ईद पर कराची में हाफिज सईद का करीबी ढेर, अब्दुल रहमान की गोली मारकर हत्या

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पाकिस्तान में एक के बाद एक आतंकियों को निशाना बनाया जा रहा है। अब कराची में लश्कर-ए-तैयबा नेता हाफिज सईद का करीबी टारगेट किलिंग का शिकार हुआ है। हाफिज सईद के एक करीबी सहयोगी को सोमवार को ईद के दिन पाकिस्तान के कराची में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मरने वाले की पहचान अब्दुल रहमान के रूप में हुई है।

बताया जाता है कि अब्दुल रहमान आतंकवादी संगठन लश्कर के लिए फंड कलेक्शन का काम करता था। जितने भी फंड कलेक्टर कराची में फंड उगाने का काम करते थे वह सभी अब्दुल रहमान के पास आकर फंड जमा करते थे जहां से यह आगे जाता था।

अब्दुल रहमान अहल-ए-सुन्नत वल जमात का प्रमुख था। इस संगठन को पहले सिपाह-ए-शहाब के नाम से जाना जाता था। इसका जैश-ए-मोहम्मद से भी संबंध रहा है। इस संगठन का तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ गहरे संबंध हैं। टीटीपी को पाकिस्तान में अफगानिस्तान तालिबान का प्रमुख सहयोगी माना जाता है।

हाफिज सईद के करीबी पर ये हमला उस समय हुआ, जब वो अपने पिता और अन्य लोगों के साथ था। इस हमले में उसके पिता समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिसमें अब्दुल रहमान की मौके पर ही मौत हो गई।गोली मारने की यह घटना कैमरे में कैद हो गई। इस वीडियो में हमलावरों को रहमान को गोली मारते और भागते हुए दिखाया गया है। इस घटना के दृश्य सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गए हैं।

पाकिस्तान में हाल के दिनों में आतंकी घटनाओं में शामिल दहशतगर्दों को अज्ञात लोग एक-एक कर ठिकाने लगा रहे हैं। हाल ही में क्वेटा में अज्ञात हमलावरों ने जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के मुफ्ती अब्दुल बाकी नूरजई की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नूरजई को क्वेटा एयरपोर्ट के पास गोली मारी गई थी, जिसमें वो बुरी तरह घायल हो गए और अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

अब्दुल रहमान से पहले लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर जिया-उर-रहमान उर्फ नदीम उर्फ कतल सिंधी की पंजाब प्रांत के झेलम इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नदीम को लश्कर संस्थापक हाफिज सईद का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। वह जम्मू-कश्मीर के पूंछ-राजौरी क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था। उसने 2000 की शुरुआत में जम्मू क्षेत्र में घुसपैठ की थी और 2005 में वो वापस पाकिस्तान चला गया था।

महाराष्ट्र से होगा पीएम मोदी का उत्तराधिकारी? शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत का दावा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे। पीएम नरेंद्र मोदी के आरएसएस हेडक्‍वार्टर जाने के एक दिन बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत ने मोदी की रिटायरमेंट को लेकर बड़ा दावा किया है। संजय राउत ने कहा कि पीएम मोदी इस साल 75 साल के होने जा रहे हैं लिहाजा अपने रिटायरमेंट प्‍लान के बारे में चर्चा करने के लिए संघ के मुख्‍यालय गए थे। राउत ने दावा करते हुए कहा कि संघ तय करेगा कि पीएम नरेंद्र मोदी का उत्‍तराधिकारी कौन होगा। उन्‍होंने ये भी कहा कि मोदी का उत्‍तराधिकारी महाराष्‍ट्र से होगा।

संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समय अब पूरा हो गया है। अब आरएसएस भी बदलाव चाहते है और बीजेपी के अगले अध्यक्ष को भी चुनना चाहता है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पिछले 10-11 सालों में आरएसएस मुख्यालय नहीं गए थे, अब वहां मोहन भागवत को टाटा, बाय-बाय कहने गए थे। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस भी देश के नेतृत्व में बदलाव चाहता है, इसलिए पीएम मोदी को बुलाया गया था।

संजय राउत ने कहा कि 10 साल बाद मोदी का नागपुर जाकर सरसंघचालक से मिलना कोई साधारण बात नहीं है। सितंबर में रिटायरमेंट का आवेदन लिखने के लिए शायद वे आरएसएस मुख्यालय गए थे। मेरी जो जानकारी है कि पिछले 10-11 सालों में मोदी जी कभी वहां नहीं गए। इस बार मोदी जी बताने के लिए गए थे कि वे मोहन भागवत जी से कहने जा रहे हैं कि वे टाटा-बाय-बाय कर रहे हैं।

