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सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित को समझने का सटीक अवसर

*खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सितंबर विषुव , 23 सितंबर 2026 को सुबह 5:35 बजे IST पर घटित होगा। इस समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा को उत्तर से दक्षिण पार करेगा,* जिससे उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शरद और दक्षिणी गोलार्ध में खगोलीय वसंत शुरू होगा साथ ही इस दिन, दिन-रात लगभग बराबर रहेंगे और सूर्य ठीक पूर्व में उगेगा और ठीक पश्चिम में अस्त होगा। इस बारे में खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस पर संक्षिप्त प्रकाश डालते हुए 10 अति महत्वपूर्ण बिंदुओं में विषुव की सम्पूर्ण जानकारी को समाहित करते हुए समायोचित जानकारी दी है जो इस प्रकार हैं।

*1. विषुव क्या है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सितंबर विषुव पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर वार्षिक परिक्रमा में आने वाला महत्वपूर्ण खगोलीय पड़ाव है और विषुव उस क्षण को कहते हैं, जब सूर्य का आभासी मार्ग आकाशीय विषुवत् रेखा को पार करता है। आकाशीय विषुवत् रेखा पृथ्वी की भूमध्य रेखा का आकाश में बना हुआ काल्पनिक विस्तार है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय भाषा में विषुव वे दो बिंदु हैं, जहां क्रांतिवृत्त यानी सूर्य का आभासी वार्षिक मार्ग और आकाशीय विषुवत् रेखा एक-दूसरे को काटते हैं, लेकिन पृथ्वी से देखने पर सितंबर विषुव के समय सूर्य उत्तर से दक्षिण की ओर जाते हुए आकाशीय विषुवत् रेखा को पार करता दिखाई देता है, इसी कारण उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शरद ऋतु और दक्षिणी गोलार्ध में खगोलीय वसंत ऋतु शुरू होती है। *2. सितंबर विषुव 2026 की तिथि और समय क्या है।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 का सितंबर विषुव 23 सितंबर को होगा और इसका सटीक क्षण 00:05 UTC है, जो भारतीय समयानुसार 23 सितंबर को सुबह 5:35 बजे होगा और यह भी जानना आवश्यक है कि विषुव किसी पूरे दिन चलने वाली कोई अलग खगोलीय घटना नहीं, बल्कि पृथ्वी-सूर्य प्रणाली में घटित होने वाला एक निश्चित क्षण होता है अगर हम बात करें भारत की तो पाते हैं कि भारत सहित उत्तरी गोलार्ध के देशों में इसे शरद विषुव या शरद संपात कहा जाता है और दक्षिणी गोलार्ध में यही घटना वसंत विषुव कहलाती है। सितंबर विषुव सामान्यतः 22 या 23 सितंबर को आता है, हालांकि पृथ्वी की कक्षीय अवधि और कैलेंडर-वर्ष के अंतर के कारण कुछ वर्षों में यह 21 या 24 सितंबर को भी पड़ सकता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 में मार्च विषुव 20 मार्च को हुआ, जबकि सितंबर विषुव 23 सितंबर 2026 को होगा, और मार्च विषुव, उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय वसंत और सितंबर विषुव, खगोलीय शरद ऋतु की शुरुआत का संकेत देता है।

*3. क्या सच में दिन और रात बराबर होते हैं।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि “Equinox” शब्द लैटिन के aequus यानी समान और nox यानी रात से बना है। जिसका मतलब/अर्थ ही होता है, समान रात, विषुव के समय पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होती है, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि हर स्थान पर ठीक 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होती है, क्योंकि इसके दो मुख्य कारण हैं,पहला कारण होता है कि सूर्य,आकाश में एक बिंदु नहीं, बल्कि लगभग आधा डिग्री व्यास वाला गोलाकार डिस्क है,सूर्योदय का समय सूर्य के ऊपरी किनारे के क्षितिज को छूने पर और सूर्यास्त का समय उसके ऊपरी किनारे के पूरी तरह गायब होने पर निर्धारित किया जाता है। और दूसरा कारण होता है कि पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़ता है,इस वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य वास्तविक ज्यामितीय स्थिति में क्षितिज के नीचे होने पर भी कुछ समय दिखाई देता है, इससे सूर्योदय थोड़ा पहले और सूर्यास्त थोड़ा बाद में दिखाई देता है,परिणामस्वरूप विषुव के दिन अधिकांश स्थानों पर दिन की अवधि रात से कुछ मिनट अधिक रहती है। जिस दिन किसी विशेष स्थान पर दिन और रात की अवधि वास्तव में लगभग बराबर होती है, उसे इक्विलक्स या समप्रकाश दिवस कहा जाता है एवं इसकी तिथि अक्षांश और स्थानीय क्षितिज की परिस्थितियों के अनुसार अलग अलग एवं बदलती है और यह विषुव से कुछ दिन पहले या बाद में हो सकती है।

