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न्यायधीशों, शिक्षाविदों और अर्थशास्त्रियों ने सर्वसम्मति से एक देश, एक चुनाव का किया समर्थन
मुंबई। ज्यूरिस्ट्स फॉर जस्टिस फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘एक देश, एक चुनाव’ विषय पर राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति, वरिष्ठ अधिवक्ता, शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित लगभग 50 प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया। देशभर में एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा के लाभ तथा इसके लिए आवश्यक संवैधानिक, प्रशासनिक, न्यायिक और आर्थिक ढांचे के विभिन्न पहलुओं पर इस अवसर पर विस्तृत चर्चा की गई। सम्मेलन में ‘एक देश, एक चुनाव’ के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता और उपस्थित वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद ज्यूरिस्ट्स फॉर जस्टिस फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री उमेश कुमार सिरोही ने स्वागत भाषण दिया और सम्मेलन के उद्देश्य, विषय तथा प्रमुख लक्ष्यों को स्पष्ट किया। इसके पश्चात सभी गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया।सम्मेलन के मुख्य विषय को दिशा देने वाला मुख्य वक्तव्य प्रो. प्रितेश आर्टे ने दिया। इसके बाद मुख्य राउंड टेबल चर्चा की शुरुआत हुई। इसमें आठ गणमान्य वक्ताओं ने अपने-अपने व्यावसायिक एवं विशेषज्ञता के दृष्टिकोण से ‘एक देश, एक चुनाव’ के समर्थन में अपने विचार रखे।
पूर्व न्यायमूर्ति बी. पी. देशपांडे ने एक साथ चुनाव के संवैधानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।पूर्व जिला न्यायाधीश श्रीमती मीराताई खडक्कर ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल सिंह, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने इसके क्रियान्वयन के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए एक साथ चुनाव का समर्थन किया।अविनाश धर्माधिकारी, पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) ने बार-बार होने वाले चुनावों के कारण पुलिस व्यवस्था पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव की समीक्षा की और स्पष्ट किया कि ‘एक देश, एक चुनाव’ से इस दबाव को कम करने में सहायता मिल सकती है। रवि पानी, चार्टर्ड अकाउंटेंट ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के आर्थिक और वित्तीय लाभों को रेखांकित किया। प्रो. अधिवक्ता दीपक परमार, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विषय के विशेषज्ञ, ने ‘एक देश, एक चुनाव’ के व्यापक लाभों को स्पष्ट करते हुए इसके IPR क्षेत्र से संबंध को रेखांकित किया। नागेश वी. न्हवकर, पूर्व प्रधान जिला न्यायाधीश तथा महाराष्ट्र राज्य विशेष सार्वजनिक सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के वर्तमान सदस्य, ‘एक देश, एक चुनाव’ को अपनाने के संवैधानिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। श्रीमती चंदा नथानी, पूर्व जिला न्यायाधीश ने भी इस प्रस्ताव के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, महाराष्ट्र सरकार के कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग के कैबिनेट मंत्री तथा मुंबई के मलबार हिल विधानसभा क्षेत्र के विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने से प्रशासन की कार्यक्षमता और देश के विकास को बड़े पैमाने पर गति मिलेगी तथा देश की राजनीतिक व्यवस्था में अधिक प्रभावशीलता आएगी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे प्राचीन लोकतंत्र वाला देश है। ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव से सरकार की कार्यक्षमता बढ़ेगी और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूती मिलेगी। इसलिए यह देशहित में अत्यंत लाभकारी प्रस्ताव है। इसके बाद उपस्थित प्रतिनिधियों को अपने विचार रखने का अवसर दिया गया। चर्चा के दौरान कुछ मतभिन्न विचार भी सामने आए, हालांकि राउंड टेबल में ‘एक देश, एक चुनाव’ के पक्ष में व्यापक सहमति बनी। इसके पश्चात प्रस्ताव का मसुदा प्रस्तुत किया गया। आवश्यक स्पष्टीकरणों के बाद ‘एक देश, एक चुनाव’ के समर्थन में यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से पारित किया गया। सम्मेलन का समापन पूर्व न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा के समापन भाषण से हुआ। उत्तराखंड राज्य में न्यायाधीश के रूप में अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर उन्होंने ‘एक देश, एक चुनाव’ के पक्ष में अपनी भूमिका रखी। साथ ही इस विषय के न्यायिक, संवैधानिक, प्रशासनिक और आर्थिक पहलुओं पर व्यापक चर्चा की।