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अखिलेश के नेतृत्व में हार का रिकॉर्ड बना रही सपा: मंत्री दानिश आजाद अंसारी
- ‘2027 में हार के डर से घबराई हुई है सपा’, दानिश आजाद का अखिलेश पर तीखा हमला
- ‘नफरत फैलाने से चुनाव नहीं जीते जाते’, दानिश आजाद का अखिलेश पर तंज, बोले- जनता इन्हें नकार चुकी है
- ‘हर हार के बाद नया बहाना खोजती है सपा’, दानिश अंसारी ने अखिलेश पर साधा निशाना
लखनऊ, 06 नवंबर। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद सपा और कांग्रेस ईवीएम, प्रशासन और चुनाव आयोग को दोषी ठहराते हैं। संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाना अखिलेश यादव की फितरत है।
दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुननी पड़ती है। लेकिन अखिलेश यादव को इससे कुछ लेना-देना नहीं है। वे केवल एसी में बैठकर एआई वाली राजनीति करते हैं। जनता इनकी मंशा को समझ चुकी है और 2027 के चुनाव में उत्तर प्रदेश से सपा को उखाड़ फेंकेगी।
- अखिलेश के नेतृत्व में सपा लगातार चुनाव हार रही
दानिश अंसारी ने कहा कि 2027 के चुनाव में अपनी हार देखकर सपा घबरा गई है। इसी वजह से अखिलेश यादव अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश के नेतृत्व में सपा लगातार चुनावी पराजय का रिकॉर्ड बना रही है। 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनाव में जनता इन्हें सबक सीखा चुकी है। अब 2027 में जनता सपा का सफाया करेगी।
पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शत-प्रतिशत शामिल कराने के लिए विभिन्न संगठनों का लिया जाएगा सहयोग : नवदीप
- वर्तमान एवं पूर्व ग्राम प्रधानों, पार्षदों, समाजसेवियों तथा प्रतिष्ठित नागरिकों का भी लिया जायेगा सहयोग

लखनऊ, 06 नवम्बर, 2026। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि विधानसभा निर्वाचक नामावलियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 के अंतर्गत प्रदेश के सभी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शत-प्रतिशत सम्मिलित कराने की मुहिम को अधिक से अधिक जनसहभागी बनाने के उद्देश्य से विभिन्न शासकीय विभागों के साथ-साथ सामाजिक, व्यावसायिक एवं गैर सरकारी संगठनों का भी सहयोग लिये जाने के संबंध में समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जनपदों में स्थित सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSEs), निजी क्षेत्र के औद्योगिक संस्थान, रेजिडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), जिला एवं तहसील बार एसोसिएशन, अधिवक्ता संगठन, नागरिक सुरक्षा संगठन, श्रमिक संगठन, व्यापारिक संगठन, चिकित्सा संघ एवं मेडिकल एसोसिएशन के साथ समन्वय स्थापित कर पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में पंजीकृत कराये जायें।
सार्वजनिक उपक्रमों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत पात्र कार्मिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए कार्यस्थलों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। आवासीय सोसाइटी, बहुमंजिला अपार्टमेंट एवं कॉलोनियों में RWA के सहयोग से नए निवासियों, प्रथम बार मतदाता बनने वाले युवाओं तथा मतदाता सूची में नाम दर्ज न करा पाने वाले पात्र नागरिकों का पंजीकरण कराया जाएगा।
इसी प्रकार नागरिक सुरक्षा संगठनों के स्वयंसेवकों के सहयोग से नगरीय क्षेत्रों, घनी आबादी वाले मोहल्लों एवं मलिन बस्तियों में छूटे हुए पात्र नागरिकों को चिह्नित किया जाएगा। श्रमिक संगठनों के माध्यम से कारखानों, औद्योगिक क्षेत्रों एवं निर्माण स्थलों पर संगठित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का पंजीकरण कराया जाएगा।
व्यापारिक संगठनों के साथ बैठक कर उन्हें मतदाता जागरूकता एवं पंजीकरण हेतु सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा। वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), निजी चिकित्सालयों, नर्सिंग होम एवं चिकित्सा संस्थानों के सहयोग से उनके परिसरों में शिविर आयोजित करने के साथ मलिन बस्तियों एवं दूरस्थ क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय जन प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में आवासित नागरिकों के संबंध में अच्छी जानकारी होती है। अतः पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में जोड़ने हेतु वर्तमान एवं पूर्व ग्राम प्रधानों, पार्षदों का भी सहयोग लिये जाने के निर्देश दिये गये हैं।
इसी प्रकार समाजसेवियों, वरिष्ठ प्रतिष्ठित नागरिकों का भी सहयोग लेकर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में मतदाता सूची से छूटे हुए पात्र नागरिकों की पहचान कर उन्हें पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संबंधित संगठनों एवं संस्थाओं के पदाधिकारियों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए विशेष अभियान दिवसों एवं अन्य उपयुक्त अवसरों पर पंजीकरण शिविरों का आयोजन कराया जाए।
एक हजार दीपों से जगमगाई सीतापुर रोड मंडी, उत्कृष्ट किसानों और व्यापारियों का हुआ सम्मान

- ‘स्वच्छ मण्डी–शुभ मण्डी’ अभियान के तहत दीपोत्सव में किसानों, व्यापारियों, आढ़तियों और पल्लेदारों की रही उत्साहपूर्ण सहभागिता
- विधायक डॉ. नीरज बोरा ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों एवं व्यापारियों को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर किया सम्मानित
- भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना कर किसानों एवं व्या पारियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना

लखनऊ, 06 नवंबर। धनतेरस के अवसर पर शुक्रवार शाम सीतापुर रोड मंडी एक हजार दीपों की रोशनी से जगमगा उठी। योगी सरकार की पहल पर संचालित ‘स्वच्छ मण्डी–शुभ मण्डी’ अभियान के अंतर्गत आयोजित दीपोत्सव में किसानों, व्यापारियों, आढ़तियों, पल्लेदारों और मंडी श्रमिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। दीपों की आकर्षक सजावट से पूरा मंडी परिसर उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक डॉ. नीरज बोरा ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों एवं व्यापारियों को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। मंडी समिति लखनऊ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान किसानों, व्यापारियों, आढ़तियों, पल्लेदारों एवं मंडी से जुड़े सभी लोगों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। इसके उपरांत मंडी परिसर में दीप प्रज्ज्वलित कर स्वच्छता, समृद्धि और आपसी सहयोग का संदेश दिया गया।
- उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों और व्यापारियों का सम्मान
सम्मान समारोह में कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसान ज्ञानेंद्र, छेदी लाल और मनोज कुमार को शॉल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं व्यापारिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रिंकू कुमार, शिखर सोनकर और राम किशन को भी सम्मानित किया गया। - किसानों की समृद्धि से ही प्रदेश की खुशहाली : डॉ. नीरज बोरा
इस अवसर पर विधायक डॉ. नीरज बोरा ने किसानों और व्यापारियों को प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि किसानों की समृद्धि से ही प्रदेश की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त होता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मंडियों में आधुनिक सुविधाओं के विस्तार, स्वच्छता और बेहतर व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मंडियों की प्रगति में किसानों और व्यापारियों के साथ आढ़तियों, पल्लेदारों एवं श्रमिकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। ‘स्वच्छ मण्डी–शुभ मण्डी’ अभियान मंडियों को स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित बनाने के साथ सभी वर्गों की सामूहिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने की सराहनीय पहल है।
- दीपों की जगमगाहट के बीच स्वच्छता और समृद्धि का संदेश
अभियान के अंतर्गत मंडी परिसर को लगभग एक हजार दीपों से आकर्षक ढंग से सजाया गया। दीपोत्सव में किसानों, व्यापारियों, आढ़तियों, पल्लेदारों, तौल कर्मियों, परिवहन कार्य से जुड़े लोगों और मंडी कर्मचारियों ने सहभागिता की। आयोजन के माध्यम से मंडी से जुड़े सभी वर्गों की खुशहाली, आपसी सहयोग और स्वच्छता का संदेश दिया गया।
हाईवे पर निराश्रित गोवंश मिलने पर संबंधित सीवीओ पर होगी कठोर कार्रवाई
- 10 नवंबर को प्रदेश की सभी गौशालाओं में भव्यता से मनेगी गोवर्धन पूजा, जन प्रतिनिधियों को किया जाएगा आमंत्रित
- दीपावली पर पराग के पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने के निर्देश: धर्मपाल सिंह

लखनऊ: 06 नवम्बर, 2026। प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी जनपद में राष्ट्रीय राजमार्गों एवं प्रमुख मार्गों पर निराश्रित गोवंश विचरण करते हुए नहीं पाए जाने चाहिए। यदि किसी जनपद में हाईवे पर निराश्रित गोवंश घूमते हुए पाया जाता है तो संबंधित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि निराश्रित गोवंश के संरक्षण के साथ सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम भी विभाग की प्राथमिकता है। सभी अधिकारी गोवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करें। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
धर्मपाल सिंह ने आज यहां विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा के अवसर पर प्रदेश की सभी गौशालाओं में भव्य आयोजन कराए जाएं तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाए। इस अवसर पर गौशालाओं में विशेष स्वच्छता अभियान चलाने, गोवंश की समुचित देखभाल, सेवा करने तथा उन्हें गुड़ एवं हरा चारा खिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आयोजनों की निगरानी संबंधित मंडलीय अपर निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी करेंगे।
श्री सिंह ने प्रदेश में दुग्ध समितियों के गठन में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे दुग्ध उत्पादकों को संगठित बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने पराग ब्रांड के उत्पादों की प्रभावी मार्केटिंग पर जोर देते हुए कहा कि दीपावली पर आमजन को गुणवत्तापूर्ण एवं शुद्ध पराग उत्पाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए जाएं। इसके लिए विपणन एवं वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मंत्री जी द्वारा दिए गए निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने गोवंश संरक्षण, गौशालाओं की स्वच्छता, गोवर्धन पूजा के आयोजन तथा दुग्ध समितियों एवं पराग उत्पादों से संबंधित कार्यों की नियमित निगरानी और समीक्षा करने को कहा।
बैठक में पशुधन विभाग के विशेष सचिव विवेक श्रीवास्तव, दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव राम सहाय यादव, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक योगेश, दुग्ध आयुक्त श्रीमती धनलक्ष्मी के0, पशुपालन निदेशालय के निदेशक (रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र) डॉ. संगीता तिवारी, निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. राजेंद्र प्रसाद सहित पीसीडीएफ एवं शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
दीपावली से पहले योगी सरकार का कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, 30 दिन के बोनस को मिली मंजूरी

- वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए योगी सरकार ने जारी किया शासनादेश

- अराजपत्रित राज्य कर्मचारियों से लेकर शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों के पात्र कर्मचारियों को मिलेगा तदर्थ बोनस

- बोनस की 25 प्रतिशत राशि का होगा नकद भुगतान, 75 प्रतिशत भविष्य निधि में होगी जमा

- सेवानिवृत्त और जल्द रिटायर होने वाले पात्र कर्मचारियों को पूरी राशि नकद मिलेगी

- दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी राहत, अधिकतम 1,184 रुपये बोनस का प्रावधान

लखनऊ, 5 नवंबर। दीपावली से पहले योगी सरकार ने राज्य कर्मचारियों को बड़ा उपहार दिया है। प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 30 दिन का तदर्थ बोनस देने का निर्णय लिया है। वित्त विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया। इसके तहत पात्र अराजपत्रित राज्य कर्मचारियों को अधिकतम 6,908 रुपये का बोनस मिलेगा। सरकार ने राज्य कर्मचारियों के साथ सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थानों, स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों, राजकीय विभागों के कार्यभारित कर्मचारियों और निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी बोनस के दायरे में रखा है।

वेतन मैट्रिक्स लेवल-8 तक के कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

शासनादेश के अनुसार, तदर्थ बोनस का लाभ उन पूर्णकालिक अराजपत्रित कर्मचारियों को मिलेगा, जिनके धारित पद का वेतन मैट्रिक्स लेवल-8 अर्थात 47,600 से 1,51,100 रुपये तक है। अपुनरीक्षित वेतनमान में 4,800 रुपये ग्रेड पे तक के पदों पर कार्यरत कर्मचारी भी इसके पात्र होंगे। विशेष बात यह है कि वित्तीय स्तरोन्नयन के कारण किसी कर्मचारी को उच्च वेतन मैट्रिक्स लेवल मिल गया है, तब भी उसके मूल धारित पद की पात्रता के आधार पर बोनस दिया जाएगा।

अधिकतम 6,908 रुपये बोनस, 7,000 रुपये की सीमा पर होगी गणना

योगी सरकार ने बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक परिलब्धियों की सीमा 7,000 रुपये निर्धारित की है। शासनादेश के मुताबिक 31 मार्च 2026 को ग्राह्य परिलब्धियों के आधार पर 30 दिन के बोनस की गणना होगी। इसके लिए एक महीने में औसतन 30.4 दिन माने जाएंगे। इस प्रकार 7,000 रुपये को आधार मानने पर 30 दिन का बोनस 6,907.89 रुपये बनता है, जिसे पूर्णांकित करके 6,908 रुपये दिया जाएगा। जिन कर्मचारियों की ग्राह्य मासिक परिलब्धियां निर्धारित सीमा से कम हैं, उनका बोनस वास्तविक परिलब्धियों के आधार पर तय होगा।

31 मार्च तक एक वर्ष की निरंतर सेवा जरूरी

बोनस के लिए सरकार ने सेवा अवधि की शर्त भी निर्धारित की है। सामान्य पात्र कर्मचारियों को इसका लाभ तभी मिलेगा, जब उन्होंने 31 मार्च 2026 तक एक वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली हो। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित वेतन स्तर और अन्य पात्रता शर्तें पूरी करने वाले कर्मचारियों को ही वित्तीय वर्ष 2025-26 का बोनस दिया जाएगा।

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को अधिकतम 1,184 रुपये बोनस

योगी सरकार ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी बोनस की व्यवस्था की है। छह कार्यदिवसीय सप्ताह वाले कार्यालयों में लगातार तीन वर्ष या उससे अधिक समय तक कार्य करने वाले और प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन की सेवा देने वाले कर्मचारी इसके पात्र होंगे। पांच कार्यदिवसीय सप्ताह वाले कार्यालयों में प्रत्येक वर्ष कम से कम 206 दिन कार्य करने की शर्त रखी गई है। ऐसे कर्मचारियों के लिए अधिकतम मासिक परिलब्धि 1,200 रुपये मानकर बोनस की गणना की जाएगी, जिससे अधिकतम 1,184 रुपये मिलेंगे। वास्तविक मासिक परिलब्धियां कम होने पर बोनस भी उसी अनुपात में निर्धारित होगा।

दैनिक वेतनभोगी से नियमित बने कर्मचारियों को भी राहत

शासनादेश में ऐसे कर्मचारियों के लिए भी प्रावधान किया गया है, जो पहले दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत थे और बाद में पूर्णकालिक कर्मचारी बने। यदि उन्होंने 31 मार्च 2026 तक नियमित पूर्णकालिक सेवा का एक वर्ष पूरा नहीं किया है, लेकिन दैनिक वेतनभोगी और पूर्णकालिक सेवा की संयुक्त अवधि तीन वर्ष या उससे अधिक है तथा निर्धारित वार्षिक कार्यदिवसों की शर्त पूरी होती है, तो उन्हें भी बोनस का लाभ मिल सकेगा।

बोनस की 25 प्रतिशत राशि नकद, 75 प्रतिशत भविष्य निधि में

शासनादेश के अनुसार, पात्र कर्मचारियों को स्वीकृत बोनस की 25 प्रतिशत राशि नकद दी जाएगी, जबकि शेष 75 प्रतिशत राशि संबंधित कर्मचारी के भविष्य निधि खाते में जमा होगी। जो कर्मचारी भविष्य निधि के सदस्य नहीं हैं, उनके हिस्से की यह राशि राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) के रूप में दी जाएगी अथवा सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) में जमा की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को तत्काल आर्थिक लाभ देने के साथ उनकी बचत को भी बढ़ावा देना है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पूरी बोनस राशि नकद

सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बोनस भुगतान में विशेष राहत दी है। जो पात्र कर्मचारी 31 मार्च 2026 के बाद अधिवर्षता आयु पर सेवानिवृत्त हो चुके हैं अथवा 30 अप्रैल 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले हैं, उन्हें बोनस की पूरी स्वीकृत राशि नकद दी जाएगी। ऐसे कर्मचारियों पर 75 प्रतिशत राशि भविष्य निधि में जमा करने की सामान्य व्यवस्था लागू नहीं होगी।

अनुशासनात्मक कार्रवाई में दोषी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा बोनस

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमे में दंडित कर्मचारियों को उस वर्ष का तदर्थ बोनस नहीं मिलेगा। वहीं जिन कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई या आपराधिक मुकदमा लंबित है, उनका बोनस संबंधित प्रकरण का परिणाम आने तक स्थगित रहेगा। दोषमुक्त होने की स्थिति में पात्र कर्मचारियों को रोके गए संबंधित वर्षों के बोनस का भुगतान किया जाएगा।

तहसील और गांव स्तर तक पहुंचेगी ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना: योगी आदित्यनाथ

एक मीडिया समूह द्वारा आयोजित 'एक जनपद-एक व्यंजन' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी हुए शामिल, कारीगरों का किया सम्मान

ODOC से हर घर तक पहुंचेगा स्वाद और स्वरोजगार, यूपी में हैं अपार संभावनाएं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

भारत ने दुनिया को व्यंजन बनाना सिखाया, हमारी पाक कला में है वैश्विक ब्रांड बनने की ताकत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

जापान ने 300 उत्पादों से कमाया दो लाख करोड़, यूपी के व्यंजनों में भी है ग्लोबल ब्रांड बनने की ताकत: मुख्यमंत्री

‘अन्नं ब्रह्म’ की हमारी परंपरा में मिलावट के लिए स्थान नहीं, पकवानों में रखें शुद्धता

कारीगरों और हलवाई परिवारों को व्यवसाय बढ़ाने के लिए ₹5 लाख से ₹20 लाख तक वित्तीय सहायता का प्रावधान: मुख्यमंत्री

यूपी के पारंपरिक व्यंजनों में रोजगार और उद्यमिता की अपार संभावनाएं, गुणवत्ता और शुद्धता से बनेगी वैश्विक पहचान: मुख्यमंत्री

‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच से घरों में बनने वाले पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगा बाजार: मुख्यमंत्री

लखनऊ।05 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों और उनसे जुड़े कारीगरों को पहचान दिलाने के लिए ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना को तहसील, ब्लॉक, गांव और कस्बे स्तर तक विस्तार दिया जाएगा। इससे स्थानीय व्यंजनों को बाजार और ब्रांडिंग मिलेगी तथा हलवाई, कारीगर और घरों में पारंपरिक पाक कला को आगे बढ़ाने वाले परिवार रोजगार और आय के नए अवसरों से जुड़ सकेंगे। सरकार इस क्षेत्र की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करा रही है।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एक मीडिया समूह द्वारा आयोजित ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मिलित हुए, जहां उन्होंने योजना से जुड़े आठ दक्ष कारीगरों जगदीश यादव, संदीप कुमार, राकेश कुमार, ब्रजेश कश्यप, बलराम गुप्ता, नीलू कुमार, शिवानी मवई और श्रवण लाल को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस मंच से प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के कारीगरों, हलवाई परिवारों और उनके पारंपरिक व्यंजनों को पहचान मिल रही है।

75 जिलों के विशिष्ट व्यंजनों को पहचान दिलाने की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश के पारंपरिक उद्यमों को कृषि के साथ जोड़कर आर्थिक ताकत बनाने की दिशा में काम शुरू किया गया। इसी सोच के साथ 2018 में ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना शुरू की गई। पहले 75 में से 58 जिलों में विशिष्ट उत्पादों की पहचान हुई थी। अब सभी 75 जनपदों के एक-एक विशेष उत्पाद को तकनीक, बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ा गया है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश से करीब ₹2 लाख करोड़ के उत्पादों का निर्यात हो रहा है। प्रदेश के लगभग 80 उत्पादों को जीआई टैग भी मिल चुका है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों में खान-पान और स्वाद की अपनी विशिष्ट परंपरा है। पिछले तीन-चार वर्षों में इन व्यंजनों की पहचान के लिए सर्वे कराया गया। इसके आधार पर ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना शुरू की गई। पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री के हाथों इसका शुभारंभ हुआ था। अब इसे और व्यापक बनाते हुए तहसील, ब्लॉक, गांव और कस्बे स्तर तक ले जाने की तैयारी है, ताकि अधिक से अधिक स्थानीय व्यंजनों और कारीगरों को मंच मिल सके।

बलिया के बाटी-चोखा से जौनपुर की इमरती तक अपार संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों में वैश्विक बाजार तक पहुंचने की क्षमता है। बलिया का बाटी-चोखा, जौनपुर की इमरती और अलग-अलग जिलों के विशिष्ट पकवान इसकी मिसाल हैं। घरों में माताओं, बहनों, दादियों और नानियों से सीखी गई पाक कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। इस हुनर को उचित मंच, पैकेजिंग, तकनीक और बाजार से जोड़कर बड़े व्यवसाय में बदला जा सकता है।

