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अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले की तैयारियां तेज, दुरूस्त होने लगीं सड़कें*
*एक्सपो मार्ट की ओर से जाने वाली सड़कें, क्षतिग्रस्त होने पर सीईपीसी ने जताई थी चिंता*


रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव



भदोही। आगामी चार अक्तूबर से आयोजित 50वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेले के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने की संभावना है। इसके मद्देनजर आयोजन समिति कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) व प्रशासनिक स्तर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रशासन की तरफ एक्सपो मार्ट की ओर से जाने वाली सड़कों की पैचिंग शुरू करा दी गई है। सीईपीसी ने सड़कें क्षतिग्रस्त होने पर चिंता जताई थी।

जिले में आयोजित होने वाले चार दिवसीय 50वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले में 65 देशों के 400 से ज्यादा कालीन आयातक व उनके प्रतिनिधि भाग ले सकते हैं। उधर, एक्सपो मार्ट की ओर जाने वाली सड़कें खराब होने पर कालीन निर्यातक पहले से ही चिंता जता रहे थे। इस बीच उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने की सुगबुगागट शुरू हो गई है। इसके बाद से प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद ने पहले ही जिला प्रशासन से सड़कों को ठीक कराने की मांग की थी। अब प्रशासन चौरी रोड पर सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने में जुट गया है। इंदिरा मिल से लेकर मोरवा पुल तक सड़कों के गड्ढे पाटे जा चुके हैं। उनकी पैचिंग भी कराई जा चुकी है। इंदिरा मिल से लेकर कारपेट सिटी तक सड़क के दोनों ओर गंदगी की भी सफाई कराई जा रही है। दो दिन पूर्व जिलाधिकारी शैलेष कुमार और एसपी अभिनव त्यागी ने सभी विभागों के अधिकारियों के साथ इंदिरा मिल चौराहे से लेकर कारपेट एक्सपो मार्ट तक सड़क का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद वहीं पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों को चेताया भी गया था कि किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीईपीसी के प्रशासनिक सदस्य इम्तियाज अहमद ने जिला प्रशासन के कदम का स्वागत किया। कहा कि सड़कों की दशा सुधरने से भदोही आने वाले आयातक और निर्यातक भदोही की अच्छी साख लेकर लौटेंगे। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता संदीप सरोज ने बताया कि सड़कों की मरम्मत कराई जा रही है। आने वाले समय में कालीन मेले को देखते हुए भी तैयारियां की जा रही हैं।
एनीमिया से जूझ रही गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में लगेगा एफसीएम इंजेक्शन


रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। हाई रिस्क प्रेगनेंसी की श्रेणी में शामिल गर्भवती महिलाओं को अब फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन लगाया जाएगा। जिले में पहली बार इस इंजेक्शन की 6000 खेप आई है। इस इंजेक्शन से खून की कमी से जूझ रही गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबीन ढाई ग्राम तक बढ़ेगा। पांच हजार रुपये की यह इंजेक्शन जिले के सरकारी अस्पतालों में निशुल्क लगाई जाएगी। खून की कमी से जूझ रही गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय खतरा रहता है। इस इंजेक्शन के आने से काफी हद तक महिलाओं को इस समस्या से निजात मिल सकेगा।


जिले में प्रसूताओं की संख्या करीब 10 हजार है। हर महीने की एक, नौ, 16 और 24 तारीख को गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एचआरपी दिवस मनाया जाता है, जहां प्रसूताओं में खून कमी आदि की जांच की जाती है। वर्तमान समय में जिले में 1425 गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी की श्रेणी में हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 70 फीसदी महिलाओं में हिमोग्लोबीन सात ग्राम के आसपास है। जिला अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति ने बताया कि गर्भवती महिला में 10 ग्राम से अधिक खून होना चाहिए, तभी सीजर होता है। अब इस तरह की महिलाओं को फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज इंजेक्शन लगाया जाएगा। इससे उनका हिमोग्लोबनी ढ़ाई ग्राम तक बढ़ जाएगा। शासन की ओर से महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय और फस्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) औराई, डीघ में 708 इंजेक्शन भेजे गए हैं। यह इंजेक्शन बाजार में 5000 रुपये का मिलता है। अस्पताल में यह गर्भवती महिलाओं को निशुल्क लगाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में हर सातवीं गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं।


पांच की जगह केवल एक इंजेक्शन लगेगा
जिला अस्पताल के स्त्री रोग एवं प्रसूता विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति ने बताया कि बदलती जीवन शैली और खानपान के तौर तरीका बदलने से तमाम तरह की बीमारी फैल रही है। गर्भवती महिलाओं में खून की कमी एक बड़ी समस्या है। एफसीएम इंजेक्शन प्रसूता को लगाने पर 2.5 ग्राम तक खून बढ़ता है। यह इंजेक्शन गर्भावस्था के 12 सप्ताह बाद से 34 सप्ताह में कभी लगाया जा सकता है। महिलाओं में सात ग्राम से कम हीमोग्लोबिन है तो उन्हें इंजेक्शन लगता है। इसकी खासियत यह है कि पहले आयरन सुक्रोज के लिए 5 इंजेक्शन लगता था, अब सिर्फ एक ही डोज में पूरा कोर्स हो जाएगा।


खून की कमी होगी दूर, बच्चे होंगे स्वस्थ्य:
महिला रोग विशेषज्ञ डॉ.शालनी पाठक ने बताया कि एनीमिया दूर होने से समय से पूर्व प्रसव, कम वजन के बच्चे के जन्म और प्रसव के दौरान अधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताओं में कमी आएगी। यह इंजेक्शन बहुत ही कारगर है। गर्भवती महिलाएं से समय पर जांच कराएं, डॉक्टर की सलाह पर इंजेक्शन लगवाएं। जिला अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. निलमा धवन ने बताया कि शरीर में खून की कमी (एनीमिया) का मुख्य कारण है। इसके अलावा प्रसूता महिलाओं में थकान आना, चक्कर आना, सांस फूलना आदि लक्षण है। महिलाओं को समय से जांच करना चाहिए। डॉक्टर के परामर्श पर दवाओं का सेवन करें।


