अमेरिका में भारत विरोधी इल्हान उमर से राहुल गांधी ने क्यों की मुलाकात? बीजेपी ने घेरा

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राहुल गांधी अमेरिका के तीन दिनों के दौरे पर हैं। अमेरिकी दौरे पर गए कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से मुलाकात की है। इसी क्रम में वो वाशिंगटन के रेबर्न हाउस में अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों से मिले। इस मुलाकात के बाद एक तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में राहुल के साथ एक ऐसा चेहरा नजर आया, जिसे लेकर विवाद हो गया। दरअशल, वो चेहरा चेहरा इल्हान उमर का है,जो भारत और हिंदुओं से घृणा को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैं।उमर अमेरिकी संसद के निचले सदन की सदस्य हैं।

इल्हान उमर अमेरिकी सांसदों के उस समूह का हिस्सा थीं जिसने वाशिंगटन डीसी के रेबर्न हाउस में कॉन्ग्रेस नेता के साथ बैठक की। इसकी मेजबानी अमेरिकी सांसद ब्रेडली जेम्स शेरमन ने की। उमर के अलावा इस बैठक में सांसद जोनाथन जैकसन, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति, बारबरा ली, श्री थानेदार, जीसस जी ग्रासिया, हैंक जॉनसन और जैन शाकोवस्की भी शामिल थे। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार सूत्रों ने बताया कि राहुल गाँधी ने अमेरिकी राजनयिक डोनाल्ड लू से भी मुलाकात की है।

राहुल की इल्हान की मुलाकात पर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल उठाया है।बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि सिख विरोधी, आरक्षण विरोधी बयान देने और विदेशी जमीन से भारतीय संस्थानों पर सवाल उठाने के बाद, राहुल गांधी अब एक पार्टी का विरोध करते हुए भारत विरोधी तत्वों से मिल रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। कौन हैं इल्हान उमर? अमेरिकी कांग्रेस में भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाईं, पाकिस्तान के दौरे पर गईं। प्रायोजित यात्रा और भारत की संप्रभुता का उल्लंघन किया।

बता दें कि अपने भारत विरोधी बयान के लिए पहचाने जाने वाली इल्हान उमर पाकिस्‍तान की चहेती है। वो जम्‍मू-कश्‍मीर को पाकिस्‍तान का हिस्‍सा बता चुकी हैं। उमर 2022 में पाकिस्‍तान गई थी. इस दौरान वो पाकिस्‍तानी अधिकृत कश्‍मीर में भी पहुंची। यह पूरा दौरा पाकिस्‍तान द्वारा प्रयोजित था। वो पाकिस्‍तान के पीएम शाहबाज शरीफ से भी मिली थी। तब इल्हान उमर ने यह बयान भी दिया था कि पीओके पाकिस्‍तान का अहम हिस्‍सा है। इसपर भारत का कोई हक नहीं है।

इतना ही नहीं जब पीएम नरेंद्र मोदी अमेरिकी संसद में भाषण दे रहे थे, तब इल्हान उमर ने इसका विरोध किया था। यही वजह है कि राहुल गांधी के साथ तस्‍वीर वायरल होने के बाद अब इसपर विवाद भी शुरू हो गया है।

चीन ने लद्दाख में दिल्ली जितनी जमीन पर कब्जा किया, यूएस में राहुल गांधी का दावा

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कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अमेरिका दौरे पर है। पिछले तीन दिनों से राहुल गांधी अमेरिका में अलग-अलग जगहों पर लोगों को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान उनके बयानों ने भारत में सियासी पारा हाई कर रखा है। यहां देश में उनके बयानों पर बहस छिड़ी हुई है। मंगलवार को आरक्षण खत्म करने को लेकर दिए गे बयान के बाद राहुल गांधी ने चीन को लेकर ऐसा दावा किया है, जिससे एक बार फिर सियासी भूचाल आना तय है। राहुल गांधा का दावा है कि चीनी सैनिकों ने लद्दाख में दिल्ली के आकार की जमीन पर कब्जा जमाया हुआ है।

4,000 वर्ग किलोमीटर में चीनी सैनिकों कब्जा-राहुल गांधी

अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन डीसी में नेशनल प्रेस क्लब में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा, अगर आप कहते हैं कि हमारे क्षेत्र के 4,000 वर्ग किलोमीटर में चीनी सैनिकों का होना किसी चीज़ से ठीक से निपटना है, तो शायद हमने लद्दाख में दिल्ली के आकार की ज़मीन पर चीनी सैनिकों का कब्ज़ा कर रखा है। मुझे लगता है कि यह एक आपदा है।