इसके बाद ज्यूरिस्ट्स फॉर जस्टिस फाउंडेशन के अध्यक्ष उमेश कुमार सिरोही ने एक बार फिर उपस्थित लोगों को संबोधित किया। चर्चा के दौरान सामने आए विभिन्न मतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव देश के लिए वायरल बुखार जैसे हैं, जबकि ‘एक देश, एक चुनाव’ इस राजनीतिक बीमारी के लिए प्रभावी टीकाकरण जैसा है। यह भारत सरकार की एक अत्यंत अच्छी पहल है। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्रा ने मुख्य अतिथि, सम्माननीय अतिथियों, वक्ताओं, सहभागी प्रतिनिधियों तथा आयोजन एवं विषय समिति के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुंबई महानगरपालिका में तबादलों के लिए राजनीतिक सिफारिशों का इस्तेमाल
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका के अधिकारी एवं कर्मचारियों के तबादलों के लिए राजनीतिक नेताओं द्वारा सिफारिशें किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। उपलब्ध सूची में कुल 225 अधिकारी एवं कर्मचारियों के नाम हैं और उनके नामों के सामने मंत्री, विधायक, सांसद, उपमहापौर तथा नगरसेवकों के नाम दर्ज हैं। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली को नगर अभियंता कार्यालय द्वारा यह विस्तृत सूची उपलब्ध कराई गई है। सूचना के अधिकार के माध्यम से उपलब्ध 225 अधिकारी-कर्मचारियों के नामों के सामने दर्ज राजनीतिक सिफारिशों के प्रारंभिक विश्लेषण में कुछ राजनीतिक व्यक्तियों के नाम बार-बार सामने आए हैं। इसमें एकनाथ शिंदे के नाम का सर्वाधिक 10 बार उल्लेख है। इसके बाद रामदास आठवले के नाम का 9 बार, जबकि गिरीश महाजन और कालिदास कोळंबकर के नाम का 7-7 बार उल्लेख है।
इसी प्रकार मंगेश कुडाळकर, अण्णा बनसोडे और तुकाराम काते के नाम का 6-6 बार उल्लेख किया गया है। मुरजी पटेल और दिलीप लांडे के नाम का 5-5 बार उल्लेख है। वहीं नरहरी झिरवळ, सुमीत वानखेडे, राहुल शेवाळे, प्रकाश सुर्वे, इंद्रनील नाईक, संतोष बांगर, राम कदम, किशन कथोरे और बच्चू कडू के नाम का 4-4 बार उल्लेख किया गया है। इसके अलावा चंद्रशेखर बावनकुळे, हसन मुश्रीफ, भरतशेठ गोगावले, उदय सामंत, परिणय फुके, रविंद्र वायकर, प्रसाद लाड, सुनील प्रभू, महेश सावंत और प्रवीण दरेकर के नाम का 3-3 बार उल्लेख है। वहीं प्रतापराव जाधव, पंकजा मुंडे, मंगलप्रभात लोढा, रावसाहेब दानवे, संजय घाडी, राहुल नार्वेकर, जयकुमार गोरे और सना मलिक के नाम का 2-2 बार उल्लेख किया गया है। जबकि रविंद्र चव्हाण, चंद्रकांत पाटील और संजय बनसोडे के नाम का 1-1 बार उल्लेख सामने आया है। इस सूची की पृष्ठभूमि में सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि महानगरपालिका में तबादले प्रशासनिक आवश्यकता, वरिष्ठता और पारदर्शी मानकों के आधार पर होना अपेक्षित है। लेकिन 225 अधिकारी, कर्मचारियों के नामों के सामने मंत्री, विधायक, सांसद और जनप्रतिनिधियों के नामों वाली सूची सामने आई है। अनिल गलगली ने कहा कि इस संबंध में महानगरपालिका आयुक्त द्वारा मौजूदा नियमों के अनुसार राजनीतिक दबाव डालने वाले अधिकारी वर्ग के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई किया जाना अपेक्षित है। इस सूची में Assistant Engineer (AE), Sub Engineer (SE), Executive Engineer (EE) और Junior Engineer (JE) पदों पर कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों का समावेश है। सूची में दर्ज नाम एवं राजनीतिक सिफारिशें इस प्रकार हैं– रविंद्र घाटगे (संतोष बांगर); सुनील शेठे (प्रकाश सुर्वे, परिणय फुके); दीपक नागासोगे (मुरजी पटेल); गजेंद्र काकड (महेंद्र दळवी); रविंद्र दरेकर (अण्णा बनसोडे, प्रकाश सुर्वे); अंजली धोरे (किशोर आप्पा पाटील); सचिन मेंढे (वर्षा गायकवाड); प्रशांत जगताप (इंद्रनील नाईक, हसन मुश्रीफ); निलेश परब (मनिषा चौधरी, गिरीश महाजन); हेमंत पंत (प्रवीण दरेकर); पद्माकर चव्हाण (मकरंद पाटील); विशाल पाटील (अण्णा बनसोडे); प्रकाश शिंगारे (मेघना बोर्डीकर); संदीप घोगरे (डॉ. पंकज भोयर); नारायण मेंघारे (संतोष बांगर); सागर गायकवाड (संजय दिना पाटील); राजेंद्र राठोड (शिवेंद्रराजे भोसले); हरीश चव्हाण (अण्णा बनसोडे); चेतन पाटील (राम कदम); व्यंकटेश आवळे (बच्चू कडू); शुभम चव्हाण (मुरजी पटेल); नेहा नितीन सांखे (उदय सामंत); प्रसाद धुमाळे (रविंद्र वायकर); सुनील यमगर (मुरजी पटेल); प्रसाद पटवर्धन (धनंजय गाडगीळ); हर्षल पिंपळे (किशन कथोरे); पूर्णिमा भोईर (कालिदास कोळंबकर); संतोष भडवेकर (प्रवीण दरेकर); विद्यसागर भामावले (प्रसाद लाड); नितीन चौधरी (राहुल शेवाळे); जयंत बोरशे (प्रकाश सोलंके); समीर सणप (संजय घाडी); सचिन हणमधर (मुरजी पटेल); सिद्धिविनायक खडपकर (दिलीप लांडे); योगेश पारटे (तुकाराम काते); रुपेश भांडगे (संजय केळकर); रमेश सोनवणे (राम कदम); किशोर क्षेत्री (बाबासाहेब पाटील); मयूर पाटील (भरतशेठ गोगावले); रेणुका पाटील (इंद्रनील नाईक); विजय श्यामोथे (दिलीप लांडे); दिनेश नांचे (रामदास आठवले); चेतन पाटील (संजय दिना पाटील); अनुप ठाकूर (सुमित वानखेडे); महेश नांदेकऱ (राधाकृष्ण विखे पाटील); संदीप देसाई (संजय शिरसाट); अभय सांख्ये (चंद्रशेखर बावनकुळे); सचिन दुधभाते (भरतशेठ गोगावले); रविंद्र गवाडे (कालिदास कोळंबकर); उस्मान सादिक (सना मलिक); दीपक चौगुले (दिलीप लांडे); सिद्धार्थ अग्रवाल (हारून शेख, रंजना पाटील); सचिन दाऊर (सुरेश कोपारकर); संदीप साळुंखे (कालिदास कोळंबकर); केशव ओवे (रामदास आठवले); राहुल निगोले (कैप्टन तमिल सेल्वन); विकास सोनुने (उदय सामंत); विकी साळुंखे (संजय राठोड); साईनाथ गलवाड (डॉ. भागवत कराड, गिरीश महाजन, अबू आजमी); जमीर पठाण (सुनील प्रभू); रोशन झेमसे (एकनाथ शिंदे); अक्षय दुधाण (एकनाथ शिंदे); प्रशांत पाथारे (एकनाथ शिंदे); अंगराज गणपत (एकनाथ शिंदे); आनंद जाधव (एकनाथ शिंदे); अमित गहाणे (एकनाथ शिंदे); प्रविण तिरकेकर (एकनाथ शिंदे); विवेक पाटील (माधुरीताई मिसाळ); रवी गुप्ता (चंद्रशेखर बावनकुळे); योगेश कोकणी (प्रकाश सुर्वे); प्रविण मुळूक (प्रकाश सुर्वे); माधव बाचेवाड (अशोक चव्हाण); शीतल काळे (सना मलिक); ओंकार माने (डॉ. भागवत कराड); शालका खाडे (संजय बनसोडे); भूषण गवळी (रामदास आठवले); शाहबाज पिरजादे (हसन मुश्रीफ); संदेश वानखेडे (कालिदास कोळंबकर); संतोष घवारे (एकनाथ शिंदे); शरिता ठाकूर (किशन कथोरे); सागर थिटे (रविंद्र वायकर); स्वप्निल देवरुखकर (रामदास आठवले); कार्तिक गांधी (राम पांडगळे, इंद्रनील नाईक, मेघना बोर्डीकर); सचिन सोनवणे (मनोज जामसुतकर, मनिषा चौधरी); रामदास कवडेकर (प्रसाद लाड, रामराव वडकुते); वलसंगीकर अब्दुल मतीन (शिवेंद्रराजे भोसले, महेंद्र थोरवे); निलेश नरकर (गुलाबराव पाटील); गिरीश सिंह (महेंद्र दळवी); जयंत तामखेडे (हारून शेख); संतोष पुजारे (मोनिका राजळे); राहुल निकम (संजय घाडी); अंगराज पुरी (आकाश राजपुरोहित); राजू डामसे (रविंद्र चव्हाण); गोविंद देवकाते (राम कदम); मिलिंद शाव्ही (एकनाथ शिंदे, अतुल थोपटे, प्रविण तायडे); निलेश काळंबे (चंद्रशेखर बावनकुळे); अकबर खान (छगन भुजबळ); सतीश करांडे (राहुल नार्वेकर); सुदीप शिंदे (अण्णा बनसोडे); निखिल नालवडे (शंभूराज देसाई); जयेश राऊत (बच्चू कडू); राजू डामसे (रामदास आठवले); गोपाल माळी (परिणय फुके); संदीप सावंत (गोपीचंद्र पडळकर); अमित पाटील (चंद्रकांत पाटील); किरण कांबळे (सुरेश भोळे); प्रदीप चंदनशिवे (जयकुमार गोरे); अमृता पाटील (जयंत पाटील); धीरज करांडे (मंगलप्रभात लोढा); सुधाकर चव्हाण (गिरीश महाजन); सुशांत पाटील (हसन मुश्रीफ); आनंद साळवे (इंद्रनील नाईक); देवेंद्र उघडे (सुमित वानखेडे); निखिल शेटे (अंबादास दानवे); अमोल चव्हाण (राम शिंदे); अमित जाधव (संजय राठोड); स्वप्निल देवरुखकर (अमय घोले); विकास पुरळीक (सुनील राणे); शरदचंद्र खाडे (किशन कथोरे); मनीष टाके (तुकाराम काते); संदीप खरात (दिलीप लांडे); रविकांत देवकर (रामदास आठवले); प्रदीप पवार (मुरजी पटेल); शिवरंजन शिगेटे (दीपक केसरकर); वैभव निंबाळकर (गणेश नाईक); सचिन भुरके (मनिषा चौधरी); पल्लवी ताटेकर (मकरंद पाटील); विकास धोंड (श्रीकांत शिंदे); स्वप्निल गुंड (राहुल कुल); अमोल पाटील (दत्तात्रय भरणे); खिरीश लिमजे (सुनील प्रभू); विजय साळे (अमोल खाटाळ); अभिलाषा सोनवणे (महेश सावंत); कल्पना कोतवाल (अतुल सावे); सचिन कुलकर्णी (नरहरी झिरवळ); मनोज दुबे (नरहरी झिरवळ); निरवकुमार जशूर (हारून खान); संतोष भिलारे (नरहरी झिरवळ); राजेश तावडे (मिहीर कोटेचा); ऋतुराज गोहिलोट (तुकाराम काते); सागर चारुडे (मंगेश कुडाळकर); सुनील चाळवाड (मंगेश कुडाळकर); अरविंद सोनार (डॉ. हेमंत सावरा, राजेंद्र गावित); पवन कुलकर्णी (दिलीप लांडे); रोहित कथोरे (किशन कथोरे); निशा दळवी (मंगेश कुडाळकर); राहुल जाधव (कालिदास कोळंबकर); महेश पाटील (मंगलप्रभात लोढा); श्रीरंग धर्माधिकारी (मनिषा चौधरी); प्रमोद ब्रामणकर (शहाजी पाटील); सुनील पाटकर (प्रवीण दरेकर); सचिन पाटील (रावसाहेब दानवे); सागर पाटील (रामदास आठवले); प्रदीप काजरोलकर (मकरंद पाटील); क्षितिजा