अब तक यहां-यहां पहुंचे इतने इंजेक्शन
जिला अस्पताल - 448
एमबीएस भदोही - 100
सीएचसी डीघ - 150
औराई - 110
नोट - बाकि इंजेक्शन ड्रग वेयर हाऊस में है।



गर्भवती महिलाओं में अक्सर हीमोग्लोबीन की कमी की शिकायत मिलती है। शासन की ओर से 6000 एफसीएम इंजेक्शन जिले में भेजा गया है। जिसमें चिह्नित सेंटरों पर इंजेक्शन भेज दिए गए हैं। महिलाओं में खून की कमी को दूर करने वाला यह इंजेक्शन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क लगाया जाएगा। निजी मेडिकल दुकानों पर यह इंजेक्शन पांच हजार रुपये में मिलता है। - डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही।
उत्तर प्रदेश में 34 आईएएस अफसरों का तबादला, कानपुर, महाेबा समेत 14 जिलाें के डीएम भी बदले
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के तबादले हो रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार देर रात को शासन ने 34 आईएएस अफसरों का स्थानांतरण किया है। इनमें कानपुर नगर, अमेठी, कुशीनगर, संतकबीरनगर, महाेबा, हरदाेई समेत 14 जिलों के जिलाधिकारी भी हैं।

शासन की ओर से जारी की गई सूची के आधार पर हरदोई के जिलाधिकारी अनुनय झा को हटाकर उन्हें मुरादाबाद का नया जिलाधिकारी बनाया गया है। राहुल पाण्डेय को विशेष सचिव, राज्यकर को हरदोई का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया है। आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और संभागीय खाद्य नियंत्रक आगरा एम अरुन्मोली को एटा का जिलाधिकारी बनाया गया है। अमेठी के जिलाधिकारी संजय चौहान को कुशीनगर का जिलाधिकारी, महेंद्र सिंह तंवर को कुशीनगर के जिलाधिकारी पद से मुक्त करते हुए कानपुर नगर का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।

मुख्य कार्यपालक अधिकारी,गोरखपुर विकास प्राधिकरण अनुज मलिक को जिलाधिकारी संत कबीरनगर, आलोक कुमार को संत कबीरनगर से जिलाधिकारी पीलीभीत, ज्ञानेंद्र सिंह को पीलीभीत जिलाधिकारी से जिलाधिकारी बलिया, शशांक चौधरी को जिलाधिकारी अमेठी, दिव्यांशु पटेल को जिलाधिकारी बागपत, प्रभास कुमार को महोबा का जिलाधिकारी बनाया गया है।इसी तरह उमेश प्रताप सिंह को जिलाधिकारी बिजनौर, सत्य प्रकाश पटेल को जिलाधिकारी हाथरस और अशोक कुमार को हमीरपुर जिले का नया डीएम नियुक्त किया है।

हिमांशु कौशिक को प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन के पद से मुक्त करते हुए नगर निगम मुरादाबाद का नगर आयुक्त बनाया गया है। विजय कुमार सिंह को मुख्य राजस्व अधिकारी देवरिया से मुख्य विकास अधिकारी मीरजापुर, संतोष बहादुर सिंह को अपर जिलाधिकारी प्रशासन सहारनपुर से मुख्य विकास अधिकारी मैनपुरी, विशाल कुमार को मुख्य विकास अधिकारी मीरजापुर से मुख्य कार्यपालक आधिकारी गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी साैंपी गई है।