*4. सूर्य ठीक पूर्व में उगेगा और ठीक पश्चिम में अस्त होगा इसका विषुव में क्या मतलब है।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सितंबर विषुव की प्रमुख विशेषता यह है कि इस दिन सूर्य लगभग ठीक पूर्व दिशा में उगता और लगभग ठीक पश्चिम दिशा में अस्त होता है,क्योंकि विषुव के समय सूर्य, आकाशीय विषुवत् रेखा पर होता है और पृथ्वी के घूर्णन के कारण उसका उदय पूर्व और अस्त पश्चिम दिशा के निकट दिखाई देता है, हालांकि, “ठीक पूर्व” और “ठीक पश्चिम” का व्यावहारिक अवलोकन स्थानीय भू-दृश्य, क्षितिज, पहाड़, इमारतों और सूर्योदय-सूर्यास्त की परिभाषा से थोड़ा प्रभावित हो सकता है, लेकिन उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर स्थिति अलग होती है,वहां सूर्य, क्षितिज के चारों ओर घूमता दिखाई दे सकता है और सामान्य अर्थों में सूर्योदय तथा सूर्यास्त अन्य स्थानों जैसा स्पष्ट नहीं होता, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि विषुव के दिन विद्यार्थी और आम लोग किसी खुले स्थान पर सूर्योदय और सूर्यास्त की दिशा भी चिह्नित कर इस घटना का सरल अवलोकन कर सकते हैं।

*5. ऋतु परिवर्तन का वैज्ञानिक कारण क्या है।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी की घूर्णन धुरी उसके कक्षीय तल के लंबवत से लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है और पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते समय इसी झुकाव के साथ आगे भी बढ़ती है, इसीलिए वर्ष के अलग-अलग समय पर कभी उत्तरी गोलार्ध, सूर्य की ओर झुका होता है और कभी दक्षिणी गोलार्ध, लेकिन सितंबर विषुव के समय कोई भी गोलार्ध सूर्य की ओर या उससे दूर प्रमुख रूप से झुका नहीं होता, इसीलिए सूर्य का प्रकाश दोनों गोलार्धों में अपेक्षाकृत संतुलित ढंग से वितरित होता है,इसके बाद उत्तरी गोलार्ध सूर्य से धीरे-धीरे दूर की ओर झुकने लगता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की ओर झुकता जाता है,इसी कारण सितंबर विषुव के बाद उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं और दक्षिणी गोलार्ध में इसके विपरीत दिन लंबे और रातें छोटी होती जाती हैं,और ऋतुओं का मूल कारण पृथ्वी की सूर्य से दूरी नहीं, बल्कि पृथ्वी की धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा है।

*6. शरद ऋतु की खगोलीय और मौसम-विज्ञानी परिभाषा क्या हैं।?*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस पर संक्षिप्त खगोलीय प्रकाश डालते हुए बताया कि शरद ऋतु की शुरुआत को दो तरीकों से परिभाषित किया जाता है, पहला होता है खगोलीय दृष्टि,खगोलीय दृष्टि   से उत्तरी गोलार्ध में शरद ऋतु सितंबर विषुव से शुरू होती है और दिसंबर संक्रांति तक रहती है और साथ ही अगर हम बात करें मौसम-विज्ञान में, तो पाते हैं कि मौसम-विज्ञान में वर्ष को तीन-तीन महीनों की निश्चित ऋतुओं में बांटा जाता है,इस पद्धति के अनुसार शरद ऋतु 1 सितंबर से 30 नवंबर तक मानी जाती है, इसका उद्देश्य विभिन्न वर्षों के तापमान, वर्षा और जलवायु आंकड़ों की तुलना को सरल बनाना होता है,इसलिए 1 सितंबर से शुरू होने वाली शरद ऋतु मौसम-विज्ञान की परिभाषा है, जबकि 23 सितंबर से शुरू होने वाली शरद ऋतु खगोलीय परिभाषा पर आधारित है।