पीएम मोदी ने चीन से ठीक से नहीं निपटा-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने इसके साथ ही कहा, अगर कोई पड़ोसी देश आपकी 4000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्ज़ा करले तो अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया होगी? क्या कोई राष्ट्रपति यह कहकर बच निकल पाएगा कि उसने इसे ठीक से संभाला है? इसलिए मुझे नहीं लगता कि पीएम मोदी ने चीन से ठीक से निपटा है। मुझे लगता है कि कोई कारण नहीं है कि चीनी सैनिक हमारे क्षेत्र में बैठे रहें।

ये पहली बार नहीं है जब कांग्रेस नेता ने चीन को लेकर ऐसा दावा किया हो। पिछले साल भी राहुल गांधी ने इसी तरह का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर लद्दाख में भारत-चीन सीमा की स्थिति पर विपक्ष से झूठ बोलने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि चीन ने भारतीय जमीन छीन ली है। हालांकि, केन्द्र की बीजेपी सरकार कांग्रेस के इस दावे को बार-बार खारिज करती आ रही है।

मैं आरक्षण के खिलाफ नहीं हूं” यूएस में बोले राहुल गांधी, जानें क्यों देनी पड़ी सफाई

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अमेरिकी दौरे पर गए कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने आरक्षण को लेकर दिए अपने बयान पर देश में विवाद खड़ा हो गया है। रक्षण पर अपने बयान की वजह से चढ़े सियासी पारे के बीच कांग्रेस सासंद ने सफाई पेश की है। उन्होंने कहा है कि वह आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। राहुल ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर उनकी पार्टी को गलत समझा गया, कांग्रेस पार्टी और का लक्ष्य इसे 50 प्रतिशत तक ले जाने का है।

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वाशिंगटन में मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर उनकी पार्टी को गलत समझा गया है। वो 50 प्रतिशत से आगे बढ़कर आरक्षण देना चाहते हैं। उन्‍होंने कहा कि हम जो कह रहे हैं वह केवल आरक्षण के विचार से अलग है। हम, जो चल रहा है उसकी व्यापक समझ चाहते हैं और फिर इसे ठीक करने के लिए नीतियों की एक सीरीज लागू करना चाहते हैं, आरक्षण भी उनमें से एक है। राहुल गांधी ने कहा, ‘हम आरक्षण को 50 प्रतिशत से आगे बढ़ाने जा रहे हैं। मैं बार-बार यह कहता रहा हूं और कभी भी आरक्षण के खिलाफ नहीं रहा हूं। कल किसी ने मेरे बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया कि मैं आरक्षण के खिलाफ हूं। लेकिन मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मैं आरक्षण के खिलाफ नहीं हूं। हम चाहते हैं कि आरक्षण 50% हो।’

क्या कहा था राहुल गांधी ने?

इससे पहले राहुल गांधी ने अमेरिका के दौरे पर मंगलवार को जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में छात्रों से बात की थी। इस दौरान उनसे पूछा गया था कि भारत में आरक्षण कब तक जारी रहेगा। इस पर राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस आरक्षण खत्म करने के बारे में तब सोचेगी जब सही समय होगा, जोकि अभी नहीं है। राहुल ने कहा था, “जब आप वित्तीय आंकड़ों को देखते हैं, तो आदिवासियों को 100 रुपये में से 10 पैसे मिलते हैं, दलितों को 100 रुपये में से 5 रुपये मिलते हैं और ओबीसी को भी लगभग इतनी ही रकम मिलती है। असलियत यह है कि उन्हें भागीदारी नहीं मिल रही है। भारत के हर एक बिजनेस लीडर की सूची देखें। मुझे आदिवासी, दलित का नाम दिखाएं। मुझे ओबीसी का नाम दिखाएं। मुझे लगता है कि शीर्ष 200 में से एक ओबीसी है। वे भारत के 50 प्रतिशत हैं, लेकिन हम इस बीमारी का इलाज नहीं कर रहे हैं। हालांकि अब, आरक्षण एकमात्र साधन नहीं है। अन्य साधन भी हैं।”

बयान पर सफाई की वजह

बता दे कि की राहुल के इस बयान के बाद बहुजन समाज पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसे लेकर कहा है कि 'केंद्र में काफी लंबे समय तक सत्ता में रहते हुए कांग्रेस पार्टी की सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लागू नहीं किया और न ही देश में जातीय जनगणना। अब इनके इनकी आड़ में कांग्रेस सत्ता में आने के सपने देख रही है। इनके इस नाटक से सचेत रहें जो आगे कभी भी जातीय जनगणना नहीं करा पाएगी। बसपा के अलावा कुछ दलित संगठनों ने इसे मुद्दा बनाया है और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है।

'कुछ तत्व नहीं चाहते भारत आगे बढ़े', ऐसा क्यों बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत?

