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पुलिस महारथी और फॉरेंसिक विभाग सारथी बनकर हर व्यक्ति को दिलाएं न्याय: योगी

- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने UPPSC द्वारा नवचयनित 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को बांटे नियुक्ति-पत्र

- अपराधी को सजा और निर्दोष को सम्मान दिलाने में फॉरेंसिक साक्ष्यों की अहम भूमिका: मुख्यमंत्री

तारीख-दर-तारीख की परंपरा हो बंद, आम आदमी को न्याय दिलाने में फॉरेंसिक अधिकारियों की होगी सारथी की भूमिका: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

नवनियुक्त फॉरेंसिक अधिकारियों को सीएम योगी का मंत्र, पूरी ईमानदारी से दिलाएं पीड़ितों को न्याय

यूपी पुलिस दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस के रूप में हुई स्थापित: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

भू-माफिया के कब्जे से छुड़ाकर बना उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट: मुख्यमंत्री

लखनऊ, 05 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा नवचयनित 28 वैज्ञानिक (फॉरेंसिक) अधिकारियों को नियुक्ति-पत्र वितरित किए। 5 कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था में तारीख-दर-तारीख की परंपरा को बंद कर आम आदमी को समय पर न्याय दिलाने के लिए फॉरेंसिक अधिकारियों को एक सारथी की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि जब आपके चयन में किसी सिफारिश और लेनदेन की आवश्यकता नहीं पड़ी, तो अब आपकी जिम्मेदारी है कि आप भी पूरी ईमानदारी, समयबद्धता और शुद्धता के साथ साक्ष्य जुटाकर पीड़ितों को न्याय दिलाएं।

न्याय के मंदिर में साक्ष्यों से ही होगी सत्य की विजय 

मुख्यमंत्री ने न्याय व्यवस्था में साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा ध्येय वाक्य 'सत्यमेव जयते' है। लेकिन न्याय के मंदिर में सत्य की विजय तभी होगी जब आपके पास उस प्रकार के साक्ष्य और प्रमाण होंगे। उन्होंने महर्षि गौतम के न्याय दर्शन का उल्लेख करते हुए प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाण की चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों वर्ष पहले महर्षि गौतम ने कहा था 'यत्र यत्र धूम्रः तत्र तत्र अग्निः' यानि जहां धुआं है, वहां आग है। आज हमारे फॉरेंसिक अधिकारी इसी अनुमान और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर खून, बाल या उंगलियों के निशान जैसे साक्ष्य जुटाकर वास्तविक अपराधी तक पहुँचते हैं।

सात साल से अधिक की सजा के लिए फॉरेंसिक एविडेंस हुआ अनिवार्य 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2024 में देश ने गुलामी के प्रतीक ब्रिटिश कानूनों को समाप्त कर तीन नए भारतीय कानून लागू किए हैं। इन नए कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक एविडेंस अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए प्रदेश को 500 ऐसे प्रशिक्षित अधिकारियों की आवश्यकता थी, जो घटना स्थल पर पहुँचकर साक्ष्य जुटा सकें। मुझे प्रसन्नता है कि नए कानून लागू होने से पहले ही उत्तर प्रदेश शासन ने फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना कर 600 से अधिक ऐसे पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित कर लिया है।

भू-माफिया के कब्जे से जमीन छुड़ाकर बनाया गया फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट 

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के निर्माण की कहानी साझा करते हुए बताया कि 2017 से पहले लखनऊ एयरपोर्ट के पास स्थित इस बेसकीमती जमीन पर एक भू-माफिया ने कब्जा कर लिया था। तत्कालीन डीजीपी ने रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले इसकी जानकारी दी, जिसके बाद सरकार ने कार्रवाई कर उस जमीन को कब्जामुक्त कराया और वहां आज यह अत्याधुनिक इंस्टीट्यूट खड़ा है। आज यह इंस्टीट्यूट एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और क्वांटम फॉरेंसिक का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

यूपी पुलिस बनी दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस 

पूर्ववर्ती सरकारों पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के लिए मोहताज था। प्रदेश में अराजकता, दंगे और कर्फ्यू नियति बन चुके थे और अपराधी बेखौफ घूमते थे क्योंकि उन्हें मालूम था कि कानून उन तक नहीं पहुँच सकता। अकर्मण्यता और अराजकता के उस दौर ने प्रदेश को 'बीमारू राज्य' बना दिया था। आज वही उत्तर प्रदेश देश की टॉप थ्री अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में हमने 2 लाख 30 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की पारदर्शी भर्ती कर यूपी पुलिस को दुनिया की सबसे बड़ी सिविल पुलिस के रूप में स्थापित किया है।

हम छह महीने में देंगे एक लाख युवाओं को नौकरी 

मुख्यमंत्री ने रोजगार के मोर्चे पर विरोधियों को जवाब देते हुए कहा कि जो लोग कहते थे कि क्या यूपी में नियुक्तियां होंगी, उन्हें गिनते रहना चाहिए। पिछले साढ़े नौ वर्षों में हमने साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। यह नियुक्ति पत्र वितरण उसी श्रृंखला की कड़ी है और हम अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने जा रहे हैं। कल भी यूपी पुलिस का एक बड़ा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है।