बच्चियों को मंच पर बुलाकर भावुक हुए मुख्यमंत्री

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक बच्ची का जिक्र किया, जो अपनी मां के हाथों बनी मूंग दाल की नमकीन का पैकेट लेकर उनसे मिली थी। बच्ची ने उत्साह के साथ मुख्यमंत्री को यह नमकीन भेंट की और बताया कि उसकी मां इसे घर पर बनाती और बेचती हैं। इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भावुक हो गए। उन्होंने बच्ची और उसके साथ मौजूद दूसरी बच्ची को मंच पर बुलाया और उनके उत्साह की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घरों में बनने वाले ऐसे उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़ दिया जाए तो वे बड़े बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने संबंधित विभाग और आयोजक संस्थान से ऐसे कारीगरों और परिवारों को प्रोत्साहित करने की अपील की।

कारीगरों को ₹5 लाख से ₹20 लाख तक वित्तीय सहायता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पारंपरिक कारीगरों, हलवाइयों और ऐसे परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना लागू की है। इसके तहत पात्र लोगों को शुरुआती तौर पर ₹5 लाख तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसके साथ सब्सिडी का भी प्रावधान है। योजना के तहत सहायता की राशि को आगे बढ़ाकर ₹7.5 लाख और ₹10 लाख तक तथा बड़े व्यवसाय के लिए ₹20 लाख तक की सुविधा देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति और हुनर रखने वाले परिवार, महिलाएं और स्वयं सहायता समूह इस माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। प्रदेश में इतना बड़ा बाजार उपलब्ध है कि स्थानीय व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को प्रोत्साहित करके बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन किया जा सकता है। उन्होंने बुलंदशहर की ‘अचार वाली दीदी’ का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने ₹500 उधार लेकर अचार बनाने का काम शुरू किया और आज 500 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।

शुद्धता और गुणवत्ता से ही बनेगी व्यंजनों की पहचान

मुख्यमंत्री ने कारीगरों और खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों से शुद्धता और गुणवत्ता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि व्यवसाय की पहली शर्त शुद्धता है। अधिक मुनाफे के लिए मिलावट या शॉर्टकट अपनाने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है और पारंपरिक पाक कला की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है। गुणवत्ता बनाए रखी जाएगी तो देश-दुनिया के बाजार में इन उत्पादों की मांग बढ़ेगी।

उन्होंने भारतीय परंपरा में अन्न के सम्मान और विविध व्यंजनों की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ स्थानीय हुनर को सम्मान देने और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच को आगे बढ़ाने का माध्यम है। जापान के ‘वन विलेज वन प्रोडक्ट’ मॉडल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को विशिष्ट पहचान और बाजार से जोड़कर गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम में रहे उपस्थित

इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार अवनीश अवस्थी, विभिन्न जनपदों के कारीगर, व्यवसायी, मीडिया कर्मी और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

पुलिस महारथी और फॉरेंसिक विभाग सारथी बनकर हर व्यक्ति को दिलाएं न्याय: योगी

- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने UPPSC द्वारा नवचयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को बांटे नियुक्ति-पत्र

- अपराधी को सजा और निर्दोष को सम्मान दिलाने में फॉरेंसिक साक्ष्यों की अहम भूमिका: मुख्यमंत्री

तारीख-दर-तारीख की परंपरा हो बंद, आम आदमी को न्याय दिलाने में फॉरेंसिक अधिकारियों की होगी सारथी की भूमिका: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

नवनियुक्त फॉरेंसिक अधिकारियों को सीएम योगी का मंत्र, पूरी ईमानदारी से दिलाएं पीड़ितों को न्याय

यूपी पुलिस दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस के रूप में हुई स्थापित: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

भू-माफिया के कब्जे से छुड़ाकर बना उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट: मुख्यमंत्री

लखनऊ, 05 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा नवचयनित 28 वैज्ञानिक (फॉरेंसिक) अधिकारियों को नियुक्ति-पत्र वितरित किए। 5 कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था में तारीख-दर-तारीख की परंपरा को बंद कर आम आदमी को समय पर न्याय दिलाने के लिए फॉरेंसिक अधिकारियों को एक सारथी की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि जब आपके चयन में किसी सिफारिश और लेनदेन की आवश्यकता नहीं पड़ी, तो अब आपकी जिम्मेदारी है कि आप भी पूरी ईमानदारी, समयबद्धता और शुद्धता के साथ साक्ष्य जुटाकर पीड़ितों को न्याय दिलाएं।

न्याय के मंदिर में साक्ष्यों से ही होगी सत्य की विजय 

मुख्यमंत्री ने न्याय व्यवस्था में साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा ध्येय वाक्य 'सत्यमेव जयते' है। लेकिन न्याय के मंदिर में सत्य की विजय तभी होगी जब आपके पास उस प्रकार के साक्ष्य और प्रमाण होंगे। उन्होंने महर्षि गौतम के न्याय दर्शन का उल्लेख करते हुए प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाण की चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों वर्ष पहले महर्षि गौतम ने कहा था 'यत्र यत्र धूम्रः तत्र तत्र अग्निः' यानि जहां धुआं है, वहां आग है। आज हमारे फॉरेंसिक अधिकारी इसी अनुमान और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर खून, बाल या उंगलियों के निशान जैसे साक्ष्य जुटाकर वास्तविक अपराधी तक पहुँचते हैं।

