पीएम मोदी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप, चुनाव आयोग को 700 नागरिकों ने लिखा पत्र
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महिला आरक्षण बिल को लेकर 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश को संबोधन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक पास नहीं होने के लिए कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी और विपक्षी दलों को ज़िम्मेदार ठहराया। अब 700 से अधिक नागरिकों ने चुनाव आयोग को लेटर लिखकर इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। लेटर लिखने वालों में पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, एक्टिविस्ट और पत्रकार शामिल हैं।
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चुनाव आयोग से जांच की मांग
700 से ज्यादा लोगों ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर शिकायत की है। उनका कहना है कि यह भाषण चुनावी आचार संहिता के दौरान दिया गया और इस भाषण से आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। इस वजह से इसका असर निष्पक्ष चुनाव के नियमों पर पड़ सकता है। इनका मानना है कि इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग को तुरंत जांच करनी चाहिए।
शिकायतकर्ताओं ने कहा-पक्षपातपूर्ण प्रचार की श्रेणी
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर 33% महिला आरक्षण को लेकर हमला बोला, जो चुनावी माहौल में पक्षपातपूर्ण प्रचार की श्रेणी में आता है। उनका आरोप है कि सरकारी तंत्र और सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए किया गया, जिससे निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना प्रभावित होती है
कंटेंट और प्रसारण के तरीकों की जांच की मांग
शिकायत में कहा गया कि भाषण का कंटेंट और उसके प्रसारण के तरीके दोनों पर जांच होनी चाहिए। नागरिकों ने मांग की कि अगर प्रसारण के लिए अनुमति दी गई थी, तो विपक्षी दलों को भी उतना ही एयरटाइम दिया जाना चाहिए। इसके अलावा अगर भाषण में आचार संहिता का उल्लंघन किया गया हो तो उसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म से हटाने की भी मांग की गई है।
शिकायत पत्र पर किन-किन लोगों ने किए हस्ताक्षर
शिकायत पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व आईएएस एम. जी. देवसहायम, शिक्षाविद जोया हसन, संगीतकार टी. एम. कृष्णा और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबोधन दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी माध्यमों पर लाइव प्रसारित किया गया जो पूरी तरह सार्वजनिक धन से संचालित होते हैं।
पीएम के संबोधन में किस बात पर विवाद?
दरअसल, राष्ट्र के नाम अपने संबोधन की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने कहा, देश की करोड़ों महिलाओं की नज़र संसद पर थी। मुझे भी देखकर दुख हुआ कि नारी शक्ति का ये प्रस्ताव जब गिरा तो कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके जैसी परिवारवादी पार्टियां ख़ुशियां मना रही थीं। ऐसे लोगों को इस देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी। करीब 30 मिनट के इस संबोधन में पीएम मोदी ने कई बार कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके समेत तमाम विपक्षी दलों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है।




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