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बिहार की 'सम्राट' कैबिनेट का विस्तार आज, बीजेपी-जेडीयू कोटा से ये नेता बन रहे मंत्री

#biharcabinetexpansion_2026

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आज उनकी नई कैबिनेट मिलने वाली है। आज बिहार में कैबिनेट विस्तार हो रहा है। दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह रखा गया है, जिसमें करीब 30 मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है।

बीजेपी के मंत्रियों की संभावित लिस्ट

बीजेपी के कोटे से विजय कुमार सिन्हा और मंगल पांडेय समेत इन नेताओं का मंत्री बनना करीब-करीब तय है। देखिए पूरी लिस्ट

• विजय कुमार सिन्हा

• मंगल पाण्डेय

• रामकृपाल यादव

• दिलीप जायसवाल

• श्रेयसी सिंह

• लखेंद्र पासवान

• रमा निषाद

• प्रमोद कुमार चंद्रवंशी

• अरूण शंकर प्रसाद

• संजय सिंह टाईगर

जदयू के कोटे से मंत्रियों की संभावित लिस्ट

जदयू के कोटे से इनका मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। अर्से बाद दामोदर रावत की फिर से कैबिनेट में एंट्री हो रही है। उन्होंने खुद इस बात की पुष्टि की है। नीचे आप लिस्ट देख सकते हैं।

• श्रवण कुमार

• अशोक चौधरी

• लेसी सिंह/चेतन आनंद

• मदन सहनी

• जमा खां

• सुनील कुमार

• दामोदर राउत

• शीला मंडल/शालिनी मिश्रा

• रत्नेश सदा

• बुलो मंडल

• जयंत राज/रुहेल रंजन

• भगवान सिंह कुशवाहा/मांजरिक मृणाल

• श्वेता गुप्ता या ललन सर्राफ

पीएम मोदी भी हो रहे शामिल

इस बार का शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार बिहार के किसी कैबिनेट विस्तार कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद शामिल होंगे। इस आयोजन को बीजेपी के बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। मोदी की मौजूदगी के कारण इस कार्यक्रम को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में एनडीए अपनी ताकत और एकजुटता का बड़ा संदेश देने की तैयारी में है। ऐसे में 7 मई का यह कार्यक्रम बिहार की राजनीति में नई तस्वीर पेश कर सकता है।

पीएम मोदी का मेगा रोड शो

वहीं, शपथ ग्रहण से पहले पीएम मोदी का एयरपोर्ट से गांधी मैदान तक मेगा रोड शो होगा। बुधवार शाम अमित शाह पटना पहुंचे। अमित शाह हवाई अड्डे से एक होटल पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी और NDA के कई नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद वह रात में वहीं ठहरे। रास्ते में, अमित शाह ने पटना हवाई अड्डे से एक किलोमीटर दूर राजबंसी नगर इलाके में स्थित पंचरूपी हनुमान मंदिर पहुंचे। आज को होने वाले समारोह के लिए पटना पहुंचने वालों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी शामिल हैं। नितिन नवीन पिछले वर्ष दिसंबर में पार्टी का शीर्ष पद संभालने तक राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री थे।

तमिलनाडु में कांग्रेस ने छोड़ा डीएमके का साथ, विजय की टीवीके की राह हुई आसान

#tamilnadudmkcongressallianceendscongressextendssupportvijaytvk

कांग्रेस ने तमिलनाडु में एक्टर विजय की अगुवाई वाली टीवीके को समर्थन देने क फैसला किया है। इसके साथ ही अपने पुराने सहयोगी को ‘हाथ’ झटक दिया है। कांग्रेस ने बुधवार को तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को समर्थन देने का एलान किया। पार्टी ने कहा कि वह टीवीके को तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए समर्थन देगी। इसके साथ कांग्रेस ने डीएमके के साथ गठबंधन खत्म करने की घोषणा भी की। कांग्रेस लंबे समय द्रविड मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की सहयोगी रही है।

सरकार गठन के लिए टीवीके को समर्थन देने का फैसला

टीवीके अध्यक्ष विजय ने औपचारिक रूप से कांग्रेस से समर्थन मांगा था, जिसके बाद तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस विधायक दल ने राज्य में सरकार गठन के लिए टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया। कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि तमिलनाडु की जनता, खासकर युवाओं ने एक स्पष्ट जनादेश दिया है, जो एक धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और जनकल्याणकारी सरकार के पक्ष में है।