नए नेता संभवतया महाराष्‍ट्र से होगा

संजय राउत ने कहा कि बंद दरवाजे के भीतर क्‍या चर्चाएं हुईं ये तो संभवतया बाहर नहीं आएंगी लेकिन कई संकेतों से इस बात का इशारा मिलता है। उन्‍होंने कहा कि नए नेता का चुनाव संघ करेगा और संभवतया वो महाराष्‍ट्र से होगा।

राउत के दावे पर सीएम फडणवीस का बयान

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संजय राउत के दावों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कई सालों तक देश का नेतृत्व करते रहेंगे। फडणवीस ने कहा कि 2029 में हम मोदी को फिर से प्रधानमंत्री के रूप में देखेंगे। उनके उत्तराधिकारी को खोजने की कोई जरूरत नहीं है। वह (मोदी) हमारे नेता हैं और बने रहेंगे। हमारी संस्कृति में, जब पिता जीवित है, तो उत्तराधिकार के बारे में बात करना अनुचित है। वह मुगल संस्कृति है। इस पर चर्चा करने का समय नहीं आया है।

पीएम मोदी ने आरएसएस की जमकर की तारीफ

बता दें कि इतिहास में यह दूसरी बार है जब किसी प्रधानमंत्री ने आधिकारिक तौर पर आरएसएस मुख्यालय का दौरा किया है। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने 2000 में अपने तीसरे कार्यकाल के दौरान नागपुर पहुंचे थे। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जो विचारधारा का बीज 100 साल पहले बोया गया था, वह एक विशाल पेड़ बन गया है। आरएसएस के सिद्धांतों और मूल्यों ने इसे महान ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जिसमें लाखों कार्यकर्ता इसकी शाखाएं हैं।

चैटजीपीटी ने घिबली स्टाइल फोटो जेनरेट करने पर लिया बड़ा फैसला, यूजर्स के लिए बुरी खबर

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ओपनएआई के चैटजीपीटी ने एक नया टूल लॉन्‍च कर इंटरनेट पर तूफान खड़ा कर दिया। हालांकि, अब इसने कंपनी की ही नींद उड़ा दी है। इन दिनों सोशल मीडिया पर घिबली स्टाइल की तस्वीरें की भरमार देखी जा रही हैं। सोशल मीडिया यूजर्स को अब इन तस्वीरों के माध्यम से अपने आप को देखना पसंद करने लगे लगे हैं। पिछले 2-3 दिन से सोशल मीडिया पर घिबली-स्टाइल फोटो की बाढ़ आई हुई है। इसी बीच ओपनएआई के चैटजीपीटी ने अपनी स्टूडियो घिबली-स्टाइल की तस्वीरों को लेकर अपनी नीति में अहम बदलाव किया है।

नए नियम के मुताबिक अब यूजर्स घिबली-स्टाइल की तस्वीरें बनाने के लिए रियल वर्ल्ड की तस्वीरों का उपयोग नहीं कर सकते। इसका साफ-साफ मतलब है कि अब आप ओपनएआई के चैटजीपीटी के माध्यम से कोई भी असल व्यक्ति या तस्वीर को देखकर घिबली-स्टाइल में तस्वीर नहीं बना सकता। जब भी आप अब चैटजीपीटी के माध्यम से तस्वीर बनाने की कोशिश करेंगे तो इसके लिए चैटजीपीटी इमेज जनरेटर ने एक नया संदेश दिखाना शुरू किया है, जिसमें कहा गया है कि अब वह किसी असल व्यक्ति की तस्वीर से घिबली स्टाइल की तस्वीर नहीं बना सकता।

फ्री और पेड यूजर्स पर लगाई लिमिट

यही नहीं, चैटजीपीटी की टीम इसके अलावा भी कुछ बदलाव कर रही है। ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन ने बताया कि चैटजीपीटी के फ्री यूजर्स को अब हर दिन 3 इमेज बनाने का मौका मिलेगा। हालांकि, ये एक टेंपरेरी सॉल्यूशन है और टीम इस पर काम कर रही है। अब एक दिन में चैटजीपीटी के फ्री यूजर्स लिमिटेड फोटोज ही बना सकेंगे। इसमें पेड यूजर्स को भी लिमिट का सामना करना पड़ेगा।

फ्री यूजर्स को करना होगा इंतजार

इसके अलावा, ओपनएआई ने अपनी इमेज जनरेटर सेवा को मुफ्त यूजर्स के लिए रोलआउट करने में देरी की घोषणा की है, क्योंकि इसे लेकर अधिक मांग आ रही है। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने ट्विटर पर कहा कि इस सेवा की लोकप्रियता उम्मीद से ज्यादा बढ़ गई है, जिससे मुफ्त यूजर्स के लिए इसमें कुछ समय की देरी हो रही है।

सोनिया गांधी ने नई शिक्षा नीति पर केन्द्र को घेरा, बोलीं- शिक्षा व्यवस्था की हत्या बंद होनी चाहिए

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कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारत की शिक्षा नीति को लेकर मोदी सरकार को घेरा है। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि बीते एक दशक में सरकार ने केवल अपने एजेंडे को लागू करने की कोशिश की है। शिक्षा संस्थानों का निजीकरण और सांप्रदायीकरण किया गया है।

अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ में लिखे लेख में सोनिया गांधी ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधा। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ‘3 सी’ एजेंडे को आगे बढ़ा रही है और इसके जरिए शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा का केंद्रीकरण, व्यवसायीकरण और सांप्रदायिकीकरण करती है। सोनिया ने केंद्र पर संघीय शिक्षा ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार राज्य सरकारों को महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों से बाहर रखकर शिक्षा के संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है।

राज्य सरकारों पर दबाव बनाया जाना शर्मनाक

सोनिया गांधी ने कहा कि 2019 से शिक्षा पर केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की बैठक नहीं बुलाई गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े बड़े बदलावों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों से एक बार भी बात नहीं की, जबकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पीएम श्री योजना के लिए राज्य सरकारों पर दबाव बनाया जाना और फंड रोकना शर्मनाक बात है।

शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता किया गया

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ने इस लेख में 89000 स्कूल के बंद होने, बीजेपी-आरएसएस से जुड़े लोगों की भर्ती जैसे मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के बच्चों और युवाओं की शिक्षा के प्रति बेहद उदासीन है। इसमें शिक्षा प्रणाली को जनसेवा की भावना से वंचित रखा गया और शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि यूजीसी नियमों के नए मसौदे में राज्य सरकारों के विश्वविद्यालय में भी कुलपति की नियुक्ति से राज्यों को बाहर कर राज्यपाल के ज़रिए केंद्र सरकार को अधिकार दिया गया है जो संघवाद पर बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था की हत्या बंद होनी चाहिए।

फिर मोदी सरकार के मुरीद हुए शशि थरूर, जानें अब कौन सी बात आई पसंद

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पूर्व राजनयिक, केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसे उनकी पार्टी की लाइन के खिलाफ माना जा सकता है।शशि थरूर ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार की तारीफ की है। इस बार उन्होंने वैक्सीन मैत्री पहल की जमकर प्रशंसा की है।उन्होंने कहा कि इस पहल ने भारत की ग्लोबल सॉफ्ट पावर को मजबूत किया है। साथ ही देश को एक उत्तरदायी वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया।

वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका को भी सशक्त किया-थरूर

अपने एक लेख में शशि थरूर ने कहा कि भारत ने अपनी वैक्सीन उत्पादन क्षमता को प्रभावी ढंग से उपयोग किया, जिससे वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति और मजबूत हुई। उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत भारत ने ना केवल जरूरतमंद देशों को मदद दी, बल्कि वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका को भी सशक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत ने आगे बढ़कर अन्य देशों को प्राथमिकता दी और कई देशों की मदद की।

चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित किया-थरूर

कांग्रेस सांसद ने ये भी कहा कि वैक्सीन मैत्री प्रोग्राम ने दक्षिण एशिया और अफ्रीका में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने का काम किया। उन्होंने माना कि भारत की वैक्सीन कूटनीति ने देश की सॉफ्ट पावर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान भारत को अपने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देनी पड़ी, लेकिन फिर भी उसकी वैक्सीन कूटनीति वैश्विक मंच पर असरदार साबित हुई।