विकास कुमार को विशेष सचिव नियुक्ति एवं क्रार्मिक महाप्रबंधक यूपीडेस्को से आगरा विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष एवं संभागीय खाद्य नियंत्रक आगरा का प्रभार सौंपा गया है। शैलेंद्र भाटिया को अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण से अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी यूपीडा, गजल भारद्वाज को जिलाधिकारी महोबा से अपर मुख्यकार्य अधिकारी इन्वेस्ट यूपी, नितिन मदान को अपर जिलाधिकारी प्रशासन रामपुर से अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, जसजीत कौर को जिलाधिकारी बिजनौर से प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन, कानपुर नगर के जिला अधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह को निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, नेहा बंधु को मुख्य विकास अधिकारी मैनपुरी से अपर आयुक्त विकसित भारत रोजगार और आजीविका गैरंटी मिशन, अमनदीप डुली को अपर आयुक्त मनरेगा से बाट माप, बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल को विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण, निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण प्रबंध निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम। अभिषेक गोयल को जिला अधिकारी हमीरपुर से विशेष सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक, बलिया के जिला अधिकारी मंगला प्रसाद सिंह को प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ लिमिटेड, विशेष सचिव उच्च शिक्षा में तैनात नीति श्रीवास्तव को विशेष सचिव राज्य कर बनाया गया है। इसके साथ ही अरविंद सिंह को जिला अधिकारी एटा से विशेष सचिव, खाद्य एवं रसद, राजेंद्र पेंसिया को जिलाधिकारी मुरादाबाद से विशेष सचिव, कारागार प्रशासन एवं सुधार, अतुल वत्स को जिलाधिकारी हाथरस से विशेष सचिव राजस्व, चंद्रशेखर को विशेष सचिव सिंचाई एवं जल संस्थान से विशेष सचिव, परती भूमि विकास का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
हरदोई के नए जिला अधिकारी राहुल पांडे ने संभाली कमान
Sb ब्यूरो रितेश मिश्रा
हरदोई -नए जिलाधिकारी ने संभाली कमान  शासन ने 2014 बैच के आईएएस अधिकारी राहुल पांडेय को हरदोई का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया है। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश शासन में विशेष सचिव, राज्य कर विभाग के पद पर तैनात थे। शासन के ताजा तबादला आदेश में हरदोई के जिलाधिकारी अनुनय झा को मुरादाबाद और राहुल पांडेय को हरदोई की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
UPSC में 52वीं रैंक ने दिलाई पहचान
राहुल पांडेय 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 52वीं रैंक हासिल की थी। गाजियाबाद से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने वाले राहुल पांडेय ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उन्हें इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल भी मिला था।
सहारनपुर से शुरू हुआ फील्ड प्रशासन का सफर
आईएएस सेवा में आने के बाद राहुल पांडेय ने उत्तर प्रदेश कैडर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने सहारनपुर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में काम किया। इसके बाद संत कबीरनगर और गोरखपुर में भी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी संभाली।
वर्ष 2018 में उन्हें बहराइच का मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) बनाया गया। इसके बाद शासन स्तर पर विशेष सचिव समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष जैसे अहम पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
हमीरपुर और हाथरस में संभाली डीएम की कमान
राहुल पांडेय के प्रशासनिक अनुभव में जिलाधिकारी के रूप में काम करने का अनुभव भी शामिल है। सितंबर 2023 में उन्हें हमीरपुर का जिलाधिकारी बनाया गया। वहां करीब एक वर्ष तक जिम्मेदारी संभालने के बाद सितंबर 2024 में उनका स्थानांतरण हाथरस के जिलाधिकारी के रूप में हुआ।
उन्होंने 14 सितंबर 2024 को हाथरस के जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला। करीब 13 महीने तक हाथरस की प्रशासनिक कमान संभालने के बाद अक्टूबर 2025 में उनका तबादला शासन में विशेष सचिव, राज्य कर विभाग के पद पर कर दिया गया।
अब हरदोई में प्रशासनिक अनुभव की परीक्षा
शासन स्तर पर करीब एक वर्ष जिम्मेदारी संभालने के बाद राहुल पांडेय को एक बार फिर जिले की कमान सौंपी गई है। हरदोई में उनके सामने कानून-व्यवस्था, राजस्व मामलों, विकास योजनाओं की निगरानी, जनसुनवाई, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आमजन की शिकायतों के त्वरित निस्तारण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
हमीरपुर और हाथरस में जिलाधिकारी के रूप में काम करने के बाद अब हरदोई में उनके प्रशासनिक अनुभव और कार्यशैली पर निगाह रहेगी। खासकर जनसुनवाई, विकास कार्यों की निगरानी, राजस्व मामलों में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही के मोर्चे पर नई जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होगी।
हरदोई में राहुल पांडेय के सामने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को गति देने के साथ शासन की प्राथमिकताओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू कराने की चुनौती रहेगी। वहीं आमजन की समस्याओं के निस्तारण और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी नए जिलाधिकारी की कार्यशैली का असर दिखाई देगा। फेरबदल के बीच हरदोई को नया जिलाधिकारी मिल गया है। शासन ने 2014 बैच के आईएएस अधिकारी राहुल पांडेय को हरदोई का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया है। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश शासन में विशेष सचिव, राज्य कर विभाग के पद पर तैनात थे। शासन के ताजा तबादला आदेश में हरदोई के जिलाधिकारी अनुनय झा को मुरादाबाद और राहुल पांडेय को हरदोई की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
UPSC में 52वीं रैंक ने दिलाई पहचान
राहुल पांडेय 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 52वीं रैंक हासिल की थी। गाजियाबाद से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने वाले राहुल पांडेय ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उन्हें इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल भी मिला था।
सहारनपुर से शुरू हुआ फील्ड प्रशासन का सफर
आईएएस सेवा में आने के बाद राहुल पांडेय ने उत्तर प्रदेश कैडर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने सहारनपुर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में काम किया। इसके बाद संत कबीरनगर और गोरखपुर में भी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी संभाली।
वर्ष 2018 में उन्हें बहराइच का मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) बनाया गया। इसके बाद शासन स्तर पर विशेष सचिव समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष जैसे अहम पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
हमीरपुर और हाथरस में संभाली डीएम की कमान
राहुल पांडेय के प्रशासनिक अनुभव में जिलाधिकारी के रूप में काम करने का अनुभव भी शामिल है। सितंबर 2023 में उन्हें हमीरपुर का जिलाधिकारी बनाया गया। वहां करीब एक वर्ष तक जिम्मेदारी संभालने के बाद सितंबर 2024 में उनका स्थानांतरण हाथरस के जिलाधिकारी के रूप में हुआ।
उन्होंने 14 सितंबर 2024 को हाथरस के जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला। करीब 13 महीने तक हाथरस की प्रशासनिक कमान संभालने के बाद अक्टूबर 2025 में उनका तबादला शासन में विशेष सचिव, राज्य कर विभाग के पद पर कर दिया गया।
अब हरदोई में प्रशासनिक अनुभव की परीक्षा
शासन स्तर पर करीब एक वर्ष जिम्मेदारी संभालने के बाद राहुल पांडेय को एक बार फिर जिले की कमान सौंपी गई है। हरदोई में उनके सामने कानून-व्यवस्था, राजस्व मामलों, विकास योजनाओं की निगरानी, जनसुनवाई, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आमजन की शिकायतों के त्वरित निस्तारण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
हमीरपुर और हाथरस में जिलाधिकारी के रूप में काम करने के बाद अब हरदोई में उनके प्रशासनिक अनुभव और कार्यशैली पर निगाह रहेगी। खासकर जनसुनवाई, विकास कार्यों की निगरानी, राजस्व मामलों में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही के मोर्चे पर नई जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होगी।
हरदोई में राहुल पांडेय के सामने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को गति देने के साथ शासन की प्राथमिकताओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू कराने की चुनौती रहेगी। वहीं आमजन की समस्याओं के निस्तारण और विभागीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी नए जिलाधिकारी की कार्यशैली का असर दिखाई देगा।
मऊ दीवार पर ‘स्वच्छ सिरसा’, परिसर में झाड़ियों का अंबार
प्राथमिक विद्यालय सिरसा नं. 1 में सफाई व्यवस्था बदहाल, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल; शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों की चुप्पी