कांग्रेस ने समर्थन के लिए रखी ये शर्त

कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका समर्थन पूरी तरह से बिना शर्त नहीं होगा। पार्टी ने कहा है कि टीवीके को इस गठबंधन में किसी भी ऐसी सांप्रदायिक ताकत को शामिल नहीं करना होगा, जो भारतीय संविधान के मूल्यों में विश्वास नहीं रखती। 

आने वाले चुनावों के ले भी समर्थन

कांग्रेस ने कहा है कि उसका समर्थन सिर्फ मौजूदा सरकार के गठन नहीं बल्कि आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव, लोकसभा चुनाव और राज्यसभा चुनावों के लिए भी होगा। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले ऐसी चर्चा सामने आई थी कि राहुल गांधी टीवीके साथ गठबंधन के इच्छुक हैं लेकिन पार्टी के अन्य नेताओं के दबाव में डीएमके साथ कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था। 

डीएमके ने कांग्रेस को कहा गद्दार

डीएमके ने कांग्रेस द्वारा टीवीके को समर्थन देने पर इस गद्दारी बताया है। तमिलनाडु में कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार बनाने के लिए टीवीके के बारे में डीएमके ने कहा कि शुरू से ही यह चर्चा थी कि कुछ लोग विजय का समर्थन करना चाहते हैं और उनकी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं। कांग्रेस हर राज्य में ऐसा कर रही है।आखिरकार वे सभी जगह हार रहे हैं। दिल्ली और पश्चिम बंगाल में उनका पूरी तरह सफाया हो गया है। महाराष्ट्र में उनके पास कोई मौका नहीं है। वे कुछ ऐसा कर रहे हैं जिससे उनकी पार्टी ही बंद हो जाएगी।

दिल्ली में ट्रैफिक नियम तोड़ना अब पड़ेगा महंगा
* 45 दिन में चालान निपटाना अनिवार्य, नई डिजिटल व्यवस्था लागू

* पांच से ज्यादा उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबन की तैयारी, वाहन सेवाएं भी हो सकती हैं प्रभावित

नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए अब बचना आसान नहीं होगा। दिल्ली सरकार एक नई डिजिटल और समयबद्ध चालान व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिसके तहत तय समय सीमा में चालान का निपटारा अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन से लेकर वाहन से जुड़ी सेवाओं पर रोक तक लग सकती है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि संशोधित केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत इस प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
नई व्यवस्था के अनुसार, किसी भी चालान के निपटारे के लिए वाहन चालक को 45 दिनों का समय मिलेगा। इस दौरान वह जुर्माना भर सकता है या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सबूतों के साथ आपत्ति दर्ज करा सकता है। निर्धारित समय में कोई कार्रवाई न करने पर चालान स्वतः स्वीकार माना जाएगा।
सरकार ने यह भी तय किया है कि एक वर्ष में पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों को गंभीर श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
नई प्रणाली के तहत चालान प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। कैमरों और ऑटोमैटिक सिस्टम के जरिए ई-चालान जारी किए जाएंगे, वहीं पुलिस अधिकारी भी डिजिटल और कागजी दोनों माध्यमों से कार्रवाई कर सकेंगे।

महत्वपूर्ण समयसीमा:

* ऑनलाइन नोटिस: 3 दिनों के भीतर
* भौतिक नोटिस: 15 दिनों के भीतर
सभी चालानों का रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा और नोटिस एसएमएस व ईमेल के जरिए वाहन मालिक तक पहुंचाए जाएंगे। इसके लिए वाहन मालिकों को अपने मोबाइल नंबर और पते को अपडेट रखने की सलाह दी गई है।
समयसीमा के भीतर चालान का भुगतान न करने पर वाहन से जुड़ी कई सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिनमें वाहन टैक्स भुगतान, ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण और वाहन पंजीकरण जैसी सेवाएं शामिल हैं। साथ ही वाहन को “Not To Be Transacted” श्रेणी में डाला जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर जब्ती की कार्रवाई भी की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि जिम्मेदार ड्राइविंग की संस्कृति विकसित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल व्यवस्था ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में सहायक सिद्ध होगी।
दिल्ली में हीटवेव की आहट, पारा 39°C तक पहुंचने के आसार; IMD ने जारी किया अलर्ट