सात साल से अधिक की सजा के लिए फॉरेंसिक एविडेंस हुआ अनिवार्य 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2024 में देश ने गुलामी के प्रतीक ब्रिटिश कानूनों को समाप्त कर तीन नए भारतीय कानून लागू किए हैं। इन नए कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक एविडेंस अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए प्रदेश को 500 ऐसे प्रशिक्षित अधिकारियों की आवश्यकता थी, जो घटना स्थल पर पहुँचकर साक्ष्य जुटा सकें। मुझे प्रसन्नता है कि नए कानून लागू होने से पहले ही उत्तर प्रदेश शासन ने फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना कर 600 से अधिक ऐसे पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित कर लिया है।

भू-माफिया के कब्जे से जमीन छुड़ाकर बनाया गया फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट 

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के निर्माण की कहानी साझा करते हुए बताया कि 2017 से पहले लखनऊ एयरपोर्ट के पास स्थित इस बेसकीमती जमीन पर एक भू-माफिया ने कब्जा कर लिया था। तत्कालीन डीजीपी ने रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले इसकी जानकारी दी, जिसके बाद सरकार ने कार्रवाई कर उस जमीन को कब्जामुक्त कराया और वहां आज यह अत्याधुनिक इंस्टीट्यूट खड़ा है। आज यह इंस्टीट्यूट एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और क्वांटम फॉरेंसिक का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

यूपी पुलिस बनी दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस 

पूर्ववर्ती सरकारों पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के लिए मोहताज था। प्रदेश में अराजकता, दंगे और कर्फ्यू नियति बन चुके थे और अपराधी बेखौफ घूमते थे क्योंकि उन्हें मालूम था कि कानून उन तक नहीं पहुँच सकता। अकर्मण्यता और अराजकता के उस दौर ने प्रदेश को 'बीमारू राज्य' बना दिया था। आज वही उत्तर प्रदेश देश की टॉप थ्री अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में हमने 2 लाख 30 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की पारदर्शी भर्ती कर यूपी पुलिस को दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस के रूप में स्थापित किया है।

हम छह महीने में देंगे एक लाख युवाओं को नौकरी 

मुख्यमंत्री ने रोजगार के मोर्चे पर विरोधियों को जवाब देते हुए कहा कि जो लोग कहते थे कि क्या यूपी में नियुक्तियां होंगी, उन्हें गिनते रहना चाहिए। पिछले साढ़े नौ वर्षों में हमने साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। यह नियुक्ति पत्र वितरण उसी श्रृंखला की कड़ी है और हम अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं। कल भी यूपी पुलिस का एक बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है।

सरकार हर सुविधा देने को तैयार: सुरेश खन्ना, कैबिनेट मंत्री

कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने नवचयनित अधिकारियों से ईमानदारी से कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार आपको हर सुविधा देने के लिए तैयार है। यूपी पुलिस की उपलब्धियों के कारण आज देश-दुनिया योगी सरकार के लॉ एंड ऑर्डर की तारीफ करती है।

2017 में 4 फॉरेंसिक लैब थीं, आज 12 हो चुकी हैं: राजीव कृष्ण, डीजीपी

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि 2017 में प्रदेश में केवल 4 विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं थीं, जो आज बढ़कर 12 हो गई हैं और 3 अन्य प्रयोगशालाएं जल्द शुरू होने वाली हैं। प्रदेश के सभी 75 जनपदों के लिए 75 अतिरिक्त मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं और पिछले पांच वर्षों में 51 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे गए हैं।

इनको मिले नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री ने डॉ. गरिमा सिंह, डॉ. कुमुदिनी बालागौतम, पवन कुमार प्रजापति, डॉ. कपिल वर्मा, डॉ. प्रवीण कुमार तिवारी, रवि गुप्ता, शशांक शेखर तिवारी और डॉ. अतुल कुमार को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र सौंपे। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री और मंत्री सुरेश खन्ना को स्मृति चिह्न और पौधा भेंट कर स्वागत किया। 

मिशन रोजगार के तहत अब तक 7,170 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मिशन रोजगार और अगले छह महीने में एक लाख नियुक्ति पत्र वितरित करने के महाभियान के तहत यह छठा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। इससे पहले पांच चरणों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, आयुष, एमएसएमई, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास, पुलिस, माध्यमिक शिक्षा, ग्राम्य विकास और खेल सहित विभिन्न विभागों में 7,142 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। अब 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र मिलने के साथ निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवा से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या बढ़कर 7,170 हो गई है।

कार्यक्रम में रहे उपस्थित* 

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं भगवान स्वरूप सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

अपना परिवार बचाने का अभियान चला रहे कांग्रेस-सपा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

- सीएम योगी ने भाजपा द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को किया संबोधित

- लोकतंत्र बचाने के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रहे विपक्षी दल

- मुख्यमंत्री योगी बोले -कांग्रेस ने देश को घोटाले दिए, सपा ने यूपी को दंगे और कर्फ्यू

- रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाली सपा आज लोकतंत्र का पाठ पढ़ा रही: मुख्यमंत्री

-कभी मास्टर ने कॉपी बदली तो कभी स्याही खत्म हुई, राहुल की हार पर मुख्यमंत्री का तंज

