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₹2000 का नोट अब भी वैध, RBI ने बताया कैसे बदल सकते हैं नोट
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि ₹2000 का नोट अब भी पूरी तरह वैध (लीगल टेंडर) है। यदि किसी व्यक्ति के पास ₹2000 के नोट हैं, तो उन्हें बदलने या बैंक खाते में जमा कराने की सुविधा अभी भी उपलब्ध है।
RBI के अनुसार, लोग देशभर में स्थित RBI के 19 इश्यू ऑफिस में जाकर अपने ₹2000 के नोट बदल सकते हैं। वहीं, जो लोग किसी RBI कार्यालय तक नहीं पहुंच सकते, वे इंडिया पोस्ट के माध्यम से अपने ₹2000 के नोट किसी भी RBI इश्यू ऑफिस में भेज सकते हैं। सत्यापन के बाद नोटों की राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी।
RBI ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि ₹2000 का नोट अभी भी वैध मुद्रा है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे बदला जा सकता है।
ईरान-यूएस जंग में झुलसा चाबहार पोर्ट, जानें अमेरिकी हमले से क्यों बढ़ी भारत की चिंता?

#iranustensionchabaharportstrikeindia_connection

अमेरिका और ईरान के बीच हो रही जंग एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर खत्म करने का ऐलान कर चुके हैं। ट्रंप के ईरान से सीजफायर खत्म होने का ऐलान करने के बाद लड़ाई तेज हो गई है। अमेरिका ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन ईरान में हवाई हमले किए हैं। गुरुवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर भी बमबारी की है। जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, ईरान के इस पोर्ट का बड़ा हिस्सा भारत के सहयोग से विकसित हुआ है।

90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले

अमेरिका ने बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात ईरान के दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार पर नए हमले किए। होर्मुज और आसपास के इलाकों में 90 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने चाबहार को भी निशाना बनाया है। हमलों में बंदरगाह, एक समुद्री यातायात नियंत्रण टावर और पास की सैन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।

चाबहार में विस्फोटों के बाद बिजली आपूर्ति बाधित

ईरान की सरकारी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक चाबहार में विस्फोटों की आवाज सुनी गई। शहर के कुछ हिस्सों में बिजली भी गुल हो गई। स्थानीय लोगों ने कई धमाके सुने। आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जगहों पर भी नुकसान की खबर है।

हमले को लेकर अमेरिकी सेना ने क्या कहा?

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, समुद्र में बने बुनियादी ढांचे और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। वाशिंगटन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इन जगहों की मदद से ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाता है। खतरों को भांपते हुए अमेरिकी सेना की मध्य पूर्व कमान- सेंटकॉम ने लगभग 90 ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। एक्स पर जारी बयान में सेंटकॉम ने लिखा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड बलों ने ईरान के खिलाफ अतिरिक्त हमले शुरू किए हैं। इसका मकसद होर्मुज में खतरों को कम करना और जहाजों को नुकसान पहुंचाने की ईरान की ताकत पर नकेल कसना है।

भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय

यह हमले चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत की मदद के विकसित इस रणनीतिक बंदरगाह पर पहली बार हमले हुए हैं। चाबहार में हमले से भारत के इस पोर्ट पर अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की संभावना को जबरदस्त झटका लगा है। चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर है। यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के पश्चिम में सिर्फ 170 किलोमीटर दूर है। ऐसे में चाबहार भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया का रास्ता देता है। ईरान-अमेरिका में शांति समझौते से भारत की चाबहार पोर्ट पर फिर से कामकाज की उम्मीद बंधी थी लेकिन नए हमलों ने चीजों को पटरी से उतार दिया है। हालांकि फिलहाल भारत चाबहार में सीधेतौर पर सक्रिय नहीं है।

गर्भावस्था में नौकरी से हटाना अनुचित: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संविदा शिक्षिका की बहाली के दिए निर्देश


-  मेडिकल कारणों से अवकाश लेने पर सेवा समाप्त करने पर कोर्ट सख्त; 4 सप्ताह में नियुक्ति पत्र और 2 सप्ताह में जॉइनिंग कराने का आदेश

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय कारणों से अवकाश लेने वाली एक संविदा टीजीटी (साइंस) शिक्षिका को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि शिक्षिका को चार सप्ताह के भीतर नया नियुक्ति पत्र जारी किया जाए तथा उसके बाद दो सप्ताह के भीतर उन्हें पुनः कार्यभार ग्रहण कराया जाए।

यह अंतरिम आदेश न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है।

-  मेडिकल मजबूरी में लिया था अवकाश
याचिका के अनुसार शिक्षिका की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) के माध्यम से महेंद्रगढ़ जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के पद पर हुई थी। नौकरी के दौरान गर्भावस्था संबंधी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण डॉक्टरों ने उन्हें नौ महीने के पूर्ण बेड रेस्ट की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने 9 अक्टूबर 2025 को मेडिकल अवकाश के लिए आवेदन किया, लेकिन अवकाश पर निर्णय लेने के बजाय 16 मार्च 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। बाद में 15 अप्रैल 2026 को उन्होंने बच्चे को जन्म दिया।

-  अन्य शिक्षकों का कार्यकाल बढ़ा, सिर्फ याचिकाकर्ता हटाई गई
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास चतरथ ने अदालत को बताया कि उसी पद पर कार्यरत अन्य संविदा टीजीटी शिक्षकों की सेवा अवधि बढ़ा दी गई, जबकि केवल मेडिकल अवकाश लेने वाली शिक्षिका की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। शिक्षिका ने अदालत को बताया कि वह उस अवधि का वेतन नहीं चाहतीं, जब वह ड्यूटी पर नहीं थीं। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और दोबारा सेवा देने के लिए तैयार हैं।

-  मातृत्व लाभ और वित्तीय अधिकारों की भी मांग
याचिका में शिक्षिका ने सेवा बहाली के साथ संविदा अवधि बढ़ाने, मातृत्व अवकाश का वेतन, मेडिकल बोनस, अन्य वित्तीय लाभ, ब्याज तथा मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि नियमित कर्मचारियों की तरह उन्हें भी मातृत्व संबंधी अधिकार मिलने चाहिए और उनके मेडिकल रिकॉर्ड यह साबित करते हैं कि उन्होंने वास्तविक चिकित्सकीय कारणों से अवकाश मांगा था।

-  हाईकोर्ट की प्रारंभिक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि शिक्षिका ने मजबूरी में चिकित्सकीय कारणों से अवकाश लिया था और बाद में उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। अदालत ने यह भी माना कि जब अन्य संविदा शिक्षकों की सेवाएं बढ़ाई गईं, तब केवल मेडिकल अवकाश लेने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना प्रथम दृष्टया भेदभावपूर्ण प्रतीत होता है। कोर्ट के अंतरिम आदेश ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि गर्भावस्था और मातृत्व जैसे संवेदनशील मामलों में कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है, चाहे नियुक्ति संविदा आधार पर ही क्यों न हो।
गर्भावस्था में नौकरी से हटाना अनुचित: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संविदा शिक्षिका की बहाली के दिए निर्देश


-  मेडिकल कारणों से अवकाश लेने पर सेवा समाप्त करने पर कोर्ट सख्त; 4 सप्ताह में नियुक्ति पत्र और 2 सप्ताह में जॉइनिंग कराने का आदेश

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय कारणों से अवकाश लेने वाली एक संविदा टीजीटी (साइंस) शिक्षिका को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि शिक्षिका को चार सप्ताह के भीतर नया नियुक्ति पत्र जारी किया जाए तथा उसके बाद दो सप्ताह के भीतर उन्हें पुनः कार्यभार ग्रहण कराया जाए।

यह अंतरिम आदेश न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है।

-  मेडिकल मजबूरी में लिया था अवकाश
याचिका के अनुसार शिक्षिका की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) के माध्यम से महेंद्रगढ़ जिले के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के पद पर हुई थी। नौकरी के दौरान गर्भावस्था संबंधी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण डॉक्टरों ने उन्हें नौ महीने के पूर्ण बेड रेस्ट की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने 9 अक्टूबर 2025 को मेडिकल अवकाश के लिए आवेदन किया, लेकिन अवकाश पर निर्णय लेने के बजाय 16 मार्च 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। बाद में 15 अप्रैल 2026 को उन्होंने बच्चे को जन्म दिया।