* नमी के कारण बढ़ा “ह्यूमिड हीट” का असर, 7 मई से तेज होगी गर्मी

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में गर्मी ने अब रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में हालात और भी कठिन हो सकते हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 6 मई 2026 को अधिकतम तापमान करीब 35°C और न्यूनतम 21°C रहने का अनुमान है। दिन में आंशिक बादल और हल्की गरज-चमक के चलते मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
हालांकि फिलहाल हीटवेव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हवा में 50 से 70 प्रतिशत तक नमी के कारण “ह्यूमिड हीट” का असर लोगों को ज्यादा गर्मी महसूस करा रहा है। इससे शरीर पर गर्मी का दबाव बढ़ रहा है और असहजता महसूस हो रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, 7 मई से तापमान में लगातार वृद्धि शुरू होगी। 8 मई तक आसमान साफ रहने के साथ पारा 36°C तक पहुंच सकता है, जबकि 9 और 10 मई को तापमान 38 से 39°C तक जाने की संभावना है। ऐसे में दिल्ली में हीटवेव जैसी स्थिति बनने के संकेत मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि साफ आसमान और तेज धूप के कारण दिन के साथ-साथ रात में भी तापमान अधिक बना रहेगा, जिससे लोगों को राहत कम मिलेगी। 11 मई तक तापमान 39°C के आसपास बना रहने की संभावना है, जिससे प्री-हीटवेव जैसी स्थिति बन सकती है।
IMD ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के व ढीले कपड़े पहनने की हिदायत दी गई है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि बढ़ती गर्मी और नमी के कारण डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
जज अमन शर्मा आत्महत्या मामला: वकीलों के संगठन ने पत्नी पर लगाए आरोप, जांच की मांग
* दिल्ली में एडीजे की मौत पर उठे सवाल; मानसिक स्वास्थ्य और कार्यदबाव को लेकर भी बहस तेज

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अमन शर्मा की आत्महत्या के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। First Generation Lawyers Association ने आरोप लगाया है कि जज अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के मानसिक उत्पीड़न से परेशान थे और इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
संगठन ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को खुला पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही जज की पत्नी स्वाति मलिक, जो स्वयं न्यायिक अधिकारी हैं, को जांच पूरी होने तक न्यायिक कार्य से दूर रखने की भी अपील की गई है।
परिवार के अनुसार, 2 मई को दक्षिण दिल्ली की एक पॉश कॉलोनी में 30 वर्षीय जज अमन शर्मा ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि घरेलू विवाद और पत्नी स्वाति मलिक तथा उनकी चचेरी बहन निधि मलिक (आईएएस अधिकारी) के हस्तक्षेप से पारिवारिक तनाव बढ़ गया था।
पुलिस ने इस मामले में स्वाति मलिक और निधि मलिक के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में पति-पत्नी के बीच विवाद की पुष्टि हुई है और पुलिस सभी पक्षों से पूछताछ कर रही है।
वहीं, वकीलों के संगठन ने इस घटना को व्यापक परिप्रेक्ष्य में उठाते हुए कहा है कि न्यायिक अधिकारियों पर बढ़ता कार्यभार, निजी जीवन की चुनौतियां और सामाजिक अपेक्षाएं मिलकर गंभीर मानसिक तनाव पैदा करती हैं। संगठन ने न्यायिक अधिकारियों के लिए नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच, काउंसलिंग और मजबूत सपोर्ट सिस्टम विकसित करने की मांग की है।
यह मामला न्यायपालिका में कार्यरत अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य और निजी जीवन से जुड़े मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।
बीजेपी का हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता, राहुल गांधी का गंभीर आरोप, हरियाणा सरकार को बताया घुसपैठिया

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कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर चुनावी प्रक्रिया में धांधली का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा में भाजपा के हर छठे सांसद ने वोट चोरी के जरिए जीत हासिल की है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अगर देश में निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं तो बीजेपी 140 सीटें भी नहीं जीत पाएगी।

राहुल ने पूछा- क्या उन्हें ‘घुसपैठिए’ कहें?

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘वोट चोरी से कभी सीटें चुराई जाती हैं, कभी पूरी सरकार। लोकसभा के 240 बीजेपी सांसदों में से मोटे तौर पर हर छठा सांसद वोट चोरी से जीता है। पहचानना मुश्किल नहीं। क्या उन्हें बीजेपी की भाषा में ‘घुसपैठिए’ कहें? और हरियाणा? वहां तो पूरी सरकार ही ‘घुसपैठिया’ है। जो संस्थाएं अपनी जेब में रखते हैं, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया को तोड़-मरोड़ देते हैं। वो ख़ुद “remote controlled” हैं। उन्हें असली डर सच्चाई का है। क्योंकि निष्पक्ष चुनाव हो जाएं, तो आज ये 140 के पास भी नहीं जीत सकते।’