*7. चार प्रमुख मौसमी खगोलीय पड़ाव क्या होते हैं।?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एक वर्ष के मौसमी चक्र में चार प्रमुख खगोलीय पड़ाव होते हैं जोकि इस प्रकार परिभाषित किए जाते हैं, मार्च विषुव, जून संक्रांति, सितंबर विषुव और दिसंबर संक्रांति। विषुव के समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा पर होता है, जबकि संक्रांति के समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा के उत्तर या दक्षिण में अपनी सबसे दूर की आभासी स्थिति पर पहुंचता है,जून संक्रांति उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत का संकेत देती है,उस समय उत्तरी ध्रुव, सूर्य की ओर झुका होता है और सूर्य की सीधी किरणें कर्क रेखा के आसपास पड़ती हैं और दिसंबर संक्रांति उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शीत ऋतु की शुरुआत दर्शाती है, उस समय दक्षिणी ध्रुव, सूर्य की ओर झुका होता है और सूर्य की सीधी किरणें मकर रेखा के आसपास पड़ती हैं, खगोलविद अमर पाल सिंह ने स्पष्ट करते हुए बताया कि विषुवों के विपरीत, संक्रांतियां संबंधित गोलार्ध में वर्ष के सबसे लंबे या सबसे छोटे दिन से जुड़ी होती हैं।

*8. विषुव का अवलोकन कैसे करें?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि विषुव के लिए किसी विशेष दूरबीन आदि की कोई भी आवश्यकता नहीं है, आप सूर्योदय और सूर्यास्त की दिशा पर ध्यान देकर सूर्य के लगभग पूर्व से उदय और पश्चिम में अस्त होने को देख सकते हैं, साथ ही खुले स्थान पर किसी खंभे, डंडे या छड़ी की छाया को दिनभर चिह्नित करना भी उपयोगी गतिविधि में सम्मिलित हो सकता है, इससे सूर्य की आभासी गति, पृथ्वी का घूर्णन और छाया की दिशा में होने वाले परिवर्तन को बड़े ही आसानी से समझा जा सकता है, खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष जोर देते हुए बताया है कि तेज रोशनी के दौरान तो सूर्य को सीधे नंगी आंखों से कभी नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे आंखों की रेटिना को स्थायी क्षति हो सकती है, सूर्य का अवलोकन केवल अंतर्राष्ट्रीय या आई ० एस० ओ० प्रमाणित सौर फिल्टर, सुरक्षित सोलर व्यूअर या पिनहोल प्रोजेक्टर से करें, सामान्य धूप के चश्मे, एक्स-रे फिल्म, काली कांच की प्लेट या बिना प्रमाणित फिल्टर वाली दूरबीन सुरक्षित नहीं होती हैं,दूरबीन में सौर फिल्टर हमेशा उसके आगे वाले सिरे पर लगाया जाना चाहिए, आंख के पास नहीं।

*9. क्रांतिवृत्त, राशिचक्र और विषुव बिंदु क्या होते हैं।?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष खगोलीय जानकारियों को सम्मिलित करते हुए समायोचित रूप में बताया कि सूर्य तारों की पृष्ठभूमि के सामने वर्षभर जिस आभासी मार्ग पर चलता दिखाई देता है, उसे क्रांतिवृत्त या रविपथ कहा जाता है और पृथ्वी की धुरी के झुकाव के कारण क्रांतिवृत्त और आकाशीय विषुवत् रेखा के बीच लगभग 23.5 डिग्री का कोण बनता है, लेकिन चंद्रमा और अधिकांश ग्रह क्रांतिवृत्त की ठीक उसी रेखा पर नहीं चलते, बल्कि उसके आसपास के एक पट्टे में दिखाई देते हैं, इस पट्टे को राशिचक्र ( जोडियाक) कहा जाता है, लेकिन बौने ग्रह प्लूटो का कक्षीय झुकाव अधिक होने के कारण उसका मार्ग इस सामान्य पट्टी से अलग है।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि विषुव बिंदु हमेशा हमेशा के लिए स्थिर नहीं बने रहते हैं बल्कि पृथ्वी की धुरी की दीर्घकालिक डगमगाहट जिसे अयन चलन कहा जाता है या कुछ यूं कहें कि अयन-चलन या विषुवों का पूर्वगमन कहा जाता है,इसके कारण विषुव बिंदु, तारों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष धीरे-धीरे पश्चिम की ओर खिसकते हैं इस दीर्घकालिक अयन चलन के कारण पृथ्वी की धुरी को एक पूरा चक्र पूरा करने में लगभग 26,000 वर्ष लगते हैं, इसीलिए पृथ्वी की इस दीर्घकालिक अयन चलन गति के कारण, पृथ्वी से देखने पर ध्रुव तारे तक की स्थिति लगभग 26,000 बर्षों में अपने स्थान से बदल जाती है, इसीलिए यह भी समझना चाहिए कि यहाँ दीर्घकालिक ब्रह्मांडीय लय में कुछ भी स्थिर जैसा है ही नहीं।