-  अन्य शिक्षकों का कार्यकाल बढ़ा, सिर्फ याचिकाकर्ता हटाई गई
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास चतरथ ने अदालत को बताया कि उसी पद पर कार्यरत अन्य संविदा टीजीटी शिक्षकों की सेवा अवधि बढ़ा दी गई, जबकि केवल मेडिकल अवकाश लेने वाली शिक्षिका की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। शिक्षिका ने अदालत को बताया कि वह उस अवधि का वेतन नहीं चाहतीं, जब वह ड्यूटी पर नहीं थीं। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और दोबारा सेवा देने के लिए तैयार हैं।

-  मातृत्व लाभ और वित्तीय अधिकारों की भी मांग
याचिका में शिक्षिका ने सेवा बहाली के साथ संविदा अवधि बढ़ाने, मातृत्व अवकाश का वेतन, मेडिकल बोनस, अन्य वित्तीय लाभ, ब्याज तथा मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि नियमित कर्मचारियों की तरह उन्हें भी मातृत्व संबंधी अधिकार मिलने चाहिए और उनके मेडिकल रिकॉर्ड यह साबित करते हैं कि उन्होंने वास्तविक चिकित्सकीय कारणों से अवकाश मांगा था।

-  हाईकोर्ट की प्रारंभिक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि शिक्षिका ने मजबूरी में चिकित्सकीय कारणों से अवकाश लिया था और बाद में उन्होंने बच्चे को जन्म दिया। अदालत ने यह भी माना कि जब अन्य संविदा शिक्षकों की सेवाएं बढ़ाई गईं, तब केवल मेडिकल अवकाश लेने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना प्रथम दृष्टया भेदभावपूर्ण प्रतीत होता है। कोर्ट के अंतरिम आदेश ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि गर्भावस्था और मातृत्व जैसे संवेदनशील मामलों में कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है, चाहे नियुक्ति संविदा आधार पर ही क्यों न हो।
‘भारत की औद्योगिक प्रगति के केन्द्र में झारखंड’, 'नेशनल स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन' में बोले सीएम हेमंत सोरेन

दिल्ली के ताज पैलेस होटल में झारखंड सरकार की ओर से आयोजित दो दिवसीय 'नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026' का भव्य आगाज हो गया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। हेमंत सोरेन की अगुवाई में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राज्य में निवेश, पर्यटन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देना है।

भारत की औद्योगिक प्रगति में झारखंड केन्द्रीय भूमिका में-हेमंत सोरेन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा, भारत की औद्योगिक प्रगति की कहानी में झारखंड की भूमिका केंद्रीय है। प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि, मेहनतकश मानव शक्ति और विकास की अपार संभावनाएँ राज्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती हैं।

हमारी पहचान सिर्फ 'माइन्स से नहीं ‘माइंड’ से भी होनी चाहिए-हेमंत सोरेन

सीएम सोरेन ने आगे कहा कि अब हमारी पहचान सिर्फ 'माइन्स से नहीं ‘माइंड’ से भी होनी चाहिए, सिर्फ ‘रिसोर्स’ से नहीं 'रिसर्च' से भी होना चाहिए, सिर्फ ‘एक्सट्रैक्शन’ नहीं 'इनोवेशन' से भी होना चाहिए और सिर्फ ‘ग्रोथ’ नहीं 'इंक्लूसिव ग्रोथ' से भी होना चाहिए।

हम Copy-Paste नहीं, अपनी मेधा से नई राह बनाएंगे-हेमंत सोरेन

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दस्तक देने के बाद अब झारखण्ड तकनीकी क्रांति और 'टेक्नोलॉजी गवर्नेंस' के अपने मौलिक मॉडल के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। हम Copy-Paste नहीं, अपनी मेधा से नई राह बनाएंगे।

देश-विदेश के निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ हो रहे शामिल

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नीति निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं।

मिडिल ईस्ट में तेज होगी जंग, ईरान के साथ अमेरिका का सीज फायर खत्म, ट्रंप का ऐलान

#donaldtrumpannouncesendtoceasefirewith_iran

मिडिल ईस्ट में जंग तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सीजफायर खत्म हो चुका है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी घोषणा की। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि ईरान के साथ युद्धविराम खत्म हो गया है। ट्रंप ने ईरान पर समझौते से मुकरने का आरोप लगाया और कहा कि अब तेहरान के साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है।