वैश्विक मंच पर मजबूत छवि-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि यह सच है कि कोविड-19 की दूसरी लहर ने भारत के वैक्सीन एक्सपोर्ट को अस्थायी रूप से बाधित किया है, जिससे घरेलू जरूरतों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के साथ संतुलित करने की चुनौतियों पर ध्यान गया। इसके बावजूद, भारत की वैक्सीन कूटनीति उसकी विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय बनी, जो रणनीतिक हितों के साथ मानवतावाद को जोड़ने की उसकी क्षमता को दर्शाती है। इसने भारत की सॉफ्ट पावर को काफी हद तक बढ़ाया है, जिससे विकासशील दुनिया में यह दर्शाया गया है कि भारत मानवीय सहायता को प्राथमिकता दे सकता है, जिससे वैश्विक मंच पर एक उदार और विश्वसनीय भागीदार के रूप में इसकी छवि मजबूत हुई है।

क्या है 'वैक्सीन मैत्री' पहल?

बता दें कि 'वैक्सीन मैत्री'के तहत भारत ने कोरोना महामारी के समय में अन्य जरूरतमंद देशों को भारी मात्रा में घरेलू वैक्सीन मुहैया करवाई थी। सरकार ने 10 जनवरी 2021 को इस पहल की शुरुआत की थी। वहीं भारत ने कोवैक्स पहल के जरिए भी ग्लोबल वैश्विक डिस्ट्रीब्यूशन में अहम भूमिका निभाई थी।

मानव तस्करी के खिलाफ एनआईए का बड़ा एक्शन, डंकी रूट से अमेरिका भेजने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया। साथ ही एनआईए ने इस रैकेट के सरगना को भी गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी गगनदीप सिंह उर्फ गोल्डी पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर का रहने वाला है। आरोपी लोगों को गैरकानूनी तरीके यानी डंकी रूट के जरिए लोगों को अमेरिका भेजने के काम में शामिल था।

एनआईए के बयान के अनुसार, आरोपी ने पंजाब के एक व्यक्ति को अवैध रूप से अमेरिका भेजा था, जिसे इस महीने की शुरुआत में भारत वापस भेज दिया गया। पीड़ित पंजाब के तरनतारन जिले का रहने वाला है। गोल्डी ने उसे दिसंबर 2024 में डंकी रूट के जरिये अमेरिका भेजा था। इसके लिए आरोपी एजेंट ने उससे 45 लाख रुपये लिए थे। अमेरिकी अधिकारियों ने 15 फरवरी 2025 को उसे भारत निर्वासित कर दिया। निर्वासन के बाद पीड़ित ने आरोपी एजेंट के खिलाफ शिकायत की।

अमेरिकी अधिकारियों ने पीड़ित को 15 फरवरी को वापस भारत भेज दिया था। उसके बाद उसने आरोपी एजेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पहले यह केस पंजाब पुलिस ने दर्ज किया था, लेकिन 13 मार्च को एनआईए ने इसे अपने हाथ में ले लिया था।

एनआईए की जांच में पता चला कि गोल्डी के पास लोगों को विदेश भेजने के लिए कोई लाइसेंस,कानूनी परमिट या पंजीकरण नहीं था, उसने डंकी रूट के जरिए पीड़ित को स्पेन, साल्वाडोर, ग्वाटेमाला और मैक्सिको के रास्ते अमेरिका भेजा था।

देशभर में धूमधाम से मनाई गई ईद, राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने दी बधाई

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देशभर में आज ईद बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। भारत में ईद का चांद 30 मार्च को दिखाई दिया, जिसके बाद आज यानी 31 मार्च को ईद का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम दिग्गज नेताओं ने देशवासियों को ईद का बधाई दी है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने 'एक्स' पर लिखा, ईद-उल-फितर के मुबारक मौके पर सभी देशवासियों, विशेष रूप से मुस्लिम भाइयों और बहनों को बधाई। यह त्योहार भाईचारे की भावना को मजबूत बनाता है तथा करुणा-भाव और दान की प्रवृत्ति को अपनाने का संदेश देता है। मैं कामना करती हूं कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति, समृद्धि और खुशियां लेकर आए तथा सबके दिलों में नेकी के रास्ते पर आगे बढ़ने के जज्बे को मजबूत बनाए।

पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में लिखा कि ईद-उल-फ़ितर की बधाई। यह त्योहार हमारे समाज में आशा, सद्भाव और दयालुता की भावना को बढ़ाए। उन्होंने आगे लिखा कि आपके सभी प्रयासों में खुशी और सफलता मिले, ईद मुबारक! रमजान के पाक महीने के बाद ईद-उल-फितर मनाई जाती है। यह मुसलमानों के लिए एक खास दिन होता है। देश में ईद का चांद रविवार को दिखाई दिया है, जिसके बाद सोमवार को ईद का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं। यह त्योहार सभी के लिए सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। आशा है कि यह दिन पूरे समाज में सद्भाव और भाईचारे के बंधन को और मजबूत करेगा। ईद मुबारक!'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रदेशवासियों को ईद की बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस पर्व पर सभी को सद्भाव एवं सामाजिक सौहार्द को और सुदृढ़ करने का संकल्प लेना चाहिए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया एक्स’ पर लिखा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईद-उल-फितर के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन, जानें मां ब्रह्मचारिणी की कथा और पूजा का विधान

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चैत्र नवरात्रि का आज दूसरा दिन है। चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। 'ब्रह्रा' का मतलब घोर तपस्या से है और ' चारिणी' का अर्थ होता है आचरण से। यानी माता का दूसरा स्वरूप तप का आचरण करने से होता है। धार्मिक मान्याओं क अनुसार नवरात्रि के दूसरे दिन मां के इस स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन,संपत्ति और सुख की कमी नहीं होती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा तप, शक्ति, त्याग ,सदाचार, संयम और वैराग्य में वृद्धि करती है और शत्रुओं का नाश करती है।

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नवरात्रि की पूजा में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मां दुर्गा की 9 शक्तियों के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी के दर्शन पूजन का विधान है। देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य रूप में होता है। देवी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल लिए श्वेत वस्त्र में देवी विराजमान होती हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार पूर्वजन्म में मां ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था। भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बहुत कठिन तपस्या की। इसीलिए इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। मां ब्रह्मचारिणी ने एक हजार वर्ष तक फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। इसके बाद मां ने कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप को सहन करती रहीं. टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं।

इससे भी जब भोले प्रसन्न नहीं हुए तो उन्होने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए और कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। मां ब्रह्मचारणी कठिन तपस्या के कारण बहुत कमजोर हो हो गई। इस तपस्या को देख सभी देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने सरहाना की और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया।

मां ब्रह्मचारिणी पूजा विधि

आज नवरात्रि के दूसरे मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जाती है. इनकी पूजा पहले दिन की तरह ही शास्त्रीय विधि से की जाती है. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान से निवृत होकर पूजा स्थल पर गंगाजल से छिड़काव करें और फिर पूरे परिवार के साथ मां दुर्गा की पूजा उपासना करें. लेकिन माता की पूजा में सफेद और पीले रंग के वस्त्र और फूल में गुड़हल या कमल के फूल और भोग में चीनी का प्रयोग करें. माता को अक्षत, फल, फूल, वस्त्र, चंदन, पान-सुपारी आदि पूजा की चीजें अर्पित करें और बीच बीच में परिवार के साथ माता के जयकारे लगाते रहें. इसके बाद कलश देवता और नवग्रह की पूजा भी करें. अब माता की आरती की तैयारी करें, इसके लिए घी और कपूर का दीपक जलाकर माता की आरती करें. फिर दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. पाठ करने के बाद माता का जयकारे लगाएं. ऐसा करने माता का आशीर्वाद प्राप्त होगा

मंगल ग्रह की अशुभता को दूर होती है

मां ब्रह्मचारणी की पूजा से मंगल ग्रह की अशुभता को दूर करने में मदद मिलती है। ऐसी मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। जिन लोगों की जन्म कुंडली में मंगल अशुभ है उन्हें मां ब्रह्मचारणी की पूजा करनी चाहिए।

श्रीलंका दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, रक्षा समझौते के अलावा और क्या होगा खास?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड और श्रीलंका की यात्रा पर जाने वाले हैं। पीएम मोदी 3 अप्रैल से 6 अप्रैल तक विदेश यात्रा पर रहेंगे। वे पहले थाईलैंड जाएंगे और उसके बाद वहां से श्रीलंका के दौरे पर निकलेंगे।विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैंतोगटार्न शिनावात्रा के निमंत्रण पर 4 अप्रैल को बैंकाक में होने वाले छठी बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस बार बिम्सटेक की मेजबानी थाईलैंड कर रहा है। थाईलैंड का दौरा खत्म करने के बाद पीएम मोदी कोलंबो पहुंचेंगे।