सरकार हर सुविधा देने को तैयार: सुरेश खन्ना, कैबिनेट मंत्री

कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने नवचयनित अधिकारियों से ईमानदारी से कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार आपको हर सुविधा देने के लिए तैयार है। यूपी पुलिस की उपलब्धियों के कारण आज देश-दुनिया योगी सरकार के लॉ एंड ऑर्डर की तारीफ करती है।

2017 में 4 फॉरेंसिक लैब थीं, आज 12 हो चुकी हैं: राजीव कृष्ण, डीजीपी

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि 2017 में प्रदेश में केवल 4 विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं थीं, जो आज बढ़कर 12 हो गई हैं और 3 अन्य प्रयोगशालाएं जल्द शुरू होने वाली हैं। प्रदेश के सभी 75 जनपदों के लिए 75 अतिरिक्त मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं और पिछले पांच वर्षों में 51 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे गए हैं।

इनको मिले नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री ने डॉ. गरिमा सिंह, डॉ. कुमुदिनी बालागौतम, पवन कुमार प्रजापति, डॉ. कपिल वर्मा, डॉ. प्रवीण कुमार तिवारी, रवि गुप्ता, शशांक शेखर तिवारी और डॉ. अतुल कुमार को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र सौंपे। कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री और मंत्री सुरेश खन्ना को स्मृति चिह्न और पौधा भेंट कर स्वागत किया। 

मिशन रोजगार के तहत अब तक 7,170 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मिशन रोजगार और अगले छह महीने में एक लाख नियुक्ति पत्र वितरित करने के महाभियान के तहत यह छठा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है। इससे पहले पांच चरणों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, आयुष, एमएसएमई, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास, पुलिस, माध्यमिक शिक्षा, ग्राम्य विकास और खेल सहित विभिन्न विभागों में 7,142 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। अब 28 वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र मिलने के साथ निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवा से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या बढ़कर 7,170 हो गई है।

कार्यक्रम में रहे उपस्थित* 

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं भगवान स्वरूप सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

अपना परिवार बचाने का अभियान चला रहे कांग्रेस-सपा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

- सीएम योगी ने भाजपा द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को किया संबोधित

- लोकतंत्र बचाने के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रहे विपक्षी दल

- मुख्यमंत्री योगी बोले -कांग्रेस ने देश को घोटाले दिए, सपा ने यूपी को दंगे और कर्फ्यू

- रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाली सपा आज लोकतंत्र का पाठ पढ़ा रही: मुख्यमंत्री

-कभी मास्टर ने कॉपी बदली तो कभी स्याही खत्म हुई, राहुल की हार पर मुख्यमंत्री का तंज

 गाजियाबाद, 5 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इनका अभियान लोकतंत्र बचाने का नहीं, बल्कि अपना परिवार बचाने की कवायद है। दोनों दल परिवारवादी राजनीति के प्रतीक बन चुके हैं। एक ही परिवार के लोग अध्यक्ष बनते हैं और उसी परिवार को ढोना इनकी नियति हो गई है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को अविश्वसनीय बनाने का प्रयास कर रही है। चुनाव जीतने पर अपना पुरुषार्थ बताने वाले कांग्रेस नेता हारते ही ईवीएम, निर्वाचन आयोग और एसआईआर को दोष देने लगते हैं। अपनी नाकामियों पर आत्ममंथन करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना इनकी आदत बन गई है।

मुख्यमंत्री योगी गाजियाबाद में बाबा दूधेश्वरनाथ महादेव की पावन धरती पर आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आह्वान पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की अराजकता के खिलाफ देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। पांच नवंबर को देश के 100 स्थानों पर पदयात्राएं पूरी हो रही हैं। दीपावली की तैयारियों के बीच बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी लोकतंत्र के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाती है।

- राहुल की तुलना बार-बार फेल होने वाले छात्र से की

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उनकी तुलना ऐसे छात्र से की, जो पढ़ाई नहीं करता और हर बार परीक्षा में फेल होने पर नया बहाना बना देता है। पहली बार पिता से कहता है कि मास्टर ने उसकी कॉपी बदल दी। दूसरी बार प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर आने की बात करता है। तीसरी बार पेन की स्याही खत्म होने और चौथी बार सामने बैठे छात्र के तेज लिखने से ध्यान भटकने का बहाना बनाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के युवराज की भी यही स्थिति हो गई है। जनता का विश्वास खोने के बावजूद अपनी गलतियां स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

- कांग्रेस ने घोटालों से गंवाया जनता का भरोसा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में कॉमनवेल्थ, 2जी, कोयला और उर्वरक जैसे घोटाले सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लाखों करोड़ रुपये के घोटाले किए और देश की सुरक्षा से समझौता किया। भ्रष्टाचार और अराजकता से परेशान जनता ने वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी को देश की बागडोर सौंपी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को अपने निकम्मेपन का ठीकरा भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर फोड़ने के बजाय यह स्वीकार करना चाहिए कि पांच दशक में जो काम वह नहीं कर सकी, उन्हें मोदी सरकार ने पूरा करके दिखाया।

