सामाजिक समरसता और जन-जागरूकता का महाजुटान है माघ मेला:डॉ शिशिर कुमार सोमवंशी
संजय द्विवेदी प्रयागराज। गंगा–यमुना के पावन संगम से जुड़ी आस्था और सांस्कृतिक चेतना को शब्द देने के लिए उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा गुरुवार को साहित्य एवं संस्कृति संगोष्ठी में विद्वानो ने माघ मेले की आध्यात्मिक सामाजिक और सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला।केन्द्र निदेशक सुदेश शर्मा एवं उपस्थित वक्ताओ द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। संगोष्ठी में“माघ मेला: सांस्कृतिक सरोकारो का महापर्व”विषय पर विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।मुख्य वक्ता डॉ.संजय सिंह (शिशिर कुमार सोमवंशी)ने कहा कि माघ मेला प्रयागराज केवल एक धार्मिक आयोजन नही बल्कि भारत की अटूट आस्था सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यह महाजुटान राष्ट्रोपयोगी कार्यो सामाजिक समरसता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।वही डॉ.संदीप मिश्र ने वैदिक मान्यताओ का उल्लेख करते हुए कहा कि पवित्र नदियों में स्नान करने से मनुष्य निष्काम और निश्चल होता है तथा धर्म की ओर उन्मुख होता है।उन्होने कहा कि माघ मास में किया गया स्नान विशेष फलदायी माना गया है यही कारण है कि देश-विदेश से श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर एकत्रित होते है।माघ मास में संगम तट पर नियम और संयम के साथ जीवन व्यतीत करने वाले श्रद्धालु कल्पवासी कहलाते है जो तपस्वी जीवन का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
प्रो.कुमार वीरेन्द्र ने कहा कि हिंदी पंचांग के अनुसार माघ मास में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सनातन धर्मावलंबियो के लिए विशेष महत्व रखता है। यह समय जप, तप और साधना के माध्यम से मनुष्यता की अनुभूति का होता है।उन्होने कहा कि सनातन परंपरा में नदियों को माता का दर्जा दिया गया है,क्योकि वे निर्मलता और सहनशीलता का प्रतीक है।इसी क्रम में ब्रह्मनाद कला प्रतियोगिता के अन्तर्गत आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में 13,मूर्तिकला में 3 तथा गायन प्रतियोगिता में 12 प्रतिभागियो ने भाग लेकर अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।कार्यक्रम के अंत में केन्द्र निदेशक सुदेश शर्मा ने सभी वक्ताओ को अंगवस्त्र एवं पौधा भेंट कर सम्मानित किया।कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने प्रतिभागियो को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।इस अवसर पर डॉ.श्लेष गौतम मनोज गुप्ता संगीत रॉय रविन्द्र कुशवाहा (सदस्य राज्य ललित कला अकादमी) डॉ.सचिन सैनी कावेरी विज सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Jan 09 2026, 20:09
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