 गाजियाबाद, 5 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इनका अभियान लोकतंत्र बचाने का नहीं, बल्कि अपना परिवार बचाने की कवायद है। दोनों दल परिवारवादी राजनीति के प्रतीक बन चुके हैं। एक ही परिवार के लोग अध्यक्ष बनते हैं और उसी परिवार को ढोना इनकी नियति हो गई है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अविश्वसनीय बनाने का प्रयास कर रही है। चुनाव जीतने पर अपना पुरुषार्थ बताने वाले कांग्रेस नेता हारते ही ईवीएम, निर्वाचन आयोग और एसआईआर को दोष देने लगते हैं। अपनी नाकामियों पर आत्ममंथन करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना इनकी आदत बन गई है।

मुख्यमंत्री योगी गाजियाबाद में बाबा दूधेश्वरनाथ महादेव की पावन धरती पर आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आह्वान पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की अराजकता के खिलाफ देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। पांच नवंबर को देश के 100 स्थानों पर पदयात्राएं पूरी हो रही हैं। दीपावली की तैयारियों के बीच बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी लोकतंत्र के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाती है।

- राहुल की तुलना बार-बार फेल होने वाले छात्र से की

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उनकी तुलना ऐसे छात्र से की, जो पढ़ाई नहीं करता और हर बार परीक्षा में फेल होने पर नया बहाना बना देता है। पहली बार पिता से कहता है कि मास्टर ने उसकी कॉपी बदल दी। दूसरी बार प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर आने की बात करता है। तीसरी बार पेन की स्याही खत्म होने और चौथी बार सामने बैठे छात्र के तेज लिखने से ध्यान भटकने का बहाना बनाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के युवराज की भी यही स्थिति हो गई है। जनता का विश्वास खोने के बावजूद अपनी गलतियां स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

- कांग्रेस ने घोटालों से गंवाया जनता का भरोसा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में कॉमनवेल्थ, 2जी, कोयला और उर्वरक जैसे घोटाले सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लाखों करोड़ रुपये के घोटाले किए और देश की सुरक्षा से समझौता किया। भ्रष्टाचार और अराजकता से परेशान जनता ने वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी को देश की बागडोर सौंपी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को अपने निकम्मेपन का ठीकरा भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर फोड़ने के बजाय यह स्वीकार करना चाहिए कि पांच दशक में जो काम वह नहीं कर सकी, उन्हें मोदी सरकार ने पूरा करके दिखाया।

- सपा शासन में बेटियां और व्यापारी थे असुरक्षित

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी को घेरते हुए कहा कि उसकी चार सरकारों में गुंडागर्दी, दंगे और कर्फ्यू उत्तर प्रदेश की पहचान बन गए थे। उस दौर में कहावत चल पड़ी थी, 'जिस गाड़ी पर सपा का झंडा, समझो बैठा है इसमें कोई कुख्यात गुंडा।' बेटियों की असुरक्षा को लेकर 'देख सपाई, बिटिया घबराई' कहा जाने लगा था। उन्होंने कोसीकलां, मुजफ्फरनगर, मथुरा, बरेली, संभल, मुरादाबाद, बुलंदशहर, मेरठ और सहारनपुर की हिंसक घटनाओं का उल्लेख करते हुए सपा को घेरा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले और बेटियों तथा व्यापारियों की सुरक्षा के लिए खतरा बने रहने वाले आज लोकतंत्र पर उपदेश दे रहे हैं। सपा ने अपने शासनकाल में मीडिया तक को नहीं बख्शा।

- आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस दे रही लोकतंत्र पर उपदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1975 में देश पर आपातकाल थोपने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र का पाठ पढ़ा रही है। संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करके स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विरासत को अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने वर्ष 1984 की सिख विरोधी हिंसा का उल्लेख करते हुए एक नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाया। आरोप लगाया कि जिस दिन हिंसा में मारे गए सिखों को याद किया जाना चाहिए था, उस दिन कांग्रेस रामलीला मैदान में जश्न मना रही थी।

- राम मंदिर निर्माण में रोड़े अटकाते रहे कांग्रेस-सपा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और सपा ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का लगातार विरोध किया। न्यायालय से लेकर सड़कों तक बाधाएं खड़ी कीं। रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में निमंत्रण मिलने के बावजूद दोनों दलों के नेता नहीं पहुंचे। आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विरासत और विकास साथ आगे बढ़ रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर बना तो चार करोड़ गरीबों को आवास भी मिले। काशी विश्वनाथ धाम का विकास हुआ तो दिल्ली में भारत मंडपम बना। केदारपुरी का पुनर्निर्माण हुआ और गाजियाबाद में पूर्वांचल तथा उत्तराखंड भवन का निर्माण हुआ।

- 2014 के बाद बदली भारत की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश आतंकवाद, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार और अस्थिर अर्थव्यवस्था से जूझ रहा था। आज भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। दिल्ली-मेरठ के बीच देश की पहली रैपिड रेल चल रही है। एम्स की संख्या 23 हो चुकी है। लगभग 12 सेमीकंडक्टर इकाइयां स्थापित हो रही हैं। वर्ष 2014 से पहले केवल पांच शहरों में मेट्रो थी, जबकि अब 20 से अधिक शहरों में इसका संचालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 55 करोड़ लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ, चार करोड़ गरीबों को आवास, 12 करोड़ घरों में शौचालय और 10 करोड़ घरों में रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर किसानों का सम्मान किया गया। किसान सम्मान निधि और सॉइल हेल्थ कार्ड जैसी योजनाओं से किसानों को लाभ मिला है।