- सपा शासन में बेटियां और व्यापारी थे असुरक्षित

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी को घेरते हुए कहा कि उसकी चार सरकारों में गुंडागर्दी, दंगे और कर्फ्यू उत्तर प्रदेश की पहचान बन गए थे। उस दौर में कहावत चल पड़ी थी, 'जिस गाड़ी पर सपा का झंडा, समझो बैठा है इसमें कोई कुख्यात गुंडा।' बेटियों की असुरक्षा को लेकर 'देख सपाई, बिटिया घबराई' कहा जाने लगा था। उन्होंने कोसीकलां, मुजफ्फरनगर, मथुरा, बरेली, संभल, मुरादाबाद, बुलंदशहर, मेरठ और सहारनपुर की हिंसक घटनाओं का उल्लेख करते हुए सपा को घेरा। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले और बेटियों तथा व्यापारियों की सुरक्षा के लिए खतरा बने रहने वाले आज लोकतंत्र पर उपदेश दे रहे हैं। सपा ने अपने शासनकाल में मीडिया तक को नहीं बख्शा।

- आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस दे रही लोकतंत्र पर उपदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1975 में देश पर आपातकाल थोपने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र का पाठ पढ़ा रही है। संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करके स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की विरासत को अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने वर्ष 1984 की सिख विरोधी हिंसा का उल्लेख करते हुए एक नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाया। आरोप लगाया कि जिस दिन हिंसा में मारे गए सिखों को याद किया जाना चाहिए था, उस दिन कांग्रेस रामलीला मैदान में जश्न मना रही थी।

- राम मंदिर निर्माण में रोड़े अटकाते रहे कांग्रेस-सपा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस और सपा ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का लगातार विरोध किया। न्यायालय से लेकर सड़कों तक बाधाएं खड़ी कीं। रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में निमंत्रण मिलने के बावजूद दोनों दलों के नेता नहीं पहुंचे। आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विरासत और विकास साथ आगे बढ़ रहे हैं। अयोध्या में राम मंदिर बना तो चार करोड़ गरीबों को आवास भी मिले। काशी विश्वनाथ धाम का विकास हुआ तो दिल्ली में भारत मंडपम बना। केदारपुरी का पुनर्निर्माण हुआ और गाजियाबाद में पूर्वांचल तथा उत्तराखंड भवन का निर्माण हुआ।

- 2014 के बाद बदली भारत की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश आतंकवाद, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार और अस्थिर अर्थव्यवस्था से जूझ रहा था। आज भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। दिल्ली-मेरठ के बीच देश की पहली रैपिड रेल चल रही है। एम्स की संख्या 23 हो चुकी है। लगभग 12 सेमीकंडक्टर इकाइयां स्थापित हो रही हैं। वर्ष 2014 से पहले केवल पांच शहरों में मेट्रो थी, जबकि अब 20 से अधिक शहरों में इसका संचालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 55 करोड़ लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ, चार करोड़ गरीबों को आवास, 12 करोड़ घरों में शौचालय और 10 करोड़ घरों में रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर किसानों का सम्मान किया गया। किसान सम्मान निधि और सॉइल हेल्थ कार्ड जैसी योजनाओं से किसानों को लाभ मिला है।

- जनता ने नकारा तो निर्वाचन आयोग पर उठाने लगे सवाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने वर्ष 1985 के बाद कांग्रेस को सत्ता का जनादेश नहीं दिया। तमिलनाडु में 1967, पश्चिम बंगाल में 1977 के बाद कांग्रेस सत्ता में नहीं लौटी। गुजरात, ओडिशा, त्रिपुरा और अन्य राज्यों में भी वह लंबे समय से सत्ता से बाहर है। इन राज्यों में कांग्रेस की पराजय एसआईआर से पहले हुई थी। ऐसे में अपनी हार के लिए निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराना हास्यास्पद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र ने प्रत्येक नागरिक को समान मताधिकार दिया है। इस अधिकार की रक्षा के लिए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान आवश्यक है। भाजपा जनादेश का सम्मान करती है और अपनी कमियों का दोष संस्थाओं पर नहीं मढ़ती। उन्होंने उपस्थित लोगों से 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' का नारा लगवाकर पदयात्रा में भागीदारी का आह्वान किया।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, सह प्रभारी अनंत ओझा, राज्यसभा सांसद रामप्रताप सिंह चौहान, क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, सुनील शर्मा, गुलाब देवी, बलदेव सिंह औलख, कपिल देव अग्रवाल, नरेंद्र कश्यप, सोमेंद्र तोमर, जसवंत सिंह सैनी, दिनेश खटीक, के.पी. मलिक, सांसद डॉ. महेश शर्मा, लक्ष्मीकांत बाजपेयी, अतुल गर्ग, सुरेंद्र नागर, भाजपा नेता सुरेश राणा, नीरज सिंह, मोहित बेनीवाल तथा रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी सहित दोनों दलों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