*10. भारतीय खगोल-परंपरा और इसका सांस्कृतिक महत्व क्या है।?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि प्राचीन भारतीय खगोल-विज्ञान में सूर्य की गति, अयन, नक्षत्र और ऋतु-चक्र का गहरा अध्ययन किया गया है, प्राचीन कालीन भारतीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नक्षत्र शब्द का उपयोग तारों या तारक-समूहों के लिए भी होता है और चंद्रमा के आकाशीय मार्ग को 27 भागों में बांटने के लिए भी होता है, जैसा कि हम जानते हैं कि चंद्रमा, तारों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष लगभग 27.3 दिनों में एक चक्र पूरा करता है,इसलिए प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में चंद्र-पथ को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है, लेकिन साथ ही यह भी जानना आवश्यक है कि अयन-चलन के कारण विषुव बिंदुओं और नक्षत्रों का आपसी स्थान लंबे समय में बदलता रहता है, इसी वजह से अलग-अलग ऐतिहासिक काल में कृत्तिका, धनिष्ठा, श्रवण, चित्रा और रेवती जैसे नक्षत्रों को वर्ष या नक्षत्र-क्रम की शुरुआत से जोड़ा गया था और प्राचीन भारतीय ग्रंथों में अयन और ऋतु-परिवर्तन से जुड़े उल्लेख इस बात का संकेत भी देते हैं कि आकाशीय घटनाओं का समय, कृषि और पंचांग-निर्माण के लिए सावधानी से देखा जाता था और आधुनिक खगोलविद एवं इतिहासकार इन उल्लेखों की विशेष व्याख्या करते समय अयन-चलन और प्राचीन गणनाओं को भी ध्यान में रखते हैं, साथ ही विभिन्न सभ्यताओं ने विषुव को अपने-अपने सांस्कृतिक ढंग से समझा जैसे कि मिस्र में कई मंदिरों और स्थापत्य संरचनाओं का संबंध सौर दिशाओं और आकाशीय घटनाओं से रहा है एवं मेक्सिको के चिचेन इत्ज़ा स्थित कुकुलकान पिरामिड पर विषुव के आसपास बनने वाली प्रकाश-छाया की आकृति सांप जैसी दिखाई देती है, हालांकि इस प्रभाव की मूल मंशा को लेकर पुरातत्वविदों में पूरी सहमति नहीं भी हो सकती है।
लेकिन अगर हम बात करें सितंबर विषुव 2026 की तो पाते हैं कि इसका इसलिए विशेष महत्वपूर्ण है कि यह केवल दिन और रात के लगभग बराबर होने की घटना नहीं, बल्कि पृथ्वी की धुरी, सूर्य की आभासी गति, ऋतु-चक्र, नक्षत्र-पद्धति, अयन-चलन और मानव सभ्यता के आकाश-अवलोकन को जोड़ने वाला वैज्ञानिक पड़ाव है, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 23 सितंबर 2026 की सुबह होने वाला यह विषुव हमें निश्चित तौर पर यह खगोलीय याद दिलाएगा कि पृथ्वी का झुकाव और उसकी सूर्य के चारों ओर गति हमारे मौसम, कृषि, दिन के उजाले और जीवन की लय को लगातार प्रभावित करते हैं,इसीलिए समस्त खगोल प्रेमियों को इसका अवलोकन एवं सटीक प्रमाणित वैज्ञानिक एवं गणितीय और विशेष खगोलीय जानकारियों से ओत प्रोत होना ही चाहिए।
नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में अभियुक्त को 05 वर्ष का सश्रम कारावास व कुल 7,000- रुपये के अर्थदण्ड से किया गया दण्डित
रमेश दूबे

पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर *श्री संदीप कुमार मीना* के निर्देशन में चलाए जा रहे *“ऑपरेशन कन्विक्शन”* अभियान के दृष्टिगत संतकबीरनगर पुलिस द्वारा गुणवत्तापूर्ण विवेचना तथा अभियोजन द्वारा प्रभावी पैरवी के क्रम में आज दिनाँक 21.09.2026 को माननीय न्यायालय ए0एस0जे0/पाक्सो एक्ट, जनपद संतकबीरनगर द्वारा अभियुक्त को 05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं कुल 7,000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया ।
*घटना का विवरण-*  वादिनी मुकदमा भिखना देवी पत्नी स्व0 रामभेज निवासी बूधाखुर्द थाना कोतवाली खलीलाबाद जनपद संतकबीरनगर द्वारा दिनाँक 17.02.2017 को थाना कोतवाली खलीलाबाद पर अभियुक्त तरवेज उर्फ तबरेज पुत्र मो0 रफीक निवासी बूधाकला थाना कोतवाली खलीलाबाद जनपद संतकबीरनगर के विरुद्ध नाबालिग से दुष्कर्म करने के सम्बन्ध में अभियोग पंजीकृत किया गया। विवेचक क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद श्री प्रमोद कुमार द्वारा साक्ष्य संकलन के आधार पर आरोप पत्र माननीय न्यायालय प्रेषित किया गया था ।
*सजा का विवरण*- मु0अ0सं 109/2017 धारा 376 भादवि व धारा 7/8 पाक्सो एक्ट थाना कोतवाली खलीलाबाद जनपद संतकबीरनगर से सम्बन्धित अभियुक्त उपरोक्त को दोषसिद्ध करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा अभियुक्त को धारा 376 भादवि में 05 वर्ष का सश्रम कारावास व 5000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है । अर्थदण्ड अदा न करने पर 03 माह का साधाराण कारावास भुगतना होगा। धारा 7/8 पाक्सो एक्ट में 02 वर्ष 06 माह का सश्रम कारावास व 2000 रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है । अर्थदण्ड अदा न करने पर 01 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा ।
माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद बना महिलाओं की समस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण का प्रभावी मंच*
*मण्डलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देश पर महिलाओं की शिकायतों का प्राथमिकता से हो रहा निस्तारण*

*मां पाटेश्वरी शक्ति सम्मान से पुराने विवादों का हुआ निस्तारण*

*माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद मण्डल के सभी जनपदों में*

गोण्डा, 21 सितम्बर 2026। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए देवीपाटन मण्डल में “माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। मण्डलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस संवाद के माध्यम से महिलाओं को अपनी समस्याएं एवं शिकायतें सीधे अधिकारियों के समक्ष रखने का अवसर मिल रहा है।

*पुराने विवादों का निस्तारण*
*अवैध कब्जे से मिली मुक्ति*
प्राथनी कामनी पत्नी मेवालाल  निवासी सेजवल बलरामपुर विपक्षी द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया गया था जिसकी शिकायत की गई थी तत्काल उपजिलाधिकारी द्वारा जांच कर अवैध मुक्ति कागया गया *मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत दुर्घटना बीमा योजना से लाभान्वित*
अजुल कुमारी पत्नी स्वर्गीय महादेव जिनके पति की दुर्घटना में मौत हो गई हैजिसकी शिकायत मंडलायुक्त से  की गई थी जिसकी जांच कराकर उक्त योजना से लाभान्वित कीया गया


मण्डलायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि महिलाओं से संबंधित शिकायतों को पूरी संवेदनशीलता एवं गंभीरता से लेते हुए उनका समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक प्रकरण में शिकायतकर्ता की बात ध्यानपूर्वक सुनी जाए तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए शिकायत के निस्तारण की जानकारी संबंधित महिला को भी उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। किसी भी महिला की शिकायत लंबित न रहे और उसे अपनी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेकर शिकायतों का अनुश्रवण करें।

“माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा व्यवस्था तथा महिला कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। संवाद के दौरान महिलाओं द्वारा घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद, पेंशन, आवास, रोजगार, सुरक्षा एवं अन्य समस्याओं से संबंधित प्रकरण अधिकारियों के समक्ष रखे जा रहे हैं, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

मण्डलायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि महिलाओं की शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा शिथिलता न बरती जाए। संवेदनशील प्रकरणों में संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा आवश्यकता के अनुसार पीड़ित महिला को संबंधित विभाग की योजनाओं एवं सहायता सेवाओं से भी जोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि “माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” का उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि महिलाओं में विश्वास, सुरक्षा और सशक्तिकरण की भावना को मजबूत करना भी है। शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक पात्र महिला तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने तथा उनकीहर समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के लिए मण्डल स्तर पर निरंतर अनुश्रवण किया जा रहा है।

*माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद मण्डल के गोंडा,बहराइच,बलरामपुर श्रवस्ती में किया जा रहा है जिसका अनुश्रवण जिलाधिकारी द्वारा किया जा रहा जिससे महिलाओं की समस्याओ निदान में ऊर्जा मिल रही है।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में स्वच्छता ही सेवा के तहत पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित
                    
                                     
छात्राओं को स्वच्छता के प्रति किया गया जागरूक,चार प्रकार के डस्टबिन के उपयोग की दी गई जानकारी

शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने किया श्रमदान           
                               
बलरामपुर। स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत सोमवार,21 सितंबर 2026 को नगर पालिका परिषद बलरामपुर द्वारा कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय-नगर में स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं द्वारा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया गया।
प्रतियोगिता के माध्यम से छात्राओं ने स्वच्छता,स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण तथा अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने का संदेश आकर्षक पोस्टरों के माध्यम से प्रस्तुत किया। छात्राओं को स्वच्छता के महत्व के साथ ही दैनिक जीवन में स्वच्छता संबंधी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को चार प्रकार के डस्टबिन के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्हें बताया गया कि अलग-अलग प्रकार के कचरे को निर्धारित डस्टबिन में डालने से कचरे का उचित पृथक्करण एवं निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकता है। विद्यार्थियों से अपने घर,विद्यालय तथा आसपास के सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के अध्यापकों एवं कर्मचारियों द्वारा श्रमदान कर स्वच्छता अभियान में सहभागिता की गई। श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी का संदेश दिया गया।
नगर पालिका परिषद की ओर से कहा गया कि ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे जनजीवन की नियमित आदत बनाना है। विद्यालयों में आयोजित ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
मतदेय स्थलों के निर्धारण एवं ईवीएम/वीवीपैट की एफएलसी को लेकर राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक


*जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई महत्वपूर्ण बैठक*


*ईवीएम/वीवीपैट की फर्स्ट लेविल चेकिंग को पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से कराने पर जोर*


*निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के निर्देश*


*गोण्डा 21 सितम्बर,2026*।
कलेक्ट्रेट सभागार में गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदेय स्थलों के निर्धारण तथा ईवीएम/वीवीपैट की एफएलसी (फर्स्ट लेवल चेकिंग) कराए जाने के संबंध में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन ने की। इस अवसर पर निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों एवं विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
बैठक में जिलाधिकारी ने गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मतदेय स्थलों के निर्धारण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मतदेय स्थलों का निर्धारण निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया को सुचारु, पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान ईवीएम/वीवीपैट की एफएलसी (First Level Checking) कराए जाने के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने एफएलसी की प्रक्रिया में निर्धारित प्रोटोकॉल एवं निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन से संबंधित सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक जानकारी एवं सहभागिता का अवसर उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि एफएलसी से संबंधित सभी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण कर ली जाएं तथा प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा, अभिलेखों के रख-रखाव और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए।


जिलाधिकारी ने कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन के लिए सभी संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी प्रत्येक कार्रवाई को निर्धारित नियमों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरा किया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। अधिकारियों ने निर्वाचन तैयारियों से संबंधित आवश्यक बिंदुओं पर जानकारी साझा की तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की ओर से भी आवश्यक सुझाव एवं विचार प्रस्तुत किए गए।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्वाचन संबंधी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने तथा निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में अपर जिलाधिकारी श्री प्रमोद झा, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी सहित सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पदाधिकारीगण एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड का कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न*
*मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रयोग की दी गई जानकारी*

*वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन एवं गुणवत्तायुक्त उत्पादों के प्रयोग पर हुआ प्रशिक्षण*

*गोण्डा, 21 सितम्बर 2026*  - चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड द्वारा सीड टू हार्वेस्ट योजनांतर्गत विकासखंड तरबगंज के ग्राम पिपरी नारायनपुर में कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक प्रयोग, फसल प्रबंधन तथा विभिन्न कृषि उत्पादों के उपयोग के संबंध में जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान नारायणपुर विजयनाथ वर्मा ने किसानों से फसलों में संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के विपणन प्रबंधक नमन पांडे ने किसानों को मृदा परीक्षण की संस्तुति के आधार पर खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कंपनी के विभिन्न उत्पादों की उपयोगिता एवं उनके प्रयोग की जानकारी देते हुए बताया कि खेती एवं उत्पादों से संबंधित जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 18001805550 पर संपर्क किया जा सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक (शस्य विज्ञान) डॉ. राम लखन सिंह ने धान, खरीफ मक्का एवं गन्ने में समसामयिक कृषि कार्य, तोरिया, सरसों, रबी मक्का एवं शरदकालीन गन्ने की वैज्ञानिक खेती, दलहनी-तिलहनी फसलों में गंधक के प्रयोग तथा जैव उर्वरकों के महत्व की जानकारी दी।

