सीबीएसई का बड़ा फैसला: स्कूलों में बनेंगी ‘कॉम्पोजिट स्किल लैब’, पढ़ाई होगी अब और प्रैक्टिकल

नई दिल्ली। देश में स्किल-बेस्ड एजुकेशन को मजबूत करने की दिशा में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई ) ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों में “कॉम्पोजिट स्किल लैब” स्थापित करना अनिवार्य कर दिया है, जिससे छात्रों को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर व्यावहारिक और अनुभवात्मक शिक्षा दी जा सके।
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCF-SE 2023) के अनुरूप है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में समस्या समाधान क्षमता, क्रिटिकल थिंकिंग और इनोवेशन जैसी स्किल्स विकसित करना है।
सीबीएसई के निर्देशों के अनुसार, कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए या तो एक लगभग 600 वर्ग फुट की कॉम्पोजिट स्किल लैब बनाई जाएगी या फिर दो अलग-अलग लैब (प्रत्येक 400 वर्ग फुट) स्थापित की जा सकेंगी—एक कक्षा 6-10 और दूसरी कक्षा 11-12 के लिए।
इन लैब्स में आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के जरिए छात्रों को रियल-लाइफ आधारित प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे वे इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार तैयार हो सकेंगे।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए स्कूलों में यह व्यवस्था शुरुआत से ही लागू होगी, जबकि पहले से संचालित स्कूलों को 22 अगस्त 2027 तक लैब्स स्थापित करनी होंगी।
इस कदम से स्किल और वोकेशनल एजुकेशन को मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी और छात्रों को रोजगार व उद्यमिता के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
दिल्ली में खराब मौसम से उड़ानें प्रभावित, इंडिगो ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी
नई दिल्ली । खराब मौसम के कारण राजधानी में हवाई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। IndiGo ने उड़ानों के संचालन पर असर को देखते हुए यात्रियों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। एयरलाइन के अनुसार मौसम की अस्थिरता के चलते उड़ानों की समय-सारणी प्रभावित हो रही है।
एयरलाइन ने अपने आधिकारिक X पोस्ट में कहा कि उनकी टीमें स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं और मौसम में सुधार होते ही उड़ानों का संचालन सामान्य कर दिया जाएगा। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर अवश्य जांच लें तथा एयरपोर्ट के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें।
इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी राजधानी के मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार 17 अप्रैल 2026 को दिल्ली में अचानक मौसम बदला और कुछ इलाकों में बारिश दर्ज की गई, जिससे अस्थायी राहत मिली।
पूर्वानुमान के अनुसार 18 और 19 अप्रैल को आंशिक बादल छाए रहेंगे, जबकि 20 से 23 अप्रैल के बीच मौसम मुख्य रूप से साफ और शुष्क रहेगा। इस दौरान अधिकतम तापमान 39°C से 42°C तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 20°C से 24°C के बीच रहने की संभावना है।
मौसम में इस उतार-चढ़ाव के कारण यात्रियों और एयरलाइन कंपनियों की सतर्कता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में गर्मी और तेज होने की संभावना जताई गई है।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की दी मंजूरी
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए सड़कों और पुलों का व्यापक सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
सरकार ने इस योजना के लिए संशोधित व्यय 83,977 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जुड़ने वाले प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे गांवों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों का कार्य इसी अवधि तक तथा पुलों का निर्माण मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, 31 मार्च 2025 से पहले स्वीकृत लेकिन अब तक टेंडर न हो सके परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। सरकार ने 961 करोड़ रुपये की लागत वाले 161 लंबी दूरी के पुलों को भी मंजूरी देने का निर्णय लिया है, जो पहले से स्वीकृत सड़कों के मार्ग पर लंबित हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, योजना की समयसीमा बढ़ाने से ग्रामीण सड़कों के उन्नयन का पूरा लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, कृषि एवं अन्य उत्पादों की बाजार तक पहुंच आसान होगी और परिवहन लागत व समय में कमी आएगी।सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी, विशेषकर दूरदराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए।
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की दी मंजूरी
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2028 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए सड़कों और पुलों का व्यापक सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
सरकार ने इस योजना के लिए संशोधित व्यय 83,977 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जुड़ने वाले प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाया जाएगा, जिससे गांवों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों का कार्य इसी अवधि तक तथा पुलों का निर्माण मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, 31 मार्च 2025 से पहले स्वीकृत लेकिन अब तक टेंडर न हो सके परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। सरकार ने 961 करोड़ रुपये की लागत वाले 161 लंबी दूरी के पुलों को भी मंजूरी देने का निर्णय लिया है, जो पहले से स्वीकृत सड़कों के मार्ग पर लंबित हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, योजना की समयसीमा बढ़ाने से ग्रामीण सड़कों के उन्नयन का पूरा लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, कृषि एवं अन्य उत्पादों की बाजार तक पहुंच आसान होगी और परिवहन लागत व समय में कमी आएगी।सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी, विशेषकर दूरदराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए।
लीगल कॉन्क्लेव 2026 में न्याय व्यवस्था सुधार पर मंथन
* 6 करोड़ लंबित मामलों के समाधान को मध्यस्थता और एआई बताया अहम उपाय