पीएम मोदी 4-6 अप्रैल तक राजकीय यात्रा पर श्रीलंका जाएंगे। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका ने पद संभालने के बाद पिछले दिनों सबसे पहले भारत दौरा किया था, तब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को श्रीलंका आने का निमंत्रण दिया था। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका के राष्ट्रपति के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच एक रक्षा समझौता होने की संभावना है। इसके साथ ही ऊर्जा, स्वास्थ्य और डिजिटलीकरण जैसे कई क्षेत्रों में भी समझौते की उम्मीद है।

भारत और श्रीलंका के बीच ये पहला रक्षा समझौता होगा। इस बारे में चर्चा पहले ही हो चुकी है जब श्रीलंका के राष्ट्रपति अरुणा कुमार दिस्सानायके पिछले साल दिसंबर में भारत आए थे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह समझौता इस यात्रा के दौरान हो जाएगा। भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा सहयोग में नौसेना का सहयोग शामिल है। इसके अलावा, भारतीय सेना श्रीलंका के सैनिकों को प्रशिक्षण भी देगी। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति की पृष्ठभूमि में इससे द्विपक्षीय रक्षा संबंध बढ़ेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी भारतीय वित्तीय सहायता से कार्यान्वित विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए अनुराधापुरा भी जाएंगे। बता दें कि श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायका ने पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में भारत का राजकीय दौरा किया था। अब श्रीलंका के राष्ट्रपति के रूप में दिसानायका द्वारा मेजबानी किए जाने वाले मोदी पहले विदेशी नेता होंगे।

प्रधानमंत्री की श्रीलंका यात्रा, दिसानायका की भारत यात्रा के तीन महीने बाद हो रही है, जिस दौरान उन्होंने मोदी को स्पष्ट रूप से बताया था कि द्वीपीय राष्ट्र अपनी भूमि का उपयोग नई दिल्ली के सुरक्षा हितों के विरुद्ध नहीं होने देगा।

मणिपुर समेत तीन राज्यों में 6 महीने के लिए बढ़ाया गया अफस्पा, हिंसा और अशांति के बीच केन्द्र का बड़ा फैसला

#manipurafspaextended

केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा) को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी। गृह मंत्रालय के मुताबिक, मणिपुर में जारी हिंसा के कारण कानून व्यवस्था की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया।

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गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा मणिपुर राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 की धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पांच जिलों के 13 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों को छोड़कर पूरे मणिपुर में 1 अप्रैल 2025 से अगले छह माह तक, यदि इस घोषणा को इससे पहले वापस न लिया जाए, 'अशांत क्षेत्र' के रूप में घोषित किया जाता था।

अधिसूचना के मुताबिक, नगालैंड के दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक और पेरेन जिलों को अशांत क्षेत्र घोषित किया है। इसके अलावा कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग, वोखा और जुनहेबोटो जिलों के कुछ पुलिस थाना क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। यहां भी 1 अप्रैल 2025 से अगले छह महीने तक अफस्पा लागू रहेगा।

वहीं अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ 3 पुलिस थानों के क्षेत्रों में भी छह महीने के लिए अफस्पा बढ़ा दिया गया है।

फरवरी 2025 से, मणिपुर राष्ट्रपति शासन के अधीन है और विधानसभा निलंबित स्थिति में है। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद यह स्थिति उत्पन्न हुई। जिसने राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता को जन्म दिया। बीरेन सिंह ने 2017 से मणिपुर में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार की अगुवाई की थी, ने राज्य में लगभग 21 महीनों से चल रही जातीय हिंसा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। मई 2023 से अब तक इस हिंसा में 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

क्या है अफस्पा?

सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफस्पा), 1958 में अधिनियमित, एक ऐसा कानून है जो सरकार द्वारा “अशांत” घोषित क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को विशेष शक्तियां प्रदान करता है। ये क्षेत्र आमतौर पर उग्रवाद या उग्रवाद का सामना करने वाले क्षेत्र होते हैं, जहां राज्य सरकारों को कानून और व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण लगता है। इन जगहों पर सुरक्षाबल बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार कर सकते हैं। कई मामलों में बल प्रयोग भी हो सकता है। पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की सहूलियत के लिए 11 सितंबर 1958 को यह कानून पास किया गया था। 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने पर यहां भी 1990 में अफस्पा लागू कर दिया गया। अशांत क्षेत्र कौन-कौन से होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है।