गोरखनाथ मंदिर पहुंचे भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, गुरु गोरखनाथ का किया दर्शन-पूजन
- सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया स्वागत, मंदिर परिसर का कराया भ्रमण; अंगवस्त्र, प्रसाद और गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा भेंटकर किया अभिनंदन
- राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार गोरखपुर पहुंचे नितिन नबीन

गोरखपुर, 5 नवंबर। भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार गोरखपुर पहुंचे नितिन नबीन ने गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत और अभिनंदन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नितिन नबीन ने गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धापूर्वक शीश नवाया और पूजा-अर्चना की।
दर्शन-पूजन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को गोरखनाथ मंदिर परिसर का भ्रमण कराया। उन्होंने नितिन नबीन को मंदिर की धार्मिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं के साथ नाथपंथ की विशेषताओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने बताया कि गोरखनाथ मंदिर नाथपंथ की प्रमुख पीठ है और इसकी आध्यात्मिक परंपरा का व्यापक प्रभाव रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को अंगवस्त्र, प्रसाद और गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा भेंटकर सम्मानित किया। मंदिर में प्रसाद और जलपान ग्रहण करने के बाद नितिन नबीन पार्टी के निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।
गोरखनाथ मंदिर में इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सांसद रविकिशन शुक्ल और विजय दूबे, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह तथा विधायक विपिन सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
PDA में ‘डी’ का मतलब दूर से प्रणाम, ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर तीखा हमला

- कैबिनेट मंत्री ने कहा- अखिलेश यादव के PDA में दलितों की स्थिति दयनीय, योगी सरकार में मिल रहे पक्के घर और रोजगार

- रामपुर में ‘A’ से मिले, बनारस में ‘P’ के घर-दुकान हो लिए, ‘D’ से दूरी क्यों?’, राजभर ने सपा प्रमुख पर साधा निशाना

लखनऊ, 05 नवंबर। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के पीडीए में ‘डी’ का मतलब दलितों को दूर से प्रणाम करना है। राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अखिलेश यादव से कहा कि वे जमीन पर उतरकर लोगों से मिलेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि योगी राज में कितना बदलाव हुआ है।

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव रामपुर जाकर ‘ए’ (अल्पसंख्यक) से मिलते हैं। बनारस में ‘पी’ (पिछड़ा) के घर-दुकान हो लेते हैं, लेकिन ‘डी’ यानी दलितों का हाल-समाचार नहीं लेते। उन्होंने कहा कि सपा शासनकाल में पिछड़े और दलित वर्ग की वास्तविक स्थिति दयनीय रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पीडीए की राजनीति करने वाले अखिलेश यादव दलितों की स्थिति जानने के लिए उनके बीच क्यों नहीं जाते?

- जमीन पर उतरकर देखिए, कितना बदला यूपी

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में दलित परिवारों के घर जाकर उनकी स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार में दलित परिवारों के पक्के घर बन रहे हैं, शौचालय की सुविधा मिल रही है और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। दलित परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में दलित परिवारों के अधिकारों को छीना जाता था। उनका तिरस्कार किया जाता था।

- अपने लोगों से ही नहीं, आम जनता से भी मिलिए

राजभर ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें केवल अपने लोगों से ही नहीं, बल्कि आम जनता से भी मिलना चाहिए। जनता के बीच जाकर ही पता चलेगा कि योगी सरकार में उत्तर प्रदेश कितना बदला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को प्रदेश की जनता के बीच जाकर सरकार के कामकाज की तुलना करनी चाहिए।

दिल्ली की 675 झुग्गी बस्तियों का होगा पुनर्विकास, करीब 4 लाख परिवारों को मिलेंगे पक्के मकान
- झुग्गी के बदले कम से कम 25 वर्गमीटर का फ्लैट देने की तैयारी, कमरे से लेकर किचन, बाथरूम और बालकनी तक की होगी सुविधा

- पात्र परिवारों को 1.50 लाख रुपये में मिलेगा मकान, 50 हजार रुपये का मेंटेनेंस कॉर्पस भी देना होगा

नई दिल्ली। दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए पक्के मकान का रास्ता खुलने जा रहा है। राजधानी की करीब 675 झुग्गी-झोपड़ी (JJ) बस्तियों के पुनर्विकास की नई नीति लागू की गई है। इसके तहत लगभग चार लाख परिवारों को झुग्गियों के स्थान पर बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। पुनर्वास योजना में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि लोगों को यथासंभव उसी इलाके में आवास मिले, ताकि उनके रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर प्रतिकूल असर न पड़े।

नई व्यवस्था के तहत पात्र परिवारों को कम से कम 25 वर्गमीटर क्षेत्रफल का मकान दिया जाएगा। इसमें कमरे के साथ किचन, बाथरूम, शौचालय और बालकनी जैसी सुविधाएं होंगी। मकान की निर्धारित लागत 1.50 लाख रुपये रखी गई है। इसके अतिरिक्त 50 हजार रुपये मेंटेनेंस कॉर्पस के रूप में देने होंगे।

- क्या होगी मकान पाने की पात्रता

योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं। इसके तहत संबंधित झुग्गी का अस्तित्व 1 जनवरी 2025 से पहले का होना जरूरी होगा। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले परिवारों को पुनर्वास योजना में शामिल किया जाएगा।