सिरसा, चिरैयाकोट (मऊ)। प्राथमिक विद्यालय सिरसा नं. 1 की बाउंड्री पर बड़े अक्षरों में लिखा है—‘स्वच्छ सिरसा, सुंदर सिरसा—एक कदम स्वच्छता की ओर।’ लेकिन विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही यह संदेश और जमीनी हकीकत आमने-सामने खड़ी नजर आती है। पश्चिमी हिस्से के ग्राउंड में घास और झाड़ियों का अंबार है, जबकि परिसर के कई हिस्सों में भी घास-फूस उगी हुई है।

विद्यालय में छोटे बच्चे पढ़ते हैं और बारिश के मौसम में झाड़ियों के बीच मच्छरों, कीड़े-मकौड़ों और अन्य जीव-जंतुओं की मौजूदगी की आशंका बनी रहती है। ऐसे में विद्यालय परिसर की बदहाल सफाई व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है।

शिकायतें होती रहीं, व्यवस्था नहीं सुधरी

प्रधानाध्यापक सत्यप्रकाश सिंह के मुताबिक सफाई व्यवस्था को लेकर ग्राम प्रधान गुड्डू सोनकर, ग्राम सचिव, ब्लॉक रानीपुर और संबंधित अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

प्रधानाध्यापक का आरोप है कि विद्यालय के लिए नियुक्त महिला सफाई कर्मचारी नियमित रूप से सफाई करने नहीं आतीं। कई बार बच्चों की मदद से परिसर की सफाई करानी पड़ती है। उनका कहना है कि बच्चों का काम पढ़ाई करना है, उनसे सफाई कराना व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकता।

अधिकारियों की ओर से सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने का आश्वासन भी मिला, लेकिन झाड़ियां अब भी समस्या बनी हुई हैं।

दीवार का संदेश कब उतरेगा जमीन पर?

विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय लोगों ने तत्काल झाड़ियों की कटाई, विशेष सफाई अभियान और नियमित सफाई व्यवस्था की मांग की है। सवाल यह है कि जब स्वच्छता का संदेश विद्यालय की दीवार पर लिखा है, तो उसी विद्यालय के परिसर में सफाई कब दिखाई देगी?

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग शिकायतों और आश्वासनों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर कब कार्रवाई करता है।
सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित को समझने का सटीक अवसर

*खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सितंबर विषुव , 23 सितंबर 2026 को सुबह 5:35 बजे IST पर घटित होगा। इस समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा को उत्तर से दक्षिण पार करेगा,* जिससे उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शरद और दक्षिणी गोलार्ध में खगोलीय वसंत शुरू होगा साथ ही इस दिन, दिन-रात लगभग बराबर रहेंगे और सूर्य ठीक पूर्व में उगेगा और ठीक पश्चिम में अस्त होगा। इस बारे में खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए 10 अति महत्वपूर्ण बिंदुओं में विषुव की सम्पूर्ण जानकारी को समाहित करते हुए समायोचित जानकारी दी है जो इस प्रकार हैं।

*1. विषुव क्या है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सितंबर विषुव पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर वार्षिक परिक्रमा में आने वाला महत्वपूर्ण खगोलीय पड़ाव है और विषुव उस क्षण को कहते हैं, जब सूर्य का आभासी मार्ग आकाशीय विषुवत् रेखा को पार करता है। आकाशीय विषुवत् रेखा पृथ्वी की भूमध्य रेखा का आकाश में बना हुआ काल्पनिक विस्तार है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय भाषा में विषुव वे दो बिंदु हैं, जहां क्रांतिवृत्त यानी सूर्य का आभासी वार्षिक मार्ग और आकाशीय विषुवत् रेखा एक-दूसरे को काटते हैं, लेकिन पृथ्वी से देखने पर सितंबर विषुव के समय सूर्य उत्तर से दक्षिण की ओर जाते हुए आकाशीय विषुवत् रेखा को पार करता दिखाई देता है, इसी कारण उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शरद ऋतु और दक्षिणी गोलार्ध में खगोलीय वसंत ऋतु शुरू होती है। *2. सितंबर विषुव 2026 की तिथि और समय क्या है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 का सितंबर विषुव 23 सितंबर को होगा और इसका सटीक क्षण 00:05 UTC है, जो भारतीय समयानुसार 23 सितंबर को सुबह 5:35 बजे होगा और यह भी जानना आवश्यक है कि विषुव किसी पूरे दिन चलने वाली कोई अलग खगोलीय घटना नहीं, बल्कि पृथ्वी-सूर्य प्रणाली में घटित होने वाला एक निश्चित क्षण होता है अगर हम बात करें भारत की तो पाते हैं कि भारत सहित उत्तरी गोलार्ध के देशों में इसे शरद विषुव या शरद संपात कहा जाता है और दक्षिणी गोलार्ध में यही घटना वसंत विषुव कहलाती है। सितंबर विषुव सामान्यतः 22 या 23 सितंबर को आता है, हालांकि पृथ्वी की कक्षीय अवधि और कैलेंडर-वर्ष के अंतर के कारण कुछ वर्षों में यह 21 या 24 सितंबर को भी पड़ सकता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 में मार्च विषुव 20 मार्च को हुआ, जबकि सितंबर विषुव 23 सितंबर 2026 को होगा, और मार्च विषुव, उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय वसंत और सितंबर विषुव, खगोलीय शरद ऋतु की शुरुआत का संकेत देता है।