बंगाल और असम के नतीजों पर भी बोला हमला

राहुल गांधी ने इससे पहले पश्चिम बंगाल और असम के नतीजों के बाद भी बीजेपी पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि असम और पश्चिम बंगाल में 'जनादेश की चोरी' देश के लोकतंत्र को नष्ट करने के भारतीय जनता पार्टी के 'मिशन' के तहत उठाया गया बड़ा कदम है। कांग्रेस के 'कुछ लोगों' और उन दूसरे लोगों को अच्छी तरह समझने की जरूरत है जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं। राहुल गांधी ने आगे कहा था कि क्षुद्र राजनीति को किनारे रखें, यह किसी एक पार्टी या दूसरी पार्टी के बारे में नहीं है, यह भारत के बारे में है।

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत पर बांग्लादेश की खिलीं बांछे, सुलझेगा दशकों पुराना तीस्ता जल विवाद?

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत देश की सियासी गलियारों में ही चर्चा का विषय नहीं है। इस जीत पर पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टियों के भीतर भी कई तरह की चर्चा और विश्लेषण हो रहे हैं। इस बड़ी चुनावी जीत ने क्षेत्रीय कूटनीति और राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत मिल रहे है।

तीस्ता जल समझौते को लेकर जगी उम्मीद

बांग्लादेश की सत्ताधारी 'बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी' (बीएनपी) ने पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज करने पर भाजपा को औपचारिक रूप से अपनी बधाई दी है। इसके साथ ही बांग्लादेश ने भारत को लेकर बड़ी उम्मीद जताई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए लंबे समय से अटके तीस्ता जल समझौते पर विचार किया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश के बीच संबंधों में सुधार की आस

वहीं, बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी बीएनपी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के शानदार प्रदर्शन की जमकर तारीफ की है। हेलाल ने कहा कि वह विजेता पार्टी भाजपा और शुभेंदु अधिकारी को बधाई देते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की यह जीत सुनिश्चित करेगी कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश सरकार के बीच संबंध पहले की तरह ही अच्छे और मजबूत बने रहें। बीएनपी के इस पूरे बयान में सबसे अहम बात तीस्ता जल बंटवारा संधि को लेकर कही गई है, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से अधर में लटकी हुई है।

तीस्ता जल को लेकर बन गई थी सहमति

सितम्बर 2011 में बांग्लादेश और भारत के जल संसाधन मंत्रियों के बीच तीस्ता समझौते पर सहमति बन गई थी। उम्मीद थी कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ढाका यात्रा के दौरान इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के कारण यह समझौता रुक गया। बता दें कि ममता बनर्जी को भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल विवाद को सुलझाने की कोशिशों में एक रुकावट के तौर पर देखा जाता रहा है।

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बिगड़े रिश्ते

शेख हसीना सरकार के अगस्त 2024 में गिरने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे, जो अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों, भारत में बांग्लादेश मिशन पर हमले, भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की मांग, ढाका में भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक केंद्र पर हमले, वीजा सेवाओं में ठहराव, व्यापारिक सुविधाओं में कटौती, और भारत में टी-20 वर्ल्ड कप क्रिकेट खेलने से बांग्लादेश क्रिकेट टीम के इनकार करने जैसी कई घटनाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को निचले स्तर तक पहुंचा दिया था। हालांकि, बांग्लादेश में फ़रवरी में हुए आम चुनाव के बाद दोनों देशों ने संबंध सुधारने की कोशिशें शुरू की हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान दिल्ली का दौरा भी कर चुके हैं।

ममता बनर्जी का इस्तीफे से इनकार, नतीजों के बाद चुनावी प्रक्रिया पर खड़े किए सवाल

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पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव हारने के बाद प्रेस कॉफ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। इसके साथ ही ममता ने कहा कि मैं लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी।

चुनाव आयोग को बताया 'खलनायक'

ममता ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि इस चुनाव में चुनाव आयोग लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने और ईवीएम में हेराफेरी करने के मामले में 'खलनायक' बन गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या आप मुझे बता सकते हैं कि वोटिंग के बाद भी ईवीएम 80-90 प्रतिशत चार्ज कैसे हो सकता है? यह कैसे संभव है?