यावली (राधाकृष्ण विखे पाटील); रुपेश कोठारे (हिरामण खोसकर); युवराज पांढरे (कालिदास कोळंबकर); रोहित शेलकांडे (परिणय फुके, गिरीश महाजन, शिवराज पाटील, पृथ्वीराज देशमुख); रिमिका भुतकर (रामदास आठवले); भरत उरिशकर (संतोष बांगर); जगदीश तुपे (संजय शिरसाट); अरविंद कदम (राधाकृष्ण विखे पाटील); धनश्री हुसेकर (नरहरी झिरवळ); दीपक मुंढे (गिरीश महाजन); ज्ञानदीप महाजन (अजय चौधरी); राहुल निगोले (प्रतापराव जाधव); अभिजीत रशाळ (प्रतापराव जाधव); अमोल भेळेकर (मोनिका राजळे); प्रथमेश जाधव (चंद्रकांत हंडोरे); सुधांशु दवारे (संतोष बांगर); शोभांगी गोसावी (तुकाराम काते); अर्जुन सुळाणे (आकाश फुंडकर); अभिषेक पाटील (प्रसाद लाड); प्रियंका खरात (विक्रम बाबनराव पाचपुते, सुमित वानखेडे); राजेंद्र पुजारी (शिवाजी पाटील); चंद्रभागा माने (मुरजी पटेल); राकेश कुमार झा (एकनाथ शिंदे); कृष्णकुमार पुरोहित (सुमित वानखेडे); भरत मोमले (राहुल शेवाळे); राहुल लांडगे (राहुल नार्वेकर); रोशन जिभकाटे (राहुल शेवाळे); योगेश चौधरी (अमीन पटेल); राजेंद्र बर्वे (सुनील राऊत); वैभव गोडसे (संजय केळकर); कुणाल भंडारी (मनिषा चौधरी); प्रसाद धुमाळे (रविंद्र वायकर, पंकज भोयर, रवी राणा); राणा जयस्वाल (बच्चू कडू); दीपक जाधव (अण्णा बनसोडे); दीपक कोरगावकर (उदय सामंत); अशेष भोईर (उदयनराजे भोसले); कल्पना दळवी (बच्चू कडू); मिथुन भिसे (जयकुमार गोरे); विश्वनाथ माने (भरतशेठ गोगावले); राकेश शिंदे (अण्णा बनसोडे); नितीन बाविस्कर (राम कदम); हेमंत पंत (अतुल भातखळकर); दिगंबर मोरे (सुरेश धस); सुभाष कांबळे (तुकाराम काते); सचिन सांगळे (पंकजा मुंडे); मोहसीन खान (मंगेश कुडाळकर); सुनील साळुंखे (पंकजा मुंडे); सावेंद्र जाधव (मंगेश कुडाळकर); अनिल विजापूरे (रामदास आठवले); महेंद्र जागीर (महेश सावंत); सागर मोरे (गिरीश महाजन); सागर अडसुळ (राहुल शेवाळे); सुहास माळी (महेश सावंत); शुभम होळकुंडे (अभिमन्यू पवार); मयुरी पवार (पराग शाह); किशोर आहिरे (मंगेश कुडाळकर); संजोग ठाकूर (समीर मेघे); अमोल मेहर (किशोर आप्पा पाटील); युवराज बेळेकर (प्रकाश आबिटकर); गणेश सातपुते (मनिषा चौधरी); महेश चौगले (सुनील प्रभू); सोनल आव्हाड (अजय चौधरी); शैलेश जाधव (अतुल भातखळकर); आदिनाथ वानवे (रावसाहेब दानवे); प्रविण खरात (तुकाराम काते); अशोक पवार (माणिकराव कोकाटे); किशोर धागर (गिरीश महाजन)।
अजीत पवार को नमन कर सुनेत्रा पवार के साथ लिया गया विकास का संकल्प

मुंबई। रक्षाबंधन के अवसर पर महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार साहेब की स्मृति को नमन करते हुए राकांपा (अजित पवार गुट) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, राज्य के अन्न नागरी पुरवठा मंत्री  छगन भुजबल, राकांपा महिला आघाड़ी की महाराष्ट्र वैशालीताई नागवडे, महिला आघाड़ी की मुंबई अध्यक्ष आरतीताई सालवी, मुंबई सचिव ममता शर्मा समेत बड़ी तादाद में पदाधिकारियों की उपस्थिति में उनके स्मृति स्थल पर उन्हें राखी बांधकर एक भावपूर्ण संकल्प लिया गया। राकांपा महिला आघाड़ी की मुंबई प्रदेश सचिव ममता शर्मा ने इस भावुक पल पर कहा कि दादा की याद और उनके विकासवादी विचारों को हमेशा अपने साथ रखते हुए, सुनेत्रा अजित पवार वहिनी के साथ हम महिला एवं युवा सशक्तीकरण के लिए पूरी ताकत और समर्पण के साथ कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की हर महिला आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बने, हर युवा कौशलवान, सक्षम और रोजगारक्षम बने और समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास का अवसर मिले, इसी उद्देश्य से निरंतर कार्य करने का हमारा संकल्प है। ममता शर्मा ने कहा कि महिला सशक्त होंगी तभी परिवार सशक्त होगा। ममता शर्मा ने कहा कि दादा के विकासवादी विचारों को आगे बढ़ाना और महाराष्ट्र को प्रगति के पथ पर और मजबूत बनाना ही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
आदर्श शिक्षिका संगीतारानी सिंह का सेवासंपूर्ति सम्मान समारोह सम्पन्न