- तीन इलाकों से पुनर्विकास की शुरुआत

योजना को जमीन पर उतारने की दिशा में शुरुआती कदम भी बढ़ाए गए हैं। सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर की 17 झुग्गी बस्तियों में करीब 4,870 झुग्गियों के पुनर्विकास की योजना तैयार की गई है। इन बस्तियों के पुनर्विकास के लिए तीन हाईराइज आवासीय कॉलोनियां प्रस्तावित हैं। इस पहल को आगे बढ़ाने वाली बड़ी पुनर्वास योजना की शुरुआती कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

- रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र को भी मिलेगा प्रोत्साहन

करीब चार लाख परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने की योजना का असर केवल आवास क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू होने से रियल एस्टेट, सीमेंट, स्टील, निर्माण सामग्री और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के लिए भी कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही निर्माण गतिविधियों से रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है। कुल मिलाकर, दिल्ली की झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास की यह योजना आवास, बुनियादी सुविधाओं और शहरी ढांचे में बदलाव की बड़ी पहल है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता पात्रता निर्धारण, पारदर्शी पुनर्वास और तय समयसीमा में मकानों के निर्माण पर निर्भर करेगी।
दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक परिवहन को सुगम, सुरक्षित एवं बाधारहित बनाने हेतु संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित


- दिव्यांगजन दया के नहीं, बल्कि समान अधिकार, गरिमापूर्ण व्यवहार और समान अवसरों के हकदार: प्रो. हिमांशु शेखर झा

- विद्याभवन निशातगंज में 28 जनपदों के परिवहन अधिकारियों व कार्मिकों ने लिया संवेदनशीलता का प्रशिक्षण

- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के प्रभावी क्रियान्वयन और सुगम्य वातावरण निर्माण पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

लखनऊ, 04 नवम्बर 2026। राज्य आयुक्त दिव्यांगजन न्यायालय/कार्यालय द्वारा बुधवार को दृष्टिबाधित छात्रों के छात्रावास, विद्याभवन, निशातगंज, लखनऊ स्थित सभागार में “दिव्यांगजनों के समानता के अधिकार, भेदभाव रहित व्यवहार, सुगम्यता तथा सुगम परिवहन से संबंधित वैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं दिव्यांग यात्रियों के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने हेतु” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में प्रदेश के 28 जनपदों से परिवहन विभाग के लगभग 40 वरिष्ठ अधिकारियों एवं कार्मिकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा, उपायुक्त (प्रशासन) डॉ. अमित कुमार राय तथा उपायुक्त दिव्यांगजन शैलेन्द्र कुमार सोनकर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

संवेदीकरण कार्यक्रम के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा ने परिवहन विभाग से संबंधित दिव्यांगजनों की प्रमुख समस्याओं एवं व्यावहारिक कठिनाइयों के निवारण पर उपस्थित अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दिव्यांगजन किसी भी प्रकार की दया अथवा विशेष कृपा के नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त समान अधिकार, समान अवसर, गरिमापूर्ण व्यवहार एवं बाधारहित वातावरण के पूर्ण हकदार हैं। उन्होंने अधिकारियों व कर्मचारियों से अपेक्षा की कि वे अपनी वैधानिक व प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन केवल दायित्वपूर्ति तक सीमित न रखकर मानवीय संवेदनशीलता, सहानुभूति एवं आत्मीय सम्मान की भावना से करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि दिव्यांग यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन में किसी भी प्रकार की असुविधा, उपेक्षा अथवा भेदभाव का सामना न करना पड़े तथा उन्हें सहज, सुरक्षित व सम्मानजनक यात्रा का अनुभव कराना सभी सेवा प्रदाताओं का सामूहिक दायित्व है।

उपायुक्त (प्रशासन) डॉ. अमित कुमार राय ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को दिव्यांगजनों के अनुकूल, सुलभ और सुरक्षित बनाने के महत्वपूर्ण तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने परिवहन कर्मियों को यात्रियों के साथ गरिमापूर्ण एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। इसके उपरांत द्वितीय सत्र में उपायुक्त दिव्यांगजन शैलेन्द्र कुमार सोनकर ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के विभिन्न प्रावधानों, कानूनी अधिकारों, वैधानिक संरक्षण तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन की बारीकियों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने विगत दो वर्षों में दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण, समस्याओं के निराकरण एवं सुगम्यता विस्तार की दिशा में किए गए प्रयासों की रूपरेखा भी साझा की।

कार्यक्रम के तृतीय सत्र में विषय विशेषज्ञ अमरेश चन्द्रा ने दिव्यांगजनों के लिए आधुनिक मानकों के अनुरूप बाधारहित एवं सुगम्य वातावरण निर्मित करने की आवश्यकता, उसके विभिन्न ढांचागत आयामों और सुगम्यता मानकों पर व्याख्यान दिया। समापन सत्र में राज्य आयुक्त दिव्यांगजन द्वारा उपस्थित अधिकारियों व कार्मिकों की विभिन्न तकनीकी व व्यावहारिक जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित कर कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।