आईपीएस और आईएएस के तबादले का आरोप

ममता बनर्जी ने आगे कहा कि चुनाव से दो दिन पहले ही उन्होंने हमारे लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। उन्होंने हर जगह छापेमारी शुरू कर दी। उन्होंने सभी आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को बदल दिया। उन्होंने अपनी पार्टी से लोगों को चुना और भाजपा ने सीधे चुनाव आयोग के साथ मिलकर खेल खेला। यह भाजपा और चुनाव आयोग के बीच एक बेटिंग है। हमने पूरी मशीनरी के खिलाफ लड़ाई लड़ी।'

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर साधा निशाना

टीएमसी अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, इसमें प्रधानमंत्री और होम मिनिस्टर भी शामिल थे। यह सीधे तौर पर उनका हस्तक्षेप था। उन्होंने एसआईआर से 90 लाख नाम हटा दिए थे। जब हम कोर्ट गए, तो 32 लाख नाम फिर से शामिल किए गए। उन्होंने बहुत ही गंदे, घटिया और शरारती खेल खेले। मैंने अपनी जिंदगी में इस तरह का चुनाव कभी नहीं देखा।

टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप

ममता बनर्जी ने कहा कि कोलकाता से जगह जंगल महल तक एक जैसा माहौल है। टीएमसी कार्यकर्ताओं के ऊपर हमले हो रहे हैं। हमारे कार्यकर्ताओं को टॉर्चर किया जा रहा है। बीजेपी जिस तरह अत्याचार कर रही है, गुंडों को सामने रखकर तांडव मचा रखा है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनके साथ काउंटिंग सेंटर पर धक्का मुक्की की गई। उन्होंने कहा कि जब एक महिला कैंडिडेट के साथ ऐसा हो सकता है तो अन्य टीएमसी उम्मीदवारों के साथ क्या हुआ होगा?

अमित शाह चुनेंगे पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री, बनाए गए पर्यवेक्षक, जेपी नड्‌डा को असम की जिम्मेदारी

#amitshahappointedobserverforwestbengal

पश्चिम बंगाल और असम में नई सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कवायद शुरू कर दी है। पश्चिम बंगाल और असम में विधायक दल का नेता चुनने के लिए भाजपा ने अपने केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को दी गई है। वहीं, असम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

जल्द कोलकाता जाएंगे शाह

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है। पार्टी को 206 सीटें हासिल हुई है, जबकि टीएमसी को 82 सीटें मिली हैं। अब बीजेपी सरकार बनाने की तैयारी में जुट गई है। इसी क्रम में पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्य में यह बड़ी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी गई है। अमित शाह अगले 2-3 तीनों में कोलकाता जाएंगे और विधायकों से बातचीत करेंगे। पश्चिम बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को होगा।

नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक कर चुनेंगे नेता

वहीं, पूर्वोत्तर के सबसे अहम राज्य असम के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है। यह दोनों वरिष्ठ नेता असम जाकर सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ सीधी बैठक करेंगे और उनकी राय जानने के बाद ही विधायक दल के नेता के नाम पर अंतिम मुहर लगाएंगे। इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी को रोकने में मदद मिलेगी।

9 मई को पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण, कौन होगा पहली बीजेपी सरकार का सीएम?

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पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद अब सभी की निगाहें राज्य में भाजपा के मुख्यमंत्री चेहरे और शपथ ग्रहण की तारीख पर टिक गई हैं। बंगाल में 206 सीटों पर प्रचंड जीत के बाद नए सीएम चुनने की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार, 9 मई को बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार शपथ लेगी। कोलकाता के परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण संभव है।

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज की। जिसके बाद बीजेपी ने नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए तारीख तय हो गई है। बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को आयोजित किया जाएगा।

राजनाथ सिंह जाएंगे कोलकाता

पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी इतनी बड़ी जीत के साथ उभरी है कि अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खड़ा हो गया है। क्या पार्टी अनुभवी नेता सुवेंदु अधिकारी को चुनेगी या नए चेहरे पर दांव लगाएगी? ऐसे में बुधवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कोलकाता आएंगे। वह यहां बीजेपी के जीते हुए विधायकों से बातचीत करेंगे जिसके बाद विधायक दल का नेता और बंगाल के नये मुख्यमंत्री के नाम का फैसला होगा।

सीएम की दौड़ में पहला नाम सुवेंदु अधिकारी का

मुख्यमंत्री की दौड़ में पहला नाम सुवेंदु अधिकारी का है। वह पिछले पांच सालों से राज्य में नेता विपक्ष की भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने इन चुनावों में मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनकी सीट भवानीपुर में शिकस्त दी है। ऐसे में दौड़ में सुवेंदु अधिकारी आगे माने जा रहे हैं। लेकिन अन्य राज्यों के रिकॉर्ड को देखें तो बीजेपी अभी तक चौंकाती आई है। अगर ऐसा होता है तो फिर कौन सीएम बन सकता है।