- जनता ने नकारा तो निर्वाचन आयोग पर उठाने लगे सवाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस को सत्ता का जनादेश नहीं दिया। तमिलनाडु में 1967, पश्चिम बंगाल में 1977 के बाद कांग्रेस सत्ता में नहीं लौटी। गुजरात, ओडिशा, त्रिपुरा और अन्य राज्यों में भी वह लंबे समय से सत्ता से बाहर है। इन राज्यों में कांग्रेस की पराजय एसआईआर से पहले हुई थी। ऐसे में अपनी हार के लिए निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराना हास्यास्पद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र ने प्रत्येक नागरिक को समान मताधिकार दिया है। इस अधिकार की रक्षा के लिए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान आवश्यक है। भाजपा जनादेश का सम्मान करती है और अपनी कमियों का दोष संस्थाओं पर नहीं मढ़ती। उन्होंने उपस्थित लोगों से 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' का नारा लगवाकर पदयात्रा में भागीदारी का आह्वान किया।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, सह प्रभारी अनंत ओझा, राज्यसभा सांसद रामप्रताप सिंह चौहान, क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, सुनील शर्मा, गुलाब देवी, बलदेव सिंह औलख, कपिल देव अग्रवाल, नरेंद्र कश्यप, सोमेंद्र तोमर, जसवंत सिंह सैनी, दिनेश खटीक, के.पी. मलिक, सांसद डॉ. महेश शर्मा, लक्ष्मीकांत बाजपेयी, अतुल गर्ग, सुरेंद्र नागर, भाजपा नेता सुरेश राणा, नीरज सिंह, मोहित बेनीवाल तथा रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी सहित दोनों दलों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

गोरखनाथ मंदिर पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, गुरु गोरखनाथ का किया दर्शन-पूजन
- सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया स्वागत, मंदिर परिसर का कराया भ्रमण; अंगवस्त्र, प्रसाद और गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा भेंटकर किया अभिनंदन
- राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार गोरखपुर पहुंचे नितिन नबीन

गोरखपुर, 5 नवंबर। भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार गोरखपुर पहुंचे नितिन नबीन ने गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत और अभिनंदन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नितिन नबीन ने गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धापूर्वक शीश नवाया और पूजा-अर्चना की।
दर्शन-पूजन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को गोरखनाथ मंदिर परिसर का भ्रमण कराया। उन्होंने नितिन नबीन को मंदिर की धार्मिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं के साथ नाथपंथ की विशेषताओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने बताया कि गोरखनाथ मंदिर नाथपंथ की प्रमुख पीठ है और इसकी आध्यात्मिक परंपरा का व्यापक प्रभाव रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को अंगवस्त्र, प्रसाद और गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा भेंटकर सम्मानित किया। मंदिर में प्रसाद और जलपान ग्रहण करने के बाद नितिन नबीन पार्टी के निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
गोरखनाथ मंदिर में इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सांसद रविकिशन शुक्ल और विजय दूबे, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह तथा विधायक विपिन सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
PDA में ‘डी’ का मतलब दूर से प्रणाम, ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर तीखा हमला

- कैबिनेट मंत्री ने कहा- अखिलेश यादव के PDA में दलितों की स्थिति दयनीय, योगी सरकार में मिल रहे पक्के घर और रोजगार

- रामपुर में ‘A’ से मिले, बनारस में ‘P’ के घर-दुकान हो लिए, ‘D’ से दूरी क्यों?’, राजभर ने सपा प्रमुख पर साधा निशाना

लखनऊ, 05 नवंबर। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के पीडीए में ‘डी’ का मतलब दलितों को दूर से प्रणाम करना है। राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अखिलेश यादव से कहा कि वे जमीन पर उतरकर लोगों से मिलेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि योगी राज में कितना बदलाव हुआ है।

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव रामपुर जाकर ‘ए’ (अल्पसंख्यक) से मिलते हैं। बनारस में ‘पी’ (पिछड़ा) के घर-दुकान हो लेते हैं, लेकिन ‘डी’ यानी दलितों का हाल-समाचार नहीं लेते। उन्होंने कहा कि सपा शासनकाल में पिछड़े और दलित वर्ग की वास्तविक स्थिति दयनीय रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पीडीए की राजनीति करने वाले अखिलेश यादव दलितों की स्थिति जानने के लिए उनके बीच क्यों नहीं जाते?

- जमीन पर उतरकर देखिए, कितना बदला यूपी

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में दलित परिवारों के घर जाकर उनकी स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार में दलित परिवारों के पक्के घर बन रहे हैं, शौचालय की सुविधा मिल रही है और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। दलित परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में दलित परिवारों के अधिकारों को छीना जाता था। उनका तिरस्कार किया जाता था।

- अपने लोगों से ही नहीं, आम जनता से भी मिलिए

राजभर ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें केवल अपने लोगों से ही नहीं, बल्कि आम जनता से भी मिलना चाहिए। जनता के बीच जाकर ही पता चलेगा कि योगी सरकार में उत्तर प्रदेश कितना बदला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को प्रदेश की जनता के बीच जाकर सरकार के कामकाज की तुलना करनी चाहिए।