राहुल फुस्स रॉकेट, अखिलेश हार के बहानेबाज: योगी आदित्यनाथ

- भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा को मुख्यमंत्री ने किया संबोधित, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का किया स्वागत

- अखिलेश को नसीहत, लोकतंत्र में बदला नहीं, जनता करती है बदलाव

- राहुल का बारूद खत्म, कांग्रेस कितनी बार करेगी लॉन्च: मुख्यमंत्री योगी

- पाकिस्तानी-बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने पर कांग्रेस को आपत्ति क्यों

- कभी ईवीएम तो कभी एसआईआर का बहाना ढूंढती है दो लड़कों की जोड़ी

- आपातकाल और सिख विरोधी हिंसा के लिए देश से माफी मांगे कांग्रेस

गोरखपुर, 04 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। राहुल गांधी को फुस्स रॉकेट बताते हुए कहा कि उनका बारूद समाप्त हो चुका है। कांग्रेस चाहे जितनी बार उन्हें लॉन्च कर ले, अब वह लॉन्च नहीं होने वाले। वहीं, अखिलेश यादव के बदला लेने संबंधी बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के बबुआ को कोई समझाए कि लोकतंत्र में बदला नहीं, जनता बदलाव करती है। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाने पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों को आपत्ति क्यों है? उन्होंने आरोप लगाया कि इंडी गठबंधन अपनी चुनावी पराजय छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज में भाजपा द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनका यह पहला गोरखपुर दौरा है। लोकतंत्र को मजबूत करने और अराजकता के खिलाफ जनजागरण के लिए उन्होंने बाबा गोरक्षनाथ की धरती को चुना है। यह पदयात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से जुड़ी है।

- अखिलेश को नसीहत, लोकतंत्र में बदला नहीं होता

मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि सपा अध्यक्ष ने कहा है कि अगली पीढ़ी हर लाठी और हर जख्म का बदला लेगी। उन्होंने पलटवार किया कि समाजवादी पार्टी के बबुआ को समझना चाहिए कि लोकतंत्र में बदला नहीं, जनता बदलाव करती है। वर्ष 2014 में देश और 2017 में उत्तर प्रदेश की जनता ने बदलाव करके दिखाया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस को मिली कुल सीटों से अधिक 255 सीटें अकेले भाजपा ने 2022 में जीती थीं। जनता ही तय करती है कि किसे सत्ता सौंपनी है।

- राहुल का रॉकेट उड़ने से पहले छोड़ देता है धुआं

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की राजनीतिक लॉन्चिंग पर तंज कसते हुए कहा कि दीपावली पर कुछ रॉकेट ऐसे होते हैं, जिनमें बत्ती लगाने के बाद लोग आसमान की ओर देखते रह जाते हैं, लेकिन रॉकेट वहीं धुआं छोड़कर बुझ जाता है। राहुल गांधी की भी यही स्थिति हो चुकी है। कांग्रेस ने वर्ष 2004 में सांसद, 2007 में महासचिव, 2013 में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 2017 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर उन्हें लॉन्च किया। इसके बाद 2019 में वह अमेठी से चुनाव हार गए। भारत जोड़ो यात्रा, न्याय यात्रा और अधिकार यात्रा से भी स्थिति नहीं बदली। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी 56 वर्ष के हो गए हैं, लेकिन कांग्रेस के लिए अभी भी युवा हैं। अब यह युवा कभी लॉन्च नहीं होने वाला है।

- घुसपैठियों के नाम हटाने पर हाय-तौबा क्यों

मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने पर कांग्रेस और इंडी गठबंधन को घेरा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1952, 1962 और 2003 सहित अलग-अलग समय में मतदाता सूची का पुनरीक्षण हुआ है। कांग्रेस के शासनकाल में इसका समर्थन किया जाता था, लेकिन आज निर्वाचन आयोग जब बांग्लादेशी घुसपैठियों, पाकिस्तानियों और मृत व्यक्तियों के नाम हटाने की कार्रवाई कर रहा है तो विरोध हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई विदेशी घुसपैठिया मतदाता सूची में नाम दर्ज कराता है तो वह भारत के किसी गरीब, दलित और वंचित का अधिकार छीनता है। ऐसे नाम हटाना उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर अराजकता पैदा करने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगियों को देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए।

- हारते ही ईवीएम पर फोड़ते हैं ठीकरा

मुख्यमंत्री ने राहुल-अखिलेश की जोड़ी की तुलना बार-बार परीक्षा में असफल होने वाले छात्र से की। कहा कि ऐसा छात्र कभी कॉपी गायब होने, कभी प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर आने और कभी पेन की स्याही समाप्त होने का बहाना बनाता है। अपनी असफलता स्वीकार नहीं करता। दोनों नेताओं की भी यही स्थिति है। चुनाव जीतने पर अपना पुरुषार्थ बताते हैं और हारने पर ईवीएम तथा निर्वाचन आयोग को दोषी ठहराते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 44, वर्ष 2019 में 52 और वर्ष 2024 में 99 सीटें मिलीं। तीनों चुनावों में कुल 195 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने अकेले 2024 में 240 सीटें जीतीं। उन्होंने बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के चुनावी परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि बार-बार की हार के बावजूद कांग्रेस आत्ममंथन नहीं करती।