उत्तम कृषि सेवक सौरभ मिश्रा ने खरपतवार, कीट एवं रोग प्रबंधन से संबंधित उत्पादों की जानकारी दी। प्रशिक्षण स्थल पर कंपनी के उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

कार्यक्रम में यादव खाद एवं बीज भंडार नारायणपुर कांटा सहित प्रगतिशील कृषक रामनायक यादव, संजय यादव, राजेश यादव, प्रेमनाथ वर्मा, श्रीकांत सिंह, विजय कुमार श्रीवास्तव, श्रीमती गीता देवी सहित अन्य किसानों ने प्रतिभाग किया। किसानों ने खेती से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के साथ कृषि उत्पादों की उपयोगिता को भी समझा। कार्यक्रम का समापन “उत्तम का योगदान, सम्पूर्ण समाधान” के संदेश के साथ हुआ।
सादगीपूर्ण जीवन शैली के हिमायती थे प्रो. डी पी सिंह - डॉ. गौर
मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. डीपी सिंह का अस्थि कलश संगम में विसर्जित

प्रयागराज, 21 सितंबर। शिक्षा जगत के पुरोधा, उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के पूर्व कुलपति प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप सिंह का अस्थि कलश सोमवार को प्रयागराज के पवित्र त्रिवेणी संगम  गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर पूरे विधि-विधान के साथ प्रवाहित कर दिया गया। जैसे ही उनके पौत्र ऋजु और यजु ने लखनऊ से लाए गए अस्थि कलश को संगम के पवित्र जल में विसर्जित किया, उपस्थित हर आंख नम हो गई और वातावरण प्रो. डीपी सिंह अमर रहें के भावुक उद्घोष से गूंज उठा।
इस अवसर पर संगम तट पर एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में प्रोफेसर सिंह के चित्र पर पुष्पार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा में उपस्थित गणमान्य जनों ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और सादगीपूर्ण जीवन को याद करते हुए कहा कि प्रो. सिंह केवल एक प्रशासक या शिक्षाविद नहीं थे, बल्कि वे मूल्यों के संवाहक  थे।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह गौर ने भावुक स्वर में कहा कि प्रोफेसर डीपी सिंह सादगीपूर्ण जीवन शैली के सच्चे हिमायती थे। कुलपति जैसे गरिमामय पद पर रहते हुए भी उन्होंने कभी आडंबर को अपने पास फटकने नहीं दिया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण था कि बड़ा पद व्यक्ति को बड़ा नहीं बनाता, बल्कि व्यक्ति के संस्कार पद को बड़ा बनाते हैं। उन्होंने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय को घर-घर तक पहुंचाने में प्रो. सिंह का योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रो. डी पी सिंह ने विश्वविद्यालय की नींव को मजबूत करने का कार्य किया। दूरस्थ शिक्षा को गरीब, वंचित और दूर-दराज के विद्यार्थियों तक पहुंचाने का जो स्वप्न उन्होंने देखा था, उसे आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
श्रद्धांजलि सभा का संयोजन वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. अनिल कुमार सिंह भदौरिया ने किया। उन्होंने प्रो. सिंह के साथ बिताए संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि वे अजातशत्रु थे। उन्होंने कहा कि प्रो. सिंह का जीवन अनुशासन, त्याग और राष्ट्रभक्ति का संगम था।
इस अवसर पर कुलसचिव कर्नल विनय कुमार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के पी सिंह, प्रोफेसर बी.एन. सिंह, प्रोफेसर राधेश्याम सिंह, समर बहादुर सिंह, डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र, डॉ. गौरव सिंह गौर, कैप्टन बलवंता यादव, रंजीत बनर्जी सहित अधिवक्तागण एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अंत में प्रोफेसर डीपी सिंह के पुत्र एवं डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रोफेसर संजय सिंह ने भावविह्वल होकर सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र
अज्ञात चोरों ने एक घर को बनाया निशाना नगदी सहित लाखों के जेवर किए पार
Sb न्यूज़ ब्यूरो रितेश मिश्रा