ईरान के साथ बातचीत बस समय की बर्बादी- ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप इस समय तुर्की की राजधानी अंकारा में हैं जहां वह नाटो शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं। यहां जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के साथ युद्धविराम अब खत्म हो गया है, तो उन्होंने कहा, "मेरे हिसाब से तो यह खत्म हो गया है।" उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत (नेगोशिएशन) करना बस समय की बर्बादी है।

ईरान के लोग घटिया और बीमार सोच वाले-ट्रंप

हालांकि, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के प्रतिनिधि ईरान के साथ बातचीत जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें शक है कि इसका कोई फायदा होगा भी या नहीं। उन्होंने कहा, "वे बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।" ट्रंप ने कहा, "वे घटिया और बीमार सोच वाले लोग हैं, उन्हें बीमार सोच वाले लोग ही चलाते हैं, और वे बेरहम और हिंसक हैं। अगर उनके पास परमाणु हथियार होता, तो वे उसका इस्तेमाल जरूर करते।"

खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़े

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर तेजी से बढ़ गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि ये हमले उसके होर्मोज़गान प्रांत और महशहर बंदरगाह पर हुई अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किए गए। ईरानी दावों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। बहरीन और कुवैत में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र को तत्काल सक्रिय कर दिया गया।

पीएम मोदी इंडोनेशिया के सबसे बड़े प्रम्बानन मंदिर पहुंचे, बोले- हमेशा शिव से जुड़ने का सौभाग्य मिला

#indonesiasprambanantemplewherepmmodivisit_today

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को मुस्लिम देश इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर के दौरे पर पहुंचे। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी उनके साथ गए। पीएम मोदी ने भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित लगभग 1,000 साल पुराने हिंदू मंदिर में पूजा-अर्चना की है। इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ मंदिर के संरक्षण-जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया।

पीएम मोदी बोले-'भव्य प्रम्बानन मंदिर

पीएम मोदी ने एक्स पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वे हेलीकॉप्टर की खिड़की से वे प्रम्बानन मंदिर का नजारा देख रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा-'भव्य प्रम्बानन मंदिर!' वहीं एक अन्य वीडियो में पीएम मोदी मंदिर में अन्य लोगों के साथ प्रार्थना करते नजर आ रहे हैं।

मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापना में भारत करेगा सहयोग

पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने संयुक्त रूप से प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापना परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के लिए भारत और इंडोनेशिया के बीच आशय पत्र यानि लेटर ऑफ इंटेंट का आदान-प्रदान पहले ही हो चुका है।

मुझे हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का मौका मिला-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने जॉइंट प्रेस कॉन्फेंस के दौरान मंगलवार को कहा था कि योग्याकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो के संग मिलकर प्रम्बानन मंदिर की संरक्षण परियोजना की शुरुआत करने का मौका मिला। मुझे किसी न किसी रूप में हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का मौका मिला है। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाद प्रम्बानन मंदिर के विकास का मौका मिलना मेरा सौभाग्य है।

मंदिरों की दीवारों पर रामायण महाकाव्य उकेरा गया

इंडोनेशिया में 10वीं सदी में बना भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। इसके केंद्र में तीन प्रमुख मंदिरों की दीवारों पर रामायण महाकाव्य को उकेरा गया है। ये मंदिर हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवों, ब्रह्मा, विष्णु और महेश को समर्पित हैं। इसके अलावा तीन अन्य मंदिर इन देवताओं के वाहनों को समर्पित हैं।

आज से दिल्ली में नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026, सीएम हेमंत सोरेन करेंगे अध्यक्षता, क्या है कार्यक्रम का उद्देश्य

#nationalstakeholdersconsultation2026innewdelhi

देश की नई दिल्ली में बुधवार यानी 8 जुलाई से झारखंड सरकार की ओर से दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। 8 और 9 जुलाई को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने के लिए खास तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, उद्योग, पर्यटन, आइटी समेत कई विभागों के सचिव नई दिल्ली पहुंच गए हैं।