*3. क्या सच में दिन और रात बराबर होते हैं।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि “Equinox” शब्द लैटिन के aequus यानी समान और nox यानी रात से बना है। जिसका मतलब/अर्थ ही होता है, समान रात, विषुव के समय पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होती है, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि हर स्थान पर ठीक 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होती है, क्योंकि इसके दो मुख्य कारण हैं,पहला कारण होता है कि सूर्य,आकाश में एक बिंदु नहीं, बल्कि लगभग आधा डिग्री व्यास वाला गोलाकार डिस्क है,सूर्योदय का समय सूर्य के ऊपरी किनारे के क्षितिज को छूने पर और सूर्यास्त का समय उसके ऊपरी किनारे के पूरी तरह गायब होने पर निर्धारित किया जाता है। और दूसरा कारण होता है कि पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़ता है,इस वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य वास्तविक ज्यामितीय स्थिति में क्षितिज के नीचे होने पर भी कुछ समय दिखाई देता है, इससे सूर्योदय थोड़ा पहले और सूर्यास्त थोड़ा बाद में दिखाई देता है,परिणामस्वरूप विषुव के दिन अधिकांश स्थानों पर दिन की अवधि रात से कुछ मिनट अधिक रहती है। जिस दिन किसी विशेष स्थान पर दिन और रात की अवधि वास्तव में लगभग बराबर होती है, उसे इक्विलक्स या समप्रकाश दिवस कहा जाता है एवं इसकी तिथि अक्षांश और स्थानीय क्षितिज की परिस्थितियों के अनुसार अलग अलग एवं बदलती है और यह विषुव से कुछ दिन पहले या बाद में हो सकती है।

*4. सूर्य ठीक पूर्व में उगेगा और ठीक पश्चिम में अस्त होगा इसका विषुव में क्या मतलब है।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सितंबर विषुव की प्रमुख विशेषता यह है कि इस दिन सूर्य लगभग ठीक पूर्व दिशा में उगता और लगभग ठीक पश्चिम दिशा में अस्त होता है,क्योंकि विषुव के समय सूर्य, आकाशीय विषुवत् रेखा पर होता है और पृथ्वी के घूर्णन के कारण उसका उदय पूर्व और अस्त पश्चिम दिशा के निकट दिखाई देता है, हालांकि, “ठीक पूर्व” और “ठीक पश्चिम” का व्यावहारिक अवलोकन स्थानीय भू-दृश्य, क्षितिज, पहाड़, इमारतों और सूर्योदय-सूर्यास्त की परिभाषा से थोड़ा प्रभावित हो सकता है, लेकिन उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर स्थिति अलग होती है,वहां सूर्य, क्षितिज के चारों ओर घूमता दिखाई दे सकता है और सामान्य अर्थों में सूर्योदय तथा सूर्यास्त अन्य स्थानों जैसा स्पष्ट नहीं होता, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि विषुव के दिन विद्यार्थी और आम लोग किसी खुले स्थान पर सूर्योदय और सूर्यास्त की दिशा भी चिह्नित कर इस घटना का सरल अवलोकन कर सकते हैं।

*5. ऋतु परिवर्तन का वैज्ञानिक कारण क्या है।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी की घूर्णन धुरी उसके कक्षीय तल के लंबवत से लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है और पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते समय इसी झुकाव के साथ आगे भी बढ़ती है, इसीलिए वर्ष के अलग-अलग समय पर कभी उत्तरी गोलार्ध, सूर्य की ओर झुका होता है और कभी दक्षिणी गोलार्ध, लेकिन सितंबर विषुव के समय कोई भी गोलार्ध सूर्य की ओर या उससे दूर प्रमुख रूप से झुका नहीं होता, इसीलिए सूर्य का प्रकाश दोनों गोलार्धों में अपेक्षाकृत संतुलित ढंग से वितरित होता है,इसके बाद उत्तरी गोलार्ध सूर्य से धीरे-धीरे दूर की ओर झुकने लगता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की ओर झुकता जाता है,इसी कारण सितंबर विषुव के बाद उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं और दक्षिणी गोलार्ध में इसके विपरीत दिन लंबे और रातें छोटी होती जाती हैं,और ऋतुओं का मूल कारण पृथ्वी की सूर्य से दूरी नहीं, बल्कि पृथ्वी की धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा है।

*6. शरद ऋतु की खगोलीय और मौसम-विज्ञानी परिभाषा क्या हैं।?*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस पर संक्षिप्त खगोलीय प्रकाश डालते हुए बताया कि शरद ऋतु की शुरुआत को दो तरीकों से परिभाषित किया जाता है, पहला होता है खगोलीय दृष्टि,खगोलीय दृष्टि   से उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु सितंबर विषुव से शुरू होती है और दिसंबर संक्रांति तक रहती है और साथ ही अगर हम बात करें मौसम-विज्ञान में, तो पाते हैं कि मौसम-विज्ञान में वर्ष को तीन-तीन महीनों की निश्चित ऋतुओं में बांटा जाता है,इस पद्धति के अनुसार शरद ऋतु 1 सितंबर से 30 नवंबर तक मानी जाती है, इसका उद्देश्य विभिन्न वर्षों के तापमान, वर्षा और जलवायु आंकड़ों की तुलना को सरल बनाना होता है,इसलिए 1 सितंबर से शुरू होने वाली शरद ऋतु मौसम-विज्ञान की परिभाषा है, जबकि 23 सितंबर से शुरू होने वाली शरद ऋतु खगोलीय परिभाषा पर आधारित है।