- आपातकाल और सिख विरोधी हिंसा पर मांगा जवाब

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1975 में देश पर आपातकाल थोपने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र पर उपदेश दे रही है। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या कांग्रेस आपातकाल में प्रताड़ित लोगों और जान गंवाने वालों के परिजनों से माफी मांगेगी? वर्ष 1984 की सिख विरोधी हिंसा का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि एक नवंबर को जब देश पीड़ित परिवारों को याद कर रहा था, तब कांग्रेस दिल्ली में जश्न मना रही थी।

- सपा की चार सरकारों में 1500 से अधिक दंगों का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बना है। कुछ लोग देश को बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका जैसा बनाने की धमकी दे रहे हैं, लेकिन नया भारत अराजकता स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 से पहले सपा की चार सरकारों में 1500 से अधिक दंगे हुए। पर्व-त्योहारों से पहले कर्फ्यू लगना आम था। बेटियां और व्यापारी असुरक्षित थे। आज प्रदेश सुरक्षा और सुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा की पदयात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने और विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने का अभियान है। उन्होंने उपस्थित लोगों से 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' का नारा लगवाया।

- विदेशी ताकतों के इशारे पर भारत में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रहा है विपक्ष: संजय निषाद

कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आरोप लगाया कि विपक्ष विदेशी ताकतों के इशारे पर भारत में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रहा है। नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिशों से जनता को सावधान करने के लिए यह पदयात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश हर क्षेत्र में विकास कर रहा है, लेकिन सपा और कांग्रेस को यह बदलाव पसंद नहीं आ रहा है।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी व कमलेश पासवान, सांसद रवि किशन, मंत्री संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, सूर्य प्रताप शाही, ए.के. शर्मा, दारा सिंह चौहान, दयाशंकर सिंह, विजय लक्ष्मी गौतम, दानिश आजाद अंसारी, राष्ट्रीय मंत्री डॉ. प्रदीप वर्मा और क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय सहित पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे।

अखिलेश यादव के वाराणसी दौरे पर बीजेपी का हमला, कहा-काशी विश्वनाथ के दर्शन की हिम्मत नहीं जुटा सके सपा प्रमुख
- सपा राज में काशी, मथुरा और अयोध्या को नजरअंदाज किया जाता था: बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह
- संकटमोचन मंदिर ब्लास्ट के आतंकियों का केस वापस लेने की पैरवी करने वाली सपा का असली चेहरा पहचानते हैं काशीवासी: डॉ.अंकुश त्रिपाठी
- ज्ञानवापी में पूजा बंद करवाने वाली सपा किस मुंह से काशी के सम्मान की बात कर रही', अंकुश त्रिपाठी का अखिलेश पर तंज

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के वाराणसी दौरे पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि आज वो अखिलेश यादव सनातन की बात कर रहे हैं जिनकी राजनीति का आधार ही तुष्टीकरण है। उन्होंने कहा कि सपा राज में काशी, मथुरा और अयोध्या को नजरअंदाज किया जाता था। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश यादव को सबसे पहले  बनारस के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। ये वही सपा है जिसने वाराणसी में हुए सीरियल ब्लास्ट के आतंकियों का मुकदमा वापस लेने की पैरवी की थी।
- 'कृष्ण जन्मभूमि पर अपना स्टैंड क्लियर करें अखिलेश'
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव बनारस गए तो काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन का साहस क्यों नहीं जुटा सके? उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव में हिम्मत है तो कृष्ण जन्मभूमि पर अपना रुख स्पष्ट करें। एक बार कहने का साहस जुटाएं कि वो चाहते हैं कि मथुरा में शाही मस्जिद के स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का भव्य मंदिर बनना चाहिए।
- 'आतंकियों के पैरोकार हैं अखिलेश यादव'
अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि सपा ने सरकार में रहते हुए बनारस कचहरी और संकट मोचन मंदिर में हुए सीरियल ब्लास्ट के आरोपियों के मुकदमे वापस लेने की पैरवी की थी। उन्होंने कहा कि काशीवासी ये कैसे भूल सकते हैं कि ये वही सपा है जिसने ज्ञानवापी में पूजा बंद कराई थी। अखिलेश यादव के मन में न भोलेनाथ हैं, न कृष्ण और न राम। वे औरंगजेब और बाबर के पैरोकार हैं और सनातन विरोधी हैं।
अंकुश त्रिपाठी ने कहा कि आज योगी राज में प्रदेश के धार्मिक स्थलों का विकास हो रहा है। उत्तर प्रदेश में टेंपल इकोनॉमी की चर्चा हो रही है। काशी कॉरिडोर बनने के बाद वहां से बड़े पैमाने पर राजस्व आ रहा है। मथुरा, अयोध्या और विंध्याचल में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।
तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले आज सनातन धर्म पर ज्ञान दे रहे : उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक

- अखिलेश को विकास से नहीं, सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति से मतलब, ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख पर कसा तंज