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है।भागवत ने कहा है कि कुछ तत्व भारत का विकास नहीं चाहते लेकिन इनसे डरने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि डरने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में भी ऐसी ही स्थिति थी, लेकिन धर्म की शक्ति का उपयोग करके इससे निपटा गया था। भागवत ने कहा कि अतीत में भारत पर "बाहरी" आक्रमण काफी हद तक दिखाई देते थे, इसलिए लोग सतर्क रहते थे, लेकिन अब वे विभिन्न रूपों में सामने आ रहे हैं। 

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भागवत डॉ. मिलिंद पराडकर द्वारा लिखित पुस्तक 'तंजावरचे मराठे' के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि हमारा देश बहुत भाग्यशाली है। जब भी ऐसा समय आता है कि यह देश नष्ट हो जाएगा, उसी समय इस संकट से निपटने का उपाय भी सामने आ जाता है। प्राचीन काल से लेकर आज तक महापुरुष आगे आते रहे हैं, जिनके कारण यह देश अमर हो गया है और हमें ऐसा करने की प्रेरणा देने के लिए हजारों लोग आगे आए हैं।

उन्होंने कहा कि अतीत में भारत पर बाहरी आक्रमण काफी हद तक दिखाई देते थे। इसलिए लोग सतर्क रहते थे, लेकिन अब वो अलग-अलग रूपों में सामने आ रहे हैं। रामायण का जिक्र करते हुए कहा कि जब ताड़का ने आक्रमण किया तो बहुत अराजकता फैल गई थी, लेकिन वह केवल एक बाण से मारी गई। आज की स्थिति भी वैसी ही है। हमले हो रहे हैं और वे हर तरह से विनाशकारी हैं। फिर चाहे वह आर्थिक हो, आध्यात्मिक हो या राजनीतिक हो।

मोहन भागवत ने कहा कि कुछ तत्व भारत के विकास की राह में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं और वैश्विक मंच पर इसके उदय से भयभीत हैं, लेकिन वे सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को डर है कि अगर भारत का व्यापक पैमाने पर विकास होता है तो उनके कारोबार बंद हो जाएंगे, ऐसे तत्व देश के विकास की राह में बाधा उत्पन्न करने के लिए अपनी सारी शक्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे योजनाबद्ध तरीके से हमले कर रहे हैं, चाहे वे भौतिक हों या सूक्ष्म।

मोहन भागवत ने कहा कि इन चीजों से डरने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में भी ऐसी ही स्थिति थी, जब भारत के उत्थान की कोई उम्मीद नहीं थी। भागवत ने कहा कि जीवन शक्ति हमारे भारत का आधार है और यह धर्म पर आधारित है जो हमेशा रहेगा। भागवत ने कहा कि धर्म सृष्टि के आरंभ में था और अंत तक इसकी आवश्यकता रहेगी।

बांग्लादेश में भारत की चार वित्तपोषित परियोजनाओं का क्या होगा? यूनुस सरकार ने दिया जवाब

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बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के संबंध को लेकर चिंता जताई जा रही है। खासतक ये सवाल उठ रहे हैं कि बांग्लादेश में भारत समर्थित प्रोजेक्ट का क्या होगा? इस पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अपना रूख साफ कर दिया है।बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के एक शीर्ष सलाहकार ने मंगलवार को कहा कि भारत द्वारा वित्तपोषित परियोजनाएं काफी महत्वपूर्ण हैं और देश में नए प्रशासन के तहत भी ये जारी रहेंगी।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के वित्त सलाहकार सलाहुद्दीन अहमद ने भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा से मुलाकात के दौरान स्थिति स्‍पष्‍ट कर दी है। सलाहुद्दीन ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की उम्मीद जताई। इस दौरान भारत ने भी बांग्लादेश को दी जाने वाली ऋण सुविधाओं को न रोकने का आश्वासन दिया है।