   मुंबई । शिष्यवृत्ति परीक्षा की कुशल मार्गदर्शक एवं आदर्श शिक्षिका संगीतारानी राकेश सिंह के मनपा. शिक्षण विभाग में लगभग तीस वर्षों की सेवा के उपरांत सेवानिवृत्त होने के उपलक्ष में दलवी प्लॉट व आकुर्ली विद्यालय परिवार द्वारा सेवा संपूर्ति सम्मान समारोह आयोजित किया गया।  इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व प्रधानाध्यापिका नीलम सिंह ने उनके त्याग, सेवा एवं छात्रों के प्रति समर्पण की  सराहना की तथा प्रशासकीय अधिकारी अशफाक अहमद शाह ने संगीता सिंह के सामाजिक सेवा भावना और मदद की प्रवृत्ति की चर्चा की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में पूर्व प्रधानाध्यापक अवधेश कुमार सिंह रमाशंकर यादव, अशोक कुमार सिंह, हरबंशकौर गिल, बजरंगलाल यादव, बिहारीराम विश्वकर्मा, सुनैनी सोनार तथा प्रधानाध्यापक शोभा महाले, सुमन शर्मा, शहनाज सैय्यद, इंचार्ज शिक्षक अनिल गुप्ता, अरुणा रच्चा एवं मुमताजुद्दीन ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए उनके व्यक्तित्व व कृतित्व की अनेक यादें साझा की। प्रमुख वक्ता के रूप में  पूर्व शिक्षक जितेंद्र तिवारी, राम आसरे यादव एवं इंद्रभान सिंह ने अपने शुभेच्छा वक्तव्य में उनके सेवाकाल के अनेक यादगार पलों के बारे में बात की। कार्यक्रम के शुभारंभ में संगीत शिक्षिका मृणाल लिमये के सुंदर निर्देशन में छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत किया।कार्यक्रम का संचालन पूर्व प्रधानाध्यापक ईश्वरदेव पाल ने किया। कार्यक्रम का सुंदर आयोजन हिम्मतलाल सेठ, धनसिंह जाधव प्रमिला पाल, वैशाली मराठे आदि शिक्षकों ने किया।
परिवहन समिति सभापति राजकुमार मिश्रा के कार्यालय उद्घाटन समारोह में पहुंची जानी-मानी हस्तियां
भायंदर। भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने परिवहन समिति के सभापति एडवोकेट राजकुमार मिश्रा के कार्यालय का उद्घाटन करते हुए कहा कि एडवोकेट राजकुमार मिश्रा सुशिक्षित और जनता के बीच अत्यंत लोकप्रिय व्यक्ति हैं। परिवहन समिति के सभापति के रूप में जनता से जुड़ी समस्याओं के निराकरण की दिशा में सराहनीय काम करेंगे। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राहुल एजुकेशन के चेयरमैन लल्लन तिवारी ने कहा कि राजकुमार मिश्रा ऊर्जावान तथा अच्छी सोच रखने वाले व्यक्ति हैं, जो राजनीति के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी पूरी तरह से सक्रिय रहते हैं।  कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित भवन निर्माता उमराव सिंह ओस्तवाल, जेडी शिक्षा ग्राम प्रतापगढ़ के चेयरमैन दिनेश त्रिपाठी, आदित्य कॉलेज केh संचालक हरिश्चंद्र मिश्रा ने एड राजकुमार मिश्रा को बधाई और शुभकामनाएं दी।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहने वाले लोगों में महापौर डिंपल विनोद मेहता, आयुक्त राधाविनोद शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप जैन, उप महापौर ध्रुव किशोर पाटिल, गटनेता तथा स्थाई समिति सभापति हसमुख गहलोत, सभागृह नेता एडवोकेट रवि व्यास उपस्थित रहे। कार्यालय उद्घाटन समारोह में परिवहन समिति सदस्य अंसारी राशीद अनवर, आदेश छोटेलाल अग्रवाल, काजल सक्सेना, भारत बोहरा, कुलदीप सिंह, प्रकाश जैन, आशीष लोढ़ा, प्रशांत केहकर, सुरेशचंद्र दुबे,ऑस्टिन जॉन मेनेजेस तथा सद्दाम कुरैशी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विगत 25वर्षों से कार्य कर रहे सैकड़ों संविदा प्राध्यापकों को अतिथि शिक्षक बनने पर किया गया मजबूर

मुंबई। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के देश भर में स्थित 13 परिसरों में कार्यरत संविदा प्राध्यापकों की सेवा-स्थिति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा वर्षों से संविदा पद पर कार्यरत बड़ी संख्या में प्राध्यापकों को अतिथि प्राध्यापक के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य किए जाने के बाद शिक्षकों में असंतोष एवं भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना बढ़ने की बात सामने आ रही है। शिक्षकों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस निर्णय के लिए उड़ीसा उच्च न्यायालय में चल रहे प्रकरण तथा केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के कथित मौखिक निर्देशों का हवाला दिया है, जबकि शिक्षकों का दावा है कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस संबंध में कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया है। शिक्षकों का कहना है कि जिन प्राध्यापकों ने विश्वविद्यालय में 10, 15, 20 तथा 25 वर्षों से अधिक समय तक सेवाएं दी हैं, उनकी सेवा-स्थिति को अचानक निम्न स्तर पर ले जाना उनके दीर्घकालीन अनुभव एवं योगदान के साथ न्यायसंगत नहीं है। अतिथि एवं संविदा शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के अथक परिश्रम कर विश्वविद्यालय को बेहतर ग्रेड प्राप्त कराने में महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं अकादमिक योगदान दिया था। अतिथि शिक्षकों के लिए लगभग ₹50,000 तथा संविदा शिक्षकों के लिए ₹57,700 