शन के बाद पांचवां संदेश भेजा जाएगा।

* रविवार और छुट्टी के दिन नहीं कटेगा कनेक्शन
ऊर्जा मंत्री ने निर्देश दिए कि रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में बैलेंस नेगेटिव होने पर भी किसी भी स्थिति में बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।

* गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति पर जोर
गर्मी के मौसम को देखते हुए सभी डिस्कॉम अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ट्रांसफार्मर बदलने में देरी न हो, ढीले तारों और स्पार्किंग जैसी समस्याओं को तत्काल ठीक किया जाए तथा अनुरक्षण कार्यों में तेजी लाई जाए।

* फोन कर सुलझाई जाएं समस्याएं
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिन उपभोक्ताओं के कनेक्शन कट चुके हैं, उनसे फोन कॉल के माध्यम से संपर्क कर समस्याओं का समाधान किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उपभोक्ता संतुष्टि सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष आशीष गोयल, डीजी विजिलेंस जय नारायण सिंह, सभी डिस्कॉम के एमडी और जनपदस्तरीय अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
मृदा स्वास्थ्य सुधारने को कृषि विभाग की पहल: हरी खाद अपनाएं किसान, 50% अनुदान पर मिलेंगे बीज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने प्रदेश के किसानों से मिट्टी की उर्वरता और मृदा स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए **हरी खाद के प्रयोग** को अपनाने की अपील की है। कृषि निदेशक **डॉ. पंकज त्रिपाठी** ने कहा कि फसलों से बेहतर उत्पादन के लिए मिट्टी में **जीवांश कार्बन** की पर्याप्त मात्रा बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश की मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा केवल **0.2 से 0.3 प्रतिशत** रह गई है, जबकि इसे बढ़ाकर **0.8 से 1 प्रतिशत** तक ले जाने की आवश्यकता है।

* रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से घट रही उर्वरता
कृषि निदेशक ने कहा कि यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग तथा गर्मियों में खेतों की जुताई न होने से मिट्टी के मित्र कीट और केंचुए समाप्त हो रहे हैं। इसका सीधा असर उत्पादन क्षमता और उर्वरकों की बढ़ती मांग पर पड़ रहा है।

* ढैंचा, सनई और लोबिया जैसी फसलें बनेंगी हरी खाद
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि दलहनी और गैर-दलहनी फसलों को उनकी वानस्पतिक वृद्धि के समय मिट्टी में दबाना ही **हरी खाद** कहलाता है। इसके लिए **ढैंचा, सनई, लोबिया, ग्वार और मक्का** जैसी फसलों का चयन किया जा सकता है।
ये फसलें अपनी जड़ों में मौजूद जीवाणुओं के माध्यम से वातावरण की नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है।

* 30 से 40 दिन में खेत में पलटें फसल
उन्होंने किसानों से अपील की कि वर्ष में कम से कम एक बार इन फसलों की बुवाई कर **30 से 40 दिन के भीतर इन्हें मिट्टी में पलट दें।** इससे मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ेगी और नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश जैसे पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बेहतर होगी।

* 50% अनुदान पर मिलेंगे बीज
कृषि विभाग किसानों की मदद के लिए **ढैंचा और मिश्रित हरी खाद के बीज 50 प्रतिशत अनुदान** पर उपलब्ध कराएगा। इच्छुक किसान कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कर इन बीजों का लाभ उठा सकते हैं।