सरकारी समाचार एजेंसी ‘बीएसएस’ की खबर के मुताबिक,वित्त सलाहकार सलेहुद्दीन अहमद ने कहा कि बांग्लादेश यहां भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा के साथ अपनी बैठक के दौरान भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की आशा करता है।सलेहुद्दीन अहमद ने कहा, ‘‘पहले से ही, उनकी (भारत) जो परियोजनाएं हैं, वो बड़ी परियोजनाएं हैं और हम उन्हें जारी रखेंगे। जो कुछ भी (परियोजनाएं) हमारे पास हैं, उसे नहीं रोकेंगे और हम उन परियोजनाओं के वित्तपोषण और कार्यान्वयन के बारे में चर्चा करेंगे।’’ 

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के वित्तीय सलाहकार की यह टिप्पणी भारत की परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन को लेकर चिंताओं के बीच आई है। इन परियोजनाओं के लिए भारत बांग्लादेश को ऋण मुहैया करा रहा है। पिछले महीने शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद से इस पर चिंता जताई जा रही थी

हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की दूसरी सूची जारी, विनेश के खिलाफ इस नेता को उतारा, कई नए चेहरों को मौका

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भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है, जिसमें 21 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। इससे पहले बीजेपी ने 67 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इस दूसरी सूची में कई सीटों पर पार्टी ने नए चेहरों को मौका दिया है। गनौर विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक निर्मल रानी को टिकट नहीं दिया गया है, उनकी जगह देवेंद्र कौशिक को मैदान में उतारा गया है। इसी तरह, राई सीट से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडोली को नजरअंदाज कर कृष्णा गहलावत को चुनावी मैदान में उतारा गया है। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार विनेश फोगाट के खिलाफ जुलना सीट से कैप्टन योगेश बैरागी को उतारा गया है। 

पार्टी ने इस बार कुछ मौजूदा विधायकों को नजरअंदाज करते हुए नए उम्मीदवारों को चुना है। पटौदी से भाजपा के मौजूदा विधायक सत्य प्रकाश का टिकट काटते हुए बिमला चौधरी को मौका दिया गया है। इसके अलावा, बधकल सीट से भाजपा विधायक सीमा त्रिखा का टिकट भी कट गया है और उनकी जगह धनेश अधलखा को उतारा गया है। यह बदलाव पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें भाजपा नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतार कर मतदाताओं का ध्यान आकर्षित करना चाहती है।

बीजेपी द्वारा जारी की गई दूसरी सूची में स्पष्ट है कि पार्टी पुराने चेहरों को हटाकर नए उम्मीदवारों को तरजीह दे रही है। इस कदम से यह संदेश जाता है कि पार्टी केवल सत्ता बनाए रखने के बजाय चुनावी जीत के लिए सक्रियता और बदलाव के साथ मैदान में उतरना चाहती है। उम्मीदवारों की सूची से यह भी जाहिर होता है कि बीजेपी ने कुछ सीटों पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए नए उम्मीदवारों को चुना है, जिससे पार्टी को उन क्षेत्रों में अधिक समर्थन मिल सके जहां पिछले उम्मीदवारों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था।

हार्ट अटैक आने से पहले मिलेगा अलर्ट, दिल्ली AIIMS की हैरतअंगेज़ रिसर्च, जानिए, कैसे ए आई ने का दी तकनीक में क्रांति

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 दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने मेडिकल क्षेत्र में क्रांति ला दी है, जिससे जांच और इलाज की प्रक्रियाएं आसान और अधिक प्रभावी हो गई हैं। सोचिए, अगर एआई तकनीक सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, शरीर का तापमान और सांस दर जैसी चार सामान्य जांचों के आधार पर पहले से ही हार्ट अटैक का पता लगा ले, तो कितनी जानें बचाई जा सकती हैं। एम्स दिल्ली के हृदय रोग विभाग के प्रोफेसर, डॉक्टर एस. रामकृष्णन ने इस बारे में एक शोध पत्र प्रकाशित किया है, जिसमें एआई के वैश्विक परिणामों और इसके भारत में संभावित इस्तेमाल पर चर्चा की गई है।