मूल वेतन के साथ HRA आदि की व्यवस्था की गई और कुछ परिसरों को ‘हार्ड स्टेशन’ घोषित कर अतिरिक्त सुविधाएं भी प्रदान की गईं। शिक्षकों का कहना है कि इन निर्णयों से यह उम्मीद बनी थी कि विश्वविद्यालय प्रशासन संविदा एवं अतिथि शिक्षकों की दीर्घकालीन समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगा। शिक्षक सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से कार्यरत कुछ अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर सामान्य साक्षात्कार के माध्यम से संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया। वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय तथा आदर्श महाविद्यालयों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी कुछ शिक्षकों ने गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में आंतरिक रूप से वर्षों से कार्यरत योग्य अभ्यर्थियों को अपेक्षित अवसर नहीं मिला और बड़ी संख्या में बाहरी अभ्यर्थियों का चयन किया गया। शिक्षकों के अनुसार, उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से बार-बार आग्रह किया कि वर्षों से कार्यरत योग्य संविदा एवं अतिथि शिक्षकों को स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया में उचित अवसर प्रदान किया जाए, लेकिन इस संबंध में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई। शिक्षकों के अनुसार, जून 2024 में डेक्कन कॉलेज, पुणे में स्थायी शिक्षकों की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में लिखित परीक्षा को साक्षात्कार के लिए आवश्यक चरण बनाया गया था। शिक्षकों का दावा है कि कई आंतरिक अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में सफल नहीं हो सके तथा परीक्षा के प्रश्नपत्र एवं उत्तर-कुंजी सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर भी प्रश्न उठे, जिसके कारण चयन प्रक्रिया एवं आंतरिक अभ्यर्थियों को मिले अवसर को लेकर असंतोष बढ़ा। नवंबर 2025 में आदर्श महाविद्यालयों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बहु-चरणीय लिखित परीक्षा का विज्ञापन जारी किए जाने के बाद संविदा एवं अतिथि शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। शिक्षकों के अनुसार, उन्होंने सेवा-सुरक्षा, स्थायीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सहित विभिन्न माँगें प्रशासन के समक्ष रखीं, लेकिन संवाद के प्रयासों के बावजूद उनकी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद कुछ संविदा शिक्षकों ने न्यायिक एवं अन्य संवैधानिक संस्थाओं का रुख किया। शिक्षकों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद स्थापित नहीं होने के बाद कुछ संविदा एवं अतिथि शिक्षकों ने अपनी समस्याओं से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्रालय, सांसदों, मंत्रियों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया तथा कुछ मामलों में न्यायालय की शरण भी ली।  शिक्षकों का दावा है कि लगातार किए गए पत्राचार, संवैधानिक संस्थाओं से संपर्क तथा न्यायालयीन प्रक्रियाओं के बीच आंतरिक अभ्यर्थियों को अपेक्षाकृत अधिक अवसर मिला। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं चयन के मानदंडों को लेकर अभी भी शिक्षकों की ओर से प्रश्न उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों ने चयन समितियों में विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं और कुछ नामों के संबंध में पूर्व में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जाँच की आवश्यकता जताई है; इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है तथा संबंधित व्यक्तियों अथवा विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी सार्वजनिक किया जाना आवश्यक होगा। वर्तमान विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष विश्वविद्यालय के 13 परिसरों में वर्षों से कार्यरत संविदा प्राध्यापकों को अतिथि प्राध्यापक के रूप में कार्य करने के लिए बाध्य किए जाने से जुड़ा है। शिक्षकों का कहना है कि जिन प्राध्यापकों की नियुक्ति विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संविदा शिक्षक के रूप में हुई थी तथा जिन्होंने वर्षों तक विश्वविद्यालय में निरंतर अध्यापन किया, उन्हें अचानक अतिथि शिक्षक की श्रेणी में लाना सेवा में अवनति के समान है। शिक्षकों के अनुसार, इनमें ऐसे प्राध्यापक भी शामिल हैं जिन्होंने पहले अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य किया और बाद में अपने अनुभव एवं निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर संविदा शिक्षक का पद प्राप्त किया था, लेकिन अब उन्हें पुनः अतिथि शिक्षक बनाए जाने से उनके पद, पारिश्रमिक, सेवा-सुरक्षा एवं भविष्य को लेकर गंभीर प्रश्न उत्पन्न हो गए हैं। शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि जुलाई 2026 में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के लिए ₹100 के शपथ-पत्र की शर्त रखी गई तथा शपथ-पत्र की भाषा एवं उसके संभावित प्रभाव को लेकर भी उनके बीच चिंता है। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से संविदा पद पर कार्यरत शिक्षक को अतिथि शिक्षक के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को संबंधित शिक्षकों के साथ व्यापक संवाद करना चाहिए था। इसी बीच कुछ शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन में कथित क्षेत्रीय असंतुलन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि पिछले कई वर्षों से विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर एक विशेष क्षेत्र के अधिकारियों की निरंतरता दिखाई देती है और नियुक्तियों, कार्यक्रमों तथा प्रशासनिक निर्णयों में भी क्षेत्रीय प्रभाव की आशंका व्यक्त की जा रही है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तथ्यात्मक जांच की मांग की गई है। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के वर्तमान शीर्ष प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं और कुलपति एवं कुलसचिव की नियुक्ति के लिए निर्धारित पात्रता, चयन समिति की कार्यवाही, अनुभव संबंधी मानदंड तथा चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने की माँग की है, ताकि विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। पूरे प्रकरण को लेकर संविदा शिक्षकों के एक वर्ग ने विश्वविद्यालय में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रियाओं, स्थानांतरण, सेवा-शर्तों तथा अन्य निर्णयों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि यदि सभी संबंधित अभिलेखों, चयन समितियों की कार्यवाही, भर्ती के मानदंड, विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति, सेवा-परिवर्तन तथा प्रशासनिक निर्णयों की स्वतंत्र जाँच कराई जाती है, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। संविदा शिक्षकों की प्रमुख माँगों में उनकी पूर्व सेवा-स्थिति बहाल करना, वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव एवं सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान की नीति बनाना, समान कार्य के लिए समान वेतन, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, सेवा-सुरक्षा तथा सभी परिसरों में एक समान नियम लागू करना शामिल है। संविदा शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान विवाद को केवल किसी एक आर्थिक राशि अथवा भत्ते के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वास्तविक प्रश्न उन शिक्षकों के भविष्य का है जिन्होंने विश्वविद्यालय में वर्षों तक अध्यापन एवं अकादमिक सेवाएं प्रदान की हैं। शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, प्रशासनिक पारदर्शिता, शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है। शिक्षकों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय में उठ रहे सभी गंभीर प्रश्नों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाए। संविदा शिक्षकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लक्ष्य बनाना नहीं, बल्कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा, प्रशासनिक पारदर्शिता, शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा तथा विद्यार्थियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन इन गंभीर सवालों पर क्या रुख अपनाता है और वर्षों से विश्वविद्यालय की सेवा कर रहे संविदा प्राध्यापकों की सेवा-संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
लोकतंत्र के सशक्तिकरण में समाचार पत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका : ज्ञान प्रकाश सिंह