*7. चार प्रमुख मौसमी खगोलीय पड़ाव क्या होते हैं।?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एक वर्ष के मौसमी चक्र में चार प्रमुख खगोलीय पड़ाव होते हैं जोकि इस प्रकार परिभाषित किए जाते हैं, मार्च विषुव, जून संक्रांति, सितंबर विषुव और दिसंबर संक्रांति। विषुव के समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा पर होता है, जबकि संक्रांति के समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा के उत्तर या दक्षिण में अपनी सबसे दूर की आभासी स्थिति पर पहुंचता है,जून संक्रांति उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत का संकेत देती है,उस समय उत्तरी ध्रुव, सूर्य की ओर झुका होता है और सूर्य की सीधी किरणें कर्क रेखा के आसपास पड़ती हैं और दिसंबर संक्रांति उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शीत ऋतु की शुरुआत दर्शाती है, उस समय दक्षिणी ध्रुव, सूर्य की ओर झुका होता है और सूर्य की सीधी किरणें मकर रेखा के आसपास पड़ती हैं, खगोलविद अमर पाल सिंह ने स्पष्ट करते हुए बताया कि विषुवों के विपरीत, संक्रांतियां संबंधित गोलार्ध में वर्ष के सबसे लंबे या सबसे छोटे दिन से जुड़ी होती हैं।

*8. विषुव का अवलोकन कैसे करें?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि विषुव के लिए किसी विशेष दूरबीन आदि की कोई भी आवश्यकता नहीं है, आप सूर्योदय और सूर्यास्त की दिशा पर ध्यान देकर सूर्य के लगभग पूर्व से उदय और पश्चिम में अस्त होने को देख सकते हैं, साथ ही खुले स्थान पर किसी खंभे, डंडे या छड़ी की छाया को दिनभर चिह्नित करना भी उपयोगी गतिविधि में सम्मिलित हो सकता है, इससे सूर्य की आभासी गति, पृथ्वी का घूर्णन और छाया की दिशा में होने वाले परिवर्तन को बड़े ही आसानी से समझा जा सकता है, खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष जोर देते हुए बताया है कि तेज रोशनी के दौरान तो सूर्य को सीधे नंगी आंखों से कभी नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे आंखों की रेटिना को स्थायी क्षति हो सकती है, सूर्य का अवलोकन केवल अंतर्राष्ट्रीय या आई ० एस० ओ० प्रमाणित सौर फिल्टर, सुरक्षित सोलर व्यूअर या पिनहोल प्रोजेक्टर से करें, सामान्य धूप के चश्मे, एक्स-रे फिल्म, काली कांच की प्लेट या बिना प्रमाणित फिल्टर वाली दूरबीन सुरक्षित नहीं होती हैं,दूरबीन में सौर फिल्टर हमेशा उसके आगे वाले सिरे पर लगाया जाना चाहिए, आंख के पास नहीं।

*9. क्रांतिवृत्त, राशिचक्र और विषुव बिंदु क्या होते हैं।?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष खगोलीय जानकारियों को सम्मिलित करते हुए समायोचित रूप में बताया कि सूर्य तारों की पृष्ठभूमि के सामने वर्षभर जिस आभासी मार्ग पर चलता दिखाई देता है, उसे क्रांतिवृत्त या रविपथ कहा जाता है और पृथ्वी की धुरी के झुकाव के कारण क्रांतिवृत्त और आकाशीय विषुवत् रेखा के बीच लगभग 23.5 डिग्री का कोण बनता है, लेकिन चंद्रमा और अधिकांश ग्रह क्रांतिवृत्त की ठीक उसी रेखा पर नहीं चलते, बल्कि उसके आसपास के एक पट्टे में दिखाई देते हैं, इस पट्टे को राशिचक्र ( जोडियाक) कहा जाता है, लेकिन बौने ग्रह प्लूटो का कक्षीय झुकाव अधिक होने के कारण उसका मार्ग इस सामान्य पट्टी से अलग है।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि विषुव बिंदु हमेशा हमेशा के लिए स्थिर नहीं बने रहते हैं बल्कि पृथ्वी की धुरी की दीर्घकालिक डगमगाहट जिसे अयन चलन कहा जाता है या कुछ यूं कहें कि अयन-चलन या विषुवों का पूर्वगमन कहा जाता है,इसके कारण विषुव बिंदु, तारों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष धीरे-धीरे पश्चिम की ओर खिसकते हैं इस दीर्घकालिक अयन चलन के कारण पृथ्वी की धुरी को एक पूरा चक्र पूरा करने में लगभग 26,000 वर्ष लगते हैं, इसीलिए पृथ्वी की इस दीर्घकालिक अयन चलन गति के कारण, पृथ्वी से देखने पर ध्रुव तारे तक की स्थिति लगभग 26,000 बर्षों में अपने स्थान से बदल जाती है, इसीलिए यह भी समझना चाहिए कि यहाँ दीर्घकालिक ब्रह्मांडीय लय में कुछ भी स्थिर जैसा है ही नहीं।