प्रोफेसर रामकृष्णन ने बताया कि कोरिया के एक अस्पताल के डॉक्टरों ने एआई मॉडल विकसित किया है, जो अस्पताल में भर्ती मरीजों को चार सामान्य जांचों के आधार पर हार्ट अटैक (दिल की धड़कन रुकना) से लगभग आधा घंटे पहले ही इसके खतरे के बारे में अलर्ट कर देता है। अध्ययन से यह सामने आया कि 74% मामलों में, यह मॉडल आधे घंटे पहले ही हार्ट अटैक की चेतावनी दे देता है, जबकि कुछ मामलों में यह 14 घंटे पहले भी अलर्ट करने में सक्षम है। हार्ट अटैक की स्थिति में जल्द इलाज न मिलने पर मरीज की मृत्यु हो सकती है।

डॉ. रामकृष्णन ने कहा कि भारत में भी इस तकनीक का व्यापक रूप से उपयोग हो सकता है। खासकर बच्चों की दिल की सर्जरी के बाद तीन से छह प्रतिशत मामलों में कार्डियक अरेस्ट का खतरा रहता है, जिससे कई बच्चों की जान चली जाती है। यदि इस एआई मॉडल का इस्तेमाल समय पर कर लिया जाए, तो यह बहुत से लोगों की जान बचाने में मददगार साबित हो सकता है। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय में खून का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है। हालांकि, सभी दिल से जुड़ी बीमारियों में दिल की धड़कनें नहीं रुकतीं।

4 नए प्लेटफार्म और 5000 साइबर कमांडो..! साइबर क्राइम पर नकेल कसेगी सरकार

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को दिल्ली में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के पहले स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया। उन्होंने चार प्रमुख साइबर प्लेटफॉर्म्स की शुरुआत की: सस्पेक्ट रजिस्ट्री, साइबर कमांडो, साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC) और समन्वय प्लेटफॉर्म।

 अमित शाह ने साइबर सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया और कहा कि साइबर अपराध की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने सभी हितधारकों से इस समस्या से निपटने में सहयोग की अपील की। उन्होंने घोषणा की कि सरकार अगले पांच वर्षों में 5000 'साइबर कमांडो' को ट्रेनिंग देगी। उनका कहना था कि साइबर सुरक्षा के बिना देश का विकास असंभव है और प्रौद्योगिकी के लाभ के साथ-साथ इसके खतरों को भी समझना होगा।

अमित शाह ने राष्ट्रीय स्तर पर एक सस्पेक्ट रजिस्ट्री बनाने की आवश्यकता भी बताई, जिसमें सभी राज्यों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने 10 सितंबर से एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की, जिसमें I4C एफएम रेडियो और अन्य प्लेटफॉर्मों का उपयोग करेगा। उन्होंने 1930 नंबर की लोकप्रियता को बढ़ाने की अपील की और राज्य सरकारों को भी इस अभियान में शामिल होने के लिए कहा।

उन्होंने I4C की सराहना की, जिसने 600 से अधिक एडवाइजरी जारी की हैं और साइबर अपराधियों द्वारा उपयोग की जाने वाली वेबसाइटों, सोशल मीडिया पेजों, मोबाइल ऐप्स और अकाउंट्स को ब्लॉक करने के प्रयास किए हैं। I4C की स्थापना 5 अक्टूबर, 2018 को गृह मंत्रालय के साइबर और सूचना सुरक्षा प्रभाग (CIS डिवीजन) के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य देश भर में साइबर अपराध से संबंधित समस्याओं का समाधान करना है।

चार प्रमुख साइबर प्लेटफॉर्म्स

साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर: यह सेंटर सभी राज्यों के 1930 कंट्रोल रूम से जुड़ा होगा और हाई प्रायोरिटी केस की मॉनिटरिंग करेगा।

समन्वय पोर्टल: यह पोर्टल फर्जी कार्ड और अकाउंट्स, साइबर क्राइम रोकथाम, अपराध के विश्लेषण और जांच में सहयोग का काम करेगा। इसके माध्यम से CCTV फुटेज की रिक्वेस्ट भी की जा सकेगी और तकनीकी तथा कानूनी मदद भी प्रदान की जाएगी।

साइबर कमांडो प्रोग्राम: यह प्रोग्राम डिजिटल भारत के प्रहरी के रूप में काम करेगा, जिसमें पैरा मिलिट्री फोर्स और स्टेट पुलिस के जवानों को साइबर सिक्योरिटी की ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण देश के प्रमुख संस्थानों जैसे IIT, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) और राष्ट्रीय फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय (NFSU) में होगा।

सस्पेक्ट रजिस्ट्रेशन: इस प्लेटफॉर्म के तहत संदिग्ध बैंक खातों का डेटाबेस बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ साझा किया जाएगा, जिससे संदिग्ध खातों को ट्रैक करने में आसानी होगी।