मुंबई। समाचार पत्र हमारे दैनिक जीवन और लोकतंत्र के सशक्तिकरण में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दैनिक हिंदी समाचार पत्र हमारा महानगर के 21 में स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे प्रख्यात समाजसेवी और वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञान प्रकाश सिंह ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि हमारा महानगर सशक्त निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से समाज और राष्ट्र को मजबूत करने का काम कर रहा है। महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने उनका स्वागत सम्मान किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य राजहंस सिंह, कार्यकारी संपादक राघवेंद्र नाथ द्विवेदी, महाप्रबंधक सुधीर दलवी, संवाददाता जितेंद्र मिश्रा, पत्रकार दिनेश सिंह समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान,बोरीवली में 200 सरयूपारीण ब्राह्मणों ने किया श्रावणी उपाक्रम
मुंबई। अंतरराष्ट्रीय सरयूपारीण ब्राह्मण परिषद के तत्वाधान में 28अगस्त को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान, बोरीवली मे  नदी के तट पर 200 सरयूपारीण ब्राह्मणों ने धर्माचार्य मुरलीधर मिश्र, वेदनिधि शास्त्री,डा वाणी प्रमुख विलाश शुक्ला,पं नरेंद्र मिश्रा एवं ध्रुवकुमार पांडेय के मार्गदर्शन मे श्रावणी उपाकर्म महापर्व मे  सोल्लास सहभाग किया। कार्यक्रम विधि-विधान से संपन्न हुआ। प्रमुख सरयूसेवक डा आर के चौबे एवं डा राधेश्याम तिवारी के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में सुभाष उपाध्याय, इंदुप्रकाश तिवारी, कृपाशंकर पांडे, संतोष दुबे, अवधेंद्र शुक्ला,के के तिवारी,रविकांत शुक्ला, सुरेश मिश्रा, हेमंत पांडेय,अशोक तिवारी. विद्याशंकर चतुर्वेदी.चंद्रशेखर शुक्ल,नागेंद्र मिश्रा.मुकेश मिश्रा विजय श्याम शुक्ला विजयनाथ तिवारी, रवि मिश्रा.संजय शर्मा, पत्रकार नित्यानंद तिवारी आदि का समावेश रहा। मुंबई महानगरपालिका के प्रभाग अध्यक्ष प्रकाश दरेकर ने उपस्थित होकर समारोह की गरिमा बढाई और भविष्य मे और अधिक सहयोग देने का आश्वासन दिया।परिषद ने प्रकाश दरेकर, प्रवीण दरेकर, विधायक प्रकाश दादा सुर्वे एवं राज सुर्वे का आभार प्रकट किया।
मुंबई नगरी के अनोखे रंग, साहित्यकारों के संग
मुंबई । अखिल भारतीय साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था सृजन के रंग नवी मुंबई इकाई के तत्वावधान में 26 अगस्त 2026 को आनलाइन कविगोष्ठी का आयोजन किया गया। उक्त गोष्ठी में पूर्व निर्धारित विषय ' मुंबई नगरी के अनोखे रंग ' पर परिचर्चा एवं कविगोष्ठी रखी गई जिसमें उपस्थित सभी साहित्यकारों ने मुंबई महानगर के विविध आयामों ऐतिहासिक, भौतिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप का दर्शन शब्दों के रंगों में रंग कर परोसा, जिसका आनंद सभी ने लिया तथा रचना की सराहना भी की। उक्त गोष्ठी की अध्यक्षता कनकलता तिवारी ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ गज़लकार, गीतकार डॉ प्रमोद कुमार कुश तन्हा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप उपस्थित थे। आमंत्रित साहित्यकारों में रोमा झा, लक्ष्मी यादव ओजस्विनी, कविता ए झा,गीता विश्वकर्मा नेह,संजय जैन, सीमा त्रिवेदी साज़, जागृति सिन्हा, प्रवीण पाण्डेय आवारा, अमनदीप गुजराल, मीनाक्षी शर्मा पंकज, सीमा श्रीवास्तव,संजय सरस,ऊषा सक्सेना, नम्रता मिश्र साहसी, डॉ मधु स्वामी एवं दयाराम दर्द फिरोजबादी उपस्थित थे। मंच का खूबसूरत संचालन लक्ष्मी यादव ओजस्विनी ने किया।अंत में अध्यक्ष श्रीमती कनकलता तिवारी ने सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
समाजसेवी हरिशंकर शर्मा के जन्मदिन पर शुभचिंतकों ने दी बधाई
मुंबई । महानगर के गोरेगांव शहर में रहने वाले उत्कृष्ट समाजसेवी एवं साप्ताहिक समाचार पत्र कदम कदम पर के उप संपादक हरिशंकर शर्मा उर्फ मुन्ना के कुशल व्यवहार एवं सराहनीय समाजसेवा को देखते हुए शुभचिंतकों ने 25 अगस्त 2026 को केक काटकर जन्मदिन मनाया और शुभकामनाएं प्रेषित किया। शुभचिंतकों में मुन्ना के मित्रों एवं संबंधियों सहित सैकड़ों लोग एकत्रित होकर केक काटा और बधाइयां दीं। महानगर से कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप, हरिकेश शर्मा नंदवंशी, प्रदीप कुमार शर्मा नंदवंशी, संतोष निरंकार शर्मा, एडवोकेट अनिल शर्मा, मनोज जगदीश शर्मा,बाबुल्ले शर्मा, श्रीमती राधा शर्मा, सुनीता शर्मा, कलेक्टर शर्मा, संतोष कुमार शर्मा, चंद्रभूषण शर्मा, कन्हैयालाल शर्मा,कदम कदम पर के संपादक छोटेलाल शर्मा, राममिलन शर्मा,डॉ प्रहलाद शर्मा, राकेश कुमार शर्मा,कदम कदम पर के प्रबंध संपादक अनिल शर्मा,अनिल कुमार शर्मा,उमानाथ महाराज, केतन,महेश मोरे,एडवोकेट संदीप दुबे,संजय,हरि नायर, राहुल,सर्वेश,एडवोकेट रोहन, अनिल,बालाजी तेजस राय, विशाल शर्मा,सरोज शर्मा, अभय शर्मा,अजय शर्मा,कान्हू आदि ने शुभकामनाएं एवं बधाइयां दी।