*10. भारतीय खगोल-परंपरा और इसका सांस्कृतिक महत्व क्या है।?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्राचीन भारतीय खगोल-विज्ञान में सूर्य की गति, अयन, नक्षत्र और ऋतु-चक्र का गहरा अध्ययन किया गया है, प्राचीन कालीन भारतीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नक्षत्र शब्द का उपयोग तारों या तारक-समूहों के लिए भी होता है और चंद्रमा के आकाशीय मार्ग को 27 भागों में बांटने के लिए भी होता है, जैसा कि हम जानते हैं कि चंद्रमा, तारों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष लगभग 27.3 दिनों में एक चक्र पूरा करता है,इसलिए प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में चंद्र-पथ को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है, लेकिन साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि अयन-चलन के कारण विषुव बिंदुओं और नक्षत्रों का आपसी स्थान लंबे समय में बदलता रहता है, इसी वजह से अलग-अलग ऐतिहासिक काल में कृत्तिका, धनिष्ठा, श्रवण, चित्रा और रेवती जैसे नक्षत्रों को वर्ष या नक्षत्र-क्रम की शुरुआत से जोड़ा गया था और प्राचीन भारतीय ग्रंथों में अयन और ऋतु-परिवर्तन से जुड़े उल्लेख इस बात का संकेत भी देते हैं कि आकाशीय घटनाओं का समय, कृषि और पंचांग-निर्माण के लिए सावधानी से देखा जाता था और आधुनिक खगोलविद एवं इतिहासकार इन उल्लेखों की विशेष व्याख्या करते समय अयन-चलन और प्राचीन गणनाओं को भी ध्यान में रखते हैं, साथ ही विभिन्न सभ्यताओं ने विषुव को अपने-अपने सांस्कृतिक ढंग से समझा जैसे कि मिस्र में कई मंदिरों और स्थापत्य संरचनाओं का संबंध सौर दिशाओं और आकाशीय घटनाओं से रहा है एवं मेक्सिको के चिचेन इत्ज़ा स्थित कुकुलकान पिरामिड पर विषुव के आसपास बनने वाली प्रकाश-छाया की आकृति सांप जैसी दिखाई देती है, हालांकि इस प्रभाव की मूल मंशा को लेकर पुरातत्वविदों में पूरी सहमति नहीं भी हो सकती है।
लेकिन अगर हम बात करें सितंबर विषुव 2026 की तो पाते हैं कि इसका इसलिए विशेष महत्वपूर्ण है कि यह केवल दिन और रात के लगभग बराबर होने की घटना नहीं, बल्कि पृथ्वी की धुरी, सूर्य की आभासी गति, ऋतु-चक्र, नक्षत्र-पद्धति, अयन-चलन और मानव सभ्यता के आकाश-अवलोकन को जोड़ने वाला वैज्ञानिक पड़ाव है, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 23 सितंबर 2026 की सुबह होने वाला यह विषुव हमें निश्चित तौर पर यह खगोलीय याद दिलाएगा कि पृथ्वी का झुकाव और उसकी सूर्य के चारों ओर गति हमारे मौसम, कृषि, दिन के उजाले और जीवन की लय को लगातार प्रभावित करते हैं,इसीलिए समस्त खगोल प्रेमियों को इसका अवलोकन एवं सटीक प्रमाणित वैज्ञानिक एवं गणितीय और विशेष खगोलीय जानकारियों से ओत प्रोत होना ही चाहिए।
नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में अभियुक्त को 05 वर्ष का सश्रम कारावास व कुल 7,000- रुपये के अर्थदण्ड से किया गया दण्डित
रमेश दूबे

पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर *श्री संदीप कुमार मीना* के निर्देशन में चलाए जा रहे *“ऑपरेशन कन्विक्शन”* अभियान के दृष्टिगत संतकबीरनगर पुलिस द्वारा गुणवत्तापूर्ण विवेचना तथा अभियोजन द्वारा प्रभावी पैरवी के क्रम में आज दिनाँक 21.09.2026 को माननीय न्यायालय ए0एस0जे0/पाक्सो एक्ट, जनपद संतकबीरनगर द्वारा अभियुक्त को 05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं कुल 7,000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया ।
*घटना का विवरण-*  वादिनी मुकदमा भिखना देवी पत्नी स्व0 रामभेज निवासी बूधाखुर्द थाना कोतवाली खलीलाबाद जनपद संतकबीरनगर द्वारा दिनाँक 17.02.2017 को थाना कोतवाली खलीलाबाद पर अभियुक्त तरवेज उर्फ तबरेज पुत्र मो0 रफीक निवासी बूधाकला थाना कोतवाली खलीलाबाद जनपद संतकबीरनगर के विरुद्ध नाबालिग से दुष्कर्म करने के सम्बन्ध में अभियोग पंजीकृत किया गया। विवेचक क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद श्री प्रमोद कुमार द्वारा साक्ष्य संकलन के आधार पर आरोप पत्र माननीय न्यायालय प्रेषित किया गया था ।
*सजा का विवरण*- मु0अ0सं 109/2017 धारा 376 भादवि व धारा 7/8 पाक्सो एक्ट थाना कोतवाली खलीलाबाद जनपद संतकबीरनगर से सम्बन्धित अभियुक्त उपरोक्त को दोषसिद्ध करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा अभियुक्त को धारा 376 भादवि में 05 वर्ष का सश्रम कारावास व 5000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है । अर्थदण्ड अदा न करने पर 03 माह का साधाराण कारावास भुगतना होगा। धारा 7/8 पाक्सो एक्ट में 02 वर्ष 06 माह का सश्रम कारावास व 2000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है । अर्थदण्ड अदा न करने पर 01 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा ।
माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद बना महिलाओं की समस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण का प्रभावी मंच*
*मण्डलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देश पर महिलाओं की शिकायतों का प्राथमिकता से हो रहा निस्तारण*

*मां पाटेश्वरी शक्ति सम्मान से पुराने विवादों का हुआ निस्तारण*

*माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद मण्डल के सभी जनपदों में*