* घटेगी लागत, बढ़ेगा उत्पादन
कृषि विभाग का कहना है कि हरी खाद अपनाने से न केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि खेती की लागत में भी प्रभावी बचत होगी और दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता बेहतर होगी।
अपर्णा यादव के खिलाफ हजरतगंज थाने में तहरीर, सपा-कांग्रेस का झंडा जलाने पर विवाद
लखनऊ। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के खिलाफ हजरतगंज थाने में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने तहरीर दी है। मामला सपा-कांग्रेस का झंडा जलाने और कथित रूप से पार्टी का अपमान करने से जुड़ा है।
सपा नेताओं का आरोप है कि अपर्णा यादव ने विधानसभा के सामने पार्टी का झंडा जलाकर समाजवादी पार्टी का अपमान किया। इसे लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी देखी गई।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर रात अपर्णा यादव ने अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने सपा और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की थी।
महिला आरक्षण बिल पास न होने पर अपर्णा यादव ने विपक्षी दलों को ‘नारी विरोधी’ बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया और झंडे जलाए थे।
इस मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रदीप कुमार समेत कई नेताओं ने हजरतगंज थाने पहुंचकर अपर्णा यादव के खिलाफ तहरीर सौंपी और कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
महिला आरक्षण बिल पर गरजे सीएम योगी: ‘भरी सभा में द्रौपदी चीरहरण जैसा था विपक्ष का आचरण’
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संसद में विपक्ष का व्यवहार भरी सभा में द्रौपदी के चीरहरण जैसा था। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडी गठबंधन ने नारियों के प्रति अपनी घटिया सोच का प्रदर्शन किया है।
सीएम योगी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए प्रगतिशील सोच के साथ यह विधेयक लाया गया था, लेकिन कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस, राजद और डीएमके जैसे दल इसमें बाधा बन गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को 33 से 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का अभिनव प्रयास किया, लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध कर अपनी मानसिकता उजागर कर दी।
उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग कर सपा ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का अपमान किया है। धर्म के आधार पर आरक्षण की बात पूरी तरह संविधान विरोधी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब शाहबानो प्रकरण सामने आया था, तब यही विपक्ष मौन था। वहीं भाजपा सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए तीन तलाक पर कानून बनाकर ऐतिहासिक कदम उठाया।
सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष से पूछा जाना चाहिए कि वह नारी, गरीब, अन्नदाता और युवा के विरोध में क्यों खड़ा है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन के पास अपने पुराने पाप धोने का अवसर था, लेकिन उसने उसे भी गंवा दिया।
उन्होंने सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि स्टेट गेस्ट हाउस कांड जैसे घटनाक्रमों पर भी सपा प्रायश्चित कर सकती थी, लेकिन उसने महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर भी राजनीति की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरा एनडीए देश और प्रदेश की आधी आबादी के साथ मजबूती से खड़ा है। इंडी गठबंधन को इस कृत्य के लिए महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आधी आबादी इन्हें कभी माफ नहीं करेगी।
अंत में सीएम योगी ने तंज कसते हुए कहा, “देख सपाई, बिटिया घबराई।”
दो दिवसीय 'दुग्ध स्वर्ण महोत्सव - 2026' का भव्य एवं सफल आयोजन संपन्न

लखनऊ। दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दो दिवसीय **दुग्ध स्वर्ण महोत्सव - 2026** का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत योगी आदित्यनाथ द्वारा विभाग के नाम भेजे गए शुभकामना संदेश के वाचन से हुई।
कार्यक्रम में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि डेयरी क्षेत्र रोजगार सृजन का प्रमुख साधन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तकनीक और नवाचार के माध्यम से किसानों एवं पशुपालकों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में दुग्ध विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। विभाग दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद आमजन तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में धनलक्ष्मी के. ने कहा कि उत्तर प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनाए रखने का संकल्प विभाग का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों को सुनिश्चित बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और स्थायी आय उपलब्ध करा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
विभाग द्वारा **नन्द बाबा दुग्ध मिशन** और उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। “गौ से ग्राहक तक” समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार डेयरी क्षेत्र का राज्य के सकल मूल्यवर्धन (GSVA) में लगभग **1.72 लाख करोड़ रुपये** का योगदान है। अब तक दुग्ध विकास क्षेत्र में **25,000 करोड़ रुपये** से अधिक के **796 एमओयू** किए गए हैं, जिनसे **60,000 से अधिक रोजगार** सृजित होंगे।
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5.0 के अंतर्गत डेयरी सेक्टर में **2,000 करोड़ रुपये** की 72 परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ, जिनसे 4,000 रोजगार सृजित हुए। इसके अतिरिक्त **3,000 करोड़ रुपये** से अधिक के 59 नए एमओयू भी विभिन्न कंपनियों से किए जा रहे हैं।
महोत्सव में प्रदेश के लगभग **10 हजार पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों** ने भाग लिया। वेबकास्टिंग और लाइव यूट्यूब के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों सहित देश-विदेश के लाखों लोगों को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया।
कार्यक्रम के दौरान विभाग में योगदान देने वाले कार्यरत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा अधिकारियों को सम्मानित किया गया। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
महिला आरक्षण विधेयक पर संसद में गतिरोध दुर्भाग्यपूर्ण: मंत्री एके शर्मा
लखनऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर उत्पन्न स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह दिन महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था, जिसे विपक्षी दलों द्वारा विरोध कर गंवा दिया गया।
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को शासन और निर्णय प्रक्रिया में उचित भागीदारी सुनिश्चित करना है। यह देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान देना प्रत्येक समाज की जिम्मेदारी है। ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध करना महिलाओं के हितों के अनुरूप नहीं है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।
मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। सदियों से लंबित इस महत्वपूर्ण पहल को आगे बढ़ाना इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश की महिलाएं जागरूक हैं और अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं। आने वाले समय में वे अपने हितों के अनुरूप निर्णय लेंगी और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
विश्व धरोहर दिवस पर मऊ में मंत्री ने किया पौधारोपण, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश * पेड़ हैं जीवन का आधार, अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें : ए.के.
मऊ/ लखनऊ। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने शनिवार को मऊ स्थित मंगलम भवन परिसर में पौधारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की। मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि पेड़-पौधे मानव जीवन के आधार हैं, क्योंकि यही हमें शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और पर्यावरण को संतुलित बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण से ही शुद्ध वायु प्राप्त होती है और शुद्ध वायु से ही स्वस्थ जीवन संभव है। स्वस्थ व्यक्ति ही समाज और राष्ट्र के विकास में प्रभावी योगदान दे सकता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण हमारी अमूल्य धरोहर है, जिसे हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। कार्यक्रम में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज: अपर्णा यादव ने विधानभवन के सामने कांग्रेस-सपा का झंडा जलाया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने राजधानी लखनऊ में विधानभवन के सामने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के झंडे जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा महिलाओं के हितों की केवल राजनीति करती हैं, जबकि महिला आरक्षण बिल जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनका रुख स्पष्ट नहीं है।
अपर्णा यादव ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी और सम्मान दिलाने के लिए महिला आरक्षण बिल जरूरी है, लेकिन विपक्षी दल इस विषय पर गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है, जबकि विपक्ष केवल दिखावे की राजनीति कर रहा है।
इस दौरान मौके पर समर्थकों की भीड़ जुटी रही और राजनीतिक माहौल गरमा गया। प्रदर्शन को लेकर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) की पुनर्परीक्षा 6 जनपदों में शांतिपूर्ण ढंग से शुरू