काम पर नहीं लौटे आरजी कर अस्पताल के डॉक्टर, सुप्रीम कोर्ट ने दी थी 5 बजे की डेडलाइन, क्या होगी कार्रवाई?
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कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के मामले में डॉक्टरों की हड़ताल अभी भी जारी है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा जूनियर डॉक्टरों को दी डेडलाइन खत्म हो चुकी है। अदालत ने आज शाम 5 बजे तक जूनियर डॉक्टरों को काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया था। हालांकि, आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टर्स ने शाम 5 बजे तक ड्यूटी पर लौटने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं माना है। इससे पहले सोमवार को शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टर्स को मंगलवार शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि काम पर लौटने पर उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या काम पर नहीं लौटने पर आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी?

दअरसल, डॉक्टर्स अपनी पांच मांगें नहीं माने-जाने तक काम पर नहीं लौटने के अपने फैसले पर कायम हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही वे आंदोलन और तेज करने जा रहे हैं। डॉक्टरों ने मंगलवार दोपहर स्वास्थ्य सचिव व स्वास्थ्य शिक्षा निदेशक के इस्तीफे की मांग को लेकर स्वास्थ्य भवन तक मार्च निकाला। डॉक्टरों ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक मृतका के परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलनकारी डॉक्टर्स का कहना है कि हमारी मांगें पूरी नहीं होने पर हम काम बंद करना जारी रखेंगे। हमने राज्य सरकार से कोलकाता पुलिस आयुक्त, स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक और चिकित्सा शिक्षा के निदेशक को शाम 5 बजे तक हटाने के लिए कहा था। हम चर्चा के लिए तैयार हैं।

इससे पहले सोमवार को शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टर्स को मंगलवार शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि काम पर लौटने पर उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी। दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने कोर्ट में यह आश्वासन दिया था कि काम पर लौटने पर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई या तबादले नहीं किए जाएंगे।

बता दे कि जूनियर डॉक्टरों ने 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार कक्ष में महिला स्नातकोत्तर प्रशिक्षु का शव मिलने के कुछ घंटों बाद ही अपना 'काम बंद' शुरू कर दिया था।
काम पर नहीं लौटे आरजी कर अस्पताल के डॉक्टर, सुप्रीम कोर्ट ने दी थी 5 बजे की डेडलाइन, क्या होगी कार्रवाई?

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कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के मामले में डॉक्टरों की हड़ताल अभी भी जारी है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा जूनियर डॉक्टरों को दी डेडलाइन खत्म हो चुकी है। अदालत ने आज शाम 5 बजे तक जूनियर डॉक्टरों को काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया था। हालांकि, आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टर्स ने शाम 5 बजे तक ड्यूटी पर लौटने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं माना है। इससे पहले सोमवार को शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टर्स को मंगलवार शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि काम पर लौटने पर उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या काम पर नहीं लौटने पर आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी?

दअरसल, डॉक्टर्स अपनी पांच मांगें नहीं माने-जाने तक काम पर नहीं लौटने के अपने फैसले पर कायम हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही वे आंदोलन और तेज करने जा रहे हैं। डॉक्टरों ने मंगलवार दोपहर स्वास्थ्य सचिव व स्वास्थ्य शिक्षा निदेशक के इस्तीफे की मांग को लेकर स्वास्थ्य भवन तक मार्च निकाला। डॉक्टरों ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक मृतका के परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलनकारी डॉक्टर्स का कहना है कि हमारी मांगें पूरी नहीं होने पर हम काम बंद करना जारी रखेंगे। हमने राज्य सरकार से कोलकाता पुलिस आयुक्त, स्वास्थ्य सचिव, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक और चिकित्सा शिक्षा के निदेशक को शाम 5 बजे तक हटाने के लिए कहा था। हम चर्चा के लिए तैयार हैं। 

इससे पहले सोमवार को शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारी रेजिडेंट डॉक्टर्स को मंगलवार शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि काम पर लौटने पर उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी। दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने कोर्ट में यह आश्वासन दिया था कि काम पर लौटने पर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई या तबादले नहीं किए जाएंगे।

बता दे कि जूनियर डॉक्टरों ने 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार कक्ष में महिला स्नातकोत्तर प्रशिक्षु का शव मिलने के कुछ घंटों बाद ही अपना 'काम बंद' शुरू कर दिया था।