- ‘जिन्होंने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, वे आज राम-शिव की बात कर रहे’, मंत्री मनोज पाण्डेय ने अखिलेश पर साधा निशाना

लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने तीखा हमला बोला है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि अखिलेश को विकास से कोई लेना-देना नहीं है, वे सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। वहीं, मनोज पाण्डेय ने कहा कि रामभक्तों पर गोलियां चलवाने और राम-शिव के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले आज मंदिरों और सनातन की बात कर रहे हैं।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा शासनकाल में जाति और क्षेत्र देखकर विकास कार्य किए जाते थे, लेकिन आज योगी सरकार में चौतरफा विकास हो रहा है। काशी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये अब वर्ल्ड क्लास सिटी के रूप में विकसित हो रही है। पाठक ने कहा कि अखिलेश यादव काशी गए, लेकिन बाबा विश्वनाथ के दर्शन तक नहीं किए और अब उसी नगरी के विकास पर सवाल उठा रहे हैं। 

- ‘रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले आज राम-शिव की बात कर रहे’

कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा कि जिन लोगों ने अयोध्या में निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, भगवान राम और शिव के अस्तित्व पर सवाल उठाए तथा हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया, वे आज काशी में भेदभाव की बात कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह योगी सरकार की ही कृपा है कि अब ऐसे लोग भी राम और शिव की बात करने लगे हैं। पाण्डेय ने कहा कि सपा ने अपने विधायकों को अयोध्या राम मंदिर दर्शन से रोका था। उन्होंने कहा कि सनातनियों के लिए भगवान श्रीकृष्ण, भगवान राम और भगवान शिव सभी पूजनीय हैं।

'चुनाव से भाग रहे हैं अखिलेश जी, आइये हो जाये दो-दो हाथ’, ओपी राजभर का सपा प्रमुख के बयान पर पलटवार

- राजभर ने कहा- जब लग गया कि मिट्टीपलीत होनी तय है तो मैदान छोड़कर भागने लगे अखिलेश 

सिर्फ एक बार CM बन पाए, अगली पैदाइश तक उम्मीद नहीं: ओपी राजभर का अखिलेश पर तंज

लखनऊ, 04 नवंबर। यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर सोशल मीडिया के जरिए तीखा पलटवार किया है। राजभर ने सपा प्रमुख को संबोधित करते हुए लिखा है कि आप चुनाव से भाग रहे हैं, वह नेता क्या जो चुनाव से भागे। पोस्ट में राजभर ने अखिलेश पर एक के बाद एक कई आरोप लगाए हैं।

- ए महाराज, नेता क्या जो चुनाव से भागे? 

पोस्ट की शुरुआत में ही राजभर लिखते हैं, ‘अरे मित्र अखिलेश यादव जी! सुना है कि आप अगले साल यूपी विधानसभा चुनाव में किसी सीट से नहीं लड़ेंगे। ए महाराज, नेता क्या जो चुनाव से भागे? आइये हो जाये दो-दो हाथ।’ उन्होंने अखिलेश को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि चुनाव से भागना नेतागिरी नहीं है।

- ‘इतना टोना-टोटका मानने वाले हो, पता नहीं था’

राजभर ने अखिलेश पर टोना-टोटका मानने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘हमको नहीं पता था कि आप इतना टोना-टोटका मानने वाले हैं। वैसे बिना चुनाव लड़े आपका मुख्यमंत्री बन जाना कोई टोना-टोटका नहीं था मित्र! बल्कि रेडीमेड पार्टी के रेडीमेड शहजादा होने के कारण मुख्यमंत्री बन पाए थे। अब जब लग गया कि लड़ने गए तो मिट्टीपलीत होनी तय है तो लगे मैदान छोड़कर भागने?’

उन्होंने आगे लिखा कि यह लाल टोपी वालों की सरकार नहीं है, जब प्रदेश टोना-टोटका वाले चलाया करते थे। नोएडा से लेकर आगरा, अयोध्या और मथुरा तक टोना-टोटका मानने वालों की सरकार को जनता ने 10 साल पहले ही उखाड़ के फेंक दिया है। आज हम लोगों ने मिलकर सारे टोना-टोटका, भूत-प्रेत, पिशाच सब झार दिए हैं। 

- ‘सिर्फ एक बार CM बन पाए, अगली पैदाइश तक उम्मीद नहीं’ 

राजभर ने कहा, ‘वैसे भी! ले दे के एक्कै बार सीएम बन पाए हैं आप... अब आगे अगली पैदाइश तक उम्मीद भी नहीं है। तो कम से कम हिम्मत दिखाते हुए किसी एक सीट से लड़ लिए होते।’ पोस्ट के अंत में राजभर ने अखिलेश को सलाह देते हुए लिखा, ‘चलिए, बाबा विश्वनाथ आपका कल्याण करें... आपके पास चौराहे पर रुककर मिठाई खाने का समय था, मगर कुछ ही दूर पर उनके दरबार में शीश झुकाने का समय नहीं मिला। कम से कम पास में ही काल भैरव बाबा के दरबार में चले गये होते। वहां आपके सब टोना-टोटका का इलाज हो गया होता।’