गोण्डा, 21 सितम्बर 2026। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए देवीपाटन मण्डल में “माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। मण्डलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस संवाद के माध्यम से महिलाओं को अपनी समस्याएं एवं शिकायतें सीधे अधिकारियों के समक्ष रखने का अवसर मिल रहा है।

*पुराने विवादों का निस्तारण*
*अवैध कब्जे से मिली मुक्ति*
प्राथनी कामनी पत्नी मेवालाल  निवासी सेजवल बलरामपुर विपक्षी द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया था जिसकी शिकायत की गई थी तत्काल उपजिलाधिकारी द्वारा जांच कर अवैध मुक्ति कागया गया *मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत दुर्घटना बीमा योजना से लाभान्वित*
अजुल कुमारी पत्नी स्वर्गीय महादेव जिनके पति की दुर्घटना में मौत हो गई हैजिसकी शिकायत मंडलायुक्त से  की गई थी जिसकी जांच कराकर उक्त योजना से लाभान्वित कीया गया


मण्डलायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि महिलाओं से संबंधित शिकायतों को पूरी संवेदनशीलता एवं गंभीरता से लेते हुए उनका समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक प्रकरण में शिकायतकर्ता की बात ध्यानपूर्वक सुनी जाए तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए शिकायत के निस्तारण की जानकारी संबंधित महिला को भी उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। किसी भी महिला की शिकायत लंबित न रहे और उसे अपनी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेकर शिकायतों का अनुश्रवण करें।

“माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा व्यवस्था तथा महिला कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। संवाद के दौरान महिलाओं द्वारा घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद, पेंशन, आवास, रोजगार, सुरक्षा एवं अन्य समस्याओं से संबंधित प्रकरण अधिकारियों के समक्ष रखे जा रहे हैं, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

मण्डलायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि महिलाओं की शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा शिथिलता न बरती जाए। संवेदनशील प्रकरणों में संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा आवश्यकता के अनुसार पीड़ित महिला को संबंधित विभाग की योजनाओं एवं सहायता सेवाओं से भी जोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि “माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” का उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि महिलाओं में विश्वास, सुरक्षा और सशक्तिकरण की भावना को मजबूत करना भी है। शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक पात्र महिला तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने तथा उनकीहर समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के लिए मण्डल स्तर पर निरंतर अनुश्रवण किया जा रहा है।

*माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद मण्डल के गोंडा,बहराइच,बलरामपुर श्रवस्ती में किया जा रहा है जिसका अनुश्रवण जिलाधिकारी द्वारा किया जा रहा जिससे महिलाओं की समस्याओ निदान में ऊर्जा मिल रही है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में स्वच्छता ही सेवा के तहत पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित
                    
                                     
छात्राओं को स्वच्छता के प्रति किया गया जागरूक,चार प्रकार के डस्टबिन के उपयोग की दी गई जानकारी

शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने किया श्रमदान           
                               
बलरामपुर। स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत सोमवार,21 सितंबर 2026 को नगर पालिका परिषद बलरामपुर द्वारा कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय-नगर में स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं द्वारा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया गया।
प्रतियोगिता के माध्यम से छात्राओं ने स्वच्छता,स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण तथा अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने का संदेश आकर्षक पोस्टरों के माध्यम से प्रस्तुत किया। छात्राओं को स्वच्छता के महत्व के साथ ही दैनिक जीवन में स्वच्छता संबंधी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को चार प्रकार के डस्टबिन के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्हें बताया गया कि अलग-अलग प्रकार के कचरे को निर्धारित डस्टबिन में डालने से कचरे का उचित पृथक्करण एवं निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकता है। विद्यार्थियों से अपने घर,विद्यालय तथा आसपास के सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के अध्यापकों एवं कर्मचारियों द्वारा श्रमदान कर स्वच्छता अभियान में सहभागिता की गई। श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का संदेश दिया गया।
नगर पालिका परिषद की ओर से कहा गया कि ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे जनजीवन की नियमित आदत बनाना है। विद्यालयों में आयोजित ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
मतदेय स्थलों के निर्धारण एवं ईवीएम/वीवीपैट की एफएलसी को लेकर राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक


*जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई महत्वपूर्ण बैठक*


*ईवीएम/वीवीपैट की फर्स्ट लेविल चेकिंग को पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से कराने पर जोर*


*निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के निर्देश*


*गोण्डा 21 सितम्बर,2026*।
कलेक्ट्रेट सभागार में गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदेय स्थलों के निर्धारण तथा ईवीएम/वीवीपैट की एफएलसी (फर्स्ट लेवल चेकिंग) कराए जाने के संबंध में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने की। इस अवसर पर निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों एवं विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
बैठक में जिलाधिकारी ने गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मतदेय स्थलों के निर्धारण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मतदेय स्थलों का निर्धारण निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारु, पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान ईवीएम/वीवीपैट की एफएलसी (First Level Checking) कराए जाने के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने एफएलसी की प्रक्रिया में निर्धारित प्रोटोकॉल एवं निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन से संबंधित सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक जानकारी एवं सहभागिता का अवसर उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि एफएलसी से संबंधित सभी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण कर ली जाएं तथा प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा, अभिलेखों के रख-रखाव और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए।


जिलाधिकारी ने कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन के लिए सभी संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी प्रत्येक कार्रवाई को निर्धारित नियमों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरा किया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। अधिकारियों ने निर्वाचन तैयारियों से संबंधित आवश्यक बिंदुओं पर जानकारी साझा की तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की ओर से भी आवश्यक सुझाव एवं विचार प्रस्तुत किए गए।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्वाचन संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने तथा निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में अपर जिलाधिकारी श्री प्रमोद झा, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी सहित सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पदाधिकारीगण एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।