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) के 09 विषयों—Asian Culture, Music Tabla, Physical Education, Urdu, English, Sociology, Chemistry, Education एवं Zoology—की लिखित पुनर्परीक्षा आज दिनांक 18 अप्रैल 2026 को प्रथम पाली में प्रातः 09:30 बजे से सफलतापूर्वक प्रारम्भ हो गई।

यह परीक्षा प्रदेश के 6 जनपदों—आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर एवं वाराणसी—के कुल 48 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जा रही है। सभी केन्द्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है।

आयोग द्वारा स्थापित Integrated Control Command Room के माध्यम से सभी परीक्षा केन्द्रों की सतत निगरानी की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का टोल तय, सफर महंगा—ट्रेन अब भी सस्ता और सुविधाजनक विकल्प
लखनऊ। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा तैयार किए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का टोल निर्धारित कर दिया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का न्यूनतम टोल 275 रुपये रखा गया है, जिसे आम यात्रियों के लिए महंगा माना जा रहा है। एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग 3600 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है और इसके 15 मई के बाद उद्घाटन की संभावना जताई जा रही है।

अधिकारियों का दावा है कि इस एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ से कानपुर तक का सफर करीब 35 से 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि एक्सप्रेसवे सीधे कानपुर शहर तक नहीं जाता, बल्कि उन्नाव के शुक्लागंज तक ही सीमित है। इसके बाद यात्रियों को जाजमऊ होते हुए शहर में प्रवेश करना होगा, जहां ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है। ऐसे में कुल यात्रा समय बढ़कर डेढ़ से दो घंटे तक पहुंचने की आशंका है।

दूसरी ओर, रेलवे सेवाएं यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक और किफायती विकल्प बनी हुई हैं। तेजस एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से लखनऊ से कानपुर का सफर लगभग 1 घंटे 10 मिनट से 1 घंटे 20 मिनट में पूरा किया जा सकता है। इन ट्रेनों का किराया भी 489 से 500 रुपये के बीच है, जबकि अन्य ट्रेनों में स्लीपर और एसी श्रेणी में इससे भी कम किराये पर यात्रा संभव है।

टोल दरों की बात करें तो कार, जीप और वैन के लिए एक तरफ का शुल्क 275 रुपये रखा गया है, जबकि हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए 445 रुपये, बस और ट्रक के लिए 935 रुपये तथा थ्री एक्सल वाहनों के लिए 1020 रुपये टोल निर्धारित किया गया है।

इस एक्सप्रेसवे का निर्माण दो चरणों में किया गया है। पहला चरण स्कूटर इंडिया से बनी तक और दूसरा चरण बनी से उन्नाव के शुक्लागंज तक विकसित किया गया है। हालांकि, इसे लेकर कुछ विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं कि जब एक्सप्रेसवे सीधे कानपुर शहर तक नहीं पहुंचता, तो इसे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे कहना पूरी तरह उचित नहीं है।

कुल मिलाकर, जहां एक ओर एक्सप्रेसवे तेज सफर का विकल्प देने का दावा करता है, वहीं अधिक टोल और शहर में प्रवेश की संभावित दिक्कतों के कारण यात्रियों के लिए ट्रेन फिलहाल अधिक बेहतर और किफायती विकल्प बनी हुई है।