करीब 100 अग्रणी टेक कंपनियां होंगी शामिल

नई दिल्ली के ताज पैलेस होटल में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य राज्य में निवेश आकर्षित करना, आईटी, एआई और पर्यटन क्षेत्रों को बढ़ावा देना है। जिसमें देश-विदेश की लगभग 100 अग्रणी टेक कंपनियां, उद्योगपति, निवेशक, नीति-निर्माता और अर्थशास्त्री सामिल हो रहे हैं।

राष्ट्रीय स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का उद्देश्य

कार्यक्रम के दौरान झारखण्ड की आईटी, आईटीईएस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़ी भावी विकास रणनीति देश-विदेश के उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं के समक्ष रखी जाएगी। राष्ट्रीय स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का उद्देश्य झारखण्ड को भारत के एआई परिदृश्य में एक ऐसे राज्य के रूप में स्थापित करना है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल तकनीकी नवाचार के रूप में नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता एवं नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट से भारत आ रहे जहाज पर ड्रोन हमला, क्रू मेंबर सुरक्षित

#indiaboundshipattackedwithdroneinhormuzstrait

कतर से भारत आ रहे एक जहाज पर होर्मुज स्ट्रेट में कथित तौर पर हमला हुआ है। एलएनजी लेकर आ रहे टैंकर जहाज-अल रकियात पर होर्मुज में ड्रोन से हमला किया गया। हमले का शिकार हुए जहाज पर 29 क्रू सदस्य हैं, जिनमें चार भारतीय नागरिक हैं। हमले में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हमला

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने बताया कि कतर से भारत आ रहे एक जहाज पर कथित तौर पर ड्रोन से हमला हुआ। हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई, जिससे बहुत ज्यादा धुआं निकलने लगा। यह जहाज कतर के रास लाफान से भारत के गुजरात के दहज जा रहा है। यह घटना ओमान की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के पास हुई।

होर्मुज में कई जहाजों पर हमले

मंगलवार, 7 जुलाई का दिन होर्मुज स्ट्रेट में भारी तनाव वाला रहा है। भारत आ रहे जहाज के अलावा भी कई टैकरों पर हमले हुए हैं। ब्रिटिश सेना ने मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन जहाजों पर हमलों की पुष्टि की है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने बताया कि जहाजों को अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से निशाना बनाया गया।

कतर ने हंले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया

इस संबंध में कतर के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी किया। कतर ने ईरान के उप-राजदूत को तलब कर टैंकर-अल-रकियात को निशाना बनाए जाने के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विरोध दर्ज कराते हुए कतर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास से गुजरते समय टैंकर को निशाना बनाया जाना निंदनीय है। यह हमला अंतरराष्ट्रीय नौवहन (नेविगेशन) सुरक्षा कानून का गंभीर उल्लंघन है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा पैदा हो गया है। टैंकर पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का भु स्पष्ट उल्लंघन है।

अमेरिका का ईरान पर नया हमला, होर्मुज में 3 जहाजों पर हमले से गुस्से में यूएस

#middleeastconflictusstrikesagainstiran

पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है।

युद्धविराम के बाद नए सैन्य हमलों की शुरुआत

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुए युद्धविराम के बाद अमेरिकी सेना ने बुधवार तड़के ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों की शुरुआत कर दी, साथ ही ईरानी तेल की अंतरराष्ट्रीय बिक्री के लिए दी गई अहम छूट भी रद्द कर दी।

होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों पर हमले से भड़का यूएस

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया था। इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका ने ईरान के इस आक्रामक रवैये को अनुचित, खतरनाक और युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।

ईरान के सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी सैन्य कमान एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबकि, उनकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी सिस्टम, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और ड्रोन लॉन्च साइट्स पर हमले किए हैं। अधिकारी ने कहा कि ईरान की बंदरगाह सुविधाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है।

तेल बेचने की छूट वापस ली

इन सैन्य हमलों से कुछ ही समय पहले अमेरिका ने ईरान को दी गई एक अस्थायी प्रतिबंध छूट भी वापस ले ली। इस छूट के तहत ईरान को जून में हुए समझौता ज्ञापन के आधार पर कच्चे तेल का उत्पादन, बिक्री और आपूर्ति करने की अनुमति मिली हुई थी। यह छूट 21 अगस्त तक लागू रहने वाली थी, लेकिन अमेरिका ने इसे समय से पहले ही समाप्त कर दिया।