हरदोई* बघौली थाना क्षेत्र के ग्राम सभा अहिरी मजरा चौराडीह मैं अज्ञात चोरों ने एक घर को बनाया निशाना प्राप्त जानकारी के अनुसार आज बीती रात रामकिशोर पुत्र महादेव प्रसाद के घर में  रामकिशोर के पड़ोस में खाली पड़े मकान में चढ कर चोरों ने रामकिशोर की छत पर जाकर नीचे घर में उतरकर चोरों ने कमरे की कुंडी खोलकर घर में रखे सामान को साफ कर दिया चोरी गए सामान में मांग बेदी दो जोड़ी पायल छ नाक की कील  पांच चांदी के सिक्के ₹10000 कैश 12 साड़ी आज चोरों ने उठाकर उसी रास्ते से निकल गए घर में रामकिशोर व उनकी पत्नी बाहर बरामदे में लेटे हुए थे किसी को जानकारी नहीं हुई सुबह जब उठकर देखा की दरवाजा खुले हुए थे तो उन्होंने अंदर जाकर देखा की बक्से से सभी सामान चोरी हो गया था उसके बाद रामकिशोर ने थाने जाकर तहरीर देकर मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की वहीं कुछ दिन पहले गांव के पड़ोस में अठौआ में चोरों ने चार घरों को निशाना बनाया था 11 /6 2026 को अवधेश पुत्र मुंशीलाल के यहां चोरों ने निशाना बनाया था उसका आज तक कोई खुलासा नहीं हो पाया कुछ ही दिन बाद इसी गांव  में गुड्डू पुत्र रामलाल  कश्यप पुत्र मनीराम के वहां चोरी हुई थी उसके बाद कोई भी उसका खुलासा नहीं हो सकता है जब लालू कश्यप से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया की पुलिस यहां एक बार भी छानबीन करने नहीं आई जबकि हम लोगों को लाल पर्ची भी नहीं दिया गया जबकि हम लोगों ने एप्लीकेशन दिए था बघौली थाने में लेकिन हम लोगों की कोई सुनवाई नहीं हुई
ज्ञानदीप डिग्री कॉलेज टड़ियावां 23 सितम्बर को लगेगा रोजगार मेला
Sb ब्यूरो रितेश मिश्रा
हरदोई  जिला सेवायोजन अधिकारी ने बताया है कि उत्तर प्रदेश शासन की मंशानुसार बेरोजगार अभ्यर्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु मिशन रोजगार चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जिला सेवायोजन कार्यालय, हरदोई द्वारा दिनांक 23 सितम्बर 2026 को प्रातः 10 बजे से एक दिवसीय बृहद रोजगार मेले का आयोजन ज्ञानदीप डिग्री कॉलेज, टड़ियावां, विधानसभा क्षेत्र गोपामऊ, हरदोई में किया जाना प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि रोजगार मेले में विभिन्न क्षेत्रों की लगभग 20 कम्पनियां प्रतिभाग करेंगी, जो हाईस्कूल, इण्टरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक, आईटीआई, डिप्लोमा एवं कौशल विकास प्रशिक्षित योग्यताधारी 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष एवं महिला अभ्यर्थियों का चयन करेंगी।
कम्पनियों में आवेदन करने हेतु समस्त अभ्यर्थियों को विभागीय पोर्टल www.rojgaarsangam.up.gov.in पर ऑनलाइन पंजीयन कराकर आवेदन करना अनिवार्य है। इच्छुक अभ्यर्थी दिनांक 23 सितम्बर 2026 को प्रातः 10 बजे अपने समस्त शैक्षिक एवं अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्रों सहित अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग कर रोजगार मेले का लाभ उठायें।
जन सुनवाई में जिलाधिकारी ने सुनी 133 शिकायतें
Sb न्यूज़ ब्यूरो रितेश मिश्रा
हरदोई आज जिलाधिकारी अनुनय झा ने कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई करते हुए आमजन की समस्याओं एवं शिकायतों को सुना। जनसुनवाई के दौरान कुल 133 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनके त्वरित निस्तारण के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए। जनसुनवाई में विभिन्न क्षेत्रों से आए फरियादियों ने अपनी समस्याओं एवं शिकायतों से जिलाधिकारी को अवगत कराया। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जनसुनवाई के दौरान प्राप्त कुछ शिकायतों का जिलाधिकारी ने मौके पर ही समाधान कराया तथा शेष शिकायतों के संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इस अवसर पर नगर मजिस्टेट संजय कुमार, अतिरिक्त मजिस्टेट गुलाब  सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।