विद्यार्थियों में बढ़ती अनुशासनहीनता और संस्कार का अभाव
फर्रुखाबाद l
विद्यार्थी किसी भी राष्ट्र के भविष्य के निर्माता होते हैं। उनके चरित्र, अनुशासन और संस्कार ही समाज तथा देश की प्रगति का आधार बनते हैं। किन्तु वर्तमान समय में विद्यार्थियों में बढ़ती अनुशासनहीनता और संस्कारों का अभाव एक गम्भीर चिन्ता का विषय बन गया है। यह समस्या केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और समाज को भी प्रभावित कर रही है।
आर्मी पब्लिक स्कूल के वरिष्ठ अध्यापक एवं शिक्षाविद् डॉ० सुनील कुमार त्रिपाठी ने बताया कि आज के युग में तकनीकी साधनों का अत्यधिक प्रयोग, सोशल मीडिया का प्रभाव, पारिवारिक व्यस्तता तथा नैतिक शिक्षा की उपेक्षा अनुशासनहीनता के प्रमुख कारण हैं। अनेक विद्यार्थी अध्ययन की अपेक्षा मोबाइल फोन, वीडियो गेम और मनोरंजन के अन्य साधनों में अधिक समय व्यतीत करते हैं। इसके अतिरिक्त माता-पिता के पास बच्चों को पर्याप्त समय न दे पाने के कारण उनमें उचित मार्गदर्शन और नियन्त्रण का अभाव देखने को मिलता है।
संस्कार व्यक्ति को विनम्रता, सम्मान, कर्तव्यपरायणता और सदाचार की शिक्षा देते हैं। जब विद्यार्थियों में संस्कारों का अभाव होता है, तब वे शिक्षकों, अभिभावकों और बड़ों के प्रति सम्मान की भावना खोने लगते हैं। असहिष्णुता, असभ्य व्यवहार, झूठ बोलना, जिम्मेदारियों से बचना तथा सामाजिक मर्यादाओं की अवहेलना जैसी प्रवृत्तियाँ विकसित होने लगती हैं। इससे उनका व्यक्तित्व और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं।
अतः इस समस्या के समाधान के लिए परिवार, विद्यालय और समाज को संयुक्त प्रयास करने होंगे। माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताकर उन्हें नैतिक मूल्यों और संस्कारों की शिक्षा देनी चाहिये। विद्यालयों में नैतिक शिक्षा, योग, प्रार्थना, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा अनुशासन सम्बन्धी कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। शिक्षकों को भी अपने आचरण से विद्यार्थियों के लिए आदर्श प्रस्तुत करना चाहिये।
विद्यार्थियों में अनुशासन और संस्कार जीवन की अमूल्य निधि हैं। इनके बिना शिक्षा अधूरी है। यदि हम चाहते हैं कि भविष्य की पीढ़ी योग्य, जिम्मेदार और चरित्रवान् नागरिक बने, तो हमें उनमें अनुशासन और संस्कारों का विकास करना होगा। यही एक सशक्त, सभ्य और उन्नत राष्ट्र के निर्माण का मार्ग है।
2 hours and 28 min ago
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