* न्यायमूर्ति मनमोहन बोले— स्वस्थ बहस से मजबूत होगी न्याय प्रणाली, तकनीक सहायक बने, विकल्प नहीं

नई दिल्ली। देश की न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ, विधि शिक्षा में सुधार और न्याय को अधिक सुलभ व किफायती बनाने के मुद्दों पर शनिवार को आयोजित लीगल कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2026 में व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में कानूनी विशेषज्ञों ने मध्यस्थता, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को न्यायिक सुधार का प्रभावी माध्यम बताया।
सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (सिल्फ) ने सोसाइटी ऑफ लीगल प्रोफेशनल्स (एसएलपी) के सहयोग से नई दिल्ली में “सभी के लिए किफायती और सुलभ न्याय” विषय पर इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया। मुख्य अतिथि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि न्याय प्रणाली की कमियों की ओर ध्यान दिलाने का उद्देश्य निंदा नहीं, बल्कि सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना से ही न्याय व्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने तकनीक को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि उसका उपयोग उसे वरदान या अभिशाप बना सकता है, इसलिए तकनीक को केवल सहायक के रूप में देखा जाना चाहिए, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने लंबित मामलों की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि कानूनी समुदाय को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या आर्बिट्रेशन, जिसे कभी समाधान माना गया था, अब स्वयं चुनौती बन रहा है। हालांकि, उन्होंने वैवाहिक मामलों में मध्यस्थता की सफलता को सराहनीय बताया।
कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन शर्मा ने कहा कि देश में 6 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता और तकनीक सबसे प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक दस्तावेजीकरण व प्रक्रियाओं को तेज कर सकती है, जिससे लाखों मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने में न्याय प्रणाली की गति महत्वपूर्ण है और तकनीक इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
सिल्फ के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने विधि शिक्षा में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लॉ स्कूलों को छात्रों को तकनीक के सही उपयोग और उसके दुरुपयोग से बचाव के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में आर्बिट्रेशन व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो सकी है, जिसके कारण कॉर्पोरेट विवाद अक्सर सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में ले जाए जाते हैं।
डॉ. भसीन ने भारत की पारंपरिक पंचायत आधारित सहमति न्याय प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय केवल कानून तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समन्वय और सहमति से भी जुड़ा है। कॉन्क्लेव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई लॉ फर्मों का सफल नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जो विधि क्षेत्र में नारी शक्ति का प्रेरक उदाहरण हैं। यह कॉन्क्लेव न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण विमर्श का मंच साबित हुआ।
नई दिल्ली में आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन के निर्माण कार्यों का मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण
नई दिल्ली। राजधानी में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का कार्य तेज़ी से जारी है। इसी क्रम में रेखा गुप्ता ने मेट्रो फेज-4 के तहत आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम के अधिकारियों के साथ परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और यात्री सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता, सुरक्षा और तय समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि मेट्रो दिल्ली की जीवनरेखा है और प्रतिदिन लाखों लोग इसका उपयोग करते हैं। ऐसे में हर स्तर पर पारदर्शिता और कार्य में तेजी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की बढ़ती आबादी और आवश्यकताओं को देखते हुए आधुनिक और मजबूत कनेक्टिविटी तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है, जो विकसित दिल्ली की दिशा में अहम कदम है।
गौरतलब है कि मेट्रो फेज-4 के तहत तीन नए कॉरिडोर—लाजपत नगर-साकेत, इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ और रिठाला-कुंडली—के लिए 3,386.18 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया है। करीब 14,630.80 करोड़ रुपये की लागत से अगले चार वर्षों में 47.22 किलोमीटर लंबा नेटवर्क तैयार होगा, जिससे उत्तर, मध्य और दक्षिणी दिल्ली को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, महिला आरक्षण के मुद्दे पर रख सकते हैं बात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। पीएम का ये संबोधन ऐसे समय हो रहा है, जब एक दिन पहले ही लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिर गया। दो तिहाई बहुमत न मिलने की वजह से केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा में पास नहीं करवा पाई है। पिछले 12 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब मोदी सरकार का कोई बिल वोटिंग के बाद संसद में गिर गया है।

महिला आरक्षण बिल पर होगी बात?

महिला आरक्षण बिल पर बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। हालांकि प्रधानमंत्री के संबोधन के विषय को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वह महिला आरक्षण बिल और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी बात रख सकते हैं।

कैबिनेट कमेटी की बैठक में दिखे निराश

वहीं, ये बी बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संसद भवन में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में महिला आरक्षण बिल के गिरने पर गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को इस फैसले पर ‘जिंदगी भर पछताना पड़ेगा’ और उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष अपनी इस स्थिति को छिपाने के लिए बहाने ढूंढ रहा है। ऐसे में आज पूरी संभावना है कि पीएम मोदी रात 8:30 बजे देश के नाम संबोधन देंगे जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोल सकते हैं।

सभी सांसदों से की थी पीएम मोदी ने अपील

इससे पहले पीएम मोदी ने कल महिला रिजर्वेशन बिल पर सभा सांसदों से अपील करते हुए कहा था कि मैं सभी सांसदों से कहूंगा कि आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए। देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित मत करिए। ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी. देश का लोकतंत्र और सशक्त होगा

पहले भी कई बार देश को कर चुके हैं संबोधित

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 सितंबर 2025 को शाम 5 बजे देश को संबोधित किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि नवरात्र के पहले दिन से ‘नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स’ की शुरुआत होगी और ‘जीएसटी बचत महोत्सव’ की भी शुरुआत की जाएगी। उन्होंने बताया था कि इस पहल से आम लोगों की बचत बढ़ेगी और रोजमर्रा की चीजें पहले से ज्यादा सस्ती और आसानी से उपलब्ध होंगी। वहीं, 12 मई की रात 8 बजे दिए गए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी देशवासियों के साथ साझा की थी।

लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश को हमने हरा दिया : प्रियंका गांधी
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि संसद में शुक्रवार को लोकतंत्र की एक बड़ी जीत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी नीत केंद्र सरकार लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश कर रही थी, जिसे पूरे विपक्ष की एकजुटता ने विफल कर दिया।
शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद में हुई यह घटना संविधान, देश और विपक्षी एकता की जीत है। महिला आरक्षण बिल पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसे तुरंत लागू करने के पक्ष में है। उनका कहना था कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू किया जाना चाहिए और महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार जो प्रस्ताव लाई, वह वास्तविक महिला आरक्षण बिल नहीं था, बल्कि परिसीमन (Delimitation) से जुड़ा हुआ था। विपक्ष इस बात से सहमत नहीं हो सकता कि परिसीमन बिना जातिगत जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाए।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन था। उन्होंने कहा कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम पर राजनीति की जा रही है और सरकार की पूरी रणनीति का उद्देश्य सत्ता हासिल करना है। उनके अनुसार, इसके लिए महिलाओं के मुद्दे का इस्तेमाल किया गया।
महिला आरक्षण से जुड़े बिलों का गिरना बीजेपी के लिए झटका है या 'मास्टरस्ट्रोक'?

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महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। सरकार ने पूरी तरीके से विपक्ष का साथ पाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने एक न सुनी और अंत में सरकार बिल पर दो तिहाई वोट पाने में नाकामयाब रही और विधेयक लोकसभा में गिर गया।

बीजेपी के लिए झटका या मिलेगा राजनीतिक फायदा?

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। मोदी सरकार के लिए संसद में हाल के समय में यह बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सरकार विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी बताकर इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी।

क्या विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है?

विश्लेषक मान रहे हैं कि विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है। जानकारों का मानना है कि यह सरकार के लिए झटका है क्योंकि उन्हें दिख रहा था कि उनके पास संख्या नहीं है फिर भी चुनावों के बीच वो इसे लेकर आई क्योंकि वो इसके ज़रिए पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोट अधिक संख्या में हासिल करना चाहती थी। विधेयक का गिरना सरकार की साख के लिए तो झटका है। माना जा रहा है कि सरकार अपने मंसूबो में नाकाम हो गई है। विश्लेषक कई राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। चुनाव के बीच में वो इसको सिर्फ़ इसलिए लाए थे जिससे कि चुनाव में कहा जा सके कि हम बंगाल की महिलाओं के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन विपक्ष ने हमें करने नहीं दिया।

सरकार ने चला मास्टरस्ट्रोक?

वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि सरकार को पहले से ही मालूम था कि लोकसभा में बिल का पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल उनके पक्ष में नहीं है, बावजूद इसक केंद्र सरकार ने इसको सदन की पटल पर रखा और बिल के साथ आगे बढ़े। हालांकि, बिल गिर गया। पश्चिम बंगाल चुनाव में इसका फायदा चाहें, जिसे भी मिले, लेकिब बीजेपी संदेश पहुंचाने में कामयाब हो गई। इसके साथ ही तमिलनाडु में परिसीमन पर डीएमके का पलड़ा भले भारी हो, लेकिन महिलाओं के मामले में बीजेपी ने कहीं न कहीं अपना पक्ष मजबूत करने का काम किया है। इस सब पहलुओं को समझें, तो पता चलता है कि बीजेपी ने हार में भी एक बड़ी जीत खोज ली है। भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की। विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया।

भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है। किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता। बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है। अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया। जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।

लोकसभा में ज्यादा वोट पाकर भी क्यों फेल हो गया महिला आरक्षण बिला, जानें अब आगे क्या?

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महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। मतदान के समय सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे। ऐसे में विधेयक पारित कराने के लिए सत्ता पक्ष को 352 वोटों की जरूरत थी। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। जिसके कारण अधिक वोट मिलने के बाद भी बिल फेल हो गया।

पिछले 12 सालों में पहली बार गिरा कोई संशोधन विधेयक

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। देश की आधी आबादी को उनका राजनीतिक हक दिलाने के लिए शुक्रवार शाम लोकसभा में वोटिंग हुई। सरकार ने इस बिल को पारित कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन यह बिल पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा, 352 से 54 वोट पीछे रह गई। कुल मौजूद सदस्य 352 में बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े और कहानी यहीं पर समाप्त हो गई।

विपक्ष ने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक के सदन में गिरने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मौका गंवा दिया गया है। रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे।

बाकी दो विधेयकों पर क्यों नहीं हुई वोटिंग

सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।

बिल में क्या था प्रस्ताव?

संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रस्ताव था। साथ ही 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना शामिल थी। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था, ताकि आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

विपक्ष क्यों है नाराज?

इस पूरे मामले में एक और बड़ा मुद्दा परिसीमन यानी डिलीमिटेशन को लेकर भी सामने आया। सरकार चाहती थी कि लोकसभा की सीटों का पुनर्निर्धारण करके महिला आरक्षण को लागू किया जाए, जबकि विपक्ष ने इसका विरोध किया। विपक्ष का तर्क था कि परिसीमन के जरिए कुछ राज्यों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है, इसलिए इसे तुरंत लागू करना उचित नहीं होगा। इसी मